Tuesday, April 7, 2026
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छोटे वेंचर कैपिटल से मिली स्टार्टअप को आगे बढ़ने की राह: रिपोर्ट

मुम्बई : छोटे वेंचर कैपिटल फंड स्टार्टअप तंत्र के लिए प्रमुख मददगार बनकर उभरे हैं और इनके जरिए पिछले तीन वर्षों में 566 स्टार्टअप के लिए 730 सौदे ऐसे हुए, जिनकी राशि तीन करोड़ डॉलर से कम थी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक इन 730 सौदों की कुल राशि 34.1 करोड़ डॉलर थी और इनमें पिछले तीन वर्षों के दौरान कई गुना बढ़ोतरी हुई। इंडियन प्राइवेट इक्विटी एंड वेंचर कैपिटल एसोसिएशन (आईवीसीए) और अमेजन सर्विसेज की एक संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि छोटे वेंचर कैपिटल की संख्या 2020 में बढ़कर 88 हो गई, जो 2014 में सिर्फ 29 थी।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दशक में छोटे वेंचर कैपिटल घरेलू स्टार्टअप के लिए बड़े मददगार बनकर उभरे हैं, जिन्होंने न सिर्फ जोखिम पूंजी उपलब्ध कराई, बल्कि संरक्षक की भूमिका भी निभाई। इस रिपोर्ट के तहत 50 छोटे वेंचर कैपिटल से उनकी निवेश रणनीति के बारे में पूछा गया।

एसएमडीसी ने खोला ‘‘दिल्ली का पहला’’ जूता बैंक

नयी दिल्ली : जरूरतमंदों की मदद करने और स्वच्छता सर्वेक्षण में अपनी रैंकिंग सुधारने के लिए दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसएमडीसी) ने बृहस्पतिवार को ‘जूता बैंक’ खोला और दावा किया कि यह दिल्ली में इस तरह की पहली पहल है।
नगर निकाय ने बताया कि एसएमडीसी के पश्चिम जोन के सुभाष नगर क्षेत्र में जूता बैंक का उद्घाटन किया गया। एसएमडीसी ने एक बयान में कहा, ‘‘एक खिलौना बैंक और ‘ प्लास्टिक लाओ-खाद ले जाओ’ सुविधाओं के साथ जूता बैंक खोला गया है।’’ एसएमडीसी ने निवासियों से आग्रह किया है कि वे जरूरतमंदों के लिए पुराने या नए खिलौने, बच्चों और बुजुर्गों के लिए जूते और जरूरतमंदों के लिए स्कूल बैग दान करें। एसएमडीसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ आम तौर पर लोग पुराने खिलौने, स्कूल बैग और जूते कचरे में फेंक देते हैं। हम उन्हें इसके बजाय इन चीजों को बैंक में दान करने के लिए कह रहे हैं, जिनका इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों को देने के लिए किया जाएगा ।’’

मोरी की जगह महिला बन सकती है तोक्यो ओलंपिक आयोजन समिति की अध्यक्ष

तोक्यो : तोक्यो ओलंपिक आयोजन समिति पूर्व अध्यक्ष योशीरो मोरी की जगह लेने के लिए किसी के नाम की घोषणा जल्द से जल्द कर सकती है। इस 83 साल के पूर्व प्रधानमंत्री को महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी करने के बाद विरोध को देखते हुए पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उनके स्थान पर किसी महिला को अध्यक्ष बनाने के लिये दबाव है लेकिन यह पक्का नहीं है क्योंकि ओलंपिक शुरू होने में केवल पांच महीने का समय बचा है। उन्होंने कहा था कि महिलाएं बहुत ज्यादा बात करती है। मोरी ने पिछले सप्ताह 84 साल के साबुरो कवाबुची को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने की कोशिश की थी लेकिन उनके खिलाफ सोशल मीडिया और सार्वजनिक रूप से बहस होने के कारण उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि 63 साल की यासुहिरो यामाशिता इस पद के दावेदार है। वह जापान ओलंपिक समिति के अध्यक्ष और 1984 ओलंपिक में जूडो के स्वर्ण पदक विजेता है। इस चयन समिति के अध्यक्ष 85 साल के फजियो मित्राई है जो कैमरा कंपनी कैनन के प्रमुख है। इस बात की भी संभावना है कि इस पद के लिए किसी महिला को चुना जाए।

