Thursday, April 2, 2026
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चमत्कार अभिनेता नहीं, चमत्कार हमेशा कहानियाँ करती हैं – पंकज त्रिपाठी

सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया

कड़े संघर्ष के बाद सफलता मिले तो उसका स्वाद अनोखा होता है और उसमें एक सन्तुष्टि मिलती है और इन्सान जमीन के करीब ही रहता है।   ‘शेरदिल : द पीलीभीत सागा’ के प्रचार के सिलसिले में कोलकाता पहुँचे दिग्गज एवं लोकप्रिय अभिनेता पंकज त्रिपाठी के चेहरे पर यही सुकून नजर आया। राजकाहिनी और उसका हिन्दी संस्करण बेगम जान, गुमनामी बाबा जैसी कई बेहतरीन फिल्में दे चुके निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी के साथ उन्होंने मीडिया के सवालों के जवाब दिए। निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी और अभिनेता पंकज त्रिपाठी की इस बातचीत के मुख्य अंश हम आपके सामने रख रहे हैं – 

गंगाराम और पंकज त्रिपाठी का सम्बन्ध
गंगाराम का किरदार निभा रहा हूँ, यही सबसे बड़ा सम्बन्ध है।

सूरज की रोशनी के हिसाब से होती थी शूटिंग
जंगल में रहना ही मजेदार था। वहाँ पर इतनी शांति थी। सुबह 5 बजे ही हम कैमरा लेकर जंगल में चले जाते थे और सूरज की रोशनी के अनुसार शूट करते थे। उत्तर बंगाल में एक टी इस्टेट था जिसे श्रीजीत जी ने ढूंढ निकाला था। वह जगह मुझे बहुत पसन्द आयी, वहाँ मैं दोबारा जाऊँगा मगर इस बार घूमने के लिए। सो बहुत याद हैं और हम दोनों जंगलों को पसन्द करने वाले लोग हैं।

यह मुद्दा, घटनाएं जानी – पहचानी थीं
निश्चित रूप से जुड़ा हूँ। मैं असली दुनिया से आता हूँ। आधा जीवन मेरा गाँव में गुजरा है तो इसमें जो परेशानियाँ हैं, संघर्ष हैं, वह मैंने करीब से देखा है। हमारे यहाँ जंगली पशु तो नहीं आते थे लेकिन नीलगायों का बहुत उत्पात रहता है, मेरे लिए यह मुद्दा, घटनाएं जानी – पहचानी थीं। मुझे अलग से तैयारी की जरूरत नहीं पड़ी, यह अखबार पढ़ने की बात नहीं है। मैं इस परेशानी से स्वयं गुजरा हूँ।

प्रकृति को लेकर अब अधिक संवेदनशील हो गया हूँ
हर किरदार हमें कुछ न कुछ तो देता है जो प्रकृति, जंगल और पर्यावरण को लेकर मैं जितना संवेदनशील पहले था, उससे ज्यादा संवेदनशील हो जाऊँगा या हो गया हूँ।

शूटिंग में जमकर खाया
बहुत खिलाया शूटिंग पर। बहुत अच्छा खाना मिलता था। बंगाली भोजन – – आलू पोस्तो..चरचरी सब खाया। हम रोज खाते थे।

फिल्म के अनुसार खुद को ढाल लेता हूँ
मैं जिस फिल्म में घुस जाता हूँ, उस फिल्म के कास्ट, क्रू औऱ सभी सदस्यों को अपना बना लेता हूँ। मैं तय नहीं करता है कि यह मेरे मनलायक है या नहीं। मेरे लिए हर व्यक्ति महत्वपूर्ण है, प्रेम और आदर ही तो महत्वपूर्ण है और मैं हर किसी को एक जैसा सम्मान देता हूँ। चमत्कार अभिनेता नहीं, चमत्कार हमेशा कहानियाँ करती हैं। चूँकि हम फिल्म में होते हैं तो लोगों को लगता है कि चमत्कार हमने किया, पर ऐसा होता नहीं है, चमत्कार कहानियाँ करती हैं। कहानियाँ बड़ी होती हैं, किरदार बड़े होते हैं, कलाकार बहुत छोटी भूमिका निभाते हैं। चरित्र बड़े होते हैं, गंगाराम मुझसे बहुत बड़ा है। गंगाराम अपने गाँव के लिए जिस तरह का त्याग कर रहा है, शायद वह त्याग मुझसे कभी जीवन में न हो पाए। कहानी बड़ी होती हैं, किरदार बड़े होते हैं। जो कहानी लगता है, कुछ कर सकती है, कर लेता हूँ।

