Saturday, April 4, 2026
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रोजगार के अवसर

वेस्ट बंगाल हेल्थ रिक्रूटमेंट बोर्ड

 योग्यता : डिप्लोमा
 नौकरी स्थान : कोलकाता
 उद्घाटन की संख्या : 19
 आवेदन करने की अंतिम तिथि : 15-03-2021
 प्रकाशित किया गया : 08-02-2021
 योग्यता : Diploma12TH
 नौकरी स्थान : Kolkata
 उद्घाटन की संख्या : 90
 आवेदन करने की अंतिम तिथि : 03-03-2021

वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी

 योग्यता : Any Bachelors Degree, LLB, Any Masters Degree
 नौकरी स्थान : Kolkata
 उद्घाटन की संख्या : 1
 आवेदन करने की अंतिम तिथि : 21-02-2021
 प्रकाशित किया गया : 06-02-2021

वेस्ट बंगाल स्टेट हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर समिति

 योग्यता : M.A, MBA/PGDM, MSW
 नौकरी स्थान : Malda, Kolkata
 उद्घाटन की संख्या : 1
 आवेदन करने की अंतिम तिथि : 21-02-2021
 प्रकाशित किया गया : 08-02-2021

उत्‍तर प्रदेश के मंडलों के बाद हर जिले में खुलेगी निःशुल्क अभ्युदय कोचिंग

लखनऊ : दूरदराज क्षेत्र या कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से जो युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों में कोचिंग के लिए नहीं जा सकते, उन्हें निश्शुल्क कोचिंग दिलाने की पूरी व्यवस्था योगी सरकार ने कर दी है। वसंत पंचमी यानी 16 फरवरी से हर मंडल में शुरू हो रही अभ्युदय कोचिंग की कार्ययोजना पर अंतिम मुहर लगाने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले चरण की घोषणा भी कर दी है। मंडलों के बाद प्रदेश के हर जिले में भी कोचिंग शुरू होगी। अभ्युदय कोचिंग के संबंध में मुख्य सचिव आरके तिवारी ने विस्तृत आदेश जारी कर दिया। शासनादेश के अनुसार, वसंत पंचमी से मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर एक निश्शुल्क प्रशिक्षण केंद्र मंडलायुक्त की अध्यक्षता में शुरू किए जाएंगे। राज्य स्तरीय और मंडल स्तरीय समिति के माध्यम से योजना चलाई जाएगी। राज्य स्तरीय समिति के लिए उप्र प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को नोडल संस्था और समाज कल्याण विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है। सेवारत आइएएस, आइपीएस, भारतीय वन सेवा, पीसीएस, पीपीएस संवर्ग और अन्य संवर्ग के अधिकारियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों द्वारा संघ लोक सेवा आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग आदि के प्रतियोगी छात्रों के लिए राज्य व मंडल स्तर पर फिजिकल-वर्चुअल क्लास निश्शुल्क चलाई जाएंगी। उपाम, सचिवालय के रूप में काम करेगी। ख्याति प्राप्त संस्थाओं से पाठ्य सामग्री लेने के लिए अनुबंध किए जाएंगे।

फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल बनेगा

विषय विशेषज्ञों द्वारा वर्चुअल, साक्षात कक्षाओं और युवाओं के लिए कैरियर काउंसिलिंग सत्रों का आयोजन किया जाएगा। राज्य स्तरीय समिति, मंडल स्तरीय समिति, उपाम के प्रवक्ताओं द्वारा व्याख्यान-लेक्चर को फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया जाएगा। यह सुविधा मोबाइल फोन पर भी उपलब्ध होगी। ई-लर्निंग प्लेटफार्म पर विभिन्न अधिकारी परीक्षा की तैयारी संबंधी अपने अनुभव साझा करते हुए वीडियो अपलोड करेंगे। उपाम द्वारा भी परीक्षा की तैयारी से संबंधित सामग्री, पुस्तक आदि संबंधी मार्गदर्शन देते हुए वीडियो अपलोड किया जाएगा। लाइव सेशन, वेबिनार होंगे। वीडियो व अन्य सामग्री को पोर्टल पर अपलोड करने से पहले स्क्रीनिंग की जाएगी। प्रत्येक विषय के लिए विशेषज्ञों की सहायता ली जाएगी। विशेषज्ञों को एक हजार रुपये प्रति बैठक की दर से मानदेय मिलेगा।
योजना के खास बिंदु
ई-लर्निंग प्लेटफार्म द्वारा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं और प्रश्नों को भेजने की सुविधा दी जाएगी। मेधावी छात्रों के चयन के लिए वर्ष में एक बार उपाम द्वारा पात्रता परीक्षा आयोजित की जाएगी।
आइएएस, आइपीएस, आइएफएस, पीसीएस और राज्य स्तरीय अधिकारियों को अभ्यर्थियों की मेंटरशिप का काम करना होगा। उनके समर्पित भाव से किए गए काम के लिए वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि में विशिष्ट प्रविष्टि दर्ज की जाएगी। प्रशिक्षु आईएएस, आइपीएस, भारतीय वन सेवा, पीसीएस और अन्य राज्यस्तरीय सेवाओं के अधिकारियों द्वारा आवश्यक रूप से इन अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया जाएगा व कक्षाएं ली जाएंगी। इसे उनके द्वारा एकेडमी में होने वाले प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।
हर केंद्र पर कोर्स को-ऑर्डिनेटर ऐसे उम्मीदवार को बनाया जाएगा, जो सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण हों। ऐसा उम्मीदवार न मिलने पर पीसीएस मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थी का चयन किया जाएगा।

ओला ला रहा है नया इलेक्ट्रिक स्कूटर, सिंगल चार्ज में चलेगी 100 किमी

देश की अग्रणी कैब प्रदाता कंपनी ओला दोपहिया बाजार में उतरने की पूरी तैयारी कर चुकी है। कंपनी जल्द ही घरेलू बाजार में अपनी पहली इलेक्ट्रिक स्कूटर को लॉन्च करने जा रही है। हाल ही में इस स्कूटर को टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया गया है, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस स्कूटर को अगले कुछ महीनों में बिक्री के लिए पेश किया जा सकता है।

बता दें कि, ओला ने पिछले साल ही नीदरलैंड की इलेक्ट्रिक स्कूटर ब्रांड ईटरगो का अधिग्रहण किया है। कंपनी एटर्गो के तकनीक और फीचर्स का इस्तेमाल अपने आने वाली स्कूटर में करेगी। हालांकि टेस्टिंग के दौरान जो स्कूटर स्पॉट किया गया है वो पूरी तरह कैमोफ्लेज (कवर) था, लेकिन बावजूद इसके इस स्कूटर के डिजाइन और फीचर्स से जुड़ी कुछ बातें सामने आई हैं। जहाँ तक इटेरगो ब्रांड की बात है तो इसका ऐप स्कूटर अपने सेग्मेंट में खासा मशहूर है और इसके कई अवार्ड भी अपने नाम किए हैं। ये स्कूटर 240 किलोमीटर तक का ड्राइविंग रेंज देती है और महज 3.9 सेकेंड में ही 45 किलोमीटर प्रतिघंटा का रफ्तार पकड़ने में सक्षम है। इसमें 50 लीटर की क्षमता का स्टोरेज स्पेस भी दिया गया है।

ऑटोकार में छपी रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में पेश किए जाने वाले मॉडल की अधिकत स्पीड 100 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी और ये स्कूटर 100 किलोमीटर तक का ड्राइविंग रेंज दे सकती है। अभी इस स्कूटर के बारे में ज्यादा जानकारी हाथ नहीं लगी है, लेकिन इस स्कूटर में स्वैपेबल (निकाले जाने वाले) Li-ion बैटरी का प्रयोग किया जा सकता है। Ola ने हाल ही में घोषणा की थी कि उसने तमिलनाडु राज्य सरकार के साथ एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किया है। कंपनी राज्य में दुनिया की सबसे बड़ी स्कूटर फैक्ट्री लगाने जा रही है। जानकारी के अनुसार ओला इस फैक्ट्री के निर्माण में तकरीबन 2,400 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस फैक्ट्री की वार्षिक उत्पादन क्षमता 20 लाख यूनिट्स होगी। इस फैक्ट्री से 10,000 लोगों को नौकरी मिलने की संभावना है। कंपनी का कहना है कि यह फैक्ट्री न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगी बल्कि इससे देश के तकनीकी क्षेत्र को भी बल मिलेगा।

