Friday, September 25, 2026
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दी भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज में कम्युनिक2016

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दी भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज के विद्यार्थियों के नेतृत्व में आयोजित हर वर्ष की तरह कम्युनिक 2016 का आयोजन18 नवंबर को किया गया। इसमें कोलकाता के12कॉलेजों ने भाग लिया जिनमें दी भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज, श्री शिक्षायतन कॉलेज, जे डी बिरला कॉलेज, आशुतोष कॉलेज,डिपार्टमेंट अॉफ लॉ, कलकत्ता युनिवर्सिटी, दी विवेकानंद कॉलेज, जादवपुर युनिवर्सिटी, दी गोयनका कॉलेज और दी आई बी एस प्रमुख रहे।

इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों में अपनी प्रतिभा को उभारने का अवसर देना है। दी भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज ने इस कार्यक्रम को एक मंच प्रदान किया जिसमें रचनात्मक लेखन, वादविवाद,पंख की कलम, ससंद से सड़क तक, भारतीय पार्लियामेंट का मॉडल जैसे विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों की टीमों ने दिनभर भाग लिया। यह आयोजन विद्यार्थियों को भविष्य में एक अच्छा नागरिक बनने का अवसर देता है।
भवानीपुर कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ.सुमन मुखर्जी ने उद्घाटन सत्र में दिए अपने भाषण में सभी कॉलेज के विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया एवं डीन प्रो दिलीप शाह, श्री चंपकलाल दोशी ने शुभकामनाएं दीं।कम्युनिक2016में जे डी बिआई, बीकॉम,जेडीबीआई बीबीए कॉलेज के विद्यार्थियों ने द्वितीय रैंक प्राप्त किया।जबकि भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज का तीसरा रैंक रह।
पुरस्कार वितरण समारोह में फिल्म जगत के प्रसिद्ध कलाकार जायेद खान ने प्रमुख अतिथि बतौर विजीत विद्यार्थियों को ट्रॉफी प्रदान की।अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं  भाषण से जायेद खान ने विद्यार्थियों को बहुत प्रभावित किया। इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज का सभागार छात्र छात्राओं से भरा हुआ था। विद्यार्थियों की सृजनात्मक ता और प्रतिभा को निखारने का यह सुनहरा अवसर है,खान ने कहा।
जेडबीआई के विद्यार्थियों ने कहा कि यह आयोजन बहुत ही सफल रहाऔर सीखने को मिला जो जीवन में यादगार भी बन जाता है। पुरस्कार समारोह में डीन प्रोफेसर दिलीप शाह, प्रोफेसर दिव्येश, प्रोफेसर विजय कोठारी एवं डॉ वसुंधरा मिश्र ,प्रोफेसर कौशिक सक्रिय रहे।कार्यक्रम का संयोजन करने में दृष्टि लखानी और स्वाति तिवारी टीम का संयुक्त योगदान रहा जो सराहनीय रहा।

 

फिल्में खुद अपने नायक बनाती हैं और खुद ही बदलते समय के साथ उसे तोड़ भी देती हैं

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शहर की सुपरिचित संस्था साहित्यिकी की ओर से भारतीय भाषा परिषद के सभाकक्ष में 23 नवंबर 2016 को  शाम पांच बजे “फिल्मों के आईने में सामाजिक नैतिकता” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अतिथियों का स्वागत साहित्यिकी की सचिव डा. किरण सिपानी ने किया। प्रमुख वक्ता कवि कथाकार श्री विजय गौड़ ने फिल्मों के दृश्यों के माध्यम से बड़े रोचक ढंग से अपनी बात रखते हुए कहा कि फिल्म अपने आप में एक यथार्थ है। फिल्म में कथा और नाटक दोनों है।फिल्में वैज्ञानिक सत्य को हमारे सामने रखती हैं। नैतिकता एक दृष्टिकोण है ..सामाजिक संरचना को देखने परखने का। एक जमाने में अमीर आदमी बुरा और गरीब अच्छा होता था। फिल्मकार दादा साहब फाल्के, वी शांताराम, राजकपूर, राज खोसला, शक्ति सामंत, सत्यजित रे आदि ने..आवारा, जागते रहो, बूट पालिस, सुजाता, बंदिनी, दो बीघा जमीन, नीचा नगर आदि फिल्मों में इसी तथ्य को उजागर किया गया है। मृणाल सेन की भुवन सोम ने इस गरीब आदमी को बिल्कल नये रूप में सामने रखा।।

