Saturday, March 28, 2026
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केरल के इस इस्लामिक संस्थान में पढ़ाई जाती है गीता, वेद, उपनिषद

संस्कृत में ही होती है बात
कोच्चि । पूरे देश में मदरसों की पढ़ाई को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। मदरसों में आधुनिक शिक्षा की पढ़ाई कराए जाने को कहा जा रहा है। असम सरकार ने कई मदरसों को बंद कर दिया तो यूपी में भी मदरसों का सर्वे चल रहा है। मदरसों में इस्लामिक पढ़ाई ही कराई जाती है। इस्लामिक संस्थानों की पढ़ाई को लेकर सवाल खड़े होते हैं, लेकिन केरल में एक ऐसा इस्लामिक संस्थान है जहां संस्कृत पढ़ाई जा रही है। त्रिशूर जिले में एक इस्लामी संस्थान ने मिसाल कायम की है। यहां मदरसे में लंबे सफेद वस्त्र पहने और सिर पर जाली वाली टोपी लगाए छात्र अपने हिंदू गुरुओं की निगरानी में धाराप्रवाह संस्कृत के श्लोक और मंत्र पढ़ते हैं।
संस्थान में एक शिक्षक छात्र को ‘गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा, गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम:’ पढ़ने के लिए कहते हैं और छात्र ऐसा ही करते हैं। छात्र धाराप्रवाह इस श्लोक को बिना अटके और रुके पढ़ते हैं। छात्र जब विभिन्न श्लोक का पाठ पूरा कर लेते हैं तो उसके शिक्षक संस्कृत में उससे कहते हैं, उत्तमम।
अन्य धर्मों के बारे में ज्ञान देना मकसद
खास बात है कि इस्लामिक संस्थान की कक्षा में छात्रों और शिक्षकों के बीच संस्कृत में ही सारी बातचीत होती है। मलिक दीनार इस्लामिक कॉम्प्लेक्स (एमआईसी) संचालित एकेडमी ऑफ शरिया एंड एडवांस्ड स्टडीज (एएसएएस) के प्राचार्य ओनाम्पिल्ली मुहम्मद फैजी ने कहा कि संस्कृत, उपनिषद, पुराण आदि पढ़ाने का उद्देश्य छात्रों में अन्य धर्मों के बारे में ज्ञान और जागरूकता पैदा करना है।
शंकर दर्शन का अध्ययन कर चुके हैं फैजी
एमआईसी एएसएएस में छात्रों को संस्कृत पढ़ाने का एक और कारण फैजी की अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि हैं। फैजी ने कहा कि उन्होंने शंकर दर्शन का अध्ययन किया है। उन्होंने बताया, ‘मैंने महसूस किया कि छात्रों को अन्य धर्मों और उनके रीति-रिवाजों व प्रथाओं के बारे में पता होना चाहिए। लेकिन आठ साल की अध्ययन अवधि के दौरान संस्कृत के साथ-साथ ‘उपनिषद’, ‘शास्त्र’, ‘वेदों’ का गहन अध्ययन संभव नहीं होगा।’
फैजी ने कहा कि इसका मकसद इन छात्रों को बुनियादी ज्ञान प्रदान करने और इनमें दूसरे धर्म के बारे में जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने कहा कि दसवीं कक्षा पास करने के बाद आठ साल की अवधि में छात्रों को भगवद गीता, उपनिषद, महाभारत, रामायण के महत्वपूर्ण अंश छात्रों को संस्कृत में पढ़ाए जाते हैं।
इन ग्रंथों का चयनात्मक शिक्षण इसलिए प्रदान किया जा रहा है क्योंकि संस्था मुख्य रूप से एक शरिया कॉलेज है। यह संस्थान कालीकट विश्वविद्यालय से संबद्ध है और यहां उर्दू और हिंदी भी पढ़ाई जाती है।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

अलीगढ़ लोक अदालत में एक दिन में रिकॉर्ड साढ़े 56 हजार केस निस्तारित

साढ़े 23 करोड़ जुर्माना भी वसूला

अलीगढ़ । अलीगढ़ में कुछ ऐसा हुआ है, जिसने हर किसी को प्रभावित किया है। मुकदमों में लगने वाले लंबे वक्त की जगह इस कोर्ट में एक ही दिन में 56 हजार 494 केस का डिस्पोजल कर दिया गया। मतलब, इन केसों में न्याय दे दिया गया। वादी और प्रतिवादी पक्ष ने न्याय को स्वीकार भी किया। दरअसल, अलीगढ़ में लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत लोक अदालत का आयोजन किया गया। एक दिन के इस आयोजन में न केवल साढ़े 56 हजार केसों का निस्तारण किया, बल्कि 23 करोड़ 56 लाख 3 हजार 257 रुपए बतौर जुर्माना भी वसूल किए गए।
अलीगढ़ में लोक अदालत का हुआ आयोजन
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में अलीगढ़ दीवानी न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ जिला जज डॉ. बब्बू सारंग ने किया। इसमें वैवाहिक, पारिवारिक विवाद, मोटर वाहन दुर्घटना क्लेम, सभी दीवानी मामले, श्रम एवं औद्योगिक विवाद, पेंशन मामले, वसूली, सभी राजीनामा योग्य फौजदारी और विवाद के मामले निपटाए गए।
लोक अदालत में 23 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली
अलीगढ़ में पिछली लोक अदालत में 32 हजार मामले निस्तारित किए गए थे। इस बार 56,494 मामलों पर का फैसला आया। सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण महेन्द्र कुमार ने बताया कि 9, 10 और 11 नवंबर को 3500 लघु वादों का निस्तारण कराया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायालयों में लम्बित विभिन्न प्रकृति के कुल 11,264 मामलों का निस्तारण आपसी सुलह समझौता के आधार पर किया गया। विभिन्न विभागों एवं बैंक लोन रिकवरी, वित्तीय संस्थाओं, दूरभाष, मोबाइल कंपनी आदि के स्तर के कुल 45,230 मामलों का निस्तारण आपसी सुलह समझौता के आधार पर किया गया।

