Thursday, March 26, 2026
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कुमार गंधर्व : सुरों से मोहित करने वाला जादूगर जो कबीर और भिंडी पर फिदा था

नमिता देवीदयाल
बात 1980 के दशक है। मुंबई के दादर में कुमार गंधर्व का एक कार्यक्रम था। जब वह वहां पहुंचे तो उनके साथ एक अजीब वाकया हुई। कार्यक्रम के चीफ गेस्ट कोई नेताजी थे। उनके आने का भी वक्त हो रहा था। चीफ गेस्ट महोदय का रास्ता बनाने के लिए आयोजकों ने कुमार गंधर्व से बदसलूकी करते हुए साइड हटने को कह दिया। गंधर्व के दोस्त, जो उनको कार्यक्रम में लेकर आए थे, ने इसका विरोध किया। उन्होंने आयोजकों को बताया कि यह वही कलाकार हैं, जिनको परफॉर्मेंस देनी है। लेकिन किसी को फर्क नहीं पड़ा।
कुमार गंधर्व यह सब देख रहे थे। उन्होंने एक शब्द नहीं बोला। उन्होंने अपना तानपुरा उठाया और ऑडिटोरियम के दूसरे फ्लोर पर जाकर बैठ गए। दोस्त भी दूसरा तानपुरा लेकर उनके साथ हो लिया। इसके बाद गंधर्व ने मंच पर जाकर ‘उड़ जाएगा हंस अकेला’ की ऐसी तान छेड़ी कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।
बाद में जब कुमार गंधर्व से पूछा गया कि क्या आयोजकों के खराब व्यवहार से उनको बुरा नहीं लगा, तो उनका जवाब था- ‘हां जरूर लगा, लेकिन 500 लोग जो यहां जमा हुए थे, इसमें उनका क्या दोष था।’ भारतीय संगीत की दुनिया का यह सुनहला हंस उड़ चुका है, लेकिन कुमार गंधर्व की तान अभी भी मोहित कर रही है।
कुमार गंधर्व भले ही अब हमारे बीच में नहीं हैं लेकिन उनकी आवाज का जादू चलता रहेगा, टूटे दिल की पीर को ये जादू हरता रहेगा, आनंद का सुख देता रहेगा। ये वो आवाज है जिसके सामने सरहदें बेमानी हैं। ये वो आवाज है जो हर बंधन को तोड़कर वहां पहुंचता है जहां लोग सन्नाटे के शोर में लीन हो जाते हैं। जब वह शून्यता या खालीपन को गाते हैं तो उसका क्या मतलब होता था? उनका संगीत शास्त्रीय था या लोकसंगीत? वह क्यों रहस्यमय कवि कबीर की आवाज बने? शिवपुत्र सिद्धारमैया कोमकली का जन्म 100 वर्ष पहले कर्नाटक के बेलगाम में सुलभावी नाम के गांव में एक शिव मंदिर के पास गायकों के परिवार में हुआ था। उस बच्चे को जैसे विलक्षण प्रतिभा का वरदान मिला था। बचपन में ही वह किसी भी तरह के संगीत को पूरी तरह याद और उसकी नकल कर सकते थे। इस विलक्षण बालक को पास के एक मठ के स्वामी जी ने कुमार गंधर्व नाम दिया। 10 साल की उम्र में वह बीआर देवधर से संगीत की शिक्षा लेने लगे जिन्होंने मुंबई के ओपेरा हाउस में म्यूजिक स्कूल खोला था।

जिस साल भारत को आजादी मिली, उसी साल कुमार गंधर्व की शादी हुई और उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के लिए जो रिकॉर्डिंग की, उसे लंबे समय तक उनकी आखिरी रिकॉर्डिंग की तरह समझा जाता रहा। पता चला कि उन्हें तपेदिक यानी टीबी है और उन्हें गाने से मना कर दिया गया। लेकिन संगीत के इस उपासक की श्रद्धा तो ऐसी थी जो एक खंजर को भी जादूई छड़ी में तब्दील कर सके। वह मध्य प्रदेश के देवास नाम के शहर में शिफ्ट हो गए जो अपने साफ और शुष्क हवा के साथ-साथ लोकसंगीत के लिए जाना जाता है।
देवास में गांववालों और घूमक्कड़ संन्यासियों या सुफी गायकों के गीत हमेशा जैसे उनकी जिंदगी में पार्श्व संगीत की तरह बजते रहे, नैपथ्य में। अब संगीत उनके अंतस में बजा करता था। उन्होंने लोकसंगीत के तत्वों को राग में तब्दील किया, बिना उनकी शुद्धता से कोई समझौता किए। उनका रहस्यवादी कवि कबीर की निर्गुण कविता से तारूफ बढ़ा। ऐसी कविता जो निराकार परम सत्य के एकत्व की बखान करती है, जो याद दिलाती है कि वह महान कुंभकार ने सभी को एक ही मिट्टी से बनाया है।
लिंडा हेस ने अपनी किताब ‘सिंगिंग एम्पटीनेस’ में लिखा है, ‘जो लोग कुमार जी को जानते थे वे बताते थे कि कैसे वह सब्जियों को प्यार करते थे। फूलों, पक्षियों, किताबों और बारिश से प्यार करते थे। वह कैसे हर वक्त, हर क्षण चीजों को लेकर सचेत रहा करते थे।’ हेस ने लिखा है, ‘उन्हें बागवानी और खरीदारी पसंद थी। वह कंधे से लटकाने वाले कई झोले लेकर बाजार जाते थे ताकि ताजी सब्जियां एक दूसरे दबकर पिचके नहीं, खराब न हों। इस दौरान हो सकता है कि वह किसी मित्र से भिंडी की खूबसूरती पर लंबी चर्चा कर लें। वह सुबह-सुबह दो पक्षियों की चहचहाहट और उनकी आपसी बातचीत को रिकॉर्ड करने के लिए बगीचे में टेप रिकॉर्डर लगा दिया करते थे।’
टीबी का पता चलने के 6 वर्ष बाद जब उन्हें फिर से गाने की इजाजत मिली तो उन्होंने स्टार सिंगिंग की शूटिंग की, एक ऐसा म्यूजिक जिसे पहले कभी नहीं सुना गया हो। उनका संगीत इतिहास और भूगोल से परे पहुंचा। यहां तक कि यह संगीत से भी परे पहुंच गया क्योंकि ये एक ऐसा विशुद्ध तान छेड़ता है जो सभी को जोड़ता है।
(साभार – नवभारत टाइम्स)

