Friday, April 10, 2026
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बुजुर्गों का ख्याल रखने में यूपी -एमपी से आगे हैं बिहारी

पटना :  देश में बुजुर्गों का ख्याल रखने के मामले में बिहार की स्थिति उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश से बेहतर है। वृद्ध राज्यों की श्रेणी में बुजुर्ग लोगों को गुणवत्ता प्रदान करने की बात आती है तो बिहार शीर्ष-3 राज्यों में शामिल है। इसमें राज्यस्थान पहले नंबर पर है। इसके बाद महाराष्ट्र और फिर बिहार का नंबर आता है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अध्यक्ष डॉ. बिबेक देबरॉय ने ‘बुजुर्गों के लिए जीवन की गुणवत्ता सूचकांक’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है।

इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट
ईएसी-पीएम के अनुरोध पर इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस की ओर से यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में राज्यों को दो श्रेणियों बुजुर्ग (जहां वरिष्ठ नागरिकों की आबादी 50 लाख से अधिक है) और ‘अपेक्षाकृत बुजुर्ग’ (जहां बुजुर्गों की आबादी 50 लाख से कम है) में बांटा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘अपेक्षाकृत बुजुर्ग’ श्रेणी के राज्यों में हिमाचल प्रदेश शीर्ष पर है जबकि उत्तराखंड और हरियाणा इस श्रेणी के राज्यों में क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।

बुजुर्गों को बेहतर सुविधा के मामले में तीसरे नम्बर पर बिहार
बुजुर्ग आबादी वाले राज्यों में बिहार का कुल स्कोर 51.82 है। वहीं टॉप दो राज्यों राजस्थान और महाराष्ट्र ने क्रमशः 54.61 और 53.31 स्कोर किया है। इंडेक्स का मूल्यांकन बुजुर्गों की भलाई को लेकर करीब 45 अलग-अलग संकेतकों पर किया गया था। जिसमें चार स्तंभ – वित्तीय, सामाजिक कल्याण, हेल्थ सिस्टम और इनकम सिक्योरिटी शामिल हैं। दूसरे पैरामीटर में आर्थिक सशक्तिकरण, शैक्षिक योग्यता और रोजगार, सामाजिक स्थिति, शारीरिक और सामाजिक सुरक्षा, बुनियादी स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक कल्याण आदि शामिल हैं।

