Thursday, April 2, 2026
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हिन्दी, बांग्ला, पंजाबी  ,उर्दू और उड़िया भाषाई पत्रकारिता पर आयोजन

कोलकाता । भारतीय भाषा परिषद और सदीनामा ने पांच भाषाओं की भाषायी पत्रकारिता के 200 साल के इतिहास पर एक दिन का सेमिनार किया । इसके साथ ही हिंदी पुस्तक काया के वन में लेखक( महेश कटारे ) की पुस्तक का बांग्ला अनुवाद ,भृतहरि : संसार – अरण्य ,का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी के स्वागत भाषण से हुई। लोक गायक दीपमय दास के लालन फकीर के गीतों की प्रस्तुति के बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई ।बांग्ला में वक्ता थे पत्रकार अमल सरकार और समीर गोस्वामी , हिंदी में वक्ता थे कृपा शंकर चौबे ( हिंदी अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा ) ओमप्रकाश अश्क,सन्तन कुमार पांडे और वरिष्ठ पत्रकार सीताराम अग्रवाल ,पंजाबी में बोले हरदेवसिंह ग्रेवाल , जगमोहन सिंह गिल,रावेल पुष्प और जगमोहनसिंह खोखर ,उर्दू पत्रकारिता के इतिहास पर विस्तार से चर्चा की वरिष्ठ पत्रकार जहांगीर काजमी ने और पांचवी भाषा ओडिया पर सारगर्भित वक्तव्य रखा डॉ सौरव गुप्ता ( कोरापुट सेंट्रल यूनिवर्सिटी ,उड़ीसा)ने।

इस अवसर पर बांग्ला पुस्तक भर्तहरि : संसार- अरण्ये ,का लोकार्पण हुआ । इसका लोकार्पण किया वागर्थ पत्रिका के सम्पादक डॉ. शंभूनाथ और छपते छपते और ताजा टीवी के समूह की पत्रिका के सम्पादक विशम्भर नेवर और वैचारिक पत्रिका के संपादक बाबूलाल शर्मा ने उपस्थित थे पुस्तक के अनुवादक मधु कपूर और काकली घोषाल तथा सदीनामा प्रकाशन से सम्पादक जीतेन्द्र जितांशु । इस अवसर पर श्रोता-वक्ता सम्वाद आयोजित हुआ जिसमें लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया । धन्यवाद ज्ञापन किया मीनाक्षी सांगानेरिया ने । संयोजन ,संचालन और जनसम्पर्क किया रेणुका अस्थाना (राजस्थान) ,नवीन प्रजापति और रितिका सिंह ने । इस कार्यक्रम की रूपरेखा और मीडिया दायित्व निभाया सदीनामा समूह के प्रमुख जीतेन्द्र जितांशु ने ।

बांगला नवजागरण की प्रासंगिकता विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

