नयी दिल्ली। भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार 9वीं बार देश का बजट 2026-27 पेश किया है। ऐसा करने वाली निर्मला सीतारमण पहली विदेश मंत्री बन गईं। नेबरहुड फर्स्ट (पड़ोसी पहले) के तहत विदेशी सहायता के लिए बजट 2026-27 के लिए विदेश मंत्रालय को 22118.97 करोड़ रुपए आवंटित किए जाएंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के बजट में मामूली बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल ये आंकड़ा 20516.61 करोड़ रुपए था। पिछले साल की तुलना में भारत ने इस साल दूसरे देशों के लिए बजट में बड़े बदलाव किए हैं। भारत ने कई देशों के लिए बजट बढ़ाया है, तो कुछ देशों के लिए वित्तीय सहायता घटाई भी है। बजट 2026-27 में भारत ने अपने सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार भूटान के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाकर 2,288.55 करोड़ रुपए कर दी है। यह दोनों देशों के बीच, खासकर हाइड्रोपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे एरिया में हमेशा रहने वाले खास रिश्तों को दिखाता है।
अफगानिस्तान के लिए वित्तीय सहायता 50 करोड़ से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपए की गई है। भारत हमेशा से ही अफगानिस्तान में मानवीय मदद के लिए राहत संबंधित कार्य करता रहा है। ऐसे में यह बजट मानवीय और विकास में मदद के लिए भारत के लगातार कमिटमेंट का संकेत है।
इसके अलावा नेपाल को 800 करोड़ रुपए मिले हैं, जो 100 करोड़ रुपए ज्यादा है। वहीं, श्रीलंका को 400 करोड़ रुपए दिए गए हैं, जो 100 करोड़ ज्यादा है। तूफान दित्वाह से निपटने के लिए हाल ही में भारत ने श्रीलंका के लिए वित्तीय सहायता भेजी थी। ऐसे में ये बजट स्वाभाविक रूप से सुधार और जरूरतों के हिसाब से बढ़ाया गया है।
इस लिस्ट में मंगोलिया का नाम भी शामिल है, जहां वित्तीय सहायता के लिए पहले के 5 करोड़ रुपए के बजट को बढ़ाकर 25 करोड़ रुपए किया गया है। इसके साथ ही मॉरिशस के लिए वित्तीय सहायता 50 करोड़ से बढ़ाकर 550 करोड़ रुपए करने का ऐलान किया गया। सेशेल्स के लिए पिछले साल की तरह बजट 19 करोड़ रुपए ही है।
भारत ने बांग्लादेश के लिए वित्तीय सहायता में बड़ी कटौती की है। बांग्लादेश के लिए 60 करोड़ रुपए की सहायता राशि का ऐलान किया गया है। इसकी वजह ये है कि इससे पहले भारत ने बांग्लादेश के लिए 120 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन सिर्फ 34 करोड़ रुपए ही इस्तेमाल हुए। इसके अलावा म्यांमार और मालदीव भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
मालदीव को 550 करोड़ रुपए और म्यांमार को 300 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया गया है।
भारत ने बांग्लादेश की वित्तीय सहायता में की कटौती
विदेश में रहने वाले भारतीय भी कर सकेंगे निवेश
– एनआरआई की निवेश लिमिट 24 फीसदी हुई
नयी दिल्ली । भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार रविवार के दिन लोकसभा में आम बजट 2026-27 पेश किया। इस बजट में केंद्रीय मंत्री ने नॉन-रेसिडेंट इंडियंस (एनआरआई) और दूसरे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय लिस्टेड कंपनियों में व्यक्तिगत निवेश की सीमा को दोगुना करने का ऐलान किया है। अब तक ऐसा होता था कि एक अकेला एनआरआई किसी कंपनी के पेड-अप कैपिटल का 5-10 फीसदी तक मालिक हो सकता था। हालांकि, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो 2026-27 का बजट पेश किया है, उसके तहत इस लिमिट को बढ़ाकर अब 10 फीसदी कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी एनआरआई के लिए कुल लिमिट बढ़ाकर 24 फीसदी करने का ऐलान किया गया। पहले कई एनआरआई निवेशकों को मुख्य रूप से विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर या खास एनआरआई रूट से भारतीय इक्विटी में निवेश करना पड़ता था। अब इसमें सुधार किया गया है, जिसके बाद एनआरआई और विदेशी नागरिकों सहित विदेशी निवासियों को एक रेगुलेटेड पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत सीधे भारतीय स्टॉक में निवेश करने की इजाजत मिलेगी। इसका मकसद घरेलू मार्केट में एक्सेस को आसान बनाना और भागीदारी को बढ़ाना है।
