Wednesday, April 8, 2026
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केएमबीएल की ‘पे योर कॉन्टेक्ट’ सुविधा

कोलकाता : कोटक महिन्द्रा बैंक (केएमबीएल) ने ‘पे योर कॉन्टेक्ट’ सुविधा शुरू की है। यह केएमबीएल के मोबाइल बैंकिंग ऐप पर एक नया फीचर है जो यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) माध्यमों का इस्तेमाल करता है और ग्राहकों को यह सुविधा देता है कि वे अपने सम्पर्क में किसी को भी पैसा भेज सकें या भुगतान कर सकें, इसके लिए उन्हें सिर्फ लाभार्थी का मोबाइल नंबर डालना करना होगा । ग्राहक अपने मोबाइल फोन में मौजूद सम्पर्कों की सूची में से किसी को चुनें, या लाभार्थी का मोबाइल नंबर डालें, फिर यूपीआई ऐप चुनें अथवा लाभार्थी के नंबर से लिंक्ड केएमबीएल अकाउंट को चुनें और सीधे कोटक मोबाइल बैंकिंग ऐप द्वारा पैसा ट्रांस्फर करें। ’पे योर कॉन्टेक्ट’ की सुविधा सभी पेमेंट ऐप्स के संग यह कारगर है तथा ऐंड्रॉएड व आईओएस दोनों पर उपलब्ध है। कोटक महिन्द्रा बैंक के प्रेसिडेंट तथा चीफ डिजिटल ऑफिसर दीपक शर्मा ने कहा कि इससे सुरक्षा भी बहुत बढ़ गई है क्योंकि किसी भी यूपीआई आईडी पर कोटक मोबाइल बैंकिंग ऐप से फंड ट्रांस्फर और भुगतान किया जा सकता है और ग्राहकों को अपने फोन पर बहुत से पेमेंट ऐप डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं है।

भवानीपुर कॉलेज में सकारात्मक यात्रा पर वेबिनार

कोलकाता : भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बीकॉम सांध्य विभाग ने, ‘सकारात्मक यात्रा की ओर’, विषय पर जागरूकता लाने के लिए गूगल मीट पर वेबिनार का आयोजन किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में उद्घाटन सत्र में सभी प्रमुख वक्ताओं का प्रो अरुंधति मजूमदार ने स्वागत किया और डॉ. जोयिता भादुड़ी ने सभी विशिष्ट वक्ताओं का स्वागत करते हुए कोरोना महामारी का समाज पर पड़े प्रभावों पर प्रकाश डाला। प्रमुख वक्ताओं में डॉ सुद्धादत्त चटर्जी- वरिष्ठ फिजीशियन,अंतरराष्ट्रीय मेडिसिन और रुमेटोलॉजी विभाग, अपोलो ग्लिइगल्स हॉस्पिटल लिमिटेड, कोलकाता , जूट उद्योग पुनर्उत्थान हेतु योगदान करने वाली प्रख्यात सामाजिक उद्यमी चैताली दास  एवं  स्टेट एंगैजमेंट ऑफिसर एन एस डी सी बिक्रम कुमार दास रहे जिन्होंने विद्यार्थियों को अपने वक्तव्यों से सकारात्मक विकास की दिशा में महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए।
डॉ चटर्जी ने कोविड काल के दौरान शरीर क्रिया विज्ञान पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा किअच्छा और संतुलित भोजन, पूरी तरह से नींद लेना, व्यक्तिगत और सामाजिक स्वस्थता और स्वच्छता, व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य जिससे हम सभी कोरोना काल में उबरे हैं और आगे भी कोरोना को जीतने का एकमात्र यही महत्वपूर्ण उपाय हैं। प्रो देवदत्त सेन ने डॉ सुद्धादत्त चटर्जी का परिचय दिया।
स्ट्रेस मैनेजमेंट और भावनात्मक प्रभाव पर चैताली दास ने कहा कि शारिरिक और उससे होने वाले मानसिक तनाव के कई कारण देखे गए। कोरोना काल में सामाजिकता से कटकर रहने के कारण भूख में बदलाव, श्वास प्रक्रिया में कमी, चिड़चिड़ापन आदि आम बीमारियों को देखा गया। उन्होंने तनाव की पहचान और उसे कम करने तथा ठीक करने के विषय में जानकारी दी। प्रो रिया साहा ने चैताली दास का परिचय दिया।
बिक्रम कुमार दास ने एन एस डी सी में होने वाले कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता विषय पर विद्यार्थियों से अपने विचार साझा किया। विशेष योजनाओं, प्रोजेक्ट, स्कीम और उनके लिए क्या प्राथमिकताएं हैं जैसे वर्ल्ड स्कील, जूनियर स्कील आदि की जानकारी दी। उन्होंने सुझाव दिया कि युवा विद्यार्थी एन एस डी सी में प्रशिक्षु बन किसी विशेष हुनर को सीखने का काम एवं रोजगार में भी सहायक बन सकते हैं। प्रो देवदत्त सेन ने दास का भी परिचय दिया। इस अवसर पर 100 प्रतिभागी, फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। अंत में, प्रो. आत्रैय गांगुली ने विशिष्ट अतिथियों के विचारों को संक्षेप में व्यक्त करते हुए मैनेजमेंट के सदस्यों, आईक्यू ए सी, विभागाध्यक्ष और सभी विद्यार्थियों को धन्यवाद दिया। फीड बैक गूगल फार्म में विद्यार्थियों ने अपने विचार भी व्यक्त किए। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

