Monday, February 23, 2026
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स्त्री सशक्तिकरण के लिए एकमात्र शिक्षा ही विकल्प : स्पर्शिता गर्ग

कोलकाता : भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज की विमेन्स सेल और पॉलिटिकल साइंस की इंटरनल कम्प्लेंट कमेटी के तत्वावधान में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया जिसका विषय “पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री सशक्तीकरण” के विभिन्न पहलुओं पर आधारित रहा। भवानीपुर कॉलेज की टीआईसी डॉ. सुचंद्रा चक्रवर्ती ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्धाटन किया ।विशिष्ट अतिथियों में स्पर्शिता गर्ग (प्रथम श्रेणी ज्यूडिशियल सर्विसेज मजिस्ट्रेट, असम, सोंतिपुर, तेजपुर, असम) एवं सुष्मिता बसु (सलाहकार, फैमिली, काउंसिलिंग स्टडीज़,EMLHIRST, इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिटी स्टडीज़, शांतिनिकेतन) ने भी उद्घाटन सत्र में भाग लिया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए मजिस्ट्रेट श्रीमती स्पर्शिता गर्ग ने “स्त्री सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका” विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने अनुभवों, रोजमर्रा जीवन में स्त्रियों की स्थितियां, कानूनी और कोर्ट से संबंधित पक्षों और समस्याओं के विषय पर विस्तार चर्चा की। निष्कर्ष में बताया कि महिलाओं का सशक्तीकरण बिना शिक्षा के असंख्य है। शिक्षित स्त्रियों को अपने अस्तित्व और अधिकारों के लिए कानूनी जानकारी की भी बहुत आवश्यक है। शिक्षा ही वह मूल मंत्र है जो स्त्रियों के सशक्तिकरण के लिए एकमात्र विकल्प है। सेमिनार के द्वितीय सत्र में अध्यक्षता की श्रीमती सुष्मिता बसु ने। फैमिली काउंसिलिंग सेंटर से जुड़ी बासु ने स्त्रियों के रोजमर्रा संघर्ष को रेखांकित करते हुए उनकी समस्याओं और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। विषय “महिलाओं के विकास की राह में आई बाधाएँ” के विभिन्न पहलुओं पर आधारित जमीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा, समस्याओं के बारे में जानकारी दी और कहा कि सरकार द्वारा दी गई कानूनी सहायता और उसे प्राप्त करने के तरीकों को भी जानना आवश्यक है। पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री के विकास के लिये अभी भी बहुत सी बाधाएं हैं जो उनकी स्वतंत्रता में बाधक हैं। बिना अच्छी सोच और विचारों के स्त्री को समुचित स्थान प्राप्त नहीं हो सकेगा। स्वागत भाषण में डॉ. सुचंद्रा चक्रवर्ती ने माया एंगलू की उक्ति से वक्तव्य की शुरुआत करते हुए कहा कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में पितृसत्तात्मक समाज में आज भी स्त्रियां अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। समय के अनुसार समाज की सोच में बदलाव आ रहा है, स्त्रियां अभी भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। अधिक संख्या में विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस सेमिनार में 160 से अधिक रजिस्ट्रेशन कराये गये। स्त्री विमर्श में शिक्षक – शिक्षिकाओं की भागीदारी रही। गार्गी गुंइया सेमिनार संयोजन में सक्रिय सहयोगी रहीं। डॉ देवजानी गांगुली ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस कार्यक्रम की जानकारी डॉ. वसुंधरा मिश्र ने दी।

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