कोलकाता। ‘कोलकाता सोसाइटी फॉर एशियन स्टडीज’, ‘मौलाना अबुल कलाम आज़ाद इंस्टीट्यूट ऑफ एशियन स्टडीज’ और ‘भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण’ के संयुक्त तत्वावधान में “भारत और विश्व के सुनिश्चित भविष्य के लिए बंगाल के नवजागरण के सार्वभौमिक मिशन की प्रासंगिकता” विषय पर दो दिवसीय त्रिभाषी(हिंदी, बंगला और अंग्रेजी) अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कोलकाता के एशियाटिक सोसायटी के महासचिव डॉ सत्यब्रत चक्रवर्ती ने इस आयोजन को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि बंगला नवजागरण के कई महत्वपूर्ण सुधारक होने के बावजूद सभी मानवीय, धर्मनिरपेक्ष ,सहिष्णुता और नई चेतना के समर्थक थे। आयोजन के दूसरे दिन हिंदी सत्र के प्रथम सत्र में बतौर चेयर स्पीकर डॉ शंभुनाथ ने ‘बांग्ला नवजागरण:भारतीय परिपेक्ष्य’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बांग्ला नवजागरण को यूरोपीय नवजागरण से अलग देखने की जरूरत है क्योंकि भारतीय नवजागरण बहुरंगा है।यहां के नवजागरण का संबंध पुनरुत्थानवाद, संरक्षणशील परंपरा के साथ आधुनिक विचारों से भी है। इस अवसर पर ऑनलाइन माध्यम से जुड़ते हुए रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय के प्रो. हितेंद्र पटेल ने ‘बांग्ला नवजागरण, हिंदी भाषी बौद्धिक समाज और देश-चिंता: कुछ विशेष संदर्भ’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि बंगला नवजागरण ने भारतीय नवजागरण की जमीन तैयार करता है।बंगाल के बुद्धिजीवी पश्चिमी नवजागरण को उम्मीद की नजर से देखते हुए भी राष्ट्रप्रेम से जुड़ते हैं। कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रो. राम आह्लाद चौधरी ने विद्यासागर की महत्ता बताते हुए कहा कि वे मानवता और सामाजिक सुधार के पक्षधर थे। इसके अलावा रवि पंडित ने ‘हिंदी भाषियों पर 19वीं सदी में बंगाल के सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन का प्रभाव’ विषय पर और आदित्य कुमार गिरि ने ‘बांग्ला नवजागरण और हिंदी नवजागरण’ विषय पर आलेख पाठ किया। दूसरे सत्र के चेयर स्पीकर विद्यासागर विश्वविद्यालय के डॉ संजय जायसवाल ने ’19वीं और 20वीं शताब्दी का बंगाल:रचनात्मक उत्कृष्टता संदर्भ बांग्ला नवजागरण एवं साहित्यिक सिनेमा’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बंगाल की रचनात्मक उत्कृष्टता औपनिवेशिक शासन में आकार पाता है। पश्चिमी आधुनिकता से प्रभावित होने के बावजूद भारतीय नवजागरण वेदांत, बौद्ध धर्म और भक्ति आंदोलन की परंपरा से विच्छिन्न नहीं होती है। इस सत्र में मधु सिंह ने ‘रवींद्रनाथ ठाकुर: मनुष्यता एवं भारतीयता के लेखक (संदर्भ: निराला कृत रवींद्र कविता कानन)’ विषय पर और रूपेश कुमार यादव ने ‘रवींद्रनाथ, हिंदी साहित्य और नवजागरण’ विषय पर आलेख पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन उत्कर्ष श्रीवास्तव तथा कार्यक्रम का संयोजन डॉ शर्मिष्ठा बसु, अर्पिता बसु, सांतनु कुमार मंडल और रोमी आनंद ने किया।