पिता की परचून की दुकान, परिवार में 30 लोग, यूपीपीएससी टॉपर बनी छात्रा

लखनऊ । यूपीपीएससी 2022 के फाइनल रिजल्ट में टॉप टेन में लड़कियों का परचम रहा है। पहली बार सबसे ज्यादा लड़कियां यूपीपीएससी में पास हुई हैं। वहीं, टॉप करने वाली छात्राओं ने इस परीक्षा का श्रेय परिवार और लगातार मेहनत को दिया है। आइए जानते हैं टॉपर छात्राओं ने क्या कहा।
ग्रामीण लड़कियों के लिए काम करूंगी- दिव्या
यूपीपीएससी में प्रथम स्थान पाने वाली आगरा की दिव्या ने कहा कि मैं महिलाओं और लड़कियों के उत्थान के लिए काम करना चाहती हूं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, क्योंकि उनके पास बढ़ने के कम अवसर रहते हैं। दिव्या ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया और कहा कि मां ही उनकी प्रेरणा है। दिव्या ने इससे पहले दो बार प्रयास किया, लेकिन एक बार मेंस नहीं निकला तो दूसरी बार इंरव्यू नहीं निकला। मां सरोज देवी ने कहा कि मैं अपनी बेटी की उपलब्धि से खुश हूं। वह घंटों पढ़ाई करती थी और घर का कामकाज भी संभालती थी। वह एक अच्छी अधिकारी बनेगी।
लगातार प्रयास से मिली सफलता: प्रतीक्षा
गोतीनगर निवासी प्रतिक्षा पांडेय को सफलता पांचवें प्रयास में मिली। उन्होंने लखनऊ के राम स्वरूप मेमोरियल कॉलेज से बीटेक किया है। प्रतीक्षा ने बताया कि उनके घर पर उनके पिता, भाई, भाभी इंजिनियर हैं। प्रतीक्षा के अनुसार सिविल सेवा में सफलता के लिए विषय को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बावजूद वैकल्पिक विषय के लिए समाजशास्‍त्र का चयन किया था। प्रतीक्षा का कहना है कि कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। लगातार प्रयास करने से सफलता अवश्य मिलती है। प्रतीक्षा पांडेय ने दूसरा स्थान पाया है।
अलीगंज की रहने वाली सल्तनत परवीन संयुक्त परिवार से हैं। उन्होंने बताया कि परिवार में 30 लोग हैं। सभी साथ रहते हैं। सल्तनत को सफलता चौथी बार में मिली। वह कहती हैं कि मैं जब भी असफल होती तो संयुक्त परिवार उनका मनोबल टूटने नहीं देता। कभी अकेलापन महसूस नहीं होने नहीं दिया। हर बार हिम्मत बढ़ाने को कोई न कोई साथ होता था। उनके पिता मुंशी पुलिया पर परचून की दुकान चलाते हैं। सल्तनत राष्ट्रीय स्तर पर बॉलीबॉल की खिलाड़ी रही हैं। सल्तनत ने छठवें स्थान पर रही हैं।

सौर मंडल में एक ऐसा ग्रह जिसके हैं 27 चंद्रमा

वॉशिंगटन । नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने बर्फीले ग्रह यूरेनस की पहली फोटो शेयर की है। इसमें यूरेनस की अदृश्य रिंग एकदम साफ दिख रही है। इसके अलावा उसके अब तक ज्ञात 27 चंद्रमा में से भी कई नजर आ रहे हैं। 10 अरब डॉलर की लागत से बना यह टेलीस्कोप उन चीजों को देखे में भी सक्षम हैं, जो सामान्य आंखों से नहीं दिखते। ग्रह के 13 में से 11 छल्ले भी दिख रहे हैं। यूरेनस के 9 छल्लों को पहली बार 1986 में नासा के वॉयजर-2 ने खोजा था। वहीं बाकी 4 को 2003 में हबल टेलीस्कोप के जरिए खोजा गया था।
यह धूल भरे छल्ले हैं। इस ग्रह के प्रमुख छल्ले बर्फ के टुकड़ों से बने हैं जो कई फीट के बराबर होते हैं। शनि की तुलना में इस ग्रह की रिंग पतली, संकडी और डार्क है। जेम्स वेब ने यूरेनस के 27 ज्ञात चंद्रमाओं में से भी कई की तस्वीर खींची है। कई इतने हल्के हैं, जिन्हें यहां से देखना भी संभव नहीं है। हालांकि 12 मिनट के एक्सपोजर में जेम्स वेब ने छह चमकदार चंद्रमाओं को खोज लिया है। यूरेनस अपने मोटे वातावरण के कारण नीला दिखाई देता है।
यूरेनस पर दिखती है हल्की सफेद परत
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नेतृत्व वाले शोधकर्ताओं ने इसे एरोसोल-2 परत नाम दिया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह कुछ हद तक सफेद दिखाई देता है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के नियर इनफ्रारेड कैमरा के जरिए इस तस्वीर को खींचा गया था। यह बेहद हल्की रोशनी को भी पकड़ लेता है। जेम्स वेब ने हमारे सामने उन तस्वीरों को भी रखा है, जो पहले सौरमंडल में कभी नहीं देखी गईं। पिछले साल जुलाई से ही काम कर रहे जेम्स वेब ने अंतरिक्ष की सबसे दूर की फोटो खींची थी।
2030 तक भेजा जाएगा स्पेसक्राफ्ट
यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मुताबिक जब वॉयजर 2 स्पेसक्राफ्ट यूरेनस के करीब से गुजरा था तो यह हल्का नीली गेंद जैसा दिखा था। लेकिन अब इन्फ्रारेड के जरिए जेम्स वेब बेहद संवेदनशील चीजों को भी देख पा रहा है। नासा वैज्ञानिकों ने हाल ही में 2030 के दशक तक यूरेनस और नेप्च्यून की जांच शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इन दोनों ही ग्रहों के बारे में हमें बेहद कम जानकारी पता है।

 