भोजपुरी फिल्म बनाने का मन है
भिखारी ठाकुर मेरे ही इलाके के हैं। उनके नाटक मुझे बहुत पसन्द हैं, मैंने किया है। बटोही नाम से नाटक है उन पर उपन्यास है तो निश्चित रूप से अगर किसी ने फिल्म बनायी तो मैं जरूर वह फिल्म करना चाहूँगा क्योंकि माटी – पानी एक ही है हम दोनों का। मेरे मन में एक सपना है कि मौका लगे तो अपने लायक एक भोजपुरी फिल्म बनाऊँ।

तरीका मनोरंजक है, फिल्म गम्भीर है
गम्भीर कहानी को मनोरंजक और सटायर का प्रभाव भी होता है। कहानी गम्भीर है, एक व्यक्ति मरने जा रहा है, यह कोई हंसी की बात नहीं है। फिल्म देखकर दर्शक सोचने पर बाध्य होंगे।

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संवाददाता सम्मेलन में निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी और अभिनेता पंकज त्रिपाठी

मैं इंडिया को जानता था, पंकज ने मुझे भारत से मिलवाया – श्रीजीत मुखर्जी 

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पंकज त्रिपाठी को छोड़कर गंगाराम के लिए किसी और को ले ही नहीं सकते थे
ऐसा अभिनेता चाहिए था जो मिट्टी के करीब हो और किरदार में घुल – मिल जाए। गंगाराम के किरदार में पंकज त्रिपाठी को छोड़कर किसी और अभिनेता के बारे में हम सोच ही नहीं सकते थे। आप फिल्म को देखेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि दोनों कितने नैसर्गिक हैं, नेचुरल हैं। इस फिल्म में भी पंकज सर का बहुत योगदान है। हमने जो पटकथा लिखी थी, उसे कुछ सुधारा है और इस फिल्म में, इस किरदार को बेहतर बनाने में पंकज का बहुत योगदान है। कोई किरदार के साथ घुल – मिल जाए तो ही इस तरह का योगदान कर सकता है।

फिल्म को सोशल सटायर की तरह बनाया है
बड़े – बुजुर्गों को जंगल में छोड़ आना और उनकी मृत्यु के बाद मुआवजा माँगना, इसका कारण तो आर्थिक अभाव है। मैंने इसे सोशल सटायर की तरह बनाया है यानी सामाजिक विद्रूप की तरह बनाया है। बहुत से लोग खुद भी जाते हैं, इस बिन्दु को उठाकर काल्पनिक जंगल, गाँव, गरीबी से बचने के लिए खुद अपनी जान दाँव पर लगाना..इसी को लेकर फिल्म गढ़ी गयी है।

फिल्म बनाते समय पुरस्कार दिमाग में नहीं रहते
फिल्म फेयर या राष्ट्रीय पुरस्कार या सफलता कुछ भी..सब बाद की चीजें हैं। मैं जिस कहानी को लेकर रोमांचित होता हूँ, उसी पर फिल्म बनाता हूँ। कई बार वे सफल होती हैं तो कई बार यह विचार काम नहीं करता तो पुरस्कार या कुछ और फिल्म बनाते समय मेरे दिमाग में नहीं रहता। मैं उन विषयों, उन कहानियों को लेकर ही फिल्म बनाता हूँ जो मेरे दिल के करीब होती हैं।

पंकज के साथ काम करके बहुत कुछ सीखा
पंकज खाने के शौकीन हैं। हैं। एक होती है, अभिनेता से ट्यूनिंग और दूसरी होती है दोस्ती तो पंकज से दोस्ती हो गयी है। हम खूब बातें करते और चर्चा करते हैं। थी काम के 8 -10 घंटे के बाद भी हम दोनों का जीवन है। यह चर्चा प्रकृति प्रकृति, राजनीति, संगीत भोजन,,,सब पर चर्चा होती है और ऐसे ही तो दोस्ती होती है, सो हुई है। पंकज के साथ काम करते हुए कभी लगा नहीं कि मैं एक स्टार के साथ काम कर रहा हूँ। मिट्टी से जुड़ा व्यक्ति हम कहते हैं मगर पंकज वास्तविकता में मिट्टी से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। मैं एक शहर का व्यक्ति हूँ तो पंकज जी ने मुझे ऐसे भारत के बारे में बताया जिसे उनसे मिले और बात किये बगैर नहीं जान सकता था। वह भारत को अच्छी तरह जानते हैं। कुछ दृश्यों में उन्होंने इसे जोड़ा है, कुछ संवादों को बेहतर बनाया क्योंकि गाँवों में और जंगलों में ऐसा होता है। उनके अनुभवों ने मुझे एक अलग भारत दिखाया। मैं इंडिया को जानता था, पंकज ने मुझे भारत से मिलवाया। सीखने की यह प्रक्रिया रोचक रही।

फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित है, उस पर आधारित नहीं है
पीपली लाइव मैंने देखी है पर उस फिल्म से इस फिल्म का सम्बन्ध नहीं बल्कि पीलीभीत की उस घटना से सम्पर्क है। प्रभावित शब्द भी गलत है, प्रेरित कह सकते हैं। हमने जो जंगल और गाँव दिखाए हैं, वह काल्पनिक है। पीलीभीत की जो घटना है, वह बहुत ही निराशाजनक है, वह बहुत मायूस करती है। हमने इसमें सकारात्मक दृष्टिकोण है, लार्जर देन लाइफ सटायर की तरह पेश किया है। बांसुरी का फिल्म में बहुत महत्वपूर्ण तरीके से उपयोग किया गय़ा है और गंगाराम से इसका बहुत सम्बन्ध है। हमने शांतनु से इस बारे में बात की।

लोग फिल्म देखकर सोचने को बाध्य होंगे
फिल्म में मनोरंजन होगा, सटायर होगा मगर लोग फिल्म देखकर सोचने को बाध्य होंगे।

 गुलजार साहब की सराहना पुरस्कार की तरह थी
गुलजार साब लीजेंड हैं और चुनिंदा काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि फिल्म देखकर तय करेंगे कि वे लिखेंगे या नहीं। हमने फिल्म भेजी और वह उनको अच्छी लगी कि उन्होंने हमें बुलाया और हमें धन्यवाद किया कि हमने उनके बारे में सोचा कि वे लिखें। यह हमारे लिए पुरस्कार की तरह था, कल्पनातीत था। केके हमारे प्रिय गायक है। मजेदार थे, काम करने की उनके साथ योजना बनी पर अफसोस है कि वह पूरी नहीं हो पायी।

कोलकाता में ‘शेरदिल’ : पंकज त्रिपाठी एवं श्रीजीत मुखर्जी ने खाए गोलगप्पे

कोलकाता । अभिनेता पंकज त्रिपाठी एवं निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी ‘शेरदिल : द पीलीभीत सागा’ के प्रचार के लिए कोलकाता पहुँचे। वन और मनुष्य के सम्बन्धों और उसकी जीजिविषा को दर्शाती फिल्म शहरीकरण के दुष्प्रभाव को दर्शाती है। पंकज और श्रीजीत ने फिल्म प्रचार के साथ कोलकाता की सैर की। पंकज ने गोलगप्पों का भी आनन्द लिया। ‘शेरदिल’ में पंकज त्रिपाठी का किरदार बाघ के हाथों अपना शिकार करवाने के लिए जंगल में जाता है, पर फिल्म इससे आगे की कहानी है जो भ्रष्ट व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करती है। संवाददाता सम्मेलन में निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी एवं नायक पंकज त्रिपाठी ने फिल्म से जुड़ी कई जानकारियाँ साझा कीं। निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी ने कहा कि ‘शेरदिल: द पीलीभीत सागा’ उनके दिल के काफी करीब है। इस तरह के विषय पर कभी फिल्म नहीं बनायी गयी है। पंकज त्रिपाठी, नीरज कबी, सयानी गुप्ता जैसे कलाकारों के साथ काम करके खुद को सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। उम्मीद है कि फिल्म दर्शकों को पसन्द आएगी। मीडिया से बात करते हुए पंकज त्रिपाठी ने कोलकाता आने पर खुशी जताते हुए कहा कि यह समचमुच सिटी ऑफ जॉय है। शेरदिल: द पीलीभीत सागा’ को कोलकाता में प्रचार करना हमेशा खास रहेगा। निर्देशक श्रीजीत कोलकाता से ही हैं तो इस शहर में तो आना ही था मुझे उम्मीद है कि दर्शक फिल्म में गंगाराम का मेरा किरदार पसन्द करेंगे जो कि अपने परिवार और अन्य ग्रामीणों को सरकारी मुआवजे का लाभ दिलवाने के लिए खुद जंगल जाता है। टी सीरिज और रिलायंस इन्टरटेन्मेंट द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म के निर्माता भूषण कुमार, रिलायंस इन्टरटेन्मेंट है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, नीरज कबी, सयानी गुप्ता समेत अन्य कलाकार हैं। फिल्म का निर्देशन श्रीजीत मुखर्जी ने किया है।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल का वार्षिक समारोह

कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल का वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह हाल ही में मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार 2021 -2022 के सत्र के लिए प्रदान किये गये। कोविड की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए निरन्तरता बनाये रखना कठिन था। ऐसी स्थिति में छात्राओं के प्रदर्शन को सराहते हुए जूनियर एवं सीनियर सेक्शन की छात्राओं, दोनों को पुरस्कृत किया गया।

एमसीसीआई ने आयोजित की कॉरपोरेट प्रशिक्षण कार्यशाला

कोलकाता । एमसीसीआई द्वारा कॉरपोरेट प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। एक्सेंचर के प्रबन्ध निदेशक डॉ, सप्तर्षि देव द्वारा संचालित इस कार्यशाला में गैर-वित्त कार्यकारियों के लिए फिनांस यानी वित्त के बारे में प्रशिक्षित किया गया। डॉ. सप्तर्षि देव के पास बिजनेस फाइनेंस और टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग के क्षेत्र में 20 साल का समृद्ध अनुभव है, जिसमें बिजनेस ग्रोथ बढ़ाने और बिजनेस वैल्यू प्रदान करने का एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है। उनके पास वित्त, आपूर्ति श्रृंखला, परियोजनाओं के संचालन और रिपोर्टिंग स्थान पर मजबूत प्रौद्योगिकी और परामर्श का अनुभव है।
कार्यक्रम को विशेष रूप से वित्त के अलावा अन्य कार्यात्मक क्षेत्रों जैसे बिक्री, विपणन, मानव संसाधन, अनुसंधान और विकास, उत्पादन, खरीद और अन्य से पेशेवरों को सक्षम करने के लिए तैयार किया गया था ताकि महत्वपूर्ण वित्तीय सिद्धांतों का व्यापक कार्य ज्ञान प्राप्त किया जा सके। तरीके, उन्हें लागत-बचत, बजट, नई परियोजनाओं के निर्णय, वित्तीय नियोजन, विकास रणनीतियों के अलावा अन्य महत्वपूर्ण व्यावसायिक निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
डॉ. सप्तर्षि देव ने कहा, “गैर-वित्त के लिए वित्त महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गैर-वित्त कार्यकारी को निर्णय लेने में मदद करेगा, क्योंकि यह वित्तीय विवरणों का विश्लेषण करने में मदद करता है, यह समझने में कि लागत और लाभों का विश्लेषण कैसे किया जाए और लागत को कैसे कम किया जाए और अधिक सार्थक तरीके से लागू किया जाए। कंपनी को लाभ कमाने में मदद करने का तरीका। यह पूर्वानुमान लगाने और यदि आवश्यक हो तो भविष्य के लिए सुधारात्मक कार्रवाई करने में भी मदद करता है, और सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यह प्रबंधकों को उन परियोजनाओं का मूल्यांकन करने में मदद करता है जहां कंपनी निवेश कर रही है। – डॉ देव ने कहा।
एमसीसीआई के अध्यक्ष ऋषभ कोठारी ने कहा कि “अधिकांश कंपनियां उन अधिकारियों को काम पर रखना पसंद करती हैं जिन्हें वित्त का बुनियादी ज्ञान है, वास्तव में हम सभी अपने अधिकारों में निर्णय लेने वाले हैं और सही निर्णय लेने के लिए, वित्त की समझ महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में सभी क्षेत्रों और कार्यक्षेत्रों के 75 से अधिक पेशेवरों ने भाग लिया। डॉ. सौगत मुखर्जी, महानिदेशक, एमसीसीआई ने सत्र के दौरान कॉर्पोरेट प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन किया।
प्रतिभागियों को वित्तीय विवरणों को समझने और उनका विश्लेषण करने के साथ-साथ वित्त की बुनियादी बुनियादी बातों को समझने का अवसर मिला। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूंजी बजट और वित्तीय पूर्वानुमान, कार्यशील पूंजी और नकदी प्रवाह प्रबंधन, अनुपात विश्लेषण, वित्तीय एमआईएस आदि शामिल थे।

