Wednesday, April 8, 2026
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 बाइक पर बच्चों को बैठाने से पहले पढ़ लें ये जरूरी नियम

नयी दिल्ली । दोपहिया वाहनों पर आप अपने बच्चों को बिठाकर कहीं ले जा रहे हैं तो यह जरूरी नियम भी जान लीजिए। आने वाले वक्त में 9 महीने से 4 साल तक के बच्चों को भी दुपहिया वाहन पर सफर के दौरान जरूरी होगा। परिवहन मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि अगले साल 15 फरवरी से नौ महीने से चार साल तक के बच्चों के लिए हेलमेट के साथ ही सेफ्टी हार्नेस बेल्ट पहनना भी जरूरी होगा। इसके साथ ही जिस टू व्हीलर पर चार साल से कम उम्र के बच्चे होंगे उसकी अधिकत्तम रफ्तार 40 किमी प्रति घंटे की होगी। क्या हैं नए नियम –
– इन नियमों का पालन नहीं करने पर 1,000 रुपये का जुर्माना और तीन महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान है। वर्तमान में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में चार साल से कम उम्र के कितने बच्चों की मौत हुई, इसका कोई विशेष डेटा नहीं है।
-सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 15 फरवरी, 2022 की अधिसूचना के माध्यम से सीएमवीआर, 1989 के नियम 138 में संशोधन किया है और चार साल से कम उम्र के बच्चों के टू व्हीलर पर ले जाने के लिए सुरक्षा उपायों से संबंधित मानदंड निर्धारित किए हैं।
-बाइक चालक को 9 महीने से 4 साल के बच्चे को सीट के पीछे ले जाते समय सेफ्टी हार्नेस का उपयोग करना होगा।
क्या होता है सेफ्टी हार्नेस बेल्ट

एक प्रकार से यह पहना जाने वाला बेल्ट होता है, इसको पहनने के बाद टू व्हीलर से बच्चे के गिरने की संभावना नहीं रहेगी। यह एडजेस्टेबल बेल्ट होता है और राइडर से बेल्ट बंधा होता है। इस बेल्ट को बच्चा पहनता है और इसका एक हिस्सा टू व्हीलर चलाने वाले के कमर से लॉक हो जाता है।

– 30Kg तक की क्षमता हार्नेस बेल्ट की उठाने की हो, डिजाइन भी वैसे ही तैयार
-वाटरप्रूफ और लाइट केयरिंग और डुरेबल होना चाहिए हार्नेस बेल्ट
– टू व्हीलर पर चार साल से कम उम्र के बच्चे होंगे उसकी अधिकत्तम रफ्तार 40 किमी प्रति घंटे की होगी।
-नए नियम 15 फरवरी 2023 से हो जाएंगे लागू, पिछले साल रखा गया था प्रस्ताव।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

याद रहेंगे ‘डिस्को किंग’ बप्पी लाहिड़ी 

मुम्बई । भारत में 80 और 90 के दशक में सिनेमा में डिस्को संगीत को लोकप्रिय बनाने वाले गायक-संगीतकार बप्पी लाहिड़ी का स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतों के कारण निधन हो गया। उनका इलाज कर रहे एक डॉक्टर ने बुधवार को यह जानकारी दी। वह 69 वर्ष के थे। गायक व संगीतकार ने पिछले साल सितंबर में उन खबरों को खारिज कर दिया था कि उन्होंने अपनी आवाज खो दी है। उन्होंने ऐसी अफवाहों को दिल तोड़ने वाली बताया था।
सोने की मोटी जंजीरें और चश्मा पहनने के लिए पहचाने जाने वाले गायक-संगीतकार ने 70-80 के दशक में कई फिल्मों के लिए संगीत रचना की जिन्हें खासी लोकप्रियता मिली। इन फिल्मों में ‘‘चलते-चलते’’, ‘‘डिस्को डांसर’’ और ‘‘शराबी’’ शामिल हैं। लाहिड़ी के परिवार में उनकी पत्नी चित्राणी, पुत्री रीमा और पुत्र बप्पा लाहिड़ी हैं।

