Thursday, April 2, 2026
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यूपी बोर्ड परीक्षा 2022: माता-पिता के बाद दादा ने चाय बेचकर पाला, पोता जिले में अव्वल

पंकज मिश्रा, हमीरपुर ।  उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक छोटे से गांव के एक गरीब छात्र ने हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में हमीरपुर टॉप कर अपने दादा-दादी का नाम रोशन किया है। माता-पिता के निधन के बाद इसे बूढ़े दादा और दादी ने न सिर्फ परवरिश की, बल्कि चाय और गुटखा पान मसाला की दुकान चलाकर इसे बड़ा अफसर बनाने के लिए पढ़ा भी रहे हैं। पोते की कामयाबी से बूढ़े दादा और दादी का आंखें खुशी से भर आई हैं।
हमीरपुर जिले के ललपुरा थाना क्षेत्र के पौथियां गांव पूर्व मंत्री शिवचरण प्रजापति का पैतृक गांव है। यहां गरीब परिवार के उज्ज्वल गुप्ता ने गरीबी का दंश झेलते हुए आज समूचे क्षेत्र में कामयाबी का परचम फहराया है। माता-पिता के निधन के बाद उज्ज्वल और इसकी छोटी बहन श्रृद्धा की परवरिश करने से सभी रिश्तेदार एक-एक कर दूर हो गए थे, लेकिन इन दोनों अनाथ बच्चों को बूढ़े दादा और दादी ने सीने से लगाकर पालन पोषण किया। गांव में एसबी इण्टर कॉलेज में पढ़ने वाले उज्ज्वल गुप्ता ने हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा के तैयारी के लिए रोजाना दस घंटे तक पढ़ाई की है।
आज उसने हमीरपुर जिले में बोर्ड परीक्षा में टॉप किया तो उसके बूढ़े दादा और दादी के आंखें खुशी से भर आई है। उसने 94.17 फीसदी अंक हासिल किए हैं। इस कामयाबी पर बूढ़े दादा ने पोते को अपनी दुकान में ही खुशी से मुंह मीठा कराकर प्यार जताया तो पड़ोसी लोग भी द्रवित हो गए। उज्ज्वल गुप्ता ने बताया कि बीटेक करने के बाद इंजीनियर बनकर देश की सेवा करने का सपना है, जिसे साकार करने के लिए अब पढ़ाई के घंटे बढ़ाएंगे जाएंगे। उसने कहा कि यह मेरा जीवन दादा और दादी के लिए है, जिन्होंने आर्थिक तंगी के बीच हमें और छोटी बहन के लिए सहारा बने हैं। बहन भी कक्षा आठवीं में पढ़ती हैं।
माता-पिता के निधन होने से भाई बहन हुए थे अनाथ
उज्ज्वल गुप्ता के पिता रामचन्द्र गुप्ता उर्फ गरीबा कैंसर की बीमारी से 6 मई 2010 को मौत हो गई थी। वहीं, मां रामा की भी 21 नवम्बर 2013 को मौत हो गई थी। बचपन में माता-पिता का सिर से हाथ उठने के बाद उज्ज्वल व श्रृद्धा अनाथ हो गए थे। इन दोनों बच्चों को दादा तारा चन्द्र गुप्ता व दादी रामलली ने सीने से लगाते हुए पालन पोषण किया। दादा गांव में ही चाय और गुटखा पान मसाला की दुकान किए हैं। इस दुकान से पूरे घर का जैसे तैसे गुजारा होता है। इसके अलावा बूढ़ी दादी भी दुकान में समोसे बनाती हैं।

बच्चों का भविष्य बनाने को दादी बेचती हैं समोसे
उज्ज्वल के दादा जहां चाय पान मसाला और गुटखा की दुकान चलाते है तो वहीं दादी रामलली दुकान में समोसे बनाती हैं। यह पोते उज्ज्वल और श्रद्धा का भविष्य बनाने के लिए गांव में समोसे भी बेचती हैं। दादा ने बताया कि बच्चों की परवरिश के साथ उन्हें बड़ा अफसर बनाने के लिए ऐसी उम्र में भी दुकान चलानी पड़ रही है, ताकि दोनों का कल संवर जाए। बताया कि उज्ज्वल को पढ़ाई में कोई कमी न रह जाए, इसके लिए पोते को गांव में संचालित एक कोचिंग पढ़ने को भेजा गया। जहां टीचर अच्छे लाल ने बोर्ड की तैयारी में मदद की।

जानिए क्या होती है वो ओवरवेट लैंडिंग, जिससे कैप्टन मोनिका खन्ना ने बचायीं सैकड़ों जानें

