Wednesday, April 8, 2026
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ऑल इंडिया मार्केट क्वेस्ट बिजनेस प्लान प्रतियोगिता में एचबीएस प्रथम रनर -अप

कोलकाता : हेरिटेज बिजनेस स्कूल, कोलकाता पश्चिम बंगाल का एकमात्र बी-स्कूल बन गया, जिसने ऑल इंडिया मार्केट क्वेस्ट बिजनेस प्लान प्रतियोगिता 2021 में प्रथम रनर-अप का स्थान हासिल किया। यह कार्यक्रम बीएनपीडी इको लैब्स द्वारा 4 जून 2021 को एक रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट प्रबन्धन कम्पनी स्टार्ट टू स्टार्टअप (Start2Startup) के सहयोग से आयोजित किया गया था और परिणाम हाल ही में घोषित किए गए थे।
हेरिटेज बिजनेस स्कूल की छात्र टीम केनेसियन के सदस्यों स्वेता झा और सुभदीप दत्ता शामिल हैं, जिनकी व्यवसाय योजना डॉ. क्लिक- (सभी चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म) को प्रतियोगिता में उपविजेता स्थान के लिए चुना गया था। पहला पुरस्कार दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिनिधित्व वाली टीम सिपर ने लिया और दूसरा उपविजेता टीम मस्किटियर्स ने संयुक्त रूप से श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स और टीम स्कूबर्स का प्रतिनिधित्व किया, जिसका प्रतिनिधित्व आईआईटी दिल्ली ने किया।
हेरिटेज बिजनेस स्कूल द्वारा प्रस्तुत परियोजना का विवरण:- डॉ. क्लिक एक दवा मंच के रूप में एक सॉफ्टवेयर है जिसका उद्देश्य नुस्खे और परीक्षण रिपोर्ट का वास्तविक समय भविष्य कहनेवाला विश्लेषण प्रदान करना है और ऑनलाइन डॉक्टर परामर्श से लेकर अंतिम मील दवा वितरण तक सभी प्रकार की फार्मेसी जरूरतों के लिए एक एकीकृत मंच प्रदान करता है।

लीवा मिस दिवा 2021 हुआ डिजिटल, भाग ले सकेंगी ट्रांसवुमन

कोलकाता :   मिस दिवा ने टाइटल स्पॉन्सर के रूप में एक फैशन इनग्रेडिएंट ब्रांड लीवा के सहयोग से अपने 9वें संस्करण के आरम्भ होने की घोषणा की है। इस बार यह प्रतियोगिता डिजिटल हो रही है, घर बैठे ही ऑडिशन दिया जा सकेगा। एमएक्स टकाटक द्वारा सह-संचालित लीवा मिस दिवा 2021 एक डाइनामिक नए फॉर्मेट में अगली ब्यूटी क्वीन को खोजने के लिए उत्साह और जुनून के समान स्तरों को साझा करेगी, जो इस बार डिजिटल मीडिया का लाभ उठाएगी। भारत ने एक से अधिक बार मिस यूनिवर्स का प्रतिष्ठित खिताब जीता है। हाल ही में एडलाइन कैस्टेलिनो की जीत के साथ, जिन्होंने लीवा मिस दिवा 2020 का प्रतिष्ठित खिताब जीता था, भारत को मिस यूनिवर्स 2020 के ग्लोबल मैप पर तीसरे रनर अप के रूप में वापस जोड़ा है।

