Sunday, November 1, 2026
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भारत को 2030 तक स्वास्थ्य क्षेत्र में 1.3 अरब वर्ग फुट अतिरिक्त जगह की जरूरत: सीबीआरई

नयी दिल्ली । भारत को आबादी के हिसाब से अस्पताल में बिस्तरों (बेड) के वैश्विक औसत तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में 2030 तक 1.3 अरब वर्ग फुट अतिरिक्त जगह की जरूरत होगी। रियल एस्टेट कंपनी सीबीआरई ने एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया है।

सीबीआरई की रिपोर्ट ‘द इवॉल्विंग इंडियन हेल्थकेयर इकोसिस्टम: व्हाट इट मीन्स फॉर द रियल एस्टेट सेक्टर’ में कहा कि 2019 में भारत में उपलब्ध बिस्तरों की कुल संख्या 19 लाख थी। जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 90 करोड़ वर्ग फुट था। सलाहकार कंपनी ने अनुमान जताया है कि अस्पतालों में बिस्तरों की वैश्विक औसत संख्या तक पहुंचने के लिए भारत को 2030 तक 29 लाख बिस्तरों की जरुरत होगी। रिपोर्ट के अनुसार, आबादी के मुकाबले बिस्तरों की वैश्विक औसत संख्या तक पहुंचने के लिए भारत को 2030 तक अतिरिक्त 1.3 अरब वर्ग फुट क्षेत्र की जरूरत होगी।

सीबीआरई दक्षिण एशिया ने एक बयान में कहा, ‘‘पूरे विश्व में भारत आबादी के हिसाब से सबसे कम अस्पताल बिस्तरों वाले देशों में से एक है। ’’ रिपोर्ट में में यह भी पाया गया कि भारत के दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों में अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। सीबीआरई के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमान मैग्जीन ने कहा, ‘‘भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र बढ़ती आमदनी, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, स्वास्थ्य बीमा तक बेहतर पहुंच और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार का खर्च बढ़ने की वजह से तेजी से आगे बढ़ रहा है।’’

 

प्रख्यात संतूर वादक भजन सोपोरी का निधन

नयी दिल्ली । ‘संतूर के संत’ नाम से प्रसिद्ध भजन सोपोरी का बृहस्पतिवार को कैंसर की बीमारी के कारण हरियाणा में गुरुग्राम के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 73 साल के थे। सोपोरी के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे सौरभ तथा अभय हैं। दोनों पुत्र भी संतूर वादक हैं। अभय ने कहा, “उन्हें पिछले साल जून में बड़ी आंत का कैंसर होने का पता चला था। हमने उन्हें तीन हफ्ते पहले इम्यूनोथेरेपी उपचार के लिए गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया था। यह कारगर नहीं रहा और उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया।’उन्होंने कहा, “ जब भी मैं प्रस्तुति देता था, पापा मेरे साथ रहते थे। मुझे नहीं पता कि उनके बिना मेरा जीवन कैसा होगा।”
सोपोरी के निधन से कुछ हफ्ते पहले 10 मई को महान संतूर वादक पंडित शिव कुमार शर्मा का निधन हो गया था। वह भी कश्मीर से ताल्लुक रखते थे और इस वाद्य यंत्र को शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। शनिवार को ही पार्श्व गायक केके का कोलकाता में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। सोपोरी को उनके कॅरियर में कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया। इनमें 2004 में पद्म श्री, 1992 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और जम्मू कश्मीर स्टेट लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड शामिल हैं।
संगीतकार उत्तरी कश्मीर के सोपोर जिले के रहने वाले थे और ‘सूफियाना घराने’ से आते थे। दस साल की उम्र में अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति देने वाले सोपोरी को संतूर वादन की बारीकियां शुरुआत में उनके दादा पंडित संसार चंद सोपोरी और बाद में उनके पिता पंडित शंभू नाथ सोपोरी ने सिखाई थी। सोपोरी के पास दो मास्टर डिग्रियां थीं। एक भारतीय शास्त्रीय संगीत में जो सितार और संतूर दोनों में विशेषज्ञता है। बहुमुखी कलाकार के पास अंग्रेजी साहित्य में भी मास्टर डिग्री थी और उन्होंने वाशिंगटन विश्वविद्यालय में पश्चिमी शास्त्रीय संगीत गुर सीखे थे।

