Thursday, April 30, 2026
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बंगाल सरकार ने किया 14 आईपीएस अधिकारियों का तबादला

– कई जिलों में बड़े पैमाने पर बदलाव
कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को पुलिस प्रशासन में बड़े पैमाने पर फेरबदल करते हुए कुल 14 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया। गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू होंगे और अधिकारी नई जगहों पर अपना कार्यभार संभालेंगे। निर्देश के अनुसार, अरिजीत सिन्हा को एसपी झारग्राम से हटाकर मिदनापुर रेंज के डीआईजी के पद पर नियुक्त किया गया है। वैभव तिवारी को एसपी बांकुड़ा से एसपी पुरुलिया भेजा गया है, जबकि अभिजीत बनर्जी को एसपी पुरुलिया से एसपी मालदा बनाया गया है। इसी तरह प्रदीप कुमार यादव को एसपी मालदा से हटाकर उत्तर दिनाजपुर में ट्रैफिक एसपी की जिम्मेदारी दी गई है। वाई. राघुवंशी को एसपी अलीपुरदुआर से एसपी जलपाईगुड़ी स्थानांतरित किया गया है। आईपीएस सचिन को एसएस, आईबी, डब्ल्यूबी से डीसी न्यू टाउन, बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट में पदस्थ किया गया है। धृतिमान सरकार को एसपी पश्चिम मेदिनीपुर से एसएस, आईबी, डब्ल्यूबी भेजा गया है। खांदबहाले उमेश गणपत को एसपी जलपाईगुड़ी से एसएस अलीपुरदुआर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं डॉ. सोनावणे कुलदीप सुरेश को वेस्ट जोन, आसनसोल दुर्गापुर से हटाकर एसपी रायगंज पुलिस जिला बनाया गया है। सौम्यदीप भट्टाचार्य को एसपी पूर्व मेदिनीपुर से हटाकर एसपी बांकुड़ा भेजा गया है। मानव सिंगला को डीसी न्यू टाउन बिधाननगर पीसी से एसपी झारग्राम बनाया गया है। पलाश चंद्र ढाली को एसपी बारुईपुर से एसपी पश्चिम मेदिनीपुर भेजा गया है। शुभेन्द्र कुमार को एडिशनल एसपी (रूरल) पूर्व मेदिनीपुर से एसपी बारुईपुर पुलिस जिला नियुक्त किया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि ये सभी नियुक्तियां सार्वजनिक हित में की गई हैं और आगे के आदेश तक प्रभावी रहेंगी।

8.2 प्रतिशत बढ़ी भारत की जीडीपी

– पीएम ने बताया उत्साहजनक
नयी दिल्‍ली। देश की अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 8.2 फीसदी की दर से बढ़ी है, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि है। चालू वित्त वर्ष की (अप्रैल-जून) पहली तिमाही में यह वृद्धि दर 7.8 फीसदी थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के जारी आंकड़ों में बताया कि चालू वित्‍त वर्ष 2025-26 की (जुलाई-सितंबर) दूसरी तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 8.2 फीसदी की दर से बढ़ी है, जो पिछली छह तिमाहियों में सर्वाधिक है। पहली तिमाही में यह 7.8 फीसदी रही थी, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की समान तिमाही में यह 5.6 फीसदी थी। एनएसओ के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था ने लगार तीसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन जारी रखा है। यह छह तिमाहियों में सबसे ज्‍यादा 8.2 फीसदी की दर से बढ़ी है, जबकि पिछली तिमाही में यह 7.8 फीसदी थी। आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी का 14 फीसदी है, दूसरी तिमाही में 9.1 फीसदी बढ़ा है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की इसी तिमाही में यह 2.2 फीसदी था। विनिर्माण क्षेत्र देश की जीडीपी में लगभग 14 फीसदी का योगदान देता है। वहीं, चालू वित्‍त वर्ष के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्‍टूबर के बीच भारत का राजकोषीय घाटा 8.25 लाख करोड़ रुपये रहा। यह वार्षिक अनुमानों का 52.6 फीसदी है। इस बार राजकोषीय घाटा पिछले वर्ष के 46.5 फीसदी से अधिक है। सरकार का लक्ष्य इस वित्‍त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 फीसदी तक कम करना है, यह एक साल पहले 4.8 फीसदी था। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती और उपभोक्ता मांग में तेजी के कारण कारखानों ने उत्पादन बढ़ाया, जिससे समग्र विकास दर में तेजी आई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में दर्ज 8.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि सरकार की विकासोन्मुख नीतियों और सुधारों के सकारात्मक प्रभाव के साथ-साथ देशवासियों की मेहनत और उद्यमशीलता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि अत्यंत उत्साहजनक है और यह दर्शाती है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार सुधारों को गति देने तथा प्रत्येक नागरिक के ईज ऑफ लिविंग को सुदृढ़ करने के लिए संकल्पित है, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की लगातार प्रगति सरकार की नीतिगत स्थिरता, पारदर्शिता और सुधारों के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है।

