Sunday, March 22, 2026
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प्रेमचंद ने जनसामान्य को प्रतिष्ठित किया : प्रो. दामोदर मिश्र

मिदनापुर। विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया गया।स्वागत गीत श्रेया और राया सरकार ने प्रस्तुत किया।इस अवसर पर ‘प्रेमचंद का साहित्य और वर्तमान भारत’ विषय पर चर्चा हुई।अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) दामोदर मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद ने पहली बार ऐतिहासिक या पौराणिक चरित्रों की जगह लोक नायकों को अपनी रचना का केंद्र बनाया। सकारात्मक देशप्रेमपरक प्रवृत्ति को लेखक हवा देता है और प्रेमचंद ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से जनता में देशप्रेम का संदेश दिया, सोजेवतन इसका प्रमाण है। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा कि आज का समय प्रेमचंद का समय नहीं है फिर भी प्रेमचंद का साहित्य हमारे समाज की सच्ची तस्वीर बयां करता है। विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि हमारा समाज जिस तरह से प्रेमचंद को भूल रहा है, यह चिंता का विषय है। बाजारवाद के प्रभाव में प्रेमचंद का हामिद खो गया है। प्रेमचंद का साहित्य हमें धर्मांधता, राष्ट्रान्धता और धनान्धता से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। शोधार्थी आदित्य गिरि ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मानव मूल्यों से संपृक्त है।वे महाजनी सभ्यता का पुरजोर विरोध करते हैं।इस अवसर पर नेहा शर्मा, मोनू,अपर्णा, संजना, कोमल साव,नेहा चटर्जी, मुस्कान, प्रिया चौधरी,तमन्ना, तराना, रोशन झा,कोमल सिंह, सिमरन गुप्ता, मीनाक्षी, राहुल, सूरज गुप्ता, प्रीति सिंह, पी.बेबी,बिट्टू कौर,सीता मोहता, अंजली तमांग, नेहा परवीन,निशा शर्मा और नाजिया ने अपना विचार रखा। कार्यक्रम का सफल संचालन उष्मिता गौड़ा और सुषमा कुमारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य हमें वैचारिक रूप से समृद्ध करता है।

एसिडिटी से परेशान है बंगाल की 31 प्रतिशत आबादी

हर 10 में से 7 शहरी भारतीय को पाचन समस्याओं से परेशान
कोलकाता। अगर आप कोलकाता में हैं और आप एसिडिटी से परेशान हैं तो हम आपको बता दें कि आप अकेले नहीं हैं । बंगाल में एसिडिटी तेजी से बढ़ती जा रही स्वास्थ्य समस्या बन रही है और राज्य की 31 प्रतिशत आबादी एसिडिटी से परेशान है । एसिडिटी यानी गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिसीज़ (जीईआरडी) से संबंधित इस तथ्या का खुलासा एक शोध में हुआ है । यह शोध दिल्ली स्थित गुरु तेग बहादुर अस्पताल के मेडिसिन विभाग, द्वारा किया गया है और इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च इन मेडिकल साइंसेज में प्रकाशित हुआ है ।
कोलकाता में हील फाउंडेशन द्वारा “एसिडिटी – करोडो लोगों की समस्या के सुरक्षित समाधान” विषय पर आयोजित एक मीडिया जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गयी । इस कार्यशाला में डॉ. (प्रो.) अरूप दास विश्वास और डॉ. (प्रो.) अपूर्व कुमार मुखर्जी ने इसके कारणों, स्वास्थ्य पर प्रभाव और इससे निपटने के सुरक्षित तरीकों पर चर्चा की।
डॉ. अरूप दास विश्वास, ने क्षेत्रीय आंकड़ों का खुलासा करते हुए कहा, “ पश्चिम बंगाल इस मामले में सबसे ज्यादा परेशान राज्य है जहाँ प्रत्येक तीन में से एक निवासी इस बीमारी से प्रभावित है। गलत जीवनशैली, आहार की अस्वास्थ्यकर आदतें इसे और गंभीर बना देती हैं।” उन्होंने दवाओं के चयन में सावधानी बरतने की सलाह दी क्योंकि उनमें से कुछ पेट में महत्वपूर्ण एसिड उत्पादन को पूरी तरह से अवरुद्ध कर सकती हैं । एसिडिटी से संबंधित विकारों के लिए रेनिटिडिन खाने की सलाह दी जाती है। एसिड के संतुलित स्तर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. (प्रो.) अपूर्व कुमार मुखर्जी ने कहा, “भोजन के उचित पाचन के लिए पेट में एसिड के अधिकतम स्तर की जरूरत होती है। हालांकि, हाइपरएसिडिटी पाचन और समग्र स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। बंगाल में, मछली, तले हुए और मसालेदार खाद्य पदार्थों, चाय, कॉफी, कार्बोनेटेड पेय पदार्थों और शराब का अत्यधिक सेवन किया जाता है। ये अक्सर एसिडिटी से संबंधित समस्याओं का कारण बनते हैं।” उन्होंने बताया, “पर्याप्त नींद न लेना, कार्य का समय नियत न होना और खान-पान की गलत आदतों के कारण समस्या बढ़ रही है। एसिडिटी से बचने के लिए, नियमित रूप से व्यायाम करें, जंक फूड्स और मसालेदार भोजन से परहेज करें, खूब पानी पीयें। कोई भी दवा लेने से पहले हमेशा डॉक्टर से परामर्श लें ।”
गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिसीज़ (जीईआरडी) तब होती है जब पेट का एसिड गले और पेट (आहारनाल) को जोड़ने वाली नली में वापस प्रवाहित होता है। इससे हार्ट बर्न या सीने में जलन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह काफी तकलीफदेह हो सकता है और अगर ठीक से प्रबंधित न किया जाए तो अधिक गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पाचन के शुरूआती स्तर में और आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी12 जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के अवशोषण में पेट के एसिड की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हुए, विशेषज्ञ एसिडिटी से संबंधित विकारों की बढ़ती वृद्धि को संबोधित करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। स्वस्थ जीवनशैली विकल्पों को अपनाने और उचित व सुरक्षित उपचार विकल्पों के लिए पेशेवर मार्गदर्शन लेने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए।

