– यूपीआई के जरिए निकाल सकेंगे पीएफ का पैसा
नयी दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अंशधारक के लिए एक बड़ी राहत लेकर आ रहा है। इसके अंशधारक एक नए मोबाइल एप्लिकेशन के जरिये यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) भुगतान गेटवे का उपयोग करके अपने पीएफ का पैसा सीधे बैंक खातों में पा सकेंगे। यह ऐप अप्रैल में लॉन्च होगा, जिससे 8 करोड़ से अधिक ग्राहकों को फायदा होगा। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय एक ऐसी परियोजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत ईपीएफ का एक निश्चित हिस्सा सुरक्षित कर दिया जाएगा, जबकि एक बड़ा हिस्सा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिये बैंक खाते से निकासी के लिए उपलब्ध होगा। सूत्रों के अनुसार ईपीएफओ एक नया मोबाइल ऐप पेश करेगा, जिसके जरिये सदस्य यूपीआई गेटवे का उपयोग करके पैसे निकालने के साथ ही पासबुक शेष राशि जैसी अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। सूत्र ने बताया कि ईपीएफओ के अंशधारक मोबाइल ऐप के जरिये अपने बैंक खातों में हस्तांतरण के लिए उपलब्ध पात्र ईपीएफ शेष राशि देख सकेंगे। इसके जरिए उन्हें लेन-देन पूरा करने के लिए अपने जोड़े गए यूपीआई पिन का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे बैंक खातों में धन का सुरक्षित हस्तांतरण सुनिश्चित होगा। ईपीएफओ इस सेवा का फिलहाल परीक्षण कर रहा है। इस साल अप्रैल में बड़े स्तर पर इस ऐप को पेश किए जाने की संभावना है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के अंशधारक इस समय अपने ईपीएफ खातों तक पहुंचने और सेवाओं का लाभ उठाने के लिए या तो यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) पोर्टल या ‘उमंग’ ऐप का उपयोग करते हैं। ये सेवाएं दोनों मंच पर उपलब्ध रहेंगी, जबकि नया समर्पित ऐप ईपीएफओ ग्राहकों के लिए सेवाओं की पहुंच और वितरण में सुधार करेगा।
अप्रैल में होगा लॉन्च ईपीएफओ का नया ऐप
मिड-डे मील पर आवंटित बजट का 25 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाई बंगाल सरकार
कोलकाता । पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील योजना के बारे में हैरान करने वाले आंकड़े आए हैं। राज्य विधानसभा में पिछले हफ्ते पेश अंतरिम बजट के दस्तावेज से खुलासा हुआ है कि मिड-डे मील योजना के लिए आवंटित बजट में से बहुत कम राशि खर्च की गई है। बजट दस्तावेज के अनुसार, पिछले दो वित्तीय वर्षों 2024-25 और 2023-24 के लिए स्थिति दयनीय थी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में मिड-डे मील के लिए बजटीय आवंटन 2,299.30 करोड़ रुपए था, लेकिन उस वर्ष वास्तविक खर्च सिर्फ 241.96 करोड़ रुपए रहा, जो कुल आवंटन का मात्र 10.52 प्रतिशत है। उससे पहले, वित्तीय वर्ष 2023-24 में मिड-डे मील के लिए 2,377 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया गया था, लेकिन वास्तविक उपयोग सिर्फ 515.04 करोड़ रुपए रहा, यानी 21.66 प्रतिशत। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य में मिड-डे मील के लिए 1,673.12 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। हालांकि, 2025-26 के संशोधित अनुमानों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक सिर्फ 320.01 करोड़ रुपए (सिर्फ 19.12 प्रतिशत) ही खर्च किए जा सकेंगे।
इसका मतलब है कि तीनों वित्तीय वर्षों को मिलाकर पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील के बजटीय आवंटन का औसत प्रतिशत उपयोग सिर्फ 16.96 फीसदी है।
माना जा रहा है कि पिछले कम प्रतिशत उपयोग को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने 2026-27 के वित्तीय वर्ष के लिए इस योजना के लिए बजटीय आवंटन को घटाकर 1,150.90 करोड़ रुपए कर दिया है, जो 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के संबंधित आंकड़ों से काफी कम है।
राज्य वित्त विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “2025-27 के लिए मिड-डे मील के लिए 1,150.90 करोड़ रुपए का यह बजटीय आवंटन अंतिम आंकड़ा नहीं हो सकता है और इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद नई राज्य कैबिनेट की ओर से पूर्ण बजट पेश करने के बाद इसमें संशोधन किया जा सकता है।”
पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील के लिए कम खर्च की यह जानकारी उस समय आई है, जब पिछले साल जून में केंद्र सरकार ने मिड-डे मील योजनाओं का लाभ उठाने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट पर चिंता व्यक्त की थी।
केंद्र सरकार के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने भी इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें इसे राज्य में स्कूल छोड़ने वालों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण बताया गया था।
आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्र ने मांगे सुझाव
– मांगे गए 18 अहम सवालों के जवाब नयी दिल्ली । केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। वेतन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट लाइव कर दी है और नए वेतन ढांचे को लेकर व्यापक स्तर पर सुझाव आमंत्रित किए हैं। यह कदम करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की भविष्य की सैलरी और पेंशन तय करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वेतन निर्धारण की प्रक्रिया को पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए माई गॉव पोर्टल का सहारा लिया जा रहा है। कर्मचारियों और पेंशनर्स से कुल 18 श्रेणियों के तहत सुझाव मांगे गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: फिटमेंट, फैक्टर, इंक्रीमेंट और पेंशन।
सुझाव देने की समयसीमा और प्रक्रिया – आयोग ने सुझाव जमा करने के लिए 16 मार्च, 2026 की समयसीमा निर्धारित की है। इच्छुक व्यक्ति लिंक ( https://www.mygov.in/mygov-survey/8th-central-pay-commission-questionnaire/) पर जाकर अपना फीडबैक दे सकते हैं। आयोग ने साफ कर दिया है कि केवल पोर्टल के माध्यम से आए सुझावों पर ही विचार होगा। ईमेल या डाक द्वारा भेजे गए पत्रों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी ताकि कर्मचारी बिना किसी हिचक के अपनी बात 8वें वेतन आयोग ने केवल कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को इस चर्चा में शामिल किया है: केंद्रीय और राज्य कर्मचारी/पेंशनभोगी। न्यायिक अधिकारी और अदालतों के कर्मचारी। विभिन्न कर्मचारी यूनियन और एसोसिएशन। शिक्षाविद, शोधकर्ता और नियामक निकायों के सदस्य।
9 महीने में केंद्र की योजनाओं पर खर्च हुई महज 40 प्रतिशत राशि
नयी दिल्ली। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में अपनी सबसे बड़ी परियोजनाओं में बजट की रकम का 40 फीसदी से थोड़ा ज्यादा खर्च किया है। उम्मीद है कि साल के आखिर तक ये खर्च 75 प्रतिशत से कम होगा। जानकारी उन 53 चुनी हुई योजनाओं के बारे में हैं, जिनका 2025-26 में बजट अनुमान 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक था। राज्यों द्वारा लागू की जाने वाली इन योजनाओं को मंजूर शेयरिंग पैटर्न के अनुसार केंद्र और राज्य दोनों फंड देते हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के तहत इंफ्रांस्ट्रक्टर रखरखाव योजनाएं, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधावा पेशन योजना और एससी और अन्य लोगों के लिए प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप ही ऐसी तीन योजनाएं थीं जिनमें संशोधित अनुमान बजट की रकम के बराबर था। तीन अन्य योजनाओं, जिनमें- मनरेगा, एसटी के लिए प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप और प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन के लिए बजट अनुमान 100 प्रतिशत से ज्यादा था। बाकी 47 योजनाओं के लिए, आर ई अलग-अलग मात्रा में बीई से कम है। सबसे बड़ी गिरावट PM कृषि सिंचाई योजना में देखी गई, जहां 150 करोड़ रुपये की आरई 850 करोड़ रुपये के बीई का मुश्किल से छठा हिस्सा है। कुल मिलाकर, इन 53 योजनाओं के लिए बीई 5 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज़्यादा था, जिसे संशोधित करके 3.8 लाख करोड़ रुपये से कम, या बजटीय आवंटन का 74.4 प्रतिशत कर दिया गया। 