Monday, April 13, 2026
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5 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ महिला न्यायाधीश करेंगी सुनवाई

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में पांच सितम्बर को एकबार फिर से इतिहास दोहराया जाएगा जब न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पूरी तरह महिला न्यायाधीशों वाली पीठ किसी मामले पर सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में पहली बार 2013 में पूरी तरह महिलाओं वाली पीठ देखने को मिली थी। उस समय एक मामले पर सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा और न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की पीठ बैठी थी। साल 2011 में न्यायमूर्ति देसाई को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किए जाने के बाद शीर्ष अदालत में दो महिला न्यायाधीश देखने को मिलीं थीं। न्यायमूर्ति फातिमा बीवी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली पहली महिला न्यायाधीश थीं। उनके बाद सुजाता मनोहर, रूमा पाल, ज्ञान सुधा मिश्रा, रंजना प्रकाश देसाई, आर भानुमति, इंदु मल्होत्रा और फिर हाल में इंदिरा बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त हुईं। इनमें से न्यायमूर्ति बीवी, न्यायमूर्ति मनोहर और न्यायमूर्ति पाल उच्चतम न्यायालय में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान एकमात्र महिला न्यायाधीश रहीं। न्यायमूर्ति सुजाता मनोहर ने बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से अपने करियर की शुरुआत की थी। वह बाद में केरल उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश बनीं। इसके बाद उन्हें उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जहां उनका कार्यकाल आठ नवंबर 1994 से 27 अगस्त 1999 तक रहा।
अभी तीन महिला न्यायधीश
अगस्त में न्यायमूर्ति बनर्जी को शपथ दिलाए जाने के साथ ही उच्चतम न्यायालय के इतिहास में पहली बार तीन महिला न्यायाधीश हैं। स्वतंत्रता के बाद से शीर्ष अदालत में वह आठवीं महिला न्यायाधीश हैं। तीन वर्तमान महिला न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति भानुमति सबसे वरिष्ठ हैं। उन्हें 13 अगस्त 2014 को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
बीवी फातिमा पहली महिला जज थीं
न्यायमूर्ति फातिमा बीवी फातिमा सुप्रीम कोर्ट में 1989 में जज बनीं थीं। उच्चतम न्यायालय के 1950 में गठन के 39 वर्षों के बाद 1989 में किसी महिला को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश बनाया गया। केरल उच्च न्यायालय के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें शीर्ष अदालत में नियुक्त किया गया था।

जस्टिस रंजन गोगोई होंगे सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश

नयी दिल्ली : जस्टिस रंजन गोगोई (63) सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) होंगे। वे 2 अक्टूबर को रिटायर हो रहे मौजूदा सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा की जगह लेंगे। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, शनिवार को सीजेआई दफ्तर की ओर से कानून मंत्रालय को जस्टिस गोगोई के नाम की सिफारिश की गई। माना जा रहा है जस्टिस गोगोई को 3 अक्टूबर को सीजेआई पद की शपथ दिलाई जा सकती है। वे 17 नवंबर 2019 को रिटायर होंगे। जस्टिस गोगोई जनवरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चार जजों में शामिल थे। पिछले दिनों सीजेआई की नियुक्ति के लिए कानून मंत्रालय ने सीजेआई दीपक मिश्रा को चिट्ठी भेजी थी, जिसमें उनसे उत्तराधिकारी का नाम पूछा गया। शीर्ष अदालत की परंपरा के मुताबिक, रिटायरमेंट से एक महीने पहले सीजेआई को सबसे वरिष्ठ जज का नाम सरकार को भेजना होता है। जस्टिस गोगोई फिलहाल जजों के वरिष्ठता क्रम में सबसे आगे हैं।
2012 में सुप्रीम कोर्ट में जज बने : जस्टिस गोगोई 28 फरवरी 2001 को गुवाहाटी हाईकोर्ट में जज बने थे। इसके बाद 12 फरवरी 2011 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए। बाद में उन्हें अप्रैल 2012 में सुप्रीम कोर्ट में जज बनाया गया। यहां वे असम के एनआरसी, सरकारी विज्ञापनों के लिए निर्देश, लोकपाल-लोकायुक्तों की नियुक्ति जैसे अहम मुद्दों की सुनवाई से जुड़े रहे हैं। असम के सीएम थे जस्टिस गोगोई के पिता : जस्टिस रंजन गोगोई असम के रहने वाले हैं। उनके पिता केसी गोगोई 1982 में डिब्रूगढ़ से कांग्रेस के विधायक थे। तब असम में राष्ट्रपति शासन के बाद वे दो महीने तक असम के मुख्यमंत्री रहे थे।

