Wednesday, March 18, 2026
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इस तरह करें गणगौर की पूजा

गणगौर का यह उत्सव नवरात्र के तीसरे दिन यानी कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तीज को आता है जिसमें को गणगौर माता (मां पार्वती) की पूजा की जाती है।इस दिन पार्वती के अवतार के रूप में गणगौर माता व भगवान शंकर के अवतार के रूप में ईसर जी की पूजा की जाती है।

कहते हैं माता पार्वती ने शंकर भगवान को पति (वर) रूप में पाने के लिए यह व्रत और तपस्या की थी। तब भगवान शंकर तपस्या से प्रसन्न हो गए और वरदान मांगने के लिए कहा। पार्वती ने उन्हें ही वर के रूप में पाने की अभिलाषा करती हैं।

पार्वती की मनोकामना पूरी हुई और पार्वती जी की शिव जी से शादी हो गई। तभी से कुंवारी कन्याएं इच्छित वर पाने के लिए ईसर यानी भगवान शंकर और माता पार्वती गणगौर की पूजा करती है। सुहागिन स्त्री पति की लम्बी आयु के लिए यह पूजा करती है।

इस तरह करें गणगौर व्रत

चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को प्रातः स्नान करके गीले वस्त्रों में ही रहकर घर के ही किसी पवित्र स्थान पर लकड़ी की बनी टोकरी में जवारे बोना चाहिए। इस दिन से विसर्जन तक व्रती को एक समय भोजन करना चाहिए। इन जवारों को ही देवी गौरी और शिव या ईसर का रूप माना जाता है।

गणगौर पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि से आरम्भ की जाती है। सोलह दिन तक सुबह जल्दी उठ कर बगीचे में जाती हैं, दूब व फूल चुन कर लाती है। दूब लेकर घर आती है उस दूब से दूध के छींटे मिट्टी की बनी हुई गणगौर माता को देती हैं। थाली में दही पानी सुपारी और चांदी का छल्ला आदि सामग्री से गणगौर माता की पूजा की जाती है।

इस दिन सुहागिन स्त्रियां दोपहर तक व्रत रखती हैं। व्रत धारण से पहले गौरी की स्थापना की जाती है। व्रत धारण करने से पहले देवी गौरी की स्थापना की जाती है। गौरी की इस स्थापना में सुहाग की सारी वस्तुएं जैसे कांच की चूड़ियां, सिंदूर, महावर, मेंहदी, टीकी, बिंदी, कंघी, शीशा, काजल आदि चढ़ाईं जाती है। सुहाग की इस साम्रगी का अर्पण, चंदन, अक्षत, धूप-दीप, नैवेद्यादि विधिपूर्वक पूजन करके किया जाता है। फिर भोग लगाने के पश्चात गौरी की कथा कही जाती है।

गणगौर का गीत

गौर गौर गोमती, ईसर पूजे पार्वती,

पार्वती के आला तीला, सोने का टीला।

टीला दे टमका दे, बारह रानी बरत करे,

करते करते आस आयो, मास आयो,छटे चौमास आयो।

खेड़े खांडे लाडू लायो, लाडू बिराएं दियो,

बीरो गुट कयगो, चुनड उड़ायगो,

चुनड म्हारी अब छब, बीरो म्हारो अमर।

साड़ी में सिंगोड़ा, बाड़ी में बिजोरा,

रानियाँ पूजे राज में, मै म्हका सुहाग में।

सुहाग भाग कीड़ीएँ, कीड़ी थारी जात है ,जात पड़े गुजरात है।

गुजरात में पानी आयो, दे दे खूंटियां तानी आयो, आख्यां फूल-कमल की डोरी।

 

कुंदन और पोल्की जूलरी में फर्क जानें

हम भारतीय महिलाओं को जेवरों से बेहद लगाव होता है और इन्हें पहनकर वो इठलाने का शायद ही कोई मौका छोड़ती होंगी। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि हम खुद के लिए जूलरी खरीदने जाते हैं और यहीं से शुरू होती है परेशानियां।जेवर के बारे में हम बहुत कम जानते हैं – उसकी बनावट, क्वालिटी, टाइप और उसकी खासियत. खासकर अगर वो दुल्हन के जेवर हों। शादियों में हीरे और सोने के साथ कुंदन और पोल्की के गहने काफी पसंद किए जाते हैं। आइए जानते हैं इन दोनों का अंतर –dkpnl181l