वर्ष 2013 में शुरू हुई मिस दिवा की आज अपनी खास पहचान है। प्रतिष्ठित खिताब युवा प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान पाने के लिए उन्हें तैयार करने, प्रोत्साहित करने और सशक्त बनाने के लिए अभियान जारी रखेगा। गत 11 जून को इसकी घोषणा की गयी। इच्छुक सुंदरियां अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए भाग ले सकती हैं। इन फाइनलिस्टों की चयन प्रक्रिया में एक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शामिल होगी, जिसमें भारत के अग्रणी शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म – एमएक्स टकाटक पर विशेष ऑडिशन कार्य प्रस्तुतियां आमंत्रित की जाती हैं। इसके बाद शॉर्टलिस्ट की गई 20 फाइनलिस्ट अक्टूबर 2021 के महीने में ग्रैंड फिनाले में प्रतिष्ठित ताज के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए मुंबई में कठोर प्रशिक्षण और सौंदर्य से गुजरेंगी। समावेशी होने की बात करते हुए, यह सौंदर्य प्रतियोगिता बिरादरी के इतिहास में पहली बार हम ट्रांसवुमन के सौंदर्य को फिर से परिभाषित करने के लिए भाग लेने को प्रोत्साहित कर और कह रहे हैं। और इस बार, सभी खूबसूरत महिलाओं के लिए ऊंचाई मानदंड को 5’4 “कर दिया गया है। लीवा मिस दिवा 2021 की विजेता सम्मानित वैश्विक मंच मिस यूनिवर्स 2021 में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी और लीवा मिस दिवा सुप्रानेशनल में देश का प्रतिनिधित्व करेगी। यह भारत को फिर से गौरवान्वित करने का समय है। भारत में कंटेंट की खपत को बढ़ावा देने वाले आकर्षक शॉर्ट वीडियो बनाने के लिए डिजिटल उत्साही लोगों की अविश्वसनीय रूप से प्रतिभाशाली और अथक पीढ़ी को सशक्त बनाने की अपनी दृष्टि के साथ एमएक्स टकाटक इन प्रतिभागियों के लिए पीजेंट के ऑडिशन के लिए प्रवेश द्वार यानी एंट्री गेटवे है। ग्रैंड फिनाले भारत के लोकप्रिय युवा चैनलों में से एक एमटीवी (MTV) पर प्रसारित होगा।

किसी भी आवेदक के लिए भागीदारी मानदंड में शामिल हैं:
⦁ कद: 5’4″ और ऊपर
⦁ उम्र: 18 -27 वर्ष के बीच (31 दिसंबर 2021 तक 27 होना चाहिए)
⦁ वैवाहिक स्थितिः सिंगल, अविवाहित और जिसने एंगेजमेंट नहीं किया हो
⦁ भारतीय पासपोर्ट धारी
⦁ ओसीआई कार्डधारक और एनआरआई रनर अप के लिए भाग ले सकती हैं
⦁ ट्रांसवुमन को भाग लेने की अनुमति रहेगी

 

 

विद्या मंदिर सोसायटी द्वारा टीकाकरण अभियान

बीएचएस और सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल भी हुए शामिल

 कोलकाता : विद्या मंदिर सोसाइटी ने अपनी सभी इकाइयों के लिए हाल ही में टीकाकरण अभियान का आयोजन किया। इसमें बिड़ला हाई स्कूल, बिड़ला हाई स्कूल-मुकुंदपुर, सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल, जेडीबीआई और शिक्षायतन फाउंडेशन के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं। यह अभियान बिड़ला हाई स्कूल के परिसर में आयोजित किया गया था। यह अभियान टेक्नो इंडिया दामा के सहयोग से चलाया गया। यह टीकाकरण अभियान कर्मचारियों, शिक्षकों, उनके परिवारों और आश्रितों के लिए था। Covisheild के 300 से अधिक जैब्स प्रशासित किए गए। सभी कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कार्यक्रम की सुचारू शुरुआत हुई। विद्या मंदिर सोसाइटी का उद्देश्य अपने फ्लैगशिप के तहत अधिक से अधिक लोगों को टीकाकरण करना था, जिससे न केवल अपने कर्मचारियों बल्कि उनके परिवार के सदस्यों और उनके आश्रितों तक भी पहुंच सके।

कहीं आपका बच्चा आत्ममुग्धता का शिकार तो नहीं

कई अध्ययनों ने साबित किया है कि जो माता-पिता अपने बच्चों को ‘अत्यधिक अहम’ मानते हैं, यानी ओवर वैल्यू करते हैं, उन बच्चों में आत्ममुग्धता यानी नार्सिस्टिक बिहेवियर देखने को मिलता है, जो डिसऑर्डर में बदल सकता है।

नार्सिसिस्टिक डिसऑर्डर क्या है?
व्यक्ति जब ख़ुद के प्रति बहुत ज़्यादा प्रेम करे, ख़ुद की तारीफ़, ख़ुद को ही महत्व देे और ख़ुद की आवश्यकताओं, इच्छाओं और ख़ुद से ही मतलब रखे, तो इसे नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर (एनपीडी) कहा जाता है।

