Wednesday, July 8, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 187

महिला प्रीमियम लीग मुंबई इंडियन्स महिला टीम में भवानीपुर कॉलेज की छात्रा चयनित

बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा है धारा गुर्जर

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज में पर्सनल विषय पर ‘एन वोग’ सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्रांडिंग वर्कशॉप में बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा धारा गुर्जर को महिला प्रीमियम लीग डब्ल्यू पीएल 2023 में मुंबई इंडियंस महिला टीम में चुने जाने पर सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम 22 फरवरी, 2023 को वर्कशॉप कॉन्सेप्ट हॉल में हुआ। छात्र मामलों के डीन प्रोफेसर दिलीप शाह ने उनकी अविश्वसनीय उपलब्धि के लिए सम्मानित किया । उनकी अविश्वसनीय उपलब्धि का जश्न मनाते हुए, कॉलेज ने उन्हें प्रभारी शिक्षक, डॉ. शुभब्रत गंगोपाध्याय, खेल अधिकारी भाविन परमार और रूपेश गांधी सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आईपीएल टीम में उनके हालिया चयन के लिए एक स्मृति चिन्ह प्रदान किया। । छात्र मामलों के डीन प्रोफेसर दिलीप शाह ने उन्हें मंच पर आमंत्रित करते हुए उनके चयन के विषय में कहा कि यह रोज की खबर नहीं है बल्कि वह सभी महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए मार्ग प्रशस्त करती है। 22 फरवरी को कॉन्सेप्ट हॉल में किया गया।
उनकी उपलब्धि छात्रों को खुद को एक ब्रांड के रूप में सोचने के लिए प्रेरित करने का एक तरीका बन गई, जिसकी अपनी एक भाषा होनी चाहिए। व्यक्तिगत ब्रांडिंग विषय पर अतिथि वक्ता अविक रॉय ने व्यक्तिगत ब्रैंडिंग पर अपने विचार व्यक्त किए । अविक राय फैशन उद्योग में 20 से अधिक दशकों के अनुभव के साथ एक अनुभवी पेशेवर हैं। वर्तमान में जिनका करियर फैशन डिजाइनिंग, फैशन इवेंट्स, लुक बुक्स, कैंपेन और स्टाइल गाइड डिजाइनिंग में फैला हुआ है। राय पर्ली अकादमी में स्नातकोत्तर छात्रों के एसोसिएट प्रोफेसर हैं । राय ने विद्यार्थियों से पूछना शुरू किया कि व्यक्तिगत ब्रांडिंग के बारे में उनका क्या विचार है और फिर इस बारे में बातचीत शुरू की कि व्यक्तिगत ब्रांडिंग वास्तव में क्यों मायने रखती है। उन्होंने छात्रों को स्वेच्छा से मंच पर आने के लिए उन्हें आमंत्रित किया और पूछा कि “वे खुद को एक व्यक्ति के रूप में कैसे परिभाषित करेंगे” और उन्होंने कहा कि यह दूसरों के लिए उनके बारे में एक धारणा बनाता है। अपने करियर के शुरुआती दिनों में खुद को पहचानने के महत्व के बारे में बताया क्योंकि यह अंततः उनके संपूर्ण व्यक्तित्व में योगदान देगा। पूरा सत्र छात्रों को प्रेरित करने और एक पोर्टफोलियो के माध्यम से खुद को ब्रांड बनाने में मदद करने के लिए था, सभी विद्यार्थियों पर एक मजबूत प्रभाव पैदा करने के लिए लिंक्डइन एप के विषय में बताया । विद्यार्थियों से यह भी पूछा कि उनमें से कितने नियत समय से पांच मिनट पहले एक जगह पर रहना पसंद करते हैं, समय के पाबंद होने के नाते, विनम्रता और दूसरों को स्वीकार करते हुए यह भी ध्यान रखते हुए कि वे कैसे कपड़े पहनते हैं, प्रत्येक गुण आजीवन संबंध बनाने में योगदान देते हैं।
कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सेशन से हुआ जिसमें छात्र छात्राओं को अपनी शंकाओं का समाधान मिला।
व्यक्तिगत ब्रांडिंग वास्तव में किस प्रकार विद्यार्थियों के लिए सहायक है। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि 120 से अधिक छात्रों की उपस्थिति में पर्ल एकेडमी की सुश्री तृषा पोद्दार; अविक रॉय को प्रो. दिलीप शाह द्वारा सम्मानित किया गया।