विजय गौड़ ने कहा कि हमारी  फिल्में लगातार एक हीरो की तलाश करती हैं जो आकर हमें अपनी तमाम मुसीबतों से छुटकारा दिला दे। कभी यह हीरो यंग्री यंग मैन तो कभी पुलिस अधिकारी और आज कोर्ट के रूप में सामने आता है। फिल्मों में सामाजिक नैतिकता के स्वरूप को श्री गौड़ ने फिराक,  पिंक ,लक्ष्मी, पार्च्ड, अलीगढ़ और ईरानी फिल्म हाना मरवम लबार्फ के माध्यम से व्याख्यायित किया। उन्होंने कहा कि फिल्मों ने आधुनिकता की संगति में प्रगतिशीलता के नये मानक गढ़े।  फिल्में आर्थिक स्वतंत्रता के सवाल को यौनिक स्वतंत्रता तक ले जाती हैं । फिल्में खुद अपने नायक बनाती हैं और खुद ही बदलते समय के साथ उसे तोड़ती भी हैं। आज कोर्ट को नायक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

अध्यक्षता करते हुए श्रीमती विद्या भंडारी ने कहा कि फिल्में समाज का आईना होती हैं और जो समाज में घटित होता है उसे ही फिल्में दिखाती हैं।

इस संगोष्ठी में साहित्यिकी परिवार के सदस्यों के अलावा नगर के साहित्यिक अभिरुचि के बहुत से लोग ने शिरकत की। श्री नवल, विमल शर्मा, डा. आशुतोष, अल्पना नायक, इतु सिंह, मोनालिसा मुखर्जी , मीनाक्षी सांगेनेरिया, आदित्य गिरी, बालेश्वर राय आदि ने संगोष्ठी में भाग लिया।

कार्यक्रम का संयोजन और संचालन गीता दूबे और धन्यवाद ज्ञापन वाणीश्री बाजोरिया ने किया।

वुमंस एशिया कप: भारत ने पाक को हराकर छठी बार जीती ट्रॉफी, मिताली के 73 रन

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भारतीय महिला टीम ने पाकिस्तान को 17 रन से हराकर लगातारी छठी बार टी-20 वुमंस एशिया कप चैंपियनशिप जीत ली। भारत की तरफ से मिताली राज ने बेहतरीन बैटिंग करते हुए 85 बॉल्स पर 73 रन बनाए। उन्होंने सात चौके और एक छक्का लगाया। वो ओपन आईं और नॉट आउट रहीं। भारत ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया। 20 ओवर में पांच विकेट पर 121 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान की टीम इतने ही ओवरों में 104 रन ही बना सकी। उसने इस स्कोर के लिए भी 6 विकेट खो दिए। झूलन ने कहा- ये लम्हा बहुत खास…

– मैच के बाद झूलन गोस्वामी ने कहा- ये बहुत खास लम्हा है। मिताली ने बेहतरीन बैटिंग की। ये इसलिए भी खास हो जाता है क्योंकि विकेट अच्छा नहीं था लेकिन हमने छोटे से स्कोर को अच्छे तरीके से डिफेंड किया।

– पाकिस्तान की तरफ से लेफ्ट आर्म स्पिनर अनम अमीन दो विकेट लिए। सना मीर और सईद को एक-एक विकेट मिला। पाकिस्तान ने भी अच्छी शुरुआत की। कप्तान बिस्माह मारुफ ने 25 रन बनाए। लेकिन इसके बाद उनके विकेट लगातार गिरते रहे।

