Tuesday, April 7, 2026
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सीमा सुरक्षा बल को मिलीं 355 महिला प्रहरी नव – आरक्षक

लक्ष्मी शर्मा की रपट

राज्यपाल ने किया एसटीसी बैकुंठपुर में सत्यापन परेड का निरीक्षण

सिलीगुड़ी । बैकुण्ठपुर के सहायक प्रशिक्षण केन्द्र में सीमा सुरक्षा बल के 355 महिला प्रहरी नव-आरक्षक बैच संख्या – 211 व 212 के सत्यापन परेड (पासिंग आउट परेड) का आयोजन किया गया। इस भव्य परेड में मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़, एवं राज्य की प्रथम महिला डाॅ सुदेश धनखड़ भी मौजूद थीं। इस अवसर पर राज्यपाल ने महिला प्रहरी नव-आरक्षक बैच संख्या – 211 व 212 को सफलता पूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने एवं उत्कृष्ट दर्जे की परेड का प्रर्दशन करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि इन महिला नव-आरक्षकों की आंखों में जो चमक और मजबूत इरादे देखे है वह आगामी भविष्य में बदलते भारत का परिचायक है। उन्होंने अजय सिंह, महानिरीक्षक, सहायक प्रशिक्षण केन्द्र, बैकुन्ठपुर एवं उत्तर बंगाल सीमान्त मुख्यालय और उनके अनुभवी अनुदेशकों की टीम को इस भव्य परैड को इस मुकाम पर पहुँचाने के लिये भूरी-भूरी प्रशंसा की।

सहायक प्रशिक्षण केन्द्र, बैकुण्ठपुर, सीमा सुरक्षा बल के पश्चिम बंगाल के सीमा क्षेत्र का एक मात्र ऐसा प्रशिक्षण केन्द्र है, जिसने अभी तक 32367 सीमा सुरक्षा बल के नव-आरक्षकों और अन्य बल के 2573 कार्मिकों को प्रशिक्षित किया है। बैच संख्या- 211 में कुल 180 महिला नव-आरक्षक ने शपथ ग्रहण की है, जिनमें से 21 आन्ध्र प्रदेश से, 12 छत्तीसगढ़ से, 22 झारखण्ड से, 05 जम्मू-कश्मीर से, 19 मध्य प्रदेश से, 10 पंजाब से, 17 राजस्थान से, 31 उत्तर प्रदेश से, 25 ओडिशा से व 18 देश के विभिन्न प्रान्तों से है। जबकि, बैच संख्या- 212 में कुल 175 महिला नव-आरक्षक ने शपथ ग्रहण की है, जिनमें से 20 आन्ध्र प्रदेश से, 11 छत्तीसगढ़ से, 20 झारखण्ड से, 07 जम्मू-कश्मीर से, 17 मध्य प्रदेश से, 12 पंजाब से, 19 राजस्थान से, 29 उत्तर प्रदेश, 24 ओडिसा से व 16 देश के विभिन्न प्रान्तों से है।

बैच सं 211 से महिला नव-आरक्षक सुर्बना प्रधान और बैच सं 212 से महिला नव-आरक्षक सुमन गोदारा प्रशिक्षण के सभी क्रिया कलापों में प्रथम स्थान पर रहीं और इन दोनों को माननीय श्री जगदीप धनखङ, राज्यपाल, पश्चिम बंगाल ने सम्मानित किया । इसके साथ ही प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न गतिविधियों में अलग-अलग प्रतिस्पर्द्धाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली कुल 10 महिला नव-आरक्षकों को भी राज्यपाल ने ट्रॅाफी प्रदान कर सम्मानित किया।

