Wednesday, March 18, 2026
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युवा दिवस (12 जनवरी ) पर विशेष : स्वामी विवेकानंदः युवाओं के लिए सच्चे आदर्श और मार्ग दर्शक

बंडारू दत्तात्रेय,  राज्यपाल, हरियाणा

भारत में 19वी सदी में अंग्रेजी शासन का बोल-बाला था और दूनिया हमें हेय दृष्टि से देखती थी। उस समय भारत माता ने एक ऐसे लाल को 12 जनवरी 1863 में जन्म दिया, जिसने भारत के लोगांे का ही नहीं पूरी मानवता का गौरव बढ़ाया। माता-पिता ने बालक का नाम नरेन्द्र रखा। इसके बाद वे आध्यात्म से सरोबोर होकर स्वामी विवेकानंद कहलाए। स्वामी विवेकानंद पश्चिमी दर्शन सहित विभिन्न विषयों के ज्ञाता होने के साथ-साथ एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वह भारत के पहले हिंदू सन्यासी थे, जिन्होंने हिंदू धर्म और सनातन धर्म का संदेश विश्व भर में फैलाया। उन्होंने विश्व में सनातन मूल्यों, हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति की सर्वाेच्चता स्थापित की।
योगिक स्वभाव से परिपूर्ण, वे बचपन से ही ध्यान का अभ्यास करते थे। श्री रामकृष्ण परमहंस के संपर्क में आने के बाद उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया। इनका सम्बन्ध गुरु-शिष्य संबंध के रूप में विकसित हुआ। उन्होंने नवंबर 1881 में एक दिन श्री रामकृष्ण परमहंस से पूछा, सर, क्या आपने भगवान को देखा है? उन्हांेने “हाँ“ में उत्तर दिया और कहा कि मैं उन्हें उतने ही स्पष्ट रूप से देखता हूं, जितना कि मैं आपको देख रहा हूं।
श्री रामकृष्ण परमहंस के दिव्य मार्गदर्शन में, स्वामी विवेकानंद ने आध्यात्मिक पथ पर अद्भुत प्रगति की। 11 सितंबर, 1893 को शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में उनके भाषण ने दुनिया भर के धार्मिक और आध्यात्मिक सन्तों पर एक अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत अमेरिकी बहनों और भाईयों के रूप में संबोधित करते हुए की, जिससे पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने कहा जिस गर्मजोशी और सौहार्दपूर्ण माहौल में मेरा स्वागत किया है, उस से मेरा हृदय गद-गद है। भारत भूमि के सभी समुदायों, वर्गों व लाखों-करोड़ों भारतीयों तथा धर्मभूमि की तरफ से मैं आपको कोटि-कोटि धन्यवाद देता हूं।
उन्होंने कहा था- “मुझे उस धर्म व राष्ट्र से संबंध रखने पर गर्व है जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिकता सिखाई है। हम न केवल सार्वभौमिक सहनशीलता में विश्वास रखते हैं बल्कि सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं। मुझे भारतीयता होने पर गर्व है, जिसमें विभिन्न राष्ट्रों के पीड़ितों और शर्णार्थियों को आश्रय दिया है। स्वामी जी का दृढ़ मत था कि सभी मार्ग एक सच्चे ईश्वर की ओर ले जाते हैं, जैसा कि ऋग्वेद में भी उल्लेख किया गया है कि “एकम सत विप्र बहुदा वदन्ति“ अर्थात सत्य एक है; दार्शनिक इसे विभिन्न नामों से पुकारते हैं।
उनके भारतीय धर्मनिरपेक्षता के विचार सभी धर्मों के लिए समान थे। उन्होंने सदैव सार्वजनिक संस्कृति के रूप में धार्मिक सहिष्णुता का समर्थन किया, क्योंकि वे सद्भाव और शांति चाहते थे। यह केवल एक सुझाव नहीं था, बल्कि जाति या धर्म के आधार पर बिना किसी भेदभाव के लोगों की सेवा करने का एक मजबूत इरादा था। उनके विचारों में धर्मनिरपेक्षता के संबंध में तुष्टिकरण के लिए कोई स्थान नहीं था। यह सर्व समावेशी था, जिसका उन्होंने अमेरिका में प्रचार किया और 1893 में विश्व धर्म संसद में ऐतिहासिक व्याख्यान देने के बाद यूरोप का भी व्यापक दौरा किया।
