मधुबनी लोककला बिहार के मधुबनी स्थान से सम्बधित है। मधुबन का अर्थ है ‘शहद का वन’ और यह स्थान राधा कृष्ण की मधुर लीलाओं के लिए मशहूर है। मधुबनी की लोक कला में भी कृष्ण की लीलाओं को चित्रित किया गया है। यह कला आम और केलों के झुरमुट में कच्ची झोपड़ियों से घिरे हरे भरे तालाब वाले इस ग्राम में सदियों पुरानी है और मधुबन के आसपास पूरे मिथिला इलाके में फैली हुई है। विद्यापति की मैथिली कविताओं के रचनास्थल इस इलाके में आज मुज़फ्फपुर, मधुबनी, दरभंगा और सहरसा जिले आते हैं।
मधुबनी की कलाकृतियों तैयार करने के लिये हाथ से बने कागज को गोबर से लीप कर उसके ऊपर वनस्पति रंगों से पौराणिक गाथाओं को चित्रों के रूप में उतारा जाता है। कलाकार अपने चित्रों के लिये रंग स्वयं तैयार करते हैं और बांस की तीलियों में रूई लपेट कर अनेक आकारों की तूलिकाओं को भी खुद तैयार करते हैं।
इन कलाकृतियों में गुलाबी, पीला, नीला, सिदूरा (लाल) और सुगापाखी (हरा) रंगों का इस्तेमाल होता है। काला रंग ज्वार को जला कर प्राप्त किया जाता है या फिर दिये की कालिख को गोबर के साथ मिला कर तैयार किया जाता है, पीला रंग हल्दी और चूने को बरगद की पत्तियों के दूध में मिला कर तैयार किया जाता है। पलाश या टेसू के फूल से नारंगी, कुसुंभ के फूलों से लाल और बेल की पत्तियों से हरा रंग बनाया जाता है। रंगों को स्थायी और चमकदार बनाने के लिये उन्हें बकरी के दूध में घोला जाता है। आधुनिक ब्रश के बजाय, चित्र बनाने के लिए पतली टहनी, माचिस, अंगुलियों और परंपरागत वस्तुओं का उपयोग उपयोग किया जाता है।
इस चित्रकला की 5 शैलियां हैं- भरनी, कचनी, तांत्रिक, गोदना और कोहबर। हालांकि मुख्य रूप से मधुबनी पेंटिंग दो तरह की होतीं हैं- भित्ति चित्र और अरिपन। भित्ति चित्र विशेष रूप घरों में तीन स्थानों पर मिट्टी से बनी दीवारों पर की जाती है जिसमें कुलदेवता, लोकदेवता, नए विवाहित जोड़े (कोहबर) के कमरे और ड्राइंग रूम में की जाती है। अरिपन अर्थात अल्पना या मांडना को चित्रित करने के लिए आंगन या फर्श पर लाइन खींचकर सुंदर रंगोली जैसी बनाई जाती है। अरिपन कुछ पूजा-समारोहों जैसे पूजा, वृत, और संस्कार आदि अवसरों पर की जाती है।
इस चित्रकला में पौराणिक घटनाओं के वर्णन के साथ ही ज्यामितिक आकार और डिज़ाइन भी इस चित्रकारी देखने को मिलती है। चित्र के खाली स्थानों को अधिकतर समय फूल-पत्तों और बेलबुटों से भर दिया जाता है। इन चित्रों में कमल के फूल, बांस, शंख, चिड़ियां, सांप आदि कलाकृतियां भी होती है।
इस चित्रकला चित्रण का फोकस खासतौर पर रामायण, महाभारत और पौरणिक ग्रंथों की कथाओं के साथ ही हिन्दू उत्सव, 16 संस्कार, राज दरबार और विवाह जैसे सामाजिक कार्यक्रम के इर्द-गिर्द ही रहता है।
मथुबनी चित्रकला रामायण काल में भी होती थी, क्योंकि वाल्मीकि रामायण अनुसार सीता के पिता राजा जनक ने अपने चित्रकारों से अपनी बेटी की शादी के लिए मधुबनी चित्र बनाने के लिए कहा था। इन चित्रों से संपूर्ण महल और नगर को सजाया गया था।
इस पारंपरिक मधुबनी कला को पहले बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं ही किया करती थीं। लेकिन आज, यह शैली न केवल भारत के लोगों के बीच लोकप्रिय है, बल्कि अन्य देशों के लोगों के बीच भी लोकप्रिय हो चली हैं। अब इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग है।