बचत खातों से डाक विभाग ने कमाये 450 करोड़

कोलकाता । मर्चेन्ट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एमसीसीआई) ने निर्यातकों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किया । इस सत्र में पश्चिम बंगाल सर्कल के पोस्ट मास्टर जनरल (एम एंड बी डी) अनिल कुमार ने डाकघर की विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि डाक विभाग ने बचत खातों से 450 करोड़ रुपये अर्जित किए जबकि पार्सल डिलिवरी से 299 करोड़ रुपये और आधार जारी कर 9.21 करोड़ रुपये की आय की । 2.11 लाख रुपये की पासपोर्ट सेवा प्रदान कर की गयी । उन्होंने कहा कि भारत में 60 हजार डाकघर हैं जिनमें से बंगाल में 12 हजार डाकघर हैं। इससे वस्तुओं की डिलिवरी में सुविधा हुई, साथ ही निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए डाकघर निर्यात केन्द्र योजना भी आरम्भ की गयी है । इससे भारत के किसी भी कोने से गंगाजल तक का निर्यात किया जा रहा है । निर्यातकों के लिए जीएसटी रिफंड की भी सुविधा है । कुमार ने कहा कि डाकघर सेवा इस समय 213 देशों में है जबकि एशिया – पैसिफिक के 38 देशों ई कॉमर्स की सुविधा है । एमसीसीआई की फॉरेन ट्रेड काउंसिल के चेयरमैन महेश केयाल ने डाकघर निर्यात केन्द्र योजना की सराहना की । धन्यवाद ज्ञापन फॉरेन ट्रेड काउंसिल के फॉरेन ट्रेड काउंसिल के सदस्य बी डी अग्रवाल ने दिया ।

