Wednesday, January 28, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog

भवानीपुर कॉलेज में 55 शिक्षकों शिक्षिकाओं को सरस्वती सम्मान

कोलकाता ।  भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज में 55 शिक्षकों शिक्षिकाओं को सरस्वती सम्मान प्रदान किया गया।
या कुदेंदु तुषार हार धवला मंत्रोच्चार और माँ सरस्वती की आरती से भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज का वालिया सभागार गूंज उठा । साथ में वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर शंखनाद प्रतियोगिता की गई जिसमें कई विद्यार्थियों और फेकल्टी ने भाग लिया। संस्कृत श्लोक, सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा में छात्र छात्राओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
माँ सरस्वती की पूजा अर्चना में कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत दानी,उपाध्यक्ष श्री मिराज डी शाह, शिबानी डी शाह, रेणुका भट्ट, नलिनी पारेख, जीतू भाई, उमेश भाई ठक्कर आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और नृत्य प्रस्तुत द्वारा की गई। इस अवसर पर कॉलेज के पीएचडी पूर्ण करने वाली फेकल्टी को, शोध आलेख लिखने वाले एवं पुस्तक प्रकाशित होने पर फेकल्टी को शॉल धनराशि और उपहार प्रदान किए गए।वसंत पंचमी के पावन पर्व पर डाॅ वसुंधरा मिश्र ने सरोद वादन किया जिसका सभी श्रोताओं ने आनंद लिया ।
वाइस प्रिंसिपल प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी और रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह के संयोजन में सभी कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।सभी सदस्यों और विद्यार्थियों ने मॉं की पूजा-अर्चना कर महाप्रसाद भोग ग्रहण किया।भोग में फल और लड्डू और महाप्रसाद में खिचड़ी बैगुनी लेबरा आलू गोभी की सब्जी पूड़ी पापड़ कूल की मीठी चटनी और गुलाबजामुन था ।इस आयोजन में गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का विशेष योगदान रहता है। अंत में सभी विद्यार्थियों ने डीजे का आनंद भी उठाया। जानकारी दी भवानीपुर कॉलेज से डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

पंच सरोवर : भारत के पांच पवित्र जल तीर्थ

भारत की आध्यात्मिक परंपरा में जल को जीवन, शुद्धि और मोक्ष का माध्यम माना गया है। इसी आस्था से जुड़े हैं भारत के पांच पवित्र सरोवर, जिन्हें पंच सरोवर कहा जाता है। ये सरोवर सिर्फ पानी के स्रोत नहीं हैं, बल्कि हजारों साल पुरानी मान्यताओं, पुराणों और साधना की जीवंत मिसाल हैं। माना जाता है कि इन सरोवरों में स्नान करने से व्यक्ति के पाप कटते हैं, मन शुद्ध होता है और आत्मा को शांति मिलती है। राजस्थान के पुष्कर में स्थित पुष्कर सरोवर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में गिना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा के हाथ से यहां एक कमल का फूल गिरा था, जिससे इस सरोवर की उत्पत्ति हुई। कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। पुष्कर सरोवर के किनारे स्थित भगवान ब्रह्मा का एकमात्र मंदिर इस स्थान को और भी खास बना देता है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां मोक्ष की कामना लेकर आते हैं।
कैलाश पर्वत के पास स्थित मानसरोवर को भगवान शिव का धाम माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस सरोवर का निर्माण भगवान ब्रह्मा ने किया था और माता पार्वती यहां स्नान करती थीं। इसका जल अत्यंत शीतल और मीठा माना जाता है। केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म में भी मानसरोवर को बेहद पवित्र स्थान माना गया है। यहां तक पहुंचना कठिन जरूर है, लेकिन जो श्रद्धालु पहुंचते हैं, वे इसे जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव मानते हैं।
गुजरात के कच्छ जिले में स्थित नारायण सरोवर भगवान विष्णु से जुड़ा पवित्र तीर्थ है। मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान विष्णु ने स्नान किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कभी सरस्वती नदी का प्रवाह यहां तक आता था और इस सरोवर का जल उसी पवित्र धारा से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नारायण सरोवर में डुबकी लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गुजरात के पाटन जिले में स्थित बिंदु सरोवर को मातृ गया तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। यहां विशेष रूप से महिलाओं के लिए श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा है। मान्यता है कि इससे मातृ आत्मा को शांति मिलती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि कर्दम ने भगवान विष्णु के दर्शन के लिए यहीं हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।
कर्नाटक में हंपी के पास स्थित पंपा सरोवर रामायण काल से जुड़ा हुआ है। यही वह स्थान माना जाता है जहां शबरी ने वर्षों तक भगवान राम की प्रतीक्षा की थी। यह क्षेत्र किष्किंधा से जुड़ा माना जाता है। शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर पंपा सरोवर आज भी भक्तों को ध्यान और भक्ति की अनुभूति कराता है।

