Tuesday, April 21, 2026
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आत्मनिर्भर भारत लक्ष्य की प्राप्ति में भारतीय भाषाओं की भूमिका पर संगोष्ठी

कोलकाता ।  नराकास, कोलकाता (कार्यालय-2) के तत्वावधान में सीएसआईआर-केन्द्रीय काँच एवं सिरामिक अनुसंधान संस्थान, कोलकाता में दिनांक गत 30 मार्च को ‘आत्मनिर्भर भारत लक्ष्य की प्राप्ति में भारतीय भाषाओं की भूमिका’  विषय पर पूर्ण दिवसीय राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में नराकास के सदस्य कार्यालयों के प्रतिनिधियों के अलावा देशभर के कई अन्य कार्यालयों से राजभाषा कार्मिक ऑनलाइन शामिल हुए। अपने स्वागत सम्बोधन में सीएसआईआर-सीजीसीआरआई एक प्रशासन नियंत्रक सुप्रकाश हलदर ने आशा जताई कि इस आयोजन से सभी को भारतीयों भाषाओं में कार्य करने में सहायता मिलेगी। अपने अध्यक्षीय अभिभाषण में नराकास अध्यक्ष, प्रो. बिक्रमजीत बसु ने जर्मनी, फ्रांस, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया आदि का उदाहरण देते हुए सभी से हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के ज्यादा से ज्यादा उपयोग की अपील की। संगोष्ठी में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारतीय भाषाओं के योगदान को केंद्र में रखते हुए कुल चार सत्रों आयोजन किया गया। प्रथम सत्र में आईआईटी खड़गपुर के वरिष्ठ हिंदी अधिकार डॉ. राजीव कुमार रावत ने ‘आधुनिक कम्प्यूटिंग ई-टूल्स के उपयोग’ पर अपनी प्रस्तुति तथा अनुभव सभी के साथ साझा किया। द्वितीय सत्र में राजभाषा विभाग, भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय में उपनिदेशक (कार्यान्वयन), डॉ. विचित्रसेन गुप्त ने ‘सरकारी कार्यालयों में राजभाषा का  प्रभावी कार्यान्वयन’ विषय पर अपने ज्ञानवर्धक व्याख्यान से संगोष्ठी में शामिल कार्मिकों को अवगत करवाया तथा उनसे भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अपना सार्थक योगदान देने का आह्वान किया। भोजनोपरांत आयोजित तृतीय सत्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग की प्रो. राजश्री शुक्ला ने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा पर जोर को रेखांकित करते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत लक्ष्य की प्राप्ति में भारतीय भाषाओं की भूमिका’ पर व्याख्यान दिया। अंतिम सत्र में यूको बैंक के मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) सत्येन्द्र कुमार शर्मा में ‘भाषा प्रौद्योगिकी और हिंदी’ विषय पर व्याख्यान-सह-प्रस्तुति के माध्यम से सभी को प्रौद्योगिकी के उचित उपयोग से अपने राजभाषा एवं हिंदी के कार्यों को सुगम बनाने की दिशा में जागरूक किया। चारों सत्रों की अध्यक्षता क्रमशः डॉ. वंशी कृष्ण बल्ला, ज्योतिर्मय सिकदर, अजयेन्द्र नाथ त्रिवेदी तथा मुनमुन गुप्ता द्वारा किया गया। संगोष्ठी के आयोजन में डॉ. विमलेश कुमार त्रिपाठी प्रशांत तिवारी तथा सत्यजीत नारायण सिंह द्वारा भी योगदान दिया गया।

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