Monday, March 9, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]

व्यवस्था के खिलाफ कलम चलाने वाले साहिर

20वीं सदी के सबसे बेहतरीन गीतकार और कवि में से एक रहे साहिर लुधियानवी का 08 मार्च को जन्म हुआ था। साहिर के गीतों और शायरी को आज भी लोग खूब पसंद करते हैं। उन्होंने अपने गीतों और शायरियों के जरिए जुल्मों और गैर-बराबरी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। साहिर लुधियानवी शब्दों के सच्चे जादूगर थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर साहिर लुधियानवी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…पंजाब के लुधियाना के करीमपुरा में 08 मार्च 1921 को साहिर लुधियानवी का जन्म हुआ था। वह एक पंजाबी मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते थे। साहिर का असली नाम अब्दुल हई है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा लुधियाना से पूरी की। कॉलेज टाइम से ही वह अपने शेर और शायरी के लिए प्रख्यात हो  गए थे।                                                                                    साहिर एक भारतीय कवि और संगीतकार थे। उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए तमाम गाने भी लिखे।साहिर लुधियानवी ने अपने काम से फिल्म जगह में अच्छी जगह बनाई थी। साल 1949 में आई फिल्म ‘आजादी की राह’ से उन्होंने अपने करियर की शुरूआत की थी। इस फिल्म के लिए उन्होंने 4 गाने लिखे थे। फिर साल 1951 में आई फिल्म ‘नौजवान’ के लिए साहिर ने गाने लिखे। उनको सबसे अधिक सफलता साल 1951 में आई फिल्म ‘बाजी’ से मिली थी। इन गानों के संगीतकार एस डी बर्मन थे। उस दौरान साहिर को गुरुदत्त की टीम का हिस्सा माना जाता है। बर्मन के साथ साहिर की आखिरी फिल्म ‘प्यासा’ थी। इसके बाद दोनों के बीच कुछ मतभेद हो गए। जिसका कारण बर्मन और साहिर की राहें अलग हो गईं।साहिर लुधियानवी की कविताएं और शायरी दत्ता नायक को काफी ज्यादा पसंद थीं। जिस कारण साहिर ने दत्ता नायक के साथ तमाम फिल्मों के लिए गाने लिखे थे। साहिर लुधियानवी ने फिल्म ‘चंद्रकांता’, ‘दास्तान’, ‘मिलाप’, ‘इज्जत’ और ‘दाग’ के लिए भी गाने लिखे थे।बताया जाता है कि साहिर लुधियानवी ने लता मंगेशकर से ज्यादा फीस की डिमांड की थी। साहिर का कहना था कि भले ही उनको लता से एक रुपए ही ज्यादा दिया जाए, लेकिन उनको लता से ज्यादा फीस दी जाए। जिसके कारण साहिर और लता के बीच मतभेद हो गए थे। वहीं 25 अक्तूबर 1980 को 59 साल की उम्र में साहिर लुधियानवी ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था। जिसके बाद उनको मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ जुहू में दफनाया गया था।

शुभजिता

शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।

शुभजिताhttps://www.shubhjita.com/
शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।
Latest news
Related news