Monday, July 6, 2026
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तीसरी लहर में हवाई टिकट रद्द करने पर सिर्फ एक तिहाई लोगों को मिला ‘रिफंड’!

मुम्बई । कोरोना वायरस महामारी के ओमीक्रोन स्वरूप के रूप मे आई तीसरी लहर के कारण हवाई उड़ानों के टिकट रद्द करने वाले एक-तिहाई से भी कम लोगों को रिफंड या टिकट का पैसा वापस मिल पाया है। एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। ऑनलाइन कम्युनिटी मंच लोकल सर्किल्स के एक सर्वेक्षण में पता चला कि महामारी की तीसरी लहर के आने की वजह से जिन लोगों को होटलों की अपनी बुकिंग निरस्त करनी पड़ी उनमें से 34 प्रतिशत को ही पैसा वापस मिला। इस सर्वेक्षण में भारत के 332 जिलों से लोगों के 20,000 से अधिक जवाब आए। ओमीक्रोन स्वरूप के मामले तेजी से बढ़ने के कारण भारत में ऐसे अनेक लोगों को अपनी यात्राएं रद्द या स्थगित करनी पड़ी हैं जिन्होंने जनवरी से मार्च के बीच यात्रा कार्यक्रम बना रखा था। उनमें से कुछ ने एयरलाइंस और होटलों से बुकिंग के लिए जमा की गई राशि वापस मांगी है।

सर्वेक्षण में हवाई यात्रा निरस्त होने के संबंध में पहला प्रश्न पूछा गया था जिसके जवाब में 29 प्रतिशत लोगों ने कहा, ‘‘ट्रैवल एजेंटों और एयरलाइन कंपनियों ने रद्दीकरण स्वीकार कर लिया और पूरा पैसा लौटा दिया, वहीं 14 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें आंशिक राशि मिली है।’’

वहीं, 29 प्रतिशत लोगों ने बहुत कम पैसा लौटाए जाने की भी बात कही। करीब 14 प्रतिशत लोगों के अनुसार उन्हें धनराशि नहीं लौटाई गई लेकिन बाद की तारीख के लिए उनका टिकट बुक कर दिया गया। लोकल सर्किल्स के संस्थापक सचिन तापड़िया ने कहा, ‘‘इस मंच पर लोग राय दे रहे हैं कि सरकार को कोविड महामारी जारी रहने तक यात्रा बुकिंग रद्द किए जाने पर, खासतौर पर एयरलाइंस और होटलों के लिए पैसा वापसी की विशेष नीति बनानी चाहिए।’’

शनि के इस चंद्रमा पर छिपा हुआ है गुप्त महासागर!

सतह 32 किलोमीटर बर्फ की मोटी चादर से है ढका

वॉशिंगटन । सौर मंडल के दूसरे सबसे बड़े ग्रह शनि के एक चंद्रमा पर 32 किलोमीटर मोटी बर्फ की परत होने का दावा किया गया है। खगोलविदों का मानना है कि मीमास नाम के इस चंद्रमा की बर्फीली मोटी परत के नीचे एक गुप्त महासागर भी मौजूद है। मीमास शनि से सबसे नजदीक बड़े आकार के चंद्रमाओं में से एक है। मीमास चंद्रमा का व्यास 395 किलोमीटर का है। यह सबसे छोटा खगोलीय पिंड है जो अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण सबसे अधिक गोल है।

पहले तरल होने के नहीं मिले थे संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, तस्वीरों और ऑब्जरवेशन से मीमास चंद्रमा पर किसी भी तरल पानी का कोई संकेत नहीं है, लेकिन कोलोराडो में साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के सिमुलेशन से पता चलता है कि इसकी बर्फ मोटी परत के नीचे एक महासागर छिपा हुआ है। 2014 में नासा कैसिनी अंतरिक्ष यान के नापतौल से पता चला है कि इस चंद्रमा की सतह के नीचे कुछ पानी हो सकता है। हालांकि, इसकी अबतक पुष्टि नहीं हुई है।

