नयी दिल्ली । गांव की सुबह, आसमान में चहकती पक्षियों की आवाज, सफेद कुर्ता धोती पहने झोला टांगकर स्कूल जाते बच्चे, घरों से आती संस्कृत के श्लोकों और शंख की मधुर ध्वनि, ये दृश्य किसी गुरुकुल का नहीं बल्कि एक साधारण से गांव का है। ये गांव कर्नाटक के शिवमोगा जिले में बसा है। हम बात कर रहे हैं ‘मत्तूरु’ गांव की। इस गांव को ‘संस्कृत गांव’ के नाम से जाना जाता है। इस गांव में सब लोग आपस में संस्कृत में बातचीत करते हैं। इस बात पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन ये बिल्कुल सच है। आप जब इस गांव में कदम रखेंगे तो आपको ‘नमो नम:, कथम् अस्ति? अहम् गच्छामि। त्वम् कुत्र अस्ति?’ जैसे वाक्य सुनने को मिलेंगे।
संस्कृत को मानते हैं मातृभाषा
इस गांव में संस्कृत की शिक्षा देने वाले श्रीनिधि ने बताया कि मत्तूरु गांव में करीब साढ़े 9 हजार आबादी है। गांव के लोग पिछले 40 सालों से संस्कृत में बात करते आ रहे हैं। इस गांव के लोग संस्कृत भाषा को मातृभाषा मानते हैं। अब गांव में देश विदेश से लोग संस्कृत सीखने आते हैं। गांव के लोगों को संस्कृत सीखना अनिवार्य है। गांव के सभी बच्चों को बचपन से ही संस्कृत के साथ योग और वेदों की शिक्षा दी जाती है।
संस्कृत बोलने के लिए चलाया आंदोलन
श्रीनिधि ने बताया कि गांव में संस्कृत बोलने की शुरुआत साल 1981 में हुई, जब गांव में संस्कृत भारती संस्था की स्थापना की गई। इस संस्था ने ‘संस्कृत संभाषण आंदोलन’ को शुरू किया। इस आंदोलन के तहत ये तय किया गया कि सब लोग संस्कृत को मातृभाषा मानें और अपने व्यवहार में शामिल करें। इसके बाद गांव के लोगों ने संस्था के साथ मिलकर काम किया। केवल दो साल में ही यानी 1982 में गांव को देशभर में ‘संस्कृत ग्राम’ के नाते जाना जाने लगा।
श्रीनिधि ने एनबीटी से भी संस्कृत में ही बात की। उन्होंने कहा कि वो ये नहीं मानते कि पूरा गांव संस्कृत बोलता है, लेकिन पूरा गांव संस्कृत सीखने और बोलने की कोशिश जरूर करता है। गांव के बच्चों की संस्कृत भाषा में नींव मजबूत हो सके इस वास्ते गांव में ‘शारदा शाला’ की शुरुआत की गई। ये एक स्कूल है, जहां बच्चों को संस्कृत के साथ-साथ योग और वेद की शिक्षा दी जाती है। गांव में संस्कृत और वेद की शिक्षा लेने के लिए विदेशों से तक लोग आते हैं।
संस्कृत भाषा सीखने विदेशों से आते हैं लोग
संस्कृत भारती संस्था के साथ काम करने वाले कृष्णन ने बताया कि गांव में संस्कृत सीखने के लिए कोर्स चलाए जाते हैं। यह सब परंपरागत परिधान पहनते है और चोटी रखते हैं। अगर कोई संस्कृत सीखना चाहता है तो यहां 20 दिनों का एक कोर्स चलता है। इसके लिए कोई फीस भी नहीं ली जाती। गांव के लोग संस्कृत सीखकर देशभर में बड़े पदों पर तैनात हैं। गांव में हिंदू या फिर मुसलमान सब लोग संस्कृत में ही संवाद करते हैं।
ऐसा नहीं है कि गांव के लोगों को केवल संस्कृत भाषा का ज्ञान है। इस गांव में रहने वाले लोग फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोल सकते हैं और कर्नाटक की स्थानीय भाषा को भी जानते हैं। गांव में एक चौपाल लगती है, जहां कई बुजुर्ग हाथ में माला लिए मंत्रोच्चारण करते हैं। मत्तूरु गांव की एक खास बात यहां की शादियां हैं। गांव में आज भी पारंपरिक तरीके से शादियां होती हैं। यहां करीब 6 दिन की शादियां होती है और लोग पारंपरिक रस्मों को निभाते हैं। गांव में जातिभेद है न ही कोई और विवाद। सब लोग एक दूसरे का भरपूर सहयोग करते हैं। एक और जहां हम अपनी संस्कृति से दूर हो रहे हैं, वहीं ये कर्नाटक का मत्तूरु गांव अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने की कोशिश कर रहा है। गांव के लोगों ने संस्कृत को केवल एक भाषा न मानकर आंदोलन की तरह बचाने का काम किया है।