स्पाइसजेट की फ्लाइट के एक इंजन में आग लगने की घटना को आपने अपनी आंखों से भी देखा होगा। जिस तरह से स्पाइसजेट की फ्लाइट के एक इंजन में आग लगी उससे एक ऐसा हादसा हो सकता था जो काफी भयावह होता। लेकिन पायलट मोनिका खन्ना की समझदारी और धैर्य से लिए गए फैसले ने 185 यात्रियों की जान बचा ली। मोनिका खन्ना ने पटना एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट की फ्लाइट SG-723 की ओवरवेट लैंडिंग कराई। आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये ओवरवेट लैंडिंग होती क्या है। तो जानिए यहां…
क्या होती है ओवरवेट लैंडिंग
ओवरवेट लैंडिंग को आप एक तरीका या फिर एक विशेष पैटर्न दोनों ही रूप में परिभाषित कर सकते हैं। आइए आपको सिर्फ एक पॉइंट में समझाते हैं कि आखिर एक हवाई जहाज की ओवरवेट लैंडिंग होती क्या है…
जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि ओवरवेट लैंडिंग यानि तय वजन से ज्यादा वजन की लैंडिंग- यूं समझिए कि जब कोई हवाई जहाज एयरपोर्ट से टेकऑफ करता है कि तो उसके फ्यूल टैंक में काफी ईंधन यानि वजन होता है। लेकिन अपनी तय जगह पर पहुंचने के दौरान वो ईंधन खत्म होता है और लैंडिंग के वक्त फ्लाइट का वजह टेक ऑफ के मुकाबले कम हो जाता है।
इसे कहते हैं ओवरवेट लैंडिंग
ऐसे में अगर फ्लाइट उड़ती है और फौरन ही उसे टेक ऑफ वाली जगह पर लौटाकर लैंड कराना होता है (जैसा कि रविवार को पटना में स्पाइस जेट की फ्लाइट के साथ हुआ) तो जहाज का वजन करीब-करीब टेकऑफ के वक्त जितना ही होता है। ऐसे में पायलट को ये तय करना होता है कि फ्यूल को किसी तरीके से कम करके जहाज का वजन कम करके लैंड कराया जाए, या फिर उसी वजन के साथ। क्योंकि ज्यादा वजन के जहाज को टेकऑफ कराना आसान होता है लेकिन लैंडिंग कराना थोड़ा मुश्किल। इसी को ओवर वेट लैंडिंग कहते हैं।
बर्ड हिट में क्या होता है, सिर्फ एक पक्षी कितना खतरनाक
कई बार आपके दिमाग में ये सवाल आता होगा कि सिर्फ एक पक्षी इतना खतरनाक हो सकता है क्या जो प्लेन को खतरे में डाल दे? जवाब है बिल्कुल, स्पाइसजेट के जहाज से भी रविवार को पटना में एक पक्षी के टकराने का शक है, और माना जा रहा है कि पक्षी एक तरफ के इंजन में अंदर आ गया जिसकी वजह से वहां आग लग गई। हालांकि कई बार बर्ड हिट से प्लेन को काफी नुकसान नहीं भी होता है।

सरकारी कर्मचारियों की फिजूल खर्ची रोकने के लिए वित्त मंत्रालय की सख्ती

नयी दिल्ली।  गैर-जरूरी खर्च में कटौती करने की कवायद के तहत वित्त मंत्रालय ने सरकारी कर्मचारियों से कहा है कि वे जिस यात्रा श्रेणी के हकदार हैं, उसमें उन्हें ‘‘सबसे सस्ता किराया’’ चुनना चाहिए और दौरों तथा एलटीसी के लिए अपनी हवाई यात्रा की तारीख से कम से कम तीन हफ्ते पहले टिकट बुक करना चाहिए। व्यय विभाग की ओर से जारी कार्यालय पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों को यात्रा के प्रत्येक चरण के लिए केवल एक ही टिकट बुक करना चाहिए और यात्रा कार्यक्रम को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया जारी रहने के दौरान भी बुकिंग की जा सकती है लेकिन ‘बेवजह टिकट रद्द’ करने से बचना चाहिए।
सरकारी कर्मचारी वर्तमान में सिर्फ तीन अधिकृत यात्रा एजेंटों से ही हवाई टिकट खरीद सकते हैं जिनमें बॉमर लॉरी एंड कंपनी, अशोक ट्रैवल एंड टूर्स और आईआरसीटीसी शामिल हैं।सरकारी खर्च पर हवाई टिकट की बुकिंग से संबंधित नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक यात्रा के 72 घंटे से भी कम समय के भीतर बुकिंग करने, यात्रा के 24 घंटे से भी कम समय में टिकट रद्द करने पर कर्मचारी को स्व-घोषित स्पष्टीकरण देना होगा।
इसमें कहा गया है, ‘‘कर्मचारियों को अपनी यात्रा श्रेणी में उपलब्ध सबसे सस्ती उड़ानें चुननी चाहिए।’’निर्देशों के मुताबिक किसी भी एक यात्रा के लिए सभी कर्मचारियों के टिकट एक ही यात्रा एजेंट के जरिए बुक करने चाहिए और इन बुकिंग एजेंट को किसी तरह का शुल्क अदा नहीं किया जाना चाहिए।इसमें कहा गया,‘‘कर्मचारियों को यात्रा से कम से कम 21 दिन पहले टिकट बुक करने चाहिए और सबसे प्रतिस्पर्धी किराये को चुनना चाहिए जिससे कि सरकारी खजाने पर कम से कम भार पड़े।’’

5जी नीलामी को मंत्रिमंडल की मंजूरी, जुलाई अंत में 72 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बिक्री को रखेगी सरकार

नयी दिल्ली ।  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में 5जी दूरसंचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी को मंजूरी दे दी है। स्पेक्ट्रम नीलामी 26 जुलाई, 2022 को शुरू होगी। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा अपने खुद के इस्तेमाल (कैप्टिव) के लिए 5जी नेटवर्क की स्थापना को भी मंजूरी दी है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 72 गीगाहर्ट्ज से अधिक के स्पेक्ट्रम की नीलामी जुलाई माह के अंत तक होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 14 जून को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि मंत्रिमंडल ने 5जी की नीलामी आरक्षित मूल्य पर करने की मंजूरी दी है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने स्पेक्ट्रम मूल्य के बारे में सिफारिशें दी थीं।

ट्राई ने मोबाइल सेवाओं के लिए 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी को आरक्षित मूल्य में करीब 39 प्रतिशत की कटौती का सुझाव दिया था।