गानों की रॉयल्टी पर अब नहीं होगा म्यूजिक कम्पनियों का एकाधिकार

मुम्बई :  इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अपीलेट बोर्ड (आईपीएबी) ने एक ऐतिहासिक फैसले में भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री का अर्थशास्त्र ही बदल दिया है। देश की प्रमुख म्यूजिक कंपनियों के विरुद्ध म्यूजिक ब्रॉडकास्टर्स व अन्य की याचिकाओं पर दिए फैसले में बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि गानों की रॉयल्टी पर अब सिर्फ म्यूजिक प्रोड्यूसर का एकाधिकार नहीं होगा। बल्कि गाना बनने से जुड़े सभी व्यक्तियों की बराबर हिस्सेदारी होगी। मतलब यह कि अब गानों की रॉयल्टी में गायक, गीतकार, संगीतकार, साउंड रिकॉर्डिस्ट समेत सभी का हिस्सा होगा। अब तक प्रोड्यूसर यानी म्यूजिक कंपनियां इसमें मनमानी करती थीं। 31 दिसंबर 2020 को आईपीएबी के चेयरमैन और दिल्ली हाई कोर्ट के सेवानिवृत जज मनमोहन सिंह ने 250 पन्नों का यह जजमेंट दिया। फैसले में रॉयल्टी की हिस्सेदारी के साथ ही आईपीएबी ने यह भी कहा है कि म्यूजिक कंपनी अब किसी भी ब्रॉडकास्टर को कंपल्सरी लाइसेंस देने से मना नहीं कर सकती है। इसके बदले में ब्रॉडकास्टर्स, म्यूजिक कंपनी को रॉयल्टी देंगे। बोर्ड ने रॉयल्टी की दर भी तय कर दी है। दरअसल, कंपल्सरी लाइसेंस के नाम पर म्यूजिक कंपनियां अपने गाने, अपनी पसंद के ब्रॉडकास्टर को ही देती थीं। इसके चलते कोई गाना किसी एक रेडियो स्टेशन को मिलता था तो दूसरे को नहीं मिलता था। म्यूजिक कंपनियां लाइसेंस देने में मनमानी करती थीं। पहले गीतों की रॉयल्टी चैनल के टर्नओवर के अनुसार तय होती थी, लेकिन फैसले में कहा गया है कि चैनल का टर्नओवर अच्छा हो या बुरा , चैनल गीत का ट्रैक जितना चलाएगा उसे उस अनुसार ही रॉयल्टी देनी होगी। फैसले में वर्ष 2021 से रेडियो ब्रॉडकास्टर्स के लिए अलग से रॉयल्टी की दर तय की गयी हैं। यानी रेडियो प्रसारण स्टेशन के रेट चैनल से अलग रहेंगे। मामले में पहला विरोध गीतकार जावेद अख्तर ने दर्ज करवाया था। फैसले के वक्त वह बतौर पार्टी आईपीएबी के समक्ष हाजिर भी थे। उन्होंने इसे ऐतिहासिक दिन बताया। दि एमवीएमएनटी कंपनी के सह संस्थापक फैज़ान खान कहते हैं कि अब छोटे शहरों से आने वालों का शोषण नहीं हो सकेगा। आईपीआर के विशेषज्ञ वकील अंकित साहनी कहते हैं कि अब अदालत ने दरवाज़े खोल दिए हैं। कॉपीराइट एक्ट-1957 के सेक्शन 17 में लिखा है कि संगीत सर्जक उसका पहला मालिक है, जबकि सेक्शन 2-डी में लिखा है कि निर्माता ही मालिक है। 2012 में संशोधन किया गया और सेक्शन 31-डी में बताया गया कि रॉयल्टी तय करने का काम आईपीएबी का है। मगर बोर्ड का चेयरमैन पद खाली होने से रॉयल्टी की दर तय नहीं हुई थी। सितंबर 2020 में म्यूजिक कंपनियों के खिलाफ दायर ब्रॉडकास्टर्स की 10 याचिकाओं को एक साथ मर्ज कर सुनवाई की गई।
( साभार – दैनिक भास्कर)