अद्भुत गाँव, यहां हिंदू-मुसलमान सब संस्कृत में करते हैं बात
एमसीसीआई में जेम, ट्रेड्स, उद्यम पंजीकरण पर कार्यशाला
कोलकाता । मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने जीईएम, टीआरईडीएस और उद्यम पंजीकरण पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए मार्वल इन्फोकॉम प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक नितिन जैन ने उन अवसरों के बारे में बताया जो जीईएम प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि 54,000 सरकारी विभाग हैं जो जेम में पंजीकृत हैं और खरीदार और विक्रेता दोनों बिना किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के अपना सौदा पूरा कर सकते हैं । आज की तारीख में जीईएम के 55 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और खरीद आदेश पर तत्काल वित्तपोषण की सुविधा थी, जिसे जीईएम सहाय एप्लिकेशन के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।” जेम ने वितरण सेवाओं के लिए भारतीय डाक के साथ सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 22 में जेम प्लेटफॉर्म के माध्यम से 1 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया गया है और वित्त वर्ष 23 में 2 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य था।
टीआरईडीएस पर विचार रखते हुए रिसिवेबल्स एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट एवं रीजनल हेड मैनाक मंडल ने कहा कि इस साल जून में प्रकाशित नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 25.80 लाख करोड़ रुपये का क्रेडिट गैप है और ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) इस अन्तर को कम करने की कोशिश कर रहा है।
उद्यम पंजीकरण की जानकारी देते हुए सुविधा कन्स्लटेंट प्राइवेट लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर (एमएसएमई), विश्वरूप चक्रवर्ती ने कहा कि जेम और ट्रेड्स का लाभ प्राप्त करने के लिए उद्यम में पंजीकृत होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बिना आईटी रिटर्न वाले नए उद्यम भी उद्यम पंजीकरण ले सकते हैं।
स्वागत भाषण एमसीसीआई की एमएसएमई काउंसिल के चेयरमैन संजीव कोठारी ने दिया । धन्यवाद एमसीसीआआई की एमएसएमई काउंसिल के को चेयरमैन प्रतीक चौधरी ने दिया ।
अंशधारकों के हित को ध्यान में रखना जरूरी

कोलकाता । मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने अरविंद फैशन के निदेशक एनं अरविंद लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव निदेशक कुलिन लालभाई के साथ ऑनलाइन सत्र आयोजित किया । लालभाई समूह की डिजिटल गतिविधियों का दायित्व सम्भालते हैं । उन्होंने कहा कि भारत एवं दक्षिण में विश्व में सबसे अधिक मध्यमवर्गीय लोगों को विकसित होता देख रहे हैं । आपूर्ति चेन चीन से भारत में स्थानांतरित हो रही है, सेवा क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है । डिजिटल क्षेत्र भारत की शक्ति बन रहा है । भारत में कपड़ों का घरेलू बाजार, स्थायी और किफायती होना एक वास्तविकता है । व्यवसाय के क्षेत्र में नेतृत्व करने वालों को अंशधारकों के हित को ध्यान में रखकर अंशधारक मूल्य (वैल्यू) निर्धारित करना होगा और यह आगे बढ़ने के लिए प्रेरक होगा ।
एसएलसीएम ने जीता फिक्की का दूसरा सस्टेनेबल एग्रीकल्चर अवार्ड