31 दिसंबर को खत्म होने वाले नौ महीनों में जारी किया गया फंड कुल 2 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा था, जो बजट आवंटन का 41.2% और RE का 55.4% था। पीएमकेएसवाई कमांड एरिया डेवलपमेंट और जल संसाधन, पीएम ई-बस सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जल जीवन मिशन/राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का कंप्यूटरीकरण और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश घटक- पीएमएवाई शहरी की अन्य मदों के लिए RE, BE के 40 प्रतिशत से कम है। इनमें से छह योजनाओं में जारी की गई वास्तविक राशि बीई के 10 प्रतिशत से कम है। इन बड़ी योजनाओं (2,000 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा बीई) में जल जीवन मिशन/नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर मिशन ( बी ई 67,000 करोड़ रुपये, नौ महीनों में असल खर्च आरई 31 करोड़ रुपये), पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (बी ई 7,500 करोड़ रुपये, असल खर्च 473 करोड़ रुपये), और प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना ( बीई 2,140 करोड़ रुपये, असल खर्च 40 करोड़ रुपये) शामिल हैं।
श्रीरामचरितमानस अनुसार ऐसा है कलियुग
रामचरितमानस के उत्तरकांड में गोस्वामी तुलसीदासजी ने काकभुशुण्डि के माध्यम से कलियुग का अत्यंत भयावह और यथार्थवादी वर्णन किया है। इसमें धर्म का लोप, नैतिकता का ह्रास, वर्णसंकर समाज, लोगों के आचरण में अनीति, लोभी ब्राह्मणों का शासन, तथा धन को ही प्रधानता मिलने जैसी कलियुगीन समस्याओं का चित्रण किया गया है, जो आज के समय में सत्य सिद्ध हो रहे हैं।
भारत ने बांग्लादेश की वित्तीय सहायता में की कटौती
नयी दिल्ली। भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार 9वीं बार देश का बजट 2026-27 पेश किया है। ऐसा करने वाली निर्मला सीतारमण पहली विदेश मंत्री बन गईं। नेबरहुड फर्स्ट (पड़ोसी पहले) के तहत विदेशी सहायता के लिए बजट 2026-27 के लिए विदेश मंत्रालय को 22118.97 करोड़ रुपए आवंटित किए जाएंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के बजट में मामूली बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल ये आंकड़ा 20516.61 करोड़ रुपए था। पिछले साल की तुलना में भारत ने इस साल दूसरे देशों के लिए बजट में बड़े बदलाव किए हैं। भारत ने कई देशों के लिए बजट बढ़ाया है, तो कुछ देशों के लिए वित्तीय सहायता घटाई भी है। बजट 2026-27 में भारत ने अपने सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार भूटान के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाकर 2,288.55 करोड़ रुपए कर दी है। यह दोनों देशों के बीच, खासकर हाइड्रोपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे एरिया में हमेशा रहने वाले खास रिश्तों को दिखाता है।
अफगानिस्तान के लिए वित्तीय सहायता 50 करोड़ से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपए की गई है। भारत हमेशा से ही अफगानिस्तान में मानवीय मदद के लिए राहत संबंधित कार्य करता रहा है। ऐसे में यह बजट मानवीय और विकास में मदद के लिए भारत के लगातार कमिटमेंट का संकेत है।
इसके अलावा नेपाल को 800 करोड़ रुपए मिले हैं, जो 100 करोड़ रुपए ज्यादा है। वहीं, श्रीलंका को 400 करोड़ रुपए दिए गए हैं, जो 100 करोड़ ज्यादा है। तूफान दित्वाह से निपटने के लिए हाल ही में भारत ने श्रीलंका के लिए वित्तीय सहायता भेजी थी। ऐसे में ये बजट स्वाभाविक रूप से सुधार और जरूरतों के हिसाब से बढ़ाया गया है।
इस लिस्ट में मंगोलिया का नाम भी शामिल है, जहां वित्तीय सहायता के लिए पहले के 5 करोड़ रुपए के बजट को बढ़ाकर 25 करोड़ रुपए किया गया है। इसके साथ ही मॉरिशस के लिए वित्तीय सहायता 50 करोड़ से बढ़ाकर 550 करोड़ रुपए करने का ऐलान किया गया। सेशेल्स के लिए पिछले साल की तरह बजट 19 करोड़ रुपए ही है।
भारत ने बांग्लादेश के लिए वित्तीय सहायता में बड़ी कटौती की है। बांग्लादेश के लिए 60 करोड़ रुपए की सहायता राशि का ऐलान किया गया है। इसकी वजह ये है कि इससे पहले भारत ने बांग्लादेश के लिए 120 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन सिर्फ 34 करोड़ रुपए ही इस्तेमाल हुए। इसके अलावा म्यांमार और मालदीव भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
मालदीव को 550 करोड़ रुपए और म्यांमार को 300 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया गया है।
विदेश में रहने वाले भारतीय भी कर सकेंगे निवेश
– एनआरआई की निवेश लिमिट 24 फीसदी हुई