अब दीवार, आंगन, पेड़ या मंदिर ही नहीं बल्कि मनुबनी चित्रकारी को साड़ी, कुशन, परदे, डोरमेट, मूर्ति, चूड़ियां, बर्तन, कपड़े, एंटिक और कैनवास पर भी चित्रित कर रहे हैं। मास्क पर भी मधुबनी चित्रशैली दिखायी दी।
मधुबनी चित्रकला में जिन देवी-देवताओं को दिखाया जाता है, वे हैं- मां दुर्गा, काली, सीता-राम, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, गौरी-गणेश और विष्णु के दस अवतार।
मधुबनी शहर में एक स्वतंत्र कला विद्यालय मिथिला कला संस्थान (एमएआई) की स्थापना जनवरी 2003 में ईएएफ द्वारा की गई थी, जो कि मधुबनी चित्रों के विकास और युवा कलाकारों का प्रशिक्षण के लिए है और ‘मिथिला संग्रहालय’, जापान के निगाटा प्रान्त में टोकामाची पहाड़ियों में स्थित एक टोकियो हसेगावा की दिमागी उपज है, जिसमें 15,000 अति सुंदर, अद्वितीय और दुर्लभ मधुबनी चित्रों के खजाने को रखा गया है। दरभंगा में कलाकृति, मधुबनी में वैधी, मधुबनी जिले के बेनिपट्टी और रंती में ग्राम विकास परिषद, मधुबनी चित्रकला के कुछ प्रमुख केंद्र हैं, जिन्होंने इस प्राचीन कला को जीवित रखा है।
कोलकाता : भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने जूम पर ऑनलाइन वेबिनार विषय ‘ सीवी कैसे बनाएं ‘पर वेबिनार का आयोजन किया गया। नौकरी के लिए अपने व्यक्तिगत परिचय को आधुनिक और पारदर्शिता के साथ लिखने के प्रारूप सीवी के विषय में जानकारी दी। बायोडाटा नाम पहले परिचित था अब उसी को सीवी कहा जाता है।
इस वेबिनार का उद्घाटन किया भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने जिन्होंने विद्यार्थियों को अपने कैरियर पर अभी से ही ध्यान रखने को कहा। कॉलेज में हर वर्ष टीसीएस, इन्डिगो जैसी बहुतेरी कंपनियां आती हैं इसलिए अपनी दृष्टि को विस्तृत आयाम देने का प्रयास करें जो कैरियर बनाने में सहायक होगा। सीएस प्रो मोहित साव ने सीवी बनाने के लिए विद्यार्थियों के लिए कई बिंदुओं पर विचार विमर्श किया।
सरकारी या गैरसरकारी संगठनों, कॉरपोरेट, कम्पनियों में आवेदन करने के लिए किस प्रकार से अपनी सीवी कैसे बनाएं जिससे कंपनी सीवी को देख कर इंटरव्यू के लिए बुलाए। यह एक कला है। हमारे पास डिग्री है, कौशल है लेकिन उसको ठीक से प्रदर्शित करना नहीं आता है तो आई हुई नौकरी भी हाथ से निकल जाती है। प्रो साव लाइफ कोच, लेक्चरार और इंटरप्रिनर है, ने विद्यार्थियों को सकारात्मक, उत्साहवर्धन और गहन ज्ञान दिया। वर्तमान युग चुनौतियों का युग है जहां सजगता और पारदर्शिता के साथ अपना आत्मविश्वास रखना चाहिए। सीवी के प्रारूप के उदाहरण दिए जिसमें नाम संपर्क नम्बर प्रोफेशनल और शैक्षणिक योग्यता और कौशल आदि के लिखने के विषय में जानकारी दी। इसी संदर्भ में कैरियर विशेषज्ञ प्रो उर्वी शुक्ला ने विद्यार्थियों को अॉन-लाइन इंटरव्यू के दौरान किस प्रकार की सावधानियां और व्यक्तित्व को अॉन-लाइन कैसे प्रदर्शित करना चाहिए, विस्तृत जानकारी दी।
अंत में, प्रश्नोत्तर सेशन में सभी 150 विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी जिज्ञासाओं को रखा और जिसका निवारण प्रो मोहित साव और प्रो उर्वी शुक्ला ने किया। इस कार्यक्रम में रिपोर्ट और तकनीकी सहयोग कीर्ति शर्मा और गौरव किल्ला का रहा। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
लिट्टी – चोखा, आज इसे अगर सुपर इन्स्टेंट फूड कहा जाए तो गलत नहीं होगा। बड़ी हस्तियाँ इसे चाव से खाती रही हैं और इसे बिहार की पहचान भी माना जाता है, पर यह लिट्टी – चोखा…आया कहाँ से, इस पर शायद ही हमने सोचा हो…आज हम इस पर ही बात करेंगे –