5जी स्पेक्ट्रम के नौ फ्रीक्वेंसी बैंड भारती एयरटेल और रिलायंस जियो जैसी दूरसंचार कंपनियों के बीच नीलाम किए जाएंगे। दूरसंचार विभाग के बोली और आवेदन आमंत्रित करने से संबंधित दस्तावेज में कहा गया है कि बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को फिलहाल अपने ‘निजी गैर-सार्वजनिक नेटवर्क’ के लिए 5जी स्पेक्ट्रम को दूरसंचार कंपनियों से किराये पर लेने की इजाजत होगी।

गूगल जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां मशीन से मशीन संचार, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और कृत्रिम मेधा (एआई) जैसे एप्लिकेशन के लिए स्पेक्ट्रम के सीधे आवंटन की मांग करती आ रही हैं जबकि दूरसंचार कंपनियां इसके विरोध में हैं और उनका कहा है कि 5जी स्पेक्ट्रम का सीधा आवंटन स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बिगाड़ेगा और इससे सरकारी खजाने को राजस्व का भी नुकसान होगा।

इस दस्तावेज के मुताबिक, नीलामी 26 जुलाई 2022 से शुरू होगी। सरकार 20 वर्ष की वैधता वाले कुल 72,097.85 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी करेगी। इसके अलावा विभिन्न निम्न, मध्यम और उच्च फ्रीक्वेंसी बैंड के लिए भी स्पेक्ट्रम की नीलामी की जाएगी।

आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्पेक्ट्रम नीलामी का दूरसंचार विभाग का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है। इसके तहत जनता और उद्यमों को 5जी सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए सफल बोलीदाताओं को स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा।’’

दूरसंचार क्षेत्र में सुधारों को गति देते हुए मंत्रिमंडल ने स्पेक्ट्रम नीलामी से संबंधित कई विकासशील विकल्पों की भी घोषणा की है जो कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देंगे।

इसमें कहा गया, ‘‘सफल बोलीदाताओं को अग्रिम भुगतान करने की कोई अनिवार्यता नहीं होगी। ऐसा पहली बार किया जा रहा है। स्पेक्ट्रम के लिए भुगतान 20 बराबर सालाना किस्तों में किया जा सकेगा और ये अग्रिम किस्तें प्रत्येक वर्ष की शुरुआत में देनी होंगी।’’

इसके अलावा बोलीदाताओं को 10 वर्ष के बाद स्पेक्ट्रम वापस करने का विकल्प भी दिया जाएगा बशर्ते उनका कोई बकाया न हो। इस नीलामी में अधिग्रहीत स्पेक्ट्रम के लिए स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) भी नहीं लिया जाएगा।

फिडे उपाध्यक्ष बनने पर शतरंज के लोकप्रियता ग्राफ को और ऊपर ले जाना चाहूंगा : आनंद

