कोलकाता । नराकास, कोलकाता (कार्यालय-2) के तत्वावधान में सीएसआईआर-केन्द्रीय काँच एवं सिरामिक अनुसंधान संस्थान, कोलकाता में दिनांक गत 30 मार्च को ‘आत्मनिर्भर भारत लक्ष्य की प्राप्ति में भारतीय भाषाओं की भूमिका’ विषय पर पूर्ण दिवसीय राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में नराकास के सदस्य कार्यालयों के प्रतिनिधियों के अलावा देशभर के कई अन्य कार्यालयों से राजभाषा कार्मिक ऑनलाइन शामिल हुए। अपने स्वागत सम्बोधन में सीएसआईआर-सीजीसीआरआई एक प्रशासन नियंत्रक सुप्रकाश हलदर ने आशा जताई कि इस आयोजन से सभी को भारतीयों भाषाओं में कार्य करने में सहायता मिलेगी। अपने अध्यक्षीय अभिभाषण में नराकास अध्यक्ष, प्रो. बिक्रमजीत बसु ने जर्मनी, फ्रांस, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया आदि का उदाहरण देते हुए सभी से हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के ज्यादा से ज्यादा उपयोग की अपील की। संगोष्ठी में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारतीय भाषाओं के योगदान को केंद्र में रखते हुए कुल चार सत्रों आयोजन किया गया। प्रथम सत्र में आईआईटी खड़गपुर के वरिष्ठ हिंदी अधिकार डॉ. राजीव कुमार रावत ने ‘आधुनिक कम्प्यूटिंग ई-टूल्स के उपयोग’ पर अपनी प्रस्तुति तथा अनुभव सभी के साथ साझा किया। द्वितीय सत्र में राजभाषा विभाग, भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय में उपनिदेशक (कार्यान्वयन), डॉ. विचित्रसेन गुप्त ने ‘सरकारी कार्यालयों में राजभाषा का प्रभावी कार्यान्वयन’ विषय पर अपने ज्ञानवर्धक व्याख्यान से संगोष्ठी में शामिल कार्मिकों को अवगत करवाया तथा उनसे भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अपना सार्थक योगदान देने का आह्वान किया। भोजनोपरांत आयोजित तृतीय सत्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग की प्रो. राजश्री शुक्ला ने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा पर जोर को रेखांकित करते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत लक्ष्य की प्राप्ति में भारतीय भाषाओं की भूमिका’ पर व्याख्यान दिया। अंतिम सत्र में यूको बैंक के मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) सत्येन्द्र कुमार शर्मा में ‘भाषा प्रौद्योगिकी और हिंदी’ विषय पर व्याख्यान-सह-प्रस्तुति के माध्यम से सभी को प्रौद्योगिकी के उचित उपयोग से अपने राजभाषा एवं हिंदी के कार्यों को सुगम बनाने की दिशा में जागरूक किया। चारों सत्रों की अध्यक्षता क्रमशः डॉ. वंशी कृष्ण बल्ला, ज्योतिर्मय सिकदर, अजयेन्द्र नाथ त्रिवेदी तथा मुनमुन गुप्ता द्वारा किया गया। संगोष्ठी के आयोजन में डॉ. विमलेश कुमार त्रिपाठी प्रशांत तिवारी तथा सत्यजीत नारायण सिंह द्वारा भी योगदान दिया गया।
अमेरिका-ईरान दो हफ्ते के संघर्ष विराम पर सहमत, इजराइल भी राजी
-होर्मुज में शांति की आहट, इस्लामाबाद वार्ता की तैयारी
वाशिंगटन/तेल अवीव/लेबनान/इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के संघर्ष विराम पर सहमत हो गए हैं। ईरान के 10 सूत्री प्रस्ताव पर यह समझौता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की समयसीमा से दो घंटे से भी कम समय पहले हुआ। ट्रंप ने मंगलवार की समय सीमा तय करते हुए तेहरान से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने या फिर समूची सभ्यता को मिटा दिए जाने का सामना करने की चेतावनी दी थी। मंगलवार देर रात ट्रंप की सहमत होने की घोषणा उनकी असाधारण चेतावनी से एकदम उलट रही। यह घोषणा पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के मध्यस्थता प्रयासों के बाद सामने आई।