लिटिल थेस्पियन का दसवां रंग अड्डा आयोजित

कोलकाता । लिटिल थेस्पियन द्वारा आयोजित दसवां रंग अड्डा कोलकाता के सुजाता देवी विद्या मंदिर में गत 26 फरवरी 2023 को सम्पन्न हुआ। लिटिल थेस्पियन के संस्थापक अज़हर आलम और उमा झुनझुनवाला की परिकल्पना की देन है ये रंग अड्डा । ये दोनों हमेशा से चाहते रहे हैं कि नई पीढ़ी में रंग संस्कार का बीज प्रफुल्लित हो। इस रंग अड्डे के केंद्र में फ्रेंच नाटककार मौलियर और 1950 के दशक में भारत में हिंदी साहित्य के नई कहानी साहित्यिक आंदोलन के अग्रदूत मोहन राकेश थे । मौलियर पर समीक्षा पाठ पार्वती रघुनंदन ने किया, वहीं आषाढ़ का एक दिन पर समीक्षा पाठ राधा ठाकुर ने किया।। मोहन राकेश पर आलेख पाठ सुधा गौड़ और प्रियंका सिंह ने किया। आषाढ़ का एक दिन नाटक के एक अंश का पाठ मनोहर कुमार झा, इंतखाब वारसी, विशाल कुमार राउत और प्रियंका सिंह ने किया। मौलियर का नाटक तारतुफ के एक अंश का पाठ संगीता व्यास , पार्वती रघुनंदन, राधा ठाकुर, निताई समादर तथा अमित कुमार यादव ने किया। राजकमल चौधरी की कविता ‘ शव – यात्रा का मृत संगीत ‘ का अभिनयात्मक पाठ उमा झुनझुनवाला और आसिफ़ अंसारी ने किया। स्व रचित कविता का अभिनयात्मक पाठ संगीता व्यास ने किया और निताई समदार ने बांग्ला कविता का पाठ किया | कार्यक्रम में अतिथि के रूप में उपस्थित श्री शिक्षायतन कॉलेज की प्रोफ़ेसर अल्पना नायक ने कहा कि उमा दी एक ऐसा कलाकार वर्ग तैयार कर रहीं हैं जो किसी भी विधा के अंतर्मुखी अर्थ से अभिप्रेरित रहेंगें। अब लिटिल थेस्पियन 12 वां राष्ट्रीय नाट्य उत्सव के आगाज़ की तैयारी में हैं जो 18 मार्च से 23 मार्च तक ज्ञान मंच में आयोजित होगी।

‘प्रोग्राम ऑन एडवांटेज एमएसएमई – द बिग स्ट्राइड्स’