(मोना पार्थसारथी)
नयी दिल्ली । उम्र के पांचवें दशक को पार कर चुके पांच बार के विश्व चैम्पियन विश्वनाथन आनंद का इरादा फिलहाल शतरंज को अलविदा कहने का नहीं है लेकिन खेल प्रशासक के तौर पर नयी पारी के जरिये वह खेल की लोकप्रियता का ग्राफ ऊपर ले जाने के लिये काम करेंगे । आनंद ने भाषा को दिये विशेष इंटरव्यू में कहा ,‘‘ पिछले कुछ साल में शतरंज ने काफी प्रगति की है खासकर कोरोना महामारी के दौर में लोग काफी शतरंज खेलने लगे । डिजिटिल, आनलाइन, इंटरनेट पर शतरंज का चलन बढा जिसे मैं आगे बढाना चाहूंगा ।’’
जुलाई अगस्त में महाबलीपुरम में होने वाले 44वें शतरंज ओलंपियाड के दौरान होने वाले चुनाव में अगर निवतृमान अध्यक्ष अर्काडी वोरकोविच फिर चुने जाते हैं तो आनंद अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) के उपाध्यक्ष होंगे । वोरकोविच ने अपनी टीम में आनंद को इस पद के लिये नामित किया है ।
आनंद ने कहा ,‘‘ मैं युवाओं के मामले में भारत को ध्यान में रखकर प्रयास करूंगा । कोशिश करूंगा कि ज्यादा से ज्यादा युवा खिलाड़ी आगे आयें और उनको पूरा सहयोग मिल सके । मैं अपना नजरिया और सुझाव रखूंगा ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ फिडे उपाध्यक्ष पद के लिये मुझसे मार्च में पूछा गया तो मुझे यह दिलचस्प अवसर लगा । अब मैं काफी कम टूर्नामेंट खेल रहा हूं और अपनी अकादमी पर भी फोकस है लेकिन यह एक नयी चुनौती है और मैं सीखने की कोशिश करूंगा । अब मैं वैसे भी चुनिंदा टूर्नामेंट खेल रहा हूं मसलन शतरंज ओलंपियाड नहीं खेल रहा तो इस नयी चुनौती के लिये मैं तैयार हूं ।’’ उन्होंनें हालांकि संन्यास की संभावना से इनकार करते हुए कहा ,‘‘ मेरा खेल को अलविदा कहने का कोई इरादा नहीं है । उम्मीद है कि फिडे उपाध्यक्ष बनने के बाद भी खेलना जारी रखूंगा।’’
1987 में भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बने आनंद से उनकी विरासत के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा ,‘‘ मैं इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचता । मैं उम्मीद करता हूं कि मैने खेल को बहुत कुछ वापिस दिया । इसे आगे ले जाने में मदद की और इसमें लोगों का ध्यान खींचा । यह सुनिश्चित किया कि भारत की सशक्त उपस्थिति विश्व शतरंज के मानचित्र पर हो ।’’
इतने वर्ष में शतरंज में भारत ने लंबा सफर तय किया है और हाल ही में राहुल श्रीवास्तव देश के 74वें ग्रैंडमास्टर बने । भारत के सफर के बारे में पूछने पर आनंद ने कहा ,‘‘ पहली बात मानसिक बाधा होती है कि क्या हम ग्रैंडमास्टर बन सकते हैं लेकिन जब एक खिलाड़ी बन जाता है तो दूसरों के लिये राह आसान हो जाती है । लंबे समय तक चुनिंदा ग्रैंडमास्टर ही भारत को मिले लेकिन पिछले कुछ समय से संख्या बढी है जो अच्छी बात है ।’
उन्होंने कहा ,‘‘ जब मैने कास्पोरोव के खिलाफ विश्व चैम्पियनशिप मैच खेला तो भारत के अधिकांश मौजूदा ग्रैंडमास्टर पैदा भी नहीं हुए थे । नये और युवा ग्रैंडमास्टर आ रहे हैं और अब सहयोगी स्टाफ भी अच्छा है । पूर्व ग्रैंडमास्टर उन्हें सिखा रहे हैं और महासंघ का भी पूरा सहयोग है ।’’
भारत में पहली बार 28 जुलाई से महाबलीपुरम में होने जा रहे शतरंज ओलंपियाड को देश में खेल को लोकप्रिय बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताते हुए उन्होंने कहा ,‘‘यह सबसे बड़ा शतरंज टूर्नामेंट है । अधिकांश टूर्नामेंटों में 10 , 20 या अधिकतम 50 खिलाड़ी होते हैं लेकिन यहां 2000 के करीब खिलाड़ी होंगे तो इसकी तुलना ही नहीं हो सकती ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ इसका बड़ा प्रभाव होगा क्योंकि इसमें इतने सारे खिलाड़ियों को खेलते देखना शतरंजप्रेमियों को लंबे समय तक याद रहेगा । इसके साथ ही इसकी व्यापक कवरेज होगी और तीन सप्ताह तक शतरंज के खबरों में बने रहने भी खेल की लोकप्रियता ग्राफ को ऊपर ले जायेगा । आने वाले समय में लोग इसकी मिसाल देंगे ।’’
आनंद इस बार बतौर मेंटोर भारतीय टीम के साथ हैं और भारत की संभावना के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा ,‘‘ मेरी सोच ऐसी है कि अगर मैं खिताब के लिये फेवरिट भी हूं तो भी मुझे बड़बोलापन पसंद नहीं । अपने खेल पर फोकस करने पर जोर रहता हूं । पदक और जीत के बारे में लोग बात कर सकते हैं लेकिन खिलाड़ी को अच्छा खेलने पर ही ध्यान देना चाहिये ।’’

अग्निवीरों के लिए कॉरपोरेट क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं: महिंद्रा

नयी दिल्ली । महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने केंद्र की अग्निपथ योजना के विरोध में हुई हिंसा पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि महिंद्रा समूह इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित, सक्षम और युवा अग्निवीरों का अपने यहां भर्ती के लिए स्वागत करेगा। उन्होंने रक्षा सेवाओं में चार साल के कार्यकाल के लिए 17.5 साल से 23 साल तक के युवाओं की भर्ती योजना पर कहा कि इन अग्निवीरों के लिए कॉरपोरेट क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं।
महिंद्रा ने ट्वीट किया, ‘‘अग्निपथ कार्यक्रम के विरोध में हुई हिंसा से दुखी हूं। जबपिछले साल इस योजना पर विचार किया गया था, तो मैंने कहा था और उस बात को मैं दोहराता हूं- अग्निवीरों का अनुशासन और कौशल उन्हें रोजगार के योग्य बना देगा।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘महिंद्रा समूह ऐसे प्रशिक्षित, सक्षम युवाओं की भर्ती के अवसर का स्वागत करता है।’’
एक ट्विटर उपयोगकर्ता ने उनसे पूछा कि महिंद्रा समूह इन अग्निवीरों को कौन सा पद देगा, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘‘कॉरपोरेट क्षेत्र में अग्निवीरों के लिए रोजगार की बड़ी संभावनाएं हैं। नेतृत्व, टीम वर्क और शारीरिक प्रशिक्षण के साथ ये अग्निवीर उद्योग को बाजार के लिए तैयार पेशेवर समाधान देते हैं। ये समाधान परिचालन से लेकर प्रशासन और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन तक विस्तृत हैं।’’

एनआईपीएफपी की नई निदेशक बनी आर कविता राव

नयी दिल्ली । जानी मानी अर्थशास्त्री आर कविता राव को राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) में पांच साल के कार्यकाल के लिए निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। राव, प्रख्यात अर्थशास्त्री पिनाकी चक्रवर्ती की जगह नियुक्त की गई हैं। एनआईपीएफपी ने एक ट्वीट में कहा, “हमने प्रोफेसर आर कविता राव को 20 जून, 2022 से शुरू होने वाले पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के निदेशक के रूप में नियुक्त किया है।”

योग के जनक महर्षि पतंजलि को माना जाता है शेषनाग का अवतार

योग भारत की ही देन है जो आज संपूर्ण विश्व में फैला हुआ है। इस बात को पूरी दुनिया मान चुकी है। वैसे तो भगवान शिव को आदियोगी कहा जाता है यानी महादेव से ही योग की उत्पत्ति हुई है, लेकिन वर्तमान में योग को बुलंदियों पर पहुंचाने में इसके महर्षि पतंजलि का महत्वपूर्ण योगदान है। महर्षि पतंजलि को आधुनिक योग का जनक भी कहा जाता है। पिछले कुछ समय में महर्षि पतंजलि के बारे में काफी शोध हुए हैं, उसी के आधार पर उनके जन्म का स्थान भी निश्चित किया गया है। जानिए महर्षि पतंजलि से जुड़ी खास बातें.