कुंदन और पोल्की, दोनो ही इंडिया की भव्य विरासत और शिल्पकारी को दर्शाते हैं. इसीलिए एक परम्परागत भारतीय लुक के लिए इनसे बेहतर कोई विकल्प नहीं होता. कुंदन, शिल्पकारिता का सबसे पुराना रूप है, यहां तक की इसके वर्क पोल्की से भी पुराने हैं, खासकर हमारे देश में.Kundan Jewellery

इनके डिज़ाइन से लेकर इन्हें तैयार करने की पूरी प्रकिया को काफी सावधानी से किया जाता है, क्योंकि इन्हें तैयार करने में काफी समय लगता है और साथ ही इन्हें काफी बारीकी से तैयार किया जाता है.

पोल्की और कुंदन, दोनों ही स्टोन होते हैं – न ही मेटल और ना ही डिज़ाइन। जहां पोल्की में अनकट डायमंड का तो वहीं कुंदन में ग्लास imitations का इस्तेमाल होता है।

पोल्की में अनफिनिश्ड नैचुरल डायमंड – जो नैचुरल शेप्स में मिलते हैं और जिन्हें पॉलिशिंग या फिनिशिंग की ज़रूरत नहीं होती, का इस्तेमाल होता है। इन्हें जमीन से इनके नेचुरल स्टेट में खुदाई करके निकाला जाता है और जेवर में इस्तेमाल किया जाता है।polki_jewellery_0

दूसरी तरफ, कुंदन – प्रेशियस या सेमी-प्रेशियस ग्लास होता है, निर्भर करता है कि किस तरह के स्टोन का इस्तेमाल किया गया है. इसे पॉलिश करके इसके लुक को और भी बारीक बनाया जाता है. इसमें मुख्य काम, गोल्ड जूलरी में पत्थर बिठाने का होता है।

इंडिया में पोल्की मुग़लों द्वारा लाई गई था जिन्हें डायमंड का नैचुरल फॉर्म बेहद पसंद था।

कुंदन, अपनी कारीगरी और डीटेलिंग के साथ, एक ऐसा आर्ट फॉर्म है जो राजस्थानी कारीगरी के लिए मशहूर है।

पोल्की पीछे की तरफ, गोल्ड फॉएल से बना होता है ताकि सारे स्टोन एक जगह पर आ जाए. वहीं, कुंदन जूलरी में पीछे की तरफ, इनैमल वर्क के साथ-साथ स्टोन्स के बीच कई लेयरिंग रहती है।polki-banner

 कुंदन और पोल्की, दोनों ही प्रिशियस और सेमी प्रिशियस स्टोनस जैसे रूबी, नीलम और पन्ना का इस्तमेमाल करके तैयार किया जाता है.

पोल्की को जिस तरह की लाजवाब कारीगरी से तैयार किया जाता है और इसमें डायमंड का इस्तेमाल होने की वजह से ये कुंदन से ज़्यादा कीमती होता है।

 

मेकअप हटाएं मगर ध्यान से

 

 

अक्सर देखा जाता है कि महिलाओं और लड़कियों को मेकअप करना तो बहुत पसंद होता है लेकित वह मेकअप हटाने पर अच्छी तरह ध्यान नहीं देतीं। नतीजा यह निकलता है कि चेहरे की त्वचा खराब होने लगती है।

गलत तरीके से मेकअप हटाने से चेहरे पर कई रैशेज पड़ जाते हैं और जलन का सामना करना पड़ सकता है. ऐसी समस्याओं से बचने के लिए और मेकअप हटाने के झंझट को कम करने के लिए जानें ये सिंपल से टिप्स…

– मेकअप हटाने के लिए काटॅन में कच्‍चा दूध लगाकर हल्के हाथ से चेहरे को साफ करें। इससे आपका मेकअप आसानी से हट जाएगा.।

– अगर आपका मेकअप वॉटरप्रूफ न हो तो मेकअप हटाने के लिए मिनरल वॉटर और बेबी आयॅल का इस्तेमाल करें।
– यदि आपका चेहरा ऑयली है तो रिमूवल के लिए दही का इस्तेमाल करें. इससे मेकअप तो हटेगा ही साथ ही चेहरा भी पहले की तुलना में अधिक मुलायम हो जाएगा।
– चेहरे की त्वचा अगर ड्राई है तो दूध का इस्‍तेमाल करें। इससे आपकी त्‍वचा पर रैशेज नहीं पड़ेंगे।
– क्लिंजिंग के लिए रात को स्क्रब का इस्तेमाल करें। इससे भी मेकअप आसानी से साफ हो जाएगा।
– मेकअप रिमूव करने के लिए आजकल मार्केट मे कुछ खास तरीके के मेकअप रिमूवल प्रॉडक्‍ट आ रहे हैं. आप अपनी त्वचा के हिसाब से इनका इस्तेमाल भी कर सकती हैं।