 

एक करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देगी बिहार सरकार

पटना । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्य में सरकारी नौकरी को लेकर बड़ा आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगले 5 सालों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देना सरकार की प्राथमिकता है। सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “राज्य में अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार मिले, ये शुरू से ही हम लोगों की प्राथमिकता रही है। सात निश्चय-2 के तहत वर्ष 2020-25 के बीच राज्य में 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार दिया गया है। अगले 5 वर्षों (2025-30) में हम लोगों ने 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।” उन्होंने लिखा, ”नई सरकार के गठन के पश्चात राज्य में अधिक से अधिक सरकारी नौकरी एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध करने के लिए हम लोगों ने तेजी से काम शुरू कर दिया है। सरकारी नौकरी की रिक्तियों को जल्द से जल्द भरने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। राज्य के अधीन सभी प्रशासी विभाग, सभी प्रमंडलीय आयुक्त, पुलिस मुख्यालय के अधीन सभी कार्यालय एवं सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे सामान्य प्रशासन विभाग को रिक्तियों से संबंधित अधियाचना दिनांक 31.12.2025 तक अवश्य उपलब्ध करा दें। सामान्य प्रशासन विभाग प्राप्त अधियाचनाओं को यथाशीघ्र जांच कर संबंधित विभिन्न नियुक्ति आयोगों को भेज दें।”
मुख्यमत्री नीतीश कुमार ने आगे लिखा, ”सभी नियुक्ति आयोगों एवं चयन एजेंसियों को निर्देशित किया गया है कि जनवरी 2026 में नियुक्ति हेतु पूरे साल का कैलेंडर प्रकाशित करें, जिसमें अन्य आवश्यक सूचनाओं के अतिरिक्त विज्ञापन प्रकाशन की तिथि, परीक्षा आयोजन की संभावित अवधि, अंतिम परीक्षाफल प्रकाशन की तिथि आदि का स्पष्ट रूप से उल्लेख हो। परीक्षा के चाहे जितने भी चरण हों, किसी भी परिस्थिति में विज्ञापन प्रकाशन से अंतिम परीक्षाफल में एक साल से अधिक समय नहीं लगना चाहिए।” उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ”सभी परीक्षाओं को पारदर्शी एवं स्वच्छ तरीके से संपन्न कराने हेतु सभी नियुक्ति आयोगों एवं चयन एजेंसियों को निर्देशित किया गया है। परीक्षाओं में अनुचित साधन की रोकथाम के लिए सख्त और तत्काल कार्रवाई की जाए। परीक्षा में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर दोषियों को चिन्हित करते हुए उनके विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से दंडित कराने का भी निर्देश दिया गया है।” सीएम नीतीश कुमार ने बताया कि बिहार में ऑनलाइन परीक्षा सीबीटी (कंप्यूटर आधारित टेस्ट) हेतु परीक्षा केन्द्रों की संख्या को बढ़ाने का भी निर्देश दिया गया है ताकि परीक्षाओं का आयोजन ससमय एवं सुचारू रूप से किया जा सके। राज्य के युवाओं के सुखद भविष्य के लिए हमलोग शुरू से काम कर रहे हैं। अधिक से अधिक सरकारी नौकरी एवं रोजगार देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। सभी परीक्षाएं ससमय एवं पूर्ण पारदर्शिता के साथ आयोजित की जाएंगी। बिहार के युवा दक्ष एवं आत्मनिर्भर हों तथा उन्हें अधिक से अधिक रोजगार मिल सके, और उनका भविष्य सुरक्षित हो, इसके लिए हमलोग कृतसंकल्पित हैं।