सोपोरी ने हिन्दी, कश्मीरी, डोगरी, सिंधी, उर्दू और भोजपुरी के साथ-साथ फारसी और अरबी सहित लगभग सभी भारतीय भाषाओं में 6,000 से अधिक गीतों के लिए संगीत तैयार किया। अपने करियर के दौरान, उन्होंने गालिब, दाग, मोमिन, बहादुर शाह ज़फर, इकबाल, फैज़ अहमद फैज़ और फिराक गोरखपुरी जैसे महान शायरों की ‘गज़लों’ के लिए भी संगीत तैयार किया। उन्होंने कबीर और मीरा बाई की रचनाओं को भी धुन दी। वर्ष 2011 में भारतीय डाक विभाग ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में सोपोरी के असाधारण कार्य को सम्मान देने के लिए पांच रुपये का डाक टिकट जारी किया।

यूपीएससी परीक्षा में अव्वल श्रुति शर्मा ने अपनी नानी का सपना पूरा किया

नयी दिल्ली । संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में शीर्ष स्थान पाकर श्रुति ने बड़ी सफलता प्राप्त की है। अपने दूसरे प्रयास में श्रुति शर्मा के यूपीएससी परीक्षा में अव्वल आने के बाद उनके जीवन से जुड़ी तमाम बातें लोग जानने को उत्सुक हो उठे और अब सभी को यह पता है कि उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक करने के बाद दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से आधुनिक इतिहास में स्नातकोत्तर किया है। उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी से यूपीएससी की तैयारी की।

लेकिन उनके जीवन से जुड़े कुछ ऐसे रोचक पहलू भी हैं जो अभी कम ज्ञात हैं। दरअसल उनकी नानी ने यूपीएससी परीक्षा पास करने का सपना अपनी बेटी यानी श्रुति की मां रचना को लेकर देखा था। लेकिन उनके रिहायशी ग्रामीण इलाके से कोचिंग सेंटर बहुत अधिक दूर होने के कारण उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। अब श्रुति शर्मा के परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के बाद सबसे ज्यादा खुशी उनकी नानी को हुई है।

इंजीनियरों और डॉक्टरों के परिवार में जन्मीं श्रुति के पेशे से आर्किटेक्ट पिता सुनील दत्त शर्मा दिल्ली में एक कंस्ट्रक्शन कंसलटेंट फर्म चलाते हैं और इस समय वह उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में स्थित अपने पैतृक गांव बस्ता में बाल ज्ञान निकेतन स्कूल का प्रबंधन भी संभाल रहे हैं। उनकी मां रचना शर्मा स्कूल अध्यापिका रह चुकी हैं। हालांकि उन्होंने भी इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की है।

उनके छोटे भाई क्रिकेट खिलाड़ी हैं और रणजी ट्रॉफी में खेल चुके हैं। अपने परिवार में श्रुति शर्मा पहली लड़की हैं जिन्होंने मानविकी शाखा में इतिहास का अध्ययन किया। उनके परदादा दयास्वरूप शर्मा और उनके दादा देवेन्द्र दत्त शर्मा अपने क्षेत्र के जाने-माने डॉक्टर रहे थे। उनके चाचा यज्ञ दत्त शर्मा और उनकी चचेरी बहन भी डॉक्टर हैं।

नई संस्कृतियों, नई भाषाओं को सीखने समझने में गहन दिलचस्पी रखने वाली, बिजनौर के धामपुर कस्बे में पैदा हुईं श्रुति शर्मा स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने के मामले में हमेशा सबसे आगे रहती थीं। उन्हें विश्व सिनेमा बहुत भाता है और इस कड़ी में वह ईरानी और हांगकांग सिनेमा को विशेष रूप से पसंद करती हैं।

अपने गृह प्रदेश, उत्तर प्रदेश कैडर में जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में काम करने की इच्छुक श्रुति को पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण अपने सपने को पूरा करने में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई लेकिन वह कहती हैं कि हर लड़की सिविल सेवा परीक्षा पास कर सकती है, बस उसे केवल परिवार के समर्थन और अवसर की जरूरत है।