इस चंद्रमा की आंतरिक गर्मी से नीचे पिघली हुई है बर्फ
नई स्टडी में टीम ने छोटे चंद्रमा के आकार और उसकी बनावट संबंधी विशेषता का पता लगाया। इससे निर्धारित किया गया कि इसकी आंतरिक गर्मी बहते हुए पानी की स्थिति को बनाने में सक्षम है कि नहीं। इस चंद्रमा को सैटर्न I ( Saturn I) के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह शनि के छल्लों के सबसे करीब है। मीमास का कुल क्षेत्रफल स्पेन की जमीनी क्षेत्र से थोड़ा ही कम है।
मीमास का सतह ऊपर से काफी कठोर
मीमास के ऊपरी सतह पर कोई भी फ्रैक्चरिंग या पिघलने का सबूत नहीं है। इस नए अध्ययन के प्रमुख लेखक एलिसा रोडेन ने न्यू साइंटिस्ट को बताया कि जब हम मीमास को देखते हैं तो यह एक छोटी, ठंडी, मृत चट्टान जैसी दिखाई देती है। अगर आप मीमास को अन्य बर्फीले चंद्रमाओं के एक समूह के साथ रखते हैं तो इसे देखते ही आप बोल उठेंगे कि इस चंद्रमा के पास एक महासागर है।

1789 में हुई थी मीमास की खोज
मीमास की खोज 1789 में अंग्रेजी खगोलशास्त्री विलियम हर्शल ने अपने 40 फुट के परावर्तक दूरबीन से की थी। नासा के कैसिनी अंतरिक्ष यान ने सबसे पहले इस चंद्रमा के आस पास उड़ान भरी थी। उसी ने इस चंद्राम की कई तस्वीरें भी जुटाई थी। इस चंद्रमा की औसत त्रिज्या 123 मील से भी कम है। इसकी ऊपरी सतह गड्ढों से ढकी हुई है। इसके कम घनत्व से पता चलता है कि इसमें लगभग पूरी तरह से पानी की बर्फ है, जो अब तक पाया गया एकमात्र पदार्थ है।

 

ट्रेनों के गार्ड साहब कहलाएंगे मैनेजर साहब 

नयी दिल्ली । ट्रेनों में गार्ड को अब ‘गार्ड’ नहीं बुलाया जाएगा। भारतीय रेलवे ने कहा है कि अब ट्रेन गार्ड का नाम बदलकर ‘ट्रेन मैनेजर’ कर दिया गया है। यानी अब ट्रेन गार्ड को ट्रेन मैनेजर कहा जाएगा। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इस बारे में रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवेज के जनरल मैनेजर्स को निर्देश जारी कर दिया है। सार्वजनिक तौर पर इसकी घोषणा भारतीय रेल ने ट्विटर के जरिए की है। जारी किए गए सर्कुलर के मुताबिक ट्रेनों में विभिन्न गार्ड्स की रिवाइज्ड डेजिग्नेशंस अब इस तरह होगी।
लवे ने यह भी कहा है कि पद के नाम में बदलाव का पे लेवल्स पर कोई असर नहीं होगा। इसके अलावा संबंधित पदों पर रिक्रूटमेंट, मौजूदा कर्तव्यों व जिम्मेदारियों, सीनियोरिटी और प्रमोशन से जुड़ी प्रक्रिया पर भी कोई असर नहीं होगा।
इस वजह से हो रही थी नाम बदलने की मांग
ट्रेन गार्ड्स के डेजिग्नेशन में बदलाव की मांग पिछले कुछ वक्त से हो रही थी। मांग थी कि ट्रेन गार्ड पदनाम अब पुराना हो चला है और समाज में लोग गार्ड का मतलब किसी प्राइवेट कंपनी आदि में गार्ड ( सिक्योरिटी गार्ड) से समझ लेते हैं। इसलिए मांग की जा रही थी कि इस पदनाम को ट्रेन मैनेजर नाम से बदल दिया जाए।

भारत में 120 साल में 2021 पांचवां सबसे गरम वर्ष

नयी दिल्ली । भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि वर्ष 2021 भारत में 1901 के बाद से पांचवां सबसे गर्म वर्ष था। इसमें देश में औसत वार्षिक वायु तापमान सामान्य से 0.44 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। विभाग ने कहा कि देश में वर्ष के दौरान बाढ़, चक्रवाती तूफान, भारी बारिश, भूस्खलन, बिजली गिरने जैसी मौसमी घटनाओं के कारण 1,750 लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग के वार्षिक जलवायु वक्तव्य, 2021 में कहा गया है, ‘1901 से वर्ष 2021 देश में 2016, 2009, 2017 और 2010 के बाद पांचवां सबसे गर्म वर्ष था। देश के लिए औसत वार्षिक वायु तापमान सामान्य से 0.44 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।’’उसने कहा, ‘सर्दियों और मानसून के बाद के मौसम में गर्म तापमान ने मुख्य रूप से इसमें योगदान दिया।’