– बता दें कि ग्रुप स्टेज के मैच में भी भारत ने पाकिस्तान को हराया था। वुमंस एशिया कप के पिछले 32 मैचों में टीम इंडिया कोई मैच नहीं हारी है। ये लगातार दूसरी बार है जब पाकिस्तान टीम भारत से फाइनल में हारी है।

– चैंपियनशिप में भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और होस्ट थाईलैंड ने शिरकत की।

– यह 6th वुमंस एशिया कप था। और खास बात ये है कि हर बार इसे भारतीय महिला टीम ने ही जीता।
– एक वक्त पाकिस्तान का स्कोर 14वें ओवर में 3 विकेट पर 75 रन था। लेकिन अनुजा पाटिल ने पाकिस्तान की कप्तान को अपनी ही बॉल पर कैच कर मैच का रुख बदल दिया। इसके बाद प्रीति बोस और एकता बिष्ट ने एक-एक विकेट लेकर मैच भारत के पक्ष में कर दिया। झूलन ने 19 रन देकर एक विकेट लिया।
– मिताली ने 73 जबकि झूलन गोस्वामी ने 17 रन बनाए। इसके अलावा टीम की बैटिंग लाइन अप कुछ खास नहीं कर सकी।

–जीत के बाद वीरेंद्र सहवाग और बीसीसीआई चीफ अनुराग ठाकुर ने टीम को जीत पर बधाई दी।

 

हर्बल चाय बनाते वक्‍त ना करें ये गलतियां

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हालाँकि हर्बल टी बनाते समय हम में से अधिकाँश लोग गलतियां करते हैं और इनके बारे में हम अभी भी अनजान हैं। हमारी इन गलतियों के कारण हम इनसे अधिकतम स्वास्थ्य लाभ नहीं ले पाते। इसके अलावा बनाने की विधि गलत होने के कारण इसके कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। हम आपको उन गलतियों के बारे में बताएँगे जिन्हें हर्बल टी बनाते समय नहीं करना चाहिए। जब हर्बल टी को सही तरीके से बनाकर पीया जाता है तभी हमें इसका पूरा फायदा होता है। हर्बल टी में विटामिन्स और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विश्व भर में किये गए अध्ययनों और खोजों में विभिन्न हर्बल टी से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताया गया है। यहाँ कुछ उन गलतियों के बारे में बताया गया है जो अक्सर हम हर्बल टी बनाते समय करते हैं तो आप ऐसी गलतियाँ न करें –

दूध न मिलाएं: जब वज़न घटाने के लिए हर्बल टी बनाई जाती है और उसमें दूध मिलाया जाता है तो यह प्रभावकारी नहीं होती। दूध में उपस्थित पोषक तत्वों के कारण वज़न कम करने में बाधा आती है। इसके अलावा दूध और तुलसी का प्रयोग एक साथ नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं

कभी भी शक्कर न मिलाएं: हर्बल टी में शक्कर मिलाने से उसमें कैलोरीज़ बहुत बढ़ जाती हैं। इस कारण हर्बल टी पीने का उद्देश्य पूरी तरह ख़तम हो जाता है। अत: इसमें कभी भी शक्कर न मिलाएं बल्कि स्वाद के लिए आप शहद और गुड मिला सकते हैं।

इसे फिर से गर्म न करें: हर्बल टी को पुन: गर्म करने से उसमें उपस्थित प्राकृतिक हर्बल गुण ख़त्म हो जाते हैं। अच्छा होगा कि आप ताज़ी बनी हुई चाय पीयें तभी इसे पीने का उद्देश्य पूरा होता है।

इसे हमेशा न पीते रहें: हर्बल टी इसलिए नहीं है कि जब भी आपका दिल करे आप इसे पी लें। इसके सेवन का एक निश्चित समय होता है। उदाहरण के लिए तुलसी की चाय सुबह पीने से पाचन अच्छे से होता है। किसी भी हर्बल टी का उपयोग करने से पहले अच्छा होगा कि आप डॉक्टर की सलाह ले लें।

चाय बनाते समय कभी ढक्कन न लगायें: हरबल टी बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि ढक्कन खुला हुआ हो और पानी भाप बनकर उड़ रहा हो। आयुर्वेद के अनुसार ऐसा करने से हर्बल टी से स्वास्थ्य को मिलने वाले लाभ बढ़ जाते हैं।

आप योगा, रस्सा कूदी, डांस या जंपिग कर सकते हैं. या फिर आप कोई स्पोर्ट्स भी ज्वॉइन कर सकते हैं. इससे आपकी कैलारी बर्न होगी और आप आसानी से वजन बढ़ने से रोक सकते हैं.