एसआईआर पर फिलहाल रोक नहीं : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली । राज्यों में एसआईआर पर चल रही राजनीतिक बहस के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूछा कि क्या सरकारी स्कीमों का लाभ प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड रखने वाले “घुसपैठियों” को भी वोट देने की अनुमति दी जानी चाहिए। पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग कोई पोस्ट आफिस नहीं है, जो बिना कुछ पूछे फार्म-6 स्वीकार कर ले। आयोग के पास हमेशा दस्तावेज की सत्यता जांचने का वैधानिक अधिकार होता है। सिब्बल ने कहा कि जैसा इस बार हो रहा है, वैसा देश में पहले कभी नहीं हुआ।”आधार कार्ड एक क़ानून की रचना है। और वैध है। इस हद तक कि यह उस पर आधारित लाभों या विशेषाधिकारों को स्वीकार करता है। कोई भी इस पर विवाद नहीं कर सकता। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सामाजिक कल्याण और मताधिकार के बीच एक स्पष्ट अंतर खींचा। सीजेआई ने टिप्पणी की, “मान लीजिए कि कुछ व्यक्ति हैं जो किसी दूसरे देश से, पड़ोसी देशों से घुसपैठ करते हैं, वे भारत आते हैं, वे भारत में काम कर रहे हैं। भारत में रह रहे हैं, कोई गरीब रिक्शा चालक के रूप में काम कर रहा है, कोई निर्माण स्थल पर मजदूर के रूप में काम कर रहा है। अगर आप उसे आधार कार्ड जारी करते हैं ताकि वह रियायती राशन या किसी अन्य लाभ का फायदा उठा सके। तो यह हमारे संवैधानिक लोकाचार का हिस्सा है, यह हमारी संवैधानिक नैतिकता है। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि अब उसे मतदाता भी बनाया जाना चाहिए?” चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच कई राज्यों में मतदाता सूचियों को साफ करने के उद्देश्य से एसआईआर की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, जो पश्चिम बंगाल और केरल राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने एसआईआर प्रक्रिया को “जल्दबाजी, और अनुचित” करार देते हुए इसकी निंदा की। उसी दौरान बीच चीफ जस्टिस का यह क्लासिकल सवाल सामने आया। सिब्बल ने अदालत से आग्रह किया, “एक अनुमान है। एक स्व-घोषणा, कि मैं एक नागरिक हूं। मैं यहां रहता हूं। मेरे पास एक आधार कार्ड है। यह मेरा निवास है। अगर आप इसे हटाना चाहते हैं, तो एक प्रक्रिया के माध्यम से हटा दें।” उन्होंने अनपढ़ और हाशिए पर रहने वाले मतदाताओं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की दुर्दशा पर जोर दिया, जिनके बाहर होने का खतरा है। उसी पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की थी।