शिव के पंचभूत स्थल और इनसे जुड़े देवालय

तारों से लेकर पत्थरों तक, जंगलों से लेकर इंसान तक, इस पूरी सृष्टि की रचना पांच मूल तत्वों से हुई है, जिन्हें हम पंचभूत कहते हैं। ये पंचतत्व हैं पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। भारतीय दर्शन में माना जाता है कि हमारा तन और मन भी इन्हीं तत्वों से बने हैं। जब इनमें संतुलन रहता है तो जीवन सहज चलता है और जब गड़बड़ होती है तो परेशानी शुरू हो जाती है। शिव को शाश्वत योगी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे इन पंचतत्वों पर पूर्ण नियंत्रण और संतुलन का प्रतीक हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शिव ने दक्षिण भारत के पांच विशेष स्थानों पर इन्हीं पांच तत्वों के रूप में स्वयं को प्रकट किया। ये स्थान पंच भूत स्थल कहलाते हैं। सबसे पहले बात करते हैं पृथ्वी तत्व की, जिसका प्रतिनिधित्व करता है कांचीपुरम का एकांबरेश्वर मंदिर। पृथ्वी तत्व स्थिरता, धैर्य और मजबूती का प्रतीक है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर भीतर से अस्थिर महसूस करते हैं। माना जाता है कि यहां दर्शन करने से मन को ठहराव मिलता है और शरीर में स्थायित्व की भावना आती है।
दूसरा है वायु तत्व, जो जीवन की सांस है। आंध्र प्रदेश का श्रीकालहस्ती मंदिर इसी तत्व से जुड़ा है। कहते हैं कि यहां शिव की पूजा वायु रूप में होती है। अगर आपने कभी इस मंदिर के गर्भगृह में दीपक को बिना हवा के हिलते देखा है, तो आप उस रहस्य को महसूस कर सकते हैं। वायु तत्व हमारे शरीर में श्वास, प्राण और विचारों से जुड़ा है। यहां दर्शन करने से मन का बोझ हल्का महसूस होता है। जो लोग तनाव, घबराहट या बेचैनी से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह स्थान खास माना जाता है।
अब आते हैं अग्नि तत्व पर, जो ऊर्जा, आत्मबल और परिवर्तन का प्रतीक है। तमिलनाडु के अरुणाचलेश्वर मंदिर, तिरुवन्नामलई में शिव को अग्नि स्तंभ के रूप में पूजा जाता है। अग्नि तत्व हमें आलस्य से बाहर निकालता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। माना जाता है कि यहां दर्शन करने से भीतर की नकारात्मकता जलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
इसके बाद आता है जल तत्व, जो भावनाओं और जीवन प्रवाह से जुड़ा है। तिरुचिरापल्ली के पास स्थित जंबुकेश्वर मंदिर में शिव निरंतर जल से अभिषिक्त रहते हैं। जल तत्व हमें सिखाता है कि जीवन में बहाव जरूरी है। जो लोग भावनात्मक रूप से भारीपन, दुख या उलझन महसूस करते हैं, उन्हें यहां आकर शांति मिलती है। यह स्थल हमें बताता है कि जैसे पानी रास्ता बना ही लेता है, वैसे ही जीवन में भी हर समस्या का समाधान संभव है।
अंत में है आकाश तत्व। चिदंबरम का नटराज मंदिर आकाश तत्व का प्रतीक है। यहां कोई ठोस लिंग नहीं, बल्कि खाली स्थान की पूजा होती है। आकाश तत्व चेतना और विस्तार से जुड़ा है। यहां दर्शन करने से मन शांत होता है और व्यक्ति खुद से गहराई से जुड़ता है। नटराज का नृत्य जीवन के सृजन और विनाश दोनों का संतुलन दिखाता है।