कोलकाता । एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम-पश्चिम बंगाल चैप्टर ने एनसीएलटी कोलकाता बार एसोसिएशन एवं कंसर्न फॉर कलकत्ता और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एमसीएक्स) ने संयुक्त रूप से ‘एडवांटेज एमएसएमई-द बिग स्ट्राइड्स’ विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया। पश्चिम बंगाल में पूरे देश में एमएसएमई की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। एमएसएमई के जरिये उद्योग जगत में पश्चिम बंगाल की प्रतिभा और उद्यमशीलता को दिखाने के उद्देश्य से ही इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में शिशिर बाजोरिया (अध्यक्ष, आईआईएम शिलांग), अधिवक्ता नारायण जैन (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स, एआईएफटीपी, सीए संजीब सांघी (आईसीएआई के ईआईआरसी के उपाध्यक्ष), सीएस डॉक्टर एवं एडवोकेट ममता बिनानी (पूर्व अध्यक्ष, आईसीएसआई और एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम पश्चिम बंगाल चैप्टर की वर्तमान अध्यक्ष, एस एम गुप्ता (एनसीएलटी कोलकाता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष), के एस अधिकारी (कंसर्न ऑफ कोलकाता के अध्यक्ष) के अलावा कई अन्य विशिष्ट हस्तियां इस कार्यक्रम में मौजूद थें। इस कार्यक्रम का विषय ‘एमएसएमई के प्रति सरकारी दृष्टिकोण’, ‘एमएसएमई के लिए बुनियादी प्रौद्योगिकी’, ‘एमएसएमई और स्टार्ट अप के लिए आयकर लाभ दिलवाना’ और इसके अलावा ‘एमएसएमई के लिए अन्य कई वित्त योजनाएं’ शामिल थे।

इस मौके पर सीएस डॉक्टर एवं एडवोकेट ममता बिनानी (पूर्व अध्यक्ष आईसीएसआई और एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम पश्चिम बंगाल चैप्टर की अध्यक्ष) ने कहा, एमएसएमई एक ऐसा क्षेत्र है जो न केवल सभी तरह के घरेलू उत्पाद को बढ़ावा देता है, बल्कि 6 करोड़ से अधिक की इकाइयाँ और 11 करोड़ से अधिक श्रमिक के साथ एमएसएमई क्षेत्र कृषि के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता क्षेत्र होने के कारण यह राष्ट्र के सामाजिक और समान विकास के लिए यह एक बड़ा संबल है। आर्थिक क्षेत्र में पर्याप्त योगदान एवं विकास के साथ सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 30% और सभी भारतीय निर्यातों का 45% से अधिक इस क्षेत्र में जाता है। एमएसएमई के बारे में: वैश्विक रैंकिंग इंडेक्स पर भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एमएसएमई काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह दर्शाता है कि क्षेत्र कितनी तेजी से विकास कर रहा है।

