Wednesday, October 21, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]

दिनकर की ‘उर्वशी’ स्त्री के स्वत्व का उद्घोष है

कोलकाता : दिनकर ने अपने काव्य ‘उर्वशी’ में स्त्री-पुरुष संबंध को एक व्यापक सर्जनात्मक भूमि पर देखा है। वे राष्ट्रीय आक्रोश के साथ मानवीय प्रेम के कवि हैं। उन्होंने एक समय ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ राष्ट्रीय भावना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन वे उर्वशी में प्रेम को भौतिक भूमि पर देखते हुए भी ‘कामाध्यात्म’ के माध्यम से एक उच्च धरातल प्रदान करते हैं। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कृति ‘उर्वशी’ पर चर्चा करते हुए भारतीय भाषा परिषद में ये बातें कही गईं। पटना विश्‍वविद्यालय के प्रो. तरुण कुमार ने अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि काम एक भौतिक वस्तु ही नहीं एक सर्जनात्मक, मानवीय और आध्यात्मिक प्रेरणा भी है। स्त्री और पुरुष दो अलग सत्ता होते हुए भी अद्वैत हैं। दिनकर की ‘उर्वशी’ में पत्नी और प्रेयसी का द्वंद्व आधुनिक यथार्थ को व्यक्त करते हुए वस्तुतः एक प्रतिकात्मक संकेत है। यह वस्तुतः भौतिकता और आध्यात्मिकता में सामंजस्य की चेतना है।

अध्यात्म और मानव प्रकृति परस्पर विरोधी नहीं हैं। आरंभ में जालान गर्ल्स कॉलेज के प्रो. विवेक सिंह ने विषय प्रस्तावना करते हुए कहा कि ‘उर्वशी’ ॠग्वेद से प्रेरणा लेकर लिखी गई एक आधुनिक कृति है जिसमें दिनकर ने आधुनिक जीवन में प्रेम के अर्थ पर विचार किया है। अध्यक्षीय भाषण में डॉ.शंभुनाथ ने कहा कि कालिदास की कृति से दिनकर की कृति की भिन्नता यह है कि इसमें उर्वशी स्त्री के रूप में एक सुंदर दृश्य भर होने की जगह खुद अपनी आँखों से मर्त्यलोक के जीवन को देखना चाहती है। वह पुरूरवा के साथ रहने का निर्णय अपने हाथ में रखती है। इस तरह उर्वशी वस्तुतः सामंतवाद और उपभोक्तावाद के परिवेश में स्त्री के स्वत्व का उद्घोष है। आज बाजार ने स्त्री को महज एक देखी जाने वाली चीज बना दिया है, जबकि स्त्री को कृतज्ञता और सम्मान के साथ देखे जाने की जरूरत है। आरम्भ में स्वागत भाषण करते हुए भारतीय भाषा परिषद के मंत्री नंदलाल शाह ने कहा कि दिनकर ने हिंदी के राष्ट्रीय साहित्य को समृद्ध किया है। संचालन करते हुए पीयूषकांत राय ने कहा कि दिनकर का साहित्य आज भी विद्यार्थियों को अच्छा और उदार मनुष्य बनने की प्रेरणा देता है। परिषद की मंत्री बिमला पोद्दार ने धन्यवाद दिया।

 

शुभजिता

शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।

शुभजिताhttps://www.shubhjita.com/
शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।
Latest news
Related news