‘मूक कला बिभंग’ कोलकाता अनुभव का सांस्कृतिक आयोजन संपन्न

कोलकाता । संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से मूक कला बिभंग कोलकाता अनुभव के तत्वावधान से सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया गया । तपन थियेटर ऑडिटोरियम में गत तीन जुलाई को यह कार्यक्रम बच्चों और युवाओं के बीच प्रदर्शन कला को बढ़ावा देने के लिए ‘कोलकाता अनुभव’ का एक महत्वपूर्ण प्रयास है जहां बच्चे और युवा कला के विभिन्न रूपों से परिचित होकर एक बेहतर समाज बना सकते हैं। डॉ विनोद नारायण इंदुरकर, माननीय अध्यक्ष, सांस्कृतिक संसाधन और प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली ने मुख्य अतिथि के रूप उपस्थित हुए।
कार्यक्रम का आरंभ एक ‘ओपनिंग सॉन्ग’ से हुई जिसे प्रख्यात गायक संजीब घोष ने गा कर सभी श्रोताओं को आनंदित कर दिया। उद्घाटन समारोह में थिएटर, माइम और नृत्यांगना बिजोया दत्त और कोलकाता अनुभव की वरिष्ठ संकाय मीनाक्षी चतुर्वेदी द्वारा एक ‘ओपनिंग डांस’ शानदार ढंग से प्रस्तुत किया गया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित किया और मुख्य सम्मानीय अतिथियों का स्वागत किया गया। सम्मानित अतिथियों में ध्रुब मित्रा, पूर्व निर्माता, दूरदर्शन केंद्र, कोलकाता, और माइम प्रतिपादक, प्रो.तारक सेनगुप्त, (सेवानिवृत्त), नाटक और रंगमंच कला, संगीत-भवन, विश्व-भारती, शांतिनिकेतन, प्रो अविजित संतरा, निदेशक और प्राचार्य , आयुष्मी फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, कोलकाता और कोलकाता के प्रतिष्ठित ज्वाइंट-रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ संतोष कुमार, सेंट जेवियर्स बिजनेस स्कूल, के डीन प्रोफेसर डॉ. सितांगशु खाटुआ का अभिनंदन किया गया। जेवियर्स यूनिवर्सिटी, कोलकाता और वित्त में प्रोफेसर, थिएटर व्यक्तित्व, नाटक निर्देशक, लेखक और अभिनेता देबोलीना साहा, प्रख्यात चित्रकार आदि को सम्मानित किया गया । इसके बाद विशिष्ट अतिथि, प्रख्यात पत्रकार और प्रसिद्ध टेलीफिल्म निर्देशक,  नौशाद मलिक का अभिनंदन किया गया जिन्होंने अपनी एक कविता सुनाई। इसके बाद ध्रुब मित्रा, पूर्व-निर्माता, दूरदर्शन केंद्र, कोलकाता और माइम प्रतिपादक द्वारा पैंटोमाइम, नाट्य कला, लोक और स्वदेशी कला और दृश्य कला पर आधारित एक व्यापक, व्यावहारिक संरचित कार्यशाला का आयोजन किया गया।सभी प्रमुख अतिथियों ने अपना वक्तव्य रखा। सांस्कृतिक कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘पॉन पदार्थ शिकार’, की प्रस्तुति से हुई जो माइम नाटक है जिसका निर्देशन और प्रदर्शन थिएटर और माइम प्रतिपादक कृष्णा दत्त ने किया था। दहेज प्रथा के पीड़ितों के विषय पर केंद्रित माइम नाटक के रूप में बहुत शक्तिशाली रूप से चित्रित किया गया । अवधारणा, स्क्रिप्ट और संकलन कृष्णा दत्त और विजया दत्त का रहा जो नाट्य कला और शिक्षा के क्षेत्र में बहुत प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं, उनकी टीम द्वारा बहुत अच्छी तरह से तैयार और संरचित किया गया । इसमें ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ की अवधारणा पर अधिक जोर दिया गया। माइम ड्रामा की इस थीम ने राष्ट्र के सांस्कृतिक ढांचे में महिलाओं द्वारा निभाई गई भूमिका के साथ-साथ व्यक्तिगत स्थान पर संस्कृति के पोषण और संरक्षण में उनके योगदान के बारे में जागरूकता को बढ़ावा दिया और प्रचारित किया। इस प्रदर्शन ने जिसमें सुंदर हावभाव, चाल और जीवंत अभिव्यक्तियाँ शामिल थीं, दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद विचारोत्तेजक माइम एक्ट, ‘स्वच्छ भारत अभियान’ आया। अगली प्रस्तुति एक प्रसिद्ध लघु नाटक, ‘जिबोंटा रंगमंच’ थी, जिसे थिएटर, माइम और नृत्य व्यक्तित्व बिजोया दत्त द्वारा प्रस्तुत किया गया। सुब्रत बर्मन, कोलकाता अनुभव के वरिष्ठ नाटक कलाकार, सबिता घोष, कोलकाता अनुभव के वरिष्ठ सदस्य छात्र, सायन दत्ता और  कोलकाता अनुभव के सबसे कम उम्र के छात्र मास्टर उद्भव दास,  शीला चटर्जी और तापस मुखर्जी, वरिष्ठ कोलकाता अनुभव के नाट्य कलाकार हैं। नाटक के नायक की भूमिका बिजोया दत्त ने निभाई, जिनके यथार्थवादी और ठोस प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अन्य पात्रों द्वारा संवादों की भावपूर्ण और भावुक प्रस्तुति वास्तव में प्रभावशाली थी। इसके बाद मास्टर उद्भव दास, कोलकाता के सबसे कम उम्र के छात्र अनुभव ने एक कविता सुनाई जिसका दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। इसके बाद बैद्यनाथ चक्रवर्ती, रानेन चक्रवर्ती, रतन चक्रवर्ती और दिलीप भट्टाचार्य (श्रवण-बाधित और वरिष्ठ सदस्य कलाकार, कोलकाता) द्वारा अभिव्यंजक और आकर्षक माइम अधिनियमों की एक श्रृंखला के साथ कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जिसने कार्यक्रम में एक अलग ही रंग जोड़ा।
अगली प्रस्तुति एक मनोरंजक लघु नाटक, ‘कान नीये केलेंगकारी’ की प्रस्तुति दी गई , जिसे कोलकाता अनुभव की सदस्य छात्रा सबिता घोष ने शानदार ढंग से किया। समापन प्रदर्शन में, एक लघु नाटक – ‘अदाय कांचकोलाय’ का शानदार मंचन ‘कोलकाता अनुभव’ के सदस्य छात्रों, शिला चटर्जी और तापस मुखर्जी द्वारा किया गया। यह थिएटर और माइम प्रतिपादक, कृष्णा दत्त द्वारा निर्देशित त्रुटियों की एक कॉमेडी , सबिता घोष, कोलकाता की छात्रा अनुभव और थिएटर, माइम और नृत्य कलाकार बिजोया दत्त ने किया । शाम के संगीतकार सिंथसाइज़र पर दिब्येंदु मालाकार थे। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन राजलक्ष्मी श्रीधर द्वारा किया गया। पूरे प्रोडक्शन की समग्र प्रस्तुति बेहद ही महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज में नव्या नवेली नंदा ने किया युवा स्त्री सशक्तीकरण का आह्वान 

कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के जुबली सभागार में आयोजित कार्यक्रम’यू ग्रो गर्ल अ युवा रोड शो’ विषय पर फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन की दोहित्री नव्या नवेली नंदा नवेली ने युवा वर्ग की लड़कियों और लड़कों के साथ अपनी कंपनी के उद्देश्यों और सुरक्षा पर अपनी बातें साझा की।’युवा’ से जुड़े निखिल तनेजा और यश पिसा नव्या नंदा के साथ युवा पीढ़ी के सभी विद्यार्थियों के साथ इसमें शामिल हुए और बहुत सी रोज घटने वाली समस्याओं पर बातचीत की।
इस अवसर पर ‘मै हूँ युवा’ लघु वृत्त चित्र भी दिखाया गया जो विशेष रूप से लड़कियों को परेशान करना, उनको बस में, ट्रेन में गलत तरीके से तंग करना आदि पर था साथ ही किस प्रकार देखने और सुनने वाले लोग उन्हें बचा सकते हैं इस पर भी फिल्म द्वारा दिखाया गया। यश पिसा ने बताया कि यह 25वां रोडशो है जिसे भवानीपुर कॉलेज में किया गया है। इसके पूर्व अभी तक 150 कॉलेज में युवा स्त्री सशक्तीकरण के लिए नवेली की पहुंच रही।
नव्या नवेली ने बताया कि कंपनी बनाने का काम कोरोना काल में हुआ तब वह भी 21 वर्ष की युवती थी। इसके द्वारा हम युवाओं की वास्तविक स्टोरीज को लेते हैं उनकी समस्याओं और समाधान का प्रयास करते हैं। नव्या ने अपने अनुभवों को सुनाया और छात्र- छात्राओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। निखिल तनेजा ने पॉडकास्ट की भी चर्चा की जिस पर युवा वर्ग की विभिन्न कहानियां प्रसारित हो रही हैं।
असफलता जीवन में कई प्रकार से आ सकती है लेकिन हम उससे कैसे उबरें इसे सकारात्मक ढंग से सोचना चाहिए। मेंटल हैल्थ, शिक्षा आदि क्षेत्रों में यह कंपनी युवाओं के साथ जुड़ी हुई है। इस अवसर पर लॉरियर पेरिस की ओर से ओपन माइक में छात्र छात्राओं ने अपनी अपनी स्टोरी को साझा किया जिसका चुनाव कर इंस्टाग्राम पर दिया जाएगा। यह कार्यक्रम डीन अॉफिस द्वारा संपन्न हुआ। संयोजन प्रातःकालीन सत्र कॉमर्स की कोआर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी और प्रो समीक्षा खंडूरी ने किया । डीन प्रो दिलीप शाह ने इस कार्यक्रम को संभव बनाया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी ।

