कोलकाता । अर्चना संस्था की ओर से आयोजित गोष्ठी में सदस्यों ने अपनी स्वरचित कविताएँ सुनाई। दोहा, कुंडलियां, हाइकू गीत, कविता आदि विभिन्न विधाओं पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। संगीता चौधरी ने हाइकु -चैत्र मास में/ नीम की निबोरी/ अमृत तुल्य रसना सुख/ अकारण उदर/ भोगता दुख और दोहे सुनाए।
विद्या भंडारी ने लोग क्या कहेंगे,इसी धुन में बिता दी सारी उम्र और क्या सुनाई देगी लुप्त हुई लोरियाँ, हिम्मत चोरडिया ने कुण्डलिया -आओ अब अवतार लो एवं गीतिका- वीर का कर लें हम गुणगान। नौरतन भंडारी ने हे धीर-वीर,हे महावीर /हे जन नायक जन लोक पीर शत-शत मेरा प्रणाम, सुशीला चनानी ने नवरात्रि के अवसर पर माँ दुर्गा की स्तुति में कुछ दोहे जैसे–देवी पूजा में करूँ माँगू ये वरदान। अपनी रक्षा कर सकूंँ शक्ति रूप प्रतिमान।और रामनवमी पर सीता की पीडा उकेरी एवं समाज की विसंगतियों पर कविता पढ़ी। इंदू चांडक ने कुंडलिया-जीवन की कठिनाइयां,सिखलाती संघर्ष, गीत- मुश्किलों तुम संगिनी बन साथ मेरे चलती जाओ सुनाई, मृदुला कोठारी ने फिर से वीर एक बार आइए/हिंसा हो रही है बचाइए /होता हाहाकार है /छाया अंधकार है /दीपशिखा कोई तो जलाइये गीत गाते हुए भगवान महावीर की जयंती पर गीत प्रस्तुति दी। डॉ वसुंधरा मिश्र ने आओ बैठो बात करें गीत सुनाया जिसे सभी ने पसंद किया। इंदू चांडक के संयोजन में संचालन डॉ वसुंधरा मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन दिया सुशीला चनानी ने ।कार्यक्रम जूम पर आयोजित किया गया।
अर्चना संस्था की स्वरचित कविता गोष्ठी संपन्न
सामुदायिक शौचालयों की निगरानी करेंगे गंधवेध एवं वायुवेध
सेडिबुज द्वारा स्वच्छ भारत और डिजिटल इंडिया मिशन पर सरकारी निवेश के बारे में जागरूकता
विलिसो टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से लॉन्च किया गया गंधवेध और वायुवेध
कोलकाता । देश की प्रमुख सरकारी परामर्श फर्म सेडिबुज कंसल्टिंग एलएलपी द्वारा भारत सरकार के स्वच्छ भारत और डिजिटल इंडिया मिशन पर सरकारी निवेश के बारे में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विलिसो टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से गंधवेध और वायुवेध उत्पाद पेश किया गया।
इस अवसर पर सेडिबुज के संस्थापक एवं सीईओ किरण एस देवलालकर ने कहा कि हमने स्वच्छ भारत और डिजिटल इंडिया मिशन पर सरकारी निवेश के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया। हम अपने ग्राहकों को विलिसो टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के एक क्रांतिकारी उत्पाद- गंधवेध और वायुवेध से परिचित कराना चाहते हैं। यह एक आईआईटी आधारित इलेक्ट्रॉनिक वायरलेस हेल्थ हाइजीन मॉनिटर है जिसमें वास्तविक समय अलर्ट के साथ अप्रिय गंध गैसों और वायरस का पता लगाने की क्षमता है। कोविड, श्वसन / हृदय रोग, निमोनिया और अधिक से रक्षा कर सकता है।
सेडिबुज़ कंसल्टिंग एलएलपी की माने तो यह देश की एक प्रमुख सरकारी परामर्शदाता फर्म है, जिसमें सलाहकारों और तकनीकी पेशेवरों की मजबूत टीम है। हमारे पास सरकार के साथ व्यापार करने की मजबूत योग्यता और अनुभव है। हम नगर निगमों, स्मार्ट शहरों, सार्वजनिक उपयोगिताओं (बिजली, पानी और गैस), राज्य और केंद्र सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सार्वजनिक अवसंरचना एजेंसियों के साथ मिलकर काम करते हैं। हम प्रौद्योगिकी सेवाओं और समाधान, वित्तीय और व्यावसायिक सलाहकार, कर और नियामक, और जोखिम सलाहकार सेवाओं सहित सेवाओं की एक पूरी श्रृंखला प्रदान करते हैं। हमारा इरादा प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करके अपने देश का समर्थन करना है।
स्वच्छ भारत और डिजिटल इंडिया मिशन पर सरकारी निवेश में कई उत्पाद शामिल हैं। उनमें से गंधवेध और वायुवेध क्रांतिकारी उत्पादों में से एक हैं। गंधवेध एक आईआईटी आधारित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो गंध, कुल वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (टीवीओसी), तापमान और आर्द्रता की निगरानी करता है। गंधवेध शौचालयों से मुख्य रूप से मानव मूत्र और मल के कारण निकलने वाली अप्रिय गंध का पता लगाता है। आमतौर पर लोग शौचालय से निकलने वाली अप्रिय गंध के कारण शौचालय का उपयोग करने से बचते हैं। हमारा उत्पाद उपयोगकर्ताओं को अप्रिय गंध वाले शौचालयों की पहचान करने में मदद करता है। अपने अद्वितीय डैशबोर्ड, चार्ट व्यू और मोबाइल अलर्ट के माध्यम से, गंधवेध समुदाय आधारित संगठनों, गैर सरकारी संगठनों और सरकार को उनके द्वारा बनाए जा रहे शौचालयों की स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