जाति और ब्राह्मणत्व

कुमार संकल्प
ब्राह्मणत्व का सम्बन्ध जाति से नहीं है।ब्राह्मणत्व एक गुण है।यह गुण जिसमें है वही ब्राह्मण है।ब्राह्मणत्व का अभिमान बुरी चीज नहीं है लेकिन यह यदि जाति पर आधारित हो गुण पर नहीं तो इसका अभिमान मिथ्या दम्भ है, जो केवल ऊंच-नीच की भावना को जन्म देने के लिए किया जाता है। रावण ब्राह्मण था, महान ऋषि पुलस्त्य का पौत्र और ऋषि विश्रवा का पुत्र था।परंतु उसे सभी एक राक्षस के रूप में जानते हैं ब्राह्मण के रूप में नहीं। उसी प्रकार महर्षि विश्वामित्र क्षत्रिय थे परंतु उन्हें लोग एक ब्राह्मण के रूप में जानते हैं। महर्षि बाल्मीकि के बारे में भी एक मत है कि वे रत्नाकर नामक डाकू थे और आदिवासी शुद्र समुदाय से थे।परंतु अपनी साधना के बल पर ब्राह्मणत्व को अर्जित कर एक ब्राह्मण ऋषि के रूप में विख्यात हुए।
उसी आधार पर कई समुदाय अपना सरनेम बाल्मीकि रखते हैं।(हालाँकि एक मत यह भी है कि वे महर्षि प्रचेता के दशम पुत्र थे।कोई उन्हें ब्रह्मा का औरष पुत्र कहता है तो कोई प्रचेता का मानस पुत्र।)एक ब्रह्मर्षि और हैं जिनका इस दृष्टि से सर्वाधिक महत्व है।वे हैं महर्षि कश्यप।उनकी कई संताने थीं। वे सब अपने गुणों के आधार पर जानी गईं पिता की जाति के आधार पर नहीं।उनकी संताने अपने-अपने गुणों के आधार पर देव, दानव, ब्राह्मण, क्षत्रिय , वैश्य और शूद्र की श्रेणी को प्राप्त हुईं। (हालाँकि इस विभाजन का आधार कुछ लोग इनकी माताओं को मानते हैं। परंतु ब्राह्मण पिता की संतान यदि ब्राह्मण नहीं कहला सकती तो क्षत्रिय माता की संतान क्षत्रिय कैसे कहलाएगी? अतः माता का आधार लेकर जातिवाद के पक्ष में कुतर्क गढ़ना उचित नहीं है। अतः महर्षि कश्यप की संतानों की पहचान उनकी माताओं के आधार पर न होकर गुणों के आधार पर है।)