बात्स की ‘द प्लेजर ट्रंक’ के पहले संस्करण का आयोजन

कोलकाता । बात्स की ओर से कोलकाता में प्रमुख शॉपिंग फेस्टिवल ‘द प्लेजर ट्रंक’ के पहले संस्करण का आयोजन कोलकाता के सॉल्टलेक में स्थित गोल्डन ट्यूलिप होटल में किया गया है। 4 एवं 5 अगस्त को दो दिनों तक यह प्रदर्शनी चली । इस दो दिवसीय प्रतिभागी उत्सव के आगामी सीज़न के लिए एक ही छत के नीचे कम बजट से लेकर उच्च बजट तक के डिजाइनर उत्पादों का प्रदर्शन किया गया । इस कार्यक्रम का प्रबंधन मैप5 इवेंट्स की ओर से किया गया था। बात्स – ‘द प्लेज़र ट्रंक’ प्रदर्शनी का उद्घाटन अभिनेत्री जया सील घोष और सीएस सलाहकार और एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम डब्ल्यूबी चैप्टर की अध्यक्ष डॉक्टर ममता बिनानी ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर नरेन सराफ के साथ ए वी स्टूडियो के मालिक गौरव और नितेश, काव्या कश्यप (अभिनेत्री), एकता बागरिया, (फिटनेस कोच), आशीष मित्तल (गोल्डन ट्यूलिप होटल के निदेशक) और कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां इस मौके पर मौजूद थे। बात्स की संस्थापक और क्यूरेटर शालिनी मित्तल ने कहा, एक ही छत के नीचे विभिन्न उत्पादों की ऐसी श्रृंखला और वैराइटी की खोज करना एक चुनौतीपूर्ण एवं रोमांचित अवसर है।
इस मौके पर बात्स की क्यूरेटर बबीता एन अग्रवाल, अंजू बेरिया और तृप्ति अग्रवाल ने कहा, इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी का उद्देश्य कुशल और महत्वाकांक्षी प्रेफेशनल के साथ व्यापार संवर्धित मंच को बढ़ावा देना है। ए वी स्टूडियो, द पिंक कॉलर, शिवांशी अपैरल्स, दीथ्या जैन, फ्लाइंग बर्ड बाय सोनू, एनकेएस बुटीक, लविष्का, केतन अनावी, जयपोर वीवर्स, बेड बाथ और मोर, कालाकारी, ड्रामा क्वीन, एसआर 2 कोलकाता, रुचि खेरिया, रेनी ग्लोरिया, मैजिक इन जार, थ्रेडवर्क्स, रेनबो क्रिएशन्स, बोज़ एंड ब्लिंग्स, एस एस क्रिएशन्स, स्पंदन क्रिएशन्स, ए स्टिच इन टाइम, तिरुमाला आर्ट्स, लव, गिफ्ट एंड मोर, हर्षिता क्रिएट्स, कान्हा क्रिएशन्स, कैंडी क्राफ्ट्स, पेंडोरा गर्ल्स, रेनू का कलेक्शन, डिवाइन थ्रेड्स, मिराया क्रिएशन्स, विनर, निकिता द्वारा जुवेलेन, ज्वेल गैलेरिया, सबिता द्वारा सावी और नुबू ज्वेल्स प्रमुख है।

एस बी पार्क सार्वजनिन दुर्गोत्सव की पूजा थीम “एलाम नोतुन देशे” जारी

कोलकाता । प्रत्येक वर्ष अपने आयोजन में एक नया सोच और अनोखी उत्सव शैली के लिए शहर के सबसे आकर्षक पूजाओं में से एक एस बी पार्क सार्वजनिन की ओर से शनिवार को कोलकाता प्रेस क्लब में इस बार ‘एलाम नोतुन देशे’ (हम एक नए देश में आये हैं) थीम को लॉन्च किया गया। शहर के ठाकुरपुकुर इलाके में स्थित स्टेट बैंक पार्क (एस बी पार्क) सार्वजनिन दुर्गोत्सव कमेटी ने दुर्गापूजा में इससे जुड़े गहन विचारों की छाप छोड़ी है। इस वर्ष एस बी पार्क सर्बोजनिन दुर्गोत्सव की ओर से 53वां वर्ष में पूजा का आयोजन किया जा रहा है।
इस संवाददाता सम्मेलन में संपूर्णा लाहिड़ी (अभिनेत्री और एसबी पार्क सर्बोजनिन दुर्गोत्सव 2023 की ब्रांड एंबेसडर), जॉय सरकार (संगीत निर्देशक) जिन्होंने इस वर्ष का थीम संगीत बनाया है। इसके अलावा रामानंद बंद्योपाध्याय (कलाकार) जिन्होंने इस वर्ष की मूर्ति डिजाइन की है, अरिघना साहा (सहायक कलाकार), शिवशंकर दास (मुख्य डिजाइनर और केंद्रीय विषय के कलाकार), बरुण कर (लाइट डिजाइनर, विजिटिंग फैकल्टी, एनएसडी, नई दिल्ली और थिएटर निर्देशक) के साथ मृणाल कांति मंडल (नेशनल सेल्स मैनेजर, सिका इंडिया प्राइवेट लिमिटेड) के साथ समाज की कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां इस मौके पर मौजूद थे।
मीडिया से बात करते हुए क्लब के अध्यक्ष संजय मजूमदार ने कहा, “एस बी पार्क सर्बोजनिन” को अपने इस वर्ष के थीम – ‘एलाम नोतुन देशे’ (हम एक नए देश में आये हैं) के साथ 53 वें वर्ष के आयोजन करने पर बहुत गर्व है। इस कठिन घड़ी में, जब चारों ओर दुनिया में राजनीति, धर्म, पूंजीवाद और बड़े पैमाने पर उभरते जलवायु संकट के कारण हर पल जीवन संकीर्ण होती जा रही है, इनके बीच एस बी पार्क ने अपने पूजा मंडप में थीम के जरिए कलात्मक कल्पना के माध्यम से इसका समाधान दिखाने की कोशिश की है। इस आयोजन में देश के हर राज्य के लोग आते हैं। इसे देखते हुए यहां के हर बैनर को देश के हर राज्य में वहां के क्षेत्रीय भाषा में प्रदर्शित किया जाएगा। हमें विश्वास है कि लोग इस साल भी हमारा प्रयास यहां आनेवाले दर्शकों को पसंद आयेगा। उन्होंने इस राज्य के अलावा देश के हर कोने में रहनेवाले सभी लोगों को परिवार और दोस्तों के साथ यहां होनेवाली पूजा में आने के लिए आमंत्रित किया।