नैसकॉम के सदस्य पहुँचे एचआईटीके, युवा उद्यमियों को दिखायी राह

कोलकाता। इन्ट्रैकर के डेटा ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म फिनट्रैकर के अनुसार भारत में 100 यूनिकॉर्न में से केवल 18 यूनिकॉर्न ने वित्तीय वर्ष 2021 में लाभप्रदता प्राप्त की और 57 को गहरा नुकसान हो रहा है। उनमें से कुछ ने यू.एस. या सिंगापुर में पंजीकृत अपने राजस्व, हानि या लाभ के आंकड़ों का खुलासा नहीं किया है। इसके कारण उचित परामर्श की कमी, विचारों की व्यवहार्यता, जटिल नियम और बहुत कुछ हो सकते हैं। इस समस्या का समाधान करने और भविष्य में उद्यमी बनने की इच्छा रखने वाले उभरते इंजीनियरों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए, हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रुमेंटेशन इंजीनियरिंग विभाग ने 17 जून 2022 को ‘छात्र उद्यमिता को प्रोत्साहित करने’ पर एक सत्र आयोजित किया जिसे संबोधित किया गया था
इस कार्यक्रम में नैसकॉम के सदस्यों की ओर से युवा विद्यार्थियों को उद्यमिया को लेकर सलाह दी गयी। 10K स्टार्टअप पहल के सदस्य। नैसकॉम की टीम में अरिहंत कोठारी, रणनीति, निवेश, प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग, ईएसजी, बाजार अनुसंधान, विश्लेषिकी, शासन और विकास, नैसकॉम और अनूप दास, मुख्य रणनीति अधिकारी और एक्सवालु, भारत में भारत संचालन के प्रमुख शामिल थे। सदस्यों ने बी.टेक- एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रुमेंटेशन इंजीनियरिंग के छात्रों के साथ बातचीत की और उनकी परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जैसे कोविड 19 रोगी सुविधाओं के स्वचालित इनडोर वायु गुणवत्ता मॉनिटर, विभिन्न औद्योगिक और जैव चिकित्सा अनुप्रयोगों में 555 टाइमर का उपयोग, स्मार्ट ऊर्जा कुशल स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम, स्वचालित संयंत्र जल प्रणाली, चाय बागान के लिए स्मार्ट कृषि प्रणाली का डिजाइन, पासवर्ड आधारित सुरक्षा प्रणाली और बहुत कुछ।
अनूप दास ने कहा, “जिन छात्रों के पास एक ठोस विचार है जो प्रारंभिक अवस्था में है और पर्याप्त सलाह की आवश्यकता है, उनमें बहुत संभावनाएं हैं।” “हम उन छात्रों को अपना समर्थन देंगे जिनके विचार एक उद्यम शुरू कर सकते हैं। मुझे खुशी है कि ऐसी नवोन्मेषी परियोजनाएं उन भावी इंजीनियरों की ओर से आई हैं जो एक उद्यमी बनना चाहते हैं। चूंकि पश्चिम बंगाल सरकार के साथ हमारी साझेदारी है, इसलिए हम इन छात्रों की काफी हद तक मदद कर सकते हैं,” अरिहंत कोठारी ने कहा।
एचआईटीके की एप्लाइड इलेक्ट्रानिक्स और इंस्ट्रीमेंटेंशन इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मधुरिमा चट्टोपाध्याय ने कहा कि “इन छात्रों ने विभिन्न अभिनव परियोजनाएं बनाई हैं जो अब प्रोटोटाइप के चरण में हैं और मुझे खुशी है कि नैसकॉम भविष्य में उद्यमी बनने की इच्छा रखने वालों को सलाह देने के लिए अपनी 10K स्टार्टअप पहल के तहत आगे आया था,”
हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, कोलकाता के सीईओ पी. के. अग्रवाल ने कहा, “भविष्य उन उद्यमियों का है जो समाज में मूल्य जोड़ सकते हैं। भारत अब ऐसे स्टार्टअप बनाने का बीड़ा उठा रहा है जो राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं। विरासत में, हमने संस्थान के साथ स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करने के लिए पहले ही नींव बना ली है। “ऑटोमैटिक हैंड सैनिटाइज़र और फेस डिटेक्शन तकनीक पर मेरे प्रोजेक्ट को नासकॉंम के मेंटर्स ने काफी सराहा था। मुझे यह जानने का व्यावहारिक अनुभव भी मिला कि मेरे प्रोजेक्ट में कहां कमियां हैं जिनमें सुधार की जरूरत है, ”मयूख बनर्जी, बी.टेक- एईईई चौथे वर्ष के छात्र ने कहा।
हाल ही में अमेजन ए आई में प्लेसमेंट पाने वाले कौस्तुभ सरकार ने कहा, “मैंने हाल ही में अमेज़न एआई में 45 लाख प्रति वर्ष के सीटीसी के साथ नौकरी हासिल की है। मैं वर्तमान में एम.टेक-एईआईई के अंतिम वर्ष में अध्ययन कर रहा हूं और संस्थान द्वारा इस तरह की पहल वास्तव में सराहनीय है। भविष्य में मैं एआई में अपना उद्यम शुरू करने की भी योजना बना रहा हूं और यह मंच मुझे अपने उद्यमशीलता कौशल को बढ़ाने का पर्याप्त अवसर देता है। ”