1. पुरातत्व की जानकारी रखने वाले नारायण व्यास के अनुसार, करीब 200 ईसा पूर्व यानी करीब दो हजार साल से भी पहले महर्षि पतंजलि का जन्म गोंदरमऊ नामक स्थान पर हुआ था। इस बात की पुष्टि पतंजलि द्वारा लिखे गए महाभाष्य से की जा सकती है। कुछ समय यहां करने के बाद यहां पतंजलि बिहार के मगध इलाके में चले गए थे।

2. महर्षि पतंजलि पर शोध करने वाले मप्र पुलिस के पूर्व डीजी सुभाष चंद्र त्रिपाठी की मानें तो पतंजलि का जन्म स्थान जिस गांव यानी गोंदरमऊ में हुआ था वो कौशांबी (वर्तमान में उत्तर प्रदेश का एक प्राचीन शहर) से उज्जैन (मध्य प्रदेश का एक प्राचीन शहर) के बीच किसी मार्ग पर स्थित था।

3. इस मार्ग पर साधु-संतों का आना-जाना काफी होता था। इस रास्ते पर आने-जाने वाले साधु-संतों से ही महर्षि पतंजलि को मार्गदर्शन मिला था। महाभाष्य के अलावा किसी और ग्रंथ में पतंजलि और गोंदरमऊ के बारे में जानकारी नहीं है।

4. गोंदरमऊ गांव में ही महर्षि पतंजलि का एक आश्रम भी था। यहीं उन्होंने संसार के पहले योग ग्रंथ अष्टांग योग की रचना की यानी इसके पहले योग पर कोई भी दस्तावेज लिखित रूप में नहीं था। इस ग्रंथ में योग के बारे में काफी विस्तार पूर्वक बताया गया है।

5. महर्षि पतंजलि का नाम आने पर अक्सर पाणिनी का भी जिक्र होता है। कुछ विद्वानों के अनुसार पतंजलि ने काशी में पाणिनी से शिक्षा ली थी और बाद में उनके शिष्य की तरह काफी काम भी किए। भारतीय साहित्य में महर्षि पतंजलि द्वारा लिखे गए 3 ग्रंथ मिलते हैं। योगसूत्र, अष्टाध्यायी पर भाष्य और आयुर्वेद पर ग्रन्थ। हालांकि इन रचनाओं को लेकर भी अलग-अलग मत है। कुछ लोग इसे अलग-अलग विद्वानों द्वारा लिखे ग्रंथ मानते हैं।

6. महर्षि पतंजलि को शेषनाग का अवतार भी माना जाता है। इसलिए कुछ चित्रों में इनका स्वरूप शेषनाग से मिलता-जुलता पाया जाता है। हालांकि ये सिर्फ मान्यता है इस तथ्य का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता। महर्षि पतंजलि को संत पणिनी का शिष्य भी बताया जाता है।

7. अष्टाध्यायी पर टीका पतंजलि की अकेली उपलब्धि नहीं, बल्कि सबसे ज्यादा इन्हें योग के लिए जाना जाता है। उन्होंने योग सूत्र लिखा, जिसमें कुल 196 योग मुद्राओं को सहेजा गया है। बता दें कि पतंजलि से पहले भी योग था लेकिन उन्होंने इसे धर्म और अंधविश्वास से बाहर निकाला और एक जगह जमा किया ताकि जानकारों की मदद से आम लोगों तक पहुंच सके। योग को ध्यान के साथ भी जोड़ा ताकि शरीर के साथ मानसिक ताकत भी बढ़े।

स्वास्थ्य और त्वचा के लिए फायदेमंद है योग

जानिए शहनाज हुसैन के हेल्थ टिप्स

यदि आप अपने शरीर को डिटॉक्सीफाई करना चाहते हैं , अपनी माँस पेशियों को मजबूत बनाना चाहते हैं तथा जिन्दगी के रोजमर्रा के तनाव से मुक्ति चाहते है तो आप केवल योग और प्राणायाम कीजिये। योग से चेहरे पर असली आभा का निखार आता है और आपकी रंगत भी निखार आती है तथा आपका चेहरा के कारण आपका व्यक्तित्व बहुत ही आकर्षक और मनमोहक दिखता हैं।

रोज सुबह प्राणायाम , अनुलोम विलोम ,शीर्षाशन ,मत्स्य आसान से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं, जिससे शरीर की पाचन प्रणाली सामान्य हो जाती है और रक्त का बहाव सही हो जाता है जिसके परिणाम स्वरुप त्वचा में खिंचाव आता है और झुर्रियां हट जाती हैं। आप सुन्दर और स्वस्थ दिखने लगते हैं ।

योग आसनों से आप गहरी नींद पा सकते हैं, कोर्टिसोल स्तर कम हो जाता है, कोलेजन में वृद्धि होती है जिससे आपकी स्वास प्रणाली मजबूत होती है, आपके जोड़ों को चिकनाहट मिलती है, आपकी मांस पेशियाँ मजबूत होती हैं। योग में सांस लेने बाली क्रियायों तथा शरीर के विभिन्न आसनों से हार्मोन्स सन्तुलित होते हैं तथा आंतड़ियों में जमा गन्दगी बाहर आ जाती है। जिससे आप हल्का और स्वस्थ महसूस करते हैं। इसे आंतरिक सौन्दर्य का नाम दिया जाता है।