18 मद्रास रेजिमेंट कैप्टन आशुतोष कुमार को मरणोपरान्त शौर्य चक्र

नयी दिल्‍ली : सेना की 18 मद्रास रेजिमेंट के कैप्टन आशुतोष कुमार को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। अपने साथी सैनिकों की जान बचाने और आतंकियों को मौत के घाट उतारने के लिए उन्‍हें यह सम्‍मान मिला है। आशुतोष पिछले साल नवंबर में जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन के दौरान अपनी यूनिट की पलटन ‘घातक’ का नेतृत्व कर रहे थे।नवंबर 2020 में कैप्टन आशुतोष कुमार की यूनिट 18 मद्रास रेज‍िमेंट को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के करीब जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात किया गया था। यूनिट के सैनिक नियमित रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगे हुए थे। तब नियंत्रण रेखा अत्यधिक सक्रिय और अस्थिर बनी हुई थी। युद्धविराम उल्लंघन कई बार और बिना किसी चेतावनी के होता था।
कुपवाड़ा जिले के माछिल सेक्टर में अग्रिम चौकियों को चलाने के अलावा कैप्टन आशुतोष कुमार की इकाई ने घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए भी अभियान चलाया हुआ था। कारण है कि इसके एओआर (एरिया ऑफ ऑपरेशन) में सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ को रोकना शामिल था।
8 नवंबर 2020 को एलओसी से लगभग 3.5 किमी की दूरी पर घुसपैठ विरोधी बाधा प्रणाली के नजदीक बीएसएफ के गश्ती दल की ओर से लगभग 1 बजे घुसपैठ की एक ऐसी कोशिश की सूचना दी गई थी। जैसे ही गोलीबारी तेज हुई 18 मद्रास के सैनिक घुसपैठियों से निपटने के लिए पहुंच गए।
कैप्टन आशुतोष कुमार ने अपनी टीम के साथ घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करने और आतंकवादियों को जवाब देने के लिए मोर्चा संभाल लिया। आतंकवादियों के साथ संपर्क लगभग 4 बजे टूट गया था, लेकिन लगभग 10.20 बजे फिर से स्थापित हो गया था। घुसपैठियों को विभिन्न निगरानी उपकरणों से ट्रैक किया जा रहा था।
कैप्टन आशुतोष कुमार ने संभावित बचने के रास्तों को बंद करने के लिए अपने सैनिकों को चतुराई से तैनात किया था। भीषण गोलीबारी में तीन आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया था। हालांकि, इस गोलीबारी के दौरान कैप्टन आशुतोष कुमार और उनके चार साथियों को गोलियां लगीं और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में कैप्टन आशुतोष कुमार और दो और सैनिकों हवलदार प्रवीण कुमार और राइफलमैन रियादा महेश्वर ने दम तोड़ दिया और शहीद हो गए। कैप्टन आशुतोष कुमार एक बहादुर सैनिक और बेहतरीन अधिकारी थे। उन्‍होंने 24 साल की उम्र में अपने कर्तव्य के मार्ग में आगे बढ़कर नेतृत्व किया और देश के लिए अपने जीवन को न्यौछावर कर दिया।
बिहार के लाल ने बढ़ाया देश का मान
कैप्टन आशुतोष कुमार का जन्म 15 अक्टूबर 1996 को हुआ था। वह बिहार के मधेपुरा जिले के परमपुर गांव के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम रवींद्र यादव और माता का गीता देवी है। कैप्टन आशुतोष की दो बहनें खुशबू और अंशु हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा ओडिशा के सैनिक स्कूल भुवनेश्वर से की। सैनिक स्कूल में पढ़ते हुए उनका सेना के प्रति झुकाव बढ़ा। वहीं से उनके भविष्य के सैन्य जीवन की नींव पड़ी।
सेना में शामिल होने का उनका संकल्प उम्र के साथ बढ़ता गया। स्कूल खत्म होने के बाद उनका चयन एनडीए में हो गया। बाद में वह आईएमए देहरादून गए। जून 2018 में 21 साल की उम्र में लेफ्टिनेंट के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। उन्होंने मद्रास रेजिमेंट के 18 मद्रास में कमीशन प्राप्त किया। यह एक इंफैंट्री रेजिमेंट है जो अपने निडर सैनिकों और कई युद्ध कारनामों के लिए जानी जाती है। एक युवा लेफ्टिनेंट के रूप में उन्हें अपने पहले तैनाती के रूप में जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में तैनात किया गया था। वह जल्द ही एक शानदार अधिकारी के तौर पर उभरे।
आशुतोष के साथ इन छह को मिला सम्‍मान
पिछले साल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में बहादुरी दिखाने के लिए आशुतोष सहित छह शूरवीरों को शौर्य चक्र सम्‍मान मिला है। इनमें आशुतोष को अकेले मरणोपरांत यह सम्‍मान दिया गया है। उनके अलावा मेजर अरुण कुमार पांडे, मेजर रवि कुमार चौधरी, कैप्टन विकास खत्री, राइफलमैन मुकेश कुमार और सिपाही नीरज अहलावत को यह प्रतिष्ठित सम्‍मान मिला है।