दूसरी ओर वायुवेध भी एक आईआईटी आधारित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो विभिन्न प्रकार की हानिकारक गैसों और हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर की निगरानी करता है। वायुवेध अदृश्य वायु घटकों के डेटा की निगरानी और भंडारण करता है जो संभावित रूप से मानव जीवन के लिए खतरा हैं और जिन्हें अक्सर मुख्य रूप से अनदेखा किया जाता है। क्योंकि हम उन्हें नहीं देख सकते हैं। मोबाइल और वेब एप्लिकेशन व्यक्तियों, सरकार, सुविधा सेवा प्रदाताओं और अस्पतालों को विभिन्न गैसों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। यह सेट स्तरों का उल्लंघन होने पर उपयोगकर्ताओं को अलर्ट और सुरक्षा भी प्रदान करता है।
शाम रूमानी हो गई एक शाम गजलों के नाम कार्यक्रम में
कोलकाता । राजस्थान की रचनाकार इकाई ने देश के कोने कोने के ग़ज़लकारों से खूबसूरत महफ़िल सजाई । संस्थापक सुरेश चौधरी जी के उद्बोधन के पश्चात एक से बढ़कर एक गजलों का लुत्फ़ दर्शकों ने उठाया और सराहा। मुख्य अतिथि के रूप में भूपेंद्र सिंह होश ,विशिष्ट अतिथि झारखंड के कृष्ण कुमार नाज़, सुशील साहिल और शालिनी नायक सह्बा थी।वहीं आराधना प्रसाद जी ने अपने मधुर कंठ से सरस्वती वंदना कर कार्यक्रम प्रारंभ किया। रचनाकार की रचना सरन, आशा पांडे ओझा तथा ज्योत्सना सक्सेना की सक्रिय सहभागिता रही। निरुपमा चतुर्वेदी के सधे मंच संचालन ने सबको बांधे रखा।
कोलकाता में खुला एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट
कोलकाता । कार्यक्रम प्रबन्धन यानी इवेंट मैनेजमेंट जिसे उत्साह और रोमांच से भरपूर माना जाता है। यह एक कमाल का फील्ड है। इसमें सृजन है, ग्लैमर है, कार्यक्रम स्थल का प्रबन्धन है और रोमांच है। यह नये समय का कार्यक्षेत्र है और सोशल मीडिया के युग में इसकी चमक और बढ़ गयी है। बड़े कार्यक्रम आयोजन प्रबन्धक यानी इवेंट मैनेजमेंट कम्पनियाँ सम्भाल रही हैं यानी तेजी से बढ़ रहे इस क्षेत्र में एक सफल पेशेवर के लिए बहुत अधिक अवसर हैं।
जब आप इवेंट मैनेजमेंट और एक्सपेरिमेंटल मार्केटिंग में अपना करियर बनाना चुनते हैं तो यह आपको रोमांचक और अविस्मरणीय घटनाओं की अवधारणा बनाने और परिभाषित करने और लागू करने का अवसर देता है। इवेंट मैनेजमेंट सेवा क्षेत्र में एक तेजी से बढ़ता उद्योग है। 2019 में भारतीय संगठित कार्यक्रम खंड में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अगले कुछ वर्षों में इसके पैमाने और महत्व में वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है। एआईईएम जो इवेंट मैनेजरों द्वारा चलाया जाता है, उद्योग-प्रासंगिक, नौकरी-उन्मुख प्रशिक्षण और एक अनुभवात्मक-स्थानांतरण दृष्टिकोण के साथ मीडिया और मनोरंजन व्यवसाय की विकसित वैश्विक परिप्रेक्ष्य के साथ प्रशिक्षण प्रदान करता है। इस कड़ी में एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट महानगर कोलकाता में नयी शुरुआत के लिए तैयार है।
इस अवसर पर एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट के सह-संस्थापक विकास बजाज ने कहा कि हमारा दृष्टिकोण है कि हम पेशेवर क्षेत्र में अधिकतम उत्कृष्टता के लिए प्रयास करें। उन्होंने कहा कि हमारा संस्थान प्लेसमेंट पर बहुत जोर देता है। उद्योग में विभिन्न वर्गों के एक जटिल और विश्वसनीय नेटवर्क के कारण, एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट एक ऐसा संस्थान है जिसने बाजार में महत्वपूर्ण कंपनियों के साथ मजबूत व्यावसायिक संबंध स्थापित किए हैं। यह स्वस्थ पेशेवर संबंधों और अग्रणी कंपनियों के साथ संबंधों की ओर ले जाता है जो पूर्ण प्रदर्शन और प्रासंगिक कार्य अनुभव के साथ जीवन भर नौकरी के अवसर प्रदान करते हैं।
बारहवीं के बाद एक अच्छे कॅरियर की चाह रखने वाले युवाओं के लिए संस्थान में स्नातक और स्नातकोत्तर इवेन्ट मैनेजमेंट में शानदार मौके हैं। आप इवेन्ट प्लानर, वेडिंग प्लानर, बर्थडे प्लानर, सरप्राइज प्लानर, प्रोडक्शन प्लानर, ले आउट प्लानर या प्रोडक्शन मैनेजर, हॉस्पिटैलिटी मैनेजर. स्पेशल इफेक्ट प्लानर, वेडिंद स्टाइलिस्ट के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त कॉरपोरेट,. पेड इन्टर्नशिप, फ्रीलांसिंग कर सकते हैं और साथ ही उद्यमी भी बन सकते हैं। एक अच्छे इवेन्ट मैनजर के लिए भाषा के साथ सम्पर्क एवं परिस्थिति प्रबन्धन की क्षमता का होना आवश्यक है। संस्थान की ओर से 11 महीने, 6 महीने और 3 महीने के डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