वर्कआउट करते रहें- बेशक विंटर्स में मौसम बहुत ठंडा रहता है, आपका रजाई में से निकलने का मन नहीं करता, आप लेजी फील करते हैं लेकिन इन सबके बावजूद आपको वजन भी कम करना है. तो आप एकदम सुबह-सुबह उठने के बजाय शाम में एक्सरसाइज कीजिए. जी हां, सुबह के बजाय शाम को भी एक्सरसाइज करने का आपको फायदा होगा. इतना ही नहीं, आप बाहर एक्सरसाइज नहीं करना चाहते तो घर में ही कर लीजिए. घर पर आप योगा, रस्सा कूदी, डांस या जंपिग कर सकते हैं. या फिर आप कोई स्पोर्ट्स भी ज्वॉइन कर सकते हैं. इससे आपकी कैलारी बर्न होगी और आप आसानी से वजन बढ़ने से रोक सकते हैं.

 

सुबाशिनी संकरन – देश की पहली महिला आईपीएस, जिनके जिम्मे है मुख्यमंत्री की सुरक्षा!

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सुबाशिनी संकरन देश की पहली महिली IPS अधिकारी हैं, जिन्हें आजाद भारत में किसी मुख्यमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा दिया गया है। इस वर्ष के जुलाई महीने में सुबाशिनी ने यह जिम्मेदारी संभाली।

सुबाशिनी को असम के मुख्यमंत्री, श्री सर्बनान्दा सोनोवाल की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है।

सुबाशिनी ने बताया, “शुरुआत में तो लोगो के लिए ये बिलकुल नयी बात थी। पर धीरे धीरे लोग इस बात के आदि हो गए कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी एक महिला पर है।”

किसी भी मुख्यमंत्री की सुरक्षा का काम बेहद पेचीदा होता है। इसमें श्रम के साथ-साथ तीव्र बुद्धि की भी आव्यशकता होती है। सुबाशिनी को भी अपने काम में हमेशा सतर्क रहना होता है। दिन के करीब 18 घंटे वे अपने काम में व्यस्त होती है। मुख्यमंत्री के दौरों के दौरान उनके पुरे सफ़र के हर पल की जानकारी रखना, अन्य सुरक्षा कर्मियों से हर वक़्त संपर्क में रहना और उन्हें समय समय पर उपयुक्त हिदायतें देना; ये सब उनके काम का हिस्सा है।

तमिलनाडु के तंजावुर शहर की रहने वाली सुबाशिनी एक मध्यम  वर्गीय परिवार से है। इससे पहले उनके परिवार से किसी ने भी इस क्षेत्र में कदम नहीं रखा था। सुबाशिनी के पिता एक निजी फर्म में काम करते हैं और उनकी माँ एक गृहणी है। उनके दादा एम. राजगोपालन ने 1950 में ‘मोटर इंडिया’ और ‘टेक्सटाइल मैगजीन’ के नाम से दो पत्रिकाएं शुरू की थीं, जो आज भी प्रकाशित होती हैं। 1980 में सुबाशिनी के घरवाले मुबंई आ गए थे और फिर उनकी पढाई मुंबई में ही हुई। उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी, दिल्ली से अपने मास्टर्स और एमफिल की पढाई पूरी की। जेएनयू में रहकर ही उन्होंने IPS की तैयारी भी की।

हैदराबाद के सरदार वल्लभभाई पुलिस अकैडमी में IPS के प्रशिक्षण के बाद सुबाशिनी की पोस्टिंग उनकी इच्छा के मुताबिक़ असम में कर दी गयी।