कुछ लोग गोत्र के आधार पर अपनी श्रेष्ठता का दम्भ पाल लेते हैं। आपके गोत्र की श्रेष्ठता से आपका कुछ लेना – देना नहीं है। आप श्रेष्ठ हैं कि नहीं इससे आपका लेना-देना होना चाहिए। सारे गोत्र ही ब्राह्मण हैं , फिर उनमें श्रेष्ठ और तुच्छ का सवाल ही नहीं।महर्षि वशिष्ठ, भारद्वाज, कश्यप , अग्नि, अत्रि में कौन श्रेष्ठ है और कौन तुच्छ? गोत्र श्रेष्ठ है तो गर्व कीजिये परंतु यदि आप उसी अनुरूप स्वयं श्रेष्ठ नहीं हैं तो यह लज्जा का विषय है गर्व का नहीं। समस्त भारतवंशी ऋषियों की संतान हैं , अतः कोई छोटा या बड़ा अथवा ऊंच-नीच नहीं है। वर्ण गुण मूलक है, जाति मूलक नहीं। चारों वर्णों की परिभाषा गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने बहुत ही उत्तम तरीके से समझाया है। जातिवाद के चक्कर में उलझने वालों को एक बार गीता का यह प्रसंग जरूर पढ़ना चाहिए। गीता ही सर्वश्रेष्ठ शास्त्र है, इससे बड़ा कोई शास्त्र नहीं, इसे स्वीकार करना चाहिए।उपनिषदों में भी चारों वर्णों की ऐसी ही परिभाषा बतलाई गयी है। इनका जाति- विशेष से कोई संबंध नहीं। इनका संबंध मनुष्य से है।
जो सत्व-गुण में स्थित है, ब्रह्म को जानने वाला है, जो भक्ति-योग में स्थित हो चुका है वही ब्राह्मण है। जो भक्ति-योग में स्थित होने के लिए संघर्षरत है, युद्धरत है वही क्षत्रिय है।भक्ति में इन्हीं का ऊंचा स्थान है , इसीलिए इनको श्रेष्ठ कहा जाता है परन्तु लोग इसे जाति-विशेष समझ कर ऊंच-नीच में उलझ जाते हैं। अर्जुन क्षत्रिय कुल का था फिर भी उसे कृष्ण महाराज कहते हैं, ‘ हे अर्जुन तू शूद्रत्व से ऊपर उठ, क्षत्रिय बन ,फिर ब्राह्मण बनना सहज हो जाएगा।’
चित-वृत्तियों को माया-मोह, काम-क्रोध आदि निकृष्ट वृत्तियों से मोड़कर उन्हें सत्व- गुण में स्थित करने के लिए जो मनुष्य निरन्त युद्ध करता रहता है वही सच्चा क्षत्रिय योद्धा है।जिसकी चित्तवृत्ति मोह, लोभ, काम, मद, आलस, निद्रा आदि का गुलाम है वही शुद्र है।वह जाति से चाहे बाबाजी हो या राजपूत, इसका इस ब्राह्मण और क्षत्रिय से कोई सम्बन्ध नहीं।यह भक्ति के क्षेत्र में गुण पर आधारित कोटियां हैं।(देखें श्रीमद्भागवत गीता, दूसरा अध्याय)आप अपने गुण के आधार पर खुद तय करें कि आप क्या हैं जाति के आधार पर नहीं।यही वैदिक परंपरा है, यही आर्ष परंपरा है, यही भारतीय परंपरा है।

