Saturday, August 15, 2026
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भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज में रैगिंग विरोधी जागरूकता कार्यक्रम

कोलकाता । “रैगिंग को ना कहें। सम्मान को हाँ कहें।”भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज का छात्र मामलों का विभाग, सभी छात्रों को एक व्यावहारिक एंटी-रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका उद्देश्य एक सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी परिसर वातावरण को बढ़ावा देना है। प्रमुख वक्ताओं में सलोनी प्रिया – निदेशक, उम्मीद और फैसल फसीह – सहायक प्रोफेसर, पश्चिम बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज (एनयूजेएस) में रहे। यह कार्यक्रम दिनांक: 12 अगस्तसमय: प्रातः 11:00 बजे से कॉन्सेप्ट हॉल में हुआ।
सलोनी प्रिया ने कहा कि रैगिंग अभी भी कई लोगों के लिए एक आघात है, कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उत्साह अक्सर रैगिंग के डर से धूमिल हो जाता है।कई विद्यार्थियों के लिए इसकी शुरुआत केवल मनोरंजन या मज़ाक के रूप में होती है और फिर वे पीड़ित असहाय, फँसे हुए और अपमानित महसूस करते हैं ।
12-18 अगस्त को राष्ट्रीय रैगिंग विरोधी सप्ताह में कई कॉलेजों ने सेमिनार आयोजित किए थे और मुझे कोलकाता के भवानीपुर कॉलेज के छात्रों को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया था।
वरिष्ठों द्वारा पूछे गए एक हानिरहित परिचय को जब वरिष्ठतम लोग अपने अहंकार, पावर के साथ घुला मिला कर गलत तरीके से पेश करते हैं तो वह व्यवहार बदसूरत और क्रूर हो जाता है। मौज-मस्ती, फ्रीडॉन फेस्ट और कॉलेज लाइफ से जुड़ी दोस्ती में डर, निराशा और झगड़ों में बदल जाती है।
कभी-कभी सन्नाटा छा जाता है…आज सभी से अपील है कि उन्हें बोलना चाहिए, चुप न रहें ।रैगिंग को रोकने और अपने परिसर को सुरक्षित बनाने के लिए —पीआरएस मॉडल का पालन करें जो तीन तरह से है -रोकें ,रिपोर्ट करें और समर्थन।
सभी कॉलेजों में अधिकारियों से नियम और प्रतिक्रिया प्रत्येक छात्र को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। संदेश यह है कि आप अकेले नहीं हैं… बोलें और मदद मांगें क्योंकि किसी को पीड़ित होने की जरूरत नहीं है।
वक्तव्य में दर्शकों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला; केवल दर्शक नहीं बल्कि सक्रिय प्रदर्शनकारी कक्षाओं, गलियारों और साइबर स्पेस में सुरक्षा घेरा बनाना चाहिए।इस अवसर पर प्रातः कालीन कॉमर्स विभाग की वाइस प्रिंसिपल प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी ने बताया कि एंटी रैगिंग विषय पर कई प्रतियोगिताएं जैसे पोस्टर, फिल्म और नारे पर विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए।एंटी रैगिंग विषय पर विद्यार्थियों ने सेमिनार भी रखा।
जब एक युवा व्यक्ति परिचित लोगों और दिनचर्या से दूर एक नए संस्थान में प्रवेश कर रहा है, तो सुरक्षित और स्वीकार्य महसूस करने की आवश्यकता अधिक है और कॉलेज इसे प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं; लेकिन उसके लिए सहकर्मी समूह का समर्थन महत्वपूर्ण और आवश्यक है। जानकारी देते हुए डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और शिक्षा मंत्रालय के सौजन्य से भवानीपुर कालेज में एंटी रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम द्वारा भयमुक्त शिक्षा के वातावरण का संदेश दिया।

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