इसके अलावा वित्त मंत्री सीतारमण ने घोषणा की है कि भारत में पांच साल तक रहने वाले विदेशी नागरिकों को नॉन-इंडिया कमाई पर राहत मिलेगी। यह विदेशी नागरिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है।
वहीं, व्यक्तिगत आयात पर टैरिफ को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है और विदेश यात्रा टूर पैकेज पर टीसीएस को 5 प्रतिशत/20 प्रतिशत से घटाकर 2 फीसदी किया गया है।
दूसरी ओर, इनकम टैक्स की बुनियादी संरचना पहले जैसी ही रहेगी, लेकिन बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाने और टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए कई कदमों का ऐलान किया।
वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स रिटर्न में संशोधन करने की अंतिम तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केवल मामूली शुल्क देना होगा। रिटर्न फाइल करने की तारीखों को भी अलग-अलग किया गया है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 भरने वाले लोग पहले की तरह 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल करेंगे। वहीं जिन कारोबारों का ऑडिट नहीं होता और ट्रस्ट्स को 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।
टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए यह भी कहा गया है कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाला ब्याज अब इनकम टैक्स से मुक्त होगा। साथ ही इस पर टीडीएस भी नहीं काटा जाएगा।
मोटर एक्सीडेंट मुआवजे के ब्याज पर माफ होगा पूरा टैक्स
– पीड़ितों को मिलेगी बड़ी राहत
नयी दिल्ली । सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 पेश करते समय ऐलान किया कि मोटर एक्सीडेंट मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब पूरी तरह इनकम टैक्स से मुक्त होगा। इस प्रस्ताव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों को मुआवजे की पूरी राशि मिले और उसमें से कोई कटौती न हो। इसके तहत अब ऐसे ब्याज पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) भी नहीं काटा जाएगा। यह घोषणा संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार पेश किए गए केंद्रीय बजट में की गई। इस आम बजट में टैक्स से जुड़े कई ऐलान किए गए।
मौजूदा नियमों के तहत मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) द्वारा दिए गए ब्याज को टैक्स योग्य आय माना जाता था। अक्सर मुआवजा मिलने में देरी हो जाती है, जिससे ब्याज की रकम काफी बढ़ जाती है और पीड़ितों या उनके परिजनों को उस पर टैक्स देना पड़ता है।
इस वजह से कई बार पीड़ितों को मुआवजे की पूरी रकम नहीं मिल पाती थी। उन्हें इलाज, पुनर्वास और रोज़ी-रोटी के लिए मिलने वाले पैसों में भी कमी झेलनी पड़ती थी। कई मामलों में टैक्स रिफंड की जटिल प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता था।
वित्त मंत्री ने साफ किया कि यह टैक्स छूट सिर्फ ‘नेचुरल पर्सन’, यानी आम व्यक्ति को मिलने वाले ब्याज पर ही लागू होगी। सरकार ने इसे मुआवजे की मानवीय भावना से जुड़ा फैसला बताया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति को दिया गया ब्याज इनकम टैक्स से मुक्त होगा और इस पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा।”
यह नया नियम वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होने की उम्मीद है, जिससे चल रहे और आने वाले मामलों में पीड़ितों को तुरंत राहत मिलेगी।
भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी समस्या बनी हुई हैं। हर साल हजारों लोगों की मौत होती है और कई लोग घायल होते हैं। मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ती है।
अक्सर मामलों में फैसले में देरी होने से ब्याज की रकम बढ़ जाती है, जो पीड़ितों को हुए नुकसान और परेशानी की भरपाई के लिए दी जाती है। अब टैक्स हटने से मुआवजा ज्यादा फायदेमंद होगा।
कानूनी विशेषज्ञों, पीड़ित अधिकार समूहों और बीमा कंपनियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान होगा।