देश तभी जागेगा जब जनता जागेगी, हम और आप जगेंगे

कोविड -19 के कारण काफी चीजें बदल गयी हैं। मुलाकात का तरीका, बातचीत का तरीका, काम का तरीका, सही है कि दूरी तो बढ़ी है और इसका असर भी बहुत ज्यादा पड़ा है। न्यू नॉर्मल को अपनाना इतना आसान भी नहीं है। तीसरी लहर की चेतावनी के बीच कोविड -19 को लेकर जागरुकता की बात की जाये, तो उंगली सरकार पर ही नहीं, जनता पर भी उठेगी। आखिर हम कब बदलने जा रहे हैं। कई राज्यों में लॉकडाउन लगा, बढ़ाया गया, पाबंदियाँ लगीं…सड़कें सूनी रहीं। ऐसा लगा कि अब लोग सजग होंगे, मास्क पहनेंगे, सामाजिक दूरी रखेंगे मगर जैसे ही लॉकडाउन में छूट मिली, पिंजरे के पंछी, पिंजरे से बाहर। कई तो आँख बचाकर छुट्टी मनाने लगे, कहने की जरूरत नहीं कि छुट्टी में मास्क जैसी कोई चीज कौन पहनता है? लापरवाही के कारण एक बार फिर कोविड -19 के मामले बढ़े. कोरोना के साथ ब्लैक, व्हाइट और यलो फंगस का खतरा बढ़ा, बहुतों को हमने खो दिया मगर इतने पर भी लोगों को फर्क नहीं पड़ता, वह लड़ेंगे, भले ही बेवजह लड़ें पर लड़ेंगे जरूर। सवाल यह है कि यही चलता रहा तो कोविड -19 का खतरा कम तो होगा नहीं, बल्कि बढ़ेगा जरूर। याद कीजिए कैसे पराधीनता की बेड़ियों में जकड़े हमारे पूर्वजों ने अनुशासन का साथ नहीं छोड़ा. कठिनाईयाँ सहीं, अत्याचार सहे पर अपने नेतृत्वकर्ताओं की एक आवाज पर वे सब कुछ लुटाते रहे। यह स्वतन्त्रता इसी आत्मत्याग का परिणाम है। आज नेता भी ऐसे नहीं हैं…उनका समय एक दूसरे को कोसने में जाता है। चुनाव के दौरान जो हुआ, हम सबने देखा और इसके बाद जो कुछ हुआ, वह भी हमने देखा, क्या हम खुद को अनुशासित नहीं कर सकते? इस देश की बागडोर सही दिशा में तभी जायेगी जब जनता जागेगी, अनुशासित होगी, आँख बन्द करके न तो समर्थन देगी और न बात मानेगी….सवाल यह है कि क्या ऐसा होगा… और होगा तो कब होगा ? देश तभी जागेगा जब जनता जागेगी, हम और आप जगेंगे।