किरायेदार के अधिकार पर कोर्ट ने खींची ‘लक्ष्मण रेखा’ नहीं दे सकते मकान मालिक को निर्देश

नयी दिल्ली/मुंबई । बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान किरायेदारों के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि किरायेदारों पास सीमित अधिकार हैं। ऐसे में वह मकान मालिक को प्रॉपर्टी में रिडेवलपमेंट कराने को लेकर निर्देश नहीं दे सकते हैं। मामला मुंबई के खार (पश्चिम) बिल्डिंग से जुड़ा था। यहां एक ‘अड़ियल किरायेदार’ (हाईकोर्ट के शब्दों में) बिल्डिंग के मरम्मत के काम को रोक रहा था। कोर्ट ने बीएमसी को रिडेवलपमेंट के जुड़ा कमेंसमेंट सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया। इस मामले में लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म जीएम हाइट्स के मालिक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और आर एन लड्डा की बेंच ने कहा कि किरायेदार के अधिकारों को इस हद तक नहीं बढ़ाया जा सकता है कि प्रॉपर्टी के रिवडेवलपमेंट का काम किरायेदार की मर्जी से हो। ऐसा नहीं होना चाहिए कि संपत्ति के मालिक का अपनी संपत्ति में पसंद के हिसाब से बदलाव कराने का बुनियादी भौतिक अधिकारों ही छीन लिए जाएं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किरायेदारों का एकमात्र अधिकार इमारत के ध्वस्त होने से पहले उनके कब्जे वाले समकक्ष क्षेत्र के वैकल्पिक आवास के साथ प्रदान करना था। मामले से जुड़े वकील के अनुसार, हाई कोर्ट के इस फैसले से भविष्य के रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का रास्ता खुलने की उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल जिस बिल्डिंग को लेकर केस चल रहा है उसे मूल रूप से रामी राजा चॉल के नाम से जाना जाता है। इसमें 21 किराएदार रहते थे। अगस्त 2021 में इस बिल्डिंग को जीर्ण-शीर्ण घोषित होने के बाद इसे ध्वस्त कर दिया गया था। इसके बाद बिल्डिंग मालिक ने एक कमर्शियल बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव रखा था। बिल्डिंग मालिक की तरफ से पैरवी करने वाले सीनियर एडवोकेट जीएस गोडबोले के अनुसार एमसी ने प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। इसमें एक को छोड़कर, अन्य 20 किरायेदारों को रिडेवलपमेंट प्लान में एक कमर्शियल बिल्डिंग बनाने पर कोई आपत्ति नहीं थी। इस किरायेदार ने एनओसी देने से इनकार कर दिया। साथ ही स्थायी वैकल्पिक आवास समझौते पर साइन भी नहीं किया। 2021 में बीएमसी की शर्त थी कि सभी किराएदारों की सहमति के बाद ही वास्तविक निर्माण या प्रारंभ प्रमाणपत्र के लिए मंजूरी जारी की जानी थी। मालिक ने अपनी याचिका में बीएमसी की शर्तों को यह तर्क देते हुए चुनौती दी कि वे मनमानी और असंवैधानिक हैं।
किरायेदारों के अधिकार क्या हैं
भारत सरकार ने साल 1948 में एक केंद्रीय किराया नियंत्रण अधिनियम पारित किया था। समय-समय पर इसमें बदलाव हुए हैं। कुछ समय पहले ही केंद्र सरकार ने दो साल पहले ही नए किराया कानून को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य संपत्ति मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकारों की रक्षा के साथ ही शोषण से बचाव करना था। इस अधिनियम में संपत्ति को किराए पर देने की नियमों का वर्णन किया गया था। ध्यान देने वाली बात है कि हर राज्य का अपना किराया नियंत्रण कानून होता है। इसके बावजूद इसमें कोई खास अंतर नहीं होता है। ऐसे में किराये पर मकान लेने से पहले लिखित समझौता करना जरूरी होता है। ऐसे में आप भविष्य में होने वाले किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में उचित फोरम पर शिकायत करने के योग्य होते हैं।
रेंट एग्रीमेंट है जरूरी
मॉडल टेनेंसी एक्ट के तहत मकान मालिक और किरायेदार के बीच रेंट एग्रीमेंट होना जरूरी है। एक्ट के सेक्शन 5 के तहत प्रत्येक किरायेदार एक अवधि के लिए वैध है। इस अवधि का जिक्र रेंट एग्रीमेंट में किया जाता है। एंग्रीमेंट में किरायेदार कब तक रहेगा, कितना किराया देगा, सिक्योरिटी राशि समेत अन्य बातों का जिक्र होगा। रहने का टाइम पीरियड खत्म होने से पहले एंग्रीमेंट को रिन्यू किया जा सकता है। यदि एक निश्चित समय के बाद जब एंग्रीमेंट खत्म होने के बाद रिन्यू नहीं होता है और किरायेदार कमरा या बिल्डिंग खाली नहीं करता है तो उसे मकानमालिक को बढ़ा हुआ किराया देना होता है। यदि वह मकान पर कब्जा जारी रखता है तो बढ़ा हुआ किराया पहले दो महीनों के लिए मासिक किराए का दुगना और फिर चार गुना होगा।
रेंट एग्रीमेंट में सिक्योरिटी राशि दो महीने के किराये से अधिक नहीं हो सकती है। कर्मशल बिल्डिंग के मामले में यह राशि 6 महीने के किराये के बराबर रखी गई है। यदि किरायेदार कमरा खाली करता है तो मकान मालिक को यह राशि एक महीने के भीतर लौटानी होगी।
यदि मकान मालिक किराया बढ़ाना चाहता है तो उसे तीन महीने पहले किरायेदार को नोटिस देना होगा।
बिजली, पानी किरायेदार का मूलभूत अधिकार है, मकान मालिक किसी भी तरह का विवाद होने पर किराये र का बिजली-पानी या पार्किंग बंद नहीं कर सकता है।
यदि मकान मालिक को किराया बढ़ाना है तो उसे 3 महीने पहले किरायेदार को इसकी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा वह बाजार मूल्य से अधिक किराया नहीं ले सकता है।
किराएदार को हर महीने किराया देने की एवज में रसीद लेने का अधिकार है। अगर मकान मालिक एंग्रीमेंट में लिखित समय से पहले किराएदार को घर खाली करवाता है तो वह कोर्ट में रसीद को सबूत के तौर पर पेश कर सकता है।
यदि किरायेदार घर में नहीं है तो मकान मालिक उसके घर का ताला नहीं तोड़ सकता है। इसके अलावा मकान मालिक घर से किरायेदार का समान बाहर नहीं फेंक सकता है।
मकान मालिक घर या बिल्डिंग को गंदा रखने पर किरायेदार को टोक सकता है।
घर खाली करने से एक महीने पहले किरायेदार को इसकी जानकारी मकान मालिक को देनी होगी। यदि मकान मालिक किरायेदार को निकालना चाहता है तो उसे 15 दिन का नोटिस देना होगा।
नए कानून के तहत मकान के ढांचे के देखभाल की जिम्मेदारी मकान मालिक की है।
अगर किरायेदार की मौत हो जाती है और उसका परिवार उसके साथ रहता है तो मकान मालिक अचानक उसे कमरा खाली करने के लिए नहीं कह सकता है।
एंग्रीमेंट होने के बाद मकान मालिक बिना अनुमति के किरायेदार के घर में नहीं घुस सकता है। अगर मकान मालिक को कमरे में आना है तो इसके लिए पहले किरायेदार की अनुमति लेनी होगी।
मकान मालिक किरायेदार के घर के पास, खासकर महिला किरायेदार के घर के पास या घर में बिना उसकी अनुमति के कैमरा नहीं लगा सकता है। ऐसा करने से किरायेदार की प्रिवेसी का हनन होता है यह कानूनन अपराधा है। इसके लिए 3 से 7 साल की सजा और आर्थिक जुर्माने का भी प्रावधान है।
मकान मालिक किरायेदारों को पालतू जानवर रखने से नहीं रोक सकता है। ऐसा करना पशुओं के प्रति क्रूरता अधिनियम के तहत आता है। यदि पालतू जानवर के रखने पर रोक लगाई जाती है तो यह संविधान के अनुच्छेद 51जी का उल्लंघन होगा।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