इस साल कुल 685 उम्मीदवारों ने यूपीएससी, सीएसई परीक्षा पास की है जिसमें से 508 पुरुष और 177 महिलाएं हैं। इस बार सबसे रोचक बात यह रही कि शीर्ष तीनों स्थान महिला उम्मीदवारों ने हासिल किए जिनमें दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमश: अंकिता अग्रवाल तथा गामिनी सिंगला ने बाजी मारी।

आधार कार्ड आईआरसीटीसी आईडी से लिंक है तो एक महीने में 24 टिकट कर सकेंगे बुक

12 टिकट बुक होते थे पहले
नयी दिल्ली । अभी तक इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) एक आईडी पर सिर्फ 6 टिकट और आधार लिंक होने पर 12 टिक बुक करने की अनुमति देता था। लेकिन अब अगर आपका आधार कार्ड आपकी यूजर आईडी से लिंक है तो आप एक महीने में डबल यानी 24 टिकट बुक कर सकते हैं।
रेल मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने एक यूजर की आईडी पर एक महीने में अधिकतम 6 टिकट बुक करने की सीमा बढ़ाकर 12 टिकट करने का निर्णय लिया है। यानी अगर आपका आधार कार्ड आपकी आईडी से लिंक नहीं है तो आप 6 की जगह 12 टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा जो आईडी आधार से लिंक हैं वो एक महीने में 12 की जगह 24 टिकट बुक कर सकते हैं।

जन समर्थ पोर्टल पर 13 सरकारी योजना के तहत मिलेंगे ऋण, प्रक्रिया जानें

नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज क्रेडिट-लिंक्ड सरकारी योजनाओं के लिए ‘जन समर्थ पोर्टल’ लॉन्च किया। इससे सरकारी स्कीम के तहत लोन लेना आसान हो जाएगा। इस पोर्टल से 13 सरकारी स्कीम के तहत लोन लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। फिलहाल, चार श्रेणी के लोन के लिए आवेदन करने की सुविधा होगी। इनमें शिक्षा, कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर, कारोबार शुरुआत एवं जीवनयापन लोन शामिल हैं। लोन के आवेदन से लेकर उसकी मंजूरी तक, सब काम जन समर्थ पोर्टल से ऑनलाइन होगा। पोर्टल में आवेदक अपने लोन की स्थिति भी देख सकेंगे। आवेदक लोन नहीं मिलने पर उसकी शिकायत भी आनलाइन कर सकेंगे। इस पोर्टल पर सरकार 125 से अधिक लोन दाताओं को एक साथ लेकर आई है।
क्या है जन समर्थ पोर्टल?
जन समर्थ पोर्टल एक डिजिटल पोर्टल है, जहां 13 क्रेडिट लिंक्ड सरकारी योजनाएं मौजूद होंगी। इस पोर्टल के जरिए लोन लेने के इच्छुक व्यक्ति आसान तरीके अपनी पात्रता यानि एलिजिबिलिटी की जांच कर सकते हैं। अगर कर्ज लेने का इच्छुक लोन के लिए पात्र है तो वो पोर्टल पर अप्लाई भी कर सकता है। इसके साथ ही उसे हाथों-हाथ डिजिटली अनुमति भी मिल जाएगी। इसके साथ कोई भी आवेदक, अप्लाई करने के बाद अपने लोन के स्टेटस की जानकारी भी हासिल कर सकता है।
जन समर्थ पोर्टल से कैसे होगा आवेदन?
फिलहाल इस पोर्टल पर लोन के लिए चार श्रेणियां बनाई गई हैं। इन कैटेगरी के नाम एजुकेशन लोन, एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर लोन, बिजनेस एक्टिविटी लोन और लिवलीहुड लोन है। हर लोन की कैटेगरी में कई योजनाएं लिस्ट की गई हैं। लाभार्थी जिस कैटेगरी के तहत लोन लेना चाहता है, उसके लिए पहले उसे इससे जुड़े कुछ सवालों के जवाब देने होंगे। इन जवाबों के जरिए लाभार्थी अपनी योग्यता की भी जांच कर सकेंगे। अगर ग्राहक लोन के लिए पात्र हैं तो उन्हें ऑनलाइन ही मंजूरी मिल जाएगी।
कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
लोन लेने के लिए आम तौर पर कई जरूरी दस्तावेजों की जरूरत होती है। इन दस्तावेजों में वोटर आईडी, पैन, बैंक स्टेटमेंट, आधार नंबर जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। आप अगर लोन के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो आपको इन दस्तावेजों की जानकारी देनी होगी।