बंगाल में 26 लाख मतदाताओं का 2002 के रिकॉर्ड से मिलान नहीं

-मुंबई में 11 लाख से अधिक डुप्लीकेट नाम मिले

कोलकाता । पश्चिम बंगाल में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासी घमासान के बीच अब चुनाव आयोग ने एक बड़ा खुलासा किया है। बंगाल की मौजूदा मतदाता सूची और 2002 में तैयार हुई सूची के मिलान में करीब 26 लाख नाम मेल नहीं खाते। चुनाव आयोग ने बताया कि मुंबई की मतदाता सूची में भी 10.64 प्रतिशत यानी 11 लाख से अधिक डुप्लीकेट नाम पाए गए हैं। लेकिन बंगाल का मामला कहीं अधिक बड़ा और संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि यहां एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल लगातार विरोध जता रहे थे। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौजूदा मतदाता सूची की तुलना पिछली SIR प्रक्रिया (2002-2006) के रिकॉर्ड से करने पर इन 26 लाख नामों की विसंगति सामने आई। आयोग के पोर्टल पर बुधवार दोपहर तक पश्चिम बंगाल से 6 करोड़ से अधिक गणना प्रपत्र अपलोड किए जा चुके थे। अधिकारी के अनुसार, जब ये प्रपत्र मैपिंग प्रक्रिया में आते हैं, तब उनका मिलान पुराने रिकॉर्ड से किया जाता है। प्रारंभिक निष्कर्ष बताते हैं कि बंगाल में लगभग 26 लाख मतदाताओं का मिलान 2002 के रिकॉर्ड से नहीं हो पा रहा है। यह बयान उस समय आया है, जब राज्य के कई हिस्सों में एसआईआर को लेकर राजनीतिक स्तर पर विरोध हो रहा है और सत्तारूढ़ दल इसे अनुचित हस्तक्षेप बताता रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में रिकॉर्ड मिसमैच चाहे वह आउटमाइग्रेशन, डेथ रिकॉर्ड्स, एड्रेस शिफ्ट या डुप्लिकेशन की वजह से हो; चुनाव की पारदर्शिता को सीधे प्रभावित करने वाला पहलू है। चुनाव आयोग का यह खुलासा अब उस राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है, जिसमें राज्य सरकार और विपक्ष एक-दूसरे पर मतदाता सूची में गड़बड़ी कराने के आरोप लगाते रहे हैं।
दूसरी ओर, मुंबई की ताजा मतदाता सूची भी चिंताजनक तस्वीर पेश करती है। महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, 1.03 करोड़ मतदाताओं में से 11 लाख से अधिक नाम डुप्लीकेट पाए गए हैं। कुछ वार्डों में एक ही व्यक्ति का नाम 2 से लेकर 103 बार तक दर्ज मिला। एसईसी ने आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख अब 3 दिसंबर कर दी है और अंतिम सूची 10 दिसंबर को प्रकाशित होगी। विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई की स्थिति बताती है कि देशभर में मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कितना आवश्यक है, जबकि बंगाल के आंकड़े इस दिशा में सबसे बड़ा अलार्म हैं।

असम में बहुविवाह प्रतिबंध विधेयक पारित

गुवाहाटी । असम विधानसभा ने गुरुवार को असम प्रोहिबिशन ऑफ पॉलिगैमी बिल, 2025 को मंजूरी दे दी। इसी दौरान मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने सदन में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि यदि वे अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद फिर से सत्ता में लौटते हैं तो नई सरकार के पहले सत्र में ही यूसीसी पेश किया जाएगा और बिना किसी देरी के लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बहुविवाह प्रतिबंध कानून “यूसीसी की दिशा में उठाया गया ठोस कदम” है और सभी समुदायों में व्यक्तिगत कानूनों की एकरूपता लाना उनकी प्रतिबद्धता है। विधेयक में बहुविवाह को दंडनीय अपराध माना गया है, जिसके लिए 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों और षष्ठ अनुसूची के अधीन क्षेत्रों को इस कानून से मुक्त रखा गया है। सरमा ने स्पष्ट किया कि यह कानून “धर्म निरपेक्ष” है और किसी एक समुदाय को लक्षित नहीं करता। उनके अनुसार, “हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चियन—सभी समाजों में बहुविवाह के मामले मिलते हैं, इसलिए यह कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा।” सरकार की एकता की अपील के बावजूद एआईयूडीएफ और माकपा ने विधेयक में संशोधन की मांग की, लेकिन सभी संशोधन ध्वनिमत से खारिज कर दिए गए। सरमा ने यह भी घोषणा की कि सरकार फरवरी अंत तक “छलपूर्वक विवाह” के खिलाफ एक अलग विधेयक लाएगी, जिसे वे आम बोलचाल में “लव-जिहाद” से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की दिशा में एक कदम बताते हैं।

पीएम ने लॉन्च किया स्काईरूट का इन्फिनिटी कैंपस और रॉकेट ‘विक्रम-I’

नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हैदराबाद में भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप स्काईरूट का नया इन्फिनिटी कैंपस उद्घाटित किया। उन्होंने कंपनी का पहला कक्षीय रॉकेट विक्रम-I भी पेश किया, जो उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम है। इन्फिनिटी कैंपस में लगभग 2,00,000 वर्ग फीट का अत्याधुनिक कार्यक्षेत्र है। यहाँ वैज्ञानिक और इंजीनियर रॉकेट डिजाइन, विकास, एकीकरण और परीक्षण कर सकेंगे। स्काइरूट के इस नये इन्फिनिटी कैंपस में अत्याधुनिक रॉकेट बनाने की सुविधा है। इस कैंपस में हर महीने एक नया कक्षीय रॉकेट बनाने की क्षमता है। मोदी ने कहा कि यह भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत को अंतरिक्ष में नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं और युवाओं के लिए उच्च तकनीक की दुनिया में अवसर पैदा कर रहे हैं। भारत बड़े सपने देख रहा है, बड़े कदम उठा रहा है और बेहतरीन परिणाम दे रहा है। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत के विकास यात्रा में सह-निर्माता बनें। भारत का विमानन क्षेत्र अब दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते घरेलू बाजारों में शामिल है और हमारा घरेलू बाजार वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भारत का 85 प्रतिशत एमआरओ कार्य विदेशी भूमि पर होता था, जिससे लागत अधिक होती थी और विमानों की ग्राउंडिंग लंबी रहती थी। अब सरकार इस स्थिति को बदल रही है। देश की उड़ान केवल विमानन तक सीमित नहीं है। अंतरिक्ष की दुनिया में भी भारत तेजी से अपनी जगह बना रहा है। स्काईरूट भारत की प्रमुख निजी अंतरिक्ष कंपनी है। इसे दो भारतीय इंजीनियर और पूर्व इसरो वैज्ञानिक पवन चंदना और भरत ढाका ने शुरू किया। दोनों आईआईटी के पूर्व छात्र हैं और विज्ञान में अपनी पकड़ रखने के साथ उद्यमिता में भी सफल रहे। नवंबर 2022 में स्काईरूट ने अपना उप-कक्षीय रॉकेट विक्रम-S लॉन्च किया। इस सफलता के साथ यह पहली भारतीय निजी कंपनी बनी जिसने रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजा। इसी सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद में सफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन सर्विसेज की नई मेन्टेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल ( एमआरओ) सुविधा का वर्चुअली उद्घाटन किया। यह सुविधा जीएमआर एयरोस्पेस और इंडस्ट्रियल पार्क में स्थापित की गई है और यह भारत का सबसे बड़ा इंजन एमआरओ सेंटर होगा। इस सेंटर के खुलने से विमान और उनके इंजनों की मरम्मत का काम अब भारत में ही संभव होगा। इससे विदेशी निर्भरता कम होगी और विमान संचालन की लागत भी घटेगी।

बारासात मेडिकल कॉलेज में चूहों ने ही चुरा लीं मृत प्रीतम की आँखें

बारासात । किसी व्यक्ति ने नहीं बल्कि मृतक की आंखें चूहों ने ही ‘चुरायी’ हैं। बारासात मेडिकल कॉलेज के मॉर्ग से मृतक की आंखें चुराने के आरोप में जांच अधिकारियों ने इसी बात पर ही मुहर लगाया है। बताया जाता है कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चूहों द्वारा ही मृतक की आंखें नोच लेने की बात कही गयी है। बता दें, पिछले दिनों ही प्रीतम घोष के शव से आंखें गायब होने का आरोप लगाया जा रहा था। तब अस्पताल प्रबंधन की तरफ से दावा किया गया था कि आंखों को चूहों ने नोच खाया है। लेकिन परिजन इस दावे को मानने से इनकार कर रहे थे। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के जांच अधिकारियों की रिपोर्ट में चूहों द्वारा नोचने की तरफ ही इशारा किया गया गया है। दूसरी बार पोस्टमार्टम होने के बाद 3 सदस्यीय कमेटी ने स्पष्ट कर दिया कि ऑपरेशन कर आंखें नहीं निकाली गयी हैं बल्कि चूहे या उसके जैसे ही किसी जीव के आक्रमण से ही आंखों को नुकसान हुआ है। बताया जाता है कि बारासात मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में दूसरा पोस्टमार्टम किया था। उस कमेटी में एक नेत्ररोग विशेषज्ञ, एक शल्य चिकित्सक व एक सहायक मेडिकल सुपर (एएमएस) मौजूद थे। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की गयी है। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया है। बुधवार की रात को स्वास्थ्य विभाग को जांच अधिकारियों द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट में बताया गया है कि शव में आईबॉल का कुछ हिस्सा मौजूद है। बाकी हिस्से में खून जमकर काला हो गया है। इसलिए ही बाहर से देखने पर ऐसा लग रहा है कि आंखें नहीं है। जांच अधिकारियों ने लिखित रूप से बताया है कि आंखों को ऑपरेशन कर नहीं निकाला गया है। चूहों या उनके जैसे किसी जीव के आक्रमण की वजह से ही ऐसा हुआ है। अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मॉर्ग में कोई चूहा घुसा है अथवा नहीं, इसकी जांच की जा रही है। बता दें, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले को रोककर प्रीतम घोष के परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद ही मुख्यमंत्री ने एक जांच कमेटी का गठन करने का आदेश दिया था। जांच कमेटी की रिपोर्ट में भी चूहों द्वारा ही आंखें नोच लेने का दावा किया जा रहा है।