दायित्व निभाते हुए अधिकारों के प्रति भी सचेतन हो स्त्री -डॉ. राजश्री शुक्ला

कोलकाता : घर और स्त्री एक दूसरे से जुड़े हुए हैं मगर घर सिर्फ स्त्री का ही नहीं बल्कि पुरुष का भी है। घर को संजोने और सहेजने की प्रक्रिया में भी स्त्री और पुरुष को समान दायित्व निभाना चाहिए। धानी आंचल की तरफ से आयोजित स्त्री और घर विषय पर इस संगोष्ठी में यह बात निकलकर सामने आई। विषय की प्रस्तावना करते हुए कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजश्री शुक्ला ने स्त्री एवं पुरुष के बीच दायिव्व एवं अधिकारों के विभाजन की असमानता को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि कुछ सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन होने पर भी स्थिति पूरी तरह बदली नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, आर्थिक स्वावलम्बन और घरेलू जिम्मेदारियों तक में समाज ने स्त्री के लिए तमाम दायित्व रखे मगर सारे अधिकार पुरुषों को दिए। इस तरह की असमानता बनी रही तो समाज एवं देश, दोनों का ही विकास बाधित होगा। उन्होंने कहा कि परिवार को जोड़ने का दायित्व स्त्री एवं पुरुष, दोनों का होना चाहिए। डॉ. शुक्ला ने एकल स्त्री के अधिकारों एवं स्त्री के आर्थिक स्वालम्बन के साथ आर्थिक निर्णयों में स्त्री की भागीदारी के पक्ष में बात कही। शिशु के व्यक्तित्व का विकास, स्त्री या पुरुष की तरह नहीं अपितु मनुष्य की तरह करने की आवश्यकता है। पितृसत्तात्मक समाज में स्त्रियाँ सचेतन रहकर ही अपने अधिकार प्राप्त कर सकती हैं एवं घर के साथ समाज को भी आगे ले जा सकती हैं।
प्रो. लाल बहादुर शास्त्री राजकीय संस्कृत विश्व विद्यालय की प्राध्यापिका सुजाता त्रिपाठी ने कहा कि स्त्री अपनी शक्ति को पहचाने. यह आवश्यक है। वह याचिका नहीं बल्कि सृष्टि को सचालित करने वाली शक्ति है। उसे खुद अपना सम्मान करना सीखना होगा।
विद्यासागर कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ. सूफिया यास्मीन ने कहा कि परम्परा और समाज ने स्त्री पर बहुत कुछ थोपा है। स्त्री को इससे आगे निकलने की आवश्यकता है। उसे शिक्षित होने के साथ आर्थिक स्वावलम्बी बनने की जरूरत है।
झारखंड की सामाजिक कार्यकर्ता सरिता कुमारी ने कहा कि स्त्री को अपने साथ दूसरी स्त्रियों को आगे बढ़ाने के लिए भी काम करना होगा। आँकड़ों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व की 35 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार है। स्त्री को सहना नहीं कहना सीखना होगा। मन को शिक्षित करना आवश्यक हैं।
चित्रकार मधु धानुका जैन ने कहा कि कई बार स्त्रियाँ ही एक दूसरे को प्रताड़ित करती हैं। स्त्री को सहयोग मिले तो कुछ भी कर सकती है। कार्यक्रम की शुरुआत श्रुति तिवारी द्वारा सरस्वती वन्दना से हुई। स्वागत भाषण धानी आंचल की संस्थापक सदस्य डॉ. सत्या उपाध्याय ने दिया। इस अवसर पर रविशंकर एवं कार्यक्रम संचालक स्कॉटिश चर्च कॉलेज की हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. गीता दूबे ने लोकगीत सुनाया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. शुभ्रा उपाध्याय ने दिया। कार्यक्रम का संयोजन प्रीति साव एवं पार्वती रघुनंदन ने किया। गूगल मीट पर आयोजित इस आभासी राष्ट्रीय संगोष्ठी में कई शिक्षा एवं साहित्यप्रेमियों ने भाग लिया एवं विचार भी रखे। दर्शकों में डॉ. मंजुरानी सिंह, प्रो. सत्य प्रकाश तिवारी, वरिष्ठ रंगकर्मी उमा झुनझुनवाला, प्रो. संजय जायसवाल समेत कई अन्य प्रबुद्ध अतिथि उपस्थित थे।