वैज्ञानिकों ने बनाया पूरी तरह से रिसाइकिल होने वाला प्लास्टिक

आम जिंदगी का हिस्सा बन चुके प्लास्टिक को रिसाइकिल करना बहुत बड़ी चुनौती है। हालांकि, अब वैज्ञानिकों ने एक रासायनिक क्रिया की पहचान की है, जिसकी मदद से प्लास्टिक को इस्तेमाल के बाद उसके मूल स्वरूप यानी मोनोमर में लौटाना मुमकिन होगा। ‘नेचर जर्नल’ में प्रकाशित शोधपत्र के मुताबिक दुनियाभर में सबसे ज्यादा प्रचलित ‘हाई डेंसिटी पॉलीइथाइलीन (एचडीपीई)’ पॉलीइथाइलीन नाम की पॉलीमर श्रृंखला से बना होता है। एचडीपीई को पिघलाकर दोबारा इस्तेमाल के लायक जरूर बनाया जाता है, लेकिन इस प्रक्रिया में कई अवांछित तत्व भी अस्तित्व में आते हैं। हालांकि, रासायनिक क्रिया से रिसाक्लिंग के दौरान ऐसा नहीं होता। इस प्रक्रिया में एचडीपीई को बार-बार मोनोमर में तब्दील किया जा सकता है। हर मोनोमर से बेहतरीन गुणवत्ता का प्लास्टिक तैयार करना भी संभव है। शोध दल में शामिल मैनुअल हॉबलर ने बताया कि नई तकनीक से प्लास्टिक के निर्माण में इस्तेमाल 96 फीसदी मोनोमर को दोबारा हासिल किया जा सकता है। इस मोनोमर को डाइइथाइल-कार्बोनेट की मदद से पॉलीमर में बदला जाता है। पॉलीमर को 3-डी प्रिंटर या पारंपरिक मोल्डिंग तकनीक के जरिये मनचाहे आकार में ढालना मुमकिन है। हॉबलर ने दावा किया कि नई तकनीक प्लास्टिक से तैयार हर वस्तु के पुन:प्रसंस्करण में सक्षम है। इससे दुनियाभर में बढ़ते प्लास्टिक कचरे पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि, रिसाइकिल किए गए प्लास्टिक की कीमत मूल उत्पाद से थोड़ी अधिक हो सकती है।

रात में गर्म दूध पीकर सोने के हैं अद्भुत लाभ

आयुर्वेद के अनुसार दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि अगर किसी वजह से आप खा नहीं पाते हैं, तो एक गिलास दूध पीकर आप उसकी पूर्ति कर सकते हैं। दिन की बजाय रात में दूध पीने को सबसे फायदेमंद माना जाता है। आइए, जानते हैं रात को दूध पीने के क्या है फायदे-
कैल्शियम की पूर्ति
हमारे दांतों और हड्डियों को कैल्शियम की जरूरत होती है। हर रोज गर्म दूध पीने से हमारे दांत और हड्डियां मजबूत बनती हैं।
एनर्जी बढ़ाने में कारगर
दूध में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन उपलब्ध होता है। इस आधार पर भी इसे हर रोज लिए जाने की सलाह दी जाती है। दिन की शुरुआत एक गिलास गर्म दूध से करने से शरीर दिनभर ऊर्जावान बना रहता है। इसके साथ ही ये मांसपेशियों के विकास के लिए भी बहुत जरूरी है।
कब्ज की समस्या
अगर आपको कब्ज की समस्या है तो गर्म दूध पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। ये पाचन के लिए बेहद फायदेमंद होता है। जिन्हें कब्ज की समस्या है वो गर्म दूध को दवा के तौर पर अपना सकते हैं।
थकान दूर करने के लिए
अगर आप काम करने के दौरान बहुत जल्दी थक जाते हैं, तो आपको गर्म दूध पीना शुरू कर देना चाहिए। बच्चों को खासतौर पर हर रोज दूध दिया जाना चाहिए।
गले के लिए फायदेमंद
दूध का सेवन करने से गला भी अच्छा रहता है। अगर आपके गले में तकलीफ है तो दूध के कप में चुटकीभर कालीमिर्च भी मिला सकते हैं।
तनाव दूर करने के लिए
ऑफिस से घर लौटने पर आप दिनभर का तनाव भी अपने साथ लेकर आते हैं। ऐसे में हल्का गर्म दूध पीना आपको इस तनाव से राहत दिलाने में मदद करेगा। दूध पीने के बाद दिनभर का तनाव कम हो जाएगा और आप राहत महसूस करेंगे।
अनिंद्रा की समस्या
रात में दूध पीने का ये सबसे बड़ा फायदा है। कई ऐसे अध्ययन सामने आए हैं जिनके अनुसार, रात को सोने से पहले हल्का गर्म दूध पीने से नींद अच्छी और भरपूर आती है।