क्या नतीजे हो सकते हैं?
}अगर बच्चे में आत्ममुग्धता आ जाए, तो वो किसी से नज़दीकी और भरोसे के रिश्ते नहीं बना पाता। समानुभूति यानी दूसरों के भावों को ना समझने की उसकी प्रवृत्ति उसे किसी के करीब नहीं आने देती।
}ऐसे बच्चे किसी और की राय से कभी इत्तेफ़ाक नहीं रख पाते। उन्हें उनकी राय ही सबसे उचित और सही लगती है।
}आत्ममुग्ध बच्चे ख़ुद को बहुत स्पेशल मानते हैं। उनकी प्रतिभाएं विशेष हैं और उनके जैसा कोई और हो ही नहीं सकता -यह विचार उनमें गहरे जमा रहता है।
}ऐसे बच्चे सामाजिक नहीं हो पाते क्योंकि वे किसी और को कुछ नहीं समझते।

कहां है आत्ममुग्ध व्यवहार की जड़ ?
जो चाहिए मिलेगा ही, वे सबसे बेहतर हैं, कोई और मुझे कुछ समझा नहीं सकता, हारना तो हमें आता ही नहीं- ऐसी भावनाएं बच्चों में डालने वाले अभिभावकों के व्यवहार में होती हैं आत्ममुग्धता की जड़ें।

ज़रूरत से ज़्यादा लाड़
बच्चे की ग़लती न देखना, उसकी ग़लतियों पर पर्दा डालना, मुंह मांगी चीज़ तुरंत ला देना, ग़लत करने पर भी हमेशा साथ देना ये कुछ सामान्य कारण हैं जो बच्चों को इस समस्या का शिकार बनाते हैं। बच्चों को लगने लगता है कि वे कुछ भी करेंगे तो अभिभावक उनका साथ तो देंगे ही। इसलिए वे कुछ भी ग़लत करने में हिचकिचाते नहीं हैं।
जीत हर क़ीमत पर
इस तरह के बच्चे हमेशा अव्वल आना चाहते हैं, फिर चाहे बेईमानी से ही क्यों न आएं। हारना या पीछे रहना उन्हें मंज़ूर नहीं होता। बचपन में जब बच्चे कोई खेल खेलते हैं, तो अभिभावक उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए हमेशा जिता देते हैं और फिर यही उनकी मांग बन जाती है। असल ज़िंदगी में या किसी खेल में जब ये बच्चे पिछड़ने लगते हैं तो पीछे रहने के कारण तनाव और अवसाद से घिरने लगते हैं।
ओवर प्रोटेक्टिव
कई माता-पिता बच्चों को लेकर ओवर केयरिंग व ओवर प्रोटेक्टिव होते हैं। किसी अन्य व्यक्ति का उनके बच्चे को समझाना या डांटना उन्हें रास नहीं आता। इसलिए कई बार देखा जाता है कि बच्चों के कारण माता-पिता आसपड़ोस के लोगों से झगड़ने तक पहुंच जाते हैं। फिर बच्चा किसी भी बड़े से मार्गदर्शन लेना पसंद ही नहीं करता।
बढ़ती अपेक्षाएं
जब माता-पिता अपने बच्चे से बहुत ज़्यादा अपेक्षाएं रखते हैं तो बच्चे को ख़ुद को बहुत होशियार या कहें कि समझदार समझने लगते हैं और वे ख़ुद के सामने बाक़ी लोगों को कुछ नहीं समझते। इस कारण उनके दोस्त नहीं बनते और दोस्त बनते भी हैं तो जल्द ही दूर हो जाते हैं।

क्या है निदान?
जितनी कम उम्र में इस व्यवहार की पहचान कर ली जाए, निदान करना उतना ही आसान हो जाता है। बड़े बच्चों के साथ व्यक्तित्व की दूसरी जटिलताएं भी सिर उठाने लगती हैं। कॉग्निटिव बिहेवियर थैरेपी निदान का रास्ता है।