प्रेमचंद की रचनाओं में हृदय परिवर्तन ज्यादा है”– मुक्तेश्वरनाथ तिवारी

आसनसोल । काज़ी नज़रुल विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के तत्वाधान में 4 अगस्त को ‘वर्तमान समय और प्रेमचंद’ को केंद्र में रखकर प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया गया था। इस सभा में मुख्य अथिति के तौर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवाशीष बंदोपाध्याय,कला संकाध्यक्ष प्रो. सजल कुमार भट्टचार्य, अध्यक्ष प्रो. मुक्तेश्वरनाथ तिवारी एवं बीज वक्ता के रूप में प्रो. विजय कुमार भारती ने अपने महत्वपूर्ण भाषण से प्रेमचंद के रचनाशीलता और उनके जीवन शैली को सभा में उपस्थित शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के समक्ष उजागर किया। कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो. देवाशीष बंदोपाध्याय के भाषण से हुई,कुलपति महोदय ने कहा-“प्रेमचंद हमारे मानव हृदय के सबसे बड़े चितेरे है। प्रेमचंद,रवींद्रनाथ,काज़ी नजरुल इस्लाम जैसे मनीषी साहित्यकारों ने मनुष्य की मनुष्यता को बचाने की बात की है।प्रेमचंद सूरज की तरह है और उनका साहित्य उसके प्रकाश की तरह है।”
विशिष्ट वक्ता प्रो. सजल कुमार भट्टचार्य ने इतिहास का अर्थ प्रस्तुत करते हुए प्रेमचंद के साहित्य पर कहा-“रवींद्रनाथ के साथ उनका संबंध जोड़ते हैं और साहित्य में प्रेमचंद की प्रासंगिकता पर बात करते है; साथ ही वर्तमान संदर्भ में प्रेमचंद की जरूरत को रेखांकित करते हैं। बीज वक्तव्य के रूप में प्रो.विजय कुमार भारती ने प्रेमचंद के भाषा सम्बन्धी पहलुओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा-“प्रेमचंद जनता की आम-फ़हम भाषा की वकालत करते है।त्रैमासिक, त्रिमासिक की जगह तिमाही क्यों न कहा जाय ?जो भाषा आम व्यक्ति को आसानी से समझ में आ जाये,उसे ही साहित्य की भाषा होनी चाहिए।अध्यक्ष मुक्तेश्वरनाथ तिवारी ने कहा-“प्रेमचंद लोक अर्थात सामान्य व्यक्ति को साहित्य के केंद्र में रखते हैं।वे इतने सहज सरल सामान्य थे कि एकबार लखनऊ स्टेशन पर उन्हें लेने जाने व्यक्ति तक उन्हें पहचान नहीं पाए क्योंकि उनकी वेशभूषा सामान्य व्यक्ति की थी। तिवारी जी ने आगे बढ़कर महादेवी वर्मा और प्रेमचंद का वह ऐतिहासिक संस्मरण भी सुनाया जिसमें फर्श गंदे हो जाने की वजह से महादेवी वर्मा की परिचारिका भक्तिन उन्हें घर में घुसने तक नहीं देती।उसे लगता है कोई जरूरत मन्द किसान महीयसी महादेवी वर्मा जी से मिलने आ गया है। इतना ही नहीं प्रेमचंद सबकी तरफ से लिखे।उस समय के भारत के हर एक नागरिक की कहानी प्रेमचंद ने लिख दी है। कभी इतिहास मिट जाए तो प्रेमचंद के साहित्य से उसे फिर से प्राप्त किया जा सकता है।”धन्यवाद ज्ञापन विभाग की प्राध्यापिका डॉ.काजु कुमारी साव ने एव संचालन विभाग के संयोजक डॉ. बिजय कुमार साव ने किया। शोध छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार रखे।डॉ.एकता कुमारी एव डॉ. प्रतिमा प्रसाद ने भी प्रेमचंद को याद किया।