जेसिका लाल की बहन सबरीना का निधन

नयी दिल्ली : जेसिका लाल के हत्यारों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाली उनकी बहन सबरीना लाल का रविवार शाम निधन हो गया। यह जानकारी उनके भाई रंजीत लाल ने दी।
उन्होंने पीटीआई-भाषा से फोन पर कहा, ‘‘वह (सबरीना) अस्वस्थ थीं और उनका अस्पताल आना-जाना लगा रहता था। कल, घर में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और हम उन्हें अस्पताल ले गए। आज शाम, उनका निधन हो गया।’’
पिछले साल, सबरीना ने पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में न्याय प्राप्त करने में महिलाओं की मदद करने के लिए अपनी बहन की स्मृति में एक फाउंडेशन शुरू करने की योजना के बारे में बात की थी।
जेसिका लाल की 1999 में राष्ट्रीय राजधानी स्थित एक रेस्तरां में हत्या कर दी गई थी। सबरीना ने कहा था, ‘‘वह (जेसिका) अपने जीवन में बहुत ही खुश और सकारात्मक नजरिए वाली थी। यह सिर्फ उसके जन्मदिन और बरसी तक सीमित नहीं है कि मुझे उसकी कमी खलती हो, हर रोज मुझे उसकी कमी खलती है। मैंने अपने घर में उसकी बहुत सी तस्वीर लगा रखी हैं और मैं उसे भूलना नहीं चाहती, ये (तस्वीरें) मुझे उसकी याद दिलाती रहती हैं।

इंडियन आइडल-12 के विजेता बने पवनदीप राजन

मुम्बई : गाने के रियलिटी शो ‘इंडियन आइडल’ के 12वें सीजन के विजेता पवनदीप राजन चुने गए हैं। पवनदीप ने कहा कि इस जीत से उनमें और मेहनत करने की हिम्मत आई है।
उत्तराखंड के चंपावत के रहने वाले पवनदीप को गत रविवार रात को शो का विजेता घोषित किया गया। इससे पहले रविवार को यह शो लगातार 12 घंटे तक चला था। इस शो के जज थे अनु मलिक, हिमेश रेशमिया और सोनू कक्कड़।
पवनदीप ने इंडियन आइडल सीजन-12 में अपनी जीत को ‘अविश्वसनीय’ बताया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं भाग्यशाली हूं और बहुत ही खुश हूं। यह एक जिम्मेदारी है जिसे मैं अच्छे से निभाऊंगा। इस जीत से मुझमें काम करने का भरोसा जागा है। ऑडिशन के वक्त तो मैं बहुत घबराया हुआ था, लगा था जैसे कि चुना भी नहीं जाऊंगा लेकिन यह यात्रा अच्छी रही।’’
पवनदीप को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन की तरफ से 25 लाख रुपये का चेक और एक मारूति सुजुकी स्विफ्ट कार दी गयी है। अरूणिता कांजीलाल दूसरे स्थान पर और सायली काम्बले तीसरे स्थान पर आई हैं। उन्हें पांच-पांच लाख रूपये दिए गए हैं। चौथे और पांचवे स्थान पर आए दानिश और निहाल को तीन-तीन लाख रुपये दिए गए हैं।

कोरोनाकाल में करें ऑनलाइन व्यवसाय

कोरोना काल में अगर आप कम जोखिम के साथ खुद का काम शुरू करना चाहते हैं तो अमेजन, फ्लिपकार्ट और पेटीएम जैसी ई-कॉमर्स साइट के साथ बिजनेस शुरू कर सकते हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनियां काफी मुनाफे में चल रही हैं। साथ ही ई-कॉमर्स साइट से जुड़ना भी बेहद आसान है। आज हम आपको बता रहे हैं कि आप कैसे इनसे जुड़कर अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं और इसे कैसे आगे बढ़ा सकते हैं।

अमेजन पर ऐसे बेच सकते हैं प्रोडक्ट

ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

  • सबसे पहले आपको sell.amazon.in पर अपना विक्रेता (सेलर) अकाउंट बनाना होगा।
  • इसके लिए कुछ डॉक्युमेंट्स की जरूरत होगी जैसे GST, पैन, आधार और अपना अकाउंट नंबर देना होगा।
  • इसके अलावा आपको अपना मोबाइल नंबर और ई-मेल ID भी देनी होगी।