खुशहाल समाज ही खुशहाल विश्व का निर्माण कर सकता है

प्रकृति हर रूप में , हर ऋतु में ,अपना अद्भुत सौंदर्य बिखेरती है। जहां बारिश की बूंदों के साथ मिट्टी की खुशबू मिलकर अलग ही सोंधी महक से हर दिल दिमाग को तरोताजा करती है। वहीं सर्दी की ऋतु में खिड़कियों में से छन- छन कर आती हुई धूप सूर्य देवता के वरदान स्वरुप लगती है । गर्मी का मौसम जो लगभग सभी के द्वारा तिरस्कृत होता है कि यह कैसा मौसम है हर समय हम पसीने से लथपथ रहते हैं लेकिन उस मौसम में भी प्रकृति ने तो सफेद और पीले छोटे छोटे फूलों से वृक्षों को बड़ी ही खूबसूरती से सजाया है, लेकिन हमारा मन तो गर्मी में ही अटक कर रह जाता है और हम उस सौंदर्य का आनंद ही नहीं ले पाते जो गर्मी की ऋतु का अपना होता है। गर्मी में भले ही हम कितने ही पंखे, एसी और कूलर चला लें लेकिन जो हवा हमारे आसपास के हरे भरे वृक्षों से आती है वह ठंडी लहर अंदर एक अलग ही सुकून और शांति भरती है। वैसी शांति ,कोई भी हमारे द्वारा निर्मित उपकरण नहीं दे पाता ।
अगर हम सभी उम्र के किसी भी पड़ाव पर हों और सोचें तो हमारी स्मृतियों में गर्मी की ऋतु सबसे अधिक होगी क्योंकि वह ॠतु ही होती थी जब हम अपने स्कूल से एक लंबी छुट्टियां पाते थे और अपने मनपसंद नाना नानी और दादा-दादी के घरों में जाते थे ,और वहां सभी भाई बहनों का मिलकर रहना और भूल जाना कि कौन मम्मी है, कौन चाची है या कौन मासी है या कौन बुआ है। सबसे समान रूप से प्यार पाना, समान रूप से डांटखाना और समान रूप से उनके द्वारा बनाई हुई चीजों का आनंद लेना सचमुच अतुलनीय है ।
कोलकाता में रहते हुए मैं आज भी सबसे ज्यादा अगर किसी चीज को मिस करती हूं तो वह है श्री डूंगरगढ़ का वह खुला आसमान जहां हमने अपनी गर्मी की रातों को आसमान में तारों को निहारते हुए बिताया था और कब हम तारों को गिनते हुए नींद के आगोश में चले जाते थे, पता ही नहीं चलता था। और जब उठते थे तो तरोताजा होकर उठते थे ,तब लगता ही नहीं था कि गर्मी भी कुछ होती है क्योंकि वे दिन हमें सबसे प्यारे लगते थे। कोलकाता जैसे महानगरों की ऊंची ऊंची बिल्डिंग और अट्टालिकाओं ने उस आसमान की अनंतता और खुलेपन को पता नहीं क्यों हमसे छीन लिया है ।मैं तो तरस जाती हूं उस आसमान को देखने के लिए जहां चांद और सूरज अपनी अठखेलियां करते हैं ,और झिलमिलाते तारों से आसमान एक दुल्हन के रूप में सज जाता है ।कभी-कभी लगता है हमारा बचपन कम संसाधनों में भी कितना खुशहाल था, छोटी छोटी खुशियां हमें हर पल खुश रखती थी। फिर वह दस पैसे की कुल्फी के लिए पूरी गर्मी की दोपहर इंतजार करना हो या शाम को छत पर पानी छिड़ककर छत को इतना ठंडा कर लेना कि रात को सोते समय वहां ठंडी- ठंडी हवा चले। यह सब हमारे लिए हिल स्टेशन पर जाने जितने अनमोल पल होते थे क्योंकि हमारे उस वक्त में हमें हर पल खुश रहना सिखाया था क्योंकि हम संसाधनों के मोहताज नहीं थे ।हमारे बचपन के दोस्त हमारी सबसे बड़ी पूंजी होते थे। जिनके साथ हम लड़ना झगड़ना फिर से एक होना करते रहते थे। और मुझे तो जहां तक याद है मैंने 25 साल की उम्र के बाद जाना कि तनाव किसे कहते हैं या तनाव या डिप्रेशन भी कोई चीज होती है और आज तो हालात यह है कि छोटे-छोटे बच्चे तनाव का शिकार हो रहे हैं ।आखिर फिर हम क्या कर रहे हैं ?हम उन्हें आधुनिक संसाधन उनके हाथों में देकर खुशहाल बनाना बनाना चाहते हैं या तनाव में डालना चाहते हैं ?हम तो सोचना ही नहीं चाहते।
काश कि हम अपने बच्चों को प्रकृति के सानिध्य में खुश रहना सिखा पाते। चलती हुई ठंडी हवा को महसूस करवा पाते। आम के वृक्षों से आने वाली मीठी खुशबू का आनंद क्या होता है ,वह बता पाते ।कोयल की कूक और चिड़ियों की चहचहाहट को सुनना सिखा पाते हैं ।जो वे यह सब महानगरों के भागदौड़ भरी जिंदगी और कोलाहल में सुन ही नहीं पाते। और एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में बचपन की वह मासूमियत भूल जाते हैं, जिसमें खेल का आनंद उठाना फर्स्ट आने से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है ।काश मासूम बचपन मोबाइल मैं देखने वाले कार्टून चरित्रों या कहानियां सुनने की जगह अपनी दादी नानी या घर के बड़ों से कहानी सुनकर खुद कल्पना कर पाता उन चरित्रों की, और उस कल्पना से खुद कहानियां बनाना सीख पाता और अपने अंदर की नैसर्गिक प्रतिभा को बाहर ला पाता।