बच्चे की सीमाओं को पहले बड़ों को स्वीकार करना होगा – बच्चे की सीमाओं को जानें, हरफनमौला बनाने या परफेक्ट बनाने की जबरन कोशिश ना करें।
जबरन प्रशंसा ना करें – तुमने बहुत शानदार काम किया’ कहने के बजाय ‘यह काम अच्छा रहा’ जैसी तारीफ़ करें ताकि बच्चा हक़ीक़त से जुड़ा रहे।

वर्तमान में रहें – ‘तुम हमेशा अच्छा काम करते हो’ कहने की बजाय जिस काम की बात हो रही है, बस उसका उल्लेख करें।
 जैसे को तैसा – उसे सिखाएं कि वो दूसरों से वैसा व्यवहार करे, जैसे वो चाहता है कि लोग उसके साथ करें। इससे उसमें भावनाओं की समझ विकसित होगी।
तुरंत कुछ नहीं – बच्चे की हर मांग पर तुरंत खड़े हो जाने की बजाय उन्हें एक टाइम फ्रेम दें कि इतने समय में यह काम पूरा होगा और उन्हें सब्र रखना होगा।
 हारना कोई बुरी बात नहीं – खेल हो, पढ़ाई के नतीजे या कोई भी काम, कोशिश करके जीत जाना या उच्चांक पाना अच्छी बात है लेकिन किसी और की मेहनत या उसकी जीत से ईर्ष्या करना, उसे नकारना सही नहीं है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

रतन टाटा को नए स्टार्टअप्स में निवेश की टिप्स देते हैं शांतनु नायडू

28 साल के शांतनु नायडू ने छोटी उम्र में ही बिजनेस इंडस्ट्री में एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। शांतनु नायडू ने अपने आइडियाज से देश के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा को भी अपना फैन बना लिया है। शांतनु नायडू की एक कंपनी है, जिसका नाम है मोटोपॉज और ये कंपनी कुत्तों के कॉलर का निर्माण करती है।
ये कॉलर अंधेरे में चमकते हैं ताकि कोई वाहन उन्हें ठोककर मार ना दे। इस कंपनी का आरोप चार देशों में 20 से ज्यादा शहरों में फैला हुआ है। ऐसी खबरें हैं कि रतन टाटा अपना पर्सनल निवेश जिन स्टार्टअप्स में करते हैं, उनके पीछे 28 साल के शांतनु नायडू का दिमाग होता है। आइए शांतनु नायडू के बारे में और जानते हैं…
कुत्तों के लिए बनाया चमकने वाला कॉलर
शांतनु नायडू का कहना है कि उन्होंने कई बार गाड़ियों के नीचे आकर कुत्तों के मरते देखा है। शांतनु का कहना है कि अंधेरे में गाड़ियां कुत्तों को नहीं देख पाती, जिस वजह से ये दुर्घटनाएं होती हैं। इसके बाद शांतनु को रिफलेक्टर कॉलर बनाने का आइडिया आया और मोटोपॉज कॉलर बना दी। इस कॉलर की मदद से ड्राइवर बिना स्ट्रीट लाइट के भी कुत्तों को दूर से देख सकता है।
टाटा को पसंद आया शांतनु का अविष्कार
बता दें कि रतन टाटा को भी कुत्तों से काफी लगाव है और टाटा समूह के न्यूज लेटर में इसके बारे में लिखा गया। बाद में रतन टाटा पर इसकी नजर पड़ी। शांतनु ने अपने पिता के कहने पर रतन टाटा को पत्र लिखा और जवाब में उन्हें रतन टाटा से मिलने का न्योता मिला। शांतनु से पहले उनकी चार पीढ़िया रतन टाटा के साथ काम कर चुकी थीं लेकिन किसी को भी उनसे मिलने का मौका नहीं मिला। रतन टाटा ने स्ट्रीट डॉग्स प्रोजेक्ट की मदद के लिए शांतनु से पूछा लेकिन उन्होंने मना कर दिया। हालांकि रतन टाटा ने जोर देकर निवेश किया और उसके बाद मोटोपॉज की पहुंच 11 अलग-अलग शहरों तक हो गई। अब शांतनु लगातार रतन टाटा से मिलते रहते हैं।
एमबीए के बाद रतन टाटा के साथ काम करने का मौका मिला
मोटोपॉज की शुरुआत करने के बाद शांतनु ने कॉर्नेल में दाखिला लिया। यहां से शांतनु ने एमबीए किया। एमबीए के दौरान उद्यमिता, निवेश, नए स्टार्टअप के साथ-साथ क्रेडिबल स्टार्टअप्स की खोज, इंटरेस्टिंग बिजनेस आइडिया और मुख्य इंडस्ट्री ट्रेंड्स पर पूरा ध्यान लगाकर पढ़ाई की। कोर्स खत्म करने के बाद उन्हें रतन टाटा के साथ काम करने का मौका मिला। शांतनु का कहना है कि ऐसा मौका जिंदगी में पहली बार मिलता है और रतन टाटा के साथ रहकर हर मिनट कुछ ना कुछ सीखने को मिलता है।
स्टार्टअप्स में रतन टाटा की रुचि ज्यादा
81 साल के रतन टाटा देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में खासा रुचि रखते हैं। जून 2016 में रतन टाटा की प्राइवेट निवेश कंपनी आरएनटी असोसिएट्स और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने स्टार्टअप को मदद करने के लिए हाथ मिलाया था। इसके अलावा उद्यमियों को रतन टाटा के साथ काम करने का मौका भी मिलता है। यही वजह है कि जिन स्टार्टअप्स को रतन टाटा का सपोर्ट मिलता है उनकी वैल्यू तुरंत बढ़ जाती है।