जब वे चार साल बाद अमेरिका और ब्रिटेन की यात्रा कर भारत लौटे तो वेे मातृभूमि को नमन कर पवित्र भूमि में लेट कर लोट-पोट हुए। यह मातृभूमि के प्रति उनके मन में अपार श्रद्धा और मां भारती के प्रति प्रेम था। उन्होंने कहा कि मातृभूमि का कण-कण पवित्र और प्रेरक है, इसलिए इस धूलि में रमा हूं। उन्होंने माना कि पश्चिम भोग-लालसा में लिप्त है। इसके विपरीत आध्यात्मिक मूल्य और लोकाचार भारत के कण-कण में रचा बसा है।
स्वामी विवेकानंद की दिव्यता, नैतिकता, पूर्व-पश्चिम का जुड़ाव व एकता की भावना विश्व के लिए वास्तविक संपत्ति है। उन्होंने हमारे देश की महान आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए एकता की भावना को परिभाषित किया। उनके बारे में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने लिखा है ‘‘स्वामीजी इसलिए महान हैं कि उन्होंने पूर्व और पश्चिम, धर्म और विज्ञान, अतीत और वर्तमान में सामंजस्य स्थापित किया है, देशवासियों ने उनकी शिक्षाओं से अभूतपूर्व आत्म-सम्मान, आत्मनिर्भरता और आत्म-विश्वास आत्मसात किया है।‘‘ इसी ऐतिहासिक संबोधन से प्रभावित होकर प्रख्यात ब्रिटिश इतिहासकार ए.एल. बाशम ने कहा था-स्वामी विवेकानंद जी को भविष्य में आधुनिक दुनिया के प्रमुख निर्माता के रूप में याद किया जाएगा।”
स्वामी विवेकानंद ने युवाओं के लिए कहा था ‘‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए‘‘। वे युवाओं में आशा और उम्मीद देखते थे। उनके लिए युवा पीढ़ी परिवर्तन की अग्रदूत है। उन्होंने कहा था- “युवाओं में लोहे जैसी मांसपेशियां और फौलादी नसें हैं, जिनका हृदय वज्र तुल्य संकल्पित है।“ वह चाहते थे कि युवाओं में विशाल हृदय के साथ मातृभूमि और जनता की सेवा करने की दृढ़ इच्छा शक्ति हो। उन्होंने युवाओं के लिए कहा था “जहां भी प्लेग या अकाल का प्रकोप है, या जहां भी लोग संकट में हैं, आप वहां जाएं और उनके दुखों को दूर करें“ आप पर देश की भविष्य की उम्मीदें टिकी हैं।
स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरित होकर, हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आत्म निर्भर, स्वस्थ भारत अभियान शुरू किया है, जिस पर 2025-26 तक 64,180 करोड़ रूपए खर्च होगें। इसका उद्देश्य 10 उच्च फोकस वाले राज्यों में 17,788 ग्रामीण स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों को सुदृढ़ करना है। सभी राज्यों में 11,024 शहरी स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित करना और 602 जिलों और 12 केंद्रीय संस्थानों में विशेष केयर अस्पताल स्थापित करना है। सरकार का यह कदम इस मन्सा को दर्शाता है कि स्वस्थ लोग ही मजबूत राष्ट्र और जीवंत समाज का निर्माण कर सकते हैं।
अपनी भारत यात्रा के दौरान, स्वामी विवेकानंद विशेष रूप से दलितों में भयानक गरीबी और पिछड़ेपन को देखकर बहुत प्रभावित हुए। वह भारत के पहले धार्मिक नेता थे, जिनका यह मानना था कि जनता ही जनार्दन है। जनता की उपेक्षा करने से देश पिछड़ जाएगा। सदियों से चले आ रहे दमन के कारण सामाजिक व्यवस्था को सुधारने की अपनी क्षमता पर उन्होंने प्रश्नचिन्ह लगाया। उन्होंने महसूस किया कि गरीबी के बावजूद, जनता धर्म से जुड़ी हुई है, क्योंकि जनता को यह नही सिखाया गया कि वेदांत के जीवनदायी सिद्धांतों और उन्हें व्यावहारिक जीवन में किस प्रकार से धारण किया जा सकता है।
वे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार करने, आध्यात्मिक ज्ञान, नैतिक बल को मजबूत करने में शिक्षा को ही एकमात्र साधन मानते थे। उनके शब्दों में शिक्षा मनुष्य को जीवन में संघर्ष के लिए तैयार करने में मदद करती है। शिक्षा चरित्रवान, परोपकार और साहसी बनाती है।