44 सप्ताह के कठोर प्रशिक्षण के बाद ये महिला नव-आरक्षक इस मुकाम पर पहूँची है। इस रंगारंग पैरेड को देखने के लिये सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी, अन्य बलों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रतिष्ठित हस्थियां, प्रशिक्षुओं के माता-पिता व परिवारजन और गणमान्य अतिथि शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं ने धीरे-धीरे अभ्यास कर विभिन्न प्रकार के हथियारों को चलाने, चांदमारी कुशलता, सीमा प्रबंधन, कानूनी प्रावधान, ड्रिल एवं बल की अन्य गतिविधियों में दक्षता प्राप्त की। इसके अतिरिक्त सहायक प्रशिक्षण केन्द्र, बैकुण्ठपुर के प्रशिक्षकों की सख्त मेहनत से इनकी शारीरिक दक्षता में भी बढ़ोतरी हुई है जिसके परिणामस्वरूप यह सभी महिलानव-आरक्षक शारीरिक, मानसिक एवं व्यावसायिक तौर पर पूरी तरह से देश की सुरक्षा एवं देश विरोधी तत्वों का सामना करने के लिये तैयार हैं।

परेड के समापन के बाद ई गुल्म की महिला नव-आरक्षकों ने मोबाईल के दुष्प्रभाव पर एक शानदार प्रस्तुति दी और साथ ही ई गुल्म की लद्दाख क्षैत्र की रहने वाली महिला नव-आरक्षकों ने लद्दाख क्षैत्र की पारम्परिक वेशभूषा में लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया और संस्थान के पी.टी. अनुदेशकों ने शारीरिक दक्षता और विभिन्न कलाबाजियाँ दिखायीं। परेड के दौरान उपस्थित प्रशिक्षुओं के माता-पिता एवं परिवारजनों को इस यादगार परेड पर गर्व की अनुभूति हुई, जिसे वे जीवन भर अपनी यादों में संजो कर रखेंगे। सहायक प्रशिक्षण केंद्र, बैकुंठपुर में 818 महिला एवं पुरुष नव आरक्षक प्रशिक्षणरत थे, जिनमें से आज 355 महिला नव आरक्षक पास आउट हो चुकी हैं और अभी वर्तमान समय में 463 महिला एवं पुरुष नव आरक्षक प्रशिक्षणरत हैं।

गुजरात में कारखाना लगायेगी सुजुकी

नयी दिल्ली । जापान की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन ने भारत में 1.26 बिलियन डॉलर के निवेश  की योजना बनाई है। इस निवेश से यहां इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरियों के निर्माण के लिए फैक्ट्री लगाई जाएगी।
गुजरात में लगेगी फैक्ट्री
जापान के दैनिक समाचार पत्र ‘निक्केई’ की एक खबर में इस बारे में बताया गया है। इस खबर के मुताबिक गुजरात में सुजुकी की ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट के पास ही बैटरी यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव है। इस नई यूनिट पर कुल लगभग 150 बिलियन येन (1.26 अरब अमेरिकी डॉलर) के निवेश का अनुमान है। इसके अलावा भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
शिखर वार्ता के दौरान घोषित निवेश का हिस्सा
खबर में कहा गया है कि यह निवेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष फुमियो किशिदा के बीच हुई शिखर वार्ता के दौरान घोषित जापान के कुल निवेश में शामिल है। जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा शनिवार को भारत आ गए हैं।