लिट्टी चोखा मूलत: बिहार का व्यंजन है. हालांकि इसे झारखंड और पूर्वी उत्तर में भी खाया जाता है. लिट्टी बनाने में सत्तू और आटे का प्रयोग किया जाता है. इसके साथ टमाटर की चटनी और आलू और बैंगन का चोखा भी खाया जाता. ठंड के दौरान इसका उपयोग और भी बढ़ जाता है.. विश्वामित्र ने भगवान राम के साथ खाया था लिट्टी-चोखा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लिट्टी चोखा त्रेतायुग के समय से ही बिहार में खाया जाता था। महर्षि विश्वामित्र ने पंचकोसी यात्रा के दौरान राम-लक्ष्मण के साथ चरित्रवन( अभी बक्सर) में लिट्टी-चोखा खाया था। यह परम्परा आज भी बक्सर में पंचकोसी मेले के दौरान निभाई जाती है। मगध काल में प्रसार बढ़ा
लिट्टी चोखा का प्रचार प्रसार मगध काल में तेजी से बढ़ा.हालांकि इतिहास में यह लिखित रूप से कहीं दर्ज नहीं मिलता है कि लिट्टी-चोखा का विस्तार कैसे हुआ। ग्रीक यात्री मेगास्थनीज जब 302 ईसापूर्व में पाटलीपुत्र आया था तो वो वहां की भव्यता देखकर हैरान रह गया था. मेगास्थनीज ने लिखा था कि इस भव्य शहर में 64 गेट, 570 टावर और कई बाग-बगीचे हैं. यहां महलों और मंदिरों की भरमार है। मेगास्थनीज ने लिखा था- मैंने पूरब के एक भव्य शहर को देखा है। मैंने पर्सियन महलों को भी देखा है लेकिन ये शहर दुनिया का सबसे विशाल शहर है। मगध साम्राज्य के उसी बेहतरीन दौर में लिट्टी चोखा सबसे पहली बार अस्तित्व में आया। अंग्रेज काल में चोखा का स्थान मटन ने ले लिया
1757 के बाद भारत में अंग्रेजों का वर्चस्व बढ़ने लगा। इसी के साथ ही लिट्टी चोखा में नये प्रयोग भी होने लगे। अंग्रेजों ने लिट्टी-चोखा साथ मटन का प्रयोग शुरू किया. आज भी बड़े-बड़े कार्यक्रमों में लिट्टी-मटन बड़े चाव से खाया जाता है। लिट्टी चोखा को युद्ध का खाना भी कहा जाता है। प्राचीन काल से युद्ध के दौरान सैनिक खाने के सामान के तौर पर लिट्टी लेकर चलते थे। लिट्टी की खासियत है कि ये जल्दी खराब नहीं होती। इसे बनाना भी आसान है और ये काफी पौष्टिक भी होता है। 1857 के विद्रोह में सैनिकों के लिट्टी चोखा खाने का जिक्र मिलता है। तात्या टोपे और रानी लक्ष्मी बाई ने इसे अपने सैनिकों के खाने के तौर पर चुना था। इसे फूड फॉर सरवाइवल कहा गया. उस दौर में ये अपनी खासियत की वजह से युद्धभूमि प्रचलन में आया. इसे बनाने के लिए किसी बर्तन की जरूरत नहीं है। इसमें पानी भी कम लगता है और ये सुपाच्य और पौष्टिक भी है। सैनिकों को इससे लड़ने की ताकत मिलती थी। इसके साथ ही अप्रवासी श्रमिक भी जहाँ गये, लिट्टी वहाँ पहुँचती रही। ये जल्दी खराब भी नहीं होती। कैसे बनता है लिट्टी-चोखा
लिट्टी-चोखा बनाने के लिए गोयठा(उपले) वाली आग सबसे उपयुक्त माना जाती है। इसमें लिट्टी यानी आटे की लोई में मसालेदार सत्तू को भरा जाता है, फिर उसे इस आग में सेंका जाता है। साथ ही बैंगन और टमाटर को भी आग में सेंका जाता है। फिर चोखा के लिए बैगन, टमाटर और हरी मिर्च का प्रयोग किया जाता है। समय के साथ लिट्टी बनाने के तरीके में काफी परिवर्तन आ जा चुका है लेकिन नहीं बदला तो इसका स्वाद और इसके प्रति लोगों की दीवानगी। बिहार की पहचान है लिट्टी-चोखा