लाहिड़ी ने आखिरी बार सितंबर 2021 में ‘‘गणपति बप्पा मोरिया’’ में काम किया था। उन्होंने अमेरिका स्थित भारतीय गायक अनुराधा जुजु पलाकुर्ती की आवाज वाले भक्ति गीतों के लिए भी संगीत दिया। लाहिड़ी को 1970 से लेकर 1990 के दौरान भारतीय सिनेमा में ‘‘आय एम ए डिस्को डांसर’’, ‘‘जिम्मी जिम्मी’’, ‘‘पग घुंघरू’’, ‘‘इंतेहा हो गयी’’, ‘‘तम्मा तम्मा लोगे’’, ‘‘यार बिना चैन कहां रे’’, ‘‘आज रपट जाए तो’’ तथा ‘‘चलते चलते’’ जैसे गीतों से डिस्को संगीत का दौर शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।
उन्होंने 2000 के दशक में ‘‘टैक्सी नंबर 9211’’ (2006) का ‘‘बम्बई नगरिया’’ और ‘‘द डर्टी पिक्चर’’ (2011) के ‘‘उह ला ला’’ जैसे हिट गीतों को भी अपनी आवाज दी। वह उन गायकों में से एक हैं जिन्होंने 2014 में आयी फिल्म ‘‘गुंडे’’ का ‘‘तूने मारी एंट्रियां’’ गीत भी गाया था। उन्होंने बंगाली, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और गुजराती फिल्मों में भी संगीत दिया।
लाहिड़ी 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए। उन्होंने श्रीरामपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी से हार गए। उनका आखिरी बॉलीवुड गीत 2020 में आयी फिल्म ‘‘बागी 3’’ का ‘‘भंकास’’ था।
उन्हें बॉलीवुड में संगीत का एक नया अंदाज पेश करने वाले कलाकार के तौर पर याद किया। लाहिड़ी को उनके प्रशंसक प्यार से ‘बप्पी दा’ बुलाते थे।

लाहिड़ी का जन्म पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में संगीतकारों के एक परिवार में 1952 में हुआ। लाहिड़ी का संगीत के प्रति प्रेम तीन वर्ष की आयु में ही शुरू हो गया था जब उन्होंने तबला बजाना शुरू किया।
उनके लिए ‘‘पग घुंघरू’’ और ‘‘चलते चलते’’ जैसे गीत गाने वाले मशहूर गायक किशोर कुमार उनके ‘‘मामा’’ थे। न केवल हिंदी फिल्मों में बल्कि लाहिड़ी बंगाली सिनेमा में भी लोकप्रिय नाम थे, जहां उन्होंने 1972 में आयी फिल्म ‘‘दादू’’ से अपने करियर की शुरुआत की। बतौर संगीतकार उनकी पहली हिंदी फिल्म 1973 में आयी ‘‘नन्हा शिकारी’’ थी। ‘‘जख्मी’’ फिल्म के लिए गाना गाने और संगीत देने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

‘‘जख्मी’’ के बाद उन्हेांने ‘‘चलते चलते’’, ‘‘सुरक्षा’’ और अन्य फिल्मों में काम किया और उनका डिस्को संगीत युवाओं के बीच इतना लोकप्रिय हुआ कि उन्हें भारत के ‘‘डिस्को किंग’’ की उपाधि दे दी गयी। गायक ने 2019 में एक साक्षात्कार में कहा था कि वह अपने युग के कुछ बड़े सितारों के लिए गाना गाने को लेकर खुद को भाग्यशाली मानते हैं।
उन्होंने कहा था, ‘‘मुझे यह सफर तय करके और इंडस्ट्री में अत्यधिक प्रतिभाशाली लोगों के साथ काम करके काफी गर्व महसूस होता है। मैंने दिलीप कुमार से लेकर रणवीर सिंह तक के लिए काम किया। ‘धर्म अधिकारी’ से लेकर ‘गुंडे’ तक में काम किया है।’’