प्रोडक्ट लिस्ट को अपलोड करें

  • एक बार आप अपना सेलर अकाउंट बना लेते हैं तो इसके बाद आपको अपने प्रोडक्ट को अमेजन की साइट पर अपलोड करना होगा।
  • जैसे ही अपलोड हो जाएगा, आपका प्रोडक्ट साइट पर बिकने के लिए दिखने लगेगा।
  • आप अमेजन पर प्रोडक्ट बेचते हैं, तो उसमें आपके पास स्टोरेज, पैकेजिंग, डिलीवरी और रिटर्न को मैनेज करने का विकल्प होगा।
  • FBA या Easy Ship में, Amazon डिलीवरी और ग्राहक द्वारा रिटर्न किए जाने वाले प्रोडक्ट हैंडल करेगा। आप चाहें तो प्रोडक्ट की खुद डिलीवरी कर सकते हैं।

पेमेंट कैसे मिलेगा?
डिलीवरी की प्रोसेस पूरी होने पर आपके प्रोडक्ट का पैसा 7 दिनों में आपके बैंक अकाउंट में आ जाएगा।

प्रोडक्ट बेचने पर रेफरल फीस देनी होगी
जब आप अमेजन के जरिए अपना प्रोडक्ट बेचते हैं तो आपको रेफरल फीस देनी होती है। ये कम से कम 2% रहती है। यानी, आपके प्रोडक्ट की कीमत में से 2% काट कर बाकी पैसा आपके अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

फ्लिपकार्ट पर ऐसे बेच सकते हैं प्रोडक्ट

ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

  • फ्लिपकार्ट पर प्रोडक्ट बेचने के लिए आपको सेलर अकाउंट बनाना होगा।
  • इसके लिए आपके पास मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, TIN नंबर, GST नंबर और खुद का बैंक अकाउंट होना जरूरी है।
  • सेलर अकाउंट बनाने के लिए आपको seller.flipkart.com पर जाना होगा।
  • जहां ये सभी जानकारी भरने के बाद आपको अपने बिजनेस और प्रोडक्ट की डिटेल्स भरनी होगी।
  • ये जानकारी देने के बाद आपका रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा।

प्रोडक्ट लिस्ट को अपलोड करें

  • सेलर अकाउंट बनाने के बाद आपको अपने प्रोडक्ट की डिटेल्स को फ्लिपकार्ट की साइट पर अपलोड करना होगा।
  • जैसे ही आप प्रोडक्ट की डिटेल्स को अपलोड करेंगे, आपका प्रोडक्ट फ्लिपकार्ट पर बिकने के लिए दिखने लगेगा।

पेमेंट कैसे मिलेगा?
आपका प्रोडक्ट बिकने के बाद 7 से 15 दिन में फ्लिपकार्ट आपको आपके अकाउंट में पेमेंट कर देगा। पेमेंट को लेकर कुछ परेशानी होने पर आप फ्लिपकार्ट सेलर अकाउंट में दिए गए नंबर पर कॉल कर सकते हैं या [email protected] पर ई-मेल कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

पेटीएम मॉल पर भी बेच सकते हैं प्रोडक्ट
अगर आप पेटीएम (Paytm) के साथ बिजनेस करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको पेटीएम का सेलर बनना होगा। पेटीएम ने पेटीएम मॉल के नाम से ऑनलाइन शॉपिंग साइट शुरू की थी। पेटीएम का सेलर बनने के लिए आपको कोई निवेश नहीं करना होगा।

ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

  • इसके लिए आपको पेटीएम seller.paytm.com पर साइन अप करना होगा।
  • इसके बाद अगला पेज खुलेगा जहां आपको कैंसिल चेक, पेन कार्ड, कंपनी एड्रेस प्रूफ, वेयर हाउस एड्रेस प्रूफ और GST नंबर की जानकारी देनी होगी।
  • आपको अपने प्रोडक्‍ट या सर्विस का कैटलॉग अपलोड करना होगा। इसके बाद आप अपने प्रोडक्ट की बिक्री शुरू कर सकते हैं।

कैसे मिलता है पैसा?
आपका पेआउट प्रोडक्ट की डिलीवरी की डेट से 10-12 वर्किंग-डे के अंदर प्रोसेस किया जाएगा। इसे आप ट्रैक भी कर सकते हैं। आपको ऑर्डर मिल जाने के बाद ऑर्डर प्रोसेस होता है, जिसमें आप प्रोडक्ट की पैकिंग करते हैं। इसके बाद ऑर्डर भेजना होता है और ऑर्डर डिलीवरी होने के बाद पेटीएम आपको पैसा देता है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

सब्र

श्वेता गुप्ता

सब्र करो, सब कहते मुझसे,
पर कितना सब्र करू मैं?!