गल्फ न्यूज, अल जजीरा, तसनीम, सीबीएस न्यूज और सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने पुष्टि की है कि अगले दो हफ्तों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति ईरानी सेना के प्रबंधन में दी जाएगी। अराकची ने बुधवार तड़के अपने एक्स हैंडल पर ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की ओर से युद्ध में प्रस्तावित युद्ध विराम के बारे में बयान जारी किया। इसमें कहा गया है कि अमेरिका के 15 और ईरान के 10 सूत्री प्रस्ताव के बाद शांति का यह अवसर मिला है। बयान में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सैन्य प्रमुख का आभार जताया गया है। इसमें कहा गया है कि दो सप्ताह की अवधि के लिए ईरान के सशस्त्र बलों के साथ समन्वय और तकनीकी सीमाओं का ध्यान रखते हुए होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग संभव होगा। उल्लेखनीय है कि अमेरिका-इजराइल के 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान में अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मौत हो गई थी। इसके बाद छिड़ा युद्ध खाड़ी देशों तक फैल गया। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान ने कड़ा पहरा बैठा दिया। जहाजों के आवागमन पर रोक लगा दिया। इससे सारी दुनिया में तेल और गैस का संकट पैदा हो गया। संघर्ष विराम पर सहमत होने के बावजूद ईरान ने इस बात पर जोर दिया है कि इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत संघर्ष की समाप्ति का संकेत नहीं होगी, बल्कि कूटनीतिक प्रयासों के विस्तार के रूप में होगी। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने अमेरिका-ईरान सीजफायर समझौते को अमेरिका की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि इसे राष्ट्रपति ट्रंप और जाबांज सेना ने मुमकिन बनाया। उन्होंने एक्स पर कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका के सैन्य अभियान ने प्रशासन को कड़ी बातचीत करने का मौका दिया, जिससे अब एक कूटनीतिक समाधान और लंबे समय तक शांति की राह खुली है। उन्होंने लिखा, “इसके अलावा राष्ट्रपति ने होर्मुज को फिर से खुलवाया।” ईरानी अधिकारी अमेरिका के साथ इस सीजफायर समझौते को ईरान के लिए एक “जीत” के तौर पर पेश कर रहे हैं। वह अब नागरिकों से वादा कर रहे हैं कि अब अगले कदम ईरान की शर्तों पर बढ़ेंगे। वह कह रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान के 10 सूत्री प्रस्ताव को मानकर ही संघर्ष विराम पर सहमति जताई है। वह कह रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि दोनों पक्षों के बीच विवाद के अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन गई है। इस जंग से ईरान को वही मिला जो वह चाहता था।