 

खुद सड़कों पर झाड़ू लगा चुकी हैं ये महिला कलेक्टर

अजमेर. स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के तहत अजमेर की जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि ए. मलिक को हाल ही में पूरे देश के जिला कलेक्टर व डिप्टी कमिश्नर को प्रशिक्षण देने के लिए चुना गया। केंद्र सरकार ने उन्हें इसके लिए रिसोर्स पर्सन बनाया। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन नई दिल्ली द्वारा 4 व 5 अप्रैल को देशभर के सभी जिला कलेक्टर व डिप्टी कमिश्नर के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।arushi 1

– अकेले अजमेर जिले में इस वर्ष 2 लाख 41 हजार शौचालयों का निर्माण हुआ है, जो बड़ी उपलब्धि है।

– स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में कलेक्टर ने जिले के सभी ब्लाॅक में जिला स्तर के अलग-अलग अधिकारियों को प्रभारी नियुक्त कर उनकी देखरेख में काम करवाया गया था।

– इतना ही नहीं, इन सभी अधिकारियों को संबंधित गांवों में जाकर वहां पर ली जाने वाली ग्रामीणों की बैठकों व शौचालय निर्माण की फोटो भी कलेक्टर को वाट्सएप पर भेजनी होती है, जिससे वास्तविकता सामने आ सके।

– स्वच्छ भारत मिशन के तहत अजमेर जिले में अधिकारी व कर्मचारी सुबह पांच बजे ही गांवों में पहुंच जाते और शौच के लिए पानी का डिब्बा लेकर जंगल जाने वाले लोगों को रोका जाता, उनकी फोटो ली जाती और उन्हें समझाया जाता कि यह गलत है।

– भारत सरकार जब शौचालय निर्माण के लिए जब निश्चित राशि का नकद भुगतान कर रही है तो उन्हें हर सूरत में शौचालय का निर्माण करवाना चाहिए, इसका असर भी हुआ और शौचालय निर्माण में इजाफा हुआ।

– कलेक्टर मलिक की समझाइश का ही असर हुआ कि पुष्कर के पास गनाहेड़ा ग्राम पंचायत की कालबेलिया बस्ती में मदन नाथ कालबेलिया ने सभी परिवारों को समझाते हुए घरों में शौचालयों का निर्माण करवा दिया।

कौन हैं डॉ. आरुषि

अजमेर की कलेक्टर आरुषि पहले भी अपने सफाई अभियान को लेकर सुर्खियां बटोर चुकी हैं ।

– वे अपने कर्मचारियों के साथ मिलकर शहर की सड़कों की सफाई करती हैं। इस दौरान उनका चेहरा भी काला हो गया था।

– वे कई बार पुष्कर और अजमेर की सड़कों की सफाई कर चुकीं हैं।

– कलेक्टर का कहना है कि वे चाहती हैं कि तीर्थ नगरी पुष्कर जिले की सबसे क्लीन सिटी बने।

 

16 से कम उम्र की लड़की से सहमति से बने संबंध भी दुष्कर्म : हाई कोर्ट

चंडीगढ़। दुष्कर्म के कई मामलों में आरोपी दलील देता है कि उनके बीच शारीरिक संबंध ‘आपसी सहमति’ से बने थे। मगर, ऐसे ही एक मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 16 साल की कम उम्र की लड़की के साथ बनाए गए संबंध को दुष्कर्म ही माना जाएगा। भले ही यह शारीरिक संबंध सहमति से बने हों।

जस्टिस अनीता चौधरी ने कहा, ‘एक नाबालिग लड़की को झांसा और लालच देकर शारीरिक संबंध बनाने के लिए राजी किया जा सकता है। 16 साल से कम उम्र की लड़की बिना इसका नतीजा समझे संबंधों की सहमति भी दे सकती है। इसलिए तथाकथित सहमति के नाम पर हम किसी को इसका नाजायज फायदा नहीं उठाने दे सकते।