दस महाविद्याओं में शामिल मां राजराजेश्वरी हैं तंत्र की देवी

उत्तर से लेकर दक्षिण भारत में मां जगदम्बा अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं। दक्षिण भारत में ज्यादा मां के उग्र रूपों की पूजा की जाती है, लेकिन आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में मां सौंदर्य और आनंद की देवी के रूप में विराजमान हैं, लेकिन फिर भी तंत्र विद्या की देवी के रूप में पूजी जाती हैं। मंदिर में भक्त तांत्रिक परंपरा के साथ मां की पूजा करने के लिए पहुंचते हैं और विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए यज्ञ और हवन करते हैं। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में शांत और सौम्य रूप में मां राजराजेश्वरी विराजमान हैं। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के बड़े हिंदू मंदिरों में शामिल है, जहां 51 यंत्र गर्भगृह में देखने को मिल जाते हैं। 51 यंत्र को इच्छापूर्ति के लिए शक्तिशाली माना जाता है और यही वजह है कि राजराजेश्वरी मंदिर को 51 शक्तिपीठों का दर्जा मिला है। मंदिर में मुख्य रूप से मां राजराजेश्वरी की पूजा होती है, जिन्हें 10 महाविद्याओं में से एक माना गया है। मां राजराजेश्वरी को ललिता, त्रिपुरासुंदरी और षोडशी के रूप में पूजा जाता है।
मंदिर भक्तों के बीच बहुत प्रसिद्ध है, क्योंकि माना जाता है कि इस मंदिर में अनुष्ठान और विधि-पूर्वक पूजा करने से हर परेशानी से छुटकारा मिलता है और तंत्र का काट भी होता है। अगर कुंडली राहु दोष से प्रभावित है, तब भी यहां 18 सप्ताह तक विशेष राहु काल दीपम होता है। इसमें लगातार 18 सप्ताह तक देसी घी और नींबू के दीयों को जलाया जाता है। माना जाता है कि ऐसे करने से राहु का प्रभाव कम होता है। भक्त मंदिर परिसर में दीपक जलाते थे और देवता की परिक्रमा करते थे, और प्रतिदिन चंडी होमम भी किया जाता है।
मंदिर में दशहरा को एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है। भक्त पूरे दिन और रात में मां भगवती का पूजन करते हैं और मेले का आनंद भी लेते हैं। माना जाता है कि मां राजराजेश्वरी ने सृष्टि को बचाने के लिए कई राक्षसों का वध किया था। राक्षसों पर मां भवानी की जीत को ही दशहरा के रूप में मनाया जाता है।
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा भी काफी प्राचीन और प्रसिद्ध है। माना जाता है कि राजराजेश्वरी पीठाधिपति अरुल ज्योति नागराज मूर्ति विजयवाड़ा जा रहे थे। उन्होंने दुर्गामित्ता में विश्राम किया और सामने के खुले मैदान में देवी राजराजेश्वरी की उपस्थिति का अनुभव किया। उन्होंने अपने स्थानीय नेल्लोर के शिष्यों से मैदान में एक मंदिर का निर्माण करने का अनुरोध किया। मंदिर की वास्तुकला भी प्राचीन और आध्यात्मिक है। मंदिर के गर्भगृहों की दीवारों पर नवग्रहों की प्रतिमाओं को अंकित कर उकेरा गया है। मंदिर के गर्भगृह में मां राजराजेश्वरी की प्रतिमा भी बहुत अद्भुत है। मां मेरु यंत्र पर विराजमान हैं और उनके हाथ में शंख, चक्र और धनुष विराजमान हैं। मां के दाईं तरफ सरस्वती और बाईं तरफ मां लक्ष्मी भी स्थापित हैं। मंदिर के निर्माण के काफी समय बाद मंदिर में छोटे-छोटे कई उप-मंदिर सुब्रह्मण्येश्वर स्वामी, भगवान श्री सुंदरेश्वर स्वामी, देवी गायत्री, और भगवान विनायक मंदिर का निर्माण कराया गया।