कोलकाता । कृषि जनित वस्तु प्रदाता कम्पनी सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट (एसएलसीएम) ने फिक्की द्वारा दिया जाने वाला सस्टेनेबल एग्रीकल्चर अवार्ड -2022 जीता है। इस पुरस्कार का यह दूसरा संस्करण था और एसएलसीएम ने लगातार दूसरी बार यह सफलता प्राप्त की है । कम्पनी को यह पुरस्कार उत्पाद, तकनीक, सुदृढ़ कृषि का प्रसार करने वाले सेवा प्रदाता की श्रेणी में दिया गया । एसएलसीएम के सीईओ संदीप सबरवाल ने केन्द्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से यह सम्मान ग्रहण किया । उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार के बाद उनका उत्तरदायित्व बढ़ गया है और वे इसका निवर्हन करेंगे । कम्पनी ने एग्री सुरक्षा, एग्री रीच मोबाइल क्वालिटी चेक ऐप जैसी कई सुविधाएं भी कृषि क्षेत्र में प्रस्तुत की हैं।
खाद्यप्रेमियों को खूब भाती है उत्तराखंड की बाल मिठाई
दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर और इस व्यापारिक मेले में उत्तराखंड की एक मिठाई ने सभी का दिल जीत लिया । हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड की राजकीय मिठाई के रूप में मान्यता प्राप्त बाल मिठाई की, जो भारत के सर्वाधिक पुराने मिष्ठानों में शामिल है । इसका एक समृद्ध इतिहास है, प्राचीन ग्रंथों, लोककथाओं और सांस्कृतिक इतिहास में इसका एक विशेष स्थान है ।
उत्तराखंड के कुमायुँ प्रदेश में अपने भूरे रंग के कारण बाल मिठाई को कुमायुँनी चॉकलेट भी कहा जाता है । वास्तव में, इस मिठाई ने इतनी लोकप्रियता हासिल की है कि हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कर्नाटक और उत्तराखंड के बीच मिठाइयों के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान की। कर्नाटक ने उत्तराखंड के सरकारी स्कूली विद्यार्थियों को अपनी लोकप्रिय मिठाई मैसूर पाक भेंट की, जबकि कर्नाटक सरकार के स्कूलों में छात्रों को बाल मिठाई का स्वाद चखने का मौका मिला।
बाल मिठाई लगभग सभी जिलों में विशेष रूप से अल्मोड़ा, नैनीताल और हल्द्वानी में बहुत लोकप्रिय है। संयोग से, क्रिसमस के दौरान अंग्रेजों में सबसे अधिक मांग रखने वाली लोकप्रिय मिठाई थी।
उत्तराखंड के प्रायः हर जिले में यह मिठाई लोकप्रिय है, खासकर अल्मोड़ा, नैनीताल एवं हल्द्वानी में तो इसकी बहुत अधिक माँग रहती है । समय के साथ इस मिष्ठान में बहुत बदलाव हुए हैं और बाल मिठाई का वर्तमान स्वरूप की खोज का श्रेय अल्मोड़ा के लाला जोगा राम शाह परिवार को है जिसने 19वीं शताब्दी के अंत में इस मिठाई की खोज की थी। इस परिवार की 5वीं पीढ़ी के हरीश लाल शाह आज भी इसी व्यवसाय में हैं ।
कई लोकप्रिय मिठाई की दुकान के ब्रांडों की तरह, बाल मिठाई की सबसे लोकप्रिय दुकान अल्मोड़ा के माल रोड पर खीम सिंह मोहन सिंह रौतेला स्वीट्स है और यह दुकान लगभग सौ साल से भी ज्यादा पुरानी है ।
बाल मिठाई को भुने हुए खोये से बनाया जाता है. यह प्रक्रिया खोआ बनाने से शुरू होती है, दूध को तब तक सुखाया जाता है जब तक वह वाष्पित होकर ठोस द्रव्यमान में नहीं बदल जाता। इसके बाद, स्वाद के उस अतिरिक्त डैश के लिए इसमें कैरामेलाइज़्ड शुगर सिरप मिलाया जाता है। गर्म मिश्रण को रात भर ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है और अंत में सफेद चीनी के गोले (खसखस पाउडर और चीनी का मिश्रण) में लपेट कर कोट किया जाता है। परिणाम है, एक चॉकलेटी स्वाद जहां हर बाइट कुरकुरी, मुलायम और आसानी से मुंह में पिघल जाती है।
बाल मिठाई के बारे में कुछ रोचक तथ्य
• महात्मा गांधी ने 1929 में अपने अल्मोड़ा आंदोलन के दौरान इस मिठाई का स्वाद चखा था
• यह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंदीदा मिठाइयों में से एक है।
• उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अक्टूबर 2022 में केदारनाथ और बद्रीनाथ की अपनी हालिया यात्रा के दौरान पीएम मोदी को बाल मिठाई का तोहफा दिया
• दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने एक ट्विटर पोस्ट में पीएम मोदी को बाल मिठाई उपहार में दी, जिन्होंने इस भाव के लिए उन्हें धन्यवाद दिया