4 साल की लिली वाइल्डर ने खोजे डायनासोर के पैरों के निशान

ब्रिटेन के वेल्श समुद्र तट पर डायनासोर के 22 करोड़ साल पुराने पैरों की निशान मिले हैं। इसे 4 साल की लिली वाइल्डर ने सबसे पहले देखा। उसने इस बारे में अपने पिता को बताया। लिली के पिता ने इसकी फोटो खींचकर अपनी पत्नी के पास भेजी जिन्होंने विशेषज्ञों के साथ इस जानकारी को साझा किया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन पदचिह्नों से यह समझने में मदद मिलेगी कि डायनासोर कैसे चलते थे। लिली की मां सैली वाइल्डर ने कहा, “जब लिली ने हमें इसके बारे में बताया तो हमने एक्सपर्ट्स को कॉल किया। वो आए और उस पर रिसर्च शुरू कर दी। क्यूरेटर सिंडी हॉवेल्स ने इस खोज को ‘समुद्र तट पर मिला सबसे अच्छा नमूना’ बताया। इनसे ये पता लगाया जा सकता है कि डायनासोर कैसे चलते थे। पैरों के निशान 10 सेमी लंबे हैं। ये अनुमान है कि डायनासोर 75 सेमी लंबा हो सकता है। इन पैरों के निशानों को नेशनल म्युजियम कार्डिफ में सुरक्षित रखा जाएगा। जब लिली से ये पूछा गया कि क्या तुम्हें डायनासोर से डर लगता है तो उसने कहा नहीं, मैं डायनासोर से नहीं डरती। उसने बताया कि ये निशान देखकर भी उसे डर नहीं लगा क्योंकि ये बहुत छोटे हैं। 23 जनवरी को वाइल्डर फैमिली ने ये निशान देखें और उसी दिन इसे फेसबुक पर पोस्ट किया ताकि जल्दी से जल्दी इनकी पहचान हो सके।

(साभार – दैनिक भास्कर)

घर की जिम्मेदारी उठाने के लिए मैकेनिक बनी आदिलक्ष्मी

हैदराबाद की महिला मैकेनिक आदिलक्ष्मी ने अपने पति का सहारा बनने के लिए मैकेनिक का काम चुना। फिलहाल आदिलक्ष्मी के हौसले की तारीफ एमएलसी के. कविता ने की है। उन्होंने कहा कि पुरुष प्रधान माने जाने वाले मैकेनिक के काम को आदिलक्ष्मी ने करके मिसाल कायम की है। आदिलक्ष्मी अपने पति के साथ कोठागुडेम के पास सुजाता नगर में ऑटोमोबाइल की दुकान चलाती हैं। उनके परिवार में दो बेटियां हैं जिनकी उम्र 9 और 7 साल है। आदिलक्ष्मी ने अपनी दुकान के लिए दो मशीन की मांग की थी। के. कविता ने आदिलक्ष्मी की मदद की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने इस परिवार को हैदाराबाद आने का निमंत्रण दिया और उनके काम की तारीफ भी की। कविता इस परिवार से मिली और उनकी दोनों बेटियों की अच्छी शिक्षा दिलाने का आश्ववासन भी दिया। कविता इस महिला के साहस को सलाम करती हैं। आदिलक्ष्मी की बीस साल की उम्र में शादी हो गई थी। परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें अपने पति के साथ मिलकर ऑटोमोबाइल की दुकान खोलना पड़ी। वे जब मैकेनिक का काम करती हैं तो ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि ये काम कोई पुरुष कर रहा है या महिला। वे अपने काम को बखूबी अंजाम देती हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