कोरोना : बंगाल में बढ़ी 1 जुलाई तक सख्ती

दफ्तरों में नहीं आएंगे 25 प्रतिशत से अधिक कर्मी
कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने कोरोना से जुड़ी पाबंदियों को 1 जुलाई तक बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई तक रात 9 बजे से सुबह 5 बजे के बीच लोगों की आवाजाही पर रोक रहेगी। हालांकि, जरूरी सेवाओं को छूट दी गयी है। सभी सरकारी दफ्तरों में 25 प्रतिशत कर्मचारी ही आएंगे। निजी और कॉर्पोरेट ऑफिस सुबह 10 से शाम 4 बजे तक खुले रहेंगे। इनमें भी भी 25 प्रतिशत से ज्यादा स्टाफ नहीं बुलाया जा सकेगा। प्राइवेट कंपनियां अपने स्टाफ के लिए ई-पास के जरिए ट्रांसपोर्ट सर्विस का इंतजाम कर सकती हैं। इसके अलावा शॉपिंग मॉल और कॉम्प्लेक्स में दुकानें सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक खोली जा सकेंगी। इनमें 50 प्रतिशत कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे। खेलों का आयोजन बिना दर्शकों के कराया जा सकेगा। सभी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। निजी वाहनों की आवाजाही इमरजेंसी को छोड़कर बंद रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बार वाले रेस्टोरेंट दोपहर 12 से रात 8 बजे के बीच खुल सकते हैं। इनमें क्षमता से आधे लोग ही मौजूद रहे सकेंगे।

3 महीने में बनाए जाएंगे देश में 50 मॉड्यूलर अस्पताल

 इनमें आईसीयू और ऑक्सीजन का इंतजाम होगा
नयी दिल्ली : कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए केंद्र ने हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को तुरंत मजबूती देना वाला प्लान बनाया है। केंद्र की योजना है कि अगले 3 महीने में देशभर में 50 मॉड्यूलर हॉस्पिटल बनाए जाएं, जिनमें आईसीयू बेड्स के साथ ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था हो। दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की सप्लाई की सबसे बड़ी समस्या थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मॉड्यूलर हॉस्पिटल मौजूदा अस्पतालों के करीब ही बनाए जाएंगे। इसके जरिए हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जाएगा। खास बात है कि 3 करोड़ की लागत से बनने वाले इस तरह के अस्पताल 3 हफ्तों के कम समय में तैयार किए जा सकेंगे। इनमें ICU, ऑक्सीजन सपोर्ट और दूसरे लाइफ सपोर्ट सिस्टम की सुविधा होगी। इन मॉड्यूलर हॉस्पिटलों की उम्र कम से कम 25 साल तक होती है। आपदा के समय इन अस्पतालों को एक हफ्ते में शिफ्ट किया जा सकता है।