उत्तराखंड में इन दिनों टूरिस्ट रेस्ट हाउस और होमस्टे में देश-विदेश के पर्यटकों को पहाड़ी व्यंजनों के साथ बाल मिठाई परोसी जाती है।
इसलिए अगर आप उत्तराखंड की यात्रा की योजना बना रहे हैं तो इस स्थानीय मिठाई को चखना आपकी उन चीजों की सूची का हिस्सा होना चाहिए जो आपको वहां छुट्टियां मनाते समय करनी चाहिए।
प्राक्सिस में 2023 के बैच के लिए प्लेसमेंट प्रक्रिया सम्पन्न
कोलकाता । प्राक्सिस बिजनेस स्कूल में वर्ष 2023 के लिए प्लेसमेंट की प्रक्रिया हाल ही में सम्पन्न हुई । संस्थान में नियोक्ता के रूप में पीडब्ल्यूसी, वेल्स फारगो, टाटा स्टील, आईटीसी, डब्ल्यूएनएस, ईवाई, एचएफडीसी बैंक, कंतार, आईसीआईसीआई बैंक, हीरो फिन कॉर्प, बंधन बैंक जैसी कई कम्पनियाँ उपस्थित थीं । प्रैक्सिस के नंबर 1 रैंक (एनालिटिक्स इंडिया मैगज़ीन सर्वे 2021 और 2022), और प्रशंसित पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन डेटा साइंस (पीजीपीडीएस), कोलकाता के नंबर 2 और पूर्वी भारत के नंबर 4 (टाइम्स एनुअल बी-स्कूल सर्वे 2022) के योग्य उम्मीदवार ) प्रैक्सिस पीजीडीएम, और डेटा इंजीनियरिंग में उद्योग-प्रशंसित पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम (पीजीपीडीएस) ने प्लेसमेंट ऑफर प्राप्त किए, जिससे वे अपने कॅरियर में सफलता के लिए फास्ट ट्रैक पर आ गए। प्रैक्सिस पीजीडीएम 2021-23 बैच द्वारा प्राप्त उच्चतम मुआवजा और औसत मुआवजा 17.60 लाख प्रति वर्ष (एलपीए) और 9.46 एलपीए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। डेटा इंजीनियरिंग (पीजीपीडीई) में पीजीपी के जुलाई’22-अप्रैल’23 बैचों को 16 एलपीए का उच्चतम मुआवजा मिला और बैच का औसत 13.14 एलपीए हो गयी, जो भारत में सभी डेटा इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में अपने आप में एक रिकॉर्ड है। प्राक्सिस बिजनेस स्कूल के सह संस्थापक एवं निदेशक प्रो. चरणप्रीत सिंह ने सफल प्रतिभागियों को बधाई दी ।
सनबीम बाबतपुर में चार दिवसीय ईस्ट जोन ताइक्वांडो प्रतियोगिता
वाराणसी। सीबीएसई क्लस्टर के अंतर्गत खिलाड़ियों की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर निखारने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का शुभारंभ हो चुका है। इस वर्ष सीबीएसई दिल्ली द्वारा ईस्ट जोन ताइक्वांडो प्रतियोगिता आयोजन की मेजबानी सौंपी गई है। प्रतियोगिता 01 दिसंबर 2022से आरंभ होकर 04 दिसंबर 2022 तक चला। सनबीम बाबतपुर ने जोर-शोर के साथ प्रतियोगिता का आगाज़ किया। प्रतियोगिता का शुभारंभ मार्च पास्ट, गणेश वंदना तथा शिव तांडव से हुआ।
प्रतियोगिता में 237 विद्यालयों से 1700 से ज्यादा प्रतिभागियों ने अति उत्साह के साथ भाग लिया। प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप सनबीम समूह के चेयरमैन डॉ.दीपक मधोक तथा भारी उद्योग मंत्री श्री महेन्द्र पाण्डेय रहें। सीबीएसई निरीक्षक डॉ नीतिन शर्मा इस अवसर पर उपस्थित रहें तथा आशीर्वचन से प्रतिभागियों के मनोबल को बढ़ावा दिया।
सनबीम बाबतपुर में धूमधाम से मना वार्षिकोत्सव
वाराणसी। सनबीम स्कूल बाबतपुर के परिसर में भव्य वार्षिकोत्सव संपन्न हुआ। विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर सनबीम समूह के अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक, मैनेजिंग डायरेक्टर डीएचके एडुसर्व श्री हर्ष मधोक ,निदेशिका भारती मधोक तथा आई.जी.एवं प्रिंसिपल चीफ सिक्योरिटी कमिश्नर श्री आर.एस.चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा अपने शुभाशीष से बच्चों का मनोबल बढ़ाया।
छात्र-छात्राओं ने विविध रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वार्षिकोत्सव की रौनक देखते ही बनती थी। स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती गीता सिंह ने छात्रों के वार्षिक गतिविधियों का संपूर्ण लेखा-जोखा प्रस्तुत किया।