आवेदन का स्टेटस कैसे पता करें
इस पोर्टल के जरिए कोई भी व्यक्ति लोन ले सकता है लेकिन उसे लोन मिलेगा या नहीं ये बात पात्रता यानि एलिजिबिलिटी के आधार पर तय की जाएगी। अगर आप पात्र हैं तो लोन मिल जाएगा। साथ ही लोन के आवेदन का स्टेटस भी आप इस पोर्टल के जरिए जान सकते हैं। आपका लोन कौन से चरण में है, इसकी जानकारी भी आपको मिल जाएगी। आवेदन करने वाला जन समर्थ पोर्टल पर लोन आवेदन का स्टेटस भी देख सकता है। इसके लिए आवेदक को रजिस्ट्रेशन की डिटेल्स भरकर साइन-इन कीजिए, इस स्टेटस को जानने के लिए डैशबोर्ड पर माई एप्लीकेशन टैब पर क्लिक करना होगा। 3 दिन में होगा समस्या का समाधान

तीन दिनों में आवेदक की शिकायत का निपटान करना होगा। जानकारों के मुताबिक, जन समर्थ पोर्टल पर आवेदक के साथ बैंक एवं लोन देने वाली विभिन्न प्रकार की छोटी-बड़ी संस्थाएं भी उपलब्ध होंगी, जो लोन के लिए आने वाले आवेदन पर अपनी मंजूरी देंगी। अभी इस पोर्टल से बैंक समेत 125 से अधिक वित्तीय संस्थाएं जुड़ चुकी हैं।

सभी स्टेक होल्डर शामिल
इस पोर्टल पर लोन से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर को शामिल किया गया है। इनमें लाभार्थी, लोन दाता और वित्तीय संस्थान, सेंट्रल/राज्य सरकार से जुड़े मंत्रालय, नोडल एजेंसी और फैसिलिटेटर्स शामिल होंगे।

कोलकाता का पेन हॉस्पिटल, जहाँ होता है पुरानी कलम का इलाज

77 साल पुरानी दुकान 1945 में स्थापित हुई
कभी सुना है कलम के अस्पताल के बारे में..? नहीं ना..? तो जान लीजिए ऐसा अस्पताल है और वो भी अपने ही देश में। कोलकाता की गलियों में एक ऐसा पेन हॉस्पिटल है, जहां पुरानी से पुरानी बिगड़े हुए कलमों को ठीक किया जाता है। यह दुकान 77 साल पुरानी है।
 इतिहास- पेन के लगातार इस्तेमाल या ऐसे भी वो रखे-रखे खराब हो जाते हैं। जिस आम लोग कूड़े में डाल देते हैं, लेकिन कोलकाता में एक समय था, जब लोग अपनी कलम को सही करवाने के लिए ‘पेन अस्पताल’ ले जाते थे। यह सुनने में भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन उस वक्त पेन अस्पताल वास्तव में शहर में काफी संख्या में मौजूद थे। हालांकि अब ऐसे अस्पताल समय के साथ खत्म गए हैं, लेकिन कोलकाता के बीचों-बीच अभी भी एक अस्पताल चल रहा है।
कहां है ये दुकान- जैसे ही आप धर्मतला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 4 से बाहर निकलते हैं, आपको फुटपाथ के बाईं ओर एक ‘पेन हॉस्पिटल’ बोर्ड लटका हुआ दिखाई देगा। संकरी गली के एक तरफ, डॉ मोहम्मद इम्तियाज एक छोटी सी दुकान में बैठे रहते हैं। यहां वो पुराने और टूटी हुई कलमों का ‘इलाज’ करते हैं। इम्तियाज के दादा समसुद्दीन ने 1945 में इस दुकान को शुरू किया था। आज इसकी हालात भले ही खराब हो गई हो लेकिन इस अव्यवस्थित दुकान में आज भी कई बेशकीमती कलम रखे हुए हैं। इम्तियाज बताते हैं कि जब ‘पेन अस्पताल’ की शुरूआत हुई थी, तब वाटरमैन, शेफर्ड, पियरे कार्डा और विल्सन जैसे बेशकीमती पेन विदेशों से लाए जाते थे, लेकिन इसके खराब होने के बाद इसे ठीक करने वाला कोई नहीं था। जिसके बाद पेन अस्पताल शुरू हुआ”।
दुकान की कमाई पर निर्भर परिवार- इम्तियाज और उनके भाई मोहम्मद रियाज ने अपने पिता मोहम्मद सुल्तान के साथ रहकर काम सीखा था। अपने छोटे भाई की मृत्यु के बाद इम्तियाज ने अस्पताल को संभाला। आज भी उनका परिवार इसी ‘अस्पताल’ की कमाई पर निर्भर है। इम्तियाज कहते हैं- “आजकल, स्याही और कलम से लिखना खत्म हो गया है। ज्यादातर लोग एक बार पेन का इस्तेमाल करते हैं और उसे फेंक देते हैं। अब कंप्यूटर का जमाना है। अभी भी कुछ लोग हैं जो स्याही से लिखते हैं। वे टूटे हुए पेन को ठीक करने आते हैं। कुछ लोग शौक के लिए भी पुराना पेन खरीदते हैं।”