भारत में बड़ी चिंता का विषय नहीं है मुद्रास्फीति – राधेश्याम राठो

कोलकाता । रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के कार्यकारी निदेशक राधा श्याम राठो का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। मुद्रास्फीर्ति कुछ दिनों के लिए है। राधा श्याम राठो ने अपने संबोधन में कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और उच्च मुद्रास्फीति ने कोविड से उबरने की उम्मीद को धराशायी कर दिया। वित्तीय वर्ष 2022-23 में विश्व अर्थव्यवस्था के विकास का अनुमान 6.1 प्रतिशत से घटकर 3.6 प्रतिशत हो गया। रूस-यूक्रेन युद्ध ने विश्व अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है क्योंकि रूस कई खाद्य वस्तुओं, धातुओं और खनिजों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। पहले, विशेषज्ञों का मानना ​​था कि मुद्रास्फीति क्षणिक थी। अब यह अटल हो गया है। यह अनुमान लगाया गया है कि वैश्विक मुद्रास्फीति 6.2 प्रतिशत होगी। कई देशों में बहुवर्षीय मुद्रास्फीति उच्च है। मुद्रास्फीति का नेतृत्व कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि के कारण होता है। दरअसल जनवरी से मई 2022 के बीच कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित एक परिचर्चा सत्र को सम्बोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। सत्र में वैश्विक अर्थव्यवस्था में हाल के रुझानों और भारतीय वित्तीय बाजार पर इसके संभावित प्रभाव पर चर्चा की गयी। भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में उन्होंने आगे कहा कि अप्रैल 2022 में सीपीआई बढ़कर 7.79 प्रतिशत हो गया है। आरबीआई अब मुद्रास्फीति पर अधिक और विकास पर कम ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसलिए पहले इसने रेपो रेट को 40 बीपीएस और सीआरआर को 50 बीपीएस और जून में रेपो रेट को 50 बीपीएस से बढ़ाकर 4.9 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुद्रास्फीति भारत में बड़ी चिंता का विषय नहीं है क्योंकि इसकी मुद्रास्फीति 7.5% प्रतिशत जबकि लक्ष्य 6 प्रतिशत है। इसकी तुलना में संयुक्त राज्य अमेरिका में मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत है जबकि लक्ष्य 2 प्रतिशत है। इसलिए भारत अमेरिका से बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि अति-वैश्वीकरण का युग समाप्त हो गया है। देश वर्तमान स्थिति में आत्मनिर्भरता या आत्मानबीर पर ध्यान केंद्रित करेंगे। हालांकि, राष्ट्र व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर जोर देंगे। जबकि वैश्वीकरण मरा नहीं है, हम अब बहुध्रुवीय दुनिया में रहते हैं जहां देश अपने स्वयं के ब्लॉक बना रहे हैं। उदाहरण के लिए चीन का उन देशों में प्रभाव है जिनकी उसने मदद की है।
वर्तमान भारतीय आर्थिक परिदृश्य का वर्णन करते हुए राठो ने कहा कि भारत जी20 में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश है। उसी तरह भारत में ब्याज दर बढ़ेगी। हालांकि हाल के व्यापार समझौते और पीएलआई योजना जैसे सकारात्मक कारक हैं जो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात को कम करेंगे। उन्होंने आगे दर्शकों को सुझाव दिया कि हमें आशावादी होना चाहिए कि भविष्य बेहतर होगा और तर्कसंगत रूप से नहीं सोचना चाहिए।
स्वागत भाषण में एमसीसीआई के अध्यक्ष ऋषभ कोठारी ने कहा कि रेपो दर में 50 आधार अंकों की वृद्धि करके 4.9% की उम्मीद की गई है। पिछले दो महीनों में यह दूसरी दर वृद्धि थी, पहले 22 मई को हुई थी, जब मौद्रिक नीति समिति ने एक अनिर्धारित बैठक में रेपो दर में 40 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी।