भारतीयता के लेखक हैं प्रेमचंद:प्रो.श्रीकांत द्विवेदी

मिदनापुर । राजा नरेंद्र लाल खान महिला महाविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से प्रेमचंद जयंती के अवसर पर ‘प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्वागत वक्तव्य देते हुए कॉलेज की प्राचार्या डॉ. जयश्री लाहा ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य हमें जन जीवन के करीब ले जाता है। मुख्य वक्ता के तौर पर विद्यासागर विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय जीवन की कथा है।प्रेमचंद ने जिन मानवीय और सामाजिक मूल्यों से सुंदर और लोकतांत्रिक समाज का सपना देखा था उसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।
इस अवसर पर पंचम सत्र की छात्राओं ने प्रेमचंद की सद्गति कहानी का मंचन किया। रक्षा कुमारी, बिट्टो कौर, सिमरन पाल, अंजली शर्मा, कुमकुम कुमारी, निशा कुमारी, प्रिया मिश्रा ने अपने शानदार अभिनय से मंचन को प्रभावी बनाया।प्रोफेसर सुमिता भकत ने प्रेमचंद के साहित्य को वंचितों की पक्षधरता का साहित्य कहा। विभागाध्यक्ष डॉ. रेणु गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि प्रेमचंद हमारी पहचान हैं। ऐसे सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजनों से हम प्रेमचंद के लेखन और विचारों को व्यापकत्व प्रदान कर सकते हैं।