(साभार – राजभवन हरियाणा की वेबसाइट पर प्रकाशित लेख)

कवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण की हमेशा याद आएगी

कोलकाता । भारतीय भाषा परिषद के पुस्तकालय कक्ष में अपने समय के प्रसिद्ध कवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण की स्मरण सभा की गई। उनका देहावसान विगत 7 जनवरी को हुआ था। उनके 15 से अधिक कविता संग्रह प्रकाशित हैं। वे एक समय कोलकात के साहित्यिक गतिविधियों के एक प्रमुख केंद्र हुआ करते थे। स्मरण सभा में कई विद्वानों एवं रचनाकारों ने उनकी साहित्यिक निरंतरता और तेजस्वी व्यक्तित्व की सराहना की। उनकी कविताओं में प्रगतिशील स्वर हमेशा मुखर रहा है। अपने अंतिम समय तक भी वे रचनारत थे। कोलकाता के उनके कई मित्रों ने आज अपना स्मरण सुनाते हुए कवि पाषाण के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्मरण सभा में डा. शंभुनाथ, प्रो.हितेंद्र पटेल, प्रो.राजश्री शुक्ला, मृत्युंजय श्रीवास्तव, डॉ. गीता दूबे, सेराज खान बातिश, डॉ सत्यप्रकाश तिवारी,रावेल पुष्प, दुर्गा व्यास, कुसुम जैन, मीनाक्षी संगनेरिया, सत्यप्रकाश भारतीय,नीलकमल, वसुंधरा मिश्र, लक्ष्मण केडिया, रामनिवास द्विवेदी, नसीम अजीजी, प्रदीप जीवराजका आदि ने उनके कृतित्व का स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि व्यक्त की। सभा में सुषमा त्रिपाठी, सुरेश शॉ, फरहान और सुषमा कुमारी, जीवन सिंह आदि उपस्थित थे। स्मरण सभा को संचालन किया प्रो. संजय जायसवाल ने।

बंगाल की धरती पर गूंजे राजस्थानी लोक गीत

कोलकाता । भारत जैन महामंडल लेडिज विंग द्वारा राजस्थानी लोक गीतों का कार्यक्रम आयोजित किया गया। दिनांक 11.1.25 को शस्य श्यामला बगं भूमि पर भारत जैन महिला मंडल द्वारा आयोजित राजस्थानी लोक गीतों की मधुर गीत गंगा बही, ऐसा लग रहा था मानो बंगाल की धरती पर राजस्थान उतर आया हो। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में राजस्थान सूचना केंद्र के निदेशक श्री हिंगलाज दान रतनू, ताजा टी वी के निदेशक श्री विश्वंभर नेवर, साहित्य प्रेमी दुर्गा व्यास, हिन्दी प्रोफेसर डाक्टर वसुंधरा मिश्र की गरिमामयी उपस्थिति रही। ताजा टीवी के डायरेक्टर वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर जी और राजस्थान सूचना केंद्र के निदेशक ने अपना वक्तव्य रखा और राजस्थानी लोक गीत और वहां की समृद्ध परंपरा पर गर्व जताया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बाई सा रा बीरा गीत गाकर राजस्थान के संबंधों को मीठा बताया। शिक्षाविद दुर्गा व्यास ने संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को राजस्थानी भाषा प्रेम का दीप जलाया कहकर प्रशंसा की। राजस्थानी गायिकाओं में मृदुला कोठारी,इंदु चांडक, संजु कोठारी,शशि कंकानी अतिथि महिला कलाकारों ने अपने कई परंपरागत हिचकी, बंगड़ी,प्रेम, विरह और श्रृंगार के लोकगीतों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए और जोरदार रंग जमाया।
भारत जैन महिला मंडल की बहनों सुमित्रा सेठिया,मंजु छाजेङ, चंदा प्रह्लादका, सुप्यार पुगलिया,मीना सोनी … ने खुबसूरत राजस्थानी गीत प्रस्तुत किए। विलुप्त हो रही राजस्थानी भाषा,संस्कृति को जीवित रखने का बेमिसाल प्रयास किआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष चंदा गोलछा, सरोज भंसाली, कल्पना बाफना अंजु बैद द्वारा नवकार मंत्रोच्चार के साथ गायन किया। जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता की सदस्याओं में सुमित्रा सेठिया, सुप्यार पुगलिया,मीना सोनी,मंजु छाजेड ने राजस्थानी गीत गाए। अंजु सेठिया ने कार्यक्रम का संचालन राजस्थानी भाषा में किया। कार्यक्रम के पश्चात राजस्थानी केशरिया चाय और नाश्ते का सुन्दर प्रबंध किए गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध विदूषी डॉ राज्यश्री शुक्ला, साहित्य अकादमी के सदस्य रावेल पुष्प, बांग्ला लेखिका बेबी करनमा की गरिमामय उपस्थिति रही।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित हुए कोलकाता के अनीश सरकार