द हेरिटेज स्कूल ने पूरे किये शिक्षा क्षेत्र में सेवा के 20 वर्ष

कोलकाता : हेरिटेज स्कूल, कोलकाता शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवा के 20 वर्ष पूरे कर लिये हैं। स्थापना दिवस पर स्कूल ने अपने 19वें वार्षिक पुरस्कार दिवस वितरण समारोह आयोजित किया। विक्रम ए साराभाई कम्युनिटी साइंस सेंटर के कार्यकारी निदेशक दिलीप सुरकर और द हार्ट एडवाइजर्स के पार्टनर तथा शिक्षाविद् शशांक वीरा शिक्षाविद् इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे। इस दिन चार नवोन्मेषी विषय स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा की गयी। ये मौजूदा पाठ्यक्रम में बनाने का दावा करने वाले ये प्रोग्राम नये शैक्षणिक सत्र में स्कूल द्वारा पेश किए जाएंगे। यह नये विषय विद्यार्थियों के भाषा ज्ञान को समृद्ध करेंगे। इसे ‘द आर्टिकुलेट एनसेम्बल’ नाम दिया गया है जो अंग्रेजी भाषा के अध्ययन की बुनियाद को मजबूत करेगा। इसके साथ ही एक ई विज्ञान पत्रिका ‘एनिग्मा – एक ई-साइंस पत्रिका’ शुरू की गयी जिसमें मानव जाति को चकित करने वाले चुनिंदा सिद्धांत और खोजें शामिल हैं। ‘संस्कारन’, जिसमें स्कूल से जुड़ी स्मृतियाँ होंगी। संवेदना एक मनेवैज्ञानिक परामर्श से जुड़ा विषय है जो विशेष रूप से बालिकाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ‘संवेदना’ एक पहल है जो 2010 में संयुक्त राष्ट्र फाउंडेशन द्वारा प्रत्येक बालिका का समर्थन करने के लिए शुरू की गयी थी।
कार्यक्रम के दौरान दिलीप सुरकर ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के कुछ जादुई आविष्कारों से जुड़ी जानकारी साझा की और शिक्षकों से विज्ञान से संबंधित अधिक कार्यक्रम और कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया ताकि छात्रों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में कॅरियर बनाने के लिए पर्याप्त प्रेरणा मिले। शशांक वीरा ने स्कूली शिक्षा में कुछ नवीनतम शैक्षिक नवाचारों को साझा किया जो भविष्य में अनुभवात्मक शिक्षा की गहराई को बढ़ाने के लिए आ रहे हैं। वर्तमान कोविड -19 महामारी ने छात्रों को घर की चार दीवारों के भीतर बना दिया था और इन नवाचारों से स्कूलों को खुद को फिर से खोजने में मदद मिलेगी ताकि वे छात्रों के साथ जुड़ाव को बनाए रख सकें और उन्हें और मजबूत कर सकें।
इस वर्चुअल कार्यक्रम में दे हेरिटेज स्कूल की प्रबन्धन कमेटी के अध्यक्ष विक्रम स्वरूप ने स्कूल की स्थापना के बाद के कुछ यादगार पलों को याद किया। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इन्टीट्यूशंस के चेयरमैन एच.के.चौधरी, चेयरमैन ने स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और उससे आगे तक समूह के विजन के बारे में बताया। स्कूल के अन्य ट्रस्टी सदस्यों ने भी शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों और कर्मचारियों को इस महत्वपूर्ण अवसर का जश्न मनाने के लिए एक विशेष स्कूल’ बनाने के प्रयासों के लिए बधाई दी। छात्रों ने वर्चुअल पुरस्कार वितरण समारोह का भी अनुभव किया जिसका वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। द हेरिटेज स्कूल की प्रिंसिपल सीमा सप्रू ने कहा, “हेरिटेज स्कूल मौजूदा पाठ्यक्रम को और गुणवत्तापरक बनाते हुए नये विषय ला रहा है। यह अलग – अलग क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए स्कूली शिक्षा को उत्कृष्ट बनाने में मदद करेंगे। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूशंस के सीईओ पी के अग्रवाल ने इस अवसर पर सबको बधाई दी। कार्यक्रम में द हेरिटेज स्कूल की हेडमिस्ट्रेस रूना चटर्जी, तथा द हेरिटेज स्कूल के हेडमास्टर डेरिल क्रिस्टोफर क्रिस्टेंसन समेत स्कूल के माता-पिता और शिक्षकों ने भी विचार रखे।

बीएचएस ने आयोजित किया 2021 -22 के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम

कोलकाता : बिड़ला हाई स्कूल में कक्षा 11 के शिक्षण सत्र की शुरुआत एक आभासी ओरिएंटेशन कार्यक्रम के आयोजन के साथ हो गयी। कार्यक्रम की स्कूल की प्रिंसिपल एल सैगल के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की, जिसमें उपस्थित लोगों को इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के सुचारू संचालन को संचालित करने वाले मार्गदर्शक लोगों से परिचित कराया गया। इसके बाद उन्होंने संबंधित कक्षा शिक्षकों, परामर्शदाताओं और विशेष शिक्षकों का परिचय कराया जो आगामी शैक्षणिक सत्र में छात्रों के लिए संपर्क का पहला बिंदु होंगे।
कोरोना से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों को देखते हुए प्रिंसिपल सैगल ने छात्रों की जरूरतों के प्रति सशक्त होने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने समझाया कि आभासी सीखने के माहौल में, माता-पिता और शिक्षकों को छात्रों के साथ धैर्यपूर्वक बातचीत करनी चाहिए और उनकी विविध आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए। इसके साथ, उन्होंने सभी से अपनी भूमिकाओं की पहचान करने और इस शैक्षणिक वर्ष को सभी के लिए एक पुरस्कृत सत्र बनाने के लिए सहयोग करने का आग्रह किया। सीनियर सेकेंडरी सेक्शन की संयोजक, सुश्री एस मुखर्जी ने सीनियर सेक्शन के संचालन सम्बन्धी तथ्यों के साथ परीक्षा की संरचना की विस्तृत जानकारी दी जिससे विद्यार्थियों को कोई परेशानी न हो और सुनिश्चित किया कि वे क्यूमुलेटिव वेटेज पर आधारित मूल्यांकन प्रणाली, परीक्षा प्रक्रिया, ग्यारहवीं तथा बारहवीं के मार्क डिजाइन, विशेष कक्षाओं और पाठ्यक्रमों से जुड़ी जानकारी समझ सकें। इसके साथ ही स्कूल द्वारा आयोजित वेबिनारों की जानकारी भी उन्होंने दी।

मानवीय संवेदनाओं की पुल हैं कविताएं : शंभुनाथ

कोलकाता : कोलकाता की प्रतिष्ठित संस्था सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से साहित्य संवाद का आयोजन किया गया।इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से कवियों ने हिस्सा लिया। स्वागत वक्तव्य देते हुए प्रो.संजय जायसवाल ने कहा कि साहित्य संवाद एक सृजनात्मक संवाद है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक शंभुनाथ ने कहा कि कविताएं मानवीय संवेदनाओं की पुल हैं जो सबको जोड़ती है। हमें प्रेम के साथ प्रतिरोध का पाठ सुनाती है। चर्चित कवि पंकज चतुर्वेदी (कानपुर) ने अपनी कविताओं में व्यवस्था के अमानवीय पक्ष के विरुद्ध जबदस्त व्यंग्य करते हुए कहा कि कविता मानव विरोधी घटनाओं का प्रतिकार है। प्रो. मनीषा झा (उत्तर बंग विश्वविद्यालय) ने स्त्री विमर्श की कविताओं का पाठ किया। युवा कवि वीरू सोनकर (कानपुर) की कविताओं में असहमति का साहस दिखा। इसके अलावा आनंद गुप्ता, धीरेंद्र धवल,(प्रयागराज) श्रीप्रकाश गुप्त, मनीषा गुप्ता, इबरार खान (कल्याणी विश्वविद्यालय), प्रेम कुमार साव (बर्दवान विश्वविद्यालय), गायत्री वाल्मीकि (विद्यासागर विश्वविद्यालय),प्रीति साव (कलकत्ता विश्वविद्यालय) ने अपनी कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर रामनिवास द्विवेदी, शिवनाथ पांडे, कुलदीप कौर,अल्पना नायक,राज्यवर्धन, गीता दूबे,रेखा सिंह,अनीता राय,प्रमोद प्रसाद, श्रीकांत द्विवेदी, रामप्रवेश रजक, आदित्य गिरि, गौतम लामा, रावेल पुष्प सहित भारी संख्या में साहित्य और संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मधु सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ अवधेश प्रसाद ने दिया। कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालन हेतु तकनीकी सहयोग उत्तम ठाकुर,सूर्यदेव राय, राहुल गौंड़ तथा रूपेश कुमार यादव ने दिया।

भक्ति और वीर रस के रंगों से सजी है सुन्दरी कुंवरी बाई की कविता

‘ऐसे उत्पादों का बहिष्कार करें जो पर्यावरण के लिए घातक हो’