मॉड्यूलर अस्पताल  की खासियत –

100 बेड वाला अस्पताल होगा।
आईसीयू के लिए समर्पित जोन होगा।
ऐसे सरकारी अस्पताल जहां इलेक्ट्रिसिटी, ऑक्सीजन और पानी की व्यवस्था होगी, वहां इन्हें बनाया जाएगा।
एक अस्पताल में 3 करोड़ का खर्च होगा और 3 हफ्तों में ये काम करने लगेंगे।
छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों पर फोकस
रिपोर्ट के मुताबिक, ये प्रोजेक्ट प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने शुरू किया है। अभी इसे सरकारी अस्पतालों में ही लागू किया जाएगा। ये अस्पताल खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी को पूरा करेंगे।
प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार दफ्तर की अदिति लेले ने बताया कि हम राज्यों से लगातार संपर्क में हैं, जहां ऐसे अस्पतालों की जरूरत है। खासतौर पर वो राज्य जहां कोविड के केस लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें हमने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी के तहत अन्य पार्टनर्स से भी संपर्क किया है, जो इस प्रोजेक्ट में हमारी मदद कर सकते हैं।

इन शहरों में अस्पताल बनेंगे
इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, महाराष्ट्र के पुणे, जालना, पंजाब के मोहाली में ये अस्पताल बनाए जाएंगे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के रायपुर में ऐसा 20 बिस्तरों वाला अस्पताल बनेगा। कर्नाटक के बेंगलुरु में पहले चरण में 20, 50 और 100 बिस्तर वाले ऐसे बेड बनाए जाएंगे।

महिला सरपंच की पहल से भरे 7 नाड़ी तालाब, मानसून में विकसित होंगे चारागाह

ओसियां : निकटवर्ती पंचायत जाटीपुरा मुकाम सिमरथ नगर पंचायत की युवा एवं पढ़ी लिखी प्रथम महिला सरपंच सुमन चौधरी की सोच ने गांव के नाडी, तालाब, गोचर, ओरण एवं चारागाह की तस्वीर बदल दी। सरपंच के प्रस्ताव पर उनके ससुर व ओसियां के पूर्व सरपंच चौधरी देवीलाल ने इस काम में समस्त महाजन ट्रस्ट से सम्पर्क कर जेसीबी मशीन उपलब्ध करवाने की अपील की। ट्रस्ट द्वारा जेसीबी मशीन निःशुल्क उपलब्ध करवाने पर चौधरी ने डीजल व अन्य खर्चे खुद वहन करके गोचर व ओरण से अंग्रेजी बबूल की सफाई करवाई। इसी प्रकार से पंचायत क्षेत्र की सात नाडियों से कंटीली झाड़ियां कटा कर साफ सफाई करवाई। तीन महीने तक 750 घण्टे काम कराया गया। रोजाना 5 हजार रुपये का खर्च चौधरी ने खुद वहन किया। जाटीपुरा सहित आसपास की ग्राम पंचायतों के लोगों ने भी स्वागत किया।
उन्होंने चौधरियों की नाडी, रेवाणी नाडी, तिण्डिया नाडा, रातड़ा नाडा, सोनेलाई नाडी, दादोलाई नाडी, कानानाडा तथा बांदेलाव तालाब के आगोर व गोचर की 750 बीघा जमीन को अंग्रेजी बबूल व अन्य कंटीली झाड़ियों से मुक्त कर सभी नाडियों को गहरा करवा दिया है। इन सभी परम्परागत जल स्रोत में पानी की आवक के रास्ते खोलने एवं अतिरिक्त मिट्टी निकालने का कार्य लगभग पूर्ण होने के स्तर पर है। देवीलाल चौधरी ने बताया कि वर्षों से उनका यह सपना था कि उनके आसपास के क्षेत्र में अंग्रेजी बबूल हट जाए तथा उसकी जगह पर पशुओं के लिए चारागाह एवं हरे-भरे छायादार पौधे लगे। सातों नाड़ी में अब वर्षभर पानी रहेगा, जिससे पशुओं के साथ साथ क्षेत्र के समस्त पशु-पक्षी, वन्य जीवों को वर्ष पर्यंत पीने का पानी मिलेगा।