आंध्र प्रदेश में महिला एस आई ने 2 दिन पुराने लावारिस शव को दिया कंधा

2 किमी पैदल चलकर श्मशान घाट ले गयी

यह खबर ऐसी है जो  एकबार हमें झकझोरती है, सोचने पर मजबूर करती है और साथ ही एक उम्मीद भी भरती है। सोचने पर आप तब मजबूर होते हैं जब आपको यह पता लगेगा कि एक लाश 2 दिन से लावारिस पड़ी है और कोई सामने नहीं आता। फिर गर्व होगा यह जानकर कि एक महिला एस आई ने हिम्मत दिखायी और मानवता को शर्मसार होने से बचा लिया। आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में एक जगह है कोशी बग्गा। यहाँ के एक गाँव में 2 दिन तक एक लावारिस शव खेत में पड़ा रहा। सभी उसे उठाने से कतराते रहे। यहां के पुलिस स्टेशन में तैनात एस आई के. सिरीशा को इसकी खबर मिली तो वे तुरंत मौके पर पहुंची। सिरीशा ने गांव वालों से मदद मांगी, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने शव को कंधा देने के लिए एक आदमी बुलाया। कोई और नहीं मिला तो खुद ही यह जिम्मेदारी ले ली। दोनों 2 किलोमीटर पैदल चलकर लाश को श्मशान घाट तक ले गए। उसका अंतिम संस्कार भी सिरीशा ने खुद ही किया। आंध्र प्रदेश पुलिस ने अपने सोशल मीडिया पेज पर सिरीशा का वीडियो शेयर किया है। इसमें वह खेतों की मेड़ पर चलकर लाश को श्मशान घाट तक ले जाते दिख रही हैं। सिरीशा ने बताया कि यह लाश को 80 साल के एक भिखारी की थी। गांव का रास्ता कच्चा था। इसलिए वहां तक वाहन नहीं जा सकता था। मैंने गाँव वालों से मदद माँगी। कोई इसके लिए तैयार नहीं हुआ तो मैं खुद ही ललिता ट्रस्ट के एक सदस्य की मदद से लाश को श्मशान घाट तक ले गयी। सिरीशा ने बताया कि मैंने लोगों की सेवा करने के लिए यह नौकरी चुनी है। जिस तरह लोग जिंदा रहते हुए सम्मान के हकदार हैं, उसी तरह मरने के बाद भी उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। शव को श्मशान घाट तक पहुंचाकर मैंने अपना फर्ज निभाया है। सिरीशा 12 साल के बच्चे की मां हैं। उनके पिता का सपना था कि वह पुलिस सेवा में जायें । वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर उनकी खूब तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने कहा कि बहादुरी इसे ही कहा जाता है। डीजीपी गौतम स्वांग ने भी सिरीशा की तारीफ की है।

प्रेरक है केरल की पहली ट्रांसजेंडर महिला डॉक्टर प्रिया की कहानी

कोल्लम : कोल्लम के एस एन पब्लिक स्कूल से पढ़ाई के दौरान ट्रांसजेंडर जीनू के मन में अपनी पहचान पाने की जद्दोजहद हावी थी। उन्हीं दिनों जीनू के पैरेंट्स ने उसकी नोटबुक के पन्ने पर यह लिखा हुआ देख लिया था कि यही वो वक्त हैं जब मुझे अपनी असली पहचान पा लेना चाहिए। जीनू के माता-पिता को अपने बेटे के लिए चिंता हुई लेकिन वे क्या हल निकाले, ये खुद भी नहीं समझ पा रहे थे। कुछ दिनों बाद जीनू के माता-पिता को ये लगने लगा कि उसे कोई मानसिक बीमारी है और वे उसका हल तलाशने लगे। उसे मनोचिकित्सक से चेकअप कराने की बात भी होने लगी। उसके माता-पिता चाहते थे कि वे एक लड़के की तरह रहे। लेकिन जीनू की भावनाएं एक लड़की के समान थी। ऐसे ही तमाम हालातों के बीच जीनू ने 2008 में वैद्य रत्नम आयुर्वेद कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। 2012 में कर्नाटक के केवीजी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, दक्षिणा कन्नड़ से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली। फिर त्रिशूर के सीताराम आयुर्वेद हॉस्पिटल से उसने अपने मेडिकल करियर की शुरुआत की। डॉक्टर बनने के बाद वो दिन भी आया तब जीनू ने अपनी मां से सेक्स रिअरैंजमेंट सर्जरी कराने की मांग की। उसकी मां इस सर्जरी के लिए राजी हो गई। जल्दी ही परिवार के अन्य लोगों की सहमति से जीनू ने 2018 में कोची के रेनाई मेडिसिटी से हॉर्मोन ट्रीटमेंट लिया। उसके बाद पिछले साल उसने सेक्स रिअरैंजमेंट सर्जरी कराई। इस तरह जीनू लड़की बनीं और उसने अपना नाम प्रिया रख लिया। उन्हें केरल की पहली ट्रांसजेंडर डॉक्टर होने का गौरव प्राप्त है। प्रिया को इस बात की खुशी है कि सर्जरी के बाद उन्होंने अपनी पहचान पा ली है। वे अन्य पैरेंट्स से कहना चाहती हैं कि अपने बच्चे को उसी रूप में स्वीकार करें, जैसा वो है। समाज के लोगों की परवाह करके उसकी सच्चाई को सबसे छिपाकर न रखें।