नृत्यक्षेत्र द्वारा नाट्यदर्शन और कृष्ण प्रिया की प्रस्तुति

 कोलकाता । प्रसिद्ध नाट्यकला केंद्र नृत्यक्षेत्र द्वारा गत सोलह जून को ज्ञान मंच सभागार में अपने शिष्यों और वरिष्ठ महान शिष्य कलाकारों के साथ नृत्य का आयोजन किया गया। प्रमुख रूप से ‘नाट्य दर्शन’ और ‘कृष्णप्रिया’ की प्रस्तुति की गई जो विलक्षण नृत्य प्रतिभा को व्यक्त करती है । इस पूरे प्रोडक्शन का श्रेय आचार्य अनुसूया घोष बनर्जी को जाता है जो प्रसिद्ध कोरियोग्राफर हैं।
आचार्य अनुसूया घोष बनर्जी भरतनाट्यम के गुरु पद्मश्री चित्रा विश्वेश्वरन और डॉ पद्मा सुब्रमण्यम की शिष्या हैं। नृत्य में भरतनाट्यम, ओडिसी और कत्थक तीनों शास्त्रीय नृत्यों का प्रयोग रहा । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों को नृत्य की शिक्षा दे रही नृत्यांगना संचयिता मुंशी साहा ने इस नृत्यकला का परिचय दिया उनकी गुरु प्रसिद्ध कोरियोग्राफर अनुसुइया घोष बनर्जी हैं जिनके निर्देशन में इस नृत्य की कोरियोग्राफी की गई। चेन्नई के गुरुकुल से जुड़ी नृत्य गुरु अनुसुइया दिल्ली, गाजियाबाद में खेतान पब्लिक स्कूल में परफार्मिंग आर्ट की कल्चरल हेड हैं और उन्हें आर्ट इनटिग्रिशन और सी लर्निंग से जुड़े कार्यक्रम में महारत हासिल है।
नृत्यांगना अनुसुया घोष बनर्जी ने नृत्य के माध्यम से नाट्यदर्शन में नाट्यकला के माध्यम से जीवन के विभिन्न रूपों को अभिव्यक्ति प्रदान की। नृत्य किस प्रकार हमारे मन, मस्तिष्क और आत्मा से जुड़ा हुआ है, बताया। दर्शन और अध्यात्म के भावों को नृत्य के द्वारा नृत्यक्षेत्र की बीस से अधिक नृत्यांगनाओं द्वारा बेहतरीन प्रस्तुति दी गई ।भारतीय नृत्य जीवन दर्शन और उत्सव का प्रतीकात्मक रूप है। नाटक ब्रह्म से साक्षात्कार कराने का माध्यम तो है ही, साथ ही भारतीय मूल्यों, संस्कृति और संस्कार के निर्माण में सहायक है। युवाओं को अधिक से अधिक शास्त्रीय नृत्य की ओर आकर्षित करने के लिए नृतयक्षेत्र कला संगीत और नृत्य की शिक्षा देने के लिए कृतसंकल्प है।यह नृत्य प्रस्तुति सोलह जून को हुई है। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

चिड़िया से टकराकर हवा में बंद हुआ विमान का इंजन

185 यात्री सवार थे विमान में, करायी गयी इमरजेंसी लैंडिंग, सभी यात्री सुरक्षित
पटना से दिल्ली जा रहा था विमान
पटना ।  बिहार के पटना एयरपोर्ट पर एक बड़ा हादसा होते बचा है। यहां से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले स्पाइस जेट के विमान में अचानक आग लग गयी। आनन-फानन में विमान की एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। बताया जा रहा है कि जिस समय विमान में आग लगी, उसमें 185 यात्री सवार थे। अधिकारियों के मुताबिक, सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, विमान के उड़ान भरते समय इंजन में आग लग गई। मौके पर फायर ब्रिगेड और दमकल की गाड़ियों को बुला लिया गया है। पटना डीएम चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि विमान में आग लगने की सूचना स्थानीय लोगों ने दी थी। इसके बाद विमान को हवाई अड्डे पर वापस बुलाया गया। सभी यात्री सुरक्षित हैं। तकनीकी खराबी के कारण विमान में आग लगी थी। इंजीनियरों की टीम आगे की जांच कर रही है। विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद नागर विमानन महानिदेशालय का बयान सामने आया है। बताया गया कि विमान से एक चिड़िया के टकराने के बाद हवा में एक इंजन बंद हो गया था। इसके बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। सभी यात्री सुरक्षित हैं।
वहीं स्पाइस जेट द्वारा भी इस बारे में विज्ञप्ति जारी की गयी है। विज्ञप्ति के मुताबिक 19 जून 2022 को स्पाइसजेट   B737-800 विमान SG-723 (पटना-दिल्ली) का संचालन कर रहा था। टेकऑफ़ पर, रोटेशन के दौरान, कॉकपिट क्रू ने इंजन #1 पर पक्षी के हिट होने का संदेह किया। एहतियात के तौर पर और एसओपी के अनुसार कैप्टन ने प्रभावित इंजन को बंद कर दिया और पटना लौटने का फैसला किया। विमान पटना में सुरक्षित उतर गया और यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया। उड़ान के बाद के निरीक्षण से पता चला कि बर्ड हिट के साथ 3 पंखे के ब्लेड क्षतिग्रस्त हो गए।