इस फैसले से मुआवजे की रकम में कटौती नहीं होगी और मामलों के जल्दी निपटारे को भी बढ़ावा मिल सकता है।
यह प्रस्ताव वित्त मंत्री की उस सोच का हिस्सा है, जिसमें टैक्स नियमों को आसान बनाना और ज़रूरतमंद लोगों को सीधी राहत देना शामिल है। साथ ही बजट में मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्थिरता पर भी खास ध्यान दिया गया है।
इस टैक्स छूट से लाखों प्रभावित परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे सड़क हादसों के मामलों में मिलने वाला न्याय टैक्स कटौती के कारण कम नहीं होगा।
केंद्रीय बजट बंगाल के लिए सीमित लेकिन अहम घोषणाएं
कोलकाता/ नयी दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 2026-27 वित्त वर्ष के लिए आम बजट पेश किया। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आए इस बजट में पश्चिम बंगाल के लिए भले ही बहुत बड़े और आकर्षक ऐलान नहीं किए गए हों, लेकिन बजट की कई योजनाओं से राज्य का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ाव देखने को मिला। यह पहलू पिछले बजट की तुलना में एक अहम बदलाव माना जा रहा है। पिछले वर्ष जब संसद में आम बजट पेश किया गया था, तब ऐसा महसूस हुआ था मानो बिहार के लिए विशेष बजट भाषण दिया जा रहा हो। उस समय बिहार को कई हाई-प्रोफाइल और सुर्खियों में रहने वाली परियोजनाएं मिली थीं और कुल मिलाकर लगभग 58,900 करोड़ की योजनाओं की घोषणा की गई थी। इसके उलट इस बार पश्चिम बंगाल के मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपेक्षाकृत संयमित रुख अपनाया और सीमित घोषणाएं कीं। विधानसभा चुनाव से पहले पेश किए गए इस बजट में पश्चिम बंगाल के लिए तीन प्रमुख घोषणाएं की गई हैं। इनमें सिलीगुड़ी–वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, डानकुनी–सूरत फ्रेट कॉरिडोर और इंटीग्रेटेड ईस्ट-कोस्ट कॉरिडोर के तहत दुर्गापुर में औद्योगिक कॉरिडोर का विकास शामिल है। बजट की अन्य योजनाओं से भी पश्चिम बंगाल को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। बायोफार्मा शक्ति परियोजना के तहत देश में सात नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के आधुनिकीकरण की घोषणा की गई है, जिनमें से एक संस्थान की शाखा कोलकाता में स्थित है। इससे राज्य में उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा वस्त्र उद्योग को लेकर कई अहम घोषणाएं की गई हैं। जूट, खादी, हैंडलूम और हस्तशिल्प पर विशेष जोर दिया गया है और मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। चूंकि इन क्षेत्रों से पश्चिम बंगाल के बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं, इसलिए राज्य को इससे सीधा लाभ मिल सकता है। केंद्रीय बजट में देश के 200 पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार की भी घोषणा की गई है। हालांकि, इसमें किसी राज्य का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन संबंधित जानकारों का मानना है कि इस योजना से पश्चिम बंगाल भी लाभान्वित हो सकता है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों पर भी बजट में खास जोर दिया गया है। लघु उद्योग विकास फंड के लिए 10 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है और सस्ती दर पर उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही गई है। चूंकि पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा एमएसएमई पर आधारित है, इसलिए इस प्रावधान से राज्य को फायदा मिलने की संभावना है। बजट में यह भी घोषणा की गई है कि हर जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास बनाया जाएगा, जहां विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे बालिकाओं की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र के लिए कई कदम उठाने की बात कही गई है। सरकार 500 रिजर्वायर और अमृत सरोवर बनाने की योजना बना रही है, जिससे तटीय इलाकों के मछुआरों को लाभ मिलेगा। पशुपालकों के लिए सस्ते ऋण की सुविधा भी देने का आश्वासन दिया गया है। पूर्वी भारत के पांच राज्यों में पांच पर्यटन केंद्र विकसित करने की घोषणा भी बजट का अहम हिस्सा रही। इसके अलावा चार हजार इलेक्ट्रिक बसें चलाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