बंगाल से प्रसेनजीत समेत 11 लोगों को पद्म पुरस्कार

कोलकाता । गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले पद्मविभूषण, पद्मभूषण और पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं की सूची जारी की गयी है। देशभर के कुल 131 लोगों को यह सम्मान प्रदान किया जाने वाला है जिसमें से 11 दिग्गज पश्चिम बंगाल से हैं। इस साल जितने लोगों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा उनमें से पद्मविभूषण और पद्मभूषण पुरस्कारों की सूची में पश्चिम बंगाल से किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं है।लेकिन इस साल 11 बंगाल वासियों को पद्मश्री पुरस्कार मिलने वाला है। इनमें से एक नाम जो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल भी हो चुका है, वह है ‘बुम्बादा’ यानी प्रसेनजीत चट्टोपाध्याय।इसके अलावा जिन 11 दिग्गजों को पद्मश्री पुरस्कार मिलने वाले हैं, उनमें शामिल हैं – अशोक कुमार हल्दार (साहित्य और शिक्षा), गंभीर सिंह योनजून (साहित्य और शिक्षा), हरिमाधव मुखर्जी (मरणोपरंत) (शिल्पकला), ज्योतिष देवनाथ (शिल्पकला), कुमार बोस (शिल्पकला), महेंद्रनाथ राय (साहित्य और शिक्षा),प्रसेनजीत चट्टोपाध्याय (शिल्पकला), रविलाल टुडू (साहित्य और शिक्षा), सरोज मंडल (मेडिसिन, तरुण भट्टाचार्य (शिल्पकला), तृप्ति मुखर्जी (शिल्पकला)
बता दें, संथाली साहित्य में अपने योगदान की वजह से कालना के बादला नोआरा निवासी रविलाल टुडू को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। वर्ष 2022 में उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार ने बंगभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया था। वहीं पिछले करीब 4 दशकों से बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहे प्रसेनजीत चट्टोपाध्याय को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। इस साल पद्म पुरस्कारों की सूची में 5 लोगों को पद्म विभूषण सम्मान भी मिलेगा। 13 लोगों को पद्म भूषण सम्मान मिलेगा लेकिन इन दोनों पद्म पुरस्कारों के प्राप्तकर्ताओं की सूची में बंगाल के कोई व्यक्ति शामिल नहीं हैं।