आओ हम सब एक ईमानदार कोशिश करें हमारे नौनिहालों और आने वाली पीढ़ी के लिए जिससे वे तनाव रहित और सुंदर जीवन जी सकें। जिसमें बड़ी खुशियों के लिए छोटी-छोटी खुशियों को नकारना नहीं बल्कि उन खुशियों को हर पल महसूस करते हुए आगे बढ़ते जाना सिखाएं क्योंकि एक विकसित समाज अत्याधुनिक तकनीकी के कारण विकसित नहीं कहा जाता बल्कि खुशियों के साथ जीने वाले समाज को विकसित कहा जाता है।
लम्बे समय तक खलेगी रंगकर्मी अजहर आलम की कमी

वर्तमान समय में जहां लोग अपनी जीविका के अलावा और कुछ नहीं सोचते वहां एक व्यक्ति अपने मन में रंगमंच सजा रहा था अलग ही अपने विचारों की दुनिया में रंगकर्म का नया इतिहास बना रहा था। अजहर आलम एक ऐसा नाम जो सिर्फ रंगमंच के नाम से ही हमारे कानों में गूंज उठता है। भारतीय रंगमंच को अपने रंगकर्म से रंग देने वाले अजहर आलम की आंखें न जाने कितनी बार कलाकारों को रोज देखतीं, चाय की प्याली में चुस्की लेतीं, स्क्रिप्ट देखते हुए खाना खाती, सेट की दीवारें और रातों के स्वप्न में संवाद करते दो किरदार।
रंगमंच हमारे समाज की बहुत पुरानी संस्कृति है जिसे इन्होंने और अधिक उभारा। रंगमंच के प्रति इतना सक्रिय व्यक्तित्व मैंने आज तक नहीं देखा था। अज़हर आलम ने अपने रंगकर्म से रंगमंच को एक नयी दिशा दी है। रंगमंच के प्रति इनके योगदान का दायरा इतना बड़ा है कि उसे समेटना मुश्किल है। ये एक अच्छे निर्देशक , प्रतिभाशाली अभिनेता, उम्दा कलाकार, एक शानदार सेट डिजाइनर एवं निर्देशक थे।
उन्होंने कई नाटक लिखे जैसे रूहें ,चाक, ,नमक की गुड़िया, गैंडा ,सुलगते ,चिराग ,सवालिया निशान, चेहरे, पतझड़ इन सभी नाटकों का प्रकाशन इंडियन नेटबुक्स से हुआ जो महानगर के आनंद प्रकाशन में और ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
हाल ही में 2020 में नाटक रूहें के लिए नेमीचंद जैन नाट्य लेखन सम्मान, 2007 में पश्चिम बंग नाट्य अकादमी, संस्कृति विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार के द्वारा नाटक सवालिया निशान के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का, 2001 में नमक की गुड़िया के लिए सर्वश्रेष्ठ नाटककार का पुरस्कार मिला। 30 से ज्यादा नाटकों का निर्देशन तथा 70 से ज्यादा नाटकों में अभिनय किया।
कोरोना हमसे बहुत कुछ छीन ले गया और अजहर आलम जैसा शानदार रंगकर्मी भी। कोरोना काल के दौरान अचानक एक ऐसी दुर्घटना घटी जिसमें अजहर आलम हमसे दूर हो गए पर इतना दूर भी नहीं कि हम उनको महसूस ना कर सके उनकी रूह रंगमंच पर सदैव एक दम भर साँस भरती रहेगी। जिस लिटिल थेस्पियन की शुरुआत 1994 मैं अजहर आलम और उमा झुनझुनवाला ने एक साथ मिलकर की थी, उसका काम उनकी जीवन संगिनी उमा झुनझुनवाला ने रुकने नहीं दिया और लगातार जुटी रहीं। उषा गांगुली की रंगकर्मी के बाद हिन्दी नाटकों को लोकप्रिय बनाने की दिशा में अगर कोई नाम याद आएगा तो वह उमा झुनझुनवाला एवं अजहर आलम का होगा। लिटिल थेस्पियन द्वारा कई कार्यशालाएं आयोजित की गयीं, कहानी और कविताओं का अभिनयात्मक पाठ हुआ और हाल ही में जश्न -ए- अज़हर का आगाज़ भी हुआ जो दो चरणों में समाप्त हुआ।
इसी के बीच अजहर आलम की स्मृति में मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना हुई। इसके कई उद्देश्य रहे- नाटक और रंगमंच में विशेष उपलब्धि के लिए प्रतिवर्ष एक व्यक्तित्व को पुरस्कार ,रंगमंच विषय पर काम करने वाले शोधार्थी को फेलोशिप देना अज़हर आलम लेक्चर और सेमिनार का आयोजन ,नाटक और रंगमंच या आलेखों का प्रकाशन ,प्रत्येक महीने की 20 तारीख को अज़हर आलम की स्मृति में अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के साथ कार्यशाला का आयोजन तथा अज़हर आलम मंच के निर्माण का आयोजन। इस वर्ष का रंग सम्मान गत 18 फरवरी 2022 को जश्न-ए- अज़हर नाट्य उत्सव के प्रथम दिन अकादमी ऑफ़ फाइन आर्ट्स में बंगाल के विख्यात रंगकर्मी रूद्र प्रसाद सेन गुप्त को दिया गया तथा अज़हर आलम मेमोरियल फैलोशिप की घोषणा भी हुई जिस का विषय है – 21वीं सदी के नाटककार और अज़हर आलम और दूसरा पश्चिम बंगाल का हिंदुस्तान रंगमंच और अज़हर आलम |
अजहर आलम की कलात्मकता का स्तर इतना उठ चुका था जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि भविष्य में भारतीय रंगमंच का स्तर कितना ऊंचा उठता और अपनी स्मृतियों और संदेशों में लोग अजहर आलम को संजो रहे हैं।