अधूरे रिश्ते,अधूरे वादे,
पर कितना डटी रहूं मैं?!
आंख मूंदे, सपने को सीते,
और कब तक हठ करू मैं?!
विरह की अग्नि में खुद को जलाकर,
और कब तक मरहम करू मैं?!

सब्र करो, सब कहते मुझसे,
पर कितना सब्र करू मैं?!

वक्त गुजरे, कोई उसको रोको,
और कब तक, परखती रहू मैं?!
हर कोई तेजी से बढ़ता,
और कब तक, विलंब करू मैं?!

सब्र करो, सब कहते मुझसे,
पर कितना सब्र करूं मैं?!

सब्र का बांध, अब टूटा जाए,
रिश्ते नाते, सब छूटा जाए,
किस्मत को आजमा ले तू,
सब्र छोड़, अपना ले तू ।

किस्मत का रोना छोड़, उठा हथियार, अब लिखता चल,
डटे रहे तू, मरहम लगाकर, विलंब न कर,
अब उठजा तू।
जीत निश्चित है, अब डर मत तू ।

सब्र करो ,सब कहते मुझसे,
अब और ,सब्र ना करे तू ।
अब और सब्र ना करे तू ।।

 

‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन के जनक क्रांतिकारी सरदार अजीत सिंह

भतीजे शहीद भगत सिंह की प्रेरणा भी थे 
सरदार अजीत सिंह का जन्म 23 फरवरी 1881 को पंजाब के जालंधर के खटकड़ कलां गांव में हुआ था। अजीत सिंह शहीद भगत सिंह के चाचा थे। साल 1907 में अंग्रेज सरकार तीन किसान विरोधी कानून लेकर आई, जिसके खिलाफ अजीत सिंह ने ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन चलाया। जीवनभर देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले सरदार अजीत सिंह का भारत की आजादी के दिन ही 66 साल की उम्र में देहांत हो गया।
देश के स्वाधीनता संग्राम में कई अमर क्रांतिकारी हुए जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान देकर देश को आजादी दिलाई। हालांकि हमारे एजुकेशन सिस्टम में बहुत सीमित क्रांतिकारियों और आंदोलनकारियों को जगह दी गई जिससे बेहद कम लोगों को इनके बारे में जानकारी है। ऐसे ही एक क्रांतिकारी थे सरदार अजीत सिंह…अजीत सिंह का जन्म 23 फरवरी 1881 को पंजाब के जालंधर के खटकड़ कलां गांव में हुआ था। शहीद भगत सिंह के पिता किशन सिंह उनके बड़े भाई थे। सरदार अजीत सिंह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जालंधर से करने के बाद बरेली के लॉ कॉलेज से आगे की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही वह भारत के स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल हो गए और अपनी कानून की पढ़ाई को बीच में ही छोड़ दिया। अजीत सिंह और उनका परिवार आर्य समाज से खासा प्रभावित था और इसका प्रभाव भगत सिंह पर भी पड़ा। अजीत सिंह पंजाब के उन पहले आंदोलनकारियों में से एक थे, जिन्होंने खुले तौर पर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी। अपने भतीजे भगत सिंह के लिए भी उन्होंने क्रांति की नींव रखने का काम किया।