(रिपोर्ट: लकी शर्मा)
(साभार – नवभारत टाइम्स)

अचंत शरत कमल को मिलेगा खेल रत्न, रोहित शर्मा के कोच को भी अवॉर्ड

नयी दिल्ली । टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंत शरत कमल को 30 नवंबर को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू वर्ष 2022 के लिये मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार प्रदान करेंगी। शरत इस साल खेलरत्न पाने वाले अकेले खिलाड़ी हैं जबकि 25 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार दिया जायेगा, जिनमें बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन, एच एस प्रणय, महिला मुक्केबाज निकहत जरीन, एथलीट एल्डौस पॉल, अविनाश साबले शामिल हैं।
रोहित शर्मा को कोच को भी अवॉर्ड
विजेताओं को राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में पुरस्कार दिये जायेंगे। जीवनजोत सिंह तेजा (तीरंदाजी), मोहम्मद अली कमर (मुक्केबाजी), सुमा शिरूर (पैरा निशानेबाजी) और सुजीत मान (कुश्ती) को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया जायेगा। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा के बचपन के कोच दिनेश लाड (क्रिकेट), बिमल घोष (फुटबॉल) और राज सिंह (कुश्ती) को आजीवन योगदान वर्ग में यह पुरस्कार मिलेगा। अश्विनी अकुंजी (एथलेटिक्स), धरमवीर सिंह (हॉकी), बी सी सुरेश (कबड्डी) और नीर महादुर गुरंग (पैरा एथलेटिक्स) को ध्यानचंद आजीवन योगदान पुरस्कार मिलेगा।
विजेताओं की सूची:
मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार: अचंता शरत कमल
अर्जुन पुरस्कार: सीमा पूनिया (एथलेटिक्स), एल्डौस पॉल (एथलेटिक्स), अविनाश साबले (एथलेटिक्स), लक्ष्य सेन (बैडमिंटन), एच एस प्रणय (बैडमिंटन), अमित (मुक्केबाजी), निकहत जरीन (मुक्केबाजी), भक्ति कुलकर्णी (शतरंज), आर प्रज्ञानानंदा (शतरंज), दीप ग्रेस इक्का (हॉकी), सुशीला देवी (जूडो), साक्षी कुमारी (कबड्डी), नयन मोनी सैकिया (लॉनबॉल), सागर ओव्हालकर (मलखम्ब), इलावेनिल वालारिवान (निशानेबाजी), ओमप्रकाश मिठारवाल (निशानेबाजी), श्रीजा अकुला (टेबल टेनिस), विकास ठाकुर (भारोत्तोलन), अंशु (कुश्ती), सरिता (कुश्ती), परवीन (वुशू), मानसी जोशी (पैरा बैडमिंटन), तरूण ढिल्लो (पैरा बैडमिंटन), स्वप्निल पाटिल (पैरा तैराकी), जर्लिन अनिका जे (बधिर बैडमिंटन)
द्रोणाचार्य पुरस्कार (नियमित श्रेणी में कोचों के लिये): जीवनजोत सिंह तेजा (तीरंदाजी), मोहम्मद अली कमर (मुक्केबाजी), सुमा शिरूर (पैरा निशानेबाजी) और सुजीत मान (कुश्ती)
द्रोणाचार्य पुरस्कार लाइफटाइम श्रेणी: दिनेश लाड (क्रिकेट), बिमल घोष (फुटबॉल), राज सिंह (कुश्ती)
ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार: अश्विनी अकुंजी (एथलेटिक्स), धरमवीर सिंह (हॉकी), बी सी सुरेश (कबड्डी), नीर बहादुर गुरंग (पैरा एथलेटिक्स)
राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार: ट्रांस स्टेडिया इंटरप्राइजेस प्राइवेट लिमिटेड, कलिंगा सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, लद्दाख स्की और स्नोबोर्ड संघ
मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्रॉफी: गुरूनानक देव यूनिवर्सिटी , अमृतसर ।