ईरान ने कहा है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका के साथ होने वाली आगामी इस्लामाबाद वार्ता के लिए किसे भेजा जाएगा, यह अभी तय नहीं है। ईरान ने मीडिया से अपुष्ट खबरों का प्रसारण न करने का अनुरोध किया है। सरकारी न्यूज एजेंसी तसनीम के अनुसार मीडिया के उन तमाम दावों के बावजूद ईरानी वार्ताकारों की टीम को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। सूत्र ने बताया कि ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिवालय ही टीम तय करेगा। बहरीन ने कहा है कि उसकी नागरिक सुरक्षा टीम ने सुबह ईरान की ओर से हुए हमलों के कारण एक जगह लगी आग को बुझाने में सफलता हासिल की है। कतर के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि एक इंटरसेप्शन (हमले को रोकने की कार्रवाई) के दौरान गिरे मलबे की चपेट में आने से चार लोग घायल हो गए। सऊदी अरब ने बताया कि उसने पांच बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच में ही रोककर नष्ट कर दिया। ट्रंप ने कहा, नहीं पता 15 दिन में क्या होगाः अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल ट्रुथ पर नया बयान पोस्ट किया है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध विराम का स्वागत करता है। वह भी लड़ाई से थक चुका है। उन्होंने कहा कि सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि अगले 15 दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कैसे आगे बढ़ती है। उन्होंने कहा, ”हमें नहीं पता कि इजराइल उस बातचीत में शामिल होगा या नहीं, जिसकी मध्यस्थता पाकिस्तान करेगा।” उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने संघर्ष विराम समझौते की मध्यस्थता में मदद के लिए पाकिस्तान और चीन का आभार जताया है।
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बंगाल में एसआईआर के बाद 6.75 करोड़ रह गए वोटर
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या में पहली बार गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2011 से लगातार बढ़ रही मतदाता संख्या अब घटकर लगभग 6.75 करोड़ रह गई है। यह जानकारी राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी अंतिम पूरक सूची के विश्लेषण में सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011 में, जब वाम मोर्चा के 34 वर्ष के शासन का अंत हुआ और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल की सरकार बनी, उस समय राज्य में लगभग 5.62 करोड़ मतदाता थे। इसके बाद हर चुनाव में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ती रही।
चुनावी वर्ष के अनुसार मतदाताओं की संख्या –वर्ष 2011 (विधानसभा चुनाव) – लगभग 5.62 करोड़, वर्ष 2014 (लोकसभा चुनाव) – लगभग 6.27 करोड़, वर्ष 2016 (विधानसभा चुनाव) – लगभग 6.58 करोड़, वर्ष 2019 (लोकसभा चुनाव) – लगभग 6.98 करोड़, वर्ष 2021 (विधानसभा चुनाव) – लगभग 7.33 करोड़, वर्ष 2024 (लोकसभा चुनाव) – लगभग 7.60 करोड़
लेकिन, बंगाल में गत नवंबर से शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब यह संख्या घटकर 6.75 करोड़ हो गई है। राजनीतिक दलों ने पहले आरोप लगाया था कि नए और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के नाम तो जोड़े जा रहे थे, लेकिन मृत, स्थानांतरित, लापता और दोहरे नाम वाले मतदाताओं को सूची से हटाने की प्रक्रिया प्रभावी तरीके से नहीं हो रही थी।
चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इस बार पुनरीक्षण के दौरान मृत, स्थानांतरित, लापता, दोहरे तथा फर्जी मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए गए हैं, जिसके कारण मतदाता संख्या में यह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रक्रिया से मतदाता सूची अधिक पारदर्शी और शुद्ध हुई है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में इसी महीने दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