एस. एम. अजहर आलम को कुछ ऐसे याद किया गया
इसी क्रम में पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी अपने शोक संदेश में लिखा है – रंगमंच पूरी दुनिया में रहा है। बहुत प्राचीन काल से ही इसकी स्पष्ट तात्कालिक था। इसका वास्तविक स्वरूप होने के कारण यह अपने गहन सामाजिक प्रभाव के साथ सबसे महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति का वाहन रहा है। यह अपने दुःख – सुख में समाज का आईना भी रहा है। अपनी दुविधा में भी नाटककार और निर्देशकों और अभिनेताओं के समर्पण और प्रतिभा का कारण है। रंगमंच एक असाधारण विधा है मेरी कामना है कि लिटिल थेस्पियन दिवंगत एस एम अज़हर आलम की रंगमंचीय जीवन की इस स्मृति को जारी रखें |
रंग समीक्षक श्री आनंद लाल का कहना है – अज़हर शब्द के कई अर्थों में से एक अर्थ है ‘प्रबुद्ध’ जो उनके व्यक्तित्व और काम पर हर मायने में फिट है वे विनम्र मृदुभाषी उदार थे सभी मानवतावादी मूल्यों को आत्मसात किया था।
प्रसिद्ध नाटककार रंग निर्देशक एवं अभिनेता निलॉय रॉय का कहना है – अज़हर आलम में के भीतर ही स्पेस बनाने की क्षमता थी जिसके कारण स्वाभाविक रूप से अभिनेताओं की ऊर्जा और क्षमता को बढ़ावा मिलता जहां विभिन्न विशिष्ट क्षणों के माध्यम से वे उस के दरमियान आसानी से यात्रा कर सकते थे यह आमतौर पर कल्पना और यथार्थ वाद के बीच का वह क्षेत्र है जिसे अज़हर आलम ने अपने काम में अपनाया |
प्रतिष्ठित रंग आलोचक श्रीमाल जी का कहना है- नाटकों के चयन से लेकर उसके निर्देशन तक में पाश्र्व में जैसे कोई आग चुपचाप धधकती रहती थी यह समय उन्हें संपूर्णता से याद करने का समय है उनके बारे में यह तथ्य भी बहुत महत्वपूर्ण है कि उन्होंने नाटक को सही अर्थों में प्रतिरोध की विधा के रूप में ढाला और हमेशा जन सरोकारों को प्रमुखता दी सकारात्मक उम्मीद की जा सकती है कि अज़हर भाई की स्मृति उन्हें और अधिक रचनात्मक बनाएगी |
रंग आलोचक ज्योतिष जोशी का कहना है __ साहित्य समाज और रंग जगत के लिए यह अपूरणीय क्षति है वे कुशल निर्देशक तो थे ही सधे हुए अभिनेता तथा नाटककार भी थे अभी हाल ही उनके नाट्य नटरंग प्रतिष्ठान द्वारा उनके लिखे नाटक रूहे के लिए नेमीचंद जैन स्मृति नाट्य लेखन पुरस्कार दिया गया था जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है।
रंग समीक्षक रवींद्र त्रिपाठी जी कहते हैं _ अज़हर एक संपूर्ण रंग व्यक्तित्व थे यानी एक बहुत अच्छे नाट्य निर्देशक थे प्रतिभाशाली अभिनेता थे उम्दा नाटककार थे और शानदार रूपांतर कार थे और कुशल रंग संगठनकर्ता थे रंगमंच की एक बेहतरीन बुद्धिजीवी थे। भारतीय रंगमंच को उनकी अनुपस्थिति लंबे समय तक खलने वाली है।
भवानीपुर कॉलेज में आयोजित हुआ व्यापार मेला, जारी हुआ ‘रिवील 2022’
विद्यार्थी ले आए अपने उत्पाद
कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने अपने उत्पादों को रिवेल 2022 के तहत लांच किया। यह विद्यार्थियों को रचनात्मक शोध करने और सीखने की आंतरिक प्रेरणा को बल देने के लिए महत्त्वपूर्ण मंच है।
एक रचनात्मक लक्ष्य बना कर जब छात्र केंद्रित होकर किसी उत्पाद की खोज करते हैं तो वे सीखने में अधिक लीन हो जाते हैं और उसकी प्राप्ति के लिए अधिक प्रेरित होते हैं जिसके लिए विद्यार्थियों को व्यवसायिक कौशल की आवश्यकता होती है।
जैसा कि कहा जाता है, “रचनात्मकता मस्ती करने वाली बुद्धि अलग ही होती है” हम अक्सर कई मज़ेदार मेलों को देखते हैं जहाँ विचारों को अनुप्रयुक्त रूप में प्रस्तुत किया जाता है। व्यापारिक मेला भी एक ऐसा ही स्थान है जहाँ लोग अपना प्रदर्शन अपनी चतुर बुद्धि और कॉर्पोरेट तकनीकों के संकेत द्वारा कर सकते हैं
अपने छात्रों की रचनात्मकता की जांँच करने और बढ़ाने के लिए, व्यवसाय प्रशासन विभाग बी बी ए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने एक दिवसीय उत्पाद लॉन्च कार्यक्रम का उद्घाटन गत 13 अप्रैल 2022 को सुबह नौ बजे से कॉलेज के वालिया सभागार में किया गया। ‘ रिवील’ एक संक्षिप्त शब्द है जिसके अर्थ में रीच-एनर्जाइज़-वायरल सस्ता-एक्सकेवेट-अचीव एंड लॉन्च अर्थात “खुलासा” जैसे अर्थ छिपे हैं । इस कार्यक्रम का उद्देश्य था व्यवसायिक -दिमाग वाले छात्रों को अपना प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करना और एक गैर-मौजूदा उत्पाद के रूप में विद्यार्थियों के विचार को लॉन्च करने के लिए तैयार करना।