अनाथ बच्चों के लिए काम करने वाली पौलोमी पाविनी फोर्ब्स की सूची में

लखनऊ : लखनऊ की लेखक, वकील और समाज सेविका पौलोमी पाविनी शुक्ला ने फोर्ब्स द्वारा जारी ‘भारत की 30 अंडर 30, 2021’ लिस्ट में स्थान पाकर देश का गौरव बढ़ाया है। फोर्ब्स पत्रिका हर साल 30 ऐसे व्यक्तियों की लिस्ट जारी करती है जिन्होंने 30 साल से कम उम्र में अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है। पाविनी का नाम अनाथ बच्चों की शिक्षा के लिए किए गए कार्यों की वजह से इस सूची में शामिल किया गया है।सुप्रीम कोर्ट में वकील पाविनी ने भारत में अनाथ बच्चों की दुर्दशा पर 2015 में अपने भाई के साथ मिलकर ‘वीकेस्ट ऑन अर्थ-ऑरफेंस ऑफ इंडिया’ नामक पुस्तक लिखी थी। पाविनी ने बताया कि फोर्ब्स की लिस्ट में मेरा नाम आने से मैं बहुत खुश हूं। इससे मुझे अनाथ बच्चों के लिए और ज्यादा काम करने का प्रोत्साहन मिला है। पाविनी सीनियर आईएएस ऑफिसर अराधना शुक्ला और प्रदीप शुक्ला की बेटी हैं। उन्होंने अनाथ बच्चों के लिए लखनऊ में ‘एडॉप्ट एन ऑरफेंज’ प्रोग्राम की शुरुआत की। अपने इस काम के लिए उन्हें लोकल बिजनेस हाउस से सपोर्ट मिला और इस तरह वे इन बच्चों को पढ़ाई के लिए स्टेशनरी, किताबें और ट्यूशन फीस की राशि दे सकीं।लॉकडाउन के दौरान पाविनी ने शहर के सभी अनाथाश्रम में स्मार्ट टीवी लगवाया ताकि वहां रहने वाले बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा मिल सके। पाविनी ने इस काम की शुरुआत के बारे में बताते हुए कहा – ”2001 में जब मैं नौ साल की थी तो मेरी मां मुझे अपने बर्थडे पर एक अनाथाश्रम ले गई। यहां मैं गरीब और अनाथ बच्चों से मिली। उनकी तकलीफें देखकर ये अहसास हुआ कि मुझे भी उनके लिए कुछ करना चाहिए। आज इन बच्चों के लिए की गई मेरी मेहनत रंग लाई।” उनके माता-पिता भी अपने बेटी के इस काम से बहुत खुश हैं।

पत्थरों पर पट्टचित्र बनाने वाली कलाकार भाग्यश्री

डूडलिंग और पेंटिंग आर्टिस्ट भाग्यश्री साहू ने ये कभी सोचा भी नहीं था कि इस कला की वजह से उन्हें खास पहचान मिलेगी। 27 साल की इंजीनियरिंग छात्रा भाग्यश्री की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान की। भाग्यश्री साहू पट्‌टचित्र पेंटिंग करने वाली चित्रकार हैं। इस पारंपरिक कला को उन्होंने अपने हुनर से आगे बभाग्यश्री ने बहुत कम उम्र में ये कला सीखी। लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि एक दिन यही कला उनका करिअर बन जाएगी। राउरकेला के स्टील सिटी स्थित सेक्टर-19 में रहने वाली भाग्यश्री को पत्थरों पर पट्‌टचित्र बनाने में महारत हासिल है। लॉकडाउन के दौरान इस आर्टिस्ट ने बॉटल्स, फ्यूज इलेक्ट्रिक बल्ब और प्लास्टिक की चीजों पर शानदार पट्‌टचित्र पेंटिंग की।

भाग्यश्री ने बताया कि पुरी के रघुराजपुर का दौरा करते समय उनकी रूचि इस कला में हुई। कॉलेज के रास्ते में भाग्यश्री को ये पत्थर मिले। वे ये पत्थर घर ले आई और इन्हें साफ करके पट्‌टचित्र पेंटिंग की। भाग्यश्री वर्कशॉप का आयोजन भी करती हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में भाग्यश्री की तारीफ करते हुए कहा था – ”सुभाष बाबू की जयंती पर भाग्यश्री ने मुझे पत्थर पर की गई एक अनूठी श्रद्धांजलि दी। मैं उन्हें भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूं”। भाग्यश्री ने इस सराहना के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।