वरिष्ठ पत्रकार रवीश तिवारी का निधन

नयी दिल्ली । वरिष्ठ पत्रकार और इंडियन एक्सप्रेस के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख रवीश तिवारी का निधन हो गया। वरिष्ठ पत्रकार और इंडियन एक्सप्रेस के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख रवीश तिवारी का दो साल तक कैंसर से जूझने के बाद शनिवार सुबह निधन हो गया।  रवीश तिवारी की शुरुआती शिक्षा नवोदय विद्यालय से हुई। आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग करने के बाद वह 2005-06 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी गए। रवीश तिवारी उस वर्ष रोड्स स्कॉलरशिप हासिल करने वाले छह लोगों में शामिल थे। इसके बाद रवीश ने तमाम लुभावने कॅरिअर का विकल्प छोड़कर पत्रकारिता को चुना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ पत्रकार के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि रवीश तिवारी ‘गहरी समझ वाले’ और विनम्र स्वभाव के व्यक्ति थे। मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘नियति ने रवीश तिवारी को बहुत जल्दी ही हमसे छीन लिया। मीडिया जगत में उनके निधन से एक शानदार करियर और प्रतिभा का अंत हो गया। मुझे उनकी रिपोर्ट पढ़ने में आनंद आता था और मैं समय-समय पर उनसे बात भी करता था। वह गहरी समझ रखने वाले और विनम्र स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके परिजनों और दोस्तों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।’’

संगठित क्षेत्र के 15,000 रुपये से अधिक मूल वेतन वालों के लिए आएगी नयी पेंशन योजना

नयी दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) संगठित क्षेत्र के 15,000 रुपये से अधिक का मूल वेतन पाने वाले तथा कर्मचारी पेंशन योजना-1995 (ईपीएस-95) के तहत अनिवार्य रूप से नहीं आने वाले कर्मचारियों के लिए एक नई पेंशन योजना लाने पर विचार कर रहा है।
वर्तमान में संगठित क्षेत्र के वे कर्मचारी जिनका मूल वेतन (मूल वेतन और महंगाई भत्ता) 15,000 रुपये तक है, अनिवार्य रूप से ईपीएस-95 के तहत आते हैं।
एक सूत्र ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘ईपीएफओ के सदस्यों के बीच ऊंचे योगदान पर अधिक पेंशन की मांग की गई है। इस प्रकार उन लोगों के लिए एक नया पेंशन उत्पाद या योजना लाने के लिए सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है, जिनका मासिक मूल वेतन 15,000 रुपये से अधिक है।’’ सूत्र के अनुसार, इस नए पेंशन उत्पाद पर प्रस्ताव 11 और 12 मार्च को गुवाहाटी में ईपीएफओ के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में आ सकता है।
बैठक के दौरान सीबीटी द्वारा नवंबर, 2021 में पेंशन संबंधी मुद्दों पर गठित एक उप-समिति भी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
सूत्र ने बताया कि ऐसे ईपीएफओ अंशधारक हैं जिन्हें 15,000 रुपये से अधिक का मासिक मूल वेतन मिल रहा है, लेकिन वे ईपीएस-95 के तहत 8.33 प्रतिशत की कम दर से ही योगदान कर पाते हैं। इस तरह उन्हें कम पेंशन मिलती है।
ईपीएफओ ने 2014 में मासिक पेंशन योग्य मूल वेतन को 15,000 रुपये तक सीमित करने के लिए योजना में संशोधन किया था। 15,000 रुपये की सीमा केवल सेवा में शामिल होने के समय लागू होती है। संगठित क्षेत्र में वेतन संशोधन और मूल्यवृद्धि की वजह से इसे एक सितंबर, 2014 से 6,500 रुपये से ऊपर संशोधित किया गया था।
बाद में मासिक मूल वेतन की सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग हुई और उसपर विचार-विमर्श किया गया, लेकिन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई।
उद्योग के अनुमान के अनुसार, पेंशन योग्य वेतन बढ़ाने से संगठित क्षेत्र के 50 लाख और कर्मचारी ईपीएस-95 के दायरे में आ सकते हैं।
पूर्व श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने दिसंबर, 2016 में लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा था, ‘‘कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत ‘कवरेज’ के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 25,000 रुपये मासिक करने का प्रस्ताव ईपीएफओ ने पेश किया था, लेकिन इसपर कोई निर्णय नहीं हुआ।
सूत्र ने कहा कि उन लोगों के लिए एक नए पेंशन उत्पाद की आवश्यकता है जो या तो कम योगदान करने के लिए मजबूर हैं या जो इस योजना की सदस्यता नहीं ले सके हैं, क्योंकि सेवा में शामिल होने के समय उनका मासिक मूल वेतन 15,000 रुपये से अधिक था।