उत्पाद लॉन्च कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति में कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। जाह्नवी खंडाड़िया व धैर्य वोरा ने सभी सम्मानित अतिथियों व्यक्तियों को मंच पर आमंत्रित कर दीप प्रज्ज्वलित के साथ समारोह की शुरुआत हुई । इस अवसर पर व्यवसाय प्रशासन विभाग की छात्राओं ने शास्त्रीय नृत्य किया।
भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी के महानिदेशक प्रो. डॉ. सुमन मुखर्जी ने अपने वक्तव्य में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए व्यापार के मूल मंत्रों पर प्रकाश डाला और कहा कि यह मंच विद्यार्थियों को भविष्य में अपने व्यवसाय को करने और वर्तमान में काम आने वाले उत्पाद और उनकी मार्केटिंग के विषय में सीखने के लिए है। इंटर कॉलेज के सभी प्रतिभागियों ने अपने वास्तविक दुनिया के सफल व्यावसायिक उदाहरणों को समझते हुए बताया कि कैसे कंपनियांँ रचनात्मक व्यवसाय योजनाओं के साथ छात्रों से संपर्क करें और उन्हें अपनाएंँ। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कारवान बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। एक व्यवसायिक योजना बनाने और अपने विचारों को दुनिया के बाकी हिस्सों के साथ संवाद करना साथ में ज्ञान और अनुभव को बढ़ावा देना है।
छात्र मामलों के डीन प्रो. दिलीप शाह ने ‘रिवील’ 2022 को विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को एक्सपो जैसे व्यावसायिक मेलों का अवलोकन करना चाहिए जहांँ उन्हें बहुत से नए नए आइडिया मिलते हैं, जहांँ लगभग पांच सौ कंपनियां अपने उत्पादों का प्रदर्शन करती हैं, सीखने की प्रक्रिया में सहायक होती हैं। साथ ही प्रो दिलीप शाह ने कॉलेज में एक व्यापार मेला आयोजित करने की भी बात कही।
कोआर्डिनेटर डॉ त्रिदीब सेनगुप्ता ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और कोलकाता के प्रसिद्ध कॉलेजों से आए विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट बाजार व्यवहार और उत्पाद निर्माण और प्रदर्शनी से संबंधित कार्यक्रम के लिए प्रेरक वक्तव्य दिया।
रिवील प्रदर्शनी का उद्घाटन रिबन काट कर किया मैनेजमेंट की वरिष्ठ सदस्या नलिनी पारेख ने। छात्रों के अध्यक्ष देवज्योति बनर्जी और माधव मोहता ने उत्पाद प्रदर्शनी खोलने की घोषणा की ।
प्रदर्शनी में आठ स्टाल लगाए गए थे और प्रत्येक स्टाल में छह से सात प्रतिभागी थे। सभी टीमों को दिया गया
अपने उत्पादों को तैयार करने और उनका विज्ञापन करने के लिए पर्याप्त मात्रा में समय दिया गया ताकि वे वोट इकट्ठा कर सकें। प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए सभी उत्पाद न केवल अभिनव थे, बल्कि प्रतिभागियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी
भीड़ को आकर्षित करने के लिए एक अनोखे तरीके से अपने उत्पादों का विज्ञापन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
कोई भी उत्पाद तभी सफल होता है जब वह बाजार में मांग पैदा कर सके।
प्रत्येक स्टॉल में अलग-अलग आकर्षण थे, जैसे जलपान और उत्पाद का लाइव प्रदर्शन, यह दर्शकों के लिए रोमांचक था कि उत्पाद कितना व्यवहार्य है। स्टालों को सजाया गया । पोस्टर और बैनर के साथ और कुछ छात्रों ने अपने स्टालों को अपशिष्ट उत्पादों से भी सजाया । इस आयोजन ने प्रतिभागियों को लोगों के साथ व्यवहार करने और उन्हें बनाने का प्रत्यक्ष अनुभव दिया।
उत्पाद में रुचि जगाने के साथ प्रतिभागियों ने यूएसपी और उत्पादों के उपयोग के बारे में भी बताया। जनता को यह समझाने के लिए बनाया गया और बाजार में लॉन्च होने पर उत्पाद के विषय में किस प्रकार उनके उत्पाद का आंकलन होगा जैसे अनुभवों का लाभ सीखने को मिला ।
सभी स्टालों के बीच आमने-सामने की प्रतियोगिता थी, जिसमें दर्शकों के वोट आ रहे थे। संकाय सदस्यों सहित सभी शिक्षकों ने आठ स्टालों पर आकर्षक उत्पाद देखे जिनमें स्वस्थ खाद्य उत्पादों और एनर्जी बार के साथ एक स्टॉल ‘ENERBRE’ ने भीड़ का ध्यान खींचा क्योंकि सस्ती कीमत पर यह उत्पाद स्वास्थ्य और स्वाद में भी अच्छी रही ।
जेडी बिड़ला संस्थान, सेंट जेवियर्स कॉलेज, आशुतोष सहित कई संस्थानों के दर्शक कॉलेज, और श्री शिक्षायतन कॉलेज ने उत्पाद प्रदर्शनी में भाग लिया और मूल्यवान ज्ञान अर्जित किया। किसी उत्पाद की व्यवसाय योजना को क्रियान्वित करते हुए ज्ञान होता है । दर्शक लगातार अपने पसंदीदा स्टॉल के लिए वोट कर रहे थे। एक घंटे के अंतराल में लोग लगातार मतदान कर रहे थे। कार्यक्रम की समाप्ति पर हो सभी मतों की गिनती के बाद परिणामों की घोषणा की गई। सभी विजेताओं को प्रभारी शिक्षक डॉ सुभब्रत गांगुली ने सम्मानित किया।