बजट में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद रक्षा क्षेत्र के लिए 15 फीसदी आवंटन बढ़ा
– रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ का आवंटन
– पिछले वित्त वर्ष में 6.81 लाख करोड़ था
नयी दिल्ली । ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में पिछले साल पाकिस्तान के साथ हवाई संघर्ष के बाद भारत सरकार ने अपने केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 15 फीसदी आवंटन बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने रविवार को केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये दिए, जो पिछले वित्त वर्ष में दिए गए 6.81 लाख करोड़ रुपये से 15 फीसदी ज्यादा है। इससे सेनाओं के आधुनिकीकरण पर सरकार के लगातार ध्यान देने का संकेत मिलता है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कोई खास नीति की घोषणा नहीं की, लेकिन केंद्र ने रविवार को रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की, जिससे मौजूदा वित्त वर्ष के लिए कुल रक्षा बजट पिछले साल के 6.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो लगभग 15 फीसदी की बढ़ोतरी है। पिछले बजट में केंद्र ने डिफेंस के लिए 6.81 लाख करोड़ रुपये रखे थे, जिससे यह कुल सरकारी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया। पिछले बजट में डिफेंस सर्विसेज (रेवेन्यू) में सैलरी, अलाउंस, मेंटेनेंस और ऑपरेशनल तैयारी का हिस्सा 3.12 लाख करोड़ रुपये था। इस वर्ष रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी होने से उपकरण, आधुनिकीकरण और घरेलू विनिर्माण पर ज्यादा खर्च होने की उम्मीद है। सरकार ने यह भी कहा है कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की कोशिशों के मुताबिक रक्षा बजट का बढ़ा हिस्सा घरेलू उद्योग की तरफ जाता रहेगा। रक्षा क्षेत्र के लिए इसलिए बजट आवंटन बढ़ाया गया है, क्योंकि भारत रक्षा विनिर्माण में ज्यादा आत्मनिर्भरता के लिए अपनी कोशिश जारी रखे हुए है। पिछले दस सालों में भारत का डिफेंस बजट ऊपर की ओर बढ़ा है। हालांकि, जीडीपी में डिफेंस खर्च का हिस्सा पिछले कुछ सालों में कम हुआ है। सरकारी डेटा के मुताबिक, कुल डिफेंस खर्च 2015-16 में 2.94 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। बजट भाषण में वित्त मंत्री की चुप्पी के बावजूद रक्षा क्षेत्र को ज्यादा आवंटन दिखाता है कि केंद्र सरकार पाकिस्तान और चीन से दोहरे खतरों के बीच सैन्य तैयारी और आधुनिकीकरण पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है। आधुनिकीकरण में तेजी लाने और स्वदेशी निर्माण को बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए पूंजीगत व्यय पर मुख्य फोकस रहा है। भारत का स्वदेशीकरण अभियान इस सेक्टर को आकार दे रहा है। वित्त वर्ष 2025 में घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2024 के मुकाबले 12.04 फीसदी ज्यादा है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ और निर्यात 50 हजार करोड़ तक पहुंचाना है। आवंटित बजट में सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। रक्षा मंत्रालय की ओर से इस समय नौसेना के लिए राफेल फाइटर जेट, सबमरीन और अनमैन्ड एरियल व्हीकल के सौदे किये जाने की तैयारी है। डिफेंस बजट (सिविल) में पिछले साल के 28,554.61 करोड़ रुपये के मुकाबले 0.45 परसेंट की कमी की गई है। इस बीच, डिफेंस सर्विसेज (रेवेन्यू) और कैपिटल आउटले को क्रमशः 3,65,478.98 करोड़ रुपये और 2,19,306.47 करोड़ रुपये दिए गए, जो 17.24 फीसदी और 21.84 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। पेंशन के लिए आवंटन में भी बढ़ोतरी हुई है, जिसमें केंद्र ने 1,71,338.22 करोड़ रुपये दिए।
बजट के बाद वायदा सौदों पर एसटीटी बढ़ी, शेयर बाजार पस्त