जस्टिस चौधरी ने ये बातें बात गुड़गांव के एक मामले की सुनवाई के दौरान कहीं। इस मामले में आरोपी का दावा था कि पीड़िता के साथ उसके सम्बन्ध आपसी सहमति के आधार बने थे, इसलिए उसे सजा नहीं मिलनी चाहिए। आरोपी ने 22 जनवरी 2010 को पीड़िता का अपहरण किया था। उस वक्त लड़की की उम्र 15 वर्ष थी।

पीड़‍िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उस वक्त उसे नहीं पता था कि उसकी बच्ची के साथ किसने दुष्कर्म किया है। लड़की ने बाद में बताया कि घटना का आरोपी मिस्त्री है, जो पीड़िता के घर में ही काम करता था। वह पहले से ही शादीशुदा था और उसके दो बच्चे भी थे।

उसे गुड़गांव की जिला अदालत में पेश किया गया, जहां उसे नाबालिग लड़की का अपहरण करने और उसके साथ दुष्‍कर्म करने के आरोप में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। इस सजा के खिलाफ दोषी ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में अपील की थी।

 

12 साल की उम्र में शादी, 14 साल में हुए 2 बच्चे, अब हैं पहलवान

भिवानी।12 साल की उम्र में शादी, 14 साल में दो बच्चों की मां और 21 साल की उम्र में बनी भारत की कुश्ती टीम की सदस्य। ये कहानी है हरियाणा के भिवानी में जन्मी पहलवान नीतू की, जिसकी शादी महज 12 साल की उम्र में 30 साल के मानसिक रूप से विकलांग से कर दी गई थी।

– नीतू के हौसले ने बंदिशों के पर कतर दिए। सब कुछ मुमकिन बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर विदेश के रास्ते खोल लिए।

– नीतू ने बताया कि उसके पांच भाई-बहन हैं। परिवार वालों ने पहली शादी टूटने के बाद दूसरी शादी कर दी। नीतू के पिता प्रेम कुमार ने गरीबी के कारण 2007 में उसकी शादी रोहतक जिले के गांव बेड़वा के संजय कुमार से कर दी।

– शादी के बंधन में बंधी 14 वर्ष की आयु में नीतू ने जुड़वां बच्चों आयुष-प्रिंस को जन्म दिया जो आज आठ वर्ष के हो चुके हैं।

– वर्ष 2010 में दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल में लड़कियों को कुश्ती लड़ते देख नीतू को भी खेलने का शौक चढ़ा।

– नीतू बताती हैं कि उन्होंने अपने पति संजय से बात की तो उन्होंने अपनी माता मरमन देवी से बात कर मुझे अखाड़े में जाने की इजाजत दे दी।

– वर्ष 2011 में उन्होंने रोहतक स्थित छोटूराम ईश्वर अखाड़े में जाना शुरू किया। वजन ज्यादा होने के कारण अखाड़े में उनसे कड़ी मेहनत कराई गई और 53 किलो भार वर्ग में लड़ने के लायक बनाया गया।

– गरीबी के कारण वह फटे जूतों और फटी प्रैक्टिस ड्रेस में अभ्यास करती थी। खाने की खुराक भी उसे पूरी नहीं मिलती थी। कोच व अन्य साथियों ने मदद की।

– कम समय में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत नीतू ने अपने इरादे जाहिर कर दिए। 2014 में खेली गई सीनियर नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य और 2015 में जूनियर नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।

– 2015 में केरल में खेले गए राष्ट्रीय खेलों में कांस्य जीता। उन्हें 2015 ब्राजील में खेली गई जूनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत की तरफ से खेलने का भी मौका मिला।

– नीतू अब ओलिंपिक में पदक लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।

 

9 साल की यह बच्ची बनी रिपोर्टर

एक कस्बे में किसी व्यक्ति की हत्या हो गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही एक नौ साल की बच्ची वहां रिपोर्टिंग करने पहुंच गई। उसके हाथों में पेन, डायरी और कैमरा था। वह आसपास के लोगों से बातचीत कर मामले की जानकारी कर रही थी। साथ ही उसे डायरी में लिख भी रही थी।