विभाग ने कहा कि 2016 में देश के लिए औसत वार्षिक वायु तापमान सामान्य से 0.710 डिग्री सेल्सियस अधिक था। वर्ष 2009 और 2017 में औसत तापमान से यह क्रमश: 0.550 डिग्री सेल्सियस और 0.541 डिग्री सेल्सियस अधिक था।
उसने कहा कि 2010 में, औसत वार्षिक वायु तापमान सामान्य से 0.539 डिग्री सेल्सियस अधिक था। विभाग ने कहा कि भारत में आंधी तूफान और बिजली गिरने से 2021 में 787 लोगों की कथित तौर पर मौत हो गई जबकि उस वर्ष भारी बारिश और बाढ़ से संबंधित घटनाओं में 759 लोगों की मौत हो गई।
बयान में कहा गया है कि चक्रवाती तूफान की वजह से 172 लोगों की मौत हुई और मौसम से संबंधित अन्य घटनाओं के कारण 32 अन्य लोगों की मौत हो गई।

2000 साल पहले आसमान से बरसे थे सोने के सिक्के! पुरातत्वविदों को खेत में मिला ‘खजाना’

बर्लिन । एक पुरातत्वविद ने उत्तरपूर्वी जर्मनी के एक राज्य ब्रेंडेनबर्ग में सेल्टिक सिक्कों के एक प्राचीन भंडार की खोज की है, जिसकी ‘कीमत बहुत अधिक रही होगी’। 41 सोने के सिक्कों को 2,000 से अधिक साल पहले ढाला गया था। यह ब्रेंडेनबर्ग में पहला ज्ञात सेल्टिक सोने का खजाना है। ब्रेंडेनबर्ग में संस्कृति मंत्री ने दिसंबर 2021 में इसकी घोषणा की थी। सिक्कों का आकार घुमावदार है जो इनके नाम ‘regenbogenschüsselchen’ से प्रभावित है, जिसका मतलब ‘इंद्रधनुष कप’ होता है। सिक्कों के ढेर का अध्ययन करने वाले और श्लॉस फ़्रीडेनस्टीन गोथा फ़ाउंडेशन के कॉइन कैबिनेट में मुद्राशास्त्री और रिसर्च अस्सिटेंट मार्जनको पाइलिक ने लाइव साइंस को बताया कि इसका नाम और आकार एक प्रसिद्ध कहानी की याद दिलाता है कि इंद्रधनुष के अंत में सोने का एक बर्तन होता है। माना जाता है कि इंद्रधनुष कप वहां पाए जाते हैं जहां एक इंद्रधनुष धरती को छूता है। उन्होंने बताया कि कहानियों का एक हिस्सा यह भी है कि इंद्रधनुष कप सीधे आसमान से गिरते हैं।
बारिश के बाद खेतों में मिलते थे सिक्के
उन्हें भाग्यशाली और इलाज के असर वाली चीजें माना जाता था। यह संभावना है कि किसानों को अक्सर बारिश के बाद अपने खेतों में प्राचीन सोने के सिक्के मिलते थे जो गंदगी और चमक से मुक्त होते थे। सिक्कों की खोज वोल्फगैंग हर्कट ने की है, जो ब्रेंडेनबर्ग स्टेट हेरिटेज मैनेजमेंट एंड आर्कियोलॉजिकल स्टेट म्यूजियम (बीएलडीएएम) के एक स्वयंसेवक पुरातत्वविद हैं। एक स्थानीय खेत की जांच के लिए मालिक से अनुमति मिलने के बाद उन्हें कुछ और चमकदार और सोने जैसा नजर आया।
जिंदगी में एक बार ही हो पाती है ऐसी खोज
पाइलिक ने कहा कि इसे देखकर उन्हें शराब की एक छोटी बोतल के ढक्कन की याद आ गई। हालांकि यह एक सेल्टिक सोने का सिक्का था। 10 सिक्कों को खोजने के बाद उन्होंने बीएलडीएएम को खोज की सूचना दी जिसके बाद पुरातत्वविदों ने कुल 41 सिक्कों का पता लगाया। हर्कट ने कहा कि यह एक असाधारण खोज है जिसे आप शायद जिंदगी में एक ही बार कर सकते हैं।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान (61) का निधन हो गया है। उन्होंने लखनऊ स्थिति अपने आवास में अंतिम सांस ली। कमाल खान का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कमाल खान की शादी पत्रकार रुचि कुमार के साथ हुई थी। वह अपने परिवार के साथ लखनऊ के बटलर पैलेस स्थित सरकारी बंगले में रहते थे। शुक्रवार तड़के उन्होंने वहीं अंतिम सांसें लीं।
कमाल खान को उनकी बेहतरीन पत्रकारिता के लिए रामनाथ गोयनका पुरस्कार मिला था। इसके साथ ही भारत के राष्ट्रपति द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके थे। कमाल खान खबर को पेश करने के अंदाज को लेकर काफी मशहूर थे और देश भर में उनके अंदाज और रिपोर्टिंग को सराहा जाता था। वह एनडीटीवी से पहले अमृत प्रभात, दैनिक जागरण तथा अन्य समाचार पत्रों में भी कार्य कर चुके थे। मृदुभाषी कमाल खान सभी के चहेते थे।