विज्ञान का चमत्कार: ऐसा कपड़ा, जिसे पहनने वाला सुन सकेगा अपने दिल की धड़कनें

अभी तक आप अपने दिल की धड़कनों, पल्स व अन्य तरह की चीजों की निगरानी के लिए स्मार्टवॉच का ही उपयोग करते थे, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने ऐसा कपड़ा बनाने में सफलता हासिल की है, जिसकी मदद से आप आसानी से दिल और सांसों की निगरानी कर सकेंगे। दरअसल, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) और रोड आइलैंड स्कूल ऑफ डिज़ाइन (आरआईएसडी) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा फैब्रिक(कपड़ा) बनाया है, जिसकी मदद से हम अपनी दिल की धड़कनों और सांसों को आसानी से सुन सकते हैं। इसके अलावा आस-पास की धीमी आवाजों को भी सुना जा सकता है। यह फैब्रिक माइक्रोफ़ोन व स्पीकर दोनों की तरह काम करता है।
त्वचा के साथ करता है इंटरफेस
यह शोध एक नेचर जर्नल में प्रकाशित हुई है। प्रमुख वैज्ञानिक एमआईटी के वेई यान कहते हैं कि “यह कपड़ा मानव त्वचा के साथ स्पष्ट रूप से इंटरफेस कर सकता है, जिससे पहनने वाला अपने दिल और श्वसन की स्थिति पर निगरानी कर सकता है।” वह कहते हैं कि हम इसे और भी ज्यादा अपग्रेड करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे यह स्पेसफ्लाइट और यहां तक कि बिल्डिंग-क्रैक तक को मॉनीटर कर सके।
कैसे सुनाई देती है आवाज
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जिस तरह से एक माइक्रोफोन काम करता है ठीक वैसे ही यह कपड़ा ध्वनि को यांत्रिक कंपन में परिवर्तित करता है। इसके बाद इन कंपन को विद्युत संकेतों में बदल लेता है, जिस तरह से हमारे कान काम करते हैं। एमआईटी के वैज्ञानिक योएल फिंक कहते हैं कि, हम मानव शरीर के कान के पर्दे ने इस तरह का कपड़ा बनाने के लिए प्रेरित हुए बाद में यह सामने आया कि कान का पर्दा भी एक तरह के फैब्रिक से ही बना होता है।

सेव स्पैरो फाउंडेशन ने देशभर में बांटे 70 हजार घरौंदे

संजोया चिड़ियों का घोंसला तो घरों में गूंजने लगी चहचहाहट
हमारे आसपास गौरैया यानी घरेलू चिड़िया की चहचहाहट की गूंज कम सुनाई देने लगी है। इसकी एक वजह है घरेलू चिड़िया के सिमट रहे प्राकृतिक आवास। ऐसे में विलुप्त हो रही गौरैया को बचाने के लिए सेव स्पैरो फाउंडेशन आगे आया। इसके प्रयासों ने न केवल गौरैया की आबादी बढ़ी, बल्कि घर के अंदर ही चहचहाहट बढ़ गई है।

फाउंडेशन ने ऐसे घोंसले तैयार किए, जिन्हें गौरैया ने अपना आशियाना बनाने के लिए चुना। यह सब संभव हुआ तोशाम के राहुल बंसल की बदौलत। उसने सेव स्पैरो फाउंडेशन का गठन कर अब तक देशभर में करीब 70 हजार चिड़ियों के घोंसले बांट दिए। फाउंडेशन अब हर छह माह के दौरान करीब 25 से 30 हजार घोंसले बांटकर चिड़िया की आबादी बढ़ाने में जुटा है।

हरियाणा के भिवानी जिले के तोशाम निवासी राहुल बंसल इनकम टैक्स और जीएसटी के सलाहकार हैं। उन्होंने पांच वर्ष पहले सेव स्पैरो फाउंडेशन की स्थापना की थी। उनका मकसद अपने आसपास गौरैया की आबादी बढ़ाना था। उन्होंने चिड़िया के घोंसले बनाने के लिए कई प्रयोग किए।

शुरूआत में सफल नहीं हुए। बाद में उसने बिना केमिकल युक्त रंगों और प्लायवुड से घोंसला तैयार किया, जो कुछ समय बाद गौरैया को बहुत पसंद आया और उसमें उसकी आबादी फलने-फूलने लगी। ये घोंसले घर के किसी भी हिस्से में आसानी से लगाए जा सकते हैं।

हानिकारक कीड़ों से दिलाती है निजात, किसानों की भी है मित्र
राहुल बंसल बताते हैं कि उनके साथ अमृत अग्रवाल, यश, लक्ष्य, नंदिनी, काव्यांश, नरेंद्र गोयल भी इसी मुहिम में जुड़े हैं। हमारा प्रयास रहता है कि गौरैया को अपने आसपास ही आवास मुहैया कराया जाए। गौरैया हानिकरक कीड़ों को खाती है। इसलिए यह किसान की भी मित्र है। गौरैया का पर्यावरण पर भी सीधा असर पड़ता है। यह ऐसा पक्षी है, जो मनुष्य यानी मानव आबादी के साथ ही रहना पसंद करती है। इसलिए यह हमारे घरों में ही अपना छोटा सा आशियाना बनाने की तलाश में रहती है।