ऐसे ही एक ‘पेन ऑपरेशन’ के दौरान पेन हॉस्पिटल के डॉक्टर ने कहा- “विदेशी पेन बहुत महंगे होते हैं। लोग अभी भी मरम्मत के लिए 10,000-12,000 रुपये के पेन लाते हैं। पेन में स्याही भरने का तरीका अलग-अलग होता है। सभी पेन पार्ट्स हमेशा आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं। ऐसे में पुरानी कलम को ठीक करते ही उसे एक नया जीवन मिल जाता है।”
इम्तियाज आगे बताते हैं कि उनके पास कलेक्शन में 20 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक के पेन हैं। कई प्रसिद्ध प्रोफेसर, लेखक और पत्रकार इस पेन अस्पताल में अपनी पसंदीदा कलम की बीमारी का इलाज कराने आ चुके हैं।
(साभार – जनसत्ता)

विश्व के शीर्ष 10 प्रेरक स्कूलों में शामिल हुआ हावड़ा का सेमिरिटन मिशन

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित सेमेरिटन मिशन स्कूल दुनिया के टॉप 10 प्रेरणादायक स्कूलों में शामिल हुआ है। यूके केंद्रित संस्थान टी-4 एजुकेशन ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संस्थाओं के साथ मिलकर दुनिया भर में ऐसे स्कूलों पर एक शोध किया है और उसकी सूची तैयार की है। उक्त सूची में दुनिया के शीर्ष दस स्कूलों में हावड़ा के स्कूल को शामिल किए जाने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुशी जाहिर करते हुए शुभकामनाएं दी हैं।

उन्होंने शुक्रवार को ट्विटर पर लिखा है, “यह जानकारी साझा करते हुए मुझे खुशी हो रही है कि हावड़ा का सेमेरिटन मिशन स्कूल दुनिया भर के 10 शीर्ष प्रेरणादायक स्कूलों में से एक है। यूके स्थित शोध संस्थान टी-4 ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित निकायों के साथ साझेदारी में विश्व के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों को पुरस्कार के लिए चुना है। उन स्कूलों को चुना गया है जो प्रतिकूल परिस्थितियों को काबू पाने में प्रेरणादायक रहे हैं और उसमें हावड़ा का यह स्कूल टॉप टेन में शामिल है। इसके लिए बधाई और शुभकामनाएं।’’

( साभार – सलाम दुनिया डिजिटल)