शायद आप यह जानकर भी हैरान होंगे कि कोरोना से लड़ाई जीतने में योग महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। वैज्ञानिक शोधों से पता चलता है की अगर आप लगातार योग करते हैं तो आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जो कि कोरोना से जंग में अहम भूमिका अदा कर सकती है तथा आपके स्वास्थ्य ,सेहत और तंदरुस्ती को बढ़ाता है। योग से प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ावा निश्चित माना जाता है। इसके लगातार अभ्यास से सेहत , सौन्दर्य और प्रतिरोधक क्षमता को बल मिलता है।

अगर आप शारीरिक रूप से सुन्दर हैं तो आपका सौन्दर्य चेहरे पर स्वभाविक रूप से झलकेगा। कुछ योग आसनों के नियमित अभ्यास से आप प्राकृतिक सुन्दरता , दमकती त्वचा तथा शारीरिक आकर्षण ग्रहण कर सकते है। वास्तव में अगर आप योग साधना को अपने जीवन से जोड़ लें तो शरीर को स्वस्थ रखने के साथ ही प्राकृतिक तौर पर स्थाई रूप से सुन्दर तथा प्रभावशाली भी बनाया जा सकता है तथा महंगे सौन्दर्य प्रसाधनों ,ब्यूटी सैलूनों के महंगे उपचार तथा समय को बचाया जा सकता है।

भारतीय आयुर्वेदिक पद्धति योग के साधारण आसनों के जरिए आप स्थाई आन्तरिक तथा बाहरी सौन्दर्य से मुफ्त में हीआसानी से पा सकते है। प्रतिदिन महज आध घण्टा सुबह तथा शाम सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, उत्थान आसन, कपालभाति, धनुरासन तथा सांसो की क्रिया के माध्यम से आप अपने यौवन, सौन्दर्य तथा प्राकृतिक आकर्षण को जीवनभर बनाऐ रख सकते है।

बालों तथा त्वचा के लिए फायदेमंद प्राणायाम

प्राणायाम से जहां तनाव कम होता है वहीं दूसरी ओर शरीर में प्राण वायु का प्रभावी संचार होता है तथा रक्त का प्रभाव बढ़ता है। प्राणायाम सही तरीके से सांस लेने की बेहतरीन अदा है। प्रतिदिन 10 मिनट तक प्राणायाम से मानव शरीर की प्राकृतिक क्लीजिंग हो जाती है।

प्राणायम के फायदे

प्राणायाम का आज पूरे विश्व में अनुसरण किया जाता है। प्राणायाम से मानव खोपड़ी में व्यापक आक्सीजन तथा रक्त संचार होता है। जिससे बालों की प्राकृतिक रूप से वृद्वि होती है तथा बालों का सफेद होना तथा झड़ने जैसी समस्या को रोकने में भी मदद मिलती है। योगा का मानसिक शारीरिक, भावनात्मक तथा मनोभाव पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है। योगा से आप आत्मिक तौर पर शान्त महसूस करते हैं। जिससे आपके बाहरी सौन्दर्य में भी निखार आता है।

आमतौर पर अनिद्रा, तनाव आदि में पैदा होने वाली कील, मुहांसे, काले धब्बों आदि की समस्याओं के स्थाई उपचार में योग महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। उत्थान आसन के लगातार उपयोग से आप कील, मुंहासे, काले धब्बों आदि की समस्याओं का स्थाई उपचार पा सकते है। कपालभाति से शरीर में कार्बन डाईक्साईड को हटाकर खून को साफ करने में मदद मिलती है। उससे शरीर में हल्कापन महसूस होता है।

धनुरासन करने के फायदे

धनुरासन से शरीर में रक्त का प्रभाव बढ़ता है तथा शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है इससे शरीर की त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है तथा त्वचा की रंगत में निखार भी आता है।योग के लगातार अभ्यास से त्वचा तथा शरीर में यौवन को दीर्घ कालीन तौर पर बनाए रखने में मदद मिलती है। योगासन से रीढ़ की हड्डी तथा जोड़ों को लचकदार बनाकर रखा जा सकता है। जिससे शरीर लम्बे समय तक लचीला तथा आकर्षक बनता है, योग से शरीर के भार को कम करने में भी मदद मिलती है तथा इससे मांसपेशियां नरम तथा मुलायम हो जाती है। योग से थकान में भी मुक्ति मिलती है तथा शरीर में ऊर्जा का प्रभावी संचार होता है।

 

