रोज़गार की चाहत

नेहा जयसवाल
खाली कंधों पर थोड़ा सा भार चाहिए,
बेरोजगार हूं साहब रोजगार चाहिए।
जेब में पैसे नहीं है डिग्री लिए फिरती हूं,
 दिनोदिन अपनी ही नजरों में गिरती हूं।
कामयाबी के घर में खुले किवाड़ चाहिए,
 बेरोजगार हूं साहब मुझे रोजगार चाहिए।।
प्रतिभा की कमी नहीं है भारत की  सड़कों पर ,
दुनिया बदल  देंगे भरोसा करो इन लड़कियों पर।
लिखते लिखते मेरी कलम तक घिस गई,
नौकरी कैसे मिले जब नौकरी ही बिक गई।
नौकरी की प्रक्रिया में अब सुधार चाहिए,
बेरोजगार हूं साहब मुझे रोजगार चाहिए।।
दिन रात करके मेहनत बहुत करती हूं,
सूखी रोटी खाकर ही चैन से पेट भरती हूं।
भ्रष्टाचार से लोग खूब नौकरी पा रहे हैं,
रिश्वत की कमाई खूब मजे में खा रहे हैं।
नौकरी पाने के लिए यहां जुगाड़ चाहिए,
बेरोजगार हूं साहब मुझे रोजगार चाहिए।।
” युवतियों की अंतर्आत्मा की आवाज़”

शुभजिता

शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।