श्लोक राय, ईशा दासगुप्ता, साची दुगर, माधव नंद गर्ग और राघव अग्रवाल के साथ टीम 7 आयोजक उर्वी बाजोरिया को उनके उल्लेखनीय विचार ‘कैश द ट्रैश’ तृतीय स्थान मिला। उन्होंने एक एटीएम बॉक्स बनाया था जहांँ एक उपभोक्ता डिब्बे में कचरा डालेगा और बदले में नकद या कूपन प्राप्त करेगा। इस नये विचार ने युवाओं में उत्पाद में रुचि दिखाई और साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रोत्साहित भी किया।
अदा बक्स, अनुषा अकबर, ईशा जेन गोम्स, इशिता देबनाथ, सरबोनी के साथ टीम 1आयोजक महक के साथ चंदा और ऋचा पोद्दार ने अपनी रचनात्मक उत्पाद के लिए द्वितीय स्थान हासिल किया। ‘दिलुवा’, जिसमें महिलाओं और पुरुषों के कपड़ों पर लगे लिए दाग-धब्बों को आसानी से हटाए जाने वाला उत्पाद का प्रदर्शन किया गया। इससे उत्पाद की वास्तविकता और लागत प्रभावी लगी। अंत में, प्रियंका डेज, आयुषी बिलाखिया, नंदिनी के साथ टीम 6 ने पहला स्थान हासिल किया । चौधरी, विश्वेश सिंह, अमन झा आयोजक अंकिता चक्रवर्ती के साथ उनके अभूतपूर्व उत्पाद का प्रदर्शन किया जिसमें बेकार प्लास्टिक से ईंधन पेट्रोल बनाने का काम था और इसकी संरचना ने सभी को चकित कर दिया।
इस प्रदर्शनी में आने वाले में दर्शकों की बहुत बड़ी भूमिका रही क्योंकि उन्होंने प्रत्येक उत्पाद का विश्लेषण किया और फिर मतदान किया गया।
यह व्यापार मेला बाजार के रूप में पेश किया गया जिसने दर्शकों को बहुत ही प्रभावित किया।उन्होंने अपने स्टाल को इस तरह सजाया कि यह उनके उत्पाद के बारे में बात करे और उनकी स्थापना की। उपस्थिति सफलतापूर्वक की जिसने भीड़ को आकर्षित किया। इवेंट मैनेजमेंट द्वारा किए गए अथक प्रयासों के कारण आयोजन सफल रहा। शिक्षक समन्वयक प्रो कौशिक बनर्जी और छात्र अध्यक्ष देवज्योति बनर्जी और माधव मोहता रहे । इस आयोजन को सफल बनाने में इवेंट मैनेजमेंट सोसायटी का भी योगदान रहा। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
अमेरिका-भारत संबंधों के 75 साल पूरे होने पर वीडियो सन्देश
कोलकाता । अमेरिका-भारत संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका भारतीय डायस्पोरा दिग्गजों के साथ शामिल हुआ। भारत में अमेरिकी मिशन (नयी दिल्ली में दूतावास और मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में महावाणिज्य दूतावास सहित) ने आज अमेरिका-भारत संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए एक स्टार-स्टडेड वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें कुछ सबसे अधिक भागीदारी के साथ अमेरिका में प्रतिष्ठित और निपुण भारतीय अमेरिकी और भारतीय, जिनका उल्लेखनीय योगदान पिछले 75 वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीयों की यात्रा को दर्शाता है। पूरा वीडियो ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब पर देखा जा सकता है।
वीडियो देखें – अमेरिका – भारत सम्बन्धों के 75 वर्ष पूरे
चार्ज डी अफेयर्स पेट्रीसिया लैसीना ने कहा: “अमेरिका-भारत साझेदारी के मूल में व्यक्तिगत अमेरिकियों और भारतीयों के बीच अनगिनत व्यक्तिगत मित्रताएं हैं, जब वे एक साथ अध्ययन करते हैं, काम करते हैं, रहते हैं और सीखते हैं। इस वीडियो के योगदानकर्ता अपने-अपने क्षेत्र के प्रयास के शिखर पर खड़े हैं, इन लोगों से लोगों के बीच संबंधों ने हमारे दोनों देशों को फलने-फूलने में मदद करने के कई तरीकों पर प्रकाश डाला है। ”
कविता कथा कारवां’ के पश्चिम बंगाल शाखा की कार्यसमिति का गठन
लक्ष्मी शर्मा
सिलीगुड़ी। आने वाली पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए उनके विचारों को, उनकी लेखनी को, एक बड़ा मंच देने के लिए सिलीगुड़ी के मैथिबाड़ी में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान ‘कविता कथा कारवां’ के पश्चिम बंगाल शाखा की कार्य समिति का गठन किया गया। इस विशेष बैठक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कविता कथा कारवा के कदम दर कदम मिलाते हुए पश्चिम बंगाल में किस तरह से शैक्षिक, सामाजिक, साहित्यिक विचारों को आने वाली पीढ़ी के द्वारा आगे लाया जाए इस पर विशेष चर्चा की गयी। इसमें महत्वपूर्ण कुछ निर्णय लिए गए इस संस्था का प्रमुख उद्देश्य नवलेखन को मंच प्रदान करना, नए लेखकों को कारवां प्रकाशन के सहयोग से पुस्तकों के प्रकाशन