Tuesday, October 27, 2026
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हमेशा से सभी का प्रिय रहा है बिहार की पहचान लिट्टी – चोखा

लिट्टी – चोखा, आज इसे अगर सुपर इन्स्टेंट फूड कहा जाए तो गलत नहीं होगा। बड़ी हस्तियाँ इसे चाव से खाती रही हैं और इसे बिहार की पहचान भी माना जाता है, पर यह लिट्टी – चोखा…आया कहाँ से, इस पर शायद ही हमने सोचा हो…आज हम इस पर ही बात करेंगे –
लिट्टी चोखा मूलत: बिहार का व्यंजन है. हालांकि इसे झारखंड और पूर्वी उत्तर में भी खाया जाता है. लिट्टी बनाने में सत्तू और आटे का प्रयोग किया जाता है. इसके साथ टमाटर की चटनी और आलू और बैंगन का चोखा भी खाया जाता. ठंड के दौरान इसका उपयोग और भी बढ़ जाता है..
विश्वामित्र ने भगवान राम के साथ खाया था लिट्टी-चोखा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लिट्टी चोखा त्रेतायुग के समय से ही बिहार में खाया जाता था। महर्षि विश्वामित्र ने पंचकोसी यात्रा के दौरान राम-लक्ष्मण के साथ चरित्रवन( अभी बक्सर) में लिट्टी-चोखा खाया था। यह परम्परा आज भी बक्सर में पंचकोसी मेले के दौरान निभाई जाती है।
मगध काल में प्रसार बढ़ा
लिट्टी चोखा का प्रचार प्रसार मगध काल में तेजी से बढ़ा.हालांकि इतिहास में यह लिखित रूप से कहीं दर्ज नहीं मिलता है कि लिट्टी-चोखा का विस्तार कैसे हुआ। ग्रीक यात्री मेगास्थनीज जब 302 ईसापूर्व में पाटलीपुत्र आया था तो वो वहां की भव्यता देखकर हैरान रह गया था. मेगास्थनीज ने लिखा था कि इस भव्य शहर में 64 गेट, 570 टावर और कई बाग-बगीचे हैं. यहां महलों और मंदिरों की भरमार है। मेगास्थनीज ने लिखा था- मैंने पूरब के एक भव्य शहर को देखा है। मैंने पर्सियन महलों को भी देखा है लेकिन ये शहर दुनिया का सबसे विशाल शहर है। मगध साम्राज्य के उसी बेहतरीन दौर में लिट्टी चोखा सबसे पहली बार अस्तित्व में आया।
अंग्रेज काल में चोखा का स्थान मटन ने ले लिया
1757 के बाद भारत में अंग्रेजों का वर्चस्व बढ़ने लगा। इसी के साथ ही लिट्टी चोखा में नये प्रयोग भी होने लगे। अंग्रेजों ने लिट्टी-चोखा साथ मटन का प्रयोग शुरू किया. आज भी बड़े-बड़े कार्यक्रमों में लिट्टी-मटन बड़े चाव से खाया जाता है। लिट्टी चोखा को युद्ध का खाना भी कहा जाता है। प्राचीन काल से युद्ध के दौरान सैनिक खाने के सामान के तौर पर लिट्टी लेकर चलते थे। लिट्टी की खासियत है कि ये जल्दी खराब नहीं होती। इसे बनाना भी आसान है और ये काफी पौष्टिक भी होता है। 