लिट्टी चोखा को बिहार का व्यंजन माना जाता है। बिहार के लोग ही नहीं बल्कि देसी और विदेशी भी इस व्यंजन को बड़े चाव से खाते हैं। बिहार के लोगों ने इसे दूसरे राज्यों में भी फैलाया है। आज लिट्टी चोखा के स्टॉल हर शहर में दिख जाते हैं। लिट्टी चोखा खाने में स्वादिष्ट तो होता ही है, ये सेहत के लिए भी फायेदमंद है।
गेहूं के आटे में सत्तू को भरकर इसे आग पर पकाया जाता है. फिर देसी घी में डुबोकर इसे खाया जाता है। जिन्हें कैलोरी की फिक्र है, वो बिना घी में डुबोये लिट्टी का स्वाद ले सकते हैं। तला-भुना नहीं होने की वजह से ये सेहत के लिए अच्छा है। इसके साथ बैंगन, आलू – टमाटर का चोखा खाया जाता है। बैंगन को आग में पकाकर उसमें टमाटर, मिर्च और मसाले को डालकर चोखा तैयार किया जाता है। आलू भी आग पर पकाकर या फिर उसे उबालकर चोखा बनाया जाता है। टमाटर भी आग में पकाकर ही बनाया जाता है। बहुत से लोग परवल का चोखा भी बनाते हैं। बगैर सत्तू डाले जो लिट्टी बनती है, वह डोंगी के आकार की होती है, तो बहुत से लोग उसे गोलाकार भी देते हैं। इसे खखड़ी कहा जाता है। चोखा और सत्तू, दोनों के लिए ही सरसो तेल ही इस्तेमाल किया जाता है। बहुत से लोग बासी लिट्टी ऐसे ही खाते हैं या फिर चाय के साथ नाश्ते की तरह खाते हैं। वहीं, लिट्टी को छान भी लिया जाता है यानी फ्राइड लिट्टी भी बनती है जो सफर के दौरान काम आती है क्योंकि यह कई दिनों तक खराब नहीं होती। बिहार का ये व्यंजन राजस्थान के बाटी-चूरमा की तरह है. बिहार में ये खासा लोकप्रिय है. इसे बनाना भी आसान है और ये पौष्टिक भी है।
नयी दिल्ली : भारत में बैंकिंग घोटालों के मामलों में सरकारी एक्शन का असर अब दिखने लगा है। विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर सरकार की चौकसी का असर यह हुआ है कि सरकारी बैकों को करीब 9371 करोड़ रुपए की संपत्ति ट्रांसफर हो गए हैं। ईडी के मुताबिक, भगोड़े आरोपी विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की 9,371 करोड़ रुपये की संपत्ति सरकारी बैंकों को ट्रांसफर कर दी गई है, ताकि धोखाधड़ी के कारण हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। ईडी ने कहा कि विजय माल्या और पीएनबी बैंक धोखाधड़ी मामलों में बैंकों की 40 फीसदी राशि पीएमएलए के तहत जब्त किए गए शेयरों की बिक्री के जरिए वसूली गयी। प्रवर्तन निदेशालय ने ट्वीट कर कहा कि ईडी ने न केवल पीएमएलए के तहत विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के मामले में 18,170.02 करोड़ (बैंकों को कुल नुकसान का 80.45%) रुपये की संपत्ति जब्त की है, बल्कि 9371.17 करोड़ की कीमत वाली संपत्ति सरकारी बैंकों को ट्रांसफर भी की है।
दरअसल, मेहुल चोकसी और उसके भतीजे नीरव मोदी पर कुछ बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ कथित तौर पर 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। नीरव मोदी अभी लंदन की एक जेल में बंद है, जबकि मेहुल चोकसी डोमिनिका की जेल में बंद है। दोनों के खिलाफ केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच कर रहा है और उसे भारत प्रत्यर्पित करने की कोशिश जारी है। वहीं, विजय माल्या पर लगभग 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। इस मामले में उसकी बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस शामिल है। किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मालिक और 65 वर्षीय कारोबारी विजय माल्या अप्रैल 2019 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से प्रत्यर्पण वारंट पर ब्रिटेन में जमानत पर है। फिलहाल विजय माल्या इंग्लैंड में है, जहां से उसे वापस लाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।