हेतु सहायता प्रदान, हिंदी साहित्य जगत में युवाओं को नया मंच प्रदान करना इन सभी पहलुओं पर विचार विमर्श किए गए। साथ ही यह भी बताया गया कि कविता कथा कारवां के अतुलनीय सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों में कला और साहित्यिक अभिरुचि को बढ़ावा देगी यह संस्था हिंदी बंगला और नेपाली भाषा की उन्नति के लिए भी कार्य करेगी। कविता कथाकार संस्था के कार्यसमिति में संरक्षक के पद पर डॉ श्याम सुंदर अग्रवाल उपाध्यक्ष के पद पर डॉ वंदना गुप्ता ,सचिव के पद पर डॉ अजय कुमार साव, उप सचिव के पद पर श्रीमती अर्चना शर्मा , कोषाध्यक्ष के पद पर कर्नल तरुण तिवारी, सह कोषाध्यक्ष के पद पर सोनी केड़िया, समिति के सलाहकार के पद पर प्रतिमा जोशी ,आशा गुप्ता , साथ ही मीडिया प्रभारी के के पद पर किरण अग्रवाल, पूनम चौधरी , प्रेरणा यादव तथा संयोजक के रुप में मनोज विश्वकर्मा, सह संचिता देवनाथ, रुबी प्रसाद, भारती बिहानी को नियुक्त किया गया।
इस अवसर पर कविता कथा कारवां की नवगठित कार्यसमिति की उपाध्यक्ष डॉ वंदना गुप्ता ने बताया कि अवसर सभी को मिलना चाहिए और वह अवसर देने के लिए ही हमारे इस कार्य समिति का गठन हुआ है। हम स्कूली बच्चों व कॉलेज छात्रों सहित युवा पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति को लेकर मंच पर कुछ अलग कर दिखाने की प्रतिभा को लेकर काम करेंगे व उन्हें प्रोत्साहित करेंगे आगे लाएंगे। वह चाहे फिर लेखन का कार्य हो या कोई नाटक मंचन हो या संस्कृति से जुड़ी साहित्य या पुस्तक लेखन से जुड़ी कोई भी प्रतिभा हो। हमारी यह संस्था नेपाली, बांग्ला एवं हिंदी सभी साहित्य को बढ़ावा देगी। उप सचिव अर्चना शर्मा ने विश्वास जताया कि आगे जाकर संस्था नवयुग को गढ़ने में मील का पत्थर साबित होगी। वहीं नारी शक्ति के रूप में जानी जाने वाली प्रतिमा जोशी ने बताया कि आज संस्था के गठन से हमारे कदम बढ़े हैं। एक सपना और एक नई उड़ान को लेकर बहुत जल्द सांस्कृतिक जगत में यह हमारी नई पीढ़ी के लिए नये भविष्य का निर्माण करेगा।संयोजक के रुप में मनोज विश्वकर्मा, सह संचिता देवनाथ, रुबी प्रसाद, भारती बिहानी उपस्थित थे।
हनुमान जन्मोत्सव पर विशेष – इस मंदिर में पत्नी संग विराजमान हैं श्री हनुमान
हनुमान जन्मोत्सव का पर्व इस साल आज यानी 16 अप्रैल को मनाया जा रहा है। कहा जाता है हनुमान जी ब्रह्मचारी रहे और उन्होंने कभी विवाह नहीं किया लेकिन उनका विवाह भी हुआ था। जी हाँ, सुनकर आपको आश्चर्य होगा लेकिन यह सच है। जी दरअसल हनुमान के विवाह से जुड़ी एक बेहद रोचक कथा पराशर संहिता में है। इस कथा के अनुसार भगवान हनुमान का विवाह हुआ था। केवल यही नहीं बल्कि उनका एक मंदिर भी मौजूद हैं और इस मंदिर में वह अपनी पत्नी के साथ विराजमान हैं। जी हाँ और इस मंदिर में उनके वैवाहिक रूप में उनकी पूजा की जाती है। अब हम आपको बताते हैं उनके विवाह से जुडी कथा।
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पौराणिक कथा- पौराणिक कथा के अनुसार हनुमान जी सूर्व देव से विद्या हासिल कर रहे थे। सूर्य देव के पास 9 विद्याएं थीं। सूरज ने उन्हें 9 में से 5 विद्याएं सीखा दी, लेकिन बाकी बची विद्याओं को हासिल करने के लिए विवाहित होना जरूरी था। इसके बिना वह ये विद्याएं प्राप्त नहीं कर सकता थे। तब हनुमान जी के सामने परेशानी खड़ी हो गई। वे बाल-ब्रह्मचारी थे। इस समस्या का सूर्य देव ने हल निकाला। उन्होंने अपनी शक्ति से एक कन्या को जन्म दिया। जिसका नाम सुर्वचला था। सूर्य देव ने बजरंगबली को कहा कि ने सुर्वचला से शादी कर लें। सूर्य देव ने कहा कि सुर्वचला से विवाह के बाद भी हनुमान ब्रह्मचारी रहेंगे, क्योंकि शादी के बाद सुर्वचला तपस्या में लीन हो जाएगी। पवनपुत्र से विवाह के बाद सुर्वचला तपस्या में चली गई। इस तरह श्रीराम भक्त के ब्रह्मचर्य में कोई रुकावट नहीं आई।
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आप सभी को बता दें कि हनुमान और उनकी पत्नी सुर्वचला का मंदिर तेलंगाना के खम्मम जिले में स्थित है। जी हाँ और यह दुनिया में एकमात्र मंदिर है, जहां भगवान हनुमान अपनी पत्नी के साथ विराजमान हैं। कहा जाता है इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि जो भक्त बजरंगबली और उनकी पत्नी सुर्वचला के दर्शन करता है, उसके वैवाहिक जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इसी के साथ ही परिवार में प्रेम बना रहता है।
(साभार – न्यूज ट्रैक लाइव)