1857 के विद्रोह में सैनिकों के लिट्टी चोखा खाने का जिक्र मिलता है। तात्या टोपे और रानी लक्ष्मी बाई ने इसे अपने सैनिकों के खाने के तौर पर चुना था। इसे फूड फॉर सरवाइवल कहा गया. उस दौर में ये अपनी खासियत की वजह से युद्धभूमि प्रचलन में आया. इसे बनाने के लिए किसी बर्तन की जरूरत नहीं है। इसमें पानी भी कम लगता है और ये सुपाच्य और पौष्टिक भी है। सैनिकों को इससे लड़ने की ताकत मिलती थी। इसके साथ ही अप्रवासी श्रमिक भी जहाँ गये, लिट्टी वहाँ पहुँचती रही। ये जल्दी खराब भी नहीं होती।
कैसे बनता है लिट्टी-चोखा
लिट्टी-चोखा बनाने के लिए गोयठा(उपले) वाली आग सबसे उपयुक्त माना जाती है। इसमें लिट्टी यानी आटे की लोई में मसालेदार सत्तू को भरा जाता है, फिर उसे इस आग में सेंका जाता है। साथ ही बैंगन और टमाटर को भी आग में सेंका जाता है। फिर चोखा के लिए बैगन, टमाटर और हरी मिर्च का प्रयोग किया जाता है। समय के साथ लिट्टी बनाने के तरीके में काफी परिवर्तन आ जा चुका है लेकिन नहीं बदला तो इसका स्वाद और इसके प्रति लोगों की दीवानगी।
बिहार की पहचान है लिट्टी-चोखा
लिट्टी चोखा को बिहार का व्यंजन माना जाता है। बिहार के लोग ही नहीं बल्कि देसी और विदेशी भी इस व्यंजन को बड़े चाव से खाते हैं। बिहार के लोगों ने इसे दूसरे राज्यों में भी फैलाया है। आज लिट्टी चोखा के स्टॉल हर शहर में दिख जाते हैं। लिट्टी चोखा खाने में स्वादिष्ट तो होता ही है, ये सेहत के लिए भी फायेदमंद है।
गेहूं के आटे में सत्तू को भरकर इसे आग पर पकाया जाता है. फिर देसी घी में डुबोकर इसे खाया जाता है। जिन्हें कैलोरी की फिक्र है, वो बिना घी में डुबोये लिट्टी का स्वाद ले सकते हैं। तला-भुना नहीं होने की वजह से ये सेहत के लिए अच्छा है। इसके साथ बैंगन, आलू – टमाटर का चोखा खाया जाता है। बैंगन को आग में पकाकर उसमें टमाटर, मिर्च और मसाले को डालकर चोखा तैयार किया जाता है। आलू भी आग पर पकाकर या फिर उसे उबालकर चोखा बनाया जाता है। टमाटर भी आग में पकाकर ही बनाया जाता है। बहुत से लोग परवल का चोखा भी बनाते हैं। बगैर सत्तू डाले जो लिट्टी बनती है, वह डोंगी के आकार की होती है, तो बहुत से लोग उसे गोलाकार भी देते हैं। इसे खखड़ी कहा जाता है। चोखा और सत्तू, दोनों के लिए ही सरसो तेल ही इस्तेमाल किया जाता है। बहुत से लोग बासी लिट्टी ऐसे ही खाते हैं या फिर चाय के साथ नाश्ते की तरह खाते हैं। वहीं, लिट्टी को छान भी लिया जाता है यानी फ्राइड लिट्टी भी बनती है जो सफर के दौरान काम आती है क्योंकि यह कई दिनों तक खराब नहीं होती। बिहार का ये व्यंजन राजस्थान के बाटी-चूरमा की तरह है. बिहार में ये खासा लोकप्रिय है. इसे बनाना भी आसान है और ये पौष्टिक भी है।