जल स्रोतों की दुर्दशा को देखकर उठाया बीड़ा
सरपंच सुमन चौधरी ने बताया कि ग्राम पंचायत क्षेत्र के परम्परागत जल स्रोतों की दुर्दशा को देखकर इनकी सुध लेने की बात मैंने मेरे ससुर पूर्व सरपंच चौधरी देवीलाल के सामने रखी तो उन्होंने सरकारी पैसे का इंतज़ार किए बिना अपनी निजी आय से कार्य करवाने की हां कर दी। पूर्व सरपंच चौधरी देवीलाल ने बताया कि इस कार्य के लिए बजट बहुत ज्यादा होने के कारण यह कार्य काफी समय तक सपना ही बना रहा लेकिन समस्त महाजन संस्था के आगे आने से उनके द्वारा बिना किराए जेसीबी मशीन उपलब्ध कराने से यह काम आसान हो गया। डीजल का खर्चा मैंने स्वयं वहन किया, इस वजह से यह कार्य संभव हो सका। आने वाली बरसात के सीजन में मेरी तरफ से सभी ग्रामीणों को मुफ्त में पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे तथा उसके बदले में उन पौधों को पानी पिलाने की जिम्मेदारी ग्रामवासियों को दी जाएगी। सेवण घास के बीज लगाकर चारागाह का विकास भी किया जाएगा।

(साभार – दैनिक भास्कर)

लॉकडाउन में 6 गुना बढ़े पुरुष प्रताड़ना के मामले

पत्नियों पर मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के आरोप
पुणे : महाराष्ट्र में कोरोना के चलते बीते डेढ़ साल से ज्यादातर लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। इस दौरान सामने आया है कि घर पर 24 घंटे साथ रहने के दौरान पति-पत्नी के बीच झगड़े बढ़ रहे हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पति ज्यादा प्रताड़ित हुए हैं। पुणे पुलिस की ट्रस्ट सेल (भरोसा सेल) ने यह दावा किया है कि लॉकडाउन के दौरान घरों में रहने वाले पति लॉकडाउन से पहले की तुलना में पत्नियों से ज्यादा प्रताड़ित हुए हैं।
लॉकडाउन में पति प्रताड़ना के केस 6 गुना बढ़े
भरोसा सेल की प्रमुख सुजाता शानमे ने बताया कि लॉकडाउन से पहले के एक साल के दौरान 1283 लोगों ने पुणे पुलिस की ट्रस्ट सेल में पारिवारिक झगड़े की शिकायत दर्ज कराई थी। इनमें पत्नियों की संख्या 791 थी, जबकि पति सिर्फ 252 थे लेकिन लॉकडाउन के दौरान, यानी बीते 15 महीने में यह आंकड़ा बढ़कर 3,075 तक पहुंच गया है। इसमें से पतियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने वाली महिलाओं की संख्या 1540 है, जबकि पुरुषों की संख्या 1535 है। यानी शिकायत करने वाले पुरुषों की संख्या लॉकडाउन से पहले के एक साल की तुलना में 6 गुना बढ़ गई है।
सुजाता के मुताबिक पिछले डेढ़ साल के दौरान घरेलू कलह के तीन हजार से ज्यादा केस दर्ज हुए हैं। इनमें ज्यादातर केस मारपीट, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के हैं। कुछ शिकायतों में यह भी दावा किया गया है कि उनकी पत्नियां झगड़ा कर उनके बच्चों के साथ मायके चली गईं हैं और अब वे लौट नहीं रही हैं।
घर में रहने के कारण लोगों में बढ़ रहा मानसिक तनाव
सुजाता ने बताया कि 24 घंटे बंद कमरे में रहने के चलते लोगों में मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। पति-पत्नी, छोटी-छोटी बातों पर झगड़ रहे हैं। हम ऐसे लोगों को अपने यहां बुलाकर या फिर ऑनलाइन माध्यम से उनकी काउंसिलिंग कर समझाने की कोशिश करते हैं।
पुणे में 2 साल पहले बना भरोसा सेल
पुणे पुलिस के भरोसा सेल का गठन 9 जनवरी 2019 को हुआ था। इसका मकसद बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की हरसंभव मदद करना है। सेल से जुड़े पुलिसकर्मी घरेलू हिंसा, कलह से जुड़े मामलों में महिलाओं या पुरुषों की काउंसिलिंग भी करते हैं।