उसने घटना की तस्वीरें भी खींची। यहां तक कि उसने पुलिस से भी घटना के बारे में तहकीकात की। यह देख वहां मौजूद लोग हैरान थे। घर पहुंचकर उसने घटना की खबर लिखी और अपने अखबार में प्रकाशित की। बच्ची की इस बहादुरी की दुनिया की मीडिया में जमकर तारीफ हो रही है।

यह नन्हीं संपादक हिल्दे केट लिस्यिाक है। वह अमेरिकी प्रांत पेनसिलवेनिया के सेलनिसग्रोव की रहने वाली है। घटना 2 अप्रैल की है। वह घर में थी, तभी उसे पता चला कि कस्बे में किसी व्यक्ति की हत्या हो गई है। पुलिस ने उसके घर के आसपास के रास्ते को बंद कर रखा था।

इसे देखकर वह तुरंत बाहर निकली और पुलिस को बताया, मैं पत्रकार हूं। इसके बाद घटनास्थल पर पहुंची। यहां वह उस कमरे में गई, जहां व्यक्ति की हत्या की गई थी। वापस घर आकर उसने पुलिस के अधिकारियों को मामले से जुड़ी सूचानाओं के लिए फोन भी किया। बच्ची ने घटना का शार्ट वीडियो भी बनाया है। जब वह वहां पहंुची तो वहां अन्य पत्रकार भी नहीं थे।

हिल्दे केट ने 2014 में आरेंज स्ट्रीट न्यूजपेपर और वेबसाइट शुरू की थी। वह खुद उसकी संपादक और प्रकाशक है। इस घटना की फोटो और न्यूज को उसने सबसे पहले अपने सोशल मीडिया पेज और वेबसाइट पर दिया। उसके पिता एक स्थानीय अखबार में पत्रकार रह चुके हैं।

उन्हीं से प्रेरित होकर उसने पत्रकारिता करना सीखा है। हालांकि जब कुछ लोगों ने उसकी उम्र को लेकर सवाल किया तो हिल्दे ने उन्हें करारा जवाब भी दिया। वह कहती है ‘हां, मैं नौ साल की हूं, पर मैं पहले रिपोर्टर हूं। यदि मेरे से उम्र में बड़े लोग ये सोचते हैं कि मैं यह नहीं कर सकती तो यह उनकी गलतफहमी है, मैं ऐसा कर सकती हूं।

आप किसी बच्चे को लड़का और लड़की में न बांटे। दोनों एक समान हैं।’ हेल्दी केट अब अमेरिका में काफी लोकप्रिय हो गई है। दुनिया के कई बड़े अखबार उसके इंटरव्यू ले रहे हैं।

 

डैड का वार्डरोब भी है आपके काम का

कितनी बार ऐसा हुआ है जब आपने अपने डैड के वॉर्डरोब में तांक-झांक की है उनके सूट्स, घड़ियों और शेड्स के कलेक्शन को देखने के लिए। पुरानी चीजें अक्सर काम की होती हैं। आखिरकार लड़कियों को भी तो जेंटलमेन ही पसंद आते हैं तो जेंटलमैन और स्टाइलिश बनने के लिए आपके डैड का वार्डरोब काम की चीज साबित हो सकता है –

कफलिंक्स
कफलिंक्स ऐसी ही एक चीज़ है. फिर चाहे वो लाजवाब प्लैटिनम वाले हों या गोल्ड कफलिंक्स या फिर क्लासिक आयरन कट कफलिंक्स जो आपके वॉर्डरोब की शान बढ़ाएंगे। तो एक्सेसरीज़ में पर आपको सबसे पहले कफलिंक्स ही लेने चाहिए।

सनग्लासेज

Well dressed man hands with elegant suit and accessories

गोल्ड फ्रेम्स वाले राउंड सनग्लासेज़, दोनों ही आप पर बहुत अच्छे लगेंगे। ऐसी पुरानी चीज़ें बेहद क्लासी होती हैं और अगर आपको ऐसी की चीज़ मिले तो उसे छोड़े नहीं।Ray-Ban-Aviator-Sunglasses-For-Men1

एक क्लासिक घड़ी 

क्लासिक घड़ी एक आदमी की पहचान होती है और पुश्तों से परिवार का हिस्सा रही घड़ी से बेहतर भला क्या हो सकता है। हम सलाह देंगे कि आप ये घड़ी अपने डैड से ज़रूर मांगें। ये शायद उतनी पॉलिश्ड ना दिखे पर यही तो इसकी खासियत है। इस एक्सेसरी पर समय की छाप दिखने दें. अगर ये एक टैन ब्राउन लेदर वाली गोल्ड डायल घड़ी है तो इससे बेहतर कुछ नहीं।209636194afd194d9b93fff12dea3e22