(स्त्रोत साभार – न्यूज 18 तथा प्रभात खबर)

कबीर के दोहे

1-जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

2-धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

3 – तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय,
कबहुँ उड़ी आँखीन पड़े, तो पिर घनेरि होय।

4 – काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ।
पल में प्रलय होएगी, बहुरी करेगा कब ।।

5 – साईं इतना दीजिये, जा के कुटुम्ब समाए ।
मैं भी भुखा न रहू, साधू ना भुखा जाय ।।

6 – दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय ।
जो सुख मे सुमीरन करे, तो दुःख काहे को होय ।।

7 – साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,
सार-सार को गही रहै, थोथी देई उड़ाय ।

8 – पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय ।

9 – ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए।
औरन को शीतल करे , आपहु शीतल होए ।।

10 – निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

11 – करता था तो क्यूं रहय, जब करि क्यूं पछिताय ।
बोये पेड़ बबूल का, अम्ब कहाँ ते खाय ॥

12 – कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती,न काहू से बैर।

13 – दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार,
तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार।

14 – जल में कुम्भ कुम्भ में जल है बाहर भीतर पानी ।
फूटा कुम्भ जल जलहि समाना यह तथ कह्यौ गयानी ॥

15 – मन के हारे हार है मन के जीते जीत ।
कहे कबीर हरि पाइए मन ही की परतीत ॥

माल्या, नीरव, चोकसी की 9371 करोड़ की संपत्ति सरकारी बैंकों को ट्रांसफर

नयी दिल्ली :  भारत में बैंकिंग घोटालों के मामलों में सरकारी एक्शन का असर अब दिखने लगा है। विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर सरकार की चौकसी का असर यह हुआ है कि सरकारी बैकों को करीब 9371 करोड़ रुपए की संपत्ति ट्रांसफर हो गए हैं। ईडी के मुताबिक, भगोड़े आरोपी विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की 9,371 करोड़ रुपये की संपत्ति सरकारी बैंकों को ट्रांसफर कर दी गई है, ताकि धोखाधड़ी के कारण हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। ईडी ने कहा कि विजय माल्या और पीएनबी बैंक धोखाधड़ी मामलों में बैंकों की 40 फीसदी राशि पीएमएलए के तहत जब्त किए गए शेयरों की बिक्री के जरिए वसूली गयी। प्रवर्तन निदेशालय ने ट्वीट कर कहा कि ईडी ने न केवल पीएमएलए के तहत विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के मामले में 18,170.02 करोड़ (बैंकों को कुल नुकसान का 80.45%) रुपये की संपत्ति जब्त की है, बल्कि 9371.17 करोड़ की कीमत वाली संपत्ति सरकारी बैंकों को ट्रांसफर भी की है।

दरअसल, मेहुल चोकसी और उसके भतीजे नीरव मोदी पर कुछ बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ कथित तौर पर 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। नीरव मोदी अभी लंदन की एक जेल में बंद है, जबकि मेहुल चोकसी डोमिनिका की जेल में बंद है। दोनों के खिलाफ केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच कर रहा है और उसे भारत प्रत्यर्पित करने की कोशिश जारी है। वहीं, विजय माल्या पर लगभग 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। इस मामले में उसकी बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस शामिल है। किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मालिक और 65 वर्षीय कारोबारी विजय माल्या अप्रैल 2019 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से प्रत्यर्पण वारंट पर ब्रिटेन में जमानत पर है। फिलहाल विजय माल्या इंग्लैंड में है, जहां से उसे वापस लाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।

नए मध्य वर्ग में 6.33 लाख भारतीय, करते हैं 20 लाख की बचत

देश में बढ़ते अरबपतियों के बीच ‘नए मध्य वर्ग’ की पहचान की गई है। हुरुन इंडिया वेल्थ रिपोर्ट-2020 के मुताबिक, इनकी संख्या 6.33 लाख है। इस वर्ग में उन लोगों को शामिल किया गया है, जिनकी सालाना औसत बचत 20 लाख रुपये है।

जमीन, मकान और गाड़ियों पर करते हैं सबसे ज्यादा खर्च
खास बात है कि ये अपनी संपत्ति का सबसे ज्यादा हिस्सा जमीन, मकान और गाड़ियों पर खर्च करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 4.12 लाख ऐसे लोग भी हैं, जिनकी कुल संपत्ति कम-से-कम 7 करोड़ रुपये है। इनमें डॉलर में कमाई करने वाले करोड़पति भी शामिल हैं।

5.64 करोड़ हैं देश में मध्य वर्ग, जिनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा
1,000 करोड़ की संपत्ति वालों की संख्या 3,000 है। ‘मध्य वर्ग’ में सालाना 2.5 लाख रुपये कमाने वाले परिवारों को रखा गया है, जिनकी संख्या 5.64 करोड़ है। इनकी कुल संपत्ति 7 करोड़ रुपये से कम है।

दो तरह से कमाई करने वाले सबसे ज्यादा
रिपोर्ट में देश के सभी आय वर्ग को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है। पहला- कम कमाई वाला वर्ग, जिसकी ज्यादातर आय नौकरी, बैंक एफडी, रियल एस्टेट और शेयर बाजार में निवेश पर निर्भर है। दूसरा- ज्यादा कमाने वाला वर्ग, जिसकी आय का मुख्य जरिया रियल एस्टेट में बड़े स्तर पर निवेश, कारोबार और घरेलू एवं विदेशी शेयर बाजार में निवेश है।