सूर्य नमस्कार आसन के फायदे

सूर्यानमस्कार आसन से पूरे शरीर में नवयौवन का संचार होता है। सूर्य नमस्कार से शरीर पर बढ़ती आयु के प्रभाव को रोका जा सकता है तथा यह चेहरे तथा शरीर पर बुढ़ापे की भाव मुद्राओं के प्रभाव को रोकने में मददगार साबित होता है।इससे नाड़ी तंत्र को स्थिर रखने में मदद मिलती है। इससे तनाव को कम करने तथा मानसिक संतुलन में भी लाभ मिलता है। योग प्राचीन भारतीय विद्या है तथा इसके निरन्तर अभ्यास से संयमित व्यक्तित्व तथा वृद्वावस्था की भाव मुद्राओं को रोकने में मदद मिलती है। योग का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे सांसों पर नियन्त्रण रहता है तथा योगाभ्यास के दौरान सांस खींचने तथा सांस बाहर निकलाने की उचित विधि से शवास को संयमित करने में मदद मिलती है जिससे शरीर में आक्सीजन को नियन्त्रित करने में सहायक सिद्ध होती है। योग से शारीरिक तथा मानसिक उल्लास की असीम अनुभूति प्राप्त होती है। भाग-दौड़ वाली जिंदगी से परेशान होकर हर कोई जिंदगी को आसान बनाना चाहता है। ऐसी स्थिति में क्या आप अपने जीवन को सुखी बनाने के लिए थोड़ा समय योग को नहीं दे सकते? योग एक ऐसी विधा है जिससे अपने मन को स्थिर कर सकते हैं। जब तक मन शुद्ध या स्थिर नहीं होता, तन भी अशुद्ध रहता है। योगाभ्यास द्वारा ही तन व मन की शुद्धि होती है और तन-मन निरोगी हो जाता है। योगाभ्यास से मन को स्वस्थ्य और शांत बनाया जा सकता है।

शरीर को स्वस्थ बनाने में तन और मन का बेहतर योगदान होता है। आमतौर पर देखा गया है कि शारीरिक बीमारियों के मानसिक आधार होते हैं। क्रोध आपके मन को विकृत करता है जिससे आप विभिन्न प्रकार की बीमारियों से घिर जाते हैं फिर भी क्रोध से बिल्कुल अनभिज्ञ रहते हैं। योगाभ्यास क्रोध पर नियंत्रण रखने में अहं भूमिका निभाता है।

सौंदर्य को बढ़ाता है योग

जब सौंदर्य की बात करते है तो केवल बाहरी चेहरे की सौंदर्य की ही बात नहीं करते बल्कि इसमें आकृति सूरत भी शामिल होती है जिसमें लचकपन हावण्भाव तथा शारीरिक आर्कषण होना बहुत ही आवश्यक होता है। जहां तक बाहरी सौंदर्य का सम्बन्ध है वहां छरहरे बदन से व्यक्ति काफी युवा दिखाई देते हैं जो कि लम्बे समय तक यौवन बनाए रखने में सहायक होता है। योग से शरीर के हर टिशू को ऑक्सीजन प्राप्त होती है जिसे शरीर में सौंदर्य तथा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। यदि आप ऐसी जीवनशैली से गुजर रहे हैं जिसमें शारीरिक गतिविधी नगण्य है तो आप वास्तव में बुढ़ापे को नियंंत्रण दे रहे है। योग तथा शारीरिक श्रम से आदमी को यौवन की स्थिति को लम्बें समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है क्योंकि इससे शरीर सुदृढ़ होता है तथा शरीर सुव्यवस्थित तथा तन्दरूस्त रखने में भी मदद मिलती है। योग आसनों से रीढ़ की हड्डी तथा हड्डियों के जोड़ों को लचकदार एवं कोमल बनाने में मदद मिलती है। इससे शरीर सुदृढ़ तथा फुर्तीला बनता है। मांसपेशियों में रंगत आती है, रक्त संचार में सुधार होता है, प्राण शक्ति का प्रवाह होता है तथा सौंदर्य एवं अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।

तनाव दूर करेगा योग

अनेक सौंदर्य समस्याएं मानसिक तनाव की वजह से उत्पन्न होती है। योग से तनाव को कम करने तथा स्वछन्द मानसिक उन्मुक्त वातावरण तैयार करने में मदद मिलती है । योग के लगातार अभ्यास से कील मुंहासों और बालों के झड़ने की समस्यांए, सिर की रूसी आदि समस्याओं का स्थाई उपचार मिलता है योग तथा शारीरिक क्रियाएं करने वाले युवाओं पर किए गए अध्ययन में यह पाया गया हैं उनके व्यक्तित्व में भावनात्मक स्थिरताओं आत्म विश्वास उचित मनोभाव जैसे सकारात्मक बदलाव महसूस किये जाते है। जिसका दिमाग एवं भावनाओं तथा मिजाज पर सीधा प्रभाव दिखाई देता है। वास्तव में योग नियमित रूप से तनाव से मुक्ति प्रदान करता है। जिससे त्वचा पर रंगत वापिस आ जाती है।

योग का महत्व

वास्तव में योग से बाहरी शारीरिक सौंदर्य को निखारने तथा संवारने में काफी मदद मिलती है। आज का समय लगातार बढ़ती जटिलताओं और गति का समय है। जीवन यापन के लिए हर कोई लगातार गतिमान है। भागदौड़ की इन स्थितियों में एक सुसंगत ,संयमित ,और स्वस्थ्य जीवन दृष्टि की खोज हर व्यक्ति को है। हर कोई अपने शरीर को स्वस्थ्य रखना चाहता है। भारतीय परंपरा हमेशा से ही जीवन को समग्र और संतुलित रूप से जीने की दृष्टि देती रही है। भारतीय चिंतन और परंपरा का आधार रहा है योगशास्त्र। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, यह जीवन को संतुलित रूप से जीने का शास्त्र है। यह निरंतर बढ़ती हुई भागदौड़ में व्यक्तित्व को एक ठहराव एक गहराई देने की विद्या है। ऐसे में आज न केवल भारत बल्कि विश्व के दूसरे देश भी योग को जीवन शैली में सुधार लाने का एक प्रमुख उपाय मान रहे हैं। जीवन की भाग.दौड़ वाली जिंदगी से परेशान होकर हर कोई जिंदगी को आसान बनाना चाहता है। ऐसी स्थिति में क्या अपने जीवन को सुखी बनाने के लिए थोड़ा समय योग को नहीं दे। योग एक ऐसी विधा है जिससे आप अपने मन को स्थिर कर सकते हैं। जब तक मन शुद्ध या स्थिर नहीं होता तब तक तन भी अशुद्ध रहता है। योगाभ्यास द्वारा ही तन व मन की शुद्धि होती है और तन.मन निरोगी हो जाता है। योगाभ्यास से मन को स्वस्थ्य और शांत बनाया जा सकता है।