कोलकाता : भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वेबिनार का आयोजन किया प्रमुख अतिथियों में हुलडेक रिसाइकलिंग प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक नंदन माल और क्लाइमेट चेंज प्रोग्राम, दक्षिण और दक्षिण पूर्वी एशिया के निदेशक अजय मित्तल उपस्थित रहे जिन्होंने ने पर्यावरण की वर्तमान स्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। 60 से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति रही ।कार्यक्रम का उद्घाटन किया भवानीपुर कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने। अपने वक्तव्य में प्रो शाह ने पर्यावरण की सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए और सुंदर वन में पेड़ लगाने की बात पर जोर दिया। कॉलेज की एनएसएस टीम ने गत की वर्षों से वहाँ बड़ी संख्या में पेड़ लगाए हैं और विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया है। प्रो. उर्वी शुक्ला ने कहा कि ऐसे उत्पादों का ही बहिष्कार करें जिनसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता हो।
अजय मित्तल ने पर्यावरण, ग्लोबल वार्मिंग पर स्लाइड्स के द्वारा विश्व और पश्चिम बंगाल के पर्यावरण संरक्षण पर उनका संगठन विभिन्न प्रकार से कार्य कर रहा है, विस्तार से जानकारी दी। अम्फान और यास जैसे बहुत से तूफ़ान हर वर्ष पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।हम व्यक्तिगत रूप से ध्यान देकर पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं। नंदन लाल ने कूड़ा करकट और गंदगी का प्रबंधन और पुनर्निर्माण उनकी कंपनी किस प्रकार कर रही है, बताया। अगली लड़ाई जल संसाधन को लेकर है। पीने के पानी की कमी होती जा रही है। बारिश के पानी का संरक्षण करने के लिए हम अपनी छत में टंकी बना कर जल संरक्षण में मदद दे सकते हैं। भविष्य में आने वाली पीढ़ी के लिए हमें अभी से सरकारी, गैर सरकारी और एनजीओ को बड़े स्तर पर काम करने की आवश्यकता है। नल से रिसते पानी की समस्या से भी निपटने की आवश्यकता है। अंत में पर्यावरण संबंधी प्रश्नोत्तर सेशन प्रो उर्वी शुक्ला ने विद्यार्थियों से किया और पूरे कार्यक्रम का संचालन भी किया। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने घरेलू फर्नीचर, बेड, मोबाइल औद्योगिक और कन्स्ट्रकशन आदि बेकार वस्तुओं को एक ही कूड़ा जगह पर फेंकने पर आपत्ति जताई। ई वेस्ट हटाने के लिए सरकारी नियमों के विषय में अजय मित्तल से जानकारी प्राप्त की। प्रो. दिव्या उडीसी, प्रो श्रद्धा अग्रवाल और अन्य शिक्षक उपस्थित रहे कीर्ति शर्मा और गौरव किल्ला का सहयोगी रहे। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