वरिष्ठ पत्रकार मार्क टुली का दिल्ली में निधन

नयी दिल्ली। ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन (बीबीसी) के वरिष्ठ पत्रकार मार्क टुली का रविवार को निधन हो गया। वह लगभग 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती टुली के निधन की उनके करीबी मित्र और पत्रकार सतीश जैकब ने पुष्टि की। मार्क टुली का जन्म 24 अक्टूबर 1935 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने बीबीसी में लंबा कार्यकाल बिताया और करीब 22 वर्षों तक नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख रहे। स्वतंत्र पत्रकारिता में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई। टुली ने भारत से जुड़ी अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को कवर किया, जिनमें प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का अंतिम संस्कार, इंदिरा गांधी के साक्षात्कार, ऑपरेशन ब्लू स्टार, राजीव गांधी की हत्या और अयोध्या विवाद शामिल हैं। लेखक और प्रसारक के रूप में भी टुली ने इंडिया इन स्लो मोशन, नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया और द हार्ट ऑफ इंडिया जैसी चर्चित पुस्तकें लिखीं। बीबीसी रेडियो के कार्यक्रम समथिंग अंडरस्टुड के प्रस्तुतकर्ता के रूप में उन्होंने समाज, आस्था और मानवीय मूल्यों पर गहन चर्चा की। वह शेख मुजीबुर रहमान का साक्षात्कार लेने वाले शुरुआती पत्रकारों में रहे और 1977 में भारत लौटकर कई बार इंदिरा गांधी का साक्षात्कार किया। उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले जरनैल सिंह भिंडरावाले से बातचीत की और बाद में एसजीपीसी प्रमुख गुरचरण सिंह तोहरा का भी इंटरव्यू लिया। उन्होंने राजीव गांधी की हत्या, नरसिम्हा राव युग का आगमन और 1992 में अयोध्या विवादित ढांचा विध्वंस जैसी घटनाओं को रोडियो पर प्रस्तुत किया। टुली ने ‘अमृतसर: मिसेज गांधीज लास्ट बैटल’, ‘द हार्ट ऑफ इंडिया’ और ‘इंडिया: द रोड अहेड’ जैसी पुस्तकें लिखीं और कई डॉक्यूमेंट्री भी बनाई। उनके योगदान के लिए उन्हें 2002 में ब्रिटेन सरकार ने नाइटहुड की उपाधि दी, जबकि भारत सरकार ने 2005 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।

धर्मेंद्र व केरल के पूर्व सीएम वीएस अच्युतानंदन को मरणोपरान्त पद्म विभूषण

-रोहित शर्मा, हरमनप्रीत, प्रसेनजीत को मिलेगा पद्मश्री
नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा कर दी है, जिसमें अभिनेता धर्मेंद्र और पूर्व सीएम वीएस अच्युतानंदन (मरणोपरांत) सहित पांच हस्तियों को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। खेल जगत में, क्रिकेटर रोहित शर्मा और हरमनप्रीत कौर को उनके योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार मिला है। गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर केंद्र सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म पुरस्कारों’ की घोषणा कर दी है। इस साल बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीएस अच्युतानंदन सहित पांच प्रतिष्ठित हस्तियों को देश का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्म विभूषण दिया गया है। इस वर्ष देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण, पांच विशिष्ट हस्तियों को प्रदान किया गया है, जिन्होंने कला, साहित्य और सार्वजनिक जीवन में असाधारण योगदान दिया है। मनोरंजन जगत के दिग्गज और बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र को कला (सिनेमा) के क्षेत्र में उनके शानदार करियर के लिए यह सम्मान मिला है। सार्वजनिक मामलों में उनके महत्वपूर्ण कार्यों के लिए केरल के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीएस अच्युतानंदन (मरणोपरांत) और केटी थॉमस को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया है। इनके अलावा, शास्त्रीय संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली मशहूर वायलिन वादक एन राजम को कला के क्षेत्र में और पी नारायणन को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनकी विशिष्ट सेवा के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। पद्म भूषण पाने वालों में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, विज्ञापन जगत के दिग्गज दिवंगत पीयूष पांडे, मशहूर बैंकर उदय कोटक, और भाजपा नेता वीके मल्होत्रा शामिल हैं। साथ ही, मनोरंजन जगत से मलयालम सुपरस्टार ममूटी और लोकप्रिय गायिका अलका याग्निक को भी इस सम्मान से नवाजा गया है। खेल और शिक्षा जगत के कई सितारों को इस साल पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है। खेल की दुनिया में भारतीय क्रिकेट का गौरव बढ़ाने वाले दो बड़े नामों पुरुष टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा और महिला टीम की वर्तमान कप्तान हरमनप्रीत कौर भुल्लर को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। इनके साथ ही भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया को भी खेल में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। मनोरंजन जगत की बात करें तो दिग्गज अभिनेता सतीश शाह (मरणोपरांत) और टॉलीवुड के मशहूर अभिनेता प्रसेनजीत चटर्जी को यह सम्मान दिया गया है। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले यूजीसी के अध्यक्ष और जेएनयू के पूर्व कुलपति मामिडाला जगदीश कुमार को भी पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। इस साल की सूची में कुल 19 महिलाएं शामिल हैं, जबकि 16 लोगों को यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया है। सूची में 6 विदेशी प्राप्तकर्ता भी शामिल हैं। ये पुरस्कार हर साल राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाते हैं।