द हेरिटेज अकादमी में आयोजित हुआ फिल्मोत्सव

कोलकाता । द हेरिटेज अकादमी के मीडिया साइंस विभाग ने दो दिवसीय फिल्मोत्सव यानी फिल्म फेस्टिवल ‘हेरिटेज अकादमी फिल्म फेस्टिवल’ आयोजित किया। गत 7 और 8 जून 2022 को संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित इस फिल्मोत्सव में 5 आयोजन थे: फिक्शन फिल्म्स, नॉन-फिक्शन फिल्म्स, फोटोग्राफी, वन-टेक फिल्में और ट्रेलर मेकिंग। राज्य भर के विभिन्न छात्रों से 100 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं।
विशेष प्री-इवेंट 6 जून को एसआरएफटीआई के डीन और फिल्म निर्माता अशोक विश्वनाथन द्वारा ‘नैरेटिव्स: तब और अब’ विषय पर एक मास्टरक्लास के साथ शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत की कुछ जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं।
पहले दिन, छात्रों ने लोकप्रिय निदेशक राज चक्रवर्ती से बातचीत की, जिन्होंने छात्रों को अधिक से अधिक फिल्मे देखने और पढ़ने का परामर्श दिया। वयोवृद्ध अभिनेता और लेखक, बरुण चंदा ने सत्यजीत रे के फिल्म निर्माण की तकनीकों पर विस्तार से बताया और फोटोग्राफी के व्याकरण पर अंतर्दृष्टि प्रदान की। रेडियो मिर्ची के रेडियो जॉकी सोमक घोष ने विभाग के पॉडकास्ट चैनल ‘द हेरिटेज पॉड’ का शुभारंभ किया। पहले दिन का समापन वन-टेक फिल्म्स, ट्रेलरों की स्क्रीनिंग और फोटोग्राफी प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुआ।
दूसरे दिन की शुरुआत फिक्शन और नॉन-फिक्शन फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ हुई। इसके बाद प्रसिद्ध फिल्म संपादक अर्घ्यकमल मित्रा और निर्देशक जुधजीत सरकार के साथ ‘एडिटिंग थ्रू द एज’ विषय पर एक पैनल चर्चा हुई। ग्रैंड फिनाले में, निर्देशक और निर्माता, अरित्र सेन, अभिनेताओं के साथ सुजॉय प्रसाद चटर्जी, विक्रम चटर्जी, और राहुल देव बोस ने अपनी आगामी रिलीज़ ‘शोहोर उशनोतोमो डाइन’ के बारे में बात की। उन्होंने जादवपुर विश्वविद्यालय, सेंट जेवियर्स और कलकत्ता विश्वविद्यालय जैसे शहर के विभिन्न कॉलेजों से आए विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।

कामधेनु ने सोशल मीडिया पर शुरू किया नया प्रचार अभियान

बाहरी दीवारों को खराब मौसम से बचाने की पहल

कोलकाता । कामधेनु पेंट्स ने 9 जून से 12 जून 2022 तक कंपनी के सोशल मीडिया चैनलों पर एक विशेष अभियान शुरू किया। अभियान का प्राथमिक उद्देश्य चरम मौसम की स्थिति के हानिकारक प्रभावों से बाहरी इमारतों के रखरखाव और सुरक्षा के बारे में जागरूकता प्रदान करना होगा।
कामधेनु पेंट्स के निदेशक सौरभ अग्रवाल ने कहा, “गर्मी के बढ़ते तापमान और आसन्न मानसून भवन और अन्य संरचनाओं पर उनके नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए उपयुक्त उपायों की मांग करता है। अंदर रहने वालों की रक्षा करते हुए बाहरी दीवारें लगातार तत्वों के संपर्क में आती हैं। सूरज और बारिश के संपर्क में आने से यूवी डिग्रेडेशन, रंग फीका पड़ना, दाग, नमी, शैवाल की वृद्धि और ऐसे ही अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं। उच्च गुणवत्ता और विशिष्ट एक्सटीरियर इमल्शन पेंट का उपयोग बाहरी को इन सभी मुद्दों से बचाने में मदद कर सकता है और दीवारों को हमेशा के लिए नया बनाए रखने में मदद कर सकता है।”
कामधेनु पेंट्स भारत में उपभोक्ताओं को सस्ती कीमत पर सामान्य प्रयोजन के सजावटी पेंट के साथ-साथ विशेषज्ञ विश्व स्तरीय उत्पादों का उत्पादन और बिक्री करता है। विशेष रूप से विकसित एक्सटीरियर इमल्शन उत्पाद जैसे ‘वेदर सुप्रीम’ और ‘वेदर क्लासिक मैक्स’ वैश्विक उत्पादों में सर्वश्रेष्ठ हैं और अत्यधिक नमी और गर्मी से अद्वितीय सुरक्षा प्रदान करते हैं, भारी वर्षा के दुष्प्रभावों से लड़ते हैं, शैवाल के विकास को रोकते हैं। और दीवारों पर कवक, क्षारीय और यूवी गिरावट, और भी बहुत कुछ जबकि आपकी दीवारों के समृद्ध रूप की रक्षा भी करता है।