मुंबई । वायदा सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने की केंद्रीय बजट में घोषणा के बाद रविवार को घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,547 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी 495 अंक टूटकर बंद हुआ। विश्लेषकों के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण में वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) खंड में सौदों पर एसटीटी को बढ़ाने का ऐलान बाजार को पसंद नहीं आया और यह बहुत तेजी से नीचे चला गया। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती बढ़त गंवाते हुए दोपहर के कारोबार में 2,370.36 अंक यानी 2.88 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 80,000 अंक के अहम स्तर से भी नीचे फिसलकर 79,899.42 अंक पर खिसक गया था।
हालांकि, बाद में सेंसेक्स थोड़े सुधार के साथ 1,546.84 अंक यानी 1.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,722.94 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का मानक सूचकांक निफ्टी भी 495.20 अंक यानी 1.96 प्रतिशत गिरकर 24,825.45 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 748.9 अंक यानी 2.95 प्रतिशत लुढ़ककर 24,571.75 अंक के निचले स्तर तक चला गया।
इस बड़ी गिरावट के लिए बजट भाषण में वायदा कारोबार पर एसटीटी की दर 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने की घोषणा को जिम्मेदार माना गया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण वायदा एवं विकल्प (एफ एंड ओ) कारोबार पर एसटीटी में की गई वृद्धि रही। सेंसेक्स की कंपनियों में से भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के शेयर में सर्वाधिक 5.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि अदाणी पोर्ट्स में 5.53 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटीसी, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी प्रमुख रूप से गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरफ, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, सन फार्मा और टाइटन के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। क्षेत्रवार सूचकांकों में पीएसयू बैंक खंड में सर्वाधिक 5.60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि धातु खंड में 3.85 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा जिंस खंड में 3.35 प्रतिशत, ऊर्जा खंड में 3.24 प्रतिशत, पूंजीगत उत्पाद खंड में 3.02 प्रतिशत, उपयोगिता खंड में 2.98 प्रतिशत और औद्योगिक खंड में 2.66 प्रतिशत की गिरावट रही। बीएसई पर सूचीबद्ध कुल 2,375 शेयरों में गिरावट का रुख रहा जबकि 1,759 शेयरों में तेजी रही और 175 अन्य अपरिवर्तित रहे। विश्लेषकों ने आगाह किया कि एसटीटी में बढ़ोतरी से निकट अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की धारणा पर असर पड़ सकता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) धीरज रेल्ली ने कहा, ‘‘एसटीटी में प्रस्तावित बढ़ोतरी अल्पावधि में पूंजी बाजार से जुड़ी इकाइयों के लिए दबाव बना सकती है, हालांकि दीर्घावधि में इसके सकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं।’’ जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘बजट में डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों तथा वैश्विक व्यापार शुल्क से प्रभावित क्षेत्रों को समर्थन दिया गया है, लेकिन वायदा कारोबार पर एसटीटी बढ़ाए जाने से बाजार में तत्काल नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।’’
40 प्रतिशत बढ़ा टेलीकॉम क्षेत्र का बजट, बीएसएनएल को मिले हजारों करोड़