15 साल बाद कोलकाता मेट्रो में शुरू हुई रिटर्न टिकट की व्यवस्था

-एक ही बार में खरीदें आने-जाने का टिकट
कोलकाता । मेट्रो में किसी समय यात्री आने और जाने दोनों तरफ का टिकट बुक कर सकते थे। बिल्कुल वैसे ही जैसे लोकल ट्रेनों में होता है। लेकिन बाद में इस व्यवस्था को हटा दिया गया। अब एक बार फिर से कोलकाता मेट्रो लगभग 15 सालों बाद रिटर्न टिकट खरीदने की व्यवस्था को शुरू करने जा रहा है। इस बारे में कोलकाता मेट्रो के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी एसएस कन्नान ने कहा कि हम प्रयोगात्मक रूप से रिटर्न टिकट की व्यवस्था को शुरू कर रहे हैं। एक बार यात्री टिकट खरीदकर उसे एंट्री गेट पर स्कैन कर अंदर जाने के बाद वापसी की यात्रा के समय उन्हें फिर से टिकट बुक करने की जरूरत नहीं होगी। सीधे एंट्री गेट पर टिकट को स्कैन कर वापसी की यात्रा के लिए अंदर जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि जो यात्री वापसी की यात्रा के लिए रिटर्न टिकट बुक करेंगे उन्हें अपना टिकट संभाल कर रखना होगा। बताया जाता है कि मेट्रो रेल में रिटर्न टिकट की सेवा को शुरू कर दिया गया है। बताया जाता है कि पांचों रुट पर ही रिटर्न टिकट की सुविधा उपलब्ध है। गौरतलब है कि 1 अगस्त 2011 से कोलकाता मेट्रो में रिटर्न टिकट की व्यवस्था को बंद कर दिया गया था। उस दिन से टोकन सिस्टम को शुरू किया गया था। इस सुविधा की वजह से जिन यात्रियों के पास मेट्रो का स्मार्ट कार्ड नहीं होता है, उन्हें आते और जाते दोनों समय ही टिकट काउंटर की लाइन में खड़े होकर अपना समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं होगी। यात्रियों में सिंगल टिकट व्यवस्था को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही थी। रिटर्न टिकट बुकिंग व्यवस्था को फिर से शुरू करने की मांग पिछले लंबे समय से यात्री कर रहे थे। एक अन्य समस्या भी हो रही थी। कोलकाता मेट्रो का न्यूनतम किराया ₹5 है। इसके अलावा कोलकाता मेट्रो के किराए का स्लैब 15, 25 और 35 रुपए का भी है। जिस वजह से खुदरा रुपये की समस्या भी शुरू हो जाती थी। अक्सर काउंटर पर कार्यरत कर्मचारियों के साथ यात्रियों की खुदरा को लेकर बहस होती रहती थी। इन बातों को ध्यान में रखते हुए ही कोलकाता मेट्रो प्रबंधन ने फिर से रिटर्न टिकट बुकिंग व्यवस्था को शुरू करने का फैसला लिया।