बाल गंगाधर तिलक से बेहद प्रभावित थे अजीत सिंह
लॉ की पढ़ाई बीच में छोड़ने के बाद अजीत सिंह का साल 1906 में बाल गंगाधर तिलक से परिचय हुआ और वह उनसे बेहद प्रभावित हुए। किशन सिंह और अजीत सिंह ने भारत माता सोसाइटी की स्थापना की और अंग्रेज विरोधी किताबें छापनी शुरू कर दीं। अपने लेख ‘स्वाधीनता संग्राम में पंजाब का पहला उभार’ में भगत सिंह ने लिखा, ‘जो युवक लोकमान्य (बालगंगाधर तिलक) के प्रति विशेष रूप से आकर्षित हुए थे, उनमें कुछ पंजाबी नौजवान भी थे। ऐसे ही दो पंजाबी जवान मेरे पिता किशन सिंह और मेरे आदरणीय चाचा सरदार अजीत सिंह जी थे।’
‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन के जनक
साल 1907 में अंग्रेज सरकार तीन किसान विरोधी कानून लेकर आई, जिसके खिलाफ देशभर में किसानों ने नाराजगी जताई। सबसे ज्यादा विरोध पंजाब में हुआ और सरदार अजीत सिंह ने आगे बढ़कर इस विरोध को सुर दिया। उन्होंने पंजाब के किसानों को एकजुट किया और जगह-जगह सभाएं कीं। इन सभाओं में लाला लापजत राय को भी बुलाया गया। मार्च 1907 की लायलपुर की सभा में पुलिस की नौकरी छोड़ आंदोलन में शामिल हुए लाला बाँके दयाल ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ शीर्षक से एक कविता सुनाई। बाद में यह कविता इतनी लोकप्रिय हुई कि उस किसान आंदोलन का नाम ही ‘पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन’ पड़ गया।

अंग्रेज सरकार झुकी, तीनों किसान विरोधी कानून वापस लिए
इस एक साल के दौरान सरदार अजीत सिंह के भाषणों की गूंज अंग्रेजी हुकूमत के कानों में चुभने लगी थी। अंग्रेज सरकार सरदार अजीत सिंह को शांत कराने का कोई मौका तलाश रही थी और यह मौका उन्हें 21 अप्रैल 1907 को मिल ही गया। रावलपिंडी की एक सभा में अजीत सिंह ने ऐसा भाषण दिया, जिसे अंग्रेज सरकार ने बागी और देशद्रोही भाषण माना। उन पर आईपीसी की धारा 124-ए के तहत केस दर्ज किया गया। हालांकि आंदोलनों का असर यह रहा कि अंग्रेज सरकार ने तीनों कानूनों को वापस ले लिया, मगर लाला लाजपत राय और अजीत सिंह को छह महीने के लिए बर्मा की मांडले जेल में डाल दिया।
लोकमान्य तिलक ने अजीत सिंह को ‘किसानों का राजा’ कहकर ताज पहनाया
मांडले जेल से निकलने के बाद अजीत सिंह दिसंबर 1907 में आयोजित हुई सूरत कांग्रेस में भाग लेने गए, जहां लोकमान्य तिलक ने अजीत सिंह को ‘किसानों का राजा’ कह कर एक ताज पहनाया। अजीत सिंह ने किसान आंदोलन के अलावा पंजाब औपनिवेशीकरण कानून और पानी के दाम बढ़ाने के खि‍लाफ भी विरोध प्रदर्शन किए।

ईरान और दुनिया भर में घूम-घूमकर क्रांतिकारियों को एकजुट किया
इसके बाद सरदार अजीत सिंह अपने साथी क्रांतिकारी सूफी अंबा प्रसाद के साथ ईरान चले गए और वहां अगले दो साल रहकर क्रांतिकारी गतिविधियों में लगे रहे। दोनों ने मिलकर ऋषिकेश लेथा, जिया उल हक, ठाकुर दास धुरी जैसे कई और आंदोलनकारी खड़े किए। इसके बाद उन्होंने रोम, जिनीवा, पैरिस, रियो डी जनीरो जैसे दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों में घूम-घूमकर क्रांतिकारियों को संगठित किया। साल 1918 में वह सैन फ्रांसिस्को में गदर पार्टी के संपर्क में आए और उनके साथ कई सालों तक काम किया। 1939 में यूरोप लौटने के बाद उन्होंने इटली में सुभाष चंद्र बोस की भी मदद की।