अच्छी किताबें नहीं मिली तो आईएएस नहीं बन सके, अब बने लाइब्रेरीमैन

रांची । 2002 में चाईबासा में रहने वाले 20 वर्षीय संजय कच्छप ने स्नातक की पढ़ाई के वक्त आईएएस अधिकारी बनने का सपना देखा। इसके लिए इन्होंने अपने स्तर से हरसंभव कोशिश की, लेकिन गरीबी के कारण महंगी पुस्तकें खरीद पाने में वे असमर्थ थे। वहीं अच्छी पुस्तकें नहीं मिल पाने के कारण उनका यह सपना अधूरा हो गया। हालांकि बाद में उन्हें रेलवे और कृषि विभााग में नौकरी मिल गई। सरकारी नौकरी मिलने के बाद इन्होंने निर्धन बच्चों की परेशानियों को समझते हुए पुस्तकालय स्थापित करने का अभियान शुरू किया। अपने पैतृक गांव से लेकर जहां भी नौकरी के दौरान पदस्थापित रहे , वहां बच्चों के लिए पुस्तकालय स्थापित करने का काम किया। जिसके कारण इन्हें अब सभी ‘लाइब्रेरी मैन’ के नाम से जानने लगे। अब तक इन्होंने कोल्हान क्षेत्र में 40 पुस्तकालय की स्थापना करने में सफलता हासिल की है।
पैतृक स्थान में पहले ‘मोहल्ला पुस्तकालय’ की स्थापना
सरकारी नौकरी में आने के बाद सबसे पहले संजय कच्छप ने पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा में वार्ड नंबर-1 के पुलहातू स्थित अपने पैतृक स्थान पर पहले ‘मोहल्ला पुस्ताकलय’ की स्थापना की। इस सराहनीय काम में उन्हें कई समान विचारधारा वाले लोगों ने मदद की। तब से लेकर अब तक उन्होंने कोल्हान प्रमंडल के तीन जिलों पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिले में लगभग 40 पुस्तकालयों की स्थापना की है। इन पुस्तकालयों की मदद से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और आदिवासी छात्रों को बड़ी मिली है।
बाल दिवस पर दुमका स्थित सरकारी आवास में भी पुस्तकालय स्थापित
कृषि विभाग में कार्यरत संजय का तबादला पिछले दिनों दुमका में हो गया। 14 नवंबर बाल दिवस पर इन्होंने दुमका स्थित अपने आधिकारिक आवास के एक हिस्से में ही बच्चों के लिए पुस्तकालय की स्थापना की। संजय बताते है कि 2002 में जब वे स्नातक की पढ़ाई के दौरान संघर्ष कर रहे थे, तो उन्होंने महसूस किया कि चाईबासा जैसे दूरदराज के इलाकों में किताबों तक पहुंच पाने की कमी के कारण सिविल सेवाओं में प्रवेश करने का उनके बचपन का सपना मुश्किल था। गरीबी एक और बाधा थी। 2004 में चाईबासा में कॉलेज में स्नातक करने में कामयाबी मिलने के बाद रेलवे में कुछ दिनों के लिए नौकरी की। उसी दौरान उन्होंने यह फैसला कर लिया कि उन्हें जिस तरह से अच्छी पुस्तकों की कमी महसूस हुई है, वे अन्य गरीब और आदिवासी बच्चों को किताबों की मुश्किल नहीं होने देंगे।
पुस्तकालय स्थापना से युवाओं ने छोड़ा नशा
संजय ने अपने वेतन और कुछ दोस्तों की मदद से पुलहातू के सामुदायिक भवन में पहला पुस्ताकलय स्थापित करने में कामयाबी हासिल की। वर्ष 2008 तक इस क्षेत्र के लिए पुस्तकालय एक विदेशी शब्द था, लेकिन धीरे-धीरे जब स्थानीय युवाओं और छात्रों ने पुस्ताकलय का उपयोग करना शुरू किया,तो उन्हें एहसास हुआ कि पढ़ाई में व्यस्त रहने के कारण क्षेत्र के युवाओं में जागरूकता आई है, नशा की लत भी छूटने लगी है। इससे उत्साहित होकर और भी पुस्तकालय स्थापित करने का निर्णय लिया। इस बीच झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने के बाद वे कृषि विभाग की नौकरी में आ गए और रेलवे की नौकरी छोड़ दी। मोहल्ला पुस्तकालय में पढ़ाई कर कई ने सिविल सेवा, रेलवे और बैंक समेत अन्य संस्थानों में नौकरी हासिल की
पुस्तकालय स्थापित करने के इस अभियान से कई युवाओं को सफलता मिली। इसी पुस्तकालय में बैठकर घंटों पढ़ाई करने वाले अजय कच्छप अभी डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्यरत है जबकि 29वर्षीय विकास टोप्पो पिछले 6 वर्षों से चाईबासा पुस्तकालय में पढ़ाई कर प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे है। इस क्षेत्र के कई गरीब आदिवासी बच्चों ने इसी निःशुल्क पुस्तकालय में पढ़ाई कर रेलवे और बैंक समेत अन्य परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की।
500 पंचायतों में पुस्तकालय खोलने के लिए 22 करोड़ मंजूर
इधर,राज्य सरकार भी सामुदायिक और मोहल्ला पुस्तकालय खोलने की योजना पर काम कर रही है। योजना के तहत अगले कुछ वर्षाें में सभी पंचायतों में पुस्तकालय स्थापित करने की योजना है। इस साल 30 सितंबर को राज्य सरकार के पंचायती राज विभाग ने पंचायत भवनों में 500 पुस्तकालय स्थापित करने की योजना के लिए 22 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