एचआईटीके के पूर्व छात्र अग्नीश द्वारा सम्पादित शॉर्ट फिल्म पुरस्कृत

किशोरों पर कोरोना के प्रभाव को दर्शाती है फिल्म
दादा साहब फाल्के फिल्म फेस्टिवल के स्कूल सेक्शन वर्ग में पुरस्कृत
कोलकाता । हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोलकाता से सिविल इंजीनियरिंग के 2020 बैच के छात्र की शॉर्ट फिल्म पुरस्कृत हुई है। संस्थान के बी.टेक स्नातक अग्निश चटर्जी द्वारा संपादित 22 मिनट की फिल्म को 12वें दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2022 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म (स्कूल सेक्शन) घोषित किया गया। पुरस्कार समारोह गत 30 अप्रैल को नोएडा, दिल्ली एनसीआर में हुआ। फिल्म का निर्देशन गोखले मेमोरियल गर्ल्स स्कूल, कोलकाता की बारहवीं कक्षा की ह्यूमैनिटीज की छात्रा युबासन कपस ने किया था।
‘एईटुकू’ की प्रमुख भूमिकाएं प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय, कोलकाता की अंग्रेजी द्वितीय वर्ष की छात्रा नीलांजना घोष और महादेवी बिड़ला विश्व अकादमी, कोलकाता की बारहवीं कक्षा की ह्यूमैनिटीज की छात्रा ऐश्वर्या महलानोबिस ने निभाई हैं। संगीत गोखले मेमोरियल गर्ल्स स्कूल की ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा श्रीपूर्णा मजूमदार, प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के द्वितीय वर्ष के छात्र शुभायन दे; अभिनव भारती हाई स्कूल के बारहवीं कक्षा के ह्यूमैनिटीज छात्र सोहम समद्दर; और युबासन द्वारा तैयार किया गया था।
लघु फिल्म मानसिक असंतुलन से निपटने का समाधान खुद से प्रेम करने में खोजती है। यह हमें परिवर्तनों और कमजोरियों को स्वीकार करने की सीख देती है। फिल्म का प्रमुख पक्ष यह है कि यह दिखाता है कि लॉकडाउन के दौरान किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर कैसे प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। फिल्म अकेलेपन जैसे विषयों पर भी जोर देती है और माता-पिता का संघर्ष बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर सकता है। हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सिविल इंजीनियरिंग स्नातक अग्निश चटर्जी ने कहा, “पूरे संपादन कार्य को कम समय में पूरा करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था।”

सामाजिक संदेश के साथ फिल्म ‘जनहित में जारी’ सिनेमाघरों में

कोलकाता । भरपूर कॉमेडी और ड्रामा से भरी फिल्म ‘जनहित में जारी’ की शुक्रवार को धमाकेदार रिलीज हुई। रिलीज के मौके पर विनोद भानुशाली, राज शांडिल्य, विमल लाहोटी और विशाल गुरनानी ने कहा कि इस फिल्म में दर्शकों के लिए एक सामाजिक संदेश छिपी हुई है। जय बसंतू सिंह की विचारधारा और नुसरत भरुचा की फिल्म दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ-साथ समाज में एक शिक्षा भी फैलायेगी। इस फिल्म में अनुद सिंह ढाका, परितोष त्रिपाठी, विजय राज, टीनू आनंद, बृजेंद्र कला समेत अन्य कलाकारों का अभिनय प्रशंसनीय हैं।