अभिनेता हमेशा अकेला होता है : शाहिद कपूर

मुम्बई : अभिनेता शाहिद कपूर ने कहा कि लोकप्रियता, ग्लैमर और प्रशंसा जैसी बातें सपनों में अच्छी लगती हैं लेकिन अभिनेता हमेशा अकेला होता है जो भावनाओं को व्यक्त करने की तलाश में रहता है। 37 वर्षीय अभिनेता ने कहा कि अकेले होने पर अपनी भावनात्मकता से खुद को मजबूत बनाते हैं जो एक कलाकार के तौर पर उन्हें समृद्ध करती है। शाहिद ने एक साक्षात्कार में कहा कि ‘‘बतौर कलाकार आप हमेशा अकेले होते हैं। आप हर वक्त सुर्खियों में रहते हैं, और लोग उसी तौर पर देखते हैं। मेरा मानना है कि जब भी कुछ भावनात्मक होता है, तो वह प्रदर्शन में दिखाई देता है।’ उन्होंने अकेलेपन के अहसास को अपने दिल के बेहद करीब बताया और कहा कि इस वक्त अपने प्रति बेहद ईमानदार होता हूं और मुमकिन है कि अंदर से बदल रहा होता हूं। उन्होंने कहा कि अभिनेता क्या करता है, क्या कहता है। इसलिए अंदर जितना होता है उतना ही बाहर दिखाना होता है। उन्होंने इन सब को संभालना सीखा है और उनका मानना है कि लंबे कॅरियर के लिए यह बेहद जरूरी होता है। अन्यथा यह एक बेहद अजीब काम है। आप लगातार यहां ऊपर नीचे होते हैं। इसलिए अच्छी स्थान की तलाश में रहते हैं। शाहिद ने कहा कि यदि बेहतर करना चाहते हैं तो बतौर कलाकार आपका ‘स्वार्थी’ होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब अपने कॅरियर को देखता हूं तो महसूस करता हूं कि मैंने कई बेहद खराब फिल्में की हैं और कई बेहद अच्छी फिल्में की हैं।’’

लॉ कमिशन की सलाह, लड़कों के लिए भी शादी की उम्र 18 वर्ष हो

नयी दिल्ली : विधि आयोग (Law commission) ने सुझाव दिया है कि महिलाओं और पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र समान होनी चाहिए। आयोग ने कहा कि वयस्कों के बीच शादी की अलग-अलग उम्र की व्यवस्था को खत्म किया जाना चाहिए। दरअसल, विभिन्न कानूनों के तहत, शादी के लिए महिलाओं और पुरुषों की शादी की कानूनी उम्र 18 साल और 21 साल है। परिवार कानून में सुधार पर अपने परामर्श पत्र में आयोग ने कहा, अगर बालिग होने की सार्वभौमिक उम्र को मान्यता है जो सभी नागरिकों को अपनी सरकारें चुनने का अधिकार देती है तो निश्चित रूप से, उन्हें अपना जीवनसाथी चुनने में सक्षम समझा जाना चाहिए। बालिग होने की उम्र (18 साल) को भारतीय बालिग अधिनियम 1875 के तहत महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए शादी की कानूनी उम्र के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। पत्र में कहा गया, पति और पत्नी के लिए उम्र में अंतर का कोई कानूनी आधार नहीं है क्योंकि शादी कर रहे दोनों लोग हर तरह से बराबर हैं और उनकी साझेदारी बराबर वालों के बीच वाली होनी चाहिए। आयोग ने नजरिया साझा किया कि महिलाओं और पुरुषों की विवाह उम्र में अंतर बनाए रखना इस दकियानूसी बात में योगदान देता है कि पत्नियां अपने पति से छोटी होनी चाहिए।