भारतीय सेना में पहली बार स्टाफ कॉलेज के लिए चयनित हुईं महिला अधिकारी

नयी दिल्ली । पहली बार भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को वह एग्जाम देने का मौका मिला जो अब तक सिर्फ पुरुष अधिकारियों के लिए सीमित ही था। यह डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज की परीक्षा है। 15 महिलाओं ने यह परीक्षा दी जिसमें छह महिला अधिकारी सफल हुईं। अब ये अगले साल मई से इस कोर्स का हिस्सा बनेंगी।
दरअसल स्टाफ कॉलेज कोर्स सेना में महिला अधिकारियों के आगे बढ़ने की राह भी खोलेगा। सफल छह महिला अधिकारी अब बाकी सफल पुरुष अधिकारियों के साथ तमिलनाडु के वेलिंगटन में स्टाफ कॉलेज में एक साल का कोर्स करेंगी और इससे सेना में उनके प्रमोशन के मौके बढ़ेंगे। अब तक स्टाफ कॉलेज में विदेशों की सेना की महिला अधिकारी तो आती रही हैं, लेकिन भारतीय सेना की महिला अधिकारी यहां पहली बार पहुंचेंगी।

अब तक क्यों नहीं आ सकीं महिलाएं?
दरअसल सेना में स्टाफ कॉलेज की परीक्षा वही दे सकता है जिनकी सात साल की नौकरी हो गई हो और जिसने जूनियर कमांड कोर्स या इसके बराबर का कोर्स किया हो। पहले सेना में सिर्फ मेडिकल कोर, लीगल और एजुकेशन कोर में ही महिला अधिकारियों के लिए परमानेंट कमिशन था और इनमें प्रमोशन के लिए स्टाफ कॉलेज करना कोई अतिरिक्त योग्यता नहीं थी। लेकिन अब सेना में आर्मी एयर डिफेंस, सिगनल्स, इंजीनियर्स, आर्मी एविएशन, इलैक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स, आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डिनेंस कोर और इंटेलिजेंस कोर में परमानेंट कमिशन की हकदार हैं।
इसका मतलब है कि वह इन सब ब्रांच में कर्नल और इससे ऊपर के किसी भी रैंक तक पहुंच सकती हैं। जब लेफ्टिनेंट कर्नल से कर्नल बनाने के लिए सिलेक्शन होता है और कर्नल से ब्रिगेडियर बनने के लिए तो इसमें स्टाफ कॉलेज वालों को एक्स्ट्रा मार्क्स मिलते हैं। यानी उनके प्रमोशन की संभावना बढ़ जाती है। जिन नई ब्रांच में महिलाओं को परमानेंट कमिशन मिला है, उनमें भी स्टाफ कॉलेज करने के बाद प्रमोशन के मौके बढ़ेंगे। इसीलिए सेना के इतिहास में पहली बार महिला अधिकारी स्टाफ कॉलेज कोर्स करेंगी।
पुरुष अधिकारियों से बेहतर
स्टाफ कॉलेज में सेना की 260 सीटें हैं। यहां अपनी जगह बनाने के लिए महिला अधिकारियों ने पुरुष अधिकारियों से मुकाबला किया। इस 260 सीटों के लिए करीब 1,500 पुरुष अधिकारियों ने अप्लाई किया था तो महिला अधिकारियों की संख्या 15 थी। 15 में से 6 महिला अधिकारी इसमें अपनी जगह बनाने में सफल रहीं। बाकी सीटों पर पुरुष अधिकारी कोर्स की पढ़ाई करेंगे।
अकेला कोर्स जिसमें पहुंचते हैं प्रतियोगिता के जरिए
भारतीय सेना में कमिशन होने से लेकर जनरल बनने तक स्टाफ कॉलेज कोर्स ही इकलौता ऐसा कोर्स है जिसके लिए सिलेक्शन प्रतियोगिता के जरिए होता है। बाकी सभी कोर्स चाहे वह हायर कमांड कोर्स हो, जूनियर कमांड कोर्स, सीनियर कमांड कोर्स या फिर एनडीसी हो, इन सभी में अधिकारियों को उनकी प्रोफाइल के आधार पर नॉमिनेट किया जाता है। एक साल का स्टाफ कॉलेज कोर्स अधिकारियों को हायर स्टाफ अपॉइंटमेंट के लिए तैयार करता है।