कोलकाता । कोलकाता के तीन साल आठ महीने के अनिश सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया है। दुनिया के सबसे कम उम्र के फिडे रेटिंग प्राप्त खिलाड़ी बनने वाले अनिश को गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया। इसे लेकर अनीश के परिजनों, उसके पड़ोसियों और जानने वालों में खुशी की लहर है।
राष्ट्रपति ने 14 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 17 बच्चों को सात अलग-अलग श्रेणियों में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया। इनमें सात लड़के और 10 लड़कियां शामिल थीं। सबसे कम उम्र के विजेता के रूप में अनिश ने इस समारोह में सभी का ध्यान खींचा। कोलकाता के कैखाली इलाके के रहने वाले अनिश सरकार ने केवल तीन साल आठ महीने की उम्र में फिडे रेटिंग हासिल कर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने तीन अलग-अलग फिडे रेटेड खिलाड़ियों के खिलाफ जीत दर्ज की। इससे पहले यह रिकॉर्ड भारत के ही तेजस तिवारी के नाम था, जिसे अनिश ने तोड़ दिया। अनिश की मां के अनुसार, जब वह सिर्फ दो साल आठ महीने के थे, तभी शतरंज के प्रति उनका गहरा लगाव देखा गया। अप्रैल 2024 में अनिश को ग्रैंडमास्टर दिव्येंदु बरुआ के शतरंज प्रशिक्षण केंद्र में दाखिला दिलाया गया। यहां से उनकी शतरंज की यात्रा ने नई ऊंचाइयों को छुआ। अनीश सप्ताह में तीन दिन, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को, दोपहर 12 बजे से रात आठ बजे तक शतरंज का गहन अभ्यास करते हैं। प्रशिक्षण के दौरान वे एक घंटे का ही ब्रेक लेते हैं। उनके माता-पिता कैखाली से चक्रबेरिया के इस केंद्र तक रोजाना चार घंटे का सफर तय करते हैं।
अनिश की मां ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि उनकी कल्पना से परे थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अनिश की इस सफलता को बरकरार रखने और ग्रैंडमास्टर बनने तक का सफर चुनौतीपूर्ण होगा। अनीश की मां ने बताया कि वह एक गृहिणी हैं और अनीश के पिता पेशे से शिक्षक हैं। हालांकि, वे अपने बेटे की सफलता के बावजूद अपना नाम मीडिया में नहीं लाना चाहते थे। गौरतलब है कि अनिश एंटाली स्थित सेंट जेम्स स्कूल के छात्र हैं। उनके माता-पिता ने अपना नाम गुप्त रखने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, “जिस दिन अनिश ग्रैंडमास्टर बनेगा, उसी दिन हम अपना नाम सार्वजनिक करेंगे।” इस सफलता के साथ, अनिश न केवल कोलकाता बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गए हैं। उनका यह सम्मान बाल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता सम्पन्न

कोलकाता । रानी बिड़ला गर्ल्स काॅलेज, कोलकाता में छात्र सप्ताह समारोह के अंतर्गत हिंदी विभाग द्वारा काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन में विधार्थियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। विधार्थियों को शुभकामना संदेश देती हुई डाॅ.पुष्पा तिवारी ने कहा कि काव्य की बेहतर आवृत्ति ही संवेदनाओं की सही अभिव्यक्ति कर सकती है। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रो.सुष्मिता दास ने कहा कि काव्य आवृत्ति से विधार्थी अपने विचारों और मनोभावों को व्यक्त करता है। निर्णायक के तौर पर भूगोल विभाग के प्रोफेसर शायन दत्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ.विजया सिंह ने एवं धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष प्रो.मंटू दास ने किया।

इमरान ज़की को सेंट जेवियर्स कॉलेज एल्युमिनी रियूनियन का ज़ेवेरियन पुरस्कार 

कोलकाता । सेंट जेवियर्स कॉलेज कलकत्ता एलुमनी एसोसिएशन के पूर्व मानद सचिव और उपाध्यक्ष इमरान जकी को एनुअल एल्युमिनी रियूनियन डिनर, “संगम 2024” के दौरान अनुकरणीय सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित ज़ेवेरियन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कॉलेज और एल्युमिनी कमिटी में इमरान जकी के उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें इस गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया है। सेंट जेवियर्स कॉलेज ग्राउंड में कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में फादर डोमिनिक सैवियो (सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्रिंसिपल और सेंट जेवियर्स कॉलेज कलकत्ता एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष), फादर जयराज वेलुस्वामी (सेंट जेवियर्स स्कूल और कॉलेज के रेक्टर), फादर रोशन (सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रिंसिपल) के साथ अन्य प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों और सेंट जेवियर्स परिवार के सदस्य इस मौके पर मौजूद थे।
मीडिया से बात करते हुए इमरान जकी ने कहा, “मैं अनुकरणीय कार्य और सेवाओं के लिए ज़ेवेरियन पुरस्कार प्राप्त करने पर खुद को बहुत ही विनम्र और सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। यह सम्मान सिर्फ़ मेरे लिए नहीं, बल्कि सेंट जेवियर्स के पूरे पूर्व छात्र समुदाय के लिए है, जिनकी लगन और समर्पण हमारे प्रिय संस्थान के भविष्य को आकार देते रहते हैं। मैं इतने सारे उल्लेखनीय व्यक्तियों की सेवा करने और उनसे जुड़ने का अवसर पाकर आभारी हूँ। मैं सेंट जेवियर्स कॉलेज का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हूं, क्योंकि हम एक साथ एक उज्जवल भविष्य का निर्माण करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
 इमरान जकी पूर्व छात्र संघ का एक अभिन्न अंग रहे है। उन्हें पूर्व छात्रों में आपसी संबंधों को बढ़ावा देने, प्रमुख पहलों को व्यवस्थित करने और उनकी अटूट प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने संस्थान की विरासत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हमेशा से ही कॉलेज और उसके वैश्विक पूर्व छात्रों के बीच आपसी संबंध को मजबूत करने में उनके नेतृत्व और समर्पण को महत्वपूर्ण माना गया है।

भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के डायरेक्टर जनरल अर्थशास्त्री डॉ सुमन मुखर्जी का निधन 

कोलकाता । डॉ सुमन मुखर्जी का निधन प्रो (डॉ.) सुमन के. मुखर्जी, एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री और सम्मानित शिक्षक, का 26 दिसंबर, 2024 को 75 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से निधन हो गया।  2 अगस्त 1949 को जन्मे डॉ. मुखर्जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कलकत्ता बॉयज़ स्कूल से पूरी की और सेंट जेवियर्स कॉलेज कोलकाता से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।  उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में एमए की पढ़ाई की, जहां उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन जैसे दिग्गजों का मार्गदर्शन मिला, जिन्होंने उनकी पीएचडी थीसिस की प्रस्तावना लिखी थी।
डॉ मुखर्जी का शैक्षणिक करियर चार दशकों तक फैला रहा, इस दौरान उन्होंने विभिन्न संस्थानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 1970 के दशक में सेंट जेवियर्स कॉलेज में अपनी शिक्षण यात्रा शुरू की, और युवा दिमागों के पोषण के लिए 24 साल समर्पित किए। उन्होंने एक्सएलआरआई जमशेदपुर और भारतीय समाज कल्याण और व्यवसाय प्रबंधन संस्थान (आईआईएसडब्ल्यूबीएम), कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर भी कार्य किया। उनकी नेतृत्वकारी भूमिकाओं में जे.डी. बिड़ला इंस्टीट्यूट और कलकत्ता बिजनेस स्कूल, और भारतीय विद्या भवन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस, कोलकाता में प्रिंसिपल और डीन के रूप में निदेशक के रूप में कार्य करना शामिल था।
2012 में, डॉ मुखर्जी भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में महानिदेशक के रूप में शामिल हुए, जहाँ उन्हें उनके दूरदर्शी नेतृत्व और शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए सम्मानित किया गया। उनके सहकर्मी और छात्र उन्हें एक मार्गदर्शक के रूप में याद करते हैं जिन्होंने अपनी बुद्धि और करुणा से अनगिनत लोगों के जीवन को छुआ।  शिक्षा जगत से परे, डॉ मुखर्जी एक चर्चित अर्थशास्त्री थे, जो केंद्रीय बजट सहित आर्थिक मुद्दों के व्यावहारिक विश्लेषण के लिए जाने जाते थे। वह ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन के फेलो और यूएसएईपी के तहत पर्यावरण फेलो थे। उनकी अंतर्राष्ट्रीय व्यस्तताओं में संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में सम्मेलनों में पेपर प्रस्तुत करना और सेलिंगर स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट, लोयोला कॉलेज, बाल्टीमोर, यूएसए और न्यूकैसल बिजनेस स्कूल, यूको, ग्रेट ब्रिटेन नॉर्थम्ब्रिया विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्य करना शामिल था।
डॉ. मुखर्जी ने ‘द टेक्स्टबुक ऑफ इकोनॉमिक डेवलपमेंट’ लिखी और राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यक्रमों में योगदान दिया, यूजीसी के मुक्त विश्वविद्यालय कार्यक्रम के लिए आर्थिक विकास और योजना पर 18 कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उनके परिवार में उनकी पत्नी सुदक्षिणा मुखर्जी और दो बेटे शोमिक कुमार मुखर्जी और श्रुतोर्सी मुखर्जी हैं।  डॉ. मुखर्जी का निधन शैक्षणिक और आर्थिक समुदाय के लिए एक गहरी क्षति है। एक शिक्षक, मार्गदर्शक और अर्थशास्त्री के रूप में उनकी विरासत भावी पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी

बंगाल कला, संस्कृति को संरक्षित करने वाली धरती है :  कैलाश खेर 

कोलकाता । भवानीपुर कॉलेज में साहित्य ,कला और संगीत महोत्सव “उमंग 24” का समापन समारोह प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर जी के गीतों की लाइव प्रस्तुति से हुई जो एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम रहा । इस वर्ष कॉलेज को नैक में ए ग्रेड प्राप्त हुआ और भवानीपुर ग्लोबल विश्वविद्यालय बनने की मंजूरी भी मिली। इस वर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धियां रहीं। कैलाश खेर (जन्म 7 जुलाई 1973) एक भारतीय संगीतकार और गायक हैं। वह भारतीय लोक संगीत और सूफी संगीत से प्रभावित संगीत शैली में गाने गाते हैं। वह शास्त्रीय संगीतकार कुमार गंधर्व, हृदयनाथ मंगेशकर, भीमसेन जोशी और कव्वाली गायक नुसरत फतेह अली खान से प्रेरित हैं।
प्रत्येक वर्ष की तरह भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज में “उमंग” – 24 का आगाज़ हो चुका है। कोलकाता की एलगिन रोड फिर से जाम हो गई। 25-26-27-28 दिसंबर 2024 के चारों दिन कोलकाता और बाहर से आए कॉलेज के प्रतिभागियों के लिए अहम दिन रहे। 29 दिसम्बर प्रसिद्ध गायक पद्मश्री से सम्मानित कैलाश खेर जी के गीतों का रोमांचक अनुभव रहा । अपनी दमदार आवाज़ और संगीत की अपनी अनूठी शैली के साथ, खेर ने खुद को भारत के सबसे लोकप्रिय पार्श्व गायकों में से एक के रूप में स्थापित किया है।भवानीपुर कॉलेज के पास नार्दर्न पार्क में लगभग दस हजार विद्यार्थियों ने कैलासा लाइव का आनंद लिया। “उमंग” केवल वार्षिकोत्सव नहीं है, वह युवा प्रतिभाओं का महोत्सव है, प्रतिभाओं का चुनाव उत्सव है।
कार्यक्रम कैलासा लाइव में पद्मश्री कैलाश खेर को वाइस-चेयरमैन मिराज डी शाह और उनकी पत्नी शालिनी डी शाह ने माँ दुर्गा की मूर्ति मोमेंटो रूप में प्रदान कर उनका सम्मान किया। कोलकाता के प्रतिष्ठित कॉलेजों के उमंग में भाग लेने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने इस अवसर का आनंद लिया । इसमें तीस से अधिक स्पॉन्सर्स ने अपना योगदान दिया। सुप्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने अपने गीतों से विद्यार्थियों, अतिथियों तथा बंगाल के सांस्कृतिक वातावरण को समृद्ध किया। तेरी दिवानी, सैंया जैसे अपने लोकप्रिय गीतों की लाइव प्रस्तुति दी। सुर सम्राट कैलाश खेर के गीत हर युवा के हृदय में बसे हुए हैं,उसका आनंद लिया साथ में अपने स्वर मिलाए, डांस किए,हजारों मोबाइल की रोशनी से पूरा नार्दर्न पार्क जगमगा उठा था। कैलाश खेर ने अपनी नृत्य भंगिमाओं से स्तब्ध कर दिया। सभी खेर की एक झलक पाने के लिए लालायित हो उठे।
कॉलेज के वाइस चेयरमैन मिराज डी शाह स्वयं पूरे आयोजन पर नजर रखे हुए थे। कॉलेज के रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह ने अपने वक्तव्य में बताया कॉलेज के विद्यार्थियों की गतिविधियों के विषय में बताया और कैलाश खेर जी को बधाई और शुभकामनाएँ दी ।इस अवसर पर खेर ने कहा कि बंगाल के भवानीपुर कॉलेज में सुनने वाले हैं। बंगाल संदेश रसगुल्ला का प्रदेश है जो खुश और रस, आनंद देने वाला है। बंगाल की धरती पर एक बार गाने वाला देश विदेश के किसी भी कोने में जाकर अपना गीत सुना सकता है। बाहुबली के लिए गीत गाने वाले कैलाश खेर को सामने पाकर सभी श्रोता खुशी से भर उठे। कैलासा लाइव के पूर्व 25 को भवानीपुर कॉलेज कैम्पस में डिजाइन एकेडमी की ओर से फैशन शो , 27 दिसंबर को रिडल्स बैंड का शानदार प्रदर्शन हुआ था।
देखा जाए तो यह कार्यक्रम भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए संदेश था कि वे भी अपने अपने क्षेत्र में विशिष्टता प्राप्त करें। पिछले दो महीने से कॉलेज के विद्यार्थियों में “उमंग” में भाग लेने की तैयारियाँ जोर शोर से चल रही हैं। क्रिसेंडो, फ्लेम, इन – एक्ट, फैशनिस्टा आदि और अन्य विद्यार्थियों में छिपी प्रतिभाओं को निखारने का काम “उमंग” करता है।