जब नेताजी ने अंग्रेजों से लड़कर किया मां सरस्वती की पूजा का आयोजन

सरस्वती पूजा भी है और भारत माता के सपूत महत्वपूर्ण स्वतंत्रता संग्रामी नेताजी का जन्मदिन भी है। यह तस्वीर एक ऐतिहासिक तस्वीर है। 20वीं सदी के दूसरे दशक में, कोलकाता के सिटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने मांग की थी कि वे अपने कॉलेज में सरस्वती पूजा बड़े धूमधाम से मनाना चाहते हैं। लेकिन कॉलेज मैनेजमेंट से उन्हें अनुमति नहीं मिली। वजह कुछ और नहीं थी, इस कॉलेज के मैनेजमेंट के सभी सदस्य ब्रह्म समाज से थे, इनलोगों में मूर्ति पूजा का निषेध था। इस पर बड़ा हंगामा शुरू हो गया। नेताजी उस समय एक उभरते हुए नेता थे, उन्होंने बहुत कम उम्र में काफी प्रसिद्धि प्राप्त कर ली थी। सिटी कॉलेज के स्टूडेंट्स उनके पास गए और उनसे इस मामले में दखल देने का अनुरोध किया। नेताजी ने अलग-अलग तरह की पूजाओं के लिए छोटे-बड़े कई आंदोलनों का सूत्रपात भी किया था। सिटी कॉलेज की घटना के बाद नेताजी और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच व्यक्तिगत रिश्ते बहुत खराब हो गए थे क्योंकि रवींद्रनाथ ने भी मैनेजमेंट का ही साथ दिया था। उस समय बहुत से बंगाली समाज के लोगों को भी इस घटना से काफी कष्ट हुआ था। बाध्य होकर नेताजी को कॉलेज परिसर के बाहर ही व्यापक स्तर पर सरस्वती पूजा का आयोजन करना पड़ा था।
बाद में, बेशक, नेताजी और रवींद्रनाथ के बीच पिता-पुत्र जैसा अटूट रिश्ता बन गया , लेकिन यह एक अलग कहानी है।जब नेताजी जेल में थे, उस समय भी कोई पूजा होती तो वे ब्रिटिश अधिकारियों को जेल में उस पूजा का आयोजन करने के लिए बाध्य कर देते थे। यहाँ तक कि सबसे आखिर में, जब उन्हें जेल भेजा गया, तो उन्होंने दुर्गा पूजा करने के अनुरोध के साथ आंदोलन भी किया था। इसके लिए वे जानलेवा भूख हड़ताल भी शुरू किए थे।

(जानकारी साभार – डॉ. सत्यप्रकाश तिवारी)

पुरोहित के बिना एआई से हुई सरस्वती पूजा

उत्तर 24 परगना। फूलों की डालियां सज चुकी थीं, फल काटे जा चुके थे और आल्पना (द्वार सजाने) का काम जारी था। पीले वस्त्रों में सजे कचिकांचों के बीच धूप-धुना जलाकर पूजा शुरू करने की तैयारी पूरी थी, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी पुरोहित की तलाश शुरू हुई। तभी सामने आया एक नया और चौंकाने वाला समाधान—कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)।
बनगांव के सुभाषपल्ली निवासी सुषोभन घोष की पहल पर इस वर्ष सरस्वती पूजा पारंपरिक पुरोहित के बिना, एआई की मदद से संपन्न हुई। मोबाइल फोन के माध्यम से एआई द्वारा शुद्ध संस्कृत मंत्रों का उच्चारण कराया गया, जिसे सुनकर परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों ने एक साथ मंत्रोच्चारण कर पूजा पूरी की। शुशोभन घोष ने बताया कि पुरोहित के इंतजार की समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने यह प्रयोग किया। एआई की मदद से मंत्रों को पंचांग के अनुसार जांचा गया और सही विधि से पूजा संपन्न की गई। उन्होंने कहा कि आज हर किसी के पास मोबाइल और इंटरनेट है। सोचा, क्यों न एआई का इस्तेमाल कर देखा जाए। एआई ने पंचांग के नियमों के अनुसार पूरे मंत्र संस्कृत में पढ़े, जिससे हमलोग आसानी से पूजा कर सके। इस अनोखी पूजा में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने भी संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि एआई की सहायता से मंत्र और विधि समझकर पूजा करने से उन्हें मानसिक तृप्ति मिली। हालांकि इस घटना को लेकर पुरोहित समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कुछ लोगों ने इसे भविष्य में पेशे पर असर डालने वाला बताया। वहीं, कई का मानना है कि एआई को सहायक के रूप में अपनाया जा सकता है, न कि पूर्ण विकल्प के तौर पर।
विद्या और बुद्धि की देवी की पूजा में एआई के इस प्रयोग ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में मानव जीवन के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं में भी तकनीक की भूमिका और बढ़ सकती है।