शुक्रवार को देश भर में प्रदर्शित जनहित में जारी फिल्म की समीक्षकों ने काफी सराहना की है। यह फिल्म में एक युवा लड़की की यात्रा पर आधारित है, जो सामाजिक प्रतिरोध के बावजूद, जीवन यापन के लिए कंडोम बेचती है, और अपने परिवार, ससुराल वालों और समाज को एक संदेश देने का फैसला करती है। ‘जनहित में जारी’ अपने दमदार प्रदर्शन, प्रफुल्लित करनेवाले डायलॉग और विचारोत्तेजक विषय के साथ दर्शकों के मन में जगह बना रही है। इस फिल्म में दिलचस्प बात यह है कि फिल्म में छिपे संदेश और वर्तमान समय में समाज को इन संदेश की सख्त जरूरत को देखते हुए, निर्माताओं ने इसके रिलीज के दिन ही इसके टिकटों पर कटौती करने की घोषणा की। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस फिल्म को देख सके। इस फिल्म में छिपा मनोरंजन और कॉमेडी दर्शकों को हमेशा याद रहेगी। जय बसंतू सिंह द्वारा निर्देशित, ‘जनहित में जारी’ फिल्म, भानुशाली स्टूडियो लिमिटेड और श्री राघव एंटरटेनमेंट एलएलपी के सहयोग से बनी है। थिंकिंक पिक्चर्स लिमिटेड प्रोडक्शन के बैनर तले यह जी स्टूडियोज द्वारा रिलीज की गयी है, रिलीज के पहले दिन ही दर्शकों ने इसे बेहद पसंद किया।

पर्यावरण के प्रति दायित्व समझता है उद्योग जगत – सीएस ममता बिन्नानी

कोलकाता । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम के पश्चिम बंगाल चैप्टर की अध्यक्ष (एचसी) सीएस ममता बिनानी ने पर्यावरण के महत्व को रेखांकित कियाआअध्यक्ष रह चुकी बिन्नानी ने कहा कि आज हर उद्योग एवं कार्यक्षेत्र समाज के प्रति अपने दायित्व को समझ रहा है और सभी हित धारकों के साथ स्थायी विकास पर जोर दे रहा है।
धन सृजन का प्राथमिक लक्ष्य और यही वजह है कि कंपनियों ने अपनी संपत्ति का खुलासा करते हुए स्थिरता रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। पर्यावरण, सामाजिक और शासन मानकों पर प्रदर्शन पर बात की जारी है और स्थिति स्पष्ट की जा रही है।
गौरतलब है कि सीएस ममता बिन्नानी बहुत सारे पर्यावरण और स्वास्थ्य के मुद्दों के लिए भी काम कर रही हैं और प्लास्टिक के न्यूनतम उपयोग के अभियान का समर्थन करती हैं। वह सैन फ्रांसिस्को में आयोजित इंटरनेशनल कॉरपोरेट गवर्नेंस नेटवर्क (आईसीजीएन) वार्षिक सम्मेलन 2016 का हिस्सा थीं।

पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को बढ़ाता है केके का अंतिम गीत