आदर्श, भावना एवं यथार्थ की त्रिवेणी रचती हैं पुस्तकें – अजयेन्द्र त्रिवेदी

कोलकाता। ‘ पुस्तकें आदर्श, यथार्थ एवं भावना की त्रिवेणी रचती हैं। यह भी एक सुखद संयोग रहा कि इस कार्यक्रम में रचनाकार, समीक्षक और पाठक तीनों वर्ग मौजूद हैं जो अपने आप में एक स्वर्णिम त्रिभुज का सृजन कर रहा है। सरोज कौशिक की पुस्तक ‘ पूर्णमिदं ‘ को आदर्श के उच्चतम शिखर पर देखा गया , तो नन्दलाल रौशन की पुस्तक ‘हक में हैं खामोशियाँ ‘ भावनाओं की आकाश गंगा आलोड़ित करती सी नज़र आई और रामनाथ बेख़बर की पुस्तक ‘ ख्वाहिश ‘ की रचनायें यथार्थ की पुष्ट जमीन पर खड़ी हो संघर्ष की विजय गाथा का आह्वान कर रही है। ‘–ये उद्गार हैं विशिष्ट साहित्यसेवी श्री अजयेन्द्र नाथ त्रिवेदी के, जो आज श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा आयोजित एक शाम किताबों के नाम के द्वितीय आयोजन में बतौर अध्यक्ष बोल रहे थे।
इस कार्यक्रम में नंदलाल रौशन की कृति ‘ हक में हैं खामोशियॉं ‘,सरोज कौशिक की ‘ पूर्णमिदम् ‘ एवं  रामनाथ बेखबर की ‘ ख्वाहिश ‘ पर विशेष चर्चा हुई। लेखकीय वक्तव्य के पश्चात समीक्षात्मक टिप्पणी डॉ अभिलाषा पांडेय, दुर्गा व्यास, परमजीत पंडित एवं ऋतु डागा ने की।
कार्यक्रम के शुरुआत में कुमारसभा के अध्यक्ष महावीर बजाज ने इस कार्यक्रम की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘परम्परा लुप्त न हो तथा हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें ‘ के भाव से यह आयोजन प्रारंभ किया गया। यह महानगर के लेखकों के लिए चर्चा का खुला मंच होगा। पुस्तकों के पठन-पाठन के लिए इससे एक जागरूकता का सृजन होगा।
कार्यक्रम का प्रारंभ श्री उदय यादव ने ‘देश हमें देता है सब-कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें ‘ गीत के सस्वर पाठ से किया। कार्यक्रम का संचालन किया डॉ कमल कुमार ने तथा धन्यवाद ज्ञापन किया कुमारसभा के मंत्री बशीधर शर्मा ने। सर्वश्री डॉ ऋषिकेश राय, अजय चौबे, नंदकुमार लढा, श्रीमोहन तिवारी, श्रीमती दिव्या प्रसाद एवं श्रीमती गायत्री बजाज ने अतिथियों का स्वागत किया। इस साहित्यिक गोष्ठी में महानगर के कई गणमान्य साहित्यकार एवं विद्वतजन तथा साहित्यप्रेमी सम्मिलित हुए जिन्होंने इस सारस्वत आयोजन की सराहना की।
गोष्ठी में रेणु गौरीसरिया, सुधा जैन, रेखा ड्रोलिया, डॉ सत्यप्रकाश तिवारी, ज्ञान प्रकाश पाण्डेय, जीवनसिंह, संजय मंडल, सीताराम तिवारी, अजय सराफ, अशोक सोनकर, अरविंद तिवारी, मनोज काकड़ा,डॉ आर एस मिश्रा, आदित्य बिनानी, भागीरथ सारस्वत, गुड्डू दूबे, अरुण सोनी, जसवंत सिंह, सुषमा त्रिपाठी, अनिल उपाध्याय, विनोद यादव, बृजेन्द्र पटेल, शनि चौहान, श्रीप्रकाश गुप्त, रुद्रकांत झा, नितिश सिंह, चंद्र कुमार जैन, रानी टांटी, विवेक तिवारी प्रभृति विशेष रूप से उपस्थित थे।

 

रवीन्द्र भारती के जोड़ासांको संग्रहालय में जुड़ेगी इटली दीर्घा

कोलकाता । रवीन्द्र भारती जोड़ासांको संग्रहालय में एक नयी दीर्घा जुड़ने जा रही है । विश्वविद्यालय के इस संग्रहालय में अब इटली की दीर्घा स्थापित होगी । इसे लेकर रवीन्द्रभारती विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. सब्यसाची बसु राय चौधरी एवं कोलकाता में इटली के कौंसुलेट जनरल डॉ. गियानुलुका रुबागोट्टी ने हस्ताक्षर किये । यह समझौता कविगुरु रवीन्द्र नाथ की इटली यात्रा को स्मृतियों को सहेजने के उद्देश्य से किया गया । इस दीर्घा के निर्माण एवं यहाँ लगने वाली प्रदर्शनी का अधिकतर खर्च इटली का वाणिज्य दूतावास वहन करेगा । रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर सब्यसाची बसु रायचौधरी ने कहा कि कविगुरु रवीन्द्रनाथ तीन बार इटली गये और 10 से अधिक शहरों में गये । कवि गुरु के इस अनुभव को दीर्घा तस्वीरों, दस्तावेजों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा । इसके साथ इटली से सम्बन्धित उनकी कविताएं भी प्रदर्शित किए जाएंगे । उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय एवं राज्य सरकार भी इस समझौते को लेकर काफी सकारात्मक हैं और यह समझौता भारत – इटली की मैत्री को मजबूत बनाने में सहायक होगा । गौरतलब है कि मार्च के प्रथम सप्ताह में इटली के प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी भारत आ रहे हैं और इसे देखते हुए यह पहल काफी महत्व रखती है । इस अवसर पर भारत में इटली के राजदूत विन्सेंजो डी लुका ने बधाई सन्देश भेजा । उम्मीद है कि कुछ महीनों में यह दीर्घा बनकर तैयार हो जाएगी ।

विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में मनाया गया मातृभाषा दिवस

मिदनापुर। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से परिचर्चा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस अवसर पर स्वागत वक्तव्य देते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा कि भाषा का हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। भाषा विचार विनिमय का सशक्त माध्यम है। हमें अपनी-अपनी मातृभाषा से जुड़े रहने की जरूरत है। अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि यह दिवस भाषा के लिए शहीद होने वाले विद्यार्थियों के प्रति श्रद्धांजलि है। यह आंदोलन एक भाषा के दायरे से निकलकर दुनिया की तमाम भाषाओं के साथ जुड़ गया है। हमें सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।इस अवसर पर शोधार्थी रूपेश कुमार यादव ने कहा कि आज मातृभाषाओं पर सांस्कृतिक साम्राज्यवाद और भाषायी वर्चस्व का खतरा बढ़ा है।उनसे टकराने के लिए हमें सांस्कृतिक आयोजनों से अपनी पीढ़ी को जोड़ना होगा।शोधार्थी मिथुन नोनिया ने कहा कि मातृभाषाएँ ही हमारी अस्मिता की पहचान हैं। उष्मिता गौड़ा ने कहा मातृभाषाओं को सम्मान मिलने से संभावनाओं में विस्तार होगा। इस अवसर पर संजीत महतो,शशि यादव,मोनू,प्रिया चौधरी एवं नंदिनी साव ने गीत और कविताएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन करते हुए विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को बलिदान दिवस के तौर पर मनाने से ज्यादा जरूरी है कि हम आंतरिकता के साथ मातृभाषाओं को सक्षम बनाएं। उन्हें सृजन ,संवाद और रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। यह दिवस सांस्कृतिक बहुलता,बहुभाषिकता और भाषा संरक्षण के पर्व के रूप में मनाना चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि मातृभाषाओं को रोजगार और समुचित पठन-पाठन की व्यवस्था के बिना हम आगे नहीं ले जा सकते हैं।इसे ज्ञान, विज्ञान और व्यापक मानवीय सरोकार की भाषा बनाने की जरूरत है।

स्कॉटिश चर्च कॉलेज में मनाया गया भाषा दिवस

कोलकाता । 21 फरवरी 2023 के ऐतिहासिक दिन को स्कॉटिश चर्च कॉलेज के बांग्ला विभाग की ओर से भाषा दिवस के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कॉलेज के सेमिनार हाल में आयोजित इस समारोह का शुभारंभ काले -सफेद वस्त्रों में सुसज्जित विद्यार्थियों के “आमार भाइएर रक्ते रागानो २१ए फरवरी” गीत के साथ हुआ । समारोह में महाविद्यालय के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं विभिन्न विभागों के अध्यापक समेत बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे। नृत्य – संगीत, आवृत्ति एवं एकल अभिनय से सजे इस कार्यक्रम ने सबका मन मोह लिया। इस अवसर पर बांग्ला विभाग के दो विद्यार्थियों ( तीर्थंकर मालाकार एवं अभ्रजित भट्टाचार्य) द्वारा निर्मित वृत्त चित्र दिखाया गया। अनुष्का चौधरी एवं देवांजना भट्टाचार्य के अद्भुत नृत्य और गायन ने दर्शकों की वाहवाही बटोरी। विद्यार्थियों ने भाषा शहीद मीनार की एक खूबसूरत अनुकृति बनाई थी जिसे इस अवसर पर प्रदर्शित किया गया। उपस्थित अध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने उस अनुकृति पर फूल चढ़ाकर अपनी श्रद्धा ज्ञापित की। महाविद्यालय की अध्यक्षा डॉ मधुमंजरी मंडल एवं उपाध्यक्ष डॉ. सुप्रतिम दास ने कार्यक्रम में अपना वक्तव्य रखा और विद्यार्थियों की हौसला अफजाई की। समारोह के अंत में बांग्ला विभाग के तमाम विद्यार्थियो ने हाथों में पोस्टर लेकर, गीत गाते हुए महाविद्यालय के चारों ओर पदयात्रा की।