88 प्रतिशत रहा उच्च माध्यमिक परीक्षा का परीक्षाफल

कूचबिहार की अदिशा अव्वल

कोलकाता : पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद ने 12वीं परीक्षा का परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया है। इस बार 88.44 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल रहे हैं। परिषद के अध्यक्ष चिरंजीव भट्टाचार्य ने शुक्रवार की सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टॉप 10 छात्रों की सूची जारी की। उन्होंने बताया कि कूचबिहार जिले की दिनहटा स्थित सनीदेवी जैन हाई स्कूल की छात्रा अदिशा देवशर्मा ने पूरे राज्य में टॉप किया है। उसे 500 में से 498 नंबर मिले हैं। पश्चिम मेदिनीपुर के जलचक्र नटेश्वरी नेताजी विद्यायतन के छात्र सायनदीप सामंत 497 नंबर हासिल कर दूसरे नंबर पर रहे। चार छात्र तृतीय आए हैं जिन्हें 496 नंबर मिले हैं। 495 नंबर हासिल कर 8 छात्र चौथे स्थान पर हैं जबकि 494 नंबर के साथ 11 छात्र पांचवें स्थान पर हैं। शीर्ष 10 की सूची में कुल 272 छात्र अपना स्थान बनाने में कामयाब रहे हैं। इनमें 144 लड़के और 128 लड़कियाँ शामिल हैं। जिलों में पूर्व मेदिनीपुर का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा है। इसके अलावा पश्चिम मिदनापुर, झाड़ग्राम, पुरुलिया, बांकुड़ा, कालिमपोंग सहित सात जिलों में 90 फ़ीसदी छात्र पास हुए हैं। इस बार भी राजधानी कोलकाता का प्रदर्शन जिलों के मुकाबले निराशाजनक रहा है।

पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक परीक्षा के परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिए गए हैं। इसके साथ ही अगले साल होने वाली उच्च माध्यमिक परी्क्षा की समय सूची भी घोषित कर दी गई है। उच्च माध्यमिक शिक्षा संसद के अध्यक्ष चिरंजीव भट्टाचार्य ने बताया कि अगले साल 14 मार्च से उच्च माध्यमिक की परीक्षाएं शुरू होंगी। उन्होंने बताया कि पूरे पाठ्यक्रम के अनुसार ही परीक्षाएं होंगी। उन्होंने यह भी बताया कि 2023 में होम सेंटर पर परीक्षा नहीं होगी।

जैसे कोरोना से पहले छात्रों को परीक्षा देने के लिए अपना स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता था वैसे ही अगले साल दूसरे स्कूलों में जाकर परीक्षा देनी होगी। उल्लेखनीय है कि उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद के एक सूत्र ने पहले ही बताया था कि कोरोना की वजह से होम सेंटर पर परीक्षा देने में काफी खर्च हुआ है और अस्थाई तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना पड़ा है। इसीलिए अगले साल से होम सेंटर से अलग स्कूलों में जाकर पहले की तरह परीक्षाएं ली जायेंगी।

माध्यमिक के नतीजे घोषित, 86.60% परीक्षार्थी सफल

इसके पूर्व गत 3 जून को माध्यमिक शिक्षा परिषद य़ानी वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने माध्यामिक परीक्षा के परिणाम घोषित किए। माध्यमिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ. कल्याणमय गांगुली ने संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से परीक्षा परिणामों की घोषणा की। इस बार भी जिलों ने कोलकाता को पछाड़ दिया है। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पूर्व मिदनापुर जिले ने जिलों में सबसे ज़्यादा सफलता दर्ज की है। कलिंपोंग ने दूसरा स्थान जबकि पश्चिम मिदनापुर जिले ने तीसरा स्थान दर्ज किया है। वहीं, कोलकाता चौथे स्थान पर रहा। 692 नंबर (99%) लाने वाले अर्णव घोराई (बांकुड़ा, रामहरिपुर रामकृष्ण मिशन स्कूल) और रौनक मंडल (पूर्व बर्दवान, बर्दवान सीएमएस स्कूल)

(साभार – सलाम दुनिया डिजिटल)