भवानीपुर कॉलेज ने मनाया दो दिवसीय कारगिल विजय दिवस – 2023

कोलकाता । जब वीरता और प्रतिबद्धता वाले लोग हमारे देश की सीमाओं को सुरक्षित करते हैं,हम शांति से सोते हैं। 1999 की गर्मियों में, कारगिल की सबसे ठंडी चोटियों पर, देश के वीर सपूतों ने पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ते हुए अपने देश की अखंडता की रक्षा के लिए लगातार लड़ाई लड़ी। इस यात्रा में कई शहीद हुए, कई घायल हुए लेकिन किसी ने हार नहीं मानी।इन बहादुरों को सम्मानित करने के लिए, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में एनसीसी कलेक्टिव ने दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया। 26 जुलाई 2023 को, कैडेटों ने देशभक्ति गीत और एक स्व-रचित कविता के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद हमारे वरिष्ठ कैडेटों और डीन सर प्रो दिलीप शाह के नेतृत्व में पुष्पांजलि समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद अंतर-विंग वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई। ईगल स्क्वाड्रन का प्रतिनिधित्व एयर विंग कैडेटों द्वारा किया गया और चीता स्क्वाड्रन का प्रतिनिधित्व आर्मी विंग कैडेटों द्वारा किया गया, जिसका मूल्यांकन छात्र मामलों के डीन प्रो. दिलीप शाह और एनसीसी अधिकारी सुश्री अरित्रिका दूबे ने किया, सर्वश्रेष्ठ वक्ता, प्रथम और द्वितीय उपविजेता को चुना गया । बहस के बाद एक खुली प्रश्नोत्तरी हुई जिसमें एनसीसी कैडेटों ने दर्शकों के सामने प्रश्न पूछे गए। सही उत्तर दिए गए। प्रश्नों की संख्या के अनुसार प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को पुरस्कृत किए जाने के साथ दिन के कार्यक्रम संपन्न हुए।
28 जुलाई 2023 को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद कारगिल युद्ध के दिग्गजों के साथ इंटरैक्टिव सत्र निर्धारित किया गया था।इस अवसर पर सम्माननीय अतिथि, कारगिल युद्ध के दिग्गज कैप्टन अखिलेश सक्सेना और कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैप्टन अखिलेश की पत्नी लेखिका, इंस्पायरिंग मंत्रा की संस्थापक और सीईओ शिखा अखिलेश सक्सेना शामिल हुईं। कमांडिंग ऑफिसर नंबर 1 बंगाल एयर स्क्वाड्रन एनसीसी, विंग कमांडर एस. सेल्वा कुमार और बीईएससी एनसीसी से जुड़ी सेना और नौसेना इकाइयों के कर्मचारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत प्रोफेसर दिलीप शाह के उद्घाटन भाषण से हुई, जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान सैनिकों के साहस के बारे में बात की, जिसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया गया। मुख्य अतिथियों को कारगिल में उनकी जीवन-घातक लड़ाई के दौरान कैप्टन अखिलेश सक्सेना के संघर्ष पर एक परिचयात्मक वीडियो के साथ पेश किया गया, जिसके बाद मुख्य अतिथियों ने स्वयं अपनी कहानियाँ साझा कीं। जैसा कि कैप्टन अखिलेश सक्सेना ने बताया कि कैसे युद्ध में उन पर हमला किया गया था, उन्होंने प्रबंधन क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपनी योजना के बाद अपनी तत्काल प्रतिक्रिया पर भी चर्चा की। हमने श्रीमती शिखा की भावनात्मक दुर्दशा भी देखी। शिखा अखिलेश सक्सेना ने घर पर अपनी लड़ाई खुद लड़ने और अपने पति के लौटने का इंतजार करने की बात कही। इस भावनात्मक सत्र के बाद डीन सर प्रो दिलीप शाह ने शिखा सक्सेना द्वारा लिखी पुस्तक ‘नेशन फर्स्ट का अनावरण किया गया, इस पुस्तक में कारगिल युद्ध’99 का विस्तृत विवरण है और एक सैनिक और उसके परिवार को दूर रहते हुए युद्ध करते समय जो गर्व और दर्द का अनुभव होता है, उसका वर्णन है। युद्ध क्षेत्र, इस बात से अनभिज्ञ कि भविष्य उसका क्या इंतजार कर रहा है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत एसजीटी गैब्रिएला आर्य गुप्ता के नेतृत्व में एक उद्घाटन नृत्य के साथ हुई, जिसमें एक सैनिक की कहानी को जीवंत किया गया, यह प्रदर्शन उन लोगों को समर्पित था जो कभी घर वापस नहीं आए। कैडट प्रिंस मिश्रा और सीपीएल पी द्वारा एक देशभक्ति युगलपवित्रा ने शुरुआती प्रदर्शन के बाद दिन का माहौल तैयार किया। युद्ध के दौरान पाकिस्तान पर किए गए भारतीय सशस्त्र बलों – ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन सफीद सागर, ऑपरेशन तलवार के हमलों का विवरण देने वाली एक बहुत ही जानकारीपूर्ण वृत्तचित्र आगे प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद सीडीटी अलीश तमांग, सीपीएल पी. पवित्रा और एसजीटी संघमित्रा बनर्जी द्वारा समूह गीत के साथ एक और मधुर प्रस्तुति दी गई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सीडीटी सृजन पायने ने माउथ ऑर्गन बजाया, जिन्होंने अपने प्रदर्शन की विशिष्टता के लिए प्रशंसा प्राप्त की। नर्तकों ने भारत की अदम्य भावना को प्रदर्शित करते हुए एक ऊर्जावान प्रदर्शन के साथ फिर से मंच को प्रोत्साहन से भर दिया। अंत में, सीडीटी प्रिंस मिश्रा ने “दर्द और गौरव” पर एक स्व-रचित कविता के माध्यम से अपने दिल की बात कही। डीन सर प्रो शाह संबोधित किया और उन्हें पृथ्वी को बचाने के लिए पेड़ लगाने का मिशन दिया, एक पहल जिसने वास्तव में संस्थान के आदर्शों को चित्रित किया।
यह आयोजन 26 जुलाई 2023 के सम्मान समारोह के साथ समाप्त हुआ। सीडीटी/एसजीटी अदिति ए संजय को बहस के लिए सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार दिया गया, उनके बाद सीडीटी ट्विंकल जैन और सीडीटी संयम अग्रवाल क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपविजेता रहे। एलसीपीएल आदित्य सिंह को क्विज़ प्रतियोगिता के लिए विजेता के रूप में सम्मानित किया गया, उनके बाद क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपविजेता के रूप में सीडीटी आरव तुलस्यान और सीडीटी स्नेहा पांडे रहे। सभी विजेताओं को पदक और प्रमाण पत्र के साथ लेखिका श्रीमती शिखा अखिलेश सक्सेना द्वारा सौंपी गई नेशन फर्स्ट की हस्ताक्षरित प्रतियाँ देकर सम्मानित किया गया। प्रत्येक सहभागी ने जोश से भरकर राष्ट्र के तिरंगे को सदैव ऊंचा रखने का संकल्प लिया। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।