असम बेहद चुनौती भरा राज्य है। क़ानूनी गैरव्यवस्था, अपराधियों के साथ जवाबी कार्रवाई, सांप्रदायिक तनाव, स्मगलिंग, जानवरों का अवैध शिकार और ड्रग्स; असम इन सभी गंभीर मसलो से जूझ रहा है।

ऐसी विलक्षण परिस्थितियों में, इतने खतरनाक परिवेश में मुख्यमंत्री की हर प्रकार से सुरक्षा करना बहुत जोखिम भरा काम है। पर सुबाशिनी इससे पहले गुवाहाटी के अजारा पुलिस चौकी में असिस्टेंट सुपरिंटेन्डेंट ऑफ़ पुलिस और उसके बाद बिस्वनाथ जिले और सिलचर तथा तेजपुर जिले में एडिशनल सुपरिंटेन्डेंट के तौर पर काम कर चुकी है। उनके इन अनुभवों की वजह से उन्हें अपने वर्तमान काम में काफी आसानी हो रही है।

इसके अलावा चार साल से असम में रहकर उन्होंने असामी भाषा भी बोलनी सीख ली है, जो उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ है।

यदि आप उनसे उनके अनुभवों का निचोड़ पूछे तो वे कहती है, “जब ज़रूरत हो तभी बोलो, और जब ज़रूरत हो सख्त कार्यवाही करो… हाँ पर कानून में रहते हुए।”

अपने अदम्य साहस और जी तोड़ मेहनत से यहाँ तक पहुंची सुबाशिनी देश की सभी लड़कियों के लिए एक मिसाल है!

 

पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर ने कहा, हम मारति जितने ही भारतीय हैं

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चीन के उल्लेखनीय स्वामित्व को लेकर ओलाचना झेल रही पेटीएम के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी विजय शेखर शर्मा ने जोर देकर कहा कि ई-कामर्स तथा भुगतान प्लेटफार्म उतनी ही भारतीय है जितनी मारति है। हमें भारत की कहानी का प्रतिनिधित्व करने को लेकर गर्व है।

शर्मा ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘हम मारति जितने ही भारतीय हैं। हम प्रत्येक रूप में भारतीय हैं।
कभी सरकार के नियंत्रण वाली मारति की बहुलांश हिस्सेदारी इस जापानी कार कंपनी सुजुकी मोटर कार्प के पास है। सुजुकी के पास मारति की 56.21 प्रतिशत हिस्सेदारी है और यह इसकी एकमात्र प्रवर्तक है।
पेटीएम ने हाल में सरकार के नोटबंदी के कदम की सराहना की है। कंपनी ने इस बारे में अखबारांे में बड़े-बड़े विज्ञापन छापे हैं जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर है। पेटीएम कही सबसे बड़ी शेयरधारक चीन की कंपनी अलीबाबा है। अलीबाबा दुनिया की सबसे बड़ी ई-कामर्स कंपनी है।
शर्मा ने कहा कि पेटीएम दुनिया के सामने भारतीय कंपनी के रूप में जाती है और जो भारत का ‘गौरव’ है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए हमारे ग्राहक, देश का कानून और नियामक महत्वपूर्ण हैं। अलीबाबा समूह और उसकी सहयोगी एंट फाइनेंशियल ने पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस में पिछले साल 68 करोड़ डालर का निवेश किया था। इस तरह देश की सबसे बड़ी मोबाइल वॉलेट आपरेटर में उसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो गई है। हालिया रपट में कहा गया है कि चीन की निवेशक पेटीएम में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है।

 