विदेशों में अपनी संपत्ति छुपाने वाले आयकर विभाग के राडार पर

नयी दिल्‍ली। आयकर विभाग विदेशों में अपनी संपत्ति छुपाने को लेकर कई टैक्सपेयर्स पर सख्ती बरतने की तैयारी में है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने गुरुवार को ‘एनयूडीजीई’ पहल के दूसरे चरण को लॉन्च करने का ऐलान किया है, जिसका मकसद विदेशी एसेट्स और इनकम की रिपोर्टिंग में वॉलंटरी कम्प्लायंस को मजबूत करना है। वित्त मंत्रालय ने जारी एक बयान में बताया कि आयकर विभाग ने ऐसे अधिक-जोखिम वाले मामलों को चिह्नित किया है जिनमें करदाताओं ने मूल्यांकन वर्ष 2025-26 के आयकर रिटर्न में अपनी विदेशी परिसंपत्तियों का ब्योरा नहीं दिया है। सीबीडीटी के मुताबिक आयकर विभाग की ओर से 28 नवंबर से इन करदाताओं को एसएमएस एवं ई-मेल भेजा जाएगा और उन्हें दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए 31 दिसंबर, 2025 तक संशोधित आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की सलाह दी जाएगी। आयकर विभाग ने एक बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए एईओआई जानकारी के विश्लेषण से ऐसे कई मामलों का पता चला है, जिनमें विदेशी संपत्तियां होने की संभावना है, लेकिन इस साल के रिटर्न में उनका ब्योरा नहीं दिया गया है। सीबीडीटी अपनी दूसरे ‘एनयूडीजीई’ इनिशिएटिव के तहत सीबीडीटी 28 नवंबर से पहचाने गए टैक्सपेयर्स को एसएमएस और ई-मेल भेजेगा, जिसमें उन्हें सलाह दी जाएगी कि वे 31 दिसंबर तक या उससे पहले अपनी मर्जी से अपने रिटर्न को रिव्यू और रिवाइज करें, ताकि सजा से बचा जा सके। मंत्रालय के मुताबिक सीबीडीटी को भारतीय निवासियों की विदेशी वित्तीय संपत्तियों की जानकारी सूचना-साझाकरण प्रणालियों- कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (सीआरएस) और अमेरिकी विदेशी खाता कर अनुपाल अधिनियम के तहत मिलती है। यह सूचना रिटर्न में संभावित त्रुटियों को पहचानने और करदाताओं को सही अनुपालन के लिए मार्गदर्शन करने में सहायक होती है। इस अभियान का उद्देश्य आईटीआर में विदेशी परिसंपत्तियों (एफए) और विदेशी स्रोत से आय (एफएसआई) खंडों के तहत सही और पूर्ण विवरण सुनिश्चित करना है। विदेशी संपत्तियों एवं विदेशी स्रोत से आय का सही खुलासा आयकर अधिनियम, 1961 और काला धन अधिनियम, 2015 के तहत कानूनी रूप से अनिवार्य है। उल्‍लेखनीय है कि पिछले साल भी आयकर विभाग ने स्वचालित सूचना आदान-प्रदान (एईओआई) व्यवस्था के तहत विदेशी क्षेत्राधिकारों द्वारा सूचित ऐसे करदाताओं को संदेश भेजे थे, जिन्होंने अपने विदेशी निवेश और खातों का विवरण आयकर रिटर्न (आईटीआर) में नहीं दिया था। इस पहल का परिणाम यह हुआ कि कुल 24,678 करदाताओं ने अपने रिटर्न में संशोधन किया था और 29,208 करोड़ की विदेशी परिसंपत्तियों एवं 1,089.88 करोड़ रुपये की विदेशी इनकम का खुलासा किया था।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद एसएससी ने जारी किये 1,806 दागी उम्मीदवारों के नाम