सुभाष चंद्र बोस की 30 फीट ऊंची प्रतिमा तैयार करेंगे मैसूरू के मूर्तिकार

इंडिया गेट पर की जाएगी स्थापित

नयी दिल्ली । मैसूरु के मूर्तिकार अरुण योगीराज सुभाष चंद्र बोस की 30 फुट ऊंची प्रतिमा को तैयार करेंगे, जिसे इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति स्थल के पीछे भव्य छतरी के नीचे स्थापित किया जाएगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। योगीराज ने केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फुट ऊंची प्रतिमा भी तैयार की थी, जिसका अनावरण पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती से पहले, प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि स्वतंत्रता आंदोलन में बोस के योगदान का सम्मान करने के लिए इंडिया गेट पर उनकी प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
छतरी को 1930 के दशक में सर एडविन लुटियन द्वारा शेष स्मारक के साथ बनाया गया था। इसमें एक समय इंग्लैंड के पूर्व राजा जॉर्ज पंचम की एक प्रतिमा रखी गई थी। प्रतिमा को 1960 के दशक में मध्य दिल्ली में कोरोनेशन पार्क में स्थानांतरित कर दिया गया था। एक बड़े काले जेड ग्रेनाइट पत्थर का चयन किया गया है और प्रतिमा बनाने के लिए इसे तेलंगाना से दिल्ली लाया गया है। प्रतिमा का डिजाइन संस्कृति मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) की एक टीम द्वारा किया गया है, जिसके प्रमुख अद्वैत गडनायक हैं।
संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि योगीराज एक जून को दिल्ली आने पर मूर्ति का चेहरा तराशेंगे और यह काम 15 अगस्त तक पूरा होने वाला है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले जब उन्हें पिछले महीने दो फुट की प्रतिकृति भेंट की गई थी तो योगीराज द्वारा बनाई गई प्रतिमा के संस्करण को मंजूरी दी थी । मोदी ने बाद में मॉडल की तस्वीर के साथ योगीराज से मुलाकात के बारे में ट्वीट किया था। केदारनाथ में स्थापित आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के निर्माण के अलावा, योगीराज के अन्य कार्यों में मैसूरु में महाराजा जयचामराजेंद्र वडेयार की 14.5 फुट की सफेद संगमरमर की प्रतिमा और स्वामी रामकृष्ण परमहंस की आदमकद सफेद संगमरमर की प्रतिमा शामिल है।

यूपीएससी – प्रेरणा देती हैं इन मेधावी युवाओं की कहानियाँ

नयी दिल्ली। सफलता के लिए एक कीमत अदा करनी होती है। संघर्ष करना होता है। कुर्बानियां देनी होती हैं। देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा संघ लोक सेवा आयोग ने इस परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी किया। इस रिजल्ट में देश के वैसे इलाकों से भी युवा पास हुए हैं जिनको अपने जीवन में कई झंझावातों का सामना करना पड़ा। कोई मजदूर का बेटा है तो किसी के घर के हालात ऐसे नहीं थे कि वह इस परीक्षा की तैयारी कर सके। लेकिन कहते हैं न सोना तपकर ही ‘कुंदन’ बनता है। तो इस परीक्षा में भी ऐसे कई कुंदन निकले हैं जिन्होंने मुसीबतों का सामना करके, छोटे शहरों के होकर भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

कर्ज लेकर परिवार का गुजारा, अब आईएएस
बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले विशाल कुमार को संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 484वां स्थान मिला है। विशाल के पिता मजदूरी किया करते थे। बाद में उनके पिता का साया भी सिर से उठ गया। ऐसे में मां ने परिवार का पेट पालने के लिए कर्ज लिया और अपने बेटे की पढ़ाई को जारी रखा। शुरू से ही विशाल काफी तेज तर्रार छात्र रहे हैं। उन्होंने 10वीं में अपने जिले में पहला स्थान हासिल किया था। मां ने अपने बेटे को आगे बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। विशाल ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर आईआईटी जैसे परीक्षा में भी सफलता हासिल की और IIT कानपुर से केमिकल इंजीनयरिंग में ग्रेजुएशन किया। उन्होंने देश की इस सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा की जमकर तैयारी की और इसमें सफलता का परचम लहरा दिया।

लेखपाल की नौकरी, 1 साल की छुट्टी..केदार की सफलता की कहानी 
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर सदर तहसील में तैनात लेखपाल केदारनाथ शुक्ल ने आईएएस बनने की कहानी किसी सपने के जैसा है। नौकरी करते हुए केदारनाथ को तैयारी करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। लेकिन केदारनाथ ने मन में ठान लिया था तो ऊपर वाले ने भी उनकी मदद की। केदारनाथ के आईएएस बनने का सपना साकार करने के लिए जिले के आईएएस अधिकारी कुलदीप मीना और सुमित महाजन ने प्रेरित किया। यही नहीं, केदारनाथ के वरिष्ठों ने उन्हें तैयारी करने के लिए एक साल की छुट्टी तक दे दी। आपने मां-बाप के एकलौते बेटे केदारनाथ ने यूपीएससी में 465वीं रैंक हासिल की है। लेखपाल पद का निर्वहन करते हुए केदारनाथ शुक्ल के बारे में आईएएस व जॉइंट मैजिस्ट्रेट कुलदीप मीना व सुमित महाजन को पता चला तो उन्होंने केदारनाथ से बात की, उन्हें प्रेरित किया और तैयारी के लिए एक साल की छुट्टी दिलाई। अधिकारियों का बल मिला तो केदारनाथ ने जुनून के साथ तैयारी शुरू कर दी। मेहनत रंग लाई और केदारनाथ ने आखिरकार संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।