102 करोड़ रुपये पहुंचा हर दिन का टोल संग्रह

एक मार्च तक मिलेगी निःशुल्क फास्टैग सुविधा
नयी दिल्ली :भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कहा है कि देश में टोल प्लाजा पर डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए लाया गया फास्टैग पेमेंट का इस्तेमाल देश भर में 23.2 प्रतिशत पर पहुंच गया है। एनएचएआई ने एक ट्वीट करते हुए बताया कि कुल लेनदेन की संख्या 63 लाख को पार कर गई है। इसके साथ-साथ यह भी कहा कि फास्टैग के जरिए टोल संग्रह 102 करोड़ रुपये प्रति दिन पहुंच गया है। एनएचएआई ने कहा 1 मार्च तक सभी टोल प्लाजा पर निःशुल्क फास्टैग लगाए जा रहे हैं। बता दें कि परिवहन मंत्रालय टोल प्लाजा पर शत-प्रतिशत फास्टैग सिस्टम लागू कर चुकी है। अब अगर आप बिना फास्टैग के टोल प्लाजा से गुजरते हैं तो आपको डबल टोल देना होगा।
बता दें कि फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल भुगतान प्रणाली है जिसे 16 फरवरी से पूरे देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू कर दिया गया है। दरअसल गाड़ियों पर एक टैग लगाया जाता है जिसमें एक कोड और जब गाड़िया टोल प्लाजा से गुजरती है तो वहां पर लगा सेंसर उसको स्कैन कर लेता है और बिना देर किए गाड़ियां आगे बढ़ जाती हैं। एनएचएआई ने कहा कि इसके लागू होने के पांच दिनों में, राष्ट्रीय राजमार्गों पर 100 प्रतिशत कैशलेस टोलिंग की व्यवस्था को लेकर यात्रियों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। सरकारी निकाय ने कहा कि वो फास्टैग में बैलेंस चेक करने के लिए स्टेटट नामक एक नई सुविधा भी जोड़ी है। जिससे गुगल प्ले या फिर ऐपल के ऐप स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। जिसमें कलर कोड के जरिए वाहन मालिक फास्टैग स्टेट चेक कर सकते हैं।

नाओमी ओसाका बनीं ऑस्ट्रेलियाई ओपन 2021 की विजेता

जापान की नाओमी ओसाका ने ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीत लिया है। उन्होंने फाइनल मैच में जेनिफर ब्रैडी को 6-4, 6-3 से हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली । ओसाका ने सेमीफाइनल में सेरेना विलियम्स को 6-3, 6-4 से हराया था। 23 वर्षीय नोआमी ओसाका का यह चौथा ग्रैंडस्लैम है। इससे पहले वह 2018 में ऑस्ट्रेलियन ओपन जीत चुकी हैं। ओसाका से फाइनल मैच हारने वाली जेनिफ ब्रैडी पहली बार किसी ग्रैंडस्लैम के फाइनल में पहुंची थी। सेमीफाइनल में सेरेना विलियम्स को हराने के बाद ओसाका इस मैच की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। और उन्होंने अपने प्रदर्शन से फैन्स को निराश नहीं होने दिया। जीत के बाद नाओमी ओसाका ने अपने ही अंदाज में में जेनिफर को बधाई देते हुए कहा, ‘मैंने पहले ही कहा था कि यह लड़की मेरे लिए आगे समस्या बनेगी। पिछले कुछ महीने से मैं देख रही हूं तुमने शानदार खेल दिखाया। यू एस ओपन के सेमीफाइनल में भी हम एक दूसरे के खिलाफ खेल चुके हैं। बहुत बधाई।’ कोरोना के बाद दर्शकों भी मैदान पर लाइव मैच देखने के लिए मौजूद थे। ओसाका ने दर्शकों को भी शुक्रिया कहा।