देश में बढ़ते अरबपतियों के बीच ‘नए मध्य वर्ग’ की पहचान की गई है। हुरुन इंडिया वेल्थ रिपोर्ट-2020 के मुताबिक, इनकी संख्या 6.33 लाख है। इस वर्ग में उन लोगों को शामिल किया गया है, जिनकी सालाना औसत बचत 20 लाख रुपये है।
जमीन, मकान और गाड़ियों पर करते हैं सबसे ज्यादा खर्च
खास बात है कि ये अपनी संपत्ति का सबसे ज्यादा हिस्सा जमीन, मकान और गाड़ियों पर खर्च करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 4.12 लाख ऐसे लोग भी हैं, जिनकी कुल संपत्ति कम-से-कम 7 करोड़ रुपये है। इनमें डॉलर में कमाई करने वाले करोड़पति भी शामिल हैं।
5.64 करोड़ हैं देश में मध्य वर्ग, जिनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा
1,000 करोड़ की संपत्ति वालों की संख्या 3,000 है। ‘मध्य वर्ग’ में सालाना 2.5 लाख रुपये कमाने वाले परिवारों को रखा गया है, जिनकी संख्या 5.64 करोड़ है। इनकी कुल संपत्ति 7 करोड़ रुपये से कम है।
दो तरह से कमाई करने वाले सबसे ज्यादा
रिपोर्ट में देश के सभी आय वर्ग को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है। पहला- कम कमाई वाला वर्ग, जिसकी ज्यादातर आय नौकरी, बैंक एफडी, रियल एस्टेट और शेयर बाजार में निवेश पर निर्भर है। दूसरा- ज्यादा कमाने वाला वर्ग, जिसकी आय का मुख्य जरिया रियल एस्टेट में बड़े स्तर पर निवेश, कारोबार और घरेलू एवं विदेशी शेयर बाजार में निवेश है।
अति धनवानों में चौथे स्थान पर भारत
हुरुन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कुल 9.12 लाख करोड़पति हैं। यह संख्या दुनिया के कुल 5.19 करोड़ करोड़पतियों के मुकाबले महज दो फीसदी है। इसके अलावा, अति धनवानों की संख्या के मामले में अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद भारत चौथे स्थान पर है। देश में कुल 4,593 अति धनवान हैं।
10 राज्यों में 70.3 फीसदी करोड़पति
राज्य संख्या
महाराष्ट्र 56,000
उत्तर प्रदेश 36,000
तमिलनाडु 35,000
कर्नाटक 33,000
गुजरात 29,000
पश्चिम बंगाल 24,000
राजस्थान 21,000
आंध्र प्रदेश 20,000
मध्य प्रदेश 18,000
तेलंगाना 18,000
शहरों में मुम्बई सबसे आगे
शहरों के लिहाज से मुंबई में सबसे ज्यादा 16,933 करोड़पति हैं, जबकि दिल्ली 16,000 करोड़पतियों के साथ दूसरे स्थान पर है। कोलकाता 10,000 के साथ तीसरे, बंगलूरू 7,582 के साथ चौथे और चेन्नई 4,685 करोड़पतियों के साथ पांचवें स्थान पर है।
हैप्पीनेस इंडेक्स : खुशियों में आई कमी
सर्वे में शामिल 72 फीसदी करोड़पतियों ने अपने काम और जीवन के प्रति प्रसन्नता जताई है। 2019 में यह आंकड़ा 85 फीसदी था। महामारी के दौरान उनकी खुशियों में 13 कमी आई है।
भारतीय करोड़पति प्राथमिक रूप से रियल एस्टेट और शेयर बाजार में निवेश करना पसंद करते हैं।
विदेश में ब्रिटेन जाना सबसे ज्यादा पसंद। स्विट्जरलैंड दूसरे और अमेरिका तीसरे स्थान पर।
निवेश और शिक्षा के लिहाज से अमेरिका सर्वाधिक पसंदीदा देश। इसके बाद भारतीय करोड़पति सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात में निवेश करना पसंद करते हैं।
लग्जरी कारों में मर्सडीज सबसे ज्यादा पसंद। बीएमडब्ल्यू दूसरी और जगुआर तीसरी पसंदीदा कार। लग्जरी स्पोर्ट्स कार ब्रांड में लैम्बॉर्गिनी पहली पसंद।