एमएमयूटी के प्रोफेसर ने विकसित किया अनोखा सोलर सिस्टम

न धूप की जरूरत, न पैनल की, बनाएगी बिजली
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सोलर एनर्जी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव होने वाला है। मदन मोहन मालवीय टेक्निकल यूनिवर्सिटी, गोरखपुर ने नए खोज के जरिए ऊर्जा के क्षेत्र को एक अलग स्तर पर ले जाने की कोशिश की है। दावा यह किया जा रहा है कि सौर ऊर्जा से बिजली बनाने के लिए अब सूरज को बादलों से बाहर आने की जरूरत नहीं होगी। सोलर पैनल की आवश्यकता भी नहीं होगी। दिन की गर्मी को ही ऊर्जा में बदलकर प्रयोग किया जा सकता है। इस नए प्रयोग को अमली जामा पहनाने की तैयारी कर ली गई है। अगर ऐसा संभव हुआ तो फिर फिर यह बड़े ऊर्जा प्लांटों से कम खर्चीला साबित होगा। इससे लोगों को ऊर्जा की भरपूर उपलब्धता कराने में भी सफलता मिल सकेगी।
मदन मोहन मालवीय टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, गोरखपुर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर प्रशांत सैनी ने इस नए सोलर प्लांट का कॉन्सेप्ट तैयार किया है। आधुनिक सोलर प्लांट में बादलों के पीछे छिपे सूरह को भी ऊर्जा प्राप्त कर लेने की क्षमता होगी। यह प्लांट 10 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी को भी सौर ऊर्जा में बदल देगा। इस सोलर प्लांट का प्रयोग ऐसे स्थानों पर किया जा सकेगा, जहां कई दिनों तक धूप नहीं निकलती है। संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग अध्यक्ष प्रो. जीऊत सिंह के मार्गदर्शन में इस शोध कार्य को पूरा कराया गया है। डॉ. प्रशांत की ओर से तैयार किए गए सोलर प्लांट के प्रारूप से संबंधित शोध पत्र को यूनाइटेड किंगडम के अंतरराष्ट्रीय जर्नल एनर्जी कन्वर्जन एंड मैनेजमेंट ने भी प्रकाशित किया है।
सोलर प्लेट भी जरूरी नहीं
सोलर एनर्जी के लिए छतों पर या फिर खाली स्थानों में आप सोलर प्लेट लगा जरूर देखे होंगे। लेकिन, डॉ. प्रशांत के शोध में इसकी जरूरत नहीं होती है। कंबाइंड कूलिंग, हीटिंग, पावर एंड डिसैलिनेशन नामक यह सोलर प्लांट सौर ऊर्जा की जगह वातावरण की गर्मी से खुद को चार्ज कर सकता है। दरअसल, इस नए इनोवेशन के तहत थर्मल आयल से भरी इनक्यूबेटेड ट्यूब से बना सोलर क्लेक्टर सौर ऊर्जा को एकत्र कर सकता है। फेज चेंज मटेरियल टैंक में उसे सुरक्षित करके बिजली से चलने वाले यंत्रों को संचालित किया जा सकता है। इस नई तकनीक के जरिए दूषित पानी को भी पेयजल में परिवर्तित किया जा सकेगा।
डॉ. प्रशांत को इस शोध में आईआईटी बीएचयू के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. जे. सरकार का भी सहयोग मिला है। डॉ. प्रशांत अब साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्रालय की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता के माध्यम से प्लांट को भौतिक रूप देने में जुटे हुए हैं।
ऐसे तैयार होगी बिजली
डॉक्टर जीऊत सिंह का कहना है कि 600 डिग्री सेल्सियस तक बॉयलिंग पॉइंट वाले थर्मल आयल से इन्क्यूबेटेड ट्यूब से बने सोलर क्लेक्टर सूर्य की ऊर्जा एकत्र होगी। यहां से उसे फेज चेंज मटेरियल टैंक में भेजा जाएगा। उसमें अपेक्षाकृत कम बॉयलिंग पॉइंट कार्बोनेटेड लिक्विड को यह वाष्पीकृत करना शुरू कर देंगी। कार्बोनेटे मटेरियल में एन ब्यूटेन, एन पेंटेन आदि मुख्य रूप से रहेगा। वाष्पीकरण की पक्रिया से मिली ऊर्जा टरबाइन को चलाएगी। इससे बिजली का निर्माण शुरू हो जाएगा। बिजली बनाने की प्रक्रिया दिन में होगी। दिन ढलने के बाद भी बिजली बनने की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।
गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत को बढ़ावा देना उद्देश्य
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नए इनोवेशन को लेकर एमएमयूटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत सैनी का कहना है कि इस सोलर प्लांट का उद्देश्य गैर परंपरागत ऊर्जा को बढ़ावा देना है। अभी तक हुए शोध कार्य के आधार पर अनुमान है कि इस प्लांट से प्रति यूनिट बिजली बनाने में 8.50 रुपये का खर्च आएगा। इसमें किसी प्रकार की बैटरी का उपयोग नहीं किया जा रहा है। इससे यह प्लांट पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।

108 साल पुराने हिंदुजा समूह का होगा बंटवारा!

