कोलकाता । साहित्यिकी संस्था की सदस्याओं ने अपने-अपने संस्मरणों को साझा किए जो गागर में सागर की तरह सभी श्रोता सदस्याओं के भावों से जुड़े रहे।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुसुम जैन और संचालन विद्या भंडारी द्वारा किया गया। 28 मई को शाम 4.15 से ऑनलाइन हुए इस कार्यक्रम में बारह से अधिक संख्या में सदस्याओं ने भाग लिया।मीतू कनोडिया, वाणी मुरारका, नीता उपाध्याय, उर्मिला प्रसाद, संगीता चौधरी, रंजना, उषा सराफ, सुधा भार्गव, उमा झुनझुनवाला मौसमी प्रसाद गीता दूबे आदि ने अपने जीवन यात्रा की स्मृतियों को एक सृजनात्मक रूप देते हुए बहुत ही रोचक ढंग से संस्मरणों को सुनाया। ऑनलाइन कार्यक्रम होने से बैंगलुरु, ऑस्ट्रेलिया, वर्धमान, कोलकाता, हावड़ा से भी साहित्यिकी की सदस्याएं जुड़ी। दूर रहकर भी उनकी उपस्थिति ने संस्था को गरिमा प्रदान की ।सुधा भार्गव ने बैंगलुरू से अपना संस्मरण सुनाया जिसमें स्ट्राबेरी फलों के देश कनाडा में उनके अनुभव और स्मृतियों के साथ उसके विषय में महत्वपूर्ण जानकारी भी दी। संगीता चौधरी ने उनके बेटे को रेलवे स्टेशन पर गिर कर फिर उसे जीवित पाकर खोने का कैसा अनुभव हुआ बताया जो आप बीती मार्मिक घटना थी। उमा झुनझुनवाला ने कविता के माध्यम से अपनी यादों को साझा किया जो उनके प्रिय पति के प्रति प्रेम की पराकाष्ठा थी। नीता उपाध्याय ने अपनी बचपन की शरारतों से कैसे अपने गुरु को खो दिया जिसका परिणाम पश्चात्ताप में बदल जाता है। वानी मुरारका ने अमरिका की यात्रा के दौरान अपनी मित्र सामाजिक कार्यकर्ती जेन के साथ भारत और विदेश के विवाह जैसी संस्था के सात वचनों पर बात करना क्या भारतीय पति पत्नी मित्रवत रहते हैं? जिसका जवाब अनुत्तरित ही रहता है। उषा श्राफ ने तीन सहेलियों के साथ वारिश में जिस युवा के घर में शरण ली उनमें से एक सहेली ने उससे पहली नजर में प्यार कर बैठी और फिर उसी से विवाह भी करती है। ऐसे ही बहुत से संस्मरणों को सुना गया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।