अति धनवानों में चौथे स्थान पर भारत 
हुरुन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कुल 9.12 लाख करोड़पति हैं। यह संख्या दुनिया के कुल 5.19 करोड़ करोड़पतियों के मुकाबले महज दो फीसदी है। इसके अलावा, अति धनवानों की संख्या के मामले में अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद भारत चौथे स्थान पर है। देश में कुल 4,593 अति धनवान हैं।

10 राज्यों में 70.3 फीसदी करोड़पति
राज्य                         संख्या
महाराष्ट्र                    56,000
उत्तर प्रदेश               36,000
तमिलनाडु                35,000
कर्नाटक                   33,000
गुजरात                    29,000
पश्चिम बंगाल             24,000
राजस्थान                 21,000
आंध्र प्रदेश               20,000
मध्य प्रदेश               18,000
तेलंगाना                  18,000

शहरों में मुम्बई सबसे आगे 
शहरों के लिहाज से मुंबई में सबसे ज्यादा 16,933 करोड़पति हैं, जबकि दिल्ली 16,000 करोड़पतियों के साथ दूसरे स्थान पर है। कोलकाता 10,000 के साथ तीसरे, बंगलूरू 7,582 के साथ चौथे और चेन्नई 4,685 करोड़पतियों के साथ पांचवें स्थान पर है।

हैप्पीनेस इंडेक्स : खुशियों में आई कमी
सर्वे में शामिल 72 फीसदी करोड़पतियों ने अपने काम और जीवन के प्रति प्रसन्नता जताई है। 2019 में यह आंकड़ा 85 फीसदी था। महामारी के दौरान उनकी खुशियों में 13 कमी आई है।
भारतीय करोड़पति प्राथमिक रूप से रियल एस्टेट और शेयर बाजार में निवेश करना पसंद करते हैं।
विदेश में ब्रिटेन जाना सबसे ज्यादा पसंद। स्विट्जरलैंड दूसरे और अमेरिका तीसरे स्थान पर।
निवेश और शिक्षा के लिहाज से अमेरिका सर्वाधिक पसंदीदा देश। इसके बाद भारतीय करोड़पति सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात में निवेश करना पसंद करते हैं।
लग्जरी कारों में मर्सडीज सबसे ज्यादा पसंद। बीएमडब्ल्यू दूसरी और जगुआर तीसरी पसंदीदा कार। लग्जरी स्पोर्ट्स कार ब्रांड में लैम्बॉर्गिनी पहली पसंद।

 

एथेनॉल को पेट्रोल का विकल्प बनाने की तैयारी में है सरकार

सरकार फ्लेक्स फ्यूल इंजन पर बड़ा फैसला लेने जा रही है। ऐसे इंजन को ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अनिवार्य बनाया जाएगा। फ्लेक्स फ्यूल का मतलब हुआ फ्लेक्सिबल यानी लचीला ईंधन यानी ऐसा ईंधन जो पेट्रोल की जगह ले और वो है एथनॉल। सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि इस वैकल्पिक ईंधन की कीमत 60-62 रुपये प्रति लीटर होगी, जबकि पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से भी ज्यादा है इसलिए एथनॉल के इस्तेमाल से देश के लोग प्रति लीटर 30-35 रुपये की बचत कर पाएंगे। एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।