सरकार फ्लेक्स फ्यूल इंजन पर बड़ा फैसला लेने जा रही है। ऐसे इंजन को ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अनिवार्य बनाया जाएगा। फ्लेक्स फ्यूल का मतलब हुआ फ्लेक्सिबल यानी लचीला ईंधन यानी ऐसा ईंधन जो पेट्रोल की जगह ले और वो है एथनॉल। सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि इस वैकल्पिक ईंधन की कीमत 60-62 रुपये प्रति लीटर होगी, जबकि पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से भी ज्यादा है इसलिए एथनॉल के इस्तेमाल से देश के लोग प्रति लीटर 30-35 रुपये की बचत कर पाएंगे। एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।
नितिन गडकरी ने बताया कि ब्राजील, कनाडा और अमेरिका में ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्लेक्स फ्यूल ईंधन का उत्पादन कर रही हैं। इन देशों में ग्राहकों को 100 प्रतिशत पेट्रोल या 10 परसेंट बायो एथनॉल का विकल्प मुहैया करवाया जा रहा है। नितिन गडकरी ने कहा कि मौजूदा वक्त में प्रति लीटर पेट्रोल में 8.5 प्रतिशत एथनॉल मिलाया जाता है, जो कि 2014 में 1 से 1.5 प्रतिशत हुआ करता था। एथनॉल की खरीदारी भी 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 320 करोड़ लीटर पहुँच गयी है। बताया जा रहा है कि एथनॉल, पेट्रोल से कहीं बेहतर बेहतर ईंधन है और यह कम लागत वाला, प्रदूषण मुक्त और स्वेदशी है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला कदम है क्योंकि हमारे देश में मकई, चीनी और गेहूं का अतिरिक्त मात्रा हैं, इनको खाद्यान्नों में रखने के लिए हमारे पास जगह नहीं है। यह देखते हुए कि खाद्यान्न का अतिरिक्त मात्रा समस्या पैदा कर रही है, हमारी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू बाजार की कीमतों से अधिक है, इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि खाद्यान्न और गन्ने का उपयोग करके एथनॉल का रस बना सकते हैं।
नयी दिल्ली : 5 साल बाद टीम इंडिया में वापसी करने वाली भारतीय महिला क्रिकेटर स्नेह राणा (Sneh Rana) इस समय अपने शानदार खेल की वजह से चर्चा का विषय बनी हुई हैं। स्नेह ने इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में 8वें नंबर पर उतरकर नाबाद 80 रन की पारी खेल मैच को ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई। देहरादून की 27 वर्षीय स्नेह डेब्यू टेस्ट में 50 प्लस स्कोर करने के अलावा और 4 विकेट हासिल करने वाली भारत की पहली जबकि ओवरऑल चौथी महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
किसान परिवार से आने वाली स्नेह का जब टीम इंडिया में चयन हुआ था उससे दो महीने पहले उनके पिता भगवान सिंह राणा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में स्नेह की बड़ी बहन रुचि ने कहा, ‘ पापा के गुजरने के बाद वह बहुत दुखी थी। लेकिन उसने ट्रेनिंग नहीं छोड़ी। दुख के समय में ट्रेनिंग उसके लिए बाम जैसा था।’
स्नेह 5 साल से टीम से बाहर थीं। नौ साल की उम्र में लिटिल मास्टर क्रिकेट अकादमी से शुरुआत करने वाली स्नेह सिनौला में टैलंट सर्च प्रोग्राम टूर्नामेंट के लि चुनी गई थीं। स्नेह को कोचिंग किरण और नरेंद्र साह ने दी। कोच किरण के पति नरेंद्र साह ने बताया, ‘उसे हमारे सामने खेलने में बहुत शर्म आती थी। हमारी अकैडमी कोच किरण ने बैटिंग के लिए उसे बहुत मनाया। वह प्रतिभा की धनी है।’