बीमार बेटा नहीं आ सका तो बहू ने सास को दी मुखाग्नि

वजीरगंज (गोंडा) :  एक पुत्र वधू ने बेटी ही नहीं बेटे होने का भी फर्ज निभाने की मिसाल पेश की है। मुंबई से बीमार बेटे के न आ सकने की वजह से बहू ने न केवल सास के अंतिम संस्कार की तैयारी की बल्कि मुखाग्नि भी दी।
वजीरगंज के बभनी गांव की रहने वाली वृद्ध कलावती की रविवार बीमारी के दौरान मृत्यु हो गई थी। बेटे को खबर दी गई लेकिन बीमारी की वजह से वह नहीं आ सका। तब तीन दिन इंतजार करने के बाद गुरुवार को बहू गुड़िया ने सास का पूरा विधि विधान से अंतिम संस्कार किया।
गांव वालों ने बताया कि घर में बहू अकेली थी। मृतका का पुत्र राजितराम मुंबई में रहकर मेहनत मजदूरी करता है। पट्टीदारी के अन्य परिवारजन मुखाग्नि देने को तैयार नहीं थे। तीन दिनों तक शव बर्फ के सहारे सुरक्षित रखा गया। तब गुरूवार को गुड़िया ने सिर्फ बेटे के हाथों मुखाग्नि देने की परंपराओं को तोड़ते हुए एक नई पहल की अपनी सास को मुखाग्नि देने की रस्म निभाई। गांव के चंदन, बजरंगी और राम लायक का कहना है कि कि पुत्र वधू गुड़िया ने अपनी सास कलावती की बीमारी की हालत में भी में पुत्र-पुत्रियों से बढ़कर सेवा की थी।
प्रधान ने दी जानकारी :
बभनी ग्राम सभा प्रधान प्रतिनिधि अयोध्या चौहान ने बताया कि मृतका कलावती के एक ही पुत्र था जो मुम्बई में मजदूरी करता था। उसके बेटे की तबीयत काफी खराब है। उसका मुम्बई के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। हालत काफी नाजुक होने के कारण वह अपने घर मां के अंतिम संस्कार के लिए नहीं आ सका। जब परिवार के अन्य लोगों ने मुखाग्नि देने से इंकार किया तो बहू गुड़िया आगे आई। उसकी भावना को देखते हुए गांव वालों ने भी उसके फैसले को स्वीकार किया। मृत सास के पति की काफी पहले मौत हो चुकी है।

सरकार ने जैव-ईंधन के निर्यात पर लगाया अंकुश

नयी दिल्ली : सरकार ने जैव-ईंधनों के आयात पर शर्तें लगाने के कुछ ही दिनों के भीतर इनके निर्यात पर भी आज कुछ अंकुश लगा दिए। जैव-ईंधन के आयात-निर्यात दोनों के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है। जैव ईंधनों में इथाइल अल्कोहल, पेट्रोलियम तेल और बिटुमिनस खनिजों, जैव-डीजल तथा मिश्रणों से प्राप्त तेल शामिल हैं। इससे पहले इनके निर्यात पर कोई शर्तें नहीं थीं। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘जैव ईंधनों की निर्यात नीति जैव-ईंधनों की राष्ट्रीय नीति 2018 के अनुसार शर्तमुक्त की जगह संशोधित कर शर्तों के तहत कर दी गयी है।’’महानिदेशालय ने इथाइल अल्कोहल एवं अन्य गैर-प्राकृतिक स्पिरिट, जैव-डीजल, पेट्रोलियम तेल तथा बिटुमिनस खनिजों से प्राप्त तेलों समेत जैव-ईंधनों के आयात पर पिछले सप्ताह शर्तें लगा दी थीं।