इसके पहले अतिरिक्त निदेशक श्री शिव शक्ति सिंह और प्रधानाचार्या श्रीमती गीता सिंह ने स्वागत भाषण से अतिथियों का सत्कार किया। कार्यक्रम का संचालन अध्यापिका अंशिता शर्मा के मार्गदर्शन में छात्र – छात्राओं ने अति उत्साह से किया।
साहित्यिकी में मधु कांकरिया के उपन्यास” ढलती सांझ का सूरज” पर चर्चा
कोलकाता । मधु कांकरिया हिंदी उपन्यासकारों में शोधपरक उपन्यासों के लिए जानी जाती हैं। साहित्यिकी संस्था ने “ढलती सांझ का सूरज” चर्चा आयोजित की । कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ मंजु रानी गुप्ता ने मंच पर आमंत्रित प्रसिद्ध उपन्यासकार मधु कांकरिया, कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष साहित्यकार डॉ राज्यश्री शुक्ला (भारतीय भाषा परिषद की सचिव) और वक्ता कथाकार और साहित्यकार डॉ शुभ्रा उपाध्याय कार्यक्रम की अध्यक्ष दुर्गा व्यास (प्रसिद्ध समाज सेवी और साहित्यकार, राजस्थान ब्राह्मण संघ की अध्यक्ष ) सभी विदूषियों ने अपने वक्तव्य रखे।
रेवा जाजोदिया ने संचालन करते हुए उपन्यासकार मधु कांकरिया का परिचय दिया। ढलती सांझ का सूरज उपन्यास पर डॉ राज्यश्री शुक्ला ने अपने महत्वपूर्ण विचारों को व्यक्त करते हुए उपन्यास के कथानक और उसके नए शिल्प पर चर्चा की। बताया कि यह उपन्यास वस्तुतः स्त्री केंद्रित उपन्यास है जिसमें एक माँ पूरे देश अर्थात भारत माँ के रुप में विस्तार पाती है। भौतिकवाद के इस दौर में किसानों की आत्महत्याओं की समस्या विशेषकर महाराष्ट्र के विदर्भ की समस्याएं, बच्चों का विदेश भेजना, भौतिक सुख सुविधाओं के घेरे में पड़कर उपन्यास के पात्र अविनाश का अपनी माँ से मिलने की चाह होते हुए भी बीस वर्ष स्विट्जरलैंड में रह जाना । सफलता के साथ जीवन को सार्थक कैसे बनाएं जैसे अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं पर डॉ शुक्ला ने अपने विचार रखे।
डॉ राज्यश्री शुक्ला ने कहा कि उपन्यास की घटनाएँ बहुत ही रोचक हैं जो पाठक को बांधे रखती हैं। स्त्रियों की स्थिति और स्त्री विमर्श पर चर्चा करते हुए स्त्री के सामाजिक विकासक्रम पर भी विचार व्यक्त किया ,लेखिका के उपन्यास ‘पत्ता खोर’ का भी जिक्र किया । किसानों की आत्महत्या, केंद्र में स्त्री, किसान जीवन के अतिरिक्त उपन्यास में सभ्यता संस्कृति और समाज की चर्चा है। जीवन की सफलता के क्या मायने हैं बच्चे कैसे सफल होगें। इस भूमंडलीकरण के दौर में सुख- सुविधाओं के पीछे भागते बच्चों को माँ के दिए संस्कार काम आते हैं और वे देश के लिए अपने उत्तरदायित्व को समझते हैं। माँ देश में रहकर अकेले हताश नहीं होती बल्कि वह एक तार टूटता है तो दूसरे तारों को जोड़ने का कार्य करती है। यही कारण है कि बीस साल बाद भी उसका बेटा अविनाश पूरे महाराष्ट्र के विदर्भ के किसानों के साथ साथ पूरे भारत की चिंता करता है।
जननी जन्मभूमि माँ से जुड़ी है भारत की प्राण नाड़ी को समझना है। उपन्यास में बड़ी सीमा के दर्शन होते हैं। पूरे देश से जुड़ कर उसकी माँ किसानों के परिवार से जुड़ती है। अपने दायरे को बढ़ायी है । जिंदगी के तार टूट जाय तो क्या दूसरे तार नहीं है। नया शिल्प है। सफल सार्थक उपन्यास है जो समाधान की दिशा में ले जाता है। वक्ता डॉ शुभ्रा उपाध्याय ने उपन्यास के मूल में राष्ट्रीय भावना को महत्वपूर्ण बिंदु माना है। विदेश में बेटा अविनाश माँ को याद करता है लेकिन फिर भी उसकी आत्मा भारत माँ से ही जुड़ी हुई है। विदेश स्विट्जरलैंड से बीस साल बाद भारत आता है माँ से मिलने लेकिन अविनाश को मांँ का कंकाल मिलता है। वस्तुतः अविनाश के चरित्र में मूलरूप में माँ के दिए संस्कारँ है। बीस वर्षों के बाद भारत की बदलती स्थिति और समसामयिक समस्याओं पर लिखा उपन्यास दो खंडों में है । किसान की समस्या 5 वें अंक से शुरू होती और दूसरे खंड में भारत माँ की अवधारणा है। इसमें राष्ट्रीय चेतना की भावना जबरदस्त है। उपन्यास का शिल्प नया है।