बैसाखी पर विशेष जिथे रूत बैसाखी दी लै के आऊंदी मस्त बहारां,

जिथे रूत बैसाखी दी लै के आऊंदी मस्त बहारां, पा भंगड़े नचदे ने थां-थां गबरू ते मुटियारां..कनकां दी मुक गई राखी, ओ जट्टा आई बैसाखी। लो जी, एक बार फिर धमाल मचाने को आ गया है बैसाखी का त्यौहार। कल ढ़ोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाने का दिन है तो आप भी हो जाईए तैयार। बैसाखी का त्योहार हर वर्ष अप्रैल के 13 या 14 तारीख को पंजाब के साथ-साथ पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है। बैसाखी मुख्यत: कृषि पर्व है जिसे दूसरे नाम से ‘खेती का पर्व’ भी कहा जाता है। यह पर्व किसान फसल काटने के बाद नए साल की खुशियां के रूप में मनाते हैं। खेतों में रबी की फसल लहलहाती है तो किसानों का मन खुशी से झूम उठता है। केरल में इस त्योहार को ‘विशु’ तो बंगाल में इसे नब बर्ष के नाम से जाना जाता है। असम में इसे रोंगाली बिहू, तमिलनाडू में पुथंडू और बिहार में इसे वैषाख के नाम से पुकारा जाता है। यह दिन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिन राबी फसल के पकने की खुशी का प्रतीक है। इसी दिन गेहूं की पक्की फसल को काटने की शुरूआत होती है। इस दिन किसान सुबह उठकर नहा धोकर भगवान का शुक्रिया अदा करते हंै। यही नहीं बैसाखी को मौसम के बदलाव का पर्व भी कहा जाता है। इस समय सर्दियों की समाप्ति और गर्मियों का आरंभ होता है। वहीं व्यापारियों के लिए भी यह अहम दिन है। इस दिन देवी दुर्गा और भगवान शंकर की पूजा होती है। इस दिन व्यापारी नये कपड़े धारण कर अपने नए कामों का आरम्भ करते हैं।

बैसाखी, समझो आ गई गर्मी
बैसाखी त्यौहार अप्रैल माह में तब मनाया जाता है, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। यह घटना हर साल 13 या 14 अप्रैल को ही होती है। सूर्य की स्थिति परिवर्तन के कारण इस दिन के बाद धूप तेज होने लगती है और गर्मी शुरू हो जाती है। इन गर्म किरणों से रबी की फसल पक जाती है। इसलिए किसानों के लिए ये एक उत्सव की तरह है। इसके साथ ही यह दिन मौसम में बदलाव का प्रतीक माना जाता है। अप्रैल के महीने में सर्दी पूरी तरह से खत्म हो जाती है और गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है। मौसम के कुदरती बदलाव के कारण भी इस त्योहार को मनाया जाता है।

इसी दिन हुई थी खालसा पंथ की स्थापना
वर्ष 1699 में सिखों के 10 वें गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज ने बैसाखी के दिन ही आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ (Baisakhi) की नींव रखी थी। ‘खालसा’ खालिस शब्द से बना है जिसका अर्थ शुद्ध, पावन या पवित्र होता है। खालसा पंथ की स्थापना के पीछे श्री गुरुगोविन्द सिंह जी का मुख्य लक्ष्य लोगों को तत्कालीन मुगल शासकों के अत्याचारों से मुक्त कर उनके धार्मिक, नैतिक और व्यावहारिक जीवन को श्रेष्ठ बनाना था। इस पंथ के द्वारा गुरु गोविन्दसिंह ने लोगों को धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव छोड़कर इसके स्थान पर मानवीय भावनाओं को आपसी संबंधों में महत्व देने की भी दृष्टि दी। बैसाखी कृषि पर्व की आध्यात्मिक पर्व के रूप में भी काफी मान्यता है।

ढोल-नगाड़ों की थाप पर मचता है धमाल
उत्तर भारत में विशेषकर पंजाब में बैसाखी पर्व को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवक-युवतियां प्रकृति के इस उत्सव का स्वागत करते हुए गीत गाते हैं, एक-दूसरे को बधाइयां देकर अपनी खुशी का इजहार करते हैं और झूम-झूमकर नाच उठते हैं। अत: बैसाखी आकर पंजाब के युवा वर्ग को याद दिलाती है, साथ ही वह याद दिलाती है उस भाईचारे की जहां माता अपने 10 गुरुओं के ऋण को उतारने के लिए अपने पुत्र को गुरु के चरणों में समर्पित करके सिख बनाती थी।

