Friday, August 7, 2026
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सीयू, हिन्दी विभाग में व्यास पूजन व राष्ट्रीय संगोष्ठी

साहित्य, समाज और शिक्षा: वर्तमान परिदृश्य’ पर चर्चा

कोलकाता । भारतीय शिक्षण मंडल एवं हिंदी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में व्यास पूजन एवं एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन दिनांक गत 3 अगस्त को कलकत्ता विश्वविद्यालय के एतिहासिक ‘सीनेट हॉल’ में किया गया। इस संगोष्ठी में विभिन्न विद्वानों ने गुरु पूर्णिमा एवं भारतीय परंपरा में गुरु के महत्व पर विचार व्यक्त किया | कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आशुतोष घोष की अध्यक्षता में सभी आगत अतिथियों ने भारत माता, देवी सरस्वती और महर्षि वेद व्यास की तस्वीर पर पुष्पार्पण कर अपनी श्रद्धा निवेदित की | मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. दीपांकर कर्मकार (संस्कृत विभाग, सुरेन्द्रनाथ कॉलेज फॉर वीमेन), विशिष्ट वक्ता माननीय डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी (अवकाश प्राप्त, सुरेन्द्रनाथ सांध्य कॉलेज), मुख्य अतिथि प्रो. अरिंदम भट्टाचार्य (विभागाध्यक्ष, जंतु विज्ञान, कलकत्ता विश्वविद्यालय), के साथ सीयू की हिन्दी विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक प्रो. राजश्री शुक्ला, प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय एवं डॉ. रामप्रवेश रजक सहित विविध महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों  से आगत भारतीय शिक्षण मंडल के अध्यापक एवं प्राध्यापक, कर्मचारी, हिंदी विभाग के शोधार्थियों, विद्यार्थियों की उपस्थिति से कार्यक्रम को पूर्ण सफलता प्राप्त हुई ।  कार्यक्रम का आरम्भ पारंपरिक रीति के अनुरूप दीप प्रज्वलन, व्यास पूजन के साथ हुआ | कार्यक्रम के समापन में आशुतोष कॉलेज के प्रो. प्रीतम घोष द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया | भारतीय शिक्षण मंडल, दक्षिण बंग प्रांत के विस्तारक श्लोक पांडे द्वारा कल्याण मंत्र का पाठ किया गया तथा प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ | विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर राजश्री शुक्ला ने सभी वक्ताओं एवं श्रोताओं का स्वागत करते हुए बीज वक्तव्य दिया । कुलपति ने व्यास पूजन की परम्परा को चलते रहने की कामना व्यक्त की | मुख्य वक्ता डॉ. दीपांकर कर्मकार द्वारा विश्वविद्यालयी अनुभवों एवं गुरु शिष्य परंपरा पर प्रकाश डाला गया | उन्होंने विस्तार से व्यास पूजन और गुरु तत्व को समझाया | प्रो. अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा कि भारत की एकता हिंदी के माध्यम से ही संपन्न हो सकती है | संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता प्रो. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु- शिष्य परंपरा की उपादेयता पर प्रकाश डाला समाज में शिक्षा की भूमिका को अभिव्यक्ति प्रदान की | हिंदी विभाग की प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने संस्कृत भाषा के महत्व का उल्लेख करते हुए संस्कृत को पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने का प्रस्ताव दिया | सम्पूर्ण कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ. रामप्रवेश रजक ने किया |

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