नितिन गडकरी ने बताया कि ब्राजील, कनाडा और अमेरिका में ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्लेक्स फ्यूल ईंधन का उत्पादन कर रही हैं। इन देशों में ग्राहकों को 100 प्रतिशत पेट्रोल या 10 परसेंट बायो एथनॉल का विकल्प मुहैया करवाया जा रहा है। नितिन गडकरी ने कहा कि मौजूदा वक्त में प्रति लीटर पेट्रोल में 8.5 प्रतिशत एथनॉल मिलाया जाता है, जो कि 2014 में 1 से 1.5 प्रतिशत हुआ करता था। एथनॉल की खरीदारी भी 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 320 करोड़ लीटर पहुँच गयी है। बताया जा रहा है कि एथनॉल, पेट्रोल से कहीं बेहतर बेहतर ईंधन है और यह कम लागत वाला, प्रदूषण मुक्त और स्वेदशी है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला कदम है क्योंकि हमारे देश में मकई, चीनी और गेहूं का अतिरिक्त मात्रा  हैं, इनको खाद्यान्नों में रखने के लिए हमारे पास जगह नहीं है। यह देखते हुए कि खाद्यान्न का अतिरिक्त मात्रा समस्या पैदा कर रही है, हमारी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू बाजार की कीमतों से अधिक है, इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि खाद्यान्न और गन्ने का उपयोग करके एथनॉल का रस बना सकते हैं।

क्रिकेट की दुनिया में कमाल दिखा रही हैं स्नेह राणा

नयी दिल्ली : 5 साल बाद टीम इंडिया में वापसी करने वाली भारतीय महिला क्रिकेटर स्नेह राणा (Sneh Rana) इस समय अपने शानदार खेल की वजह से चर्चा का विषय बनी हुई हैं। स्नेह ने इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में 8वें नंबर पर उतरकर नाबाद 80 रन की पारी खेल मैच को ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई। देहरादून की 27 वर्षीय स्नेह डेब्यू टेस्ट में 50 प्लस स्कोर करने के अलावा और 4 विकेट हासिल करने वाली भारत की पहली जबकि ओवरऑल चौथी महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
किसान परिवार से आने वाली स्नेह का जब टीम इंडिया में चयन हुआ था उससे दो महीने पहले उनके पिता भगवान सिंह राणा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में स्नेह की बड़ी बहन रुचि ने कहा, ‘ पापा के गुजरने के बाद वह बहुत दुखी थी। लेकिन उसने ट्रेनिंग नहीं छोड़ी। दुख के समय में ट्रेनिंग उसके लिए बाम जैसा था।’
स्नेह 5 साल से टीम से बाहर थीं। नौ साल की उम्र में लिटिल मास्टर क्रिकेट अकादमी से शुरुआत करने वाली स्नेह सिनौला में टैलंट सर्च प्रोग्राम टूर्नामेंट के लि चुनी गई थीं। स्नेह को कोचिंग किरण और नरेंद्र साह ने दी। कोच किरण के पति नरेंद्र साह ने बताया, ‘उसे हमारे सामने खेलने में बहुत शर्म आती थी। हमारी अकैडमी कोच किरण ने बैटिंग के लिए उसे बहुत मनाया। वह प्रतिभा की धनी है।’
दूसरी ओर किरण ने स्नेह की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उसने फादर्स डे से एक दिन पहले शानदार प्रदर्शन कर अपने पिता को श्रद्धांजलि दी है। यह हमारे लिए वास्तव में गर्व करने का क्षण है। स्नेह के लिए यह पिछले कई वर्षों से कड़ी मेहनत का फल है। वह नौ साल की उम्र में मेरे पास कोचिंग के लिए आई थी।’
किरण ने शुरुआती दिनों को याद कर कहा कि कैसे वह ऑलराउंडर बनीं। बकौल किरण, ‘ हमारी अकादमी में लड़कियों को बड़े लड़कों के खिलाफ पेस बोलिंग का सामना करना पड़ता था। इससे उसके क्रिकेट स्किल में निखार आया।’
स्नेह ने मैच की पहली पारी में पहले गेंदबाजी में 4 विकेट चटकाए फिर दूसरी पारी में बल्ले से कमाल दिखाते हुए शानदार अर्धशतक जड़े। स्नेह ने इसके साथ इतिहास रच दिया। वह डेब्यू टेस्ट में 4 विकेट के साथ अर्धशतक जड़ने वाली पहली खिलाड़ी बन गई है। इससे पहले टेस्ट में ये कारनामा न तो पुरष और न ही किसी महिला बल्लेबाज ने किया था।
आठवें नंबर पर बैटिंग के लिए उतरीं स्नेह ने दूसरी पारी में 154 गेंदों पर 13 चौकों की मदद से 80 रन बनाकर नाबाद लौटीं। यह महिला क्रिकेट में फॉलोऑन खेलते हुए किसी बल्लेबाज का तीसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर है। साल 2014 में पहली बार टीम इंडिया में जगह बनाने वाली स्नेह रेलवे के लिए चयन से पहले हरियाणा और पंजाब की ओर से अंडर-19 में खेल चुकी हैं। स्नेह ने अब तक 7 वनडे और 5 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं।