जनगणना 2021 : आजाद भारत में पहली बार जुटाए जाएंगे ओबीसी के आंकड़े

नयी दिल्ली : साल 2021 की जनगणना में आजाद भारत में पहली बार अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) से संबंधित आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे। यह कदम 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में 1931 की जनगणना में आखिरी बार एकत्रित किए गए जातिगत आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई मंडल आयोग की सिफारिशों पर तत्त्कालीन वी पी सिंह सरकार ने ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 2021 की जनगणना के लिए तैयारियों की समीक्षा की जिसके बाद ओबीसी आंकड़े एकत्रित करने के फैसले का खुलासा किया गया। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, पहली बार ओबीसी से संबंधित आंकड़े भी इकट्ठा करने का विचार किया गया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन की एक शाखा राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) ने 2006 में देश की आबादी पर नमूना सर्वेक्षण रिपोर्ट की घोषणा की और कहा कि देश में ओबीसी आबादी कुल आबादी की करीब 41 फीसदी है।
एनएसएसओ ने ग्रामीण इलाकों में 79,306 परिवारों और शहरी इलाकों में 45,374 परिवारों की गणना की। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 2019 के लोकसभा चुनावों में 2021 जनगणना में ओबीसी आंकड़े एकत्रित करने के फैसले का उल्लेख कर सकती है क्योंकि कई ओबीसी संगठन लंबे समय से इसके लिए मांग कर रहे हैं। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ने 2011 में सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना कराई थी और मौजूदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने तीन जुलाई 2015 में इसके नतीजों का ऐलान किया।
इसके बाद 28 जुलाई 2015 को सरकार ने कहा था कि जाति जनगणना के संबंध में कुल 8.19 करोड़ गलतियां पाई गई हैं जिनमें से 6.73 करोड़ गलतियां सुधार दी गई। हालांकि 1.45 करोड़ गलतियों में अभी सुधार नहीं किया गया है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जनगणना 2021 तीन सालों में पूरी हो जाएगी। आज की समीक्षा बैठक में गृह मंत्री ने इसके रोडमैप पर चर्चा की। इस बात पर जोर दिया गया कि डिजाइन और तकनीकी चीजों में सुधार पर जोर दिया जाए ताकि जनगणना करने के तीन साल के अंदर आंकड़ों को अंतिम रूप दे दिया जाए।
अभी तक पूरे आंकड़े जारी करने में सात से आठ साल का समय लग जाता है। इस बड़ी कवायद के लिए 25 लाख से अधिक कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है। सिंह ने सिविल पंजीकरण प्रणाली खासतौर से दूरवर्ती इलाकों में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में सुधार करने तथा आंकड़ों का आकलन करने के लिए नमूना पंजीकरण प्रणाली को मजबूत करने जैसे कि शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और प्रजनन दर पर भी जोर दिया।

अक्षय की ‘गोल्ड’ ने बनी सउदी अरब में रिलीज होने वाली बॉलीवुड की पहली फिल्म

मुम्बई : 15 अगस्त को रिलीज हुई अक्षय कुमार की ‘गोल्ड’ भले ही धीमी रफ्तार से बिजनेस कर रही है, लेकिन फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर ली है। फिल्म के कमाई के साथ-साथ एक और इतिहास रच दिया है। जी हां, अक्षय और मौनी रॉ स्टारर फिल्म गोल्ड को साउदी अरब में भी रिलीज किया जाएगा। ऐसा करने वाली बॉलीवुड की यह पहली फिल्म होगी, जिसे साउदी अरब में रिलीज किया जा रहा है, जो कि वाकई गर्व की बात है। इस बात की जानकारी खुद अक्षय कुमार ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की है। बता दें कि हॉकी पर बनी अक्षय कुमार की ये फिल्म सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद की जा रही है। देश में जहां फिल्म ने 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं वर्ल्डवाइड फिल्म 150 करोड़ रुपये से भी ज्यादा कमाई करने में कामयाब रही है। फिल्म के साथ-साथ अक्षय कुमार ने भी अपनी झोली में एक और रिकॉर्ड शामिल कर लिया है। दरअसल, गोल्ड को मिलाकर अक्षय की 9 वीं फिल्म 100 करोड़ क्लब में एंट्री करने में सफल रही है। इससे पहले हाउसफुल3, एयरलिफ्ट, रुस्तम, जॉली एलएलबी, हॉलीडे, टॉयलेट और राउडी राठौर इस लिस्ट में अपनी जगह बना चुकी हैं।
अक्षय की फिल्म गोल्ड की बात करें तो ये एक पीरियड ड्रामा है। फिल्म में उस समय की कहानी को दिखाया गया है जब आजादी के बाद भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स में राष्ट्रीय खेल हॉकी में अंग्रेजो के हाथों गोल्ड मेडल मिला था। कहानी में अक्षय कुमार गोल्ड हासिल करने के लिए किस तरह से संघर्ष करते हैं दिखाया गया है। फिल्म ने दर्शकों के दिलों को छू लिया और धीरे-धीरे फिल्म ने 100 करोड़ क्लब में एंट्री कर ली।