परिणय सूत्र में बंधे युवराज सिंह और हेजल कीच

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क्रिकेटर युवराज सिंह और मॉडल से अभिनेत्री बनी हेजल कीच आज यहां सरहिंद – चंडीगढ़ मार्ग स्थित दुफेरा गांव में बाबा राम सिंह गंदुआं वाले के डेरे पर परिणय सूत्र में बंध गये। आनंद कारज समारोह के बाद इस जोड़ी ने डेरा प्रमुख बाबा राम सिंह से आशीर्वाद लिया। युवराज और हेजल उस स्थल पर परिणय सूत्र में बंधे जिसका चयन इस क्रिकेटर की मां शबनम सिंह ने किया था। शादी में किसी तरह की तड़क भड़क नहीं थी और दोनों के करीबी मित्रों और परिजनों ने इसमें हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान डेरे के करीब सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे। हेजल आज दूसरी बार डेरा पहुंची। इससे पहले वह सगाई के बाद युवराज के साथ यहां आयी थी। नवविवाहित जोड़े ने सुनहरी मैरून रंग की पोशाक पहन रखी थी। दुल्हन ने मैरून रंग का लहंगा पहना था जिस पर सुनहरी कढ़ाई थी। युवराज मखमल की शेरवानी में खूब जंच रहे थे। उन्होंने मैरून रंग की पगड़ी और मोजड़ी पहनी थी। डेरे में शादी सिख धर्म के रीति रिवाजों से संपन्न हुई। युवराज के पिता और पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह डेरे में अपने बेटे के विवाह समारोह में शामिल नहीं हुए। योगराज ने पहले ही कह दिया था कि वह शादी में शरीक नहीं होंगे क्योंकि वह डेरा प्रमुख द्वारा शादी करवाये जाने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा था वह ईश्वर में विश्वास करते हैं, धार्मिक गुरू में नहीं

 

पुश्तैनी गहने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा

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सरकार ने यह साफ़ किया है कि पुश्तैनी गहनों या फिर सोने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

आयकर क़ानून में संशोधन बिल पेश होने के बाद इस तरह की अफ़वाहें थीं कि पुश्तैनी सोने पर टैक्स लगाया जा सकता है।

आज वित्त मंत्रालय ने बयान जारी कर साफ़ किया है कि पुश्तैनी गहनों या घोषित आय से ख़रीदे गए सोने और गहने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

वित्त मंत्रालय ने ये भी कहा है कि हर विवाहित महिला को 500 ग्राम, अविवाहित महिला को 250 ग्राम और पुरुषों को 100 ग्राम सोना रखने की छूट है।

इस मात्रा में सोना या फिर गहना मिलने पर उसे ज़ब्त नहीं किया जाएगा।

वित्त मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को कहा गया कि आयकर कानून संशोधन बिल 2016 को लेकर कई तरह के अफ़वाह फैलाए जा रहे हैं जो बिल्कुल आधारहीन हैं।

सरकार का कहना है कि सिर्फ उन निवेशों पर टैक्स लगाने के लिए प्रावधान है, जिनका ब्यौरा नहीं दिया गया है. ऐसी संपत्तियों पर टैक्स लगाने का प्रावधान 1960 से ही लागू है।

इस तरह के निवेशों पर मौजूदा टैक्स की दर 30 फ़ीसदी से बढ़ा कर 60 फ़ीसदी कर दी गई है साथ ही इस पर 25 फ़ीसदी सरचार्ज और सेस भी लगेगा।

वित्त मंत्री ने लोकसभा में आयकर संशोधन बिल पेश किया जहां से इसे पारित कर राज्यसभा में भेजा गया है।

 

एक ऐसा बाज़ार जो आधार कार्ड से चलता है

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कहते है यदि आप सूझ बुझ से काम ले, तो ऐसी कोई परेशानी नहीं है जिसका हल न निकाला जा सके और ऐसी कोई मुसीबत नहीं जिससे आप बाहर न आ सके। 500 और 1000 के नोट बंद होने के दस दिनों बाद भी लोगो की परेशानी दूर होती नज़र नहीं आ रही है। लोगों को रोज़मर्रा के ज़रूरत का सामान खरीदने में भी दिक्कत हो रही है। पर वहीँ हैदराबाद के कूकटपल्ली रायतू बाजार में माहौल कुछ और ही है। यहाँ ने ग्राहकों शुक्रवार को करीब 15000 की सब्जियां खरीदी है।