25-26 -27-28 -29 दिसंबर 2024 पांच दिन हर विद्यार्थी के लिए सचमुच उमंग, उत्साह – ऊर्जा से भर देने वाले अवसर होते हैं।25 दिसम्बर को
इस वर्ष प्रो दिलीप शाह ने “उमंग” की थीम “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आई” रखी जिसमें बदलते भारत और विश्व की तस्वीर कैसी होगी इसी थीम पर ही सभी कार्यक्रम किए जा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी ने मैं यानि व्यक्ति की सार्थकता को चुनौती दी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मनुष्य की उपस्थिति को भी नकार रहा है। वर्चुअल युग में आने वाला समय कैसा होगा इस पर विद्यार्थियों के विभिन्न प्रदर्शन हुए । “उमंग” की मंच सज्जा भी इसी थीम पर आधारित रही जो हर वर्ष आकर्षण का केंद्र रहता है।
इस वर्ष भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज कोलकाता के लगभग 84से अधिक कॉलेजों के प्रतिभागियों के बेहतरीन प्रदर्शन को मंच देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है जो पूरे पश्चिम बंगाल के लिए एक मिसाल है।
इस अवसर पर विशेष ध्यान देने की बात है कि इस बार बाहर से छह कॉलेज और युनिवर्सिटी के प्रतिभागी विद्यार्थियों का समूह भी आया है। उमंग में शिक्षा साहित्य संस्कृति कला आदि विभिन्न क्षेत्रों में सांस्कृतिक आदान प्रदान किया गया और अपनी-अपनी विभिन्न प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया ।
“उमंग” केवल उमंग नहीं है वह एक ऐसा महोत्सव है जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में व्यवस्था, संगठन, नेतृत्व और आत्मविश्वास को विकसित करता है। चुने गए मिस्टर उमंग को पूरे देश में एक पहचान मिलती है।
शैक्षणिक संस्था के माध्यम से इवेंट को किस तरह व्यवस्थित और संगठित करके सफल बनाया जाता है इस प्रकार की शिक्षा दी जाती है। कॉलेज के सभी कमरों, वालिया सभागार, जुबली हॉल, प्लेसमेंट हॉल और कॉलेज टर्फ का इन चार दिनों तक भरपूर उपयोग होता है।प्रो दिलीप शाह ने बताया कि हर दिन 20 -22 इवेंट समानांतर चले। सभी कार्य विद्यार्थियों द्वारा किए जाते हैं और उनका निर्देशन डीन ऑफिस द्वारा किया जाता है जहांँ प्रमुख डीन प्रोफेसर दिलीप शाह एवं प्रोफ़ेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी का विशेष योगदान रहता है ।
डॉ वसुंधरा मिश्र भवानीपुर कॉलेज से हिंदी मीडिया प्रभारी ने बताया कि उमंग – 2024 में 75 से अधिक कॉलेजों के 90 इवेंट्स संपन्न किए गए जिनमें 4000 प्रतिभागी हिस्सा लिया । नृत्य, संगीत, खेल, सृजनात्मक लेखन बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी, शास्त्रीय, आधुनिक लोक संगीत, लोक नृत्य, पाश्चात्य नृत्य, नाटक स्ट्रीट प्ले, फैशन शो आदि विभिन्न इवेंट्स चार दिनों तक चले और
खेल में क्रिकेट, टग अॉफ वार, योग, फुटबाल, कबड्डी,खो खो, फिटनेस, बॉलीबॉल, बास्केटबाल चेसबॉक्सिंग आदि की प्रतियोगिताएं हो चुकी हैं। सभी कॉलेज के विजेता छात्र – छात्राओं को उमंग में सम्मानित किया गया ।
उमंग24 के प्रमुख प्रतिनिधियों ने बताया कि सभी कॉलेज से आए प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराईं गईं हैं और सभी का यथायोग्य स्वागत किया गया । उमंग में 277 से अधिक विद्यार्थी वोलिंटियर्स ने पांच दिनों तक चलने वाली प्रत्येक गतिविधियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई ।
विशेष रूप से देश विदेश के विभिन्न कॉलेज के विद्यार्थियों ने उमंग24 में भाग लिया । के आई आई टी, भुवनेश्वर, सनबीम कॉलेज बनारस, क्रिया युनिवर्सिटी बैंगलोर, क्राइस्ट युनिवर्सिटी, यशवंतपुर, बीएचयू वाराणसी, सेंट जेवियर्स बर्धमान प्रमुख हैं और विदेश से एम्सटर्डम युनिवर्सिटी के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है जो उमंग को विशिष्ट पहचान दिलाता है। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मिराज डी शाह ने विद्यार्थियों को उमंग 24 की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी।