परीक्षा के दौरान बच्चों को दें ये पोषक आहार

कोरोना का मुश्किल वक्त गुजरा ही था कि परीक्षा की तिथि घोषित हो गयी। कुछ दिनों बाद ही बच्चों की बोर्ड परीक्षाएं हैं। अक्सर देखा गया है कि परीक्षा आते ही बच्चों पर पढ़ाई का तनाव बढ़ जाता है और अनियमित दिनचर्या से बच्चों की भूख अक्सर कम हो जाती है। एक ही जगह बैठे रहने से तनाव और थकान के कारण बच्चों की खाने से अरुचि हो जाती है। ऐसे में जरूरी है कि उन्‍हें पौष्टिक आहार दिया जाए। परीक्षा के तनाव को दूर करने में कुछ खाद्य पदार्थ अहम भूमिका निभाते हैं। जिससे बच्चों की याददाश्त बढ़ती है और मुंह का स्वाद भी बदलता रहता है। तो आइये ऐसे ही आहार के बारे में बताते हैं जो दिमाग के लिए भी अच्छे हैं और स्वादिष्ट भी।
नट्स खाने से बढ़ती है मेमोरी
नट्स पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और दिमाग को तेज़ करने के लिए आवश्यक भी। मेवे में विटामिन-ई और जिंक की अच्छी मात्रा शामिल होती है, जो उन्हें परीक्षा के समय स्नैक्स के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प बनाता हैं। नट्स में गुड फैट, प्रोटीन और फाइबर होते हैं, जो बच्चों को लंबे समय तक पढ़ने के दौरान ऊर्जा देने में मदद कर सकती हैं। साथ ही, कुछ शोध से पता चलता है कि नट्स खाने से भी मस्तिष्क के कुछ पहलुओं को बेहतर काम करने में मदद मिलती है। नट्स खाने से समग्र मानसिक स्थिति में सुधार करने में मदद मिल सकती है।

मखाने या मूंगफली
परीक्षा के समय अक्सर बच्चों को पढ़ते वक़्त भूख लगती है और ऐसे में उन्हें जंक स्नैक्स देने से अच्छा है घर पर भुने मखाने या मूंगफली देना। मखाने हो या मूंगफली दोनों ही सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है और ये बच्चों को भी काफी पसंद होते हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायो टेक्नोलॉजी इनफार्मेशन (एनसीबीआई) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, मखाने में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी ट्यूमर गुण मौजूद होते हैं, जो दिमाग को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है। साथ ही मूंगफली में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है जो दिमाग के लिए बहुत अच्छा है और इसे खाने से बच्चों को जल्दी भूख भी नहीं लगती है। बच्चों को पढाई के वक़्त तरोताजा रखने के लिए विटामिन- सी जरूरी है। संतरे, अंगूर या कीवी जैसे अन्य मौसमी फल बच्चों को ज़रूर खिलाएं। कई शोध में यह सामने आया है कि विटामिन-सी मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाता है और समग्र रूप से बच्चों की याद करने की शक्ति अच्छी करता है। फ्रूट जूस देने के बजाय उन्हें ऐसे फल खिलाएं जो बच्चों का माइंड फ्रेश रखेंगे।

डार्क चॉकलेट
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि डार्क चॉकलेट मेंटल परफॉरमेंस पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। एनसीबीआई के अध्ययनों से पता चला है कि डार्क चॉकलेट का सेवन मानसिक थकान को कम करने, मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाने और स्मरण शक्ति को बढ़ाने में मदद कर सकती है।

स्मूदी या शेक
काफी बच्चे पढ़ते सय चाय या कॉफ़ी का सेवन करते हैं, लेकिन यह सही नहीं है क्योंकि दोनों में कैफीन की मात्रा अधिक होती है जो या तो सुस्ती का कारण बन सकती है या नींद उड़ा देती है। ऐसे में उन्हें उनके मन पसंद फ्रूट से बने शेक या स्मूदी दें नहीं तो बादाम का दूध भी एक अच्छा विकल्प है। ये सभी स्वादिष्ट तो हैं ही, साथ ही सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं और इन्हें पीने से नींद भी नहीं आएगी। ऐसा करने से बच्चे दूध भी पी लेंगे और आपकी चिंता भी दूर हो जाएगी।
(साभार – हेल्थ शॉट्स)