दूसरी ओर किरण ने स्नेह की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उसने फादर्स डे से एक दिन पहले शानदार प्रदर्शन कर अपने पिता को श्रद्धांजलि दी है। यह हमारे लिए वास्तव में गर्व करने का क्षण है। स्नेह के लिए यह पिछले कई वर्षों से कड़ी मेहनत का फल है। वह नौ साल की उम्र में मेरे पास कोचिंग के लिए आई थी।’
किरण ने शुरुआती दिनों को याद कर कहा कि कैसे वह ऑलराउंडर बनीं। बकौल किरण, ‘ हमारी अकादमी में लड़कियों को बड़े लड़कों के खिलाफ पेस बोलिंग का सामना करना पड़ता था। इससे उसके क्रिकेट स्किल में निखार आया।’
स्नेह ने मैच की पहली पारी में पहले गेंदबाजी में 4 विकेट चटकाए फिर दूसरी पारी में बल्ले से कमाल दिखाते हुए शानदार अर्धशतक जड़े। स्नेह ने इसके साथ इतिहास रच दिया। वह डेब्यू टेस्ट में 4 विकेट के साथ अर्धशतक जड़ने वाली पहली खिलाड़ी बन गई है। इससे पहले टेस्ट में ये कारनामा न तो पुरष और न ही किसी महिला बल्लेबाज ने किया था।
आठवें नंबर पर बैटिंग के लिए उतरीं स्नेह ने दूसरी पारी में 154 गेंदों पर 13 चौकों की मदद से 80 रन बनाकर नाबाद लौटीं। यह महिला क्रिकेट में फॉलोऑन खेलते हुए किसी बल्लेबाज का तीसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर है। साल 2014 में पहली बार टीम इंडिया में जगह बनाने वाली स्नेह रेलवे के लिए चयन से पहले हरियाणा और पंजाब की ओर से अंडर-19 में खेल चुकी हैं। स्नेह ने अब तक 7 वनडे और 5 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं।
ना बिल गेट्स और ना ही मेलिंडा गेट्स, ना तो वारेन बफेट और ना ही अमेजन वाली जोफ बेजोस सदी का सबसे बड़े दानदाता है। हम भारतीयों के लिए यह गर्व की बात है कि टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी नसरवानजी टाटा ने सदी के एडेलगिव हुरुन परोपकारी लोगों में शीर्ष स्थान हासिल किया है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके दान का वर्तमान मूल्य 102.4 बिलियन डॉलर आंका गया है, जिसकी शुरुआत 1892 में हुई थी।
शीर्ष सूची में एक मात्र भारतीय कंपनी
शीर्ष 10 की सूची में टाटा ग्रुप इकलौती भारतीय कंपनी है। शीर्ष 50 में अन्य भारतीय विप्रो के पूर्व अध्यक्ष अजीम प्रेमजी हैं, जो 12वें स्थान पर हैं। बिल गेट्स और मेलिंडा फ्रेंच गेट्स, हेनरी वेलकम, हॉवर्ड ह्यूजेस और वॉरेन बफेट शीर्ष पांच में शामिल हैं। जेफ बेजोस की पूर्व पत्नी मैकेंजी स्कॉट ने चैरिटी को सीधे 8.5 बिलियन डॉलर का दान दिया, जो एक जीवित दाता एक वर्ष में दिया गया सबसे बड़ा दान है।
परोपकारी मूल्य के आधार पर दी गई रैंकिंग
यह रैंकिंग कुल परोपकारी मूल्य पर आधारित है, जिसकी गणना मुद्रास्फीति के लिए उपहार या वितरण की राशि के साथ समायोजित संपत्ति के मूल्य के रूप में की जाती है। डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से प्राप्त किया गया था और कुछ मामलों में सीधे संस्था व फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराया गया था।
टाटा स्टील में दुनिया भर से 80, 500 लोग करते हैं काम
जमशेदजी टाटा भारत में कपड़ा व स्टील उद्योग के अगुआ रहे हैं। उन्होंने जमशेदपुर में टाटा आयरन एंड स्टील वर्क्स कंपनी (टिस्को) की स्थापना की, जिसे अब टाटा स्टील के नाम से जाना जाता है। 1907 में स्थापित, टाटा स्टील अब भारत, नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम सहित 26 देशों में काम करती है, और रिपोर्टों के अनुसार लगभग 80,500 लोग कार्यरत हैं। सेंचुरी रिपोर्ट के एडलगिव हुरुन फिलैंथ्रोपिस्ट्स ने कहा, “टाटा ग्रुप का कुल परोपकारी मूल्य टाटा संस का 66 प्रतिशत है, जिसका अनुमान 100 अरब डॉलर है, जो पूरी तरह से सूचीबद्ध संस्थाओं के मूल्य पर आधारित है।”