टार्टन या प्लेड ब्लेज़र 
टार्टन या प्लेड ब्लेज़र से कई यादें जुड़ी होती हैं. और आपके पापा के वॉर्डरोब में भी ऐसा एक ब्लेज़र ज़रूर होगा, जिसे आप भी आजमा सकते हैं। आप इसे अपने वॉर्डरोब में बड़ी आसानी से शामिल कर सकते हैं, सिंपल सी शर्ट के साथ पहनकर या स्पंकी स्लोगन टी-शर्ट के साथ पहनकर।blazer-dress-shirt-dress-pants-brogues-bow-tie-large-767

 

बेहद काम के हैं ये किफायती होममेड बैैग्स

यह सही है कि दफ्तर हो या कोई पार्टी मंहगे बैग्स हम अधिकतर इस्तेमाल करते हैं मगर यह भी लगता है कि कुछ अलग तो होना चाहिए। कई बार लेदर बैग्स का वजन ज्यादा हो जाता है तो हम चाहकर भी आराम से नहीं रह पाते। अगर कुछ ऐसा हो कि वह जेब औऱमूड दोनों को हल्का रखे तो शायद इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। हम आपके लिए पेश कर रहे हैं आदि होममेड बैक्स के दिलचस्प औऱ रंगारंग कलेक्शन जिन्हें आप कहीं भी औऱ कैसे भी कैरी कर सकती हैं औऱ ये आपके बजट  में भी फिट बैठने वाले हैं।

आप किसी पार्टीी में जा रहे हैं तो  यह बैग आपको पसद आ सकता हैै।

 

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सहेलियों के साथ मस्ती करननी हो या शॉपिंग, ये प्रिंटेड बैग आपको कूल लुक देगा
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किसी भी इंडियय वेयर, कुरतीी या जींस के साथ यह बैैग बहुत फबैगा
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साम्प्रदायिक सद्भभाव का प्रतीक होगा इस्कॉन का चंद्रोदय मंदिर

आगरा/मथुरा _धर्म को आज तोड़ने का जरिया बनाया जा रहा है मगर धर्म जोड़ता है और जब यह जुड़ने और जोड़ने का काम करता है तो रचना अद्भुत होती है। ऐसी ही अद्भुत कृति बनने जा रही है इस्कॉन के चंद्रोदय मंदिर के रूप में। इस्कॉन सोसाइटी ने वृंदावन में दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया है।

– इसके लीड आर्किटेक्ट सिख धर्म से जुड़े जे. जे. सिंह हैं। जबकि अमेरिकन कंपनी के स्ट्रक्चरल आर्किटेक्ट मुस्लिम हैं। वहीं, लिफ्ट डिजाइन करने वाले ईसाई हैं।

– मंदिर की हाइट 210 मीटर होगी और इस बिल्डिंग में 70 तल बनाए जाएंगे। मुकेश अंबानी का एंटीलिया कुल 170 मीटर ऊंचा है और उसमें 27 फ्लोर शामिल हैं।

– चंद्रोदय मंदिर को पिरामिड का डेवलप्ड फॉर्म कहा जा रहा है।
– इसकी स्ट्रक्चरल डिजाइनिंग के लिए इस्कॉन सोसाइटी ने अमेरिका की स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग कंपनी थॉर्नटन टोमासेटी की सेवाएं ली हैं।
– इस मंदिर के कंस्ट्रक्शन का जिम्मा गुड़गांव की इनजीनियस स्टूडियो और नोएडा की क्विनटेसेंस डिजाइन स्टूडियो को सौंपा गया है।

– 2006 में इसकी परिकल्पना की गई और 8 साल की तैयारियों के बाद 2014 में नींव रखी गई।

– प्रोजेक्ट डायरेक्टर दास के मुताबिक, इसकी नींव लगभग कुतुब मीनार की ऊंचाई जितनी गहरी खोदी गई है।

– मंदिर की नींव 55 मीटर जमीन में गहरी होगी और इसका बेस 12 मीटर ऊंचा होगा। कुतुब मीनार की ऊंचाई 73 मीटर है। यानी कि कुतुब मीनार से कुल 6 मीटर कम गहरी।

– इसका निर्माण 2022 में पूरा होगा।