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श्री हनुमानः रामभक्ति के विग्रहवान स्वरूप
हनुमान जयंती (02 अप्रैल) पर विशेष
-डॉ. उमेश चन्द्र शर्मा
हनुमान जी महाराज, परात्पर ब्रह्म, सच्चिदानन्द स्वरूप, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम के निष्ठावान सेवक, निष्काम भक्त और उनके अन्तरङ्ग पार्षद हैं। रामभक्ति के विग्रहवान स्वरूप श्री हनुमानजी भक्ति की उच्चतम पराकाष्ठा पर आसीन है और उनके जीवन में प्रेमा भक्ति, तात्विक ज्ञान और निष्काम कर्म योग का समुच्चय विद्यमान है।
श्री हनुमानजी राम मिलन के प्रमुख सेतु हैं और अपने आराधकों को जीवन के चरम लक्ष्य रामभक्ति की और अग्रसर करते हैं, वे रामभक्तों के परम आश्रय और संकटापन्न स्थिति में उनके संकटों का निवारण करते हुए उनके जीवन में शुभ मङ्गल का संचार करने वाले प्रत्यक्ष देवता कहे जाते हैं।
भगवान् श्रीराम की वनगमन लीला में एक प्रमुख पात्र के रूप में उनकी भूमिका अपने स्वामी श्रीराम के निष्ठावान सेवक के रूप में ही नहीं बल्कि कर्तव्य पथ पर पुत्र के समान आज्ञाकारी, बंधु के समान हितकारी, द्विविधा की स्थिति में गुरु के समान पथ प्रदर्शक तथा विषम परिस्थितियों में मित्र के समान सहयोगी के रूप में भी उल्लेख किए जाने योग्य है। वस्तुत: हनुमानजी जैसा निष्ठावान, समर्पित एवं निष्काम भक्त न तो सृष्टि में पहले कभी हुआ और न आगे कभी हो सकता है। उनके बगैर श्रीरामचरित का पूरी तरह बखान नहीं किया जा सकता।
विराट वैभव से परिपूर्ण श्री हनुमानजी विनयशील हैं और रामकाज में अत्यंत लघु रुप धारण कर लेते हैं। हनुमानजी भगवान् श्रीराम की आज्ञा पाकर जब सीता माता की खोज हेतु निकले तो वे अत्यंत लघु रूप में आकाश मार्ग से गमन करते हुए लंका पहुंचे।
श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं कि लंका की भूमि पर कदम रखने के पहले जहां उन्होंने अपने स्वामी श्रीराम का स्मरण करते हुए लंका की सीमा में प्रवेश किया, वहीं जब लंका नगरी में माता सीता की खोज शुरू की, तब भी लघु रूप धारण कर सर्वप्रथम अपने स्वामी श्रीराम का स्मरण करते हुए सीताजी का अनुसंधान करने लगे।
हनुमानजी शुद्ध भक्त हैं इसलिए अहंकार रहित हैं और उनके द्वारा रामकाज निष्पादन हमें प्रेरित करता है कि किसी बड़े उद्देश्य की पूर्ति के लिए छोटा हो जाना ही ठीक है। अहंकार महान् उद्देश्यों की पूर्ति में सदैव बाधक होता है, परिणामस्वरूप अहंकार से कोई महान् कार्य अपने मुकाम पर पहुंचने में पूरी तरह सफल नहीं होता इसलिए हनुमानजी अपने स्वामी श्रीराम की आज्ञा पाकर जब सीता माता की खोज हेतु निकले तो अपने मुख में राम नाम की विराट सत्ता को स्थापित कर लिया किंतु अपने स्वरूप को अत्यंत लघु आकार देते हुए लंकापुरी में सीता माता की खोज करने लगे।
धर्मशास्त्रों के अनुसार भगवान् शिव द्वारा अपने स्वामी श्रीराम की सेवा की तीव्र अभिप्सा के निमित्त उन्होंने ग्यारहवें रुद्र के रूप में वायुदेव केसरी और देवी अञ्जना के पुत्र हनुमान के रूप में जन्म लिया और भगवान् श्रीराम की सेवा की अपनी अभिलाषा पूरी की। पुराणों के अनुसार चूंकि भगवान् विष्णु ने रामावतार में पुरुष रुप धारण किया था और भगवान् शिव उनकी सेवा के अभिलाषी थे, ऐसे में यदि मनुष्य रूप में जन्म लेकर सेवा करते तो यह दास भाव के अनुकूल नहीं होता इसलिए उन्होंने मनुष्य से निम्नतर वानर योनि में जन्म लेकर दास भाव से अपने स्वामी भगवान् श्रीराम की सेवा की।