नयी दिल्ली । भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार रविवार के दिन लोकसभा में आम बजट 2026-27 पेश किया। इस बजट में केंद्रीय मंत्री ने नॉन-रेसिडेंट इंडियंस (एनआरआई) और दूसरे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय लिस्टेड कंपनियों में व्यक्तिगत निवेश की सीमा को दोगुना करने का ऐलान किया है। अब तक ऐसा होता था कि एक अकेला एनआरआई किसी कंपनी के पेड-अप कैपिटल का 5-10 फीसदी तक मालिक हो सकता था। हालांकि, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो 2026-27 का बजट पेश किया है, उसके तहत इस लिमिट को बढ़ाकर अब 10 फीसदी कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी एनआरआई के लिए कुल लिमिट बढ़ाकर 24 फीसदी करने का ऐलान किया गया। पहले कई एनआरआई निवेशकों को मुख्य रूप से विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर या खास एनआरआई रूट से भारतीय इक्विटी में निवेश करना पड़ता था। अब इसमें सुधार किया गया है, जिसके बाद एनआरआई और विदेशी नागरिकों सहित विदेशी निवासियों को एक रेगुलेटेड पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत सीधे भारतीय स्टॉक में निवेश करने की इजाजत मिलेगी। इसका मकसद घरेलू मार्केट में एक्सेस को आसान बनाना और भागीदारी को बढ़ाना है।
इसके अलावा वित्त मंत्री सीतारमण ने घोषणा की है कि भारत में पांच साल तक रहने वाले विदेशी नागरिकों को नॉन-इंडिया कमाई पर राहत मिलेगी। यह विदेशी नागरिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है।
वहीं, व्यक्तिगत आयात पर टैरिफ को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है और विदेश यात्रा टूर पैकेज पर टीसीएस को 5 प्रतिशत/20 प्रतिशत से घटाकर 2 फीसदी किया गया है।
दूसरी ओर, इनकम टैक्स की बुनियादी संरचना पहले जैसी ही रहेगी, लेकिन बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाने और टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए कई कदमों का ऐलान किया।
वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स रिटर्न में संशोधन करने की अंतिम तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केवल मामूली शुल्क देना होगा। रिटर्न फाइल करने की तारीखों को भी अलग-अलग किया गया है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 भरने वाले लोग पहले की तरह 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल करेंगे। वहीं जिन कारोबारों का ऑडिट नहीं होता और ट्रस्ट्स को 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।
टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए यह भी कहा गया है कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाला ब्याज अब इनकम टैक्स से मुक्त होगा। साथ ही इस पर टीडीएस भी नहीं काटा जाएगा।
मोटर एक्सीडेंट मुआवजे के ब्याज पर माफ होगा पूरा टैक्स
– पीड़ितों को मिलेगी बड़ी राहत
नयी दिल्ली । सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 पेश करते समय ऐलान किया कि मोटर एक्सीडेंट मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब पूरी तरह इनकम टैक्स से मुक्त होगा। इस प्रस्ताव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों को मुआवजे की पूरी राशि मिले और उसमें से कोई कटौती न हो। इसके तहत अब ऐसे ब्याज पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) भी नहीं काटा जाएगा। यह घोषणा संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार पेश किए गए केंद्रीय बजट में की गई। इस आम बजट में टैक्स से जुड़े कई ऐलान किए गए।
मौजूदा नियमों के तहत मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) द्वारा दिए गए ब्याज को टैक्स योग्य आय माना जाता था। अक्सर मुआवजा मिलने में देरी हो जाती है, जिससे ब्याज की रकम काफी बढ़ जाती है और पीड़ितों या उनके परिजनों को उस पर टैक्स देना पड़ता है।
इस वजह से कई बार पीड़ितों को मुआवजे की पूरी रकम नहीं मिल पाती थी। उन्हें इलाज, पुनर्वास और रोज़ी-रोटी के लिए मिलने वाले पैसों में भी कमी झेलनी पड़ती थी। कई मामलों में टैक्स रिफंड की जटिल प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता था।
वित्त मंत्री ने साफ किया कि यह टैक्स छूट सिर्फ ‘नेचुरल पर्सन’, यानी आम व्यक्ति को मिलने वाले ब्याज पर ही लागू होगी। सरकार ने इसे मुआवजे की मानवीय भावना से जुड़ा फैसला बताया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति को दिया गया ब्याज इनकम टैक्स से मुक्त होगा और इस पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा।”