नहीं रहे कथक के सम्राट बिरजू महाराज

 देश-दुनिया में कथक नृत्य से अपनी पहचान बनाने वाले नर्तक पंडित बिरजू महाराज का रविवार देर रात निधन हो गया है। पद्म विभूषण से सम्मानित 83 साल के बिरजू महाराज के  पोते स्वरांश मिश्रा ने उनके निधन की पुष्टि की। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ है। बिरजू महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ था। अभी वे दिल्ली में रह रहे थे। रविवार देर रात बिरजू महाराज अपने पोते के साथ खेल रहे थे तभी उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। उन्हें दक्षिणी दिल्ली स्थित साकेत अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कुछ दिनों पहले उन्हें किडनी की बीमारी का पता चला था और वे डायलिसिस पर थे।

पंडित बिरजू महाराज की पोती रागिनी महाराज ने बताया, उनका पिछले एक महीने से इलाज चल रहा था। बीती रात करीब 12:15-12:30 बजे उन्हें अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई। हम उन्हें 10 मिनट के भीतर अस्पताल ले आए, लेकिन उनका निधन हो गया।

श के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्म विभूषण से सम्मानित बिरजू महाराज को उनके शिष्यों और अनुयायियों द्वारा प्यार से पंडित-जी या महाराज-जी कहा जाता था। बिरजू महाराज कथक नर्तकियों के महाराज परिवार के वंशज थे, जिसमें उनके दो चाचा, शंभू महाराज और लच्छू महाराज, और उनके पिता और गुरु, अचन महाराज शामिल हैं।

भारतीय नृत्य कला को विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाने वाले पंडित बिरजू महाराज जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उनका जाना संपूर्ण कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!

गौरतलब है कि भारत के महान कलाकारों में पंडित बिरजू महाराज का नाम शामिल है। पूरी दुनिया में उनके लाखों-करोड़ों प्रशंसक हैं। गायिका मालिनी अवस्थी और अदनान सामी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। इसी तरह देश की अन्य बड़ी हस्तियां भी उन्हें श्रद्धांजलि दे रही हैं। मालिनी अवस्थी ने ट्वीट किया, ‘आज भारतीय संगीत की लय थम गई है। आवाजें खामोश हो गईं। कथक के राजा पंडित बिरजू महाराज नहीं रहे। लखनऊ की देवधी आज वीरान हो गई। कालिकाबिन्दादीन की गौरवमयी परम्परा की सुगन्ध पूरे विश्व में फैलाने वाले महाराज अनंत में विलीन हो गए। आह! यह एक अपूरणीय क्षति है।’

 