यूएई के साथ एफटीए से भारत के 26 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों को होगा फायदा

नयी दिल्ली । भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से रत्न एवं आभूषण जैसे करीब 26 अरब डॉलर मूल्य के घरेलू उत्पादों को फायदा मिलने की संभावना है। इन पर अभी खाड़ी देश में पांच प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाता है।
एक अधिकारी ने भारत-यूएई एफटीए से जुड़े लाभों को रेखांकित करते हुए कहा कि इस करार से श्रम-गहन क्षेत्रों मसलन कपड़ा, चमड़ा, जूते-चप्पल, खेल का सामान, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि और लकड़ी के उत्पाद, इंजीनियरिंग, फार्मास्युटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों तथा वाहन जैसे उद्योगों को काफी लाभ होगा।
अधिकारी ने कहा कि सेवा क्षेत्र की बात की जाए, तो इस करार से कंप्यूटर से संबंधित सेवाएं, ऑडियो-विजुअल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, यात्रा, नर्सिंग, इंजीनियरिंग और लेखा सेवाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
भारत और यूएई ने 18 फरवरी को वृहद आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य पांच साल की अवधि में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना और लाखों रोजगार के अवसरों का सृजन करना है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘यूएई पहले से ही भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। 2019-20 में यूएई को भारत का निर्यात लगभग 29 अरब डॉलर रहा था। यूएई के साथ सीईपीए से लगभग 26 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय उत्पादों को लाभ होने की संभावना है। इन उत्पादों पर यूएई में पांच प्रतिशत का आयात शुल्क लगता है।’’ अनुमानों के अनुसार, 2023 में सोने और स्वर्ण-जड़ित आभूषणों का निर्यात बढ़कर 10 डॉलर हो जाएगा और भारत द्वारा सोने जैसे उत्पादों में यूएई को दी जाने वाली शुल्क रियायतों से उत्पादन सामग्री के आयात लागत कम हो जाएगी। अगले पांच वर्षों में कपड़ा निर्यात में दो डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान है।

बिहार के साकिबुल गनी ने बनाया रिकॉर्ड, रणजी मुकाबले में जड़ा तिहरा शतक

नयी दिल्ली । बिहार के साकिबुल गनी ने एक नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। उन्होंने फर्स्ट क्लास डेब्यू पर सर्वाधिक स्कोर बनाया है। वह फर्स्ट क्लास डेब्यू पर तिहरा शतक बनाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। बिहार के मिजोरम के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले में उन्होंने 341 रन की पारी खेली है। शुक्रवार को 405 गेंद पर उन्होंने यह पारी खेली।
22 साल के साकिबुल गनी ने मध्य प्रदेश के अजय रोहेरा का रिकॉर्ड तोड़ा जिन्होंने 2019-19 में फर्स्ट क्लास डेब्यू पर 267* रन बनाए थे। रोहेरा ने हैदराबाद के खिलाफ यह पारी खेली थी।
गनी ने 387 गेंद पर अपना तिहरा शतक पूरा किया । जाधवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में चल रहे इस मुकाबले के दूसरे दिन उन्होंने तिहरा शतक पूरा किया। उनकी पारी 405 गेंद खेलकर पूरी हुई। अपनी पारी में उन्होंने 341 रन बनाए। बिहार ने पहली पारी में 600 से ज्यादा का स्कोर बनाआ गनी ने चौथे विकेट के लिए बाबुल कुमार के साथ 557 रन की साझेदारी की। बाबुल कुमार ने भी दोहरा शतक लगाया। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड श्रीलंका के कुमार संगाकारा और महेला जयवर्धने के नाम है। इन दोनों ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2006 में 624 रन जोड़े थे।
रणजी ट्रॉफी में पार्टनरशिप का रिकॉर्ड महाराष्ट्र के स्वपनिल गुगले और अंकित बावने के बीच है। दोनों ने 594 रन की नाबाद साझेदारी की। बिहार के साकिबुल और बाबुल अब रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गए है। यह चौथे विकेट के लिए दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी है। इससे पहले 1946/47 में विजय हजारे और गुल मोहम्मद ने बड़ौदा के लिए 577 रन जोड़े थे।
मोतिहारी में हुआ है जन्म
22 साल के इस क्रिकेटर का जन्म बिहार के मोतिहारी में हुआ है। उन्होंने इससे पहले 14 लिस्ट ए मैचों में 377 रन बनाए थे। वहीं 11 टी20 मुकाबलों में उन्होंने कुल 192 रनों का योगदान दिया था।