चैताली ब्रह्म
प्राध्यापिका, बांग्ला विभाग
स्कॉटिश चर्च कॉलेज
कोलकाता

भवानीपुर कॉलेज ने मनाया विश्व मातृभाषा दिवस

मेरा गौरव मेरी आशा बांग्ला भाषा था विषय
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बांग्ला विभाग की ओर से विश्व मातृभाषा दिवस पर साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विभागाध्यक्ष डॉ मिली समद्दार और शिक्षकों द्वारा आयोजित भाषा दिवस पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन किया गया । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में बांग्ला मातृभाषा पर अपना विशेष कार्यक्रम मनाया। कॉलेज के बांग्ला विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ मिली समाद्दार द्वारा आयोजित मातृभाषा बांग्ला .भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 20 और 21 फरवरी को “अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा” दिवस धूमधाम से मनाया। प्रथम दिन हर क्षेत्र से प्रतिभा के प्रदर्शन और कॉलेज के फैकल्टी ने अपनी भाषा पर हृदय को छू लेने वाले ज्ञानवर्धक भाषण दिए । गीत संगीत, नृत्य से लेकर नाट्यकला और नाटक आदि की प्रस्तुति दी जिसका सभी विद्यार्थियों और शिक्षक गणों ने आनंद लिया ।डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि द्वितीय दिन, संस्थान के 4ए परिसर में बीईएससी एनैक्ट की टीम अंतरजाल द्वारा एक नुक्कड़ नाटक” एकत्तरेर दिनगुली “का प्रदर्शन किया गया, जिसने हर राहगीर का ध्यान आकर्षित किया। इसके द्वारा युवा थियेटर के कलाकारों ने एलगिन रोड की सड़क पर एकत्रित भीड़ के बहुत से लोगों को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के बारे में शिक्षित किया । रवीन्द्र सदन में मातृभाषा बांग्ला का नुक्कड़ नाटक और बांग्ला बैंड ने अपनी प्रस्तुति दी।