यह नया नियम वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होने की उम्मीद है, जिससे चल रहे और आने वाले मामलों में पीड़ितों को तुरंत राहत मिलेगी।
भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी समस्या बनी हुई हैं। हर साल हजारों लोगों की मौत होती है और कई लोग घायल होते हैं। मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ती है।
अक्सर मामलों में फैसले में देरी होने से ब्याज की रकम बढ़ जाती है, जो पीड़ितों को हुए नुकसान और परेशानी की भरपाई के लिए दी जाती है। अब टैक्स हटने से मुआवजा ज्यादा फायदेमंद होगा।
कानूनी विशेषज्ञों, पीड़ित अधिकार समूहों और बीमा कंपनियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान होगा।
इस फैसले से मुआवजे की रकम में कटौती नहीं होगी और मामलों के जल्दी निपटारे को भी बढ़ावा मिल सकता है।
यह प्रस्ताव वित्त मंत्री की उस सोच का हिस्सा है, जिसमें टैक्स नियमों को आसान बनाना और ज़रूरतमंद लोगों को सीधी राहत देना शामिल है। साथ ही बजट में मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्थिरता पर भी खास ध्यान दिया गया है।
इस टैक्स छूट से लाखों प्रभावित परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे सड़क हादसों के मामलों में मिलने वाला न्याय टैक्स कटौती के कारण कम नहीं होगा।
केंद्रीय बजट बंगाल के लिए सीमित लेकिन अहम घोषणाएं
कोलकाता/ नयी दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 2026-27 वित्त वर्ष के लिए आम बजट पेश किया। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आए इस बजट में पश्चिम बंगाल के लिए भले ही बहुत बड़े और आकर्षक ऐलान नहीं किए गए हों, लेकिन बजट की कई योजनाओं से राज्य का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ाव देखने को मिला। यह पहलू पिछले बजट की तुलना में एक अहम बदलाव माना जा रहा है। पिछले वर्ष जब संसद में आम बजट पेश किया गया था, तब ऐसा महसूस हुआ था मानो बिहार के लिए विशेष बजट भाषण दिया जा रहा हो। उस समय बिहार को कई हाई-प्रोफाइल और सुर्खियों में रहने वाली परियोजनाएं मिली थीं और कुल मिलाकर लगभग 58,900 करोड़ की योजनाओं की घोषणा की गई थी। इसके उलट इस बार पश्चिम बंगाल के मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपेक्षाकृत संयमित रुख अपनाया और सीमित घोषणाएं कीं। विधानसभा चुनाव से पहले पेश किए गए इस बजट में पश्चिम बंगाल के लिए तीन प्रमुख घोषणाएं की गई हैं। इनमें सिलीगुड़ी–वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, डानकुनी–सूरत फ्रेट कॉरिडोर और इंटीग्रेटेड ईस्ट-कोस्ट कॉरिडोर के तहत दुर्गापुर में औद्योगिक कॉरिडोर का विकास शामिल है। बजट की अन्य योजनाओं से भी पश्चिम बंगाल को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। बायोफार्मा शक्ति परियोजना के तहत देश में सात नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के आधुनिकीकरण की घोषणा की गई है, जिनमें से एक संस्थान की शाखा कोलकाता में स्थित है। इससे राज्य में उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा वस्त्र उद्योग को लेकर कई अहम घोषणाएं की गई हैं। जूट, खादी, हैंडलूम और हस्तशिल्प पर विशेष जोर दिया गया है और मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। चूंकि इन क्षेत्रों से पश्चिम बंगाल के बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं, इसलिए राज्य को इससे सीधा लाभ मिल सकता है। केंद्रीय बजट में देश के 200 पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार की भी घोषणा की गई है। हालांकि, इसमें किसी राज्य का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन संबंधित जानकारों का मानना है कि इस योजना से पश्चिम बंगाल भी लाभान्वित हो सकता है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों पर भी बजट में खास जोर दिया गया है। लघु उद्योग विकास फंड के लिए 10 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है और सस्ती दर पर उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही गई है। चूंकि पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा एमएसएमई पर आधारित है, इसलिए इस प्रावधान से राज्य को फायदा मिलने की संभावना है। बजट में यह भी घोषणा की गई है कि हर जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास बनाया जाएगा, जहां विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे बालिकाओं की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र के लिए कई कदम उठाने की बात कही गई है। सरकार 500 रिजर्वायर और अमृत सरोवर बनाने की योजना बना रही है, जिससे तटीय इलाकों के मछुआरों को लाभ मिलेगा। पशुपालकों के लिए सस्ते ऋण की सुविधा भी देने का आश्वासन दिया गया है। पूर्वी भारत के पांच राज्यों में पांच पर्यटन केंद्र विकसित करने की घोषणा भी बजट का अहम हिस्सा रही। इसके अलावा चार हजार इलेक्ट्रिक बसें चलाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