आजादी की सुबह देखकर ही ली अंतिम सांस
साल 1946 आते-आते भारत की आजादी की राह साफ होने लगी थी। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अजीत सिंह से बात की और उन्हें वापस भारत बुला लिया। कुछ समय तक दिल्ली में रहने के बाद वह हिमाचल प्रदेश के डलहौजी चले गए। आखिरकार 15 अगस्त 1947 की वह सुबह आई जिसके लिए उन्होंने इतने साल संघर्ष किया, जिस आजादी की राह में उन्होंने अपने भतीजे भगत को भी खो दिया…मगर आजादी के उस जश्न को वह बाकी लोगों की तरह मना पाते उससे पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं। सरदार अजीत सिंह का भारत की आजादी के दिन ही 66 साल की उम्र में देहांत हो गया। उनकी याद में डलहौजी के पंजपुला में एक समाधि बनाई गई है, जो अब एक मशहूर पर्यटन स्थल है।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

बंगाल में 31 अगस्त तक बढ़ीं पाबंदियां, 50 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे सिनेमाघर

कोलकाता : बंगाल में कोविड -19 को लेकर प्रतिबन्ध 31 अगस्त तक बढ़ा दिये गये हैं। इस निर्णय की जानकारी देते हुए सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि तीसरी लहर का खतरा अब भी है। कुछ ढील रहेंगी जैसे कि रात में पूर्ण लॉकडाउन की अवधि पहले रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक थी जिसे अब रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक कर दिया गया है।
50 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे थिएटर
वहीं सिनेमा हॉल,थिएटर, ऑडिटोरियम, स्टेडियम और स्वीमिंग पूल 50 फीसदी क्षमता के साथ खोले जा सकते हैं। पहले इन चीजों के खोलने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई थी। जिसे अब सरकार ने हटा लिया है।
रात 10:30 तक खुले रह सकते हैं रेस्तरां और बार
नये निर्देशों के मुताबिक रेस्तरां और बार रात 10:30 तक खुले रह सकते हैं. पश्चिम बंगाल में पहले बार और रेस्टोरेंट को सिर्फ तीन घंटे खोलने की इजाजत थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है।
एक घंटे ज्यादा चलेगी मेट्रो
पश्चिम बंगाल में मेट्रो रेल ने शहर में अपने उत्तर-दक्षिण गलियारे पर सोमवार से शाम को सेवा के समय में एक घंटे बढ़ाने का फैसला किया है। अब आखिरी ट्रेन रात नौ बजे टर्मिनल स्टेशनों से रवाना होगी।
बढ़ाई गयी ट्रेनों की संख्या
कोलकाता मेट्रो के अधिकारियों ने यात्रियों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए ट्रेनों की दैनिक संख्या 220 से बढ़ाकर 228 कर दी है और व्यस्तम समय में हर पांच मिनट के अंतराल पर ट्रेन मिलेगी।
नाइट कर्फ्यू में दी गयी छूट
पश्चिम बंगाल सरकार ने घोषणा की है कि राज्य में कोविड-19 महामारी के कारण रात के समय आवाजाही पर लगाई रोक 16 अगस्त से रात्रि 11 बजे से सुबह पांच बजे तक रहेगी, न कि रात नौ बजे से लागू होगी।

 