कला संस्कृति अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपना स्थान बना रही है लघुकथा – सिद्धेश्वर

कोलकाता ! ” साहित्य में आज सर्वाधिक लिखी और पढ़ी जा रही विधा बन गई है लघुकथा l लघुकथा सहज रूप से पाठकों को अपनी ओर खींचने में कामयाब रही है l अपने देश में विकसित यह लघुकथा, आज अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपना स्थान बना रही है l हिंदी लघुकथाओं का देश विदेश में अनुवाद हो रहे हैं ! यहां तक कि लघुकथाओं पर अब लघु फिल्में भी बनाई जा रही है ! “
अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था ” रचनाकार ” के तत्वधान में ऑनलाइन आयोजित लघुकथा संगोष्ठी में पढ़ी गई लघुकथााओं पर, समीक्षात्मक टिप्पणी देते हुए, लब्ध प्रतिष्ठित लघुकथाकार सिद्धेश्वर ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि लघुकथा का अंत, जिस्म में सुई चुभोने के जैसा होना चाहिए, और लेखक को अपनी लघुकथा के अंत में कोई टिप्पणी देने से बचना चाहिए, तभी लघुकथा अत्यंत प्रभावकारी होती है ! “
” रचनाकार ” संस्था के संस्थापक एवं संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश चौधरी दादा ने कहा कि – लघुकथा तभी अपने आप में सार्थक होती है, जब उसमें कसाव हो, और उसमें एक शब्द भी अनावश्यक उपयोग नहीं किया जाए ! सिद्धेश्वर जी की इस बात से मैं सहमत हूं कि आज अधिकांश लघुकथाएं ‘ कालदोष ‘ से ग्रसित है, इससे नए रचनाकारों को बचना चाहिए ! हमने इसी उद्देश्य से ” रचनाकार,” संस्था के माध्यम से हर महीने लघुकथा आलोचना संगोष्ठी की शुरुआत की है , ताकि युवा लघुकथाकारों को दिशा निर्देश मिलें, और एक साथ मिलकर हम लघुकथा को और बेहतर बना सकें, लघुकथा की समृद्धि में अपना योगदान दें सके !
लघुकथा लेखिका कोलकाता की लघुकथा लेखिका विद्या भंडारी के सशक्त संचालन में देश भर से चुने हुए सात लघुकथाकारों ने अपनी लघुकथाओं का पाठ किया, और प्रत्येक लघुकथा पाठ के बाद, सिद्धेश्वर एवं सुरेश चौधरी दादा ने त्वरित समीक्षा प्रस्तुत किया l इस यादगार संगोष्ठी में बेंगलुरु की स्वीटी सिंघल ने ‘बोझ ‘, पीलीभीत के विजेंद्र जैमिनी ने ‘सवेरा’, कानपुर की अन्नपूर्णा बाजपेई ने ‘फैशन’, आसाम की कुमुद शर्मा ने ‘ शादी के बाद ‘, पटना के सिद्धेश्वर ने ‘ अंतर’, अहमदाबाद की डॉ ऋचा शर्मा ‘सिहरन ‘ और कोलकाता की विद्या भंडारी ने ‘एहसास ‘ लघुकथाओं का पाठ किया l निश्चित तौर पर , ऑनलाइन या ऑफलाइन, इस तरह का आयोजन, लघुकथाओं पर केंद्रित होनी ही चाहिए !