श्रीरामचरितमानस के अनुसार हनुमानजी ने गतिमान सूर्यदेव से तादात्म्य स्थापित करते हुए उनसे शिक्षा ग्रहण की, अपने दिव्य गुणों से वे सूर्यदेव के भी स्नेह भाजन हुए और उनसे प्रखर बुद्धि, दिव्य ज्ञान सहित तेज, ओज, बुद्धि और बल पा गए।
वाल्मीकि रामायण में महर्षि वाल्मीकि एवं हनुमान बाहुक में गोस्वामी तुलसीदास वर्णन करते हैं कि जब श्री हनुमान विद्या अध्ययन हेतु भगवान् सूर्य के पास गए तो सूर्यदेव ने असमर्थता व्यक्त करते हुए कहा कि मैं सदैव गतिमान हूं और तुम्हारे लिए मेरे सामने बैठना संभव नहीं इसलिए मैं तुम्हे कैसे शिक्षा दूंगा? तभी हनुमानजी ने सूर्याभिमुख होकर आकाश मार्ग में गमन करना शुरू कर दिया और उनके समक्ष उनसे संपूर्ण शिक्षा ग्रहण की। उधर स्वर्ग स्थित देवताओं ने जब यह अद्भुत एवं विस्मयकारी दृश्य देखा तो सब के सब हतप्रभ रह गए और हनुमानजी के धैर्य, शौर्य, साहस और वीरता की प्रशंसा करने लगे।
हमारे वेद्, उपनिषद् एवं पौराणिक ग्रंथों में भगवान् श्रीराम के पावन नाम की बड़ी महिमा का बखान किया गया है और हनुमानजी महाराज तो भगवान् श्रीराम के अतिप्रिय दास हैं, रुद्रावतार हैं और रुद्र अर्थात शिव सतत रामनाम में ही रत रहते हैं, ऐसे में रुद्रावतार हनुमानजी हर क्षणांश अपने प्रभु के नाम का ही स्मरण किया करते हैं।
श्री बुधकौशिक मुनि रामरक्षा स्तोत्र में भगवान् शिव और माता पार्वती के बीच हुए संवाद का उल्लेख करते हुए, रामनाम की महिमा का वर्णन करते हैं-राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्त्र नाम तत्तुल्यं राम नाम वरानने।।
अर्थात है देवी ! राम राम राम इस प्रकार तीन बार राम नाम का उच्चारण सहस्त्र नाम के तुल्य है इसलिए मैं सदैव राम नाम में ही रमण करता हूं ।
श्री हनुमानजी पर ब्रह्म एवं शक्ति की महती कृपा थी और वे इसी शक्ति से अनुप्राणित हुए। वाल्मीकि कृत रामायण सहित अन्य पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख है कि भगवान् श्रीराम और भगवती सीता द्वारा प्रदत्त आशीर्वाद से श्री हनुमानजी अजर अमर हैं और कल्प पर्यन्त पृथ्वी लोक में उनका निवास बना रहेगा।
महर्षि वाल्मीकि के अनुसार भगवान् श्रीराम के आज्ञानुसार सीता माता की खोज कर लौटे हनुमानजी को प्रभु ने अपना सर्वस्व कहा जाने वाला दिव्य आलिंगन प्रदान कर उन्हें कृत-कृत कर दिया और जब प्रभु अपनी लीलाओं का संवरण कर अपने नित्य धाम जाने लगे तब उन्होंने हनुमानजी को कहा कि हनुमान! तुम मेरी कथा में ही मेरी भावना कर कल्प पर्यन्त इस पृथ्वी लोक पर निवास करते हुए स्वयं मेरी कथा सुनना और रसिकों को भी सुनाया करना।
ऋषि वाल्मीकि के अनुसार भगवान् श्रीराम ने हनुमानजी को कहा कि जब तक ये लोक बने रहेंगे, तब तक मेरी कथाएं स्थिर रहेंगी और जब तक मेरी कथा संसार में रहेगी, तुम्हारे शरीर में प्राण रहेंगे और तुम्हारी कीर्ति अमिट रहेगी। भगवान् श्रीराम की कृपा के साथ ही सीताजी ने भी हनुमानजी पर कृपा करते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया कि है तात्! तुम बल और शील के निधान, अजर अमर और गुणों की निधि होओ और श्रीरघुनाथजी तुम पर बहुत कृपा करें।