जमशेद जी टाटा हैं दुनिया के सबसे बड़े परोपकारी दानदाता : हुरुन रिपोर्ट

ना बिल गेट्स और ना ही मेलिंडा गेट्स, ना तो वारेन बफेट और ना ही अमेजन वाली जोफ बेजोस सदी का सबसे बड़े दानदाता है। हम भारतीयों के लिए यह गर्व की बात है कि टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी नसरवानजी टाटा ने सदी के एडेलगिव हुरुन परोपकारी लोगों में शीर्ष स्थान हासिल किया है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके दान का वर्तमान मूल्य 102.4 बिलियन डॉलर आंका गया है, जिसकी शुरुआत 1892 में हुई थी।

शीर्ष सूची में एक मात्र भारतीय कंपनी

शीर्ष 10 की सूची में टाटा ग्रुप इकलौती भारतीय कंपनी है। शीर्ष 50 में अन्य भारतीय विप्रो के पूर्व अध्यक्ष अजीम प्रेमजी हैं, जो 12वें स्थान पर हैं। बिल गेट्स और मेलिंडा फ्रेंच गेट्स, हेनरी वेलकम, हॉवर्ड ह्यूजेस और वॉरेन बफेट शीर्ष पांच में शामिल हैं। जेफ बेजोस की पूर्व पत्नी मैकेंजी स्कॉट ने चैरिटी को सीधे 8.5 बिलियन डॉलर का दान दिया, जो एक जीवित दाता एक वर्ष में दिया गया सबसे बड़ा दान है।

परोपकारी मूल्य के आधार पर दी गई रैंकिंग

यह रैंकिंग कुल परोपकारी मूल्य पर आधारित है, जिसकी गणना मुद्रास्फीति के लिए उपहार या वितरण की राशि के साथ समायोजित संपत्ति के मूल्य के रूप में की जाती है। डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से प्राप्त किया गया था और कुछ मामलों में सीधे संस्था व फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराया गया था।

टाटा स्टील में दुनिया भर से 80, 500 लोग करते हैं काम

जमशेदजी टाटा भारत में कपड़ा व स्टील उद्योग के अगुआ रहे हैं। उन्होंने जमशेदपुर में टाटा आयरन एंड स्टील वर्क्स कंपनी (टिस्को) की स्थापना की, जिसे अब टाटा स्टील के नाम से जाना जाता है। 1907 में स्थापित, टाटा स्टील अब भारत, नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम सहित 26 देशों में काम करती है, और रिपोर्टों के अनुसार लगभग 80,500 लोग कार्यरत हैं। सेंचुरी रिपोर्ट के एडलगिव हुरुन फिलैंथ्रोपिस्ट्स ने कहा, “टाटा ग्रुप का कुल परोपकारी मूल्य टाटा संस का 66 प्रतिशत है, जिसका अनुमान 100 अरब डॉलर है, जो पूरी तरह से सूचीबद्ध संस्थाओं के मूल्य पर आधारित है।”

अजीम प्रेमजी ने फाउंडेशन को दिए हैं 2.2 बिलियन डॉलर दान

दूसरी ओर, विप्रो के प्रेमजी ने 2013 में गिविंग प्लेज पर हस्ताक्षर करके अपनी संपत्ति का कम से कम आधा हिस्सा दान देेने की घोषणा की है। उन्होंने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को 2.2 बिलियन डॉलर के दान के साथ शुरुआत की, जो भारत में शिक्षा पर केंद्रित था। उन्होंने 2020 के लिए एडेलगिव हुरुन इंडिया परोपकार सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया था।