भवानीपुर कॉलेज और सुलेखा इंक फैक्ट्री ने प्रस्तुत किया स्वराज इंक

कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज और सुलेखा वर्क लिमिटेड, सुलेखा पार्क के संयुक्त तत्वावधान में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जादवपुर कोलकाता में स्थित सुलेखा फैक्ट्री के प्रांगण में हुए इस कार्यक्रम में भवानीपुर कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह, कोऑर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, छपते छपते हिंदी दैनिक कोलकाता के प्रधान संपादक और ताजा टीवी के डायरेक्टर विश्वंभर नेवर, आनंदबाजार पत्रिका के प्रधान संपादक सुपर्ण पाठक विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सुलेखा स्याही के मालिक कौशिक मोइत्रा द्वारा नयी निर्मित स्वराज इंक प्रस्तुत किया गया। वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर ने सुलेखा स्याही के विषय पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि सुलेखा स्याही पुराने दिनों की याद ताजा करती है। वर्तमान में फाउन्टेन पेन ने बॉल पेन का स्थान ले लिया है। सुलेखा इंक वैसा ही परिचित नाम है जैसे बाटा, डनलप आदि। आज सौ वर्षों के बाद भी सुलेखा स्याही की पहचान है।
आनंद बाजार पत्रिका के संपादक सुपर्ण पाठक ने कहा कि आज भी सुलेखा कई लोगों की पसंदीदा स्याही है। उनके पॉकेट में अभी भी फाउंटेन पेन रहता है। सुलेखा फैक्ट्री के मालिक कौशिक मोइत्रा ने बताया कि सुलेखा स्याही उनके दादा चलाते थे आज उन्हीं की इच्छा को पूरा करने के लिए सुलेखा स्याही की फैक्ट्री को पुनर्जीवित किया गया है। गांधीजी के सिद्धांत सुलेखा स्याही से जुड़े हुए हैं जो स्वराज और स्वाधीनता और देशप्रेम से जुड़े हैं। गांधी जी के सिद्धांत से अनुप्रेरित होकर खादी और ग्राम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मोइत्रा ने सुलेखा स्याही का उत्पादन शुरू किया है। 25 से अधिक स्त्रियों को रोजगार उपलब्ध कराया है। साथ ही, फैक्ट्री में सोलर पावर प्लांट से बिजली व्यवस्था की गई है जो पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त करने का महत्वपूर्ण कदम है। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने स्याही और फाउंटेन पेन से जुड़े बचपन के अनुभवों को साझा किया। इस अवसर पर डॉ वसुंधरा मिश्र ने ‘युद्ध और शांति’ कविता सुनाई। चॉम सर शुभव्रत गांगुली , ज्योत्स्ना अगिवाल, अहाना मोइत्रा द्वारा संयोजित यह कार्यक्रम पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है । चॉम सर ने सुलेखा अकादमी के द्वारा कोलकाता के स्कूलों के बच्चों को लेकर सुलेख प्रतियोगिता भी कराने का प्रस्ताव दिया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ को “हरिचाँद ठाकुर-गुरुचाँद ठाकुर सम्मान”

कोलकाता । महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता के पूर्व प्रभारी एवं लेखक-विचारक डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ को ‘‘हरिचाँद ठाकुर-गुरुचाँद ठाकुर सम्मान’’ से सम्मानित किया गया है। हावड़ा स्थित रामगोपाल मंच सभागार में मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ (मक्कम) की प. बंगाल ईकाई, बाबासाहेब डॉ. बी.आर.अम्बेडकर मिशन, हुगली, भारतीय दलित साहित्यकार मंच (प.बं.) तथा पश्चिम बंगाल सफाई कर्मचारी एकता संघ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक भव्य अभिनंदन समारोह में डॉ सुनील को यह सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन लेखक व कवि रामजीत राम ने किया। इस अवसर पर उपस्थित भंते रखित श्रमण, समाजसेवी शारदा प्रसाद, वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘पैरोकार’ पत्रिका के संपादक अनवर हुसैन, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के राजभाषा अधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार यादव, महाराजा श्रीश चंद्र कालेज के राजनीति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ.  प्रेम बहादुर मांझी, सहायक प्रोफ़ेसर एवं आलोचक डॉ. कार्तिक चौधरी, आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग के मीडिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. ललित कुमार, मक्कम के राज्य सचिव एवं शिक्षक-एक्टिविस्ट विनोद कुमार राम, कोषाध्यक्ष शशिकांत प्रसाद, मूलनिवासी संघ के अध्यक्ष विष्णु पाल, रामचंद राम, रामवचन यादव, राजेश कुशवाहा तथा शंकर सिंह आदि गणमान्य वक्ताओं ने डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’ ने आयोजकों का धन्यवाद देते हुए कहा कि बंगाल के दो महापुरुषों के नाम पर स्थापित इस अमूल्य सम्मान को हासिल करना मेरे लिए बहुत ही गौरव की बात है। इससे मेरी सामाजिक ज़िम्मेदारी और बढ़ गयी है। इस आयोजन को सफल बनाने में अम्बेडकर मिशन (प.बं.) के अध्यक्ष ई. वीरा. राजू, धर्मराज राम एवं गौतम पासवान आदि ने भी सहयोग किया।