पर इस बाज़ार में खरीदारी के लिए लोगों को न पुराने नोट बदलने की चिंता करनी पड़ी और न ही नए नोट न होने की वजह से परेशान होना पडा क्यूंकि यहाँ सब्जियां नोटों से नहीं आधार कार्ड से खरीदी गयी।

तेलंगाना स्टेट मार्केटिंग डिपार्टमेंट की पहल के तहत शुक्रवार को इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट फाइनैंशल कॉरपोरेशन के काउंटर बनाए गए, जहां करंसी की जगह लोगों को टोकन मुहैया करवाए गए। जिन ग्राहको का बैंक खाता उनके आधार कार्ड नंबर से जुड़ा हुआ है, उन्हें  5, 10 और 20 रुपए के टोकन दिए गए। ग्राहकों ने जितने भी रुपयों की सब्जी ली उतने पैसे बाद में सीधे उन लोगों के बैंक अकाउंट से काट लिया गया। और जिन टोकनों का इस्तेमाल नहीं हो सका, उन्हें कैश के रूप में लोगों को दे दिया गया।

इस बेहतरीन सुविधा का फायदा सिर्फ ग्राहकों को ही नहीं बल्कि किसानो और विक्रेताओं को भी हुआ।

जिन किसानों या सब्जी विक्रेताओं ने टोकन के जरिए पेमेंट लिया, उनके खाते में रकम भी भेज दी गई। यदि किसी के पास बैंक अकाउंट नहीं था, तो इन आईडीएफसी काउंटरों ने अकाउंट खुलवाने का भी काम किया।

तेलंगाना के सिंचाई मंत्री टी. हरीश राव ने बताया, “इस सुविधा का इस्तेमाल शुक्रवार को सुबह 9 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक 95 लोगों ने किया। यदि सबकुछ ठीक रहा तो शनिवार को भी यह व्यवस्था जारी रहेगी। पहले चरण में इसे शहर सभी रायतु बाजारों में लागू करेंगे और दूसरे चरण में इसे अन्य जगहों पर भी लागू किया जाएगा।”

तेलुगु भाषा में रायतु का मतलब होता है किसान। तेलंगाना में काफी समय पहले रायतु बाज़ार की शुरुआत की गयी जहाँ किसान अपना माल सीधा ग्राहकों को बेचते है। किसी भी दुसरे सब्जी बाज़ार के मुकाबले मध्यस्तो के न होने की वजह से इस बाज़ार में सब्जियां काफी कम कीमत पर मिलती है और किसानो को भी बहुत फायदा होता है। नोटबंदी के चलते जिस तरह इस बाज़ार को तुरंत डिजिटल बना दिया गया, उससे ग्राहक और किसान दोनों को और भी लाभ होंगे।

 

जाड़े के मौसम की दो कविताएं

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जाड़े की बहारें

nazeerakbarabadi

 नज़ीर अकबराबादी

 

जब माह अगहन का ढलता हो, तब देख बहारे जाड़े की।
और हँस हँस पूस संभलता हो, तब देख बहारे जाड़े की।
दिन जल्दी जल्दी चलता हो, तब देख बहारे जाड़े की।
पाला भी बर्फ़ पिघलता हो, तब देख बहारे जाड़े की।
चिल्ला ख़म ठोंक उछलता हो, तब देख बहारें जाड़े की॥1॥

तन ठोकर मार पछाड़ा हो, दिल से होती हो कुश्ती सी।
थर-थर का ज़ोर अखाड़ा हो, बजती हो सबकी बत्तीसी।
हो शोर पफू हू-हू-हू का, और धूम हो सी-सी-सी-सी की।
कल्ले पे कल्ला[1] लग लग कर, चलती हो मुंह में चक्की सी।
हर दांत चने से दलता हो, तब देख बहारें जाड़े की॥2॥