पिछली सदी के दानदाताओं में अमेरिका शीर्ष पर

एडेलगिव हुरुन रिपोर्ट के अनुसार, पिछली शताब्दी में दुनिया के 50 सबसे उदार व्यक्ति पांच देशों से आए थे, जिनमें 39 दानताओं के साथ अमेरिका शीर्ष पर था, इसके बाद इंग्लैंड, चीन (3), भारत (2) और पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड के 5 लोग थे। उनके दान की राशि $832 बिलियन थी, जिसमें से 503 बिलियन डॉलर आज विभिन्न फाउंडेशन में हैं जबिक लगभग 329 बिलियन डॉलर पिछली शताब्दी में वितरित किए गए।

एलोन मस्क व जेफ बेजोस को सूची में नहीं मिली जगह

हुरुन रिपोर्ट के अध्यक्ष और मुख्य शोधकर्ता रूपर्ट हुगवेरफ ने कहा, यह आश्चर्य की बात है कि जेफ बेजोस और एलोन मस्क ने इस सूची में जगह नहीं बनाई है। पिछली सदी के दुनिया के सबसे बड़े परोपकारी लोगों की कहानियां आधुनिक परोपकार की कहानी बयां करती हैं। कार्नेगी और रॉकफेलर जैसे दुनिया के शुरुआती अरबपतियों की विरासत आज के बिल गेट्स और वॉरेन बफेट के माध्यम से दिखाती है कि कैसे बनाई गई संपत्ति का पुनर्वितरण किया गया है। कई परोपकारियों ने पहली के बजाय दूसरी पीढ़ी में दान किया, जैसे कि फोर्ड फाउंडेशन की कहानी, जिसे हेनरी फोर्ड के बेटे द्वारा स्थापित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष 50 व्यक्तियों ने वार्षिक अनुदान के रूप में अपने कुल संपत्ति का सामूहिक रूप से $30 बिलियन या 6 प्रतिशत का योगदान दिया। $8.5 बिलियन के दान के साथ, मैकेंज़ी स्कॉट सबसे बड़ा वार्षिक अनुदान निर्माता है, जिसके बाद वॉरेन बफेट (2.7 बिलियन डॉलर) और बिल एंड मेलिंडा गेट्स (2.5 बिलियन डॉलर) हैं।

बीएचएस ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

कोलकाता : बिड़ला हाई स्कूल ने गत 21 जून, 2021 को ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया। सामाजिक दूरी के बजाय शारीरिक दूरी की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए, कक्षा 6-11 के छात्रों ने इस उत्सव में प्रदर्शन किया। सभी प्रतिभागियों ने अपने घर से अलग-अलग आसन किए और यह वीडियो को स्कूल के साथ साझा किया। स्कूल द्वारा इन सभी वीडियो को लेकर कोलाज वीडियो तैयार किया। आठवीं-ई कक्षा के विशेष मेहता ने उद्घाटन भाषण दिया और समापन भाषण नौवीं-बी कक्षा के आदित्य बसु द्वारा दिया गया। कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग बिड़ला हाई स्कूल फेसबुक पेज पर सुबह 7:30 बजे शुरू हुई। छात्र ने सभी छात्रों के बीच यह संदेश फैलाया कि योग उनकी प्रतिरक्षा, शारीरिक क्षमता में सुधार करने और चिंता और तनाव को दूर करने में मदद करता है।

-गौतम घोष
(विभागाध्यक्ष) शारीरिक शिक्षा विभाग

 