कैसे पड़ा बैसाखी नाम
वैशाख माह के पहले दिन को बैसाखी कहा गया है। इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, इसलिए इसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है।

‘एमएसएमई के लिए भुगतान में विलंब एवं वसूली’ पर चर्चा

कोलकाता । एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम-पश्चिम बंगाल चैप्टर ने एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम-पश्चिम बंगाल चैप्टर और आईसीएआई के ईआईआरसी के साथ संयुक्त तत्वाधान में मंगलवार को कोलकाता के आईसीएआई भवन में ‘एमएसएमई के लिए विलंबित भुगतान और वसूली पर एक चर्चा सत्र’ का आयोजन किया।
इस मौके पर विधायक विवेक गुप्ता, पश्चिम बंगाल राज्य एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल के सदस्य सीए आलोक टिब्रेवाल, एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम, पश्चिम बंगाल की अध्यक्ष एवं अधिवक्ता सीएस डॉ. ममता बिनानी, आईसीएआई के ईआईआरसी के अध्यक्ष सीए देबायन पात्रा , आईसीएआई के ईआईआरसी के उपाध्यक्ष सीए संजीब सांघी , एमएसएमई, पश्चिम बंगाल सरकार के उपनिदेशक (मुख्यालय) अशोक घोष , ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अधिवक्ता नारायण जैन के अलावा समाज की कई विशिष्ट हस्तियां इसमें मौजूद थें।
इस मौके पर सीएस डॉ. एवं अधिवक्ता ममता बिनानी (पूर्व अध्यक्ष, आईसीएसआई और एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम डब्ल्यूबी चैप्टर की अध्यक्ष) ने कहा, एमएसएमई एक ऐसा क्षेत्र है, जो न केवल सकल घरेलू उत्पाद को धारण करता है और इसे बढ़ाता है, बल्कि राष्ट्र के सामाजिक और समान विकास के लिए यह एक बड़े रोजगार प्रदान करने का क्षेत्र भी है। इसमें 6 करोड़ से अधिक इकाइयों के साथ 11 करोड़ से अधिक श्रमिक इससे जुड़े हैं। एमएसएमई क्षेत्र कृषि के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है। देश के आर्थिक क्षेत्र में विकास और पर्याप्त योगदान में सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 30% और सभी भारतीय निर्यातों का 45% से अधिक का श्रेय इसी क्षेत्र में जाता है। सरकार हमेशा वैश्विक मूल्य की श्रृंखला में एमएसएमई की प्रतिस्पर्धा में सुधार करने की हर संभव तरीके से कोशिश कर रही है। इसका एक बहुत महत्वपूर्ण कारक कार्यशील पूंजी के तौर पर सस्ते पैसे की उपलब्धता है। जब उनका भुगतान अटक जाता है, तो व्यवसाय की गति खतरे में पड़ जाती है। क्योंकि इस एक व्यवसाय से कईयों का जीवन जुड़ा होता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य एमएसई की सुविधा परिषद को प्रदर्शित करना है। यह कैसे व्यवसायों के संकट को कम करने में काम कर रहा है । एमएसएमई के बारे में: वैश्विक रैंकिंग इंडेक्स पर भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एमएसएमई काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह दर्शाता है कि क्षेत्र कितनी तेजी से विकास कर रहा है।

अन्तरराष्ट्रीय बाजार में धूम मचाएगी पुरुलिया के छऊ मुखौटा कारीगरों की कला

साथ आए जीनियस फाउंडेशन एवं एसेंसिव एडु स्किल फाउंडेश

कोलकाता ।  जीनियस फाउंडेशन,जीनियस कंसल्टेंट लिमिटेड और एसेंसिव एडु स्किल फाउंडेशन पारम्परिक छऊ मुखौटा कलाकारों की सहायता के लिए आगे आए हैं। पुरुलिया के चरिदा में छाऊ मास्क कारीगरों का उद्यमिता विकास और बाजार लिंकेज बनाने के लिए एसेंसिव एडू स्किल फाउंडेशन के बीच समझौता हुआ है । यह परियोजना कारीगरों के लिए जमीनी स्तर से उद्यमियों को विकसित करने और एक सामूहिक व्यवसाय के रूप में काम करने के विचार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने और उनके विकास पर केंद्रित होगी। कारीगरों को आधुनिक पैकेजिंग तकनीक के बारे में शिक्षित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
जीनियस फाउंडेशन समझौता ज्ञापन के प्रावधानों के अनुसार एसेंसिव एडू स्किल फाउंडेशन को फंड प्रदान करेगा और एसेंसिव एडू स्किल फाउंडेशन कार्यक्रम को लागू करेगा। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर जीनियस कंसल्टेंट्स लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आर.पी. यादव और एसेंसिव ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ के अध्यक्ष अभिजीत चटर्जी, राज्य के श्रम विभाग की अतिरिक्त सचिव शॉन सेन, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के बीओपीटीआर के निदेशक एसएम एजाज अहमद, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के एनएसडीसी के एसईओ बिक्रम दास, कपड़ा मंत्रालय के डीसी हस्तशिल्प कार्यालय की सहायक निदेशक मौमिता देब, सहायक निदेशक (एच),  सहायक निदेशक (एच) सुदर्शन दास, आरोहण फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत राय, शाकंभरी ग्रुप के जीएम-ब्रांड एंड कम्युनिकेशन सुबोध बिहानी की उपस्थिति में हुआ । सभी प्रतिनिधियों और विशेष अतिथियों ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के अभिनव कार्यक्रमों को कारीगरों की बेहतरी के लिए और दुनिया भर में स्थानीय विरासत को बढ़ावा देने के लिए लाया जाना चाहिए।

 