38 देशों में कारोबार, 150,000 से अधिक कर्मचारी

नयी दिल्ली । ब्रिटेन के सबसे अमीर परिवार हिंदुजा परिवार का बंटवारा होने जा रहा है। 108 साल पुराने हिंदुजा ग्रुप की कुल संपत्ति 14 अरब डॉलर की है। हिंदुजा भाइयों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। हिंदुजा बंधुओं में सबसे बड़े 86 साल के श्रीचंद हिंदुजा के वकीलों ने हाल ही में लंदन की एक अदालत को बताया था कि परिवार 2014 के एग्रीमेंट को खत्म करने पर सहमत हो गया है। परिवार के बीच यह समझौता 30 जून 2022 को हुआ था। सूत्रों की मानें तो इसी महीने परिवार का बंटवारा हो सकता है। समझौते के मुताबिक अगर परिवार के बीच नवंबर में बंटवारा नहीं हुआ तो यह मामला एक बार फिर अदालत में पहुंच सकता है। इस ग्रुप की दर्जनों कंपनियां हैं जिनमें से छह लिस्टेड हैं। इनमें इंडसइंड बैंक भी शामिल है।
हिंदुजा परिवार के बीच झगड़े की जड़ दो जुलाई 2014 में हुआ एक समझौता है। इस पर चारों भाइयों ने हस्ताक्षर किए थे। इसमें कहा गया था कि परिवार का सबकुछ प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित है और कुछ भी किसी से भी संबंधित नहीं है। श्रीचंद हिंदुजा ने अपने भाइयों जी पी हिंदुजा, पी पी हिंदुजा और ए पी हिंदुजा के खिलाफ केस किया था। यह 2014 के समझौते की वैधता संबंधित था। इस पर कानूनी विवाद नवंबर, 2019 से चल रहा था। श्रीचंद हिंदुजा के तीन छोटे भाइयों की दलील थी कि यह चिट्ठी 100 साल से अधिक पुराने हिंदुजा ग्रुप की उत्तराधिकार योजना थी। लेकिन श्रीचंद हिंदुजा की बेटियों शानू और वीनू ने इसे चुनौती दी थी। ब्रिटेन ही नहीं यूरोप के कई देशों में हिंदुजा ब्रदर्स के बीच कानूनी जंग चल रही है। इससे परिवार को नुकसान पहुंच रहा है।
हिंदुजा समूह का कारोबार
हिंदुजा ग्रुप का कारोबार ट्रक बनाने से लेकर, बैंकिंग, केमिकल्स, पावर, मीडिया और हेल्थकेयर तक फैला है। ग्रुप की कंपनियों में ऑटो कंपनी अशोक लीलेंड और इंडसइंड बैंक शामिल हैं। 14 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ हिंदुजा परिवार ब्रिटेन का सबसे अमीर परिवार है। इस ग्रुप की कंपनियों का कारोबार 38 देशों तक फैला है और उनमें 150,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। हिंदुजा ग्रुप की स्थापना 1914 में श्रीचंद परमानंद ने ब्रिटिश इंडिया में सिंध इलाके से की थी। हिंदुजा समूह कभी कमोडिटी-ट्रेडिंग फर्म हुआ करता था लेकिन श्रीचंद और उनके भाइयों ने लगातार अपने कारोबार को दूसरे क्षेत्रों में फैलाया।
हिंदुजा परिवार में दरार की पहली खबर तब आई थी, जब श्रीचंद की बेटियों ने स्विट्जरलैंड में स्थित एसपी हिन्दुजा बैंक्यू प्री वी एस ए पर नियंत्रण को लेकर कोर्ट में मुकदमा दायर किया। श्रीचंद की बेटी शानू इस बैंक की चेयरमैन हैं और उनके बेटे करम इसके सीईओ हैं। हालांकि परिवार के दूसरे सदस्य भी इस बैंक पर अपना नियंत्रण चाहते थे, जिसके बाद से यह विवाद शुरू हुआ। इस विवाद ने 100 साल से भी पुराने इस कॉरपोरेट साम्राज्य को टूटने के कगार पर पहुंचा दिया।
किसे मिलेगा स्विस बैंक
एक सूत्र ने बताया कि स्विट्जरलैंड में हिंदुजा ग्रुप का बैंक एसपी हिंदुजा ग्रुप के पास ही रह सकता है। हालांकि स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि हिंदुजा परिवार इस बैंक को एसपी ग्रुप को देने पर सहमत है या नहीं। एसपी हिंदुजा ग्रुप ने 2013 में बैंका कमर्शियल लुगानो को खरीदा था और इसका हिंदुजा बैंक (स्विट्जरलैंड) में विलय कर दिया था। बाद में इसका नाम बदल दिया गया था। श्रीचंद हिंदुजा इसके फाउंडिंग चेयरमैन बने थे। उनके भाइयों का आरोप है कि श्रीचंद का स्वास्थ्य ठीक नहीं है और इसका फायदा उठाकर उनकी बेटियां उनकी इच्छा के उलट काम कर रही हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीचंद हिंदुजा डिमेंशिया (यादाश्त भूलने की बीमारी) से ग्रसित हैं।

स्विस बैंक हिंदुजा ग्रुप की बाकी कंपनियों के मुकाबले बहुत छोटा है लेकिन इसमें अहम क्रॉस होल्डिंग्स है। अशोक लीलैंड में इसकी 4.98 फीसदी हिस्सेदारी है। मौजूदा मार्केट कैप के हिसाब से इसकी वैल्यू 2195 करोड़ रुपये है। इसके अलावा मॉरीशस के इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स के एमेरिटस चेयरमैन एसपी हिंदुजा हैं। इसकी इंडसडइंड बैंक में 12.58 फीसदी हिस्सेदारी है। इस बैंक का मार्केट कैप 89 हजार करोड़ रुपये के करीब है। इस हिसाब से इसमें आईआईएच की हिस्सेदारी की कीमत 11205 करोड़ रुपये है।
साथ ही आईआईएच की हिंदुजा लीलैंड फाइनेंस और इंडसइंड मीडिया एंड कम्युनिकेशनंस लिमिटेड में भी हिस्सेदारी है। अभी इसके चेयरमैन अशोक हिंदुजा हैं। शानू और वीनू हिंदुजा के पास लिस्टेड कंपनी हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशंस के भी शेयर हैं। यह प्रमोटर ग्रुप का हिस्सा है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि क्रॉस-होल्डिंग का समाधान कैसे होगा। दोनों पक्ष इस सेटलमेंट के विवरण का खुलासा नहीं करना चाहते हैं।
अलग-अलग जिम्मेदारी
हर भाई के पास कारोबार की अलग-अलग जिम्मेदारी है। श्रीचंद हिंदुजा पूरे ग्रुप के चेयरमैन है। उन्होंने ही इंडसइंड बैंक को शुरू किया था, जो भारत के प्रमुख प्राइवेट बैंकों में से एक है। गोपीचंद हिंदुजा इस ग्रुप के को-चेयरमैन है। ये हिंदुजा ऑटोमोटिव लिमिटेड, यूके के चेयरमैन भी हैं। तीसरे भाई प्रकाश इस समय यूरोप में हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन हैं, जबकि अशोक भारत में हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन है। श्रीचंद और गोपीचंद लंदन में रहते हैं। प्रकाश मोनैको में रहते हैं जबकि अशोक भारत में रहते हैं। फोर्ब्स रियल टाइम नेट वर्थ सूची के मुताबिक हिंदुजा बंधु दुनिया के अमीरों की सूची में 110वें नंबर पर हैं।