एसोचैम बना अंतर्राष्ट्रीय एक्सबीआरएल सम्मेलन 2021 का मेजबान

कोलकाता : एसोचैम ने हाल ही में “अंतर्राष्ट्रीय एक्सबीआरएल सम्मेलन 2021 – उभरते रुझान और अवसर” पर एक वेबिनार का आयोजन किया, जिसमें एक्सबीआरएल के आवेदन, उपयोगकर्ताओं और पेशेवरों को शिक्षित करने, इसके आवेदन को बढ़ावा देने और इसे संबोधित करने के लिए उभरते क्षेत्रों पर चर्चा और विचार-विमर्श किया गया। हितधारकों की समस्याएं और प्रश्न के समाधान पर चर्चा हुई।
वक्ता इस तथ्य पर सहमत हुए कि एक्सबीआरएल व्यावसायिक सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए विश्वसनीय वैश्विक ढांचा है जो व्यापार रिपोर्टिंग में आमतौर पर आवश्यक अर्थ अर्थ की अभिव्यक्ति की अनुमति देता है। यह व्यवसाय के प्रदर्शन की जवाबदेही और पारदर्शिता में सुधार करने में भी मदद करता है और सभी हितधारकों के लिए बहुत ही किफायती है । एक्सबीआरएल के लाभों पर प्रकाश डालते हुए कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की उप महानिदेशक गीता सिंह राठौर ने कहा, ” एक्सबीआरएल विश्व स्तर पर व्यावसायिक सूचनाओं को संग्रहीत करने और प्रसारित करने के मानक तरीके के रूप में उभरा है। यह विभिन्न हितधारकों के लिए सटीकता, विश्वसनीयता, समयबद्धता और निर्णय उपयोगिता सुनिश्चित करता है। यह सूचना और डेटाबेस के विभिन्न उपयोगकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ है।
बीएसई लिमिटेड के मुख्य नियामक अधिकारी नीरज कुलश्रेष्ठ ने अंतर्राष्ट्रीय एक्सबीआरएल सम्मेलन 2021 के आयोजन के लिए एसोचैम को धन्यवाद दिया। एसोचैम के लेखा मानकों की टास्क फोर्स के अध्यक्ष और आईसीएआई के पूर्व सचिव डॉ. अशोक हल्दिया ने कहा कि भारत को एक राष्ट्रीय डेटा रिपोर्टिंग मानक की आवश्यकता है। नेक्सजेन के निदेशक सीए विनोद कश्यप ने कहा कि भारत को एक्सबीआरएल पर अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना चाहिए और एमसीए में दायर एक्सबीआरएल टैग किए गए डेटा की गुणवत्ता में बहुत आवश्यक सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाना चाहिए। इस कार्यक्रम में आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष और एक्सबीआरएल इंटरनेशनल के सदस्य सी ए अतुल कुमार के अतिरिक्त अन्य वक्ताओं ने विचार रखे।

‘रघुनाथ के होते कोई अनाथ कैसे होगा’

कोलकाता : राष्ट्रीय कवि संगम पश्चिम बंगाल के प्रांतीय पटल पर विगत रविवार को गंगा दशहरा एवं पितृ दिवस के अवसर पर एक भव्य कवि सम्मेलन का सफलतम आयोजन हुआ l इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल जी की उपस्थिति ने उपस्थित सभी कवियों एवं श्रोताओं का अभूतपूर्व उत्साह वर्धन करके इस कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिया था l इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष डॉक्टर गिरधर राय तथा संचालन अंजनी कुमार राय द्वारा की गई थी l कार्यक्रम का संयोजन डॉ अनिरुद्ध राय द्वारा तथा कार्यक्रम का शुभारंभ रीमा पांडेय द्वारा सुमधुर गंगा वंदना से हुआ ।उपस्थित कवियों में चंद्रिका प्रसाद ‘अनुरागी’, रामपुकार सिंह, बलवंत सिंह, कामायनी संजय, रीमा पांडेय, सीमा सिंह, देवेश मिश्र, शिव शंकर सिंह, संतोष कुमार तिवारी, अशोक कुमार शर्मा, अरविंद कुमार मिश्र एवं कोमल चूड़ीवाल ने अपने काव्य स्वर द्वारा कार्यक्रम की सफलता में अपना विशिष्ट योगदान दियाl मित्तल ने यह कहकर दर्शकों और श्रोताओं का दिल जीत लिया कि “रघुनाथ के और बाबा विश्वनाथ के होते हुए कोई भी व्यक्ति अनाथ कैसे हो सकता है?” प्रांतीय अध्यक्ष गिरधर राय ने अपनी लोकप्रिय घनाक्षरी द्वारा यह उद्घोष कर कि वाम को भी दिखने लगे हैं अब राम जी” श्रोताओं को आनंद विभोर कर दिया । कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अशोक शर्मा ने किया । कुल मिलाकर यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कवि संगम के मूल “मंत्र राष्ट्र जागरण धर्म हमारा” का उद्घोष था।