बजट में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद रक्षा क्षेत्र के लिए 15 फीसदी आवंटन बढ़ा
– रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ का आवंटन
– पिछले वित्त वर्ष में 6.81 लाख करोड़ था
नयी दिल्ली । ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में पिछले साल पाकिस्तान के साथ हवाई संघर्ष के बाद भारत सरकार ने अपने केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 15 फीसदी आवंटन बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने रविवार को केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये दिए, जो पिछले वित्त वर्ष में दिए गए 6.81 लाख करोड़ रुपये से 15 फीसदी ज्यादा है। इससे सेनाओं के आधुनिकीकरण पर सरकार के लगातार ध्यान देने का संकेत मिलता है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कोई खास नीति की घोषणा नहीं की, लेकिन केंद्र ने रविवार को रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की, जिससे मौजूदा वित्त वर्ष के लिए कुल रक्षा बजट पिछले साल के 6.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो लगभग 15 फीसदी की बढ़ोतरी है। पिछले बजट में केंद्र ने डिफेंस के लिए 6.81 लाख करोड़ रुपये रखे थे, जिससे यह कुल सरकारी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया। पिछले बजट में डिफेंस सर्विसेज (रेवेन्यू) में सैलरी, अलाउंस, मेंटेनेंस और ऑपरेशनल तैयारी का हिस्सा 3.12 लाख करोड़ रुपये था। इस वर्ष रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी होने से उपकरण, आधुनिकीकरण और घरेलू विनिर्माण पर ज्यादा खर्च होने की उम्मीद है। सरकार ने यह भी कहा है कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की कोशिशों के मुताबिक रक्षा बजट का बढ़ा हिस्सा घरेलू उद्योग की तरफ जाता रहेगा। रक्षा क्षेत्र के लिए इसलिए बजट आवंटन बढ़ाया गया है, क्योंकि भारत रक्षा विनिर्माण में ज्यादा आत्मनिर्भरता के लिए अपनी कोशिश जारी रखे हुए है। पिछले दस सालों में भारत का डिफेंस बजट ऊपर की ओर बढ़ा है। हालांकि, जीडीपी में डिफेंस खर्च का हिस्सा पिछले कुछ सालों में कम हुआ है। सरकारी डेटा के मुताबिक, कुल डिफेंस खर्च 2015-16 में 2.94 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। बजट भाषण में वित्त मंत्री की चुप्पी के बावजूद रक्षा क्षेत्र को ज्यादा आवंटन दिखाता है कि केंद्र सरकार पाकिस्तान और चीन से दोहरे खतरों के बीच सैन्य तैयारी और आधुनिकीकरण पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है। आधुनिकीकरण में तेजी लाने और स्वदेशी निर्माण को बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए पूंजीगत व्यय पर मुख्य फोकस रहा है। भारत का स्वदेशीकरण अभियान इस सेक्टर को आकार दे रहा है। वित्त वर्ष 2025 में घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2024 के मुकाबले 12.04 फीसदी ज्यादा है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ और निर्यात 50 हजार करोड़ तक पहुंचाना है। आवंटित बजट में सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। रक्षा मंत्रालय की ओर से इस समय नौसेना के लिए राफेल फाइटर जेट, सबमरीन और अनमैन्ड एरियल व्हीकल के सौदे किये जाने की तैयारी है। डिफेंस बजट (सिविल) में पिछले साल के 28,554.61 करोड़ रुपये के मुकाबले 0.45 परसेंट की कमी की गई है। इस बीच, डिफेंस सर्विसेज (रेवेन्यू) और कैपिटल आउटले को क्रमशः 3,65,478.98 करोड़ रुपये और 2,19,306.47 करोड़ रुपये दिए गए, जो 17.24 फीसदी और 21.84 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। पेंशन के लिए आवंटन में भी बढ़ोतरी हुई है, जिसमें केंद्र ने 1,71,338.22 करोड़ रुपये दिए।