भवानीपुर कॉलेज में थिएटर फेस्ट 2023  तीन दिवसीय अभिनय कला का प्रदर्शन

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने तीन दिवसीय थियेटर इंटर कॉलेज के उद्घाटन समारोह का उद्घाटन किया। एडवर्ड बॉन्ड के अनुसार ” रंगमंच के बिना कोई दुनिया नहीं है”। समग्र शिक्षा और सर्वांगीण विकास की अपनी परंपरा को बनाए रखते हुए, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 2023 के लिए 5 अप्रैल 2023 से 7 अप्रैल तक थिएटर फेस्टिवल के अपने 8वें संस्करण का आयोजन किया, जिसमें थिएटर-प्रेमी छात्रों को एक मंच प्रदान किया गया। इस फेस्टिवल में अभिनय कला, प्रतिभा, योग्यता, कौशल और विशेष योग्यता का मूल्यांकन किया गया।
2016 के बाद से यह पश्चिम बंगाल में थिएटर का एकमात्र तीन -दिवसीय उत्सव रहा है, जिसमें कोलकाता के 13 कॉलेज एक या दूसरे प्रकार के थिएटर से संबंधित 8 अलग-अलग प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन करने के लिए कॉलेज की एक छत के नीचे आते हैं।

पहले दिन, महोत्सव का उद्घाटन समारोह सुबह 10 बजे जुबली हॉल में हुआ। उपस्थित दर्शकों में कॉलेज के छात्र और अन्य कॉलेजों की प्रतिभागी टीमें शामिल थीं, जिनके प्रतिनिधियों ने एक वीडियो ट्रेलर के माध्यम से उत्सव के सार को दर्शाते हुए इसका उद्घाटन देखा। महोत्सव का विषय था “स्पेकुलो: आई विदिन आई।” इसकी जानकारी डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. दिलीप शाह ने दी। समारोह में जीतू शाह और उमेश ठक्कर सहित प्रबंधन द्वारा कॉलेज की पूर्व छात्रा सुश्री मौबानी सरकार का अभिनंदन भी देखा गया। उनकी उपलब्धियों का एक वीडियो असेंबल भी पृष्ठभूमि में प्रदर्शित किया गया था, जबकि उन्हें सम्मानित किया गया था। इसके अलावा प्रो दिलीप शाह ने इस अवसर पर प्रसिद्ध नाटककारों और कवियों की शायरी, कविताओं और उद्धरणों के माध्यम से अपने विचार साझा किए।

तीन दिवसीय इस फेस्ट की शुरुआत में कॉलेज की फ्लेम्स टीम ने डांस परफॉर्मेंस पेश की। पहला कार्यक्रम ऑडियो ड्रामा (सुनो कहानी) था जिसने थिएटर फेस्ट की तीन दिवसीय यात्रा की शुरुआत की। यह आयोजन हमारे कॉलेज के सोशल हॉल में सुबह 11 बजे शुरू हुआ और इसमें 7 कॉलेजों की भागीदारी रही जहाँ प्रत्येक टीम में 6 सदस्य शामिल थे। इस कार्यक्रम की समय सीमा 6 +2 मिनट थी जहांँ कलाकारों ने कलाकारों को अभिनय करते हुए सुना और दर्शकों को उनकी कल्पना में ले लिया। टीमों ने दोस्तों के एक समूह के पुनर्मिलन, और एक ट्रेन पर अजनबियों की बैठक जैसे विषयों की खोज की जो दर्शकों के लिए अत्यधिक भरोसेमंद थी। अंत में कार्यक्रम की निर्णायक प्रतिज्ञा घोष ने कलाकारों को जिस स्थिति का वे चित्रण कर रहे थे, उसके अनुसार अपनी ऊर्जा को उच्च रखते हुए अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए एक युक्ति दी। इस आयोजन की विजेता बीईएससी, आरोहण की मुख्य टीम थी, जिसमें द हेरिटेज कॉलेज और बीईएससी अंतरजाल पहले और दूसरे स्थान पर रहे।

उसी दिन, ‘सड़क’, नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें एक टीम में 20 लोग शामिल थे, जो मौजूदा शिक्षा प्रणाली द्वारा छात्रों पर लगाए गए तनाव और राजनीति में सत्ता हथियाने जैसे संबंधित विचारों पर प्रदर्शन कर रहे थे।  कार्यक्रम के निर्णायक सुप्रोवो टैगोर थे। इस आयोजन का विजेता हेरिटेज लॉ कॉलेज था, जिसमें प्रथम रनर अप बीईएससी अंतरजाल रहा। द्वितीय संयुक्त उपविजेता बीईएससी आरोहण और स्कॉटिश चर्च कॉलेज रहे ।

एक अन्य एकल कार्यक्रम ‘सिम्फनी’ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के व्यक्तियों का एक मोनोएक्ट कार्यक्रम था, जिसमें 6 मिनट की एकल स्क्रिप्ट का अभिनय किया गया था। जुबली हॉल में। इस कार्यक्रम की निर्णायक विनीता अभानी और ऋत्विका चौधरी थीं। यहाँ जिन विषयों की खोज की गई थी, वे थे एक माँ के दृष्टिकोण से एक बच्चे की हानि, हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों का पाखंड और आज के कार्य क्षेत्र में अवास्तविक मानक। विजेता युवराज सुराणा थे, जो बीईएससी आरोहण के छात्र थे। प्रथम उपविजेता बीईएससी आरोहण की दीप्ति पंचारिया और बी.पी. से अनीश पोद्दार थे। पोद्दार कॉलेज। यूईएम कोलकाता के उपहार जाना और हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के विश्वरूप चक्रवर्ती दूसरे उपविजेता रहे। इस श्रेणी में 2 विशेष उल्लेख थे, यूईएम कोलकाता से सुमित कुमार दास और बीईएससी आरोहण से मानसी जायसवाल।

मोनोएक्ट के बाद, अगली घटना, जोक्स जलसा, एक हास्य नाटक ने दर्शकों के मूड को हल्का कर दिया और उनके मन को उनके जीवन की दैनिक समस्याओं से हटा दिया । प्रतिभागी टीमों ने सरस्वती पूजा जैसी दैनिक जीवन स्थितियों का उपयोग किया और कॉमेडी की अवधारणा को इस तरह से सम्मिलित किया जो आकर्षक था लेकिन दूसरों की भावनाओं के प्रति अपमानजनक नहीं था। इस कार्यक्रम के निर्णायक थे प्रतीम चटर्जी और श्रीमती ऋत्विका चौधरी। इस कार्यक्रम के विजेता बीईएससी अंतरजाल थे और पहले और दूसरे उपविजेता क्रमशः यूईएम कोलकाता और हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी थे। हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरुष निलोय घोष भी थे और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री महिला हेरिटेज लॉ कॉलेज से सृष्टि तिवारी थीं।