श्रीमद्भागवत महापुराण में शुकदेव मुनि, राजा परीक्षित को कहते हैं कि राजन् ! किम्पुरुष वर्ष में भगवान् श्री राम के चरणारविन्दों की सन्निधि के रसिक परम भागवत श्री हनुमानजी अन्य किन्नर गणों सहित भक्ति पूर्वक उनकी उपासना करते हैं। वहां अन्य गंधर्वों सहित आर्ष्टिषेण अपने स्वामी भगवान् श्री राम की परम कल्याणमयी गुणगाथाओं का गान किया करते हैं, हनुमानजी उस कथा का श्रवण करते हैं और अपने प्रभु की स्तुति में मग्न रहते हुए रसिकों को भी राम कथा रुपी अमृत प्रदान करते हैं।
परब्रह्म श्रीराम और आद्या शक्ति सीता के कृपा प्राप्त श्री हनुमानजी महाराज अजर अमर हैं, सब युगों में वर्तमान है और अपने आराधकों को संरक्षण प्रदान करते हुए उन्हें रामभक्ति पथ पर अग्रसर करते हैं, वे रामकथा के अमर गायक हैं। यद्यपि हनुमानजी की विद्यमानता व्यापक रूप से सब जगह है, तथापि जहां-जहां राम का कीर्तन गाया जाता है, वहां वे मौजूद होते हैं। तुलसीदासजी कहते हैं-
यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनं, तत्र तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम्।वाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं मारुतिं नमत राक्षसांतकम्।।
अर्थात जहां-जहां रघुनाथ श्रीराम का कीर्तन, स्मरण, जप या कथा होती है, वहां-वहां नेत्रों में अश्रुपूरित आनंद लिए हनुमानजी उपस्थित हो जाते हैं। ऐसे राक्षसों के लिए काल स्वरूप श्री हनुमानजी को प्रणिपात किया जाना चाहिए।
(साभार – हिन्दुस्थान समाचार)
न्याय का प्रतीक घंटा: क्यों बजाते हैं घंटी और क्या है इसका महत्व
भारतीय भाषा परिषद में महादेवी जयंती का आयोजन
कोलकाता। भारतीय भाषा परिषद की ओर से महादेवी वर्मा की जयंती के अवसर पर “महादेवी वर्मा और स्त्री विमर्श” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इस संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि अमूमन जब भक्तिकाल की बात होती है तो मीरा को हाशिए पर रख कर देखा जाता है और जब छायावाद की बात होती है तो महादेवी वर्मा को हाशिए पर रख कर देखा जाता है। स्त्रियों के दो बड़े आभूषण रहे हैं- मौन और आँसू। महादेवी का लेखन स्त्री विवशता को चुनौती देता है। महादेवी वर्मा की स्त्री चेतना में बाजार के रंगीन प्रलोभनों के प्रति विरोध का स्वर है। महादेवी वर्मा के यहाँ स्वानुभव के साथ संवेदना भी है। विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन की डॉ. श्रुति कुमुद ने कहा कि महादेवी वर्मा अपनी सीमा को अपनी शक्ति बना लेती हैं। आज स्त्री-विमर्श एक गाली की तरह देखा जा रहा है। यह देखना जरूरी है कि भविष्य के गर्भ में स्त्रीवाद का स्वरूप क्या होगा? आज कैंसिल कल्चर को स्त्रियों के ख़िलाफ़ ट्रॉलिंग के टूल्स के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। युवा हस्ताक्षर के रूप में हिंदी विभाग, विद्यासागर विश्वविद्यालय के शोधार्थी सुषमा कुमारी ने कहा कि महादेवी वर्मा ने अपने समय की उन तमाम समाजिक रूढ़ियों, अन्याय और अत्याचारों का विरोध किया जो भारतीय समाज को अपंग बनाने में सहायक था। शोधार्थी रूपेश कुमार यादव ने कहा कि महादेवी वर्मा का रचना-संसार पुरुष वर्चस्व के ख़िलाफ़ एक सशक्त प्रतिरोध है। इस अवसर पर महादेवी वर्मा पर बनी फ़िल्म ‘पंथ रहने दो अपरिचित’ की प्रदर्शनी भी हुई।