ऐसे लगाएं अपने घरों के अंदर गौरैया के घोेंसले
घोंसले को कम से कम सात से आठ फूट ऊंचाई पर लगाएं।
छायादार स्थान व बारिश से बचाव के स्थान पर लगाएं।
बंदरों व बिल्ली से बचाव के लिए छज्जों के नीचे की जगह व बालकनी उपयुक्त है।
घोंसलों के अंदर खाने-पीने के लिए कुछ नहीं डालें।
दाना व पानी की व्यवस्था घोंसलों से कम से कम आठ से 10 फुट दूर ही रखें।
घोंसलों के ऊपर किसी भी तरह का अलग से पेंट न करें।
घोंसलों की आपस में दूरी कम से कम तीन फूट रहे।
घोंसलों में किसी भी तरह की घास फूस न डालें।
एक बार लगाने के बाद घोंसलों से छेड़छाड़ न करें।
घोंसलों को छत के पंखों से दूर लगाएं।
ये भी ध्यान रखें कि रात के समय इनके घोंसलों के आसपास तेज रोशनी न जलाएं।
जब इनके अंडे देने का समय हो (मार्च से सितंबर) तब इनके 8-10 फुट दूर सूखी घास डाल सकते हैं।
घोंसलों को लगते समय यह भी ध्यान रखे कि इनके ऊपर गर्मियों में दोपहर व शाम की धूप सीधी न पड़े।

बेहतर ‘मार्केटिंग’ से बढ़ाया जा सकता है जीआई उत्पादों का निर्यात : वाणिज्य मंत्रालय

नयी दिल्ली । वाणिज्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि विभिन्न राज्यों में क्षेत्र विशेष की विशिष्ट खासियत और गुणवत्ता वाले (भौगोलिक संकेतक) कई उत्पाद हैं, जिन्हें वैश्विक बाजारों में संभावित खरीदारों तक पहुंचाने के लिए समुचित विपणन (मार्केटिंग) की जरूरत है।
मंत्रालय ने कहा कि स्थानीय भौगोलिक संकेतक का दर्जा प्राप्त कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिये सरकार नये उत्पादों और गंतव्यों की पहचान कर रही है।
सरकार कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के जरिये प्रयोग के तौर पर कुछ उत्पादों को नये बाजारों में भेजने की राह को सुगम बना रहा है। इन उत्पादों में काला नमक चावल, नगा मिर्च, शाही लीची, जलगांव का केला आदि शामिल हैं।
भौगोलिक संकेतक उन उत्पादों को दिया जाता है, जिनकी उत्पत्ति विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में होती है और इसके कारण उन उत्पादों की विशिष्ट गुणवत्ता तथा एक अलग पहचान होती है। ऐसे उत्पाद गुणवत्ता का गारंटी और विशिष्टता का आश्वासन देते हैं।
दार्जिलिंग की चाय, महाबलेश्वर की स्ट्रॉबेरी, बनारसी साड़ी और तिरुपति का लड्डू जैसे उत्पादों को जीआई संकेतक प्राप्त हैं। मंत्रालय ने कहा, ‘‘ दार्जिलिंग चाय और बासमती चावल भारत के दो लोकप्रिय भौगोलिक संकेतक वाले कृषि उत्पाद हैं। इन उत्पादों के लिये दुनियाभर में तैयार बाजार हैं। देश के विभिन्न भागों में भौगोलिक संकेतक दर्जा प्राप्त उत्पाद हैं, जिनके पास विशिष्ट लेकिन ऐसे ग्राहक हैं, जो उसे पसंद करते हैं। ऐसे उत्पादों को अधिक-से-अधिक संभावित खरीदारों तक पहुंचाने के लिये सही तरीके ‘मार्केटिंग’ की आवश्यकता है।’’देश में अभी की स्थिति के अनुसार 417 पंजीकृत भौगोलिक संकेतक वाले उत्पाद हैं। इनमें से 150 कृषि और खाद्य उत्पाद हैं।

 