हर सेकंड 100 ‘बुरे’ विज्ञापन हटा रहा गूगल

सैन फ्रांसिस्को : गूगल अपनी नीतियों को लेकर सख्त कदम उठाने में लगा हुआ है। इसी के तहत वह हर सेकंड 100 से ज्यादा ऐसे विज्ञापनों को हटा रहा है, जो उसकी नीतियों को उल्लंघन करती हैं। कंपनी ने यह भी फैसला लिया है कि अपने मंच से ‘बुरे’ तत्वों को हटाने के लिए वह जल्द ही एक सत्यापन कार्यक्रम शुरू करने वाला है।
मीडिया खबरों के मुताबिक कई घोटालेबाज विज्ञापन खरीद रहे हैं और बड़ी दिग्गज कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। गूगल ने शनिवार को स्पष्ट कर दिया है कि वह इनके खिलाफ कदम उठा रहे हैं। गूगल के वैश्विक उत्पाद नीति निदेशक डेविड ग्राफ ने बताया, ‘पिछले एक साल में ही हमने 320 करोड़ विज्ञापनों को अपने मंच से हटाया है। इन विज्ञापनों ने हमारी नीतियों का उल्लंघन किया था। हम प्रति सेकंड 100 से ज्यादा खराब विज्ञापनों को हटा रहे हैं।’

18वें एशियाई खेलों का हुआ समापन, भारत ने किया अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

जर्काता : मुक्केबाज अमित पांघल और ब्रिज में पुरूष युगल जोड़ी के स्वर्ण पदकों के दम पर भारत ने एशियाई खेलों में अब के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ अपने अभियान का शानदार अंत किया। कांस्य पदक के मुकाबले में भारतीय पुरूष हॉकी टीम ने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर फाइनल में ना पहुंच पाने की अपनी टीस को कम किया, जबकि महिला स्क्वॉश टीम को फाइनल में हारने के कारण रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारत ने इन खेलों में 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य पदक सहित कुल 69 पदक जीते। एशियन गेम्स के इतिहास में यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 में ग्वांग्झू एशियाई खेलों में था, जब उसने 14 स्वर्ण सहित 65 पदक जीते थे। भारत ने स्वर्ण पदक के लिहाज से 1951 में दिल्ली में हुए एशियाई खेलों की बराबरी की। तब भी भारत ने 15 स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे।

भारत ने प्रतियोगिता के आखिरी दिन भी अपना स्वर्णिम अभियान जारी रखा। पहले अमित (49 किग्रा) ने मौजूदा ओलंपिक रजत पदक विजेता और एशियाई चैंपियन हसनब्वॉय दुस्तामातोव को हराकर सोने का तमगा हासिल किया। जबकि इसके बाद पहली बार इन खेलों में शामिल किये गये ब्रिज के पुरूष युगल स्पर्धा में प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार ने स्वर्ण पदक जीता। सेना के 22 वर्षीय अमित एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले कुल आठवें भारतीय मुक्केबाज बने। 18वें एशियन गेम्स के फाइनल में पहुंचने वाले एकमात्र भारतीय मुक्केबाज थे। उन्होंने प्रबल दावेदार दुस्तामातोव को 3-2 से हराया। उन्होंने इस तरह से पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में उज्बेकिस्तान के इस मुक्केबाज से मिली हार का बदला भी चुकता कर दिया।