इस अवसर पर घनश्याम सुगला,प्रो. हितेन्द्र पटेल, डॉ नंदिता बनर्जी, प्रो.दिलीप शाह, श्री आशीष झुनझुनवाला, विमला पोद्दार, डॉ सुशीला ओझा, ज्योति शोभा, शिखा सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि आधी आबादी का आख्यान है महादेवी वर्मा का साहित्य। यही वजह है कि महादेवी वर्मा ने मनमाना और मनचाहा में मनचाहा को चुना।
लिटिल थेस्पियन का 15वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह ‘जश्न-ए-अज़हर’ सम्पन्न
कोलकाता । लिटिल थेस्पियन का 15वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह ‘जश्न-ए-अज़हर’ कोलकाता के ज्ञान मंच में आयोजित हुआ। लिटिल थेस्पियन के 15वें राष्ट्रीय नाट्य उत्सव ‘जश्न-ए-अज़हर’ के छठवें और अंतिम दिन का समापन ज्ञान मंच के प्रांगण में 29 मार्च 2026 को हुआ। पश्चिम बंग नाट्य अकादमी, सूचना और सांस्कृतिक विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार और अज़हर आलम मेमोरियल ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव के छठवें दिन ,विवेचना रंगमंडल, जबलपुर द्वारा सत्यनारायण पटेल के नाटक ‘पर पाज़ेब ना भीगे’ का मंचन किया गया। यह नाटक एक लोक कथा पर आधारित है, जिसमें एक बंजारे की प्रेम कहानी को दर्शाया गया है। कोलकाता के ज्ञान मंच में 24 से 29 मार्च 2026 तक चलने वाले नाट्य उत्सव के प्रथम दिन की शुरुआत उद्घाटन समारोह से हुई जिसमें मुख्य सम्मानित अतिथि के तौर पर उपस्थित थे , विश्वम्भर नेवर ( छपते छपते अखबार के संपादक ), कल्लोल भट्टाचार्य (नाट्य निर्देशक, एबोंग आमरा), डॉ. अजय रॉय (संगीतकार) और जयंत देशमुख (नाट्य निर्देशक, एकरंग,( मुंबई)उपस्थित रहे । प्रथम दिन के दूसरे सत्र में मुरारी रायचौधरी (संगीतकार) को 5वाँ अज़हर आलम स्मृति पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। उन्होंने 500 नाटकों के लिए संगीत तैयार किया, जिसमें लगभग 300 ऐसे गीत शामिल थे जिन्हें उन्होंने खुद लिखा और उनकी धुनें तैयार कीं। उन्होंने नंदिकर, सायक, लिटिल थेस्पियन, अन्य थिएटर, पदातिक जैसे बड़े नाट्य संस्थाओं के लिए मंच प्रस्तुतियों का संगीत तैयार किया है। तीसरे सत्र में नाट्य संस्था एकरंग, मुंबई द्वारा पगला घोड़ा का मंचन जयंत देशमुख के निर्देशन में हुआ।

जश्ने अज़हर के चौथे दिन के पहले सत्र में थिएटर समीक्षक प्रेम कपूर को सम्मानित किया गया। वे एक पत्रकार, कला और थिएटर समीक्षक, और कुशल अनुवादक हैं। 1962 से पत्रकारिता में सक्रिय कपूर ने ‘विचार प्रवाह’ और ‘जनसंसार’ जैसे प्रकाशनों में सहायक संपादक के रूप में कार्य किया है। उनकी थिएटर समीक्षाएँ ‘जनसंसार’, ‘जनसत्ता’, ‘छपते-छपते’, ‘प्रभात वार्ता’, ‘कलयुग वार्ता’ और ‘राजस्थान पत्रिका’ में प्रकाशित हुई हैं। दूसरे सत्र में एस.एम. अजहर आलम का नाटक ‘चाक’ उमा झुनझुनवाला के निर्देशन में लिटिल थेस्पियन समूह द्वारा प्रस्तुत किया गया। पाँचवे दिन (28 मार्च 2026) अज़हर आलम मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा माइम कलाकार सोमा दास को सम्मानित किया गया। सोमा दास ने अपने करियर की शुरुआत 5 साल की उम्र में अपने पिता स्वर्गीय मानिक लाल मजूमदार के मार्गदर्शन में की थी। बाद में उन्होंने पद्मश्री निरंजन गोस्वामी से सीखा। वे ‘सोमा माइम थिएटर’ की संस्थापक/निदेशक हैं और उन्हें ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार, 2016’ से सम्मानित किया गया है। उत्सव