छिंदवाड़ा में क्यू आर कोड लेकर डिजिटल भीख माँगता है भिखारी

छिंदवाड़ा । छिंदवाड़ा में इन दिनों मन्दिर और रेलवे स्टेशन के आसपास एक डिजिटल भिखारी घूमते नज़र आ जाएगा. अगर आपके पास भीख देने के लिए अगर नकदी रुपये नहीं है तो भी कोई बात नहीं आप उसे डिजिटल भुगतान से भीख दे सकते हैं। दरअसल भारत में आपको हर जगह अलग-अलग अंदाज में भीख मांगते हुए दिख जाएंगे। कोई रेलवे स्टेशन पर भीख मांगते मिलेगा, तो कोई मंदिर के बाहर. अक्सर लोग भिखारी को भीख न देने के लिए बहाना भी बनाते है कि उनके पास छुट्टे पैसे नहीं है. या कह देते है कि मेरे पास अभी पैसे ही नहीं हैं। अगर आप भी इन बहानों से अब तक बचते रहे हैं तो अब सावधान हो जाइए क्योंकि अब इसके लिए भी भिखारियों ने तकनीक निकाल ली है और अब भिखारी के पास ऑनलाइन पेमेंट का ऑप्शन भी मौजूद हो गया है। आपको अब सार्वजनिक स्थानों पर डिजिटल भिखारी भी मिल सकते हैं।
डिजिटल मोड में भीख लेता है
इन दिनों मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा का रहने वाला एक भिखारी चर्चाओं में है. जिसका नाम हेमंत सूर्यवंशी है। डिजिटल तकनीक के इस युग में अब भिखारी भी अपने आप को अपडेट मोड पर रखने लगे हैं। भिखारी हेमंत सूर्यवंशी बारकोड स्कैन करके ऑनलाइन डिजिटल मोड में भीख लेता है इसलिए अब आपका छुट्टा ना होने का बहाना भी चलने वाला नहीं है।
चिल्लर नहीं होने का बहाना करते थे लोग
भिखारी हेमंत सूर्यवंशी का कहना हैं कि अधिकतर लोगों से जब वह भीख मांगता था, तो कई लोग चिल्लर नहीं होने का हवाला देते थे। उन्होंने डिजिटल तकनीक का सहारा लेते हुए बारकोड के जरिए भीख लेना शुरू किया है, जो लोग चिल्लर नहीं होने का बहाना करते हैं उनसे वह बारकोड के जरिए भीख लेते हैं।
अलग तरीका भीख मांगने का
हेमंत का भीख मांगने का अंदाज भी अलग है। मना करने पर वह कहता है. बाबूजी चिल्लर नहीं तो फोन-पे या गूगल-पे से भीख दे दो और लोग कुतूहल वश भीक दे भी देते हैं। भिखारी का कहना है कि लोग डिजिटल तकनीक को भीख के लिए इस्तेमाल होते देखने के लिए भीख भी आसानी से बारकोड स्कैन कर दे देते हैं।