शेरदिल के गीत गुलजार के बोल बयां करते हैं जंगलों का दर्द
मुम्बई/ कोलकाता। प्रख्यात गायक केके की आवाज का जादू सदाबहार है और शेरदिल के लिए रिकॉर्ड किया गया अंतिम गीत एक बार बांधने लगा है। गुलजार के गीत पर केके की मखमली आवाज और उस पर पंकज त्रिपाठी का जबरदस्त अभिनय सोने पर सुहागा है। धूप – पानी बहने दे गीत को हाल ही में निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी ने जारी में जारी किया। इस गीत को काफी पसन्द भी किया जा रहा है। संगीत शांतनु मोएत्रा का है। कृष्णकुमार कुन्नाथ, जिन्हें केके के नाम से जाना जाता है, हमारे समय के सबसे प्रतिभाशाली पार्श्व गायकों में से एक थे। अपने 26 वर्षों के शानदार काम के दौरान, उन्हें जनता का खूब प्रेम मिला। धूप पानी बहने दे को अगर पर्यावरण संरक्षण का थीम गीत कहा जाए तो यह अतिशियोक्ति नहीं होगी। इस गीत में जंगलों, नदियों और वन्य जीवन के सिमटते जाने की ऐसी कसक है जिसे सुनकर एक क्षण के लिए हम सोचने लगते हैं कि हम कहाँ जा रहे हैां
एक साथ रिकॉर्ड किया गया आखिरी गाना होने के नाते, गुलज़ार साहब ने कहा “श्रीजीत ने शेरदिल में मुझ पर एक एहसान किया है। इतनी खूबसूरत फिल्म के लिए न सिर्फ मुझे लिखने को मिला, बल्कि केके से सदियों बाद मिलने का मौका मिला। केके ने सबसे पहले माचिस में मेरा एक गाना गाया था, “छोड़ आए हम वो गलियां…”। जब वह शेरदिल के लिए गीत गाने आए, तो मेरा दिल खुशी से भर गया लेकिन यह शर्म की बात है कि इसे उनके अंतिम गीतों में से एक के रूप में जाना पड़ा। मानो वह अलविदा कहने आया हो। शेरदिल में गीत पर्यावरण पर है। फिल्म में जिस तरह से इसका इस्तेमाल किया गया है, वह आपके जंगलों, नदियों, जानवरों और पक्षियों को बचाने का आह्वान है। इतने महत्वपूर्ण संदेश को अपनी आवाज देने के बाद उन्हें थोड़ी देर और रुकना चाहिए था। अफ़सोस यह हमारे हाथ में नहीं था। मैं उसके लिए प्रार्थना करूंगा और उसे याद करूंगा। शेरदिल जहां भी जाएंगे, उनकी याद हमारे साथ रहेगी।’

शांतनु मोइत्रा कहते हैं, “केके ने इस गाने को ऐसे गाया जैसे यह उनका अपना हो। उन्होंने मुझे बताया कि इस गाने ने गुलजार साहब को दो दशक बाद उन्हें वापस दिया है। वह इस बात से भी उत्साहित थे कि वह इस गीत को लाइव कॉन्सर्ट में गाएंगे क्योंकि यह संरक्षण की बात करता है और युवाओं को इसे सुनने की जरूरत है। ”
निर्देशक, श्रीजीत मुखर्जी कहते हैं, “हम गुलज़ार साहब की कविता पर बड़े हुए हैं। हम दिल की हर बात में केके की आवाज से दोस्ती करते हुए बड़े हुए हैं। इसलिए यह मेरे लिए दोहरे सपने के सच होने जैसा है।” सच्ची घटनाओं से प्रेरित होकर, श्रीजीत मुखर्जी ने शहरीकरण के प्रतिकूल प्रभावों, मानव-पशु संघर्ष और गरीबी के बारे में एक अंतर्दृष्टिपूर्ण कहानी सामने रखी है, जो एक जंगल के किनारे बसे एक गाँव में एक विचित्र प्रथा की ओर ले जाती है। फिल्म 24 जून को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है। शेरदिल: द पीलीभीत सागा’ गुलशन कुमार, टी-सीरीज़ फिल्म और रिलायंस एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो भूषण कुमार और रिलायंस एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित और मैच कट प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, नीरज काबी और सयानी गुप्ता हैं और इसका निर्देशन श्रीजीत मुखर्जी ने किया है।