विवाह मानवीयता का परिशोधन और परिवर्धन है :डॉ. सोमा बंदोपाध्याय

कोलकाता । राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन महिला इकाई कोलकाता द्वारा आयोजित संगोष्ठी में “वर्तमान समय में विवाह के बदलते स्वरूप” विषय पर देश के महत्वपूर्ण साहित्यविदों, पत्रकारों, नाट्यकार ने अपने वक्तव्य रखे। विषय प्रवेश करते हुए छपते छपते हिंदी दैनिक कोलकाता और ताजा टीवी के निदेशक वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर ने विषय प्रवेश करते हुए प्रमुख आंकड़ों को रखते हुए भारत के हिंदू विवाह, संस्कार, इतिहास को बताते हुए अरैंज मैरिज से लेकर कानूनी रुप से स्वीकृत विवाह और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बात रखी। विश्वंभर नेवर ने कहा कि वर्तमान समय में विवाह के स्वरूप में बहुत अधिक परिवर्तन हैं जो समाज के ढांचे को भी तेजी से बदल रहे हैं ।
व्यंगकार और साहित्यकार विशिष्ट वक्ता नुपूर अशोक ने बताया कि विदेश और भारत की मानसिकता में बहुत अंतर है। अब विवाह में दिमाग का रोल अधिक है दिल का कम। पेशे से शिक्षिका और सक्रिय रूप से कई संस्थानों से जुड़ीं दुर्गा व्यास ने भारतीय संस्कृति में विवाह संस्कार के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त करते हुए लिव इन रिलेशनशिप और समलैंगिक विवाह को विवाह माना ही नहीं।
प्रसिद्ध अभिनेत्री, नाट्यकार, नाट्य लेखिका, युवाओं से जुड़ी कवयित्री उमा झुनझुनवाला ने अपने वक्तव्य में कहा कि पिछले दो वर्षों में कोरोना काल से विवाह की सोच में बहुत परिवर्तन हुए।नए संस्कार अब टुकड़ों में आ रहे हैं।
वर्तमान समय में विवाह के बदलते स्वरूप विषय को समसामयिक विषय बताते हुए कहा कि भारत विविधताओं का देश है। आज युवक-युवतियाँ अपनी इच्छा से सभी कार्य कर रहे हैं वे अपना स्थान स्वयं बनाते जा रहे हैं।
ओडिशा महिला आयोग की पूर्व सदस्य वरिष्ठ वकील नम्रता चढ्ढा ने कहा कि भारत में विवाह के विभिन्न व्यक्तिगत विचार और कोर्ट में तलाक के मुकदमों की चर्चा विभिन्न प्रकार के मानसिक, शारीरिक, आर्थिक और राजनीतिक शोषणों का सामना करना पड़ता है। भारत में हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई पारसी बौद्ध सभी लोगों के अलग अलग विवाह के नियम हैं। आदिवासियों और ग्रामीण और नगर महानगर में विविधता है।
मुख्य वक्ता के रूप में डायमंड हार्बर विश्विद्यालय और शिक्षण प्रशिक्षण से संबद्ध कुलपति प्रो सोमा बंदोपाध्याय ने अपने बहुमूल्य विचार रखते हुए कहा कि विवाह का अर्थ अर्थात विशेष रूप से निर्वाह करना है। विवाह के संदर्भ में अपनी कविता हवाओं में बादलों में /… इस मन ने उस मन को दी सम्मति सुनाई। भारत में विवाह एक पवित्र बंधन है वहीं पश्चिम में तीन अंगूठियाँ महत्वपूर्ण होती हैं जो सगाई शादी और पीड़ा यात्राओं से संबधित है। विवाह मानवीय पहले प्रवृत्तियों का परिशोधन और परिवर्धन है।
कार्यक्रम का संचालन किया राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन महिला इकाई कोलकाता की अध्यक्ष डॉ वसुंधरा मिश्र ने जो भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की हिंदी प्रवक्ता हैं। संचालन के दौरान कई प्रश्न उठाए गए। वर्तमान समय में विवाह के बदलते स्वरूप में विवाह की कानूनी अधिकतम आयु सीमा लड़की की 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष हो गई है। शहरों में कॅरियर बनाने में युवा युवक अधिक ध्यान दे रहे हैं जिससे उनके सामाजिक जीवन में रिक्तता आई है। एक दूसरे को समय नहीं दे पाते हैं और बच्चों पर भी असर पड़ता है। माता-पिता और युवा पीढ़ी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रश्नोत्तर सत्र का संचालन किया डॉ सुषमा हंस ने। डॉ मंजूरानी गुप्ता, सुषमा त्रिपाठी, कविता कोठारी, सीमा भावसिंहका आदि कई सदस्यों ने प्रश्न पूछे जिनका उत्तर नम्रता चढ्ढा ने दिए।
राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव और नई पीढ़ी के संस्थापक शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी ने नयी पीढ़ी और राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन महिला इकाई की सभी सदस्याओं और प्रमुख अतिथि वक्ताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि आधुनिक समाज के बदलते हुए विभिन्न विषयों पर चर्चा करना हमारा कर्तव्य और धर्म है। संवाद होने से समस्याओं का समाधान मिलता है। यह कार्यक्रम जूम पर ऑनलाइन हुआ। इस कार्यक्रम का संचालन और संयोजन डॉ वसुंधरा मिश्र ने किया ।