पर्यावरण, सामाजिक, कंपनी संचालन के क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की कमी: विशेषज्ञ

नयी दिल्ली । पर्यावरण, सामाजिक और कंपनी संचालन (ईएसजी) के क्षेत्र में जरूरी कौशल वाले पेशेवरों की कमी देश के लिये 2050 तक शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के रास्ते में एक बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों ने यह बात कही।
शोध संस्थान थिंक चेंज फोरम के अनुसार भारत में ईएसजी क्षेत्र में निवेश 30 से 40 अरब डॉलर होने का अनुमान है और इसमें तेजी से वृद्धि हो रही है। तेजी से चौतरफा विकास के लिये ईएसजी का अनुपालन करने वालों को उपयुक्त वित्तीय संसाधनों, तकनीकी संसाधनों और पेशवरों और विशेषज्ञों के रूप में मानव संसाधन की जरूरत होगी।
संस्थान ने एक बयान में कहा, ‘‘पहले दो मामलों में प्रगति हुई है, लेकिन ईएसजी विशेषज्ञों और मानव संसाधनों के मामले में तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।’’
थिंक चेंज फोरम द्वारा आयोजित बैठक में भाग लेते हुए परामर्श कंपनी स्कल्प्ट पार्टनर्स के संस्थापक सदस्य और प्रबंध निदेशक कुमार सुब्रमण्यम ने कहा, ‘‘भारत में पिछले कुछ साल से हमने स्थायी वित्तपोषण और प्रौद्योगिकी के संबंध में कुछ प्रगति देखी है, लेकिन आज हमें वास्तव में कुशल ईएसजी पेशेवरों की एक टीम बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की आवश्यकता है…।’’
लार्सन एंड टुब्रो लि. के ‘कॉरपोरेट सस्टेनेबिलटी’ प्रमुख प्रदीप पाणिग्रही ने भी कहा कि जहां तक ईएसजी लक्ष्यों का संबंध है, सही विशेषज्ञता रखने वाले टीम की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘आपको वास्तविक तौर पर विशेषज्ञ बनाने की आवश्यकता है। सिर्फ प्रशिक्षण देने या किसी अन्य क्षमता निर्माण कार्यक्रम को शुरू करने से मदद नहीं मिलती है। आपको कारोबार की बारीकियों को समझने की जरूरत है। तब ही चीजें सही तरीके से काम करती हैं।’’
इंस्टिट्यूट ऑफ इकनॉमिक ग्रोथ में पर्यावरण और संसाधन अर्थशास्त्र इकाई की अध्यक्ष और प्रमुख पूर्णमिता दासगुप्ता ने कहा कि बड़ी कंपनियों के लिए ईएसजी जैसे कुछ क्षेत्रों में प्रगति करना आसान हो सकता है, लेकिन छोटी इकाइयों के लिये इस मामले में समस्या हो सकती हैं।

 नवीन के शव को दान करेगा परिवार, यूक्रेन में गोलीबारी में गई थी जान

बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने शनिवार को कहा कि युद्धग्रस्त यूक्रेन में रूस की गोलाबारी में मारे गए राज्य के एक मेडिकल छात्र का पार्थिव शरीर दान किया जा रहा है। इसके लिए सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई है। सूत्रों के मुताबिक नवीन के माता-पिता ने अंतिम श्रद्धांजलि के बाद अस्पताल को शव दान करने का फैसला किया है। खारकीव ‘नैशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी’ में मेडिकल के अंतिम वर्ष के छात्र नवीन शेखरप्पा ज्ञानगौदर की 1 मार्च को संघर्ष क्षेत्र में मौत हो गई थी। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने नवीन के पार्थिव शरीर को लेने के लिए एक अंतिम संस्कार एजेंट नियुक्त किया था। सरकारी नोडल अधिकारी (यूक्रेन संकट) मनोज राजन ने एक बयान में कहा कि एजेंट ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है और उसके बाद आवश्यक कागजी कार्यों को पूरा करके इसे वारसॉ (पोलैंड) ले जाया गया है।
प्राइवेट अस्पताल को शव दान कर सकता है परिवार
नवीन हावेरी जिले के रानेबेन्नूर तालुक के चलगेरी गांव के निवासी थे। सूत्रों के मुताबिक, उनके माता-पिता ने अंतिम श्रद्धांजलि देने के बाद दावनगेरे के एक निजी अस्पताल को शव दान करने का फैसला किया है। नवीन के पिता शंकरप्पा ने कहा- मेरा बेटा चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ हासिल करना चाहता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कम से कम उसके शरीर का उपयोग अन्य मेडिकल छात्र पढ़ाई के लिए कर सकते हैं। इसलिए, हमने चिकित्सा अनुसंधान के लिए अपने बेटे का शरीर दान करने का फैसला किया है।