के दूसरे सत्र में मृणाल माथुर द्वारा लिखित और अमित रौशन द्वारा निर्देशित नाटक ‘पश्मीना’ का मंचन किया गया। ‘पश्मीना’ एक शहीद सैनिक के माता-पिता की कश्मीर घाटी की मार्मिक यात्रा की कहानी है, जहाँ उनके साथ उनके पड़ोसी, एक कश्मीरी पंडित, डॉ. कौल का दुख भी जुड़ा होता है। इस महोत्सव को पश्चिंमबंग नाट्य अकादमी, सूचना और सांस्कृतिक विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार और अज़हर आलम मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की गयी है ।
आईआईटी खड़गपुर ने चारनोक हॉस्पिटल से मिलाया हाथ
रिसर्च और क्लिनिकल एक्सीलेंस को लेकर साथ करेंगे काम
कोलकाता । इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) खड़गपुर ने 26 मार्च, 2026 को चारनोक हॉस्पिटल के साथ एक रणनीतिक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया। यह स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में इनोवेशन, रिसर्च और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आईआईटी खड़गपुर के डायरेक्टर प्रो. सुमन चक्रवर्ती और चारनोक हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक प्रशांत शर्मा की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया। इस सहयोग का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में हो रहे अत्याधुनिक शोध और क्लिनिकल प्रैक्टिस में उसके उपयोग के बीच की खाई को दूर करना है। आईंआईटी खड़गपुर स्वास्थ्य सेवा से जुड़े अपने शैक्षणिक और शोध परिणामों का उपयोग चारनोक अस्पताल के क्लिनिकल परिवेश में करेगा। यह साझेदारी निम्नलिखित क्षेत्रों पर केंद्रित होगी: आईआईटी द्वारा विकसित डायग्नोस्टिक और डिजिटल हेल्थ-टेक का सत्यापन और बेंचमार्किंग, एआई, एमएल और ट्रांसलेशनल शोध के लिए क्लिनिकल डेटा का संग्रह और विश्लेषण, चिकित्सकों और इंजीनियरों के लिए संयुक्त शोध, प्रशिक्षण और आउटरीच कार्यक्रम, क्लिनिकल और सामुदायिक परिवेश में प्रौद्योगिकी विकास की गति को तेज करना । इस मौके पर आरिसर्च और क्लिनिकल एक्सीलेंस को लेकर ईआईटी खड़गपुर के डायरेक्टर प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा, आईआईटी खड़गपुर और चारनोक हॉस्पिटल के बीच यह सहयोग वैज्ञानिक रिसर्च को क्लिनिकल प्रैक्टिस के साथ जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है। आईआईटी खड़गपुर में हम ऐसी टेक्नोलॉजी डेवलप करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिनका समाज पर असल असर हो। यह पार्टनरशिप हमारे इनोवेशन को सुलभ, मरीज़-केंद्रित हेल्थकेयर समाधानों में बदलने के लिए एक ज़रूरी मंच देती है। इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च को क्लिनिकल विशेषज्ञता के साथ मिलाकर, हमारा लक्ष्य डायग्नोस्टिक्स, डिजिटल हेल्थ और ट्रांसलेशनल मेडिसिन में प्रगति को तेज करना है, जिससे आखिरकार एक ज़्यादा मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार हेल्थकेयर इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी। चारनोक हॉस्पिटल के एमडी प्रशांत शर्मा ने कहा, आईआईटी खड़गपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ पार्टनरशिप करना चारनोक हॉस्पिटल के लिए एक बड़ा मौका है। यह सहयोग इनोवेशन और रिसर्च से प्रेरित विश्व-स्तरीय हेल्थकेयर देने की हमारी प्रतिबद्धता को और मज़बूत करता है।