सफलता स्वयं तलाशनी पड़ती है। तभी जीवन की सार्थकता है। बारह अंक में माँ नहीं है बल्कि माँ की मांग है। भारत आकर 28वें अंक में अविनाश बहुत कुछ करता है।वह विदर्भ के किसान के क्षेत्र को चुनता है जहाँ किसानों ने बड़ी संख्या में आत्महत्या की है । समस्या का समाधान भी सोचना, प्रेमचंद के बाद किसानों को संबोधित करते हुए उनकी समस्याओं को जमीनी हकीकत पर लिखा यह पहला उपन्यास है। self help की बात आती है अविनाश किसानों के गांव की सड्कों को हाइ वे से जोड़ता है। हमें सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं रहकर स्वयं सहयोग देने से किसानों की बहुत सी समस्याएं हल हो सकती हैं। एनजीओ और कई लोग व्यक्तिगत रूप से सहयोग देने के लिए आगे आ जाते हैं। उपन्यास की पंक्तियाँ हमें किसान के विस्तार के साथ हमारे भीतर के किसान का भी विस्तार करने के लिए प्रेरित करता है ।
रेवा जाजोदिया ने अपने सफल संचालन में उपन्यास को सफल और सार्थक बताते हुए कहा कि माँ ने फलक का विस्तार किया वहीं बेटे को पत्र द्वारा विरासत में भारत प्रेम को विस्तार दिया है । ढलती सांझ का सूरज शोधपरक उपन्यास है।
मधु कांकरिया ने सात उपन्यास, 70-75 कहानी लिखी है और कई साहित्यिक पुरस्कार से सम्मानित हुईं हैं। वे जमीनी स्तर की सिपाही हैं । इच वन टीच वन एनजीओ से जुड़ी हैं। अनाथ बच्चों को साक्षर करने का बीड़ा उठाया ।
मधु कांकरिया का लेखन भावना दर्शन परक है। वे मानती हैं कि आज भौतिकतावाद चरम पर है और सांस्कृतिक जीवन मूल्यों का रह्रा हुए। जरुरत से ज्यादा सुविधाएं है । बुद्ध और गीता का ह्रास हुआ है , जीवन की समस्याओं को दूर किया जा सकता है।आज बच्चों का बचपना कम हो गया है और आत्महत्या बढ़ रही है। हम अच्छा इंसान नहीं बना रहे हैं। जीवन सार्थक हो तो सफल हो सकता है। शर्मिला वोहरा ने – उपन्यास की शीर्ष लाइन समर्थ सफलता के आधार पर उपन्यास के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला जिसकी सूत्रधार स्वंय लेखिका है। अध्यक्षीय वक्तव्य में दुर्गा व्यास ने सभी वक्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि उपन्यास बहुत ही महत्वपूर्ण और समसामयिक है ।अविनाश जाता है तो खरा सोना था लेकिन लौटा तो विचलित होकर। स्वनिर्भर हो जाएं तो समस्याएं खत्म हो जाती है। अम्मा के चरित्र का विस्तार होता है। लेखिका ने महाराष्ट्र की पूरी चित्रात्मक यात्रा उपन्यास में करवाई है जो विशिष्टता है। सार्थक लेखन, दार्शनिकता नैनसी को लिखे पत्रों में दिखाई पड़ती है । आशा जायसवाल ने धन्यवाद ज्ञापन दिया । कोरोना के बाद 16.11.2022 सायं 4.30 पर साहित्यिकी संस्था का प्रथम ऑफलाइन कार्यक्रम भारतीय भाषा परिषद के छोटे सभागार में हुआ। वाणीश्री बाजोरिया और डॉ मंजू रानी गुप्ता ने सक्रिय योगदान दिया।
लाइमलाइट सीवीडी डायमंड्स अब कोलकाता में
कोलकाता । लाइमलाइट सीवीडी डायमंड्स अब कोलकाता में भी उपलब्ध है।मुंबई में अपने फ्लैगशिप स्टोर के साथ घरेलू लग्जरी ब्रांड के आकर्षक स्टोर के रूप में दिल्ली, बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद के साथ देश के 20 अन्य शहरों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद अब कोलकाता के फोरम मॉल में लाइमलाइट सीवीडी डायमंड्स का नया आउटलेट स्टोर खोला गया है। इस नए शोरूम में डायमंड्स के गहनों की बिलकुल नई डिजाइन का बेहतरीन कलेक्शन उपलब्ध है।