क्रिप्टोकरेंसी के वर्गीकरण पर काम कर रही है सरकार

लेनदेन पर कर लगाने की तैयारी
नयी दिल्ली । केन्द्र सरकार क्रिप्टोकरेंसी के वर्गीकरण पर काम कर रही है। इस समय सिर्फ क्रिप्टो एक्सचेंज द्वारा दी जाने वाली सेवा पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है और इसे वित्तीय सेवाओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। जीएसटी अधिकारियों का विचार है कि क्रिप्टो किसी लॉटरी, कैसीनो, सट्टेबाजी, जुआ, घुड़दौड़ के समान हैं, जिनके पूरे मूल्य पर 28 प्रतिशत जीएसटी लागू है। इसके अलावा सोने के मामले में पूरे लेनदेन मूल्य पर तीन प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है।
क्रिप्टोकरेंसी पर जीएसटी लगाने के संबंध में स्पष्टता
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ”क्रिप्टोकरेंसी पर जीएसटी लगाने के संबंध में स्पष्टता जरूरी है और हम विचार कर रहे हैं कि क्या इसे पूरे मूल्य पर लगाया जाना चाहिए, और क्या क्रिप्टोकरेंसी को वस्तुओं या सेवाओं के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।”एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगर क्रिप्टोकरेंसी के पूरे लेनदेन पर जीएसटी लगाया जाता है तो यह दर 0.1 से एक फीसदी के बीच हो सकती है।अधिकारी ने कहा, ”कर की दर पर चर्चा शुरुआती चरण में है, चाहे यह 0.1 प्रतिशत हो या एक प्रतिशत। पहले वर्गीकरण पर निर्णय को अंतिम रूप देना होगा और फिर दर पर चर्चा की जाएगी।”
जीएसटी कानून क्रिप्टोकरेंसी के वर्गीकरण के बारे में स्पष्ट रूप से नहीं बताता है और ऐसी वर्चुअल डिजिटल मुद्राओं को विनियमित करने के लिए कानून के अभाव में वर्गीकरण करते समय यह भी ध्यान रखना होगा कि कानूनी ढांचा इसे अनुयोज्य दावे के रूप में वर्गीकृत करता है या नहीं। अनुयोज्य दावा एक ऐसा दावा है, जो न्यायालय में कार्रवाई के योग्य हो।आम बजट 2022-23 में क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर आयकर लगाने के संबंध में कुछ स्पष्टता लाई गई है। सरकार क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित करने के लिए अलग से एक कानून पर काम कर रही है, लेकिन अभी तक कोई मसौदा सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है।

 

स्कूल के पास ट्रैफिक जाम की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुँचा नन्हा विद्यार्थी

चित्तूर । यूकेजी के छह वर्षीय छात्र ने आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के पालमनेर के स्थानीय पुलिस थाने में पहुंचकर अपने स्कूल के आसपास खराब ट्रैफिक की शिकायत की। आदर्श स्कूल में पढ़ने वाले कार्तिक ने पालमनेर सर्कल इंस्पेक्टर एन. भास्कर को बताया कि ट्रैक्टरों के चलते रोड ट्राफिक जाम हो जाता है और सड़कों को खोद दिया गया है। उन्होंने पुलिस अधिकारी से कहा कि वे स्वयं क्षेत्र का दौरा करें और समस्या का समाधान निकालें।
इस बच्चे के आत्मविश्वास को देखकर ऑन-ड्यूटी ऑफिसर प्रभावित हुए और उसे मिठाई खिलाई। ऑफिसर ने उसे आश्वासन दिया कि उसकी शिकायत सुनी जाएगी और समस्या का समाधान किया जाएगा। पुलिस ऑफिसर ने बच्चे को अपना मोबाइल नंबर दिया और लड़के से कहा कि जब भी वह स्कूल जाये और ट्रैफिक की समस्या हो तो उसे कॉल करे। बता दें स्कूल के पास नाली का काम होने के कारण सड़क खोदी जा रही है, जिससे जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।

भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने की पुस्तकों पर चर्चा

भारतीय भाषा परिषद के सहयोग से आयोजित हुआ कार्यक्रम

कोलकाता ।  भारतीय भाषा परिषद और भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने तीन पुस्तकों को पढ़ा और उनकी समीक्षा की। भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी ने अपने संदेश में कहा कि पुस्तकें हाथ में लेकर पढ़ने से एक अलग ही अनुभूति होती है। संदेश पढा़ परिषद के मंत्री डॉ केयुर मजमूदार ने । ए पी जे अब्दुल कलाम की पुस्तक ‘विंग्स अॉफ फॉयर’ पर बीए अंग्रेजी की छात्रा नम्रता चौधरी ने बताया कि कितने संघर्षों के बाद एक अब्दुल कलाम पैदा होता है। मिसाइल मैन और भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति होने के साथ-साथ वे एक प्रेरक व्यक्तित्व रहे हैं। असफलताओं को पार करके ही व्यक्ति अपने जीवन में सफल होता है, हार भी जीत में बदल जाती है। विंग्स ऑफ फॉयर’ के दो महत्वपूर्ण पृष्ठों को भी पढ़ा। वहीं बीकॉम के छात्र फजल मोहम्मद ने लेखक एलिफ शफक के उपन्यास ‘फोर्टी रूल्स अॉफ लव’ पर चर्चा करते हुए उपन्यास की नायिका ऐला जो जूनियर एडिटर होती है लेकिन उसके जीवन में सब कुछ रहते हुए भी वह बहुत अकेली और प्रेमविहीन थी और एक पुस्तक ने उसके जीवन को कैसे बदल डाला, इसी को केंद्र में रखकर पुस्तक लिखी गई है। पुस्तक पढकर उसे प्रेम का अहसास होता है ।भारतीय भाषा परिषद से आई साहित्य मर्मज्ञ डॉ अल्पना सिंह ने डॉ. कुसुम खेमानी के उपन्यास पर चर्चा करते हुए कहा कि डॉ कुसुम खेमानी का उपन्यास ‘लावण्यदेवी’ एक ऐसा उपन्यास है जिसमें एक कुटुम्ब की पांच पीढ़ियों की गाथा समाहित है। प्रमुख नायिका चरित्र लावण्य देवी है जिनका जीवन कर्मशील है और उनके सारे फैसले जनहित में किए जाते हैं। कार्यक्रम के आरंभ में कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने कहा कि पुस्तक पढ़ते समय विभिन्न विचारों, दर्शन और संस्कृति का ज्ञान होता है। अपने वक्तव्य में एपीजे अब्दुल कलाम से संबंधित अपना एक संस्मरण भी सुनाया। चर्चिल, गांधी के वैचारिक मतभेद और अन्य पठनीय पुस्तकों के विषय में बात की। भारतीय भाषा परिषद के मंत्री डॉ केयुर मजमूदार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया ।परिषद के कार्यकारिणी सदस्य अमित मूंधड़ा की उपस्थिति रही। अमित मूंधड़ा ने कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल डॉ पिंकी साहा सरदार को पुस्तक गुच्छ देकर सम्मानित किया। कॉलेज की ओर से डॉ अल्पना सिंह और डॉ केयुर मजमूदार को मोमेंटो प्रदान किया गया।
भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की लाइब्रेरी में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन डॉ वसुंधरा मिश्र ने किया ।पचास से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति रही।