विश्व मातृभाषा दिवस पर कविता पाठ आयोजित

कोलकाता । सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर कविता पाठ का आयोजन किया गया। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा नेपाल से भी कवियों ने हिस्सा लिया। यह दिवस मातृभाषाओं के सम्मान के साथ परस्पर सृजन एवं संवाद का भी दिन है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मिशन के अध्यक्ष डॉ शम्भुनाथ ने कहा कि हिंदी मातृभाषा की अड़तालीस माताएं हैं। हमें सभी भाषाओं के प्रति उदार और मानवीय होने की जरूरत है। आज एक मंच पर तमाम भारतीय भाषाओं के कवियों का यह काव्यपाठ ही भाषा की संस्कृति है। इस अवसर पर सेराज खान बातिश (हिंदी), अंजुमन आरा (उड़िया), रावेल पुष्प (पंजाबी), सुमन पोखरेल (नेपाली), परवेज अख़्तर (उर्दू), अयाज खान (उर्दू), अभिजीत सेनगुप्त( बांग्ला), श्यामाचरण हेम्ब्रम (संथाली), हिमाद्रि मिश्र (मैथिली), जीवन सिंह (भोजपुरी), सुनीता करोथवाल (हरियाणवी) और सत्येंद्र कुमार (मगही) ने अपनी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन सूर्यदेव रॉय ने किया। मधु सिंह ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि मातृभाषा दिवस का संबंध सिर्फ अभिव्यक्ति और ज्ञान का मामला नहीं है बल्कि यह हमारी पहचान और संस्कृति का हिस्सा है। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए संजय जायसवाल ने कहा कि सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन का यह मंच तमाम भारतीय भाषाओं के लिए एक पुल की तरह है जहां आकर भाषाएं एक दूसरे से मिलती हैं और एक सृजनात्मक संवाद करती हैं। इस अवसर पर उदयराज सिंह, रामनिवास द्विवेदी, प्रो. रामप्रवेश रजक, आदित्य गिरि सहित बड़ी संख्या में साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे।

हेरिटेज लॉ कॉलेज में मनाया गया अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

कोलकाता । हेरिटेज लॉ कॉलेज में गत 21 फरवरी को अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नृत्य, संगीत, काव्य आवृति से हुई और मातृभाषा के रूप में बांग्ला के योगदान को सामने लाया गया। कार्यक्रम में हेरिटेज लॉ कॉलेज के डीन प्रो. एस. एस. चटर्जी, टीचर इन्चार्ज शांतनु मित्रा, प्रो. श्राबनी गुप्ता समेत कॉलेज के अन्य शिक्षक – शिक्षिकाओं ने भाग लिया। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ ने इस दिन के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को प्रेरित करेंगे।

मातृभाषा दिवस पर एचआईटीके के पूर्व विद्यार्थी ने शुरू की बांग्ला में वेबसाइट

ऐसा करने वाला पहला उद्यमी है राहुल
कोलकाता । हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का पूर्व छात्र राहुल बसाक बांग्ला में अपनी वेबसाइट बनाने का पहला बंगाली उद्यमी बन गया है। राहुल बी.टेक -आई टी के 2017 के बैच का विद्यार्थी है। राहुल टेड्स स्पीकर यानी वक्ता है और उसने दो कम्पनियों, माई कैनवास टॉक और आमार कैनवस की स्थापना की है। माई कैनवस टॉक एक यू ट्यूब चैनल है जहाँ विभिन्न पृष्ठूमियों के प्रेरक लोगों की कहानियाँ साझा की जाती हैं। वहीं आमार कैनवस पर विश्व भर के कलाकारों की कलाकृतियाँ बेची जाती हैं। माई कैनवस ने कई पुरस्कार जीते हैं जिसमें से एक बंगाल चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के आन्ट्रेप्रेनियर कन्क्लेव में प्रदान किया गया था। राहुल को कई टॉक शो में बतौर प्रेरक वक्ता एवं निर्णायक आमंत्रित भी किया जा चुका है। राहुल ने कहा कि यह उसकी वेबसाइट का बीटा वर्जन है और भविष्य में वह इसे बड़े पैमाने पर आरम्भ करेगा। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ प्रदीप कुमार अग्रवाल ने राहुल को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर यह संस्थान के पूर्व छात्र राहुल का विनम्र योगदान है। उसके दूसरे विद्यार्थियों के लिए उदाहरण पेश किया है।