कॉस्मेटिक्स बाजार में उतरेंगे रतन टाटा और मुकेश अंबानी

नयी दिल्ली । देश का प्रमुख औद्योगिक घराना टाटा ग्रुप एक बार फिर ब्यूटी और पर्सनल केयर बिजनस में उतरने की तैयारी कर रहा है। उसकी देशभर में 20 ब्यूटी टेक स्टोर खोलने की योजना है। इसके लिए टाटा ग्रुप विदेशी ब्रांड्स से बातचीत कर रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इस सेक्टर में टाटा का सीधा मुकाबला एलवीएमएच के ब्रांड सेफोरा और घरेलू कंपनी नायिका से होगा। देश में ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट 16 अरब डॉलर का है और तेजी से बढ़ रहा है। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की भी देश में 400 से अधिक ब्यूटी स्टोर खोलने की योजना है। ऐसा पहला स्टोर अगले महीने मुंबई में खोला जा सकता है।
टाटा की नजर 18 से 45 साल के युवाओं पर है जो ईस्टी लॉडर के मैक और बॉबी ब्राउन जैसे महंगे ब्रांड्स को खरीद सकते हैं। कंपनी द ऑनेस्ट कम्पनी, इलिस ब्रुललिन और गैलिनी जैसी विदेशी कंपनियों से हाथ मिला सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक टाटा की दो दर्जन से अधिक कंपनियों से बात चल रही है जो उसके स्टोर्स के लिए खास उत्पाद मुहैया करवाएगी । टाटा के स्टोर्स में वर्चुअल मेकअप कियोस्क और डिजिटल स्किन टेस्ट का इस्तेमाल किया जाएगा और इसके आधार पर ग्राहकों को प्रीमियम ब्यूटी प्रॉडक्ट खरीदने के लिए ऑफर दिया जाएगा। हालांकि इस बारे में इन कम्पनियों ने कोई टिप्पणी नहीं की ।
कब खुलेगा पहला स्टोर
टाटा ने हाल में ब्यूटी शॉपिंग एप टाटा क्लिक पैलेट लॉन्च किया था। कंपनी पहले से ही रिटेल बिजनस में है। उसका जारा और स्टारबक्स जैसे ग्लोबल ब्रांड्स के साथ जॉइंट वेंचर है। रिपोर्ट के मुताबिक ब्यूटी स्टोर्स में 70 फीसदी प्रॉडक्ट्स स्किनकेयर और मेकअप का होगा। टाटा का पहले ब्यूटी स्टोर मार्च में खुल सकता है। भारत का ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट 16 अरब डॉलर का है जो चीन (92 अरब डॉलर) की तुलना में बहुत छोटा है। लेकिन अगले कुछ साल में इसके सात फीसदी के एवरेज से बढ़ने की उम्मीद है। ब्यूटी रिटेलर नायका की देश में 300 स्टोर खोलने की तैयारी है। अभी उसके पूरे देश में 124 स्टोर हैं। यह कंपनी पिछले साल शेयर मार्केट में लिस्ट हुई थीं। तब इसका मार्केट कैप 14 अरब डॉलर पहुंच गया था।
कभी बोलती थी टाटा ग्रुप की तूती
कुछ दशक पहले तक ब्यूटी सेक्टर में टाटा ग्रुप की तूती बोलती थी। नोएल टाटा की मां सिमोन टाटा ने 1953 में लैक्मे ब्रांड की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन टाटा ने 1998 में लैक्मे को यूनिलीवर पीएलसी की लोकल यूनिट को बेच दिया था। 2014 में कंपनी ने फिर से इस सेक्टर में एंट्री मारी थी लेकिन अब कंपनी इसे गंभीरता से ले रही है। टाटा ग्रुप की रिटेल स्टोर्स चलाने वाली कंपनी ट्रेंट लिमिटेड के नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नोएल टाटा ने एक साक्षात्कार में कहा कि कंपनी को जोर फुटवियर और अंडरवियर के साथ-साथ सौंदर्य उत्पादों पर रहेगा। उन्होंने कहा कि रिटेल में इनमें विकास की संभावना है।