स्वतंत्रता सेनानी की विधवा बेटी पेंशन की हकदार : दिल्ली हाई कोर्ट

नयी दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना को लेकर एक अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी की विधवा या तलाकशुदा बेटी स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना के तहत आश्रित पेंशन के लिए पात्र नहीं है। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने केंद्र से आठ सप्ताह के भीतर आश्रित पेंशन देने के मामले पर विचार करने के लिए कहा, बशर्ते वह योजना के तहत अन्य शर्तों को पूरा करती हो।
न्यायालय दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी की विधवा बेटी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें आदेश को चुनौती दी गयी थी। न्यायाधीश ने कहा कि वह देश के अन्य उच्च न्यायालयों के विचार से सहमत हैं, जिन्होंने इस योजना के तहत उन तलाकशुदा और विधवा बेटियों को पेंशन का लाभ दिया है जो आश्रित हैं। अदालत ने आदेश दिया, ‘वर्तमान रिट याचिका स्वीकार की जाती है। 12 फरवरी 2020 का आदेश रद्द किया जाता है। प्रतिवादी याचिकाकर्ता को पेंशन योजना के तहत आश्रित पेंशन देने के याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करेंगे, अगर वह योजना के तहत अन्य शर्तों को पूरा करती है।’ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा पारित एक फैसले का जिक्र करते हुए, अदालत ने कहा कि बेटियों को योजना के दायरे से पूरी तरह से बाहर नहीं रखा गया है क्योंकि एक अविवाहित बेटी का उल्लेख पात्र आश्रितों की सूची में किया गया था और इस प्रकार एक तलाकशुदा बेटी को बाहर करना एक उपहास होगा जो एक आश्रित है। वर्तमान मामले में योजना का लाभ प्राप्त कर रहे स्वतंत्रता सेनानी का नवंबर 2019 में निधन हो गया। वह अपने पीछे अपनी विधवा बेटी को छोड़ गए जो शारीरिक रूप से दिव्यांग, मानसिक रूप से विक्षिप्त और बेरोजगार है। केंद्र ने फरवरी 2020 में उसे यह कहते हुए एक संदेश भेजा कि आश्रित के लिए उसका अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया है क्योंकि संशोधित नीति दिशानिर्देशों में विधवा / तलाकशुदा बेटी को पात्र नहीं माना गया है।

‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर कवि गोष्ठी

कोलकाता : “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” का आयोजन प्रान्तीय अध्यक्ष डॉ. गिरिधर राय की अध्यक्षता में “राष्ट्रीय कवि संगम” की सेंट्रल कोलकाता इकाई द्वारा किया गया। जिलाध्यक्ष रमाकांत सिन्हा के मधुर सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले वीरों के शौर्य और पराक्रम पर प्रबुद्ध रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक स्वरचित कविताओं का काव्य पाठ कर के श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। डॉ. गिरिधर राय ने अपनी कविता – “यह देश है हमारा इसके हम सिपाही / रक्षा में इस ज़मी की होगीं नहीं कोताही।” से राष्ट्र भक्ति का साफ संदेश दिये। इसी के साथ युवा कवियों को प्रोत्साहित करने तथा आजादी और उसके महत्व को समझाते हुए प्रांतीय महामंत्री राम पुकार सिंह, सेन्ट्रल कोलकाता जिलाध्यक्ष रमाकान्त सिन्हा, हुगली जिलाध्यक्ष रीमा पान्डेय, दक्षिण कोलकाता जिलाध्यक्ष सीमा सिंह, सेंट्रल कोलकाता जिला महामंत्री स्वागता बसु, नार्थ 24 परगना जिला मंत्री सुषमा राय पटेल, सुदामी यादव, आलोक चौधरी आदि ने अपनी राष्ट्रवादी कविताओं से युवा रचनाकारों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले युवा रचनाकारों मे मोनू यादव, निशा राजभर, सपना कुमारी, विश्वरूप शाह परीक्षित, निखिता पाण्डेय, उत्तीर्णा धर, सौमि मजूमदार, बद्रीनाथ साव और अभिषेक पाण्डेय प्रमुख थे, जिन्होंने अपनी-अपनी कविताओं द्वारा सबका मन मोह लिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन अभिषेक पांडे ने किया। प्रांतीय मंत्री बलवंत सिंह गौतम, प्रान्तीय संयोजक देवेश मिश्रा की उपस्थिति ने सबका उत्साह वर्धन किया। कार्यक्रम में रामकाव्य राष्ट्रीय प्रतियोगिता सेंट्रल कोलकाता जिले की संयोजिका मुस्कान साव तथा सह-संयोजिका ज्योति साव भी उपस्थित थी। प्रान्तीय सह संयोजक स्वागता बसु ने कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन किया।