गालिब : ‘ग़र नहीं है मेरे अश आ़र में माने न सही

वसुंधरा मिश्र

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाजे गुफ्तगू क्या है
ग़ालिब उर्दू भाषा के एकमात्र शायर और साहित्यकार हैं जिनके व्यक्तित्व और साहित्य पर सबसे अधिक लेख गए हैं। दीवान के तो इतने संस्करण हो गए हैं कि उनकी गणना भी संभव नहीं है। मिर्ज़ा असद उल्ला खां ‘गालिब’ – पहले असद और फिर ग़ालिब उपनाम से प्रसिद्ध हुए। इनका जन्म 27 दिसंबर 1797 को आगरा में हुआ था।
ये बहादुर शाह जफर के जमाने में पैदा हुए थे। 1857 का गदर उन्होंने देखा था। अव्यवस्था और निराशा के उस जमाने में मानव प्रेम और दार्शनिक दृष्टि से साहित्य में आए। शुरू में तो उनकी मौलिकता की हंसी उड़ाई गई लेकिन बाद में इतना बढ़ावा मिला कि शायरी की दुनिया का नजारा ही बदल गया।
पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है
कोई बतलाओ कि हम बतलाएं क्या।
गालिब उर्दू साहित्य के अपने युग के ‘अदबी बली’ मतलब साहित्यिक अवतार थे और आधुनिक युग के भी।
गालिब परंपराओं से विद्रोह और उस डगर से हटकर अपनी बात करते इसी कारण संसार ने वही व्यवहार किया जो हर वली मतलब अवतार से किया जाता रहा है।
गालिब ने दर्शन सिद्ध अवतार मद्यप माशूक आदि को नए आयाम दिए।
सनम सुनते हैं तेरी भी कमर है
कहां है? किस तरफ़ है? औ किधर है?
सितारे जो समझते हैं गलतफहमी है ये उनकी।
फ़लक पर (आकाश) आह पंहुची है मेरी चिनगरियां होकर।।
वे नाजुक ख्याली और शायरी का शिखर मान रहे थे, गालिब ने लिखा –
दाम हर मौज में है हल्का – ए-सदकामे नहंग।
देखें क्या गु़ज़रे है क़तरे पे गुहर होने तक
जब उन्होंने नींद के मातों और माशूक की कमर की तलाश करने वाले कवियों को ललकारा तो लोग आश्चर्य में पड़ गए कि यह नया कौन कवि पैदा हुआ है। वे विरोधों को हंस हंस कर सहते रहे – कोई उन्हें मुश्किल पसंद (जटिल भाषा लिखने वाला) कोई मोह-मल-गो (अर्थ हीन शेर कहने वाला) और किसी ने सिरे से सौदाई ही कह डाला।
गालिब पर किसी का प्रभाव न पड़ा। वे कहते हैं – नमाज़ काबे की ओर मुंह करके पढ़ी जाती है पर काबा तो केवल कम्पास की सुई मात्र है जो रास्ता दिखाती है। सिजदे का वास्तविक स्थान समझ से बहुत परे है।
गजल की तंग गली (संकुचित क्षेत्र) गालिब को शेर कहने के के शौक के अनुकूल सामर्थ्य नहीं रखती, उनके बयान के लिए विशाल क्षेत्र की आवश्यकता है।
न सताइश (प्रशंसा) की तमन्ना न सिले (पुरस्कार) की परवा।
अंदाज़े – बयां (वर्णन शैली) से हटकर उन्होंने वास्तविक जीवन के रंगों को पकड़ा। 25 वर्ष की आयु में 2000 शेर ‘बेदिल’ के रंग में कह डाले जिस पर उर्दू के प्रसिद्ध शायर और उस्ताद मीर तकी मीर ने भविष्यवाणी की थी कि ‘अगर इस लड़के को कोई अच्छा उस्ताद मिल गया तो वह इसे रास्ते पर डाल देगा, यह लाजवाब शायर बनेगा वरना मोहमल (अर्थहीन) बकने लगेगा।’
‘ग़र नहीं है मेरे अश आ़र में माने न सही।’ कहते हुए जीवन के गीत गाते रहे गालिब उनके कलम की आवाज दैवीय आवाज है जो हमारे कानों में गूंजकर हृदय में उतरकर उद्भावनाओं के नये नये मार्ग सुझा रही है। खगोल, ज्योतिष, तर्क, दर्शन पदार्थ विज्ञान, संगीत तसव्वुफ सभी उनकी रचनाओं में मिलता है।
तेरह वर्ष में उमराव बेगम से विवाह किया। बीबी को वे पांवों की बेड़ी कहते हैं। दिल्ली में आकर उनकी शायरी और भी रंग लाई।
उनका मानना था कि हर पुरानी लकीर सिराते – मुस्तकीम (सीधा मार्ग) नहीं है और पूर्वज जो कह गए हैं वह पूरी तरह सनद (प्रामाणिक) नहीं हो सकती।