शोरूम के लांचिंग कार्यक्रम में संसद व अभिनेत्री नुसरत जहां के अलावा ओडिशा के मयूरभंज की शाही राजकुमारी अक्षिता भंजदेव और मृणालिका भंजदेव भी मौजूद थीं। इस मौके पर विनीता शाह निदेशक, लाइमलाइट स्टोर, कोलकाता) और पंकज जालान (निदेशक, लाइमलाइट स्टोर, कोलकाता) उपस्थित रहे ।
इस अंतरराष्ट्रीय लक्जरी बुटीक आउटलुक स्टोर में नए युग की तकनीक और पारंपरिक बढ़िया आभूषणों के कई डिजाइन के गहने मौजूद है, जो आज की पीढ़ी को सबसे अधिक आकर्षित करता है। फोरम मॉल में खोले गए इस आउटलेट में ग्राहकों को बेहतरीन सॉलिटेयर ज्वेलरी रेंज का अद्भुत होलोग्राम डिस्प्ले देखने को मिलेगा। इस आउटलेट में लाइफटाइम बायबैक, 100% एक्सचेंज गारंटी, डिजाइन कस्टमाइजेशन के साथ ग्राहकों को उनके खरीददारी पर ईएमआई की सुविधा भी मिलेगी। जो ग्राहकों के मन में इस ब्रांड के प्रति विश्वास जगाने में काफी अहम भूमिका निभाएगी। सभी लाइमलाइट सीवीडी डायमंड्स आउटलेट स्टोर पर उपलब्ध हीरे दुनिया के सबसे शुद्ध हीरे हैं। यह जीआईए, आईजीआई और एसजीएल जैसे सभी विश्व प्रसिद्ध हीरा ग्रेडिंग संगठनों द्वारा मान्य और प्रमाणित है।
अभिनेत्री और सांसद नुसरत जहां कहती हैं, मुझे हमेशा से ही प्रयोगशाला में विकसित किए जानेवाले हीरे की डिजाइन काफी पसंद है, क्योंकि इन हीरे की गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं किया जाता । राजकुमारी अक्षिता ने कहा कि लैब में विकसित हीरों का खनन नहीं किया जाता है, बल्कि इसे अत्याधुनिक तकनीक से विकसित किया जाता है, जिससे यह एक अलग आकर्षक लुक देता है, जो अन्य ग्राहकों की तरह हमे भी काफी आकर्षित करता है। राजकुमारी मृणालिका ने इस मौके पर अपने जीवन की हसीन पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि, मैं हमेशा बचपन में अपने माता-पिता, दादा-दादी से कोहिनूर के सबसे कीमती और सुंदर हीरा होने के बारे में सुना करती थी, आज यहां मुझे एक नई जानकारी मिली, कि कोहिनूर हीरे की शुद्धता वास्तव में सीवीडी के अत्याधुनिक लैब की शुद्धता से परखी गई है। क्योंकि यहां की तकनीक काफी बेहतरीन प्रभावशाली और कारगर होती है।
वर्जिनिया वूल्फ के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा
कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की लाइब्रेरी नोलेज रिसोर्स में बुक रिडिंग सेशन में बीसवीं सदी की प्रमुख अंग्रेजी लेखिका वर्जिनिया वूल्फ के दो उपन्यासों टू दि लाइट हाउस और श्रीमती डलोवे पर चर्चा की गई। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कहा कि वर्जिनिया वूल्फ के उपन्यास पाठकों की भावनाओं को बहुत गहराई तक खोदता है और कई भावनाओं को बाहर लाता है जो सभी को छूता है। सबके भीतर की इन आंतरिक अनुभूतियों को वह अद्भुत ढंग से यथार्थ से जोड़ता है। यह वास्तव में पाठक को कथानक के भीतर डुबो देता है, जो समुद्र की लहरों की तरह तीव्र भावनाओं से दूर हो जाता है
कम्युनिकेशन और सॉफ्ट स्किल ट्रेनर समीक्षा खंडूरी ने बताया कि वर्जीनिया वूल्फ के उपन्यास में एक तरह से कथा के माध्यम से क्या और कैसे को परिभाषित किया गया है।सतही समानता से अधिक उपन्यास उसकी वास्तविक जीवन की कहानी को दर्शाता है, व्याख्यात्मक आधारों का संदर्भ देता है , अवचेतन चिंतन जो कथानक को आगे बढ़ाता है और एक द्विआधारी संदर्भ में पारिवारिक गति का पारभासी अभिप्राय सेक्सवाइज, वूल्फ के सबसे चिह्नित भेद सभी इस पुस्तक में उनकी तेजस्विता में प्रदर्शित होता है। विद्यार्थियों द्वारा दोनों उपन्यासों पर विवेचनात्मक चर्चा की गई। मिसेज़ डलोवे उपन्यास दो कहानियों के माध्यम से व्यक्तिगत अनुभव में समय की प्रकृति को संबोधित करता है, विशेष रूप से पात्र क्लेरिसा की वह एक पार्टी की तैयारी करती है और उसकी मेजबानी करती है और मानसिक रूप से क्षतिग्रस्त युद्ध के अनुभवी सेप्टिमस वॉरेन स्मिथ की। दो पात्रों को एक दूसरे के