– नियुक्तियों की विस्तृत सूची 10 दिसंबर तक पेश करने का निर्देश
कोलकाता । पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) ने गुरुवार को 1,806 दागी उम्मीदवारों की एक नई व्यापक सूची जारी की। इन्हें पहले 2016 राज्य स्तरीय चयन परीक्षा (एसएलएसटी) में सहायक शिक्षक पदों के लिए योग्य के रूप में चिह्नित किया गया था। कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश का पालन करते हुए आयोग ने दोपहर के आसपास सूची अपलोड की जिसमें अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के नाम, उनके द्वारा पढ़ाए जाने वाले विषय, रोल नंबर और जन्मतिथि शामिल थी। न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की अदालत ने आयोग से 2016 के नियुक्ति पैनल की मियाद खत्म होने के बाद जारी की गई सभी नियुक्तियों की विस्तृत सूची 10 दिसंबर तक पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही 2025 की नियुक्ति प्रक्रिया की लिखित परीक्षा की ओएमआर शीट भी वेबसाइट पर अपलोड करने का आदेश दिया गया है। न्यायमूर्ति सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि एसएससी के 2016 पैनल की वैधता समाप्त होने के बावजूद, जिन अभ्यर्थियों को वर्ष 2025 में 9-10वीं और 11-12वीं कक्षाओं के लिए शिक्षक नियुक्ति पत्र दिए गए, उनकी पूरी सूची सार्वजनिक की जाए। कोर्ट का कहना है कि यदि इस सूची में नाम होने के बावजूद कोई अभ्यर्थी 2025 की नई भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुआ है, तो उसका भविष्य इस केस के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। कोर्ट ने एसएससी से यह भी पूछा कि 2025 की परीक्षा की ओएमआर शीट अब तक वेबसाइट पर क्यों नहीं डाली गई है। न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। ऐसे में शुरू से ही पारदर्शिता बरतना जरूरी है, नहीं तो भविष्य में फिर अनियमितता के आरोप लग सकते हैं। इस आदेश के बाद अभ्यर्थियों के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीदें जागी हैं। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी। शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने गुरुवार को कहा कि स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार ‘दागी’ या ‘टेंटेड’ उम्मीदवारों की पूरी सूची आज ही प्रकाशित करेगा। शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेष रूप से सक्षम अभ्यर्थी के ‘टेंटेड’ सूची में नाम रहने के विषय में एसएससी ही निर्णय लेगा। एक बार फिर मंत्री ने दोहराया कि एसएससी का कार्य पूर्ण निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ चल रहा है और 31 दिसंबर की समयसीमा में नियुक्ति प्रक्रिया समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। दरअसल, बुधवार को उच्चतम न्यायालय ने एसएससी से जुड़े सभी मुकदमे फिर से उच्चतम न्यायालय में भेज दिए थे। इस पर मंत्री ब्रात्य बसु ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि जज या कोर्ट के अनुसार कानून या निर्णय बदलता है और वे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर पूरा विश्वास रखते हैं। न्यायालय ने एसएससी को निर्देश दिया था कि वह विस्तृत पहचान संबंधी जानकारी के साथ अयोग्य शिक्षकों के नाम पुनः प्रकाशित करे। हालांकि, अद्यतन सूची में उन स्कूलों का नाम नहीं बताया गया है जहां ये दागी शिक्षक लगभग एक दशक से काम कर रहे थे। इस सवाल पर कि क्या ये उम्मीदवार सितंबर 2025 में आयोजित नई भर्ती परीक्षा में शामिल होने वालों में शामिल थे ? एसएससी के एक अधिकारी ने इस संभावना से इन्कार किया। उन्होंने कहा, “हमने पहले भी दागी शिक्षकों की यही सूची अपलोड की थी। लेकिन इस बार उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, हमने पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त विवरण शामिल किए हैं।” यह घटनाक्रम सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें 2016 एसएलएसटी के माध्यम से चयनित 25,753 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को अमान्य करार दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि पूरी भर्ती प्रक्रिया दूषित थी, जिसे सुधारा नहीं जा सकता।
५.१३