अंशु प्रिया, असफलता से सफलता की कहानी
बिहार के मुंगेर की रहने वाली अंशु प्रिया पेशे से चिकित्सक हैं। लेकिन अब उनका नया पेशा लोक सेवक का होगा। यूपीएससी परीक्षा में उन्हें 16वीं रैंक मिली है। हालांकि, अंशु के लिए ये सब इतना आसान नहीं था। डॉक्टर की नौकरी छोड़कर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने वाली अंशु को शुरुआत के दो प्रयास में असफल रही थीं। लेकिन उन्होंने इससे बिना घबराए तीसरी बार प्रयास किया और इस बार उन्होंने इस परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। अंशु के पिता शिक्षक हैं जबकि मां गृहिणी हैं। अंशु ने अपनी सफलता से साबित किया कि अगर लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें तो कुछ भी असंभव नहीं है।

एमपी के कृष्णपाल की कहानी
मध्य प्रदेश के कृष्णपाल राजपूत के आईएएस बनने की कहानी आपको प्रेरित करेगी। वकील पिता और आंगनवाड़ी सहायिका के बेटे कृष्णपाल शुरू से ही प्रतिभावान रहे हैं। निवाड़ी जिले के ओरछा के रहने वाले कृष्णपाल ने अपना लक्ष्य पाने के लिए चार साल तक तपस्या की और अपने पहले ही प्रयास में 329वीं रैंक हासिल कर ली। पिता रामकुमार ने बताया कि उनके बेटे ने छोटी उम्र में ही प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य बना लिया था। 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद से वे अपनी कॉलेज की पढृाई के साथ सिविल सर्विसेज परीक्षा से संबंधित जानकारियां जुटाने लगे थे। इसीलिए वे परिवार की सुख-सुविधा को छोड़ ग्वालियर गए थे।

15 साल तक ‘संन्यास’, तब आईएएस परीक्षा में सफलता
बिहार के नवादा जिले के रोह प्रखंड के रहने वाले आलोक रंजन ने यूपीएससी परीक्षा में 346वीं रैंक पाई है। आलोक की इस परीक्षा को पास करने की यात्रा काफी मुश्किलों वाली रही है। आलोक 15 साल तक घर नहीं गए थे। उनकी जिद थी कि जबतक वह आईएएस नहीं बनेंगे घर नहीं आएंगे। आलोक के पिता नरेश यादव और मां सुशीला देवी शिक्षक हैं। आलोक ने 2007 में मैट्रिक नवादा के जीवनदीप पब्लिक स्कूल से किया था। उसके बाद वह कोटा चले गए थे, जहां से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय नई दिल्ली से स्नातक किया। आलोक ने 2015 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी। कड़ी मेहनत के बाद सातवें प्रयास में आलोक को सफलता मिली

दिल्ली की आयुषी, ‘बंद’ आंखों से सफलता
सफलता के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत होना जरूरी होता है। दिल्ली की आयुषी शर्मा इसका जीता जागता उदाहरण हैं। यूपीएससी की परीक्षा में 48वां रैंक हासिल करने वाली आयुषी 100 प्रतिशत दृष्टिहीन हैं। लेकिन उनकी सफलता में ये मुश्किल बाधा नहीं बन सकी और उन्होंने मेहनत के जरिए देश की इस सबसे प्रतिष्ठित सेवा में सफलता हासिल की। अपने चौथे प्रयास में सफल होने वाली आयुषी अपने स्कूल में हमेशा से टॉपर रही हैं। वह मुबारकपुर स्थित स्कूल में इतिहास की लेक्चरर रही हैं। वह अपनी तैयारी के लिए रात में कम सोती थीं।

(साभार – नवभारत टाइम्स)