पुलित्जर अवॉर्ड्स: जॉर्ज फ्लॉयड को न्याय दिलाने वाला वीडियो पुरस्कृत

पुलिस के हाथों हत्या का वीडियो बनाने वाली डेरनेला फ्रेजियर को विशेष पुरस्कार 

न्यूयॉर्क : इस साल के पुलित्जर अवॉर्ड्स का ऐलान कर दिया गया है। इस बार ज्यूरी ने एक विशेष पुरस्कार भी देने की घोषणा की है और यह नाम अब मशहूर हो चुका है। अमेरिका के मिनेपोलिस में पिछले साल 25 मई को अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड को एक पुलिस अफसर ने गला घोंटकर मार डाला था। पुलिस अफसर की इस वहशियाना हरकत को 17 साल की अश्वेत लड़की डेरनेला फ्रेजियर ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया था। बाद में यह वायरल हुआ और अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया गया। अब फ्रेजियर को उनकी इस बहादुरी के लिए स्पेशल पुलित्जर अवॉर्ड देने का ऐलान किया गया है। पुलित्जर अवॉर्ड्स आमतौर पर जर्नलिज्म के लिए दिए जाते हैं।

फ्रेजियर ने साहस दिखाया
जॉर्ज फ्लायड पर मामूली धोखाधड़ी का आरोप था। 25 मई 2020 को पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची। वो घर पर नहीं मिले। लौटते वक्त एक कार के किनारे दिखे तो पुलिस ने उन्हें घेरकर गिरा दिया। डेरेक चौविन नाम के पुलिस ने जॉर्ज की गर्दन पर अपना घुटना रख दिया और उन्हें दबाने लगा। यह सिलसिला 8 मिनट चला। आखिरकार जॉर्ज की मौत हो गई। कुछ दूरी पर मौजूद फ्रेजियर ने पुलिस की इस हरकत का वीडियो बनाया। ये कुछ ही घंटे में वायरल हो गया। चौविन का मामला जब अदालत पहुंचा तो यही वीडियो पब्लिक प्रॉसीक्यूटर ने सबूत के तौर पर पेश किया। फोरेंसिक जांच में साबित हो गया कि वीडियो असली और उसी दिन का है, जब जॉर्ज की हत्या हुई। इसके बाद अमेरिका में काफी हिंसा हुई। दुनियाभर में ब्लैक लाइव्स मैटर के बैनर तले आंदोलन चला।
नस्लभेद का जिक्र
पुलित्जर बोर्ड ने कहा- फ्रेजियर ने जॉर्ज की हत्या का वीडियो बनाकर साहस की मिसाल पेश की है। हम ये जान पाए हैं कि पुलिस किस हद तक वहशियाना तरीके अपनाती है। फ्रेजियर की इस कोशिश के चलते ही दुनिया का ध्यान इस मुद्दे पर गया। वैसे, इस बार अवॉर्ड्स पर महामारी का मुद्दा ही छाया रहा। पहले यह पुरस्कार 19 अप्रैल को दिए जाने थे। बाद में इन्हें री-शेड्यूल करके 11 जून किया गया। ये पुरस्कार 1917 से दिए जा रहे हैं।

महत्वपूर्ण पुरस्कार किसे मिले
पब्लिक सर्विस : द न्यूयॉर्क टाइम्स
ब्रेकिंग न्यूज रिर्पोटिंग : स्टार ट्रिब्यून
इन्वेस्टिगेटिव रिर्पोटिंग : बोस्टन ग्लोब के पांच पत्रकारों को
एक्सप्लेनरी रिर्पोटिंग : द अटलांटिक के एड यंग और रॉयटर्स के पांच जर्नलिस्टस को
लोकल रिर्पोटिंग : टाम्पा बे टाइम्स के दो पत्रकारों को