नयी दिल्ली । बीएसएनएल के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार फिर से खजाना खोल दिया है। सरकारी टेलीकॉम कंपनी के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए बजट में 28,473 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। वहीं, सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर के लिए भी हजारों करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। अपने नौवें बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री ने डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी घोषणाएं की हैं। सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर के लिए 73,990 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि हमने टेलीकॉम सेक्टर के बजट को 53,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 73,990 करोड़ रुपये कर दिया है। टेलीकॉम सेक्टर के बजट में 40 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्टर के लिए भारतनेट प्रोजेक्ट के बजट को बढ़ाया गया है।
केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि बीएसएनएल के नेटवर्क कॉस्ट, नेटवर्क रोलआउट, इंटरनल रिक्वॉरमेंट जैसे प्रोजेक्ट के लिए बजट आवंटित किए गए हैं। सरकारी टेलीकॉम कंपनी का एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर 90 रुपये से बढ़कर 99 रुपये हो गया है। इसमें लगभग 9 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है।
बीएसएनएल ने पिछले साल ही पूरे देश में 4 जी सर्विस रोल आउट की है। इसके लिए टेलीकॉम कंपनी ने लगभग 1 लाख नए 4 जी/5 जी मोबाइल टावर लगाए हैं। सरकारी टेलीकॉम ऑपरेटर अपने नेटवर्क को बेहतर करने के लिए और भी नए मोबाइल टावर लगाने जा रही है। साथ ही, 5 जी सर्विस भी रोल आउट करने वाली है। बजट में बीएसएनएल को 28,473 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिसका इस्तेमाल नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्टर, स्पेक्ट्रम कॉस्ट आदि के लिए किया जाएगा। भारत संचार निगम का 4जी/5जी मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर बेस्ड है। बीएसएनएल टावर में लगने वाले इक्वीपमेंट्स को भारतीय कंपनियों ने डिजाइन किया है। इसके अलावा बीएसएनएल के नए मोबाइल टावर 5जी रेडी हैं यानी इनका इस्तेमाल 5G सर्विस के लिए भी किया जा सकता है। पहले आई रिपोर्ट्स की मानें तो बीएसएनएल 5G सर्विस को सबसे पहले दिल्ली और मुंबई में लॉन्च किया जाएगा। इसके लिए ट्रायल किया जा रहा है।
बनेंगे 15 हजार से ज्यादा एवीजीसी लैब, ‘भारत-विस्तार’ एआई टूल
– नये राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान बनाने की घोषणा
नयी दिल्ली । केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में देश की नारंगी अर्थव्यवस्था (ऑरेंज इकोनॉमी) को आगे बढ़ाने के लिए 15 हजार स्कूलों और 500 कॉलेजों में एनीमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग और कॉमिक्स एवीजीसी लैब, पूर्वी भारत में नया राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, किसानों के लिए ‘भारत-विस्तार’ एआई टूल और नौकरियों व कौशल पर तकनीक के असर का आकलन करने के लिए ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ समिति बनाने की घोषणा की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किए केंद्रीय बजट 2026-27 में कहा कि देश की ऑरेंज इकोनॉमी यानी एनीमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में सामग्री निर्माण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। सरकार का अनुमान है कि इस क्षेत्र में वर्ष 2030 तक लगभग 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता होगी। वित्तमंत्री ने पूर्वी भारत में डिजाइन शिक्षा और उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए नया राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान स्थापित करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि भारतीय डिजाइन उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और इसे नई दिशा देने के लिए उच्चस्तरीय शिक्षा और प्रशिक्षण की जरूरत है। साथ ही वित्तमंत्री ने कृषि क्षेत्र में किसानों को बेहतर सलाह और संसाधनों तक आसान पहुंच देने के लिए ‘भारत-विस्तार’ नामक बहुभाषी एआई टूल लाने का प्रस्ताव रखा। यह टूल कृषि पोर्टल्स और आईसीएआर पैकेज को एआई सिस्टम से जोड़कर किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने, जोखिम कम करने और सही फैसले लेने में मदद करेगा। उन्होंने बजट में एआई और नई तकनीकी नौकरियों और कौशल की जरूरतों ध्यान में रखते हुए ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता’ नाम से एक उच्च स्तरीय स्थायी समिति बनाने का ऐलान किया, जो इस असर का आकलन करेगी और जरूरी उपाय सुझाएगी।