हर एक मकां में सर्दी ने, आ बांध दिया हो यह चक्कर।
जो हर दम कप-कप होती हो, हर आन कड़ाकड़ और थर-थर।
पैठी हो सर्दी रग रग में, और बर्फ़ पिघलता हो पत्थर।
झड़ बांध महावट पड़ती हो, और तिस पर लहरें ले लेकर।
सन्नाटा वायु का चलता हो, तब देख बहारें जाड़े की॥3॥

तरकीब बनी हो मजलिस की, और काफ़िर नाचने वाले हों।
मुंह उनके चांद के टुकड़े हों, तन उनके रुई के गाले हों।
पोशाकें नाजुक रंगों की और ओढ़े शाल दुशाले हों।
कुछ नाच और रंग की धूमें हो, कुछ ऐश में हम मतवाले हों।
प्याले पर प्याला चलता हो, तब देख बहारें जाड़े की॥4॥

हर चार तरफ़ से सर्दी हो और सहन खुला हो कोठे का।
और तन में नीमा शबनम का हो जिसमें ख़स का इत्र लगा।
छिड़काव हुआ हो पानी का और खू़ब पलंग भी हो भीगा।
हाथों में प्याला शर्बत का हो आगे एक फ़र्राश खड़ा।
फ़र्राश भी पंखा झलता हो तब देख बहारें जाड़े की॥5॥

जब ऐसी सर्दी हो ऐ दिल! तब ज़ोर मजे़ की घातें हों।
कुछ नर्म बिछौने मख़मल के कुछ ऐश की लम्बी रातें हों।
महबूब गले से लिपटा हो, और कोहनी, चुटकी लाते हों।
कुछ बोसे मिलते जाते हों कुछ मीठी-मीठी बातें हों।
दिल ऐशो तरब में पलता हो तब देख बहारें जाड़े की॥6॥

हो फ़र्श बिछा गालीचों का और पर्दे छूटे हों आकर।
एक गर्म अंगीठी जलती हो और शमा हो रौशन तिस पर।
वह दिलबर शोख़ परी चंचल, है धूम मची जिसकी घर-घर।
रेशम की नर्म निहाली पर सौ नाज़ो अदा से हंस-हंस कर।
पहलू के बीच मचलता हो तब देख बहारें जाड़े की॥7॥

हर एक मकां हो खि़ल्वत का और ऐश की सब तैयारी हो।
वह जान कि जिस पर जी गश हो सौ नाज़ से आ झनकारी हो।
दिल देख ”नज़ीर“ उसकी छवि को, हर आन सदा पर बारी हो।
सब ऐश मुहैया हों आकर जिस जिस अरमान की बारी हो।
जब सब अरमान निकलता हो, तब देख बहारें जाड़े की॥8॥

Indians warm themselves around a bonfire in Ahmadabad, India, Tuesday, Dec. 15, 2015. Cold wave swept in several parts of north India as temperatures dipped along with another spell of snowfall at higher regions. (AP Photo/Ajit Solanki)

जाड़े की साँझ

makhanlal

माखनलाल चतुर्वेदी

 

किरनों की शाला बन्द हो गई चुप-चपु
अपने घर को चल पड़ी सहस्त्रों हँस-हँस
उ ण्ड खेलतीं घुल-मिल होड़ा-होड़ी
रोके रंगों वाली छबियाँ? किसका बस!

ये नटखट फिर से सुबह-सुबह आवेंगी
पंखनियाँ स्वागत-गीत कि जब गावेंगी।
दूबों के आँसू टपक उठेंगे ऐसे
हों हर्ष वायु से बेक़ाबू- से जैसे।

कलियाँ हँस देंगी
फूलों के स्वर होगा
आगन्तुक-दल की आँखों का घर होगा,
ऊँचे उठना कलिकाओं का वर होगा
नीचे गिरना फूलों का ईश्वर होगा।
शाला चमकेगी फिर ब्रह्माण्ड-भवन की
खेलेंगी आँख-मिचौनी नटखट मन की।

इनके रूपों में नया रंग-सा होगा
सोई दुनिया का स्वपन दंग-सा होगा
यह सन्ध्या है, पक्षी चुप्पी साधेंगे
किरणों की शाला बन्द हो गई- चुप-चुप।