50 साल में पूरी की पीएचडी! मिलिए 76 साल के विद्यार्थी से

पत्‍नी और पोती के सामने मिली उपाधि

नयी दिल्‍ली । कुछ करने की इच्‍छा हो तो उम्र कोई बाधा नहीं है। निक एक्‍सटेन इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। वह 76 साल के हो चुके हैं। 1970 में वह पीएचडी में एनरोल हुए थे। 50 साल बाद उन्‍होंने इसे पूरा किया है। 14 फरवरी को उन्‍हें डॉक्‍टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि से नवाजा गया। एक्‍सटेन को अपनी पत्‍नी क्‍लेयर और 11 साल की पोती फ्रेया के सामने यह सम्‍मान मिला। 1970 में एक्‍सटेन को पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी में मैथमैटिकल सोशॉलजी से पीएचडी करने के लिए फुलब्राइट स्‍कॉलरशिप मिली थी। लेकिन, वह पीएचडी पूरी किए बिना 5 साल बाद ब्रिटेन लौट गए। अब यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिसल ने उन्हें डॉक्‍ट्रेट की डिग्री से नवाजा है।
एक्‍सटेन के नाम के आगे अब डॉक्‍टर लग चुका है। जब उन्‍हें डॉक्‍ट्रेट की डिग्री से नवाजा गया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। कई साल पहले उनकी यह चाहत पूरी हो गई होती। लेकिन, ऐसा नहीं हो सका। फिर भी उन्‍होंने इस ख्‍वाहिश को मन में जिंदा रखा। डॉ एक्‍सटेन ने ब्रिसल यूनिवर्सिटी से फिलॉसफी में एमए किया। तब उनकी उम्र 69 साल थी। फिर उन्‍होंने इसी विश्‍वविद्यालय से फिलॉसफी में पीएचडी की। 75 साल की उम्र में पिछले साल यह पूरी हुई। 14 फरवरी को यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में उन्‍हें उपाधि दी गई।
डॉ न‍िक एक्‍सटेन ने क्‍या कहा?
ब्रिसल यूनिवर्सिटी ने डॉक्‍टर एक्‍सटेन का एक बयान जारी किया है। इसमें उन्‍होंने कहा कि कुछ समस्‍याएं बहुत बड़ी होती हैं जो जिंदगी का काफी समय ले लेती हैं। इन्‍हें समझना आसान नहीं होता है। काफी सोच-विचार की जरूरत पड़ती है। इसे समझने में मुझे 50 साल लग गए। एक्‍सटेन की रिसर्च की नींव में वो आइडिया हैं जो पांच दशक पहले अमेरिका में काम करते हुए उन्‍होंने महसूस किए। यह मानव व्‍यवहार को समझने के लिए नई थ्‍योरी है जो हर एक व्‍यक्ति रखता है। एक्‍सटेन कहते हैं कि इसमें बिहेवियर साइकॉलजी के नजरिये को बदलने की क्षमता है।
साथी छात्रों का जताया आभार
डॉ निक एक्‍सटेन ने 50 साल बाद पीएचडी पूरी करने पर ब्रिसल यूनिवर्सिटी और साथी छात्रों का आभार जताया। उन्‍होंने कहा कि उनके साथी छात्र काफी कम उम्र के थे। लेकिन, उन्‍होंने कभी निक को उम्र का एहसास नहीं होने दिया। इन युवा छात्रों के पास अपार आइडिया हैं। उन्‍हें इन साथियों से बात करना बहुत पसंद है। डॉ निक एक्‍सटेन अभी सोमरसेट के वेल्‍स में अपनी पत्‍नी के साथ रहते हैं। उनके दो बच्‍चे और चार पोती-पोते हैं।
निक एक्‍सेटन के गाइड प्रोफेसर समीर ओकाशा ने कहा कि उन्‍हें पीएचडी करते हुए देखना बेहद शानदार था। यह उनके लिए भी बिल्‍कुल अलग तरह का अनुभव था। ओरिजनल पीएचडी शुरू करने के बाद इसे पूरा करने में उन्‍होंने आधी सदी लगाई। यह उनके जज्‍बे और चाहत को दिखाता है। उनकी जगह शायद कोई और होता तो काफी पहले इस चाहत को छोड़ चुका होता।