भा रही है नासा की वैज्ञानिक स्वाति मोहन की बिन्दी

मंगल के सबसे खतरनाक मिशन पर नासा के पर्सवियरन्स रोवर को लैंड कराने में अहम भूमिका निभाने वालीं भारतीय मूल की अमेरिकी वैज्ञानिक स्वाति मोहन पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। नासा में उनका यह कारनामा प्रशंसा का काबिल तो है ही, मगर उनकी एक चीज और है, जिसे देखकर सोशल मीडिया दीवाना हो रहा है। दरअसल, नासा का रोवर पर्सवियरन्स शुक्रवार को जैसे ही मंगल की सतह पर उतरा, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के नियंत्रण कक्ष में टचडाउन कंर्फम्ड (सफलतापूर्वक उतर गया) की आवाज गूंज उठी। यह घोषणा भारतीय मूल की अमेरिकी वैज्ञानिक स्वाति मोहन ने की, जिन्होंने रोवर को लाल ग्रह पर उतारने में एक अहम भूमिका निभाई। इस दौरान उनके माथे पर एक बिंदी थी, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। नासा ने इस मिशन से जुड़े वीडियो और फोटो अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किए, मगर भारत में सोशल मीडिया यूजर्स को इनमें से सबसे सबसे अधिक स्वाति मोहन के बिंदी ने आकर्षित किया। मिशन को कामयाब बनाने के लिए स्वाति मोहन नासा के कंट्रोल रूम में बैठी थीं और इस दौरान वह बिंदी में नजर आईं। हालांकि, इस दौरान उनके चेहर पर मास्क भी दिखा। इस बिंदी को देख देसी ट्विटर यूजर इतने खुश हुए कि वह अलग-अलग तरह से प्रतिक्रियाएं देने लगे। बता दें कि स्वाति ही वह वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने ‘मार्स 2020 मिशन के दिशा-निर्देशन और नियंत्रण अभियान (जीएन ऐंड सी) का नेतृत्व किया। उन्होंने रोवर को उतारने में उड़ान नियंत्रक (फ्लाइट कंट्रोलर) की भूमिका निभाई। स्वाति ने ही लाल ग्रह के वायुमंडल को पार करते हुए मंगल की सतह पर रोवर के सफलतापूर्वक उतरने की सबसे पहले घोषणा की। पर्सवियरन्स जैसे ही लाल ग्रह की सतह पर उतरा, स्वाति ने घोषणा की, ”सफलतापूर्वक उतर गया। इसके साथ ही वहां जश्न का माहौल देखने को मिला। स्वाति एक साल की उम्र में भारत से अमेरिका पहुंचीं थीं । नॉर्दर्न वर्जीनिया और वाशिंगटन डीसी में पली बढ़ीं स्वाति ने यांत्रिक और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से स्नातक और फिर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से वैमानिकी एवं अंतरिक्षयानिकी में एमएस तथा पीएचडी की थी। स्वाति ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में उनकी रुचि तब पैदा हुई जब उन्होंने नौ साल की उम्र में टीवी शो ‘स्टार ट्रेक देखा था। नासा के मंगल मिशन में स्वाति के योगदान की आज दुनियाभर में प्रशंसा हो रही है।

अलग रह रही पत्नी को गुजारा भत्ता देने से पति मुंह नहीं मोड़ सकता: सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी परित्यक्त (अलग रह रही) पत्नी को गुजारा भत्ता देने की जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकता है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना तथा न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने एक व्यक्ति को उसकी पत्नी को 2.60 करोड़ रुपये की पूरी बकाया राशि अदा करने का अंतिम मौका देते हुए यह कहा। साथ ही, मासिक गुजारा भत्ता के तौर पर 1.75 लाख रुपये देने का भी आदेश दिया। पीठ ने तमिलनाडु निवासी व्यक्ति की एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। यह व्यक्ति एक दूरसंचार कंपनी में राष्ट्रीय सुरक्षा की एक परियोजना पर काम करता है। उसने कहा कि उसके पास पैसे नहीं है और रकम का भुगतान करने के लिए दो साल की मोहलत मांगी। इस पर, शीर्ष न्यायालय ने कहा कि उसने न्यायलय के आदेश का अनुपालन करने में बार-बार नाकाम रह कर अपनी विश्वसनीयता खो दी है। न्यायालय ने हैरानगी जताते हुए कहा कि इस तरह का व्यक्ति कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा की परियोजना से जुड़ा हुआ है। पीठ ने कहा, पति अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता मुहैया करने की जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकता है और यह उसका कर्तव्य है कि वह गुजारा भत्ता दे। पीठ ने अपने आदेश में कहा, हम पूरी लंबित राशि के साथ-साथ मासिक गुजारा भत्ता नियमित रूप से अदा करने के लिए अंतिम मौका दे रहे हैं आज से चार हफ्तों के अंदर यह दिया जाए, इसमें नाकाम रहने पर प्रतिवादी को दंडित किया जा सकता और जेल भेज दिया जाएगा। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद के लिए निर्धारित कर दी। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से पेश हुए पति ने न्यायलय से कहा कि उसने अपना सारा पैसा दूरसंचार क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक परियोजना के अनुसंधान एवं विकास में लगा दिया है। गौरतलब है कि पत्नी ने 2009 में चेन्नई की एक मजिस्ट्रेट अदालत में अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया था।