अजीम प्रेमजी ने फाउंडेशन को दिए हैं 2.2 बिलियन डॉलर दान
दूसरी ओर, विप्रो के प्रेमजी ने 2013 में गिविंग प्लेज पर हस्ताक्षर करके अपनी संपत्ति का कम से कम आधा हिस्सा दान देेने की घोषणा की है। उन्होंने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को 2.2 बिलियन डॉलर के दान के साथ शुरुआत की, जो भारत में शिक्षा पर केंद्रित था। उन्होंने 2020 के लिए एडेलगिव हुरुन इंडिया परोपकार सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया था।
पिछली सदी के दानदाताओं में अमेरिका शीर्ष पर
एडेलगिव हुरुन रिपोर्ट के अनुसार, पिछली शताब्दी में दुनिया के 50 सबसे उदार व्यक्ति पांच देशों से आए थे, जिनमें 39 दानताओं के साथ अमेरिका शीर्ष पर था, इसके बाद इंग्लैंड, चीन (3), भारत (2) और पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड के 5 लोग थे। उनके दान की राशि $832 बिलियन थी, जिसमें से 503 बिलियन डॉलर आज विभिन्न फाउंडेशन में हैं जबिक लगभग 329 बिलियन डॉलर पिछली शताब्दी में वितरित किए गए।
एलोन मस्क व जेफ बेजोस को सूची में नहीं मिली जगह
हुरुन रिपोर्ट के अध्यक्ष और मुख्य शोधकर्ता रूपर्ट हुगवेरफ ने कहा, यह आश्चर्य की बात है कि जेफ बेजोस और एलोन मस्क ने इस सूची में जगह नहीं बनाई है। पिछली सदी के दुनिया के सबसे बड़े परोपकारी लोगों की कहानियां आधुनिक परोपकार की कहानी बयां करती हैं। कार्नेगी और रॉकफेलर जैसे दुनिया के शुरुआती अरबपतियों की विरासत आज के बिल गेट्स और वॉरेन बफेट के माध्यम से दिखाती है कि कैसे बनाई गई संपत्ति का पुनर्वितरण किया गया है। कई परोपकारियों ने पहली के बजाय दूसरी पीढ़ी में दान किया, जैसे कि फोर्ड फाउंडेशन की कहानी, जिसे हेनरी फोर्ड के बेटे द्वारा स्थापित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष 50 व्यक्तियों ने वार्षिक अनुदान के रूप में अपने कुल संपत्ति का सामूहिक रूप से $30 बिलियन या 6 प्रतिशत का योगदान दिया। $8.5 बिलियन के दान के साथ, मैकेंज़ी स्कॉट सबसे बड़ा वार्षिक अनुदान निर्माता है, जिसके बाद वॉरेन बफेट (2.7 बिलियन डॉलर) और बिल एंड मेलिंडा गेट्स (2.5 बिलियन डॉलर) हैं।
कोलकाता : बिड़ला हाई स्कूल ने गत 21 जून, 2021 को ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया। सामाजिक दूरी के बजाय शारीरिक दूरी की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए, कक्षा 6-11 के छात्रों ने इस उत्सव में प्रदर्शन किया। सभी प्रतिभागियों ने अपने घर से अलग-अलग आसन किए और यह वीडियो को स्कूल के साथ साझा किया। स्कूल द्वारा इन सभी वीडियो को लेकर कोलाज वीडियो तैयार किया। आठवीं-ई कक्षा के विशेष मेहता ने उद्घाटन भाषण दिया और समापन भाषण नौवीं-बी कक्षा के आदित्य बसु द्वारा दिया गया। कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग बिड़ला हाई स्कूल फेसबुक पेज पर सुबह 7:30 बजे शुरू हुई। छात्र ने सभी छात्रों के बीच यह संदेश फैलाया कि योग उनकी प्रतिरक्षा, शारीरिक क्षमता में सुधार करने और चिंता और तनाव को दूर करने में मदद करता है।