कॉमिक रिलीफ के बाद, आप या मैं: इम्प्रोव प्रतियोगिता थी । इसमें अलग-अलग कॉलेजों से 2-2 की जोड़ी में प्रतिभागी शामिल थे। इस आयोजन के निर्णायक आरोन टार्गैन थे जिन्होंने सुनिश्चित किया कि यह कार्यक्रम मज़ेदार और प्रतिस्पर्धी होगा। इसमें 2 राउंड शामिल थे, राउंड 1 में प्रदर्शन करने वाली जोड़ी को दर्शकों या जज द्वारा चुने गए एक विषय को दिया गया था और तैयारी के लिए 1 मिनट और प्रदर्शन के लिए 3 मिनट दिए गए थे। कई जोड़ियों को बाहर कर दिया गया और केवल 6 जोड़ियों ने दूसरे राउंड में जगह बनाई । यहां राउंड 2 में, सभी छह टीमों को दर्शकों या जज द्वारा चुने गए एक विषय पर एक साथ प्रदर्शन करने के लिए कहा गया था। इस कार्यक्रम के विजेता श्री शिक्षायतन कॉलेज के मोहर चौधरी, प्रथम उपविजेता बीईएससी आरोहण के युवराज सुराणा और हेरिटेज अकादमी के देवाशीष घोष द्वितीय उपविजेता रहे। विशेष उल्लेख स्कॉटिश चर्च कॉलेज से डैनी डेनियल मूर्ति का भी था।

इंप्रूव एक्ट के बाद, ‘एज यू लाइक इट’, बोर्डरूम ड्रामा इवेंट, जो थिएटर फेस्ट रोस्टर के लिए एक नया अतिरिक्त था। यह शाम 6:30 बजे शुरू हुआ। हमारे कॉलेज के कॉन्सेप्ट हॉल में। फेस्ट के दूसरे दिन का समापन विभिन्न स्थानों पर समानांतर बोर्डरूम ड्रामा कार्यक्रमों के साथ हुआ, जहां अभिनेताओं ने फ्लैश मॉब शैली में प्रदर्शन किया। टीमों ने आसपास के वातावरण का चतुराई से उपयोग किया और उन्होंने इसे अपने कार्य में शामिल किया। शानदार हिस्सा दर्शकों की प्रतिक्रिया और विस्मय था। यहां विजेता यूईएम कोलकाता था। प्रथम उपविजेता बीईएससी आरोहण और द्वितीय उपविजेता श्री शिक्षायतन कॉलेज रहे।

अंतिम घटना थी विद्या पुन, एक ए़डी स्पूफ इवेंट और इसमें रिमोट, रैकेट, मटका और पाइप जैसी वस्तुओं के लिए विज्ञापनदाताओं के रूप में काम करने वाली 4 टीमें शामिल थीं। इस कार्यक्रम का निर्णय ज़ाहिद हुसैन, सुप्रोवो टैगोर और  प्रतीम चटर्जी द्वारा जज किया गया था । प्रतिभागियों ने वस्तुओं की महानता पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कॉमेडी और सस्पेंस को उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया। फेस्ट का दूसरा दिन थियेटर का अनुभव करने के आनंद के साथ समाप्त हुआ जैसा पहले कभी नहीं हुआ। विजेता बीईएससी आरोहण टीम थी, जिसमें श्री शिक्षायतन कॉलेज प्रथम रनर अप और यूईएम कोलकाता दूसरे रनर अप के रूप में आया था।
तीसरा दिन, सेंटर स्टेज के साथ शुरू हुआ, एक स्टेज प्ले जिसने इस 3 दिवसीय उत्सव की भव्यता को चिह्नित किया, जिसमें 9 भाग लेने वाले कॉलेजों ने प्रत्येक 30 – 45 मिनट के अलग-अलग नाटकों का मंचन किया। टीमों ने अपने प्रदर्शन के बाद अपना परिचय दिया और जजों ने प्रत्येक कलाकार पर भी अपना फैसला सुनाया। इसने आज समाज में महिलाओं की स्थिति, स्वच्छ भारत, कोलकाता में आवारा पशुओं का जीवन, आदि जैसे विषयों को सामने लाया। सभी अधिनियम जीवन के शक्तिशाली अधिनियमन थे जैसा कि हम जानते हैं और समान जीवन जैसी तीव्रता के साथ व्यक्त किए गए थे। यहां बीईएससी आरोहण ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। फर्स्ट रनर अप हेरिटेज लॉ कॉलेज रहा और सेकेंड रनर अप पोजीशन स्कॉटिश चर्च कॉलेज और बी.पी. पोद्दार कॉलेज। कुछ विशेष उल्लेख थे जैसे बीईएससी आरोहण टीम से सर्वश्रेष्ठ निर्देशक दीप्ति पंचारिया थीं और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से राजदीप सरकार और निलाद्री घोष को सर्वश्रेष्ठ स्क्रिप्ट दी गई थी। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार हेरिटेज लॉ कॉलेज के अलापन सरकार और  बीईएससी अंतरजाल टीम के प्रियांग्शु बानिक को मिला।
तीन दिवसीय उत्सव एक समापन समारोह के साथ समाप्त हुआ जहां सभी विजेताओं को डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स, प्रोफेसर दिलीप शाह, सुप्रोवो टैगोर और ऋत्वका चौधरी के साथ सम्मानित किया गया। समापन समारोह के बाद छात्रों ने 3 दिन तक चलने वाले थिएटर फेस्ट का जश्न मनाने के लिए कुछ धुनों पर नृत्य किया। रिपोर्ट दी अनिकेत दासगुप्ता ने और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