प्रख्यात रंगकर्मी शाओली मित्रा का निधन

कोलकाता । प्रख्यात रंगकर्मी शाओली मित्रा का गत रविवार को दक्षिण कोलकाता स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 73 वर्ष की थीं। मित्रा हृदय संबंधी बीमारियों से ग्रस्त थीं।
रंगमंच कलाकार और मित्रा की करीबी मित्र अर्पिता घोष ने बताया कि शाओली मित्रा ने गत रविवार अपराह्न तीन बजकर 40 मिनट पर अंतिम सांस ली और बाद में श्रीति शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। घोष ने बताया कि मित्रा हृदय संबंधी बीमारियों से ग्रस्त थीं और उन्होंने अस्पताल में भर्ती होने से इनकार कर दिया था। उन्होंने बताया कि रविवार को मित्रा की तबीयत काफी बिगड़ गई थी।
शाओली मित्रा को 2009 में पद्मश्री से नवाजा गया था। उन्हें संगीत नाटक अकादमी समेत अन्य पुरस्कार प्राप्त हुए थे। शंभू मित्रा और तृप्ति मित्रा द्वारा स्थापित एक प्रसिद्ध थिएटर ग्रुप ‘बहुरूपी’ में वर्षों बिताने के बाद, जहां उन्होंने टैगोर के ‘दक्घर’ में अमल के चरित्र को अमर कर दिया था, शाओली ने ‘पंचम बैदिक’ की स्थापना की, जिसने व्यापक रूप से महिला मुक्ति पर प्रशंसित नाटक पेश करके एक ट्रेल ब्लेजर प्रदर्शनों की सूची की स्थापना की।

 

प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एम के प्रसाद का निधन

कोच्चि । केरल की साइलेंट वैली में सदाबहार उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों को विनाश से बचाने के लिए ऐतिहासिक जमीनी स्तर के आंदोलन में अग्रणी रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् प्रोफेसर एम के प्रसाद का निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। उनके सहयोगियों ने ये जानकारी दी।
उनके सहयोगियों के मुताबिक कोविड संबंधी जटिलताओं के बाद उपचार के लिये एक निजी अस्पताल में भर्ती प्रसाद ने वहीं अंतिम सांस ली। प्रसाद 1970 के दशक में पलक्कड जिले में ‘साइलेंट वैली’ में एक जल विद्युत परियोजना स्थापित करने के राज्य सरकार के कदम के खिलाफ राष्ट्रीय आंदोलन के पीछे एक मार्गदर्शक शक्ति थे।
पारिस्थितिकी विशेषज्ञों के अथक दबाव के आगे झुकते हुए सरकार को इस परियोजना को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने पर्यावरण आंदोलनों के नेता के रूप में प्रसाद के योगदान को याद करते हुए उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने भी प्रसाद के निधन पर शोक व्यक्त किया।

गोवा भारतीय पर्यटकों का पसंदीदा पर्यटन स्थल, मनाली दूसरे नंबर पर : ओयो सर्वे

नयी दिल्ली । इस साल भारतीय अंतरराष्ट्रीय के बजाय घरेलू पर्यटन स्थलों पर जाना पसंद करेंगे। गोवा भारतीय यात्रियों के लिए सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल है। ओयो ट्रैवलोपीडिया के सर्वे में यह तथ्य सामने आया है।
सर्वे के अनुसार, गोवा के बाद भारतीयों का दूसरा पसंदीदा स्थान मनाली है। ओयो ट्रैवलोपीडिया ओयो का वार्षिक उपभोक्ता सर्वे है। इसमें ओयो के प्रयोगकर्ताओं के बीच उनकी यात्रा के पसंदीदा स्थलों की जानकारी ली जाती है। सर्वे में 61 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि वे घरेलू गंतव्यों पर छुट्टियां बिताने जाना चाहेंगे। वहीं 25 प्रतिशत ने कहा था कि वे घरेलू के साथ अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थलों की यात्रा भी करना चाहेंगे।
हालांकि, भारतीय यात्रा को लेकर रोमांचित हैं, लेकिन महामारी के बीच सुरक्षा अब भी उनके लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। 80 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सुरक्षा उनके लिए चिंता का विषय है। हालांकि, इसके साथ ही उनका मानना है कि टीके की बूस्टर खुराक से यात्रा की उम्मीदें बेहतर होंगी।
जहां तक पसंदीदा पर्यटक स्थलों की बात है, गोवा पहले स्थान पर रहा है। एक-तिहाई लोगों ने कहा कि वे गोवा जाना चाहेंगे। उसके बाद क्रमश: मनानी, दुबई, शिमला और केरल का नंबर आता है। ओयो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों की बात की जाए, तो भारतीय मालदीव, पेरिस, बाली और स्विट्जरलैंड जाना चाहेंगे।
सर्वे में शामिल 37 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपने जीवनसाथी के साथ यात्रा पर जाना चाहेंगे। 19 प्रतिशत का कहना था कि वे अपने दोस्तों के साथ छुट्टियां बिताना पसंद करेंगे। वहीं 12 प्रतिशत ने अकेले यात्रा पर जाने की इच्छा जताई।