योग से नियंत्रित रहेगा क्रोध

शरीर को स्वस्थ बनाने में तन और मन का बेहतर योगदान होता है। आमतौर पर देखा गया है कि हमारी शारीरिक बीमारियों के मानसिक आधार होते हैं। क्रोध आपके मन को विकृत करता है जिससे आप विभिन्न प्रकार की बीमारियों से घिर जाते हैं फिर भी क्रोध से बिल्कुल अनभिज्ञ रहते हैं। योगाभ्यास क्रोध पर नियंत्रण रखने में अहम भूमिका निभाता है।

लेखिका अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सौंदर्य विशेषज्ञ है और हर्बल क्वीन के रूप में लोकप्रिय हैं।

(माध्यम – डेली हंट)

योग दिवस पर आयोजित हुआ स्वस्थ जीवन शैली के लिए योग सत्र

कोलकाता । योग में इतनी शक्ति है की इसे करने से यह प्रकृति के प्रकाश और ऊर्जा को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाकर शरीर को निरोग रखने में सहायक होता है। मंगलवार को 7वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ‘नेफ्रोकेयर इंडिया’ की तरफ से योग के जरिए स्वस्थ जीवन शैली के प्रति समग्र दृष्टिकोण के साथ “योग फॉर हेल्दी लिविंग” नामक एक सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मंत्रा के सहयोग से आयोजित की गई थी। इस पूरे कार्यक्रम को मैप5 इवेंट्स द्वारा संचालित किया गया। मंगलवार को सॉल्टलेक में स्थित गोल्डन ट्यूलिप होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

योग मानव जाति के लिए वरदान है। यह कई पुरानी बीमारियों से बचाता है। यह प्रकृति का सबसे अच्छा उपहार है, जो हर कोई स्वयं को दे सकता है। योग हमारे शरीर में रोजाना नई ऊर्जा का संचार करता है। जिससे पुरानी बीमारियां दूर होती है और योग हमारे शरीर को नई बीमारियों से बचाता है।

इस कार्यक्रम में डॉ. प्रतिम सेनगुप्ता (एमडी, इंटरनल मेडिसिन और नेफ्रोलॉजी के डीएम व मेंटर), शुभव्रत भट्टाचार्य (संस्थापक और निदेशक, मंत्र लाइफस्टाइल हेल्थ क्लब),आशीष मित्तल (निदेशक, गोल्डन ट्यूलिप होटल) के अलावा समाज की अन्य कई प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे।
एक दिवसीय इस कार्यक्रम में धौती क्रिया, अंग मर्दाना, सूर्य नमस्कार, ध्यान, ओम जप और प्राणायाम पर सत्र शामिल थे। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने हठ योग, त्राटक और मौना नामक योग का भी अभ्यास किया। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य और योग के सिद्धांतों पर भी चर्चा हुई और उसके बाद योग और मन पर नियंत्रण पर चर्चा की गई।
इस आयोजन के मेंटर, डॉ. प्रतिम सेनगुप्ता (एमडी, इंटरनल मेडिसिन और डीएम, नेफ्रोलॉजी) ने कहा, “योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर की एकाग्रता, विचार और क्रिया, संयम और एकता का प्रतीक है। योग के जरिए मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित होता है। यह स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण है। योग आपकी जीवन शैली को बदलकर और चेतना पैदा करके आपके शारीरिक कल्याण में मदद करता है। हमे खुद को स्वस्थ और निरोग रखने के लिए अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है।
योग के महत्व को बताते हुए मंत्रा लाइफस्टाइल हेल्थ क्लब के संस्थापक और निदेशक, शुभव्रत भट्टाचार्य ने कहा, “नियमित योग अभ्यास मन को शांत रखता है। यह शरीर में पुराने तनाव से राहत देता है। गोल्डन ट्यूलिप होटल के निदेशक आशीष मित्तल ने कहा, “आप हमेशा यह नियंत्रित नहीं कर सकते कि बाहर क्या हो रहा है। लेकिन आप हमेशा अपने अंदर के बदलाव को नियंत्रित कर सकते हैं। योग स्वयं की यात्रा है, स्वयं के माध्यम से, स्वयं को निरोग रखने का सबसे आसान जरिया है।

प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए, डॉ. प्रतिम सेनगुप्ता ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योग की एकीकृत शक्ति, इसके अपार लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह कहते हुए कार्यक्रम का समापन किया कि योग एक प्रकाश है, जो एक बार जला देने पर कभी कम नहीं होता। आपका अभ्यास जितना बेहतर होगा, आपकी लौ उतनी ही तेज होगी।

इस कार्यक्रम में आयोजकों द्वारा लोगो द्वारा रक्त परीक्षण करने पर 25% की छूट प्रदान करने की घोषणा की गयी। पीएफटी, ब्लड शुगर, ईसीजी के लिए रियायती मूल्य और अतिरिक्त ऑफर के रूप में पूरे शरीर की स्वास्थ्य जांच करने पर 50% की छूट देने की घोषणा भी की गयी।