ऑटिज्म से लड़ने के लिए साथ आएं कॉरपोरेट जगत – संघमित्रा घोष

कोलकाता । मर्चेंट चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री एंड एमसीसीआई लेडीज फोरम और प्रेसीडेंसी एलुमनी एसोसिएशन कलकत्ता ने शुम्पन फाउंडेशन के साथ विश्व ऑटिज्म दिवस मनाया । गत 1 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर एक परिचर्चा सत्र इस अवसर पर आयोजित किया गया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की मुख्य सचिव संघमित्रा घोष उपस्थित थीं । राज्य में विकलांगता की डिग्री की पहचान करने के लिए यूडीआईडी के माध्यम से प्रमाणन प्रदान करने की पहल की है। हालांकि, विकलांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया बहुत जटिल है और विभाग इसके सरलीकरण की प्रक्रिया पर काम कर रहा है । घोष ने बताया कि आंगनबाडी केन्द्रों के माध्यम से विभाग ने प्रतिदिन लगभग 1 लाख 20 हजार बच्चों की देखभाल की है. आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे के जीवन के पहले 18 महीनों के दौरान ऑटिज़्म का निदान किया जा सकता है और प्रारंभिक उपचार विकार की गंभीरता को कम कर सकता है। आंगनवाड़ी केंद्रों में एक मान्य परीक्षण उपकरण है, और यदि कोई बच्चा औसत से कम अंक प्राप्त कर सकता है, तो उसका विशेष ध्यान रखा जाता है।
समाज के सीमांत वर्गों में आत्मकेंद्रित बच्चों के सामने मुख्य चुनौती उनके लिए प्रभावी संसाधन व्यक्तियों और देखभाल करने वालों की उपलब्धता की कमी है। डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) ऑटिज्म जैसी अक्षमताओं से पीड़ित बच्चों को निरंतर चिकित्सा प्रदान करता है। पश्चिम बंगाल में 24 डीईआईसी हैं। डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सर्विसेज (डीईआईएस) को विशेष रूप से सक्षम बच्चों के लिए इन सेवाओं को संचालित करने के लिए कॉर्पोरेट्स से समर्थन की आवश्यकता है। घोष ने निजी अस्पतालों में इन बच्चों की मदद के लिए हस्तक्षेप केंद्र शुरू करने पर जोर दिया । गत 20 जनवरी को, एमसीसीआई ने ऑटिज़्म के बारे में जागरूकता और सामुदायिक समझ फैलाने और हमारे समुदाय में ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर की स्वीकृति को बढ़ावा देने के लिए प्रेसीडेंसी एलुमनी एसोसिएशन कलकत्ता के समझौते पर हस्ताक्षर किए। एमसीसीआई प्रेसीडेंसी एलुमनी एसोसिएशन कलकत्ता और शुम्पन फाउंडेशन के साथ मिलकर इस परियोजना पर साल भर काम करेगा।
सत्र में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सेरेब्रल पाल्सी की एडुकेशन कोऑर्डिनेटर एवं इन्क्लूजन फैसिलिटेचर एवं , प्रेसीडेंसी एलुमनी एसोसिएशन कलकत्ता की सदस्य मधुमिता दासगुप्ता, द हेरिटेज स्कूल की प्रिंसिपल सीमा सप्रू, पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रबन्ध निदेशक संजय बनर्जी ने विचार रखे ।
स्वागत भाषण एमसीसीआई के अध्यक्ष नमित बाजोरिया ने दिया । उन्होंने ऑटिस्टिक बच्चों को भी मुख्य धारा में लाने पर जोर दिया । प्रेसीडेंसी एलुमनी एसोसिएशन कलकत्ता के अध्यक्ष सुतीर्थ भट्टाचार्य ने कहा कि भेदभाव के खिलाफ लड़ने के लिए समाज को समावेश की आवश्यकता है। ऑटिज़्म के बारे में जागरूकता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेसीडेंसी एलुमनी एसोसिएशन ने एमसीसीआई के साथ हाथ मिलाया है। धन्यवाद ज्ञापन एमसीसीआई लेडीज फोरम की चेयरपर्सन नीता बाजोरिया ने दिया ।

मास्टर स्पेलर्स और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की ऑनलाइन स्पेलिंग बी प्रतियोगिता

कोलकाता । मास्टर स्पेलर्स ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया के साथ मास्टर स्पेलर्स 2023-24 प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है । ऑनलाइन स्पेलिंग बी प्रतियोगिता मास्टर स्पेलर्स का उद्देश्य प्रतिस्पर्द्धी समय के अनुसार अंग्रेजी शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाना है । अंग्रेजी शिक्षकों द्वारा डिज़ाइन किया गया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से सामग्री द्वारा संचालित, प्रतियोगिता की कल्पना युवा वर्तनीकारों और भाषा सीखने वालों में सौहार्द हेतु की गयी है । मास्टर स्पेलर्स 2023-24 शिक्षार्थियों के लिए एक व्यापक, स्व-प्रेरित और समग्र दृष्टिकोण प्रदान करके भाषा सीखने को बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। स्पेलिंग बी के लिए पंजीकरण 10 अप्रैल 2023 से शुरू हो गया । इसमें ग्रेड 1 से 12 तक के सात समूहों में प्रारंभिक, क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और अंतिम प्रतियोगिताएं शामिल होंगी। विजेताओं को पुरस्कार, ट्राफियां और प्रमाण पत्र मिलेंगे। छात्र व्यक्तिगत रूप से या स्कूलों के माध्यम से https://masterspellers.com/ पर पंजीकरण कर सकते हैं।
मास्टर स्पेलर्स की संस्थापक और सीईओ शर्मिष्ठा का कहना है, “कुल मिलाकर, हमारा उद्देश्य प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों के लिए भाषा सीखने को मज़ेदार और प्रेरक बनाना है। आज के समय में, समृद्ध शब्दावली और प्रभावी अभिव्यक्ति के बढ़ते महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता है।”
, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया के एम डी सुमंत दत्ता ने कहा, “प्रतियोगिताएं छात्रों के संपर्क में सुधार, संज्ञानात्मक और सामाजिक जुड़ाव के स्तर को बढ़ाने, अच्छी भाषा सीखने की आदतों को बढ़ावा देने और बार-बार अभ्यास के माध्यम से शब्दावली बनाने में प्रभावी हैं। मास्टर स्पेलर्स कक्षा के बाहर अंग्रेजी सीखने के साथ छात्रों की व्यस्तता पर सकारात्मक प्रभाव पैदा करने का एक मंच है। ये दौर प्रतिभागियों के लिए सीखने को बेहद आकर्षक और मजेदार बना देंगे।