घर में बनी शाकाहारी थाली दिसंबर में 3 प्रतिशत हुई सस्ती

नयी दिल्ली । घर में बनी शाकाहारी थाली की कीमत में दिसंबर में मासिक आधार पर 3 प्रतिशत की गिरावट हुई है, हालांकि, इस दौरान मांसाहारी थाली की कीमत में भी इतनी ही बढ़ोतरी हुई है। यह जानकारी सोमवार को एक रिपोर्ट में दी गई।

क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से ताजा आपूर्ति के कारण टमाटर की कीमतों में इस महीने के दौरान 12 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि उत्तर में शीत लहर के कारण उत्पादन में कमी के कारण ब्रायलर की कीमतों में इस महीने के दौरान अनुमानित 11 प्रतिशत की वृद्धि के कारण मांसाहारी थाली की लागत में तेज गति से वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि त्यौहारी और शादी सीजन में मांग में वृद्धि और चारे की ऊंची लागत ने भी कीमत बढ़ोतरी को हवा दी है। आलू और प्याज की कीमतों में क्रमशः 2 प्रतिशत और 12 प्रतिशत की मासिक गिरावट ने दिसंबर में शाकाहारी थाली की कीमत में गिरावट को सहारा दिया है। हालांकि, वार्षिक आधार पर शाकाहारी थाली की कीमत में बढ़ोतरी की वजह टमाटर और आलू की कीमतों में बढ़ोतरी होना है, जिनकी हिस्सेदारी शाकाहारी थाली की कीमत में 24 प्रतिशत की है। दिसंबर में टमाटर की कीमत सालाना आधार पर 24 प्रतिशत बढ़कर 47 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि पिछले साल दिसंबर में यह 38 रुपये प्रति किलोग्राम थी। आलू की कीमत पिछले साल के निचले आधार से 50 प्रतिशत बढ़कर दिसंबर 2024 में 36 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि दिसंबर 2023 में यह 24 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसका कारण उत्पादन में अनुमानित 6 प्रतिशत की गिरावट है।

आयात शुल्क में वृद्धि के कारण वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, साथ ही त्योहारों और शादियों सीजन के चलते इसकी मांग में भी वृद्धि हुई है। शाकाहारी थाली में रोटी, सब्जियां (प्याज, टमाटर और आलू), चावल, दाल, दही और सलाद शामिल हैं। नॉन-वेज थाली में दाल को छोड़कर सभी चीजें समान होती हैं। इसकी जगह चिकन (ब्रायलर) को शामिल किया जाता है।

ओयो अब अविवाहित जोड़ों के लिए नहीं

नयी दिल्ली । यात्रा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ओयो ने मेरठ से शुरुआत करते हुए भागीदार होटलों के लिए एक नयी ‘चेक-इन’ नीति लागू की है। इसके अनुसार, अविवाहित जोड़ों का अब ‘चेक-इन’ की अनुमति नहीं दी जाएगी। यानी सिर्फ पति-पत्नी ही होटल में कमरा ले सकेंगे। संशोधित नीति के तहत, सभी जोड़ों को ‘चेक-इन’ के समय अपने रिश्ते का वैध प्रमाण देने के लिए कहा जाएगा। इसमें ऑनलाइन की गई बुकिंग भी शामिल है। कंपनी ने कहा कि ओयो ने अपने भागीदार होटलों को स्थानीय सामाजिक संवेदनशीलता के साथ तालमेल बिठाते हुए अपने विवेक के आधार पर अविवाहित जोड़ों की बुकिंग को अस्वीकार करने का अधिकार दिया है।

ओयो ने मेरठ में अपने भागीदार होटलों को तत्काल प्रभाव से ऐसा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। नीति में हुए बदलाव से परिचित लोगों ने कहा कि जमीनी प्रतिक्रिया के आधार पर, कंपनी इसे और शहरों में विस्तारित कर सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘ओयो को पहले भी विशेष रूप से मेरठ में सामाजिक समूहों से इस मुद्दे को हल करने के लिए प्रतिक्रिया मिली थी। इसके अलावा, कुछ दूसरे शहरों के निवासियों ने भी अविवाहित जोड़ों को ओयो होटलों में चेक-इन करने की अनुमति न देने की मांग की है।’’

ओयो उत्तर भारत के क्षेत्र प्रमुख पावस शर्मा ने  बताया, ‘‘ओयो सुरक्षित और जिम्मेदार आतिथ्य प्रथाओं को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हम व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, लेकिन साथ ही हम इन बाजारों में कानून प्रवर्तन और नागरिक समाज समूहों की बात सुनने और उनके साथ काम करने की अपनी जिम्मेदारी को भी पहचानते हैं।’’ उन्होंने कहा कि कंपनी समय-समय पर इस नीति और इसके प्रभाव की समीक्षा करती रहेगी।