बजट में पूंजी लाभ कर व्यवस्था में हो सकता है बदलाव

नयी दिल्ली । बजट में इक्विटी शेयर, बॉन्ड और अचल संपत्ति पर लगने वाले पूंजी लाभ कर में बदलाव किया जा सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि कर की विभिन्न दरों और संपत्ति रखने की अवधि में अंतर को दूर करने के लिये यह कदम उठाये जाने की संभावना है। उसने कहा कि अगले वित्त वर्ष के बजट में पूंजी लाभ कर में बदलाव की संभावना है। वित्त वर्ष 2023-24 का बजट संसद में एक फरवरी, 2023 को पेश किया जाएगा।
पूंजी लाभ कर में संभावित बदलाव के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन नितिन गुप्ता ने कहा, ”यह बजट प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।”
आयकर कानून के तहत पूंजीगत संपत्तियों…चल और अचल दोनों…की बिक्री से होने वाला लाभ पूंजी लाभ कर की श्रेणी में आता है। हालांकि कानून में कार, परिधान और फर्नीचर जैसी व्यक्तिगत चल संपत्तियों को बाहर रखा गया है।
अधिकारी ने कहा, ”हम विभिन्न पक्षों से मिले सुझाव पर गौर कर रहे हैं।”
फिलहाल एक साल से अधिक समय तक शेयर रखने पर उस पर होनेवाले दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ पर 10 प्रतिशत कर लगता है। वहीं बॉन्ड और अचल संपत्ति क्रमश: तीन साल और दो साल रखने की स्थिति में पूंजीगत लाभ पर कर की दर 20 प्रतिशत है।

दिवाली पर खूब मिठाई खाई, बढ़ गया 32 फीसदी भारतीयों का 1.5 किलोग्राम वजन

काजू कतली और गुलाब जामुन की सबसे ज्यादा हुई खपत

नयी दिल्ली । मिठाई खाकर लोगों का वजन बढ़ गया है। हेल्थीफाई मी द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार दिवाली वाले हफ्ते के दौरान 22 से 27 अक्टूबर के बीच भारत में चीनी की कुल खपत में 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो साल 2022 के लिए अब तक का सबसे उच्च स्तर है, जिसकी वजह से हर उपभोक्ता का औसतन 1.5 किलोग्राम वजन बढ़ा है । इसके साथ ही रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयों के वर्कआउट में 32 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है ।
हेल्थीफाई मी की चीफ बिजनेस ऑफिसर अंजन भोजराजन ने कहा, “कोविड के दो साल बाद लोगों ने इस साल पूरे उत्साह के साथ दिवाली मनाई और अकेले एक हफ्ते में औसतन अपना 1.5 किलो वजन बढ़ाया! हालांकि, यह देखना अच्छा है कि बहुत से लोगों ने वापस आकार में आने के लिए मेहनत शुरू कर दी – और 10 दिनों में ज्यादातर ने अपना बढ़ा हुआ वजन कम कर लिया ।”
रिपोर्ट के अनुसार काजू कतली और गुलाब जामुन ऐसी भारतीय मिठाइयां हैं, जो हेल्थीफाई मी ऐप के हिसाब से दिवाली वाले सप्ताह के दौरान मिठाई की खपत के मामले में सबसे आगे रहीं । यह मिठाई दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और पुणे में सबसे ज्यादा पसंद की गयी । अध्ययन से यह भी पता चला है कि त्योहारों के दौरान पुरुषों को महिलाओं की तुलना में ज्यादा मिठाई खाने की इच्छा होती हैं । दीवाली के हफ्ते के दौरान पुरुषों में चीनी की खपत में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि महिलाओं में यह 25 प्रतिशत थी। एक सप्ताह में व्यायाम की कमी और ज्यादा चीनी का सेवन पुरुषों का महिलाओं की तुलना में ज्यादा वजन बढ़ने का एक मुख्य कारण था । पुरुषों का वजन औसतन 1.7 किलोग्राम बढ़ा था, वहीं दिवाली के हफ्ते के दौरान महिलाओं का वजन 1.28 किलोग्राम बढ़ा ।
पुणे शहर में चीनी की खपत सबसे अधिक
भारत के प्रमुख महानगरों में पुणे शहर में चीनी की खपत सबसे अधिक 46 प्रतिशत रही । इसके बाद हैदराबाद में 34 प्रतिशत, बेंगलुरु में 34 प्रतिशत और चेन्नई में 33 प्रतिशत की खपत हुई । मुंबई के लोग मिठाई की खाने की अपनी आदत पर काबू करने में कामयाब रहे और वहां चीनी की खपत केवल 20 प्रतिशत अधिक रही जबकि दिल्ली और कोलकाता में चीनी की खपत में क्रमशः 30 प्रतिशत और 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई ।
कैलोरी बढ़ने के लिए सिर्फ चीनी जिम्मेदार नहीं है. मुंबई ने मीठा खाने की अपनी इच्छा पर काबू कर लिया, लेकिन लोगों के बीच खाने की कुल खपत में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई। दिवाली के हफ्ते के दौरान पुणे के लोगों के औसत वजन में 2.4 किलोग्राम की वृद्धि हुई। दिल्ली और हैदराबाद के लोगों ने क्रमशः 1.5 किग्रा और 1.2 किग्रा वजन बढ़ाया जबकि बेंगलुरु और चेन्नई के लोगों में दिवाली के हफ्ते के दौरान औसतन केवल 0.9 किलोग्राम वजन बढ़ा । रिपोर्ट में कहा गया है कि वजह बढ़ने के बाद अब लोगों ने इसे कम करने की कोशिश शुरू कर दी है ।