लिए पन्नी के रूप में देखा जा सकता है। टू द लाइट हाउस जीवन और उसकी वास्तविकता पर सवाल उठाता उपन्यास है। एक ओर जब यह विवाह और समाज में महिलाओं की स्थिति की जांच करता है, तो यह जीवन की कठिन जटिलताओं जैसे अलगाव और उन्मूलन को भी चित्रित करता है। श्री और श्रीमती रामसे, अपने आठ बच्चों के साथ, विभिन्न पड़ोसियों और नौकरों से घिरे हेब्राइड्स के घर में रहते हैं। वर्जीनिया वूल्फ पारिवारिक जीवन में अंतर-संबंधों की विसंगतियों और पेचीदगियों की एक आश्चर्यजनक कहानी बुनती है। बीसवीं शताब्दी में वर्जीनिया वूल्फ के सबसे लोकप्रिय कार्यों में से एक टू द लाइटहाउस है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डीन प्रो दिलीप शाह ने कहा कि लेखक द्वारा रचित पात्रों का चित्रण ही जीवंत होता है तभी लेखिका या लेखक प्रसिद्धि प्राप्त करता है। समीक्षा ने मिसेज़ डलोवे उपन्यास के पात्रों की चर्चा करते हुए कहा कि उपन्यास में लेखिका एक नैरेटर की तरह है। दोनों उपन्यास के कुछ अंशों को विद्यार्थियों ने बहुत ही प्रभावशाली ढंग से पढ़ा। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि दुनिया की सभी भाषाओं में लिखे श्रेष्ठ साहित्य और लेखक के व्यक्तित्व को हमें जानना चाहिए तभी विचार समृद्ध होते हैं। फज़ल करीम ने बुक रिडिंग का महत्व बताया। उज्जवल करमचंदानी ने उपन्यास की महत्वपूर्ण उक्तियों को पढ़ा जो जीवन की महत्वाकांक्षा, सफलता और असफलता को दर्शाता है। नम्रता चौधरी ने उपन्यास के आधार पर जीवन में बदलते हुए संबंधों पर आज के संदर्भ में अपनी बात कही जो प्रासंगिक है। आदित्य मुखर्जी, कशिश शॉ, अनिकेत दास गुप्ता, रूपेश कुमार झा, शेख मोहम्मद जहिरुददीन, यश सिन्हा का सक्रिय योगदान रहा। संयोजक डॉ वसुंधरा मिश्र और समीक्षा ने डीन प्रो दिलीप शाह और पुस्तकालय के अधिकारियों को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस कार्यक्रम के लिए सुविधा उपलब्ध कराई।
पेटीएम से बुकिंग पर मुफ्त सिलेंडर की सुविधा
नये यूजर्स को मिलेगा कैशबैक
कोलकाता । पेटीएम ने अपने प्लेटफॉर्म से एलपीजी सिलेंडर बुक कराने वाले नये यूजर्स के लिये रोमांचक डील्स की घोषणा की है। देखभर में लाखों यूजर्स अपने एलपीजी सिलेंडर्स बुक करने के लिये सुविधाजनक रूप से पेटीएम का इस्तेमाल करते हैं। अभी पेटीएम ऐप पर भारत गैस के लिये बुकिंग विशेष तौर पर उपलब्ध है। पेटीएम के मौजूदा यूजर्स के पास मुफ्त में सिलेंडर पाने का मौका है। इसके लिये उन्हें पेटीएम ऐप पर भुगतान प्रक्रिया पूरी करने से पहले कूपन कोड ‘FREEGAS’ का इस्तेमाल करना होगा। कंपनी ने हाल ही में यूजर्स को अपने गैस सिलेंडर की बुकिंग ट्रैक करने और रिफिल्स के लिये ऑटोमेटेड इंटेलिजेंट रिमाइंडर्स पाने में सक्षम बनाने वाले खोजपरक फीचर्स जोड़कर सिलेंडर की बुकिंग का अनुभव बेहतर बनाया है।
पेटीएम के मुताबिक इस ऑफर में नये यूजर्स अपनी पहली बुकिंग पर 30 रुपये का फ्लैट कैशबैक पा सकते हैं। इसके लिये उन्हें पेटीएम ऐप पर भुगतान पूरा करते समय “FIRSTCYLINDER” प्रोमोकोड अप्लाय करना होगा। यह कैशबैक ऑफर सभी 3 प्रमुख एलपीजी कंपनियों- इण्डेन, एचपी गैस और भारत गैस की सिलेंडर बुकिंग पर लागू है। यूजर्स ‘पेटीएम नाऊ पे लेटर’ प्रोग्राम पेटीएम पोस्टपैड में एनरोल कर सिलेंडर बुकिंग के लिये अगले महीने भी भुगतान कर सकते हैं।
ऐसे करें बुकिंग
- यूजर को केवल ‘Book Gas Cylinder’ टैब पर जाना है
- गैस प्रोवाइडर को सिलेक्ट करना है
- मोबाइल नंबर/एलपीजी आईडी/कंज्यूमर नंबर एंटर करना है
- फिर पेमेंट के लिये अपने पसंदीदा तरीके से भुगतान करना है
- जैसे पेटीएम वैलेट, पेटीएम यूपीआई, कार्ड्स और नेट बैंकिंग।
- नजदीकी गैस एजेंसी सिलेंडर को पंजीकृत पते पर डिलीवर कर देगी।