मधुमेह‑कैंसर जैसी बीमारियों पर 10 हजार करोड़ खर्च करेगी सरकार
नयी दिल्ली। देश में बढ़ती मधुमेह, कैंसर, हृदय, किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियों जैसे- गैर संक्रामक रोगों को देखते हुए सरकार अगले 5 सालों में फार्मा और बायो‑टेक सेक्टर के विकास में 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए सरकार जांच और शुरुआती इलाज पर विशेष ध्यान देगी ताकि लोगों को इन बीमारियों से बचाने की क्षमता को मजबूत किया जा सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण में कहा कि देश में रोग‑भार लगातार बढ़ रहा है और अब यह ज्यादातर गैर‑संक्रामक रोग यानी डायबिटीज, कैंसर, हृदय संबंधी बीमारी, किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियों की तरफ झुक रहा है। इसी वजह से सरकार का पूरा ध्यान रोकथाम, जांच और शुरुआती इलाज पर रहेगा ताकि लोगों को इन बीमारियों से बचाने की क्षमता मजबूत हो सके। वित्त मंत्री कहा कि अगले पांच साल में 10 हजार करोड़ रुपये बायो‑फार्मा सेक्टर के विकास पर खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, टीका निर्माण और उन्नत उपचार पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। साथ ही औषधीय शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए तीन नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान(एनपीईआरएस) स्थापित किए जाएंगे, जिनसे गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास, अत्याधुनिक लैब सुविधाएं और वैश्विक प्रतिभा तैयार करने में मदद मिलेगी। सीतारमण ने कहा कि लगातार सुधारों और नीतियों के चलते देश ने 7 प्रतिशत की उच्च विकास दर हासिल की है। भारत अब विकसित भारत की दिशा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है और यह यात्रा लगातार जारी रहेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक सिद्धांत मानते हुए सरकार ने घरेलू विनिर्माण क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है। रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, घरेलू क्रय शक्ति और सार्वभौमिक सेवाओं को बढ़ाने के लिए सुधार किए गए हैं। इन उपायों से गरीबी कम करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने में अहम प्रगति हुई है।
बजट 2026 : देश में खोले जायेंगे 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान
नयी दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी अहम घोषणाएं की हैं। जिसके तहत देश में 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोले जाएंगे। अभी इनकी जगह नहीं बताई गई है। इसके साथ बेहतर मानसिक स्वास्थ्य इलाज के उद्देश्य से वित्त मंत्री ने निमहंस 2.0 स्थापना की घोषणा की जो देश के लिए प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के तौर पर काम करेगा। इसके साथ ही उत्तर भारत में दो मानसिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई। निर्मला सीतारमण ने भारत को मेडिकल टूरिज्म हब के तौर पर बढ़ावा देने के लिए देश में 5 रीजनल हब स्थापित करने में मदद की योजना का प्रस्ताव रखा। इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी, प्रशिक्षण और शोध को मजबूती मिलेगी और मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके अलावा 5 साल में एक लाख विशेषज्ञ हेल्थकेयर प्रोफेशनल बनेंगे। 1.5 लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नॉन कॉम्यूनिकेबल डिजिज की दवाइयों की कीमत सस्ती की जाएगी। इसमें कैंसर की दवाओं पर जोर दिया गया है। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने केंद्रीय बजट में देशभर में तीन नए एआईआईए स्थान खोले जाने की घोषणा को लेकर कहा कि यह गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल को सशक्त बनाएगा।





