Wednesday, April 8, 2026
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बाजार में आए मास्क और पीपीई किट पहने कान्हा

कोलकाता :  कोरोना वायरस महामारी के बीच कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां भी जोरों पर हैं। हर साल की तरह इस बार भी जन्माष्टमी पर बाजार सज कर तैयार है लेकिन कोरोना का असर कान्हा की मूर्तियों पर भी दिखाई देने लगा है। बाल गोपाल की मूर्तियां कहीं पीपीई किट और कोरोना कैप पहने हुईं हैं तो कहीं मास्क, सर्जिकल कैप और फेस शील्ड के साथ कान्हा पूरी तरह तैयार दिख रहे हैं। गोपाल जी की मूर्तियों पर कपड़ों के अलावा अलग से लगे सुरक्षा के यह सारे इंतजाम लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। कान्हा की मूर्ति लेने आए भक्तों का कहना है कि कोरोना से बचाव के लिए संदेश देने का इससे अच्छा और कोई माध्यम नहीं हो सकता। वहीं, दुकानदार गणेश पटेल बताते हैं कि लोगों जागरूक करने के लिए उन्होंने भगवान कृष्ण की मूर्ति को पीपीई किट, मास्क, सर्जिकल कैप, फेस शील्ड और कोरोना कैप से सजाया है. इसका उद्देश्य लोगों तक एक संदेश पहुंचाना है।

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जानिए गिरधर के कुछ नामों का रहस्य

कोलकाता : 11 और 12 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। 11 को शैव और 12 को वैष्णव जन्माष्टमी मनाएंगे। भगवान कृष्ण के कई नाम हैं। लेकिन, कुछ नाम ऐसे हैं, जिनके पीछे कुछ कहानी, किस्से या कोई अलग ही महत्व है। ऐसे नामों के अलग से जाप का भी विधान शास्त्रों में बताया गया है। श्रीमद् भागवत, पद्मपुराण, कूर्म पुराण, गर्ग संहिता और ब्रह्मवैवर्त पुराण में भगवान कृष्ण के नामों की महिमा बताई गई है।
अलग-अलग ग्रंथों में नामों की अलग व्याख्या भी है। जैसे, भागवत में कृष्ण शब्द की व्याख्या काले रंग से है, लेकिन साथ ही कृष्ण शब्द को मोक्ष देने वाला भी कहा गया है। महाभारत में दो कृष्ण हैं, एक भगवान कृष्ण, दूसरे महाभारत के रचनाकार कृष्ण द्वैपायन व्यास यानी वेद व्यास। वेद व्यास काले थे और द्वीप पर जन्मे थे। सो, उनका नाम कृष्ण द्वैपायन पड़ा, एक वेद को चार भागों में बांटने के कारण उनका नाम वेद व्यास पड़ा।ऐसे ही भगवान कृष्ण के कई नाम उपलब्धियों और उनके व्यक्तित्व की विशेषताओं के कारण पड़े।
मुरारी
महर्षि कश्यप और दिति का एक राक्षस पुत्र था। उसका नाम था मुरा। मुरा ने अपने बल से स्वर्ग पर विजय पा ली। देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया। तब इंद्र ने भगवान कृष्ण से प्रार्थना की। भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी सत्यभामा ने युद्ध में मुरा का वध कर दिया। मुरा दैत्य के अरि यानी शत्रु होने के कारण भगवान का एक नाम मुरारी पड़ गया।

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मधुसूदन
मधु नाम के दैत्य का वध करने से भगवान का एक नाम मधुसूदन पड़ा। इस राक्षस के कारण भी देवता और मनुष्य काफी परेशान थे। भागवत में मधु नाम के दो से तीन राक्षसों का जिक्र मिलता है, जो अलग-अलग काल में हुए हैं। इनमें से एक का वध कृष्ण ने किया था।
केशव
ये नाम भगवान के सुंदर केशों के कारण है। भागवत और गर्ग संहिता में भगवान के रूप का वर्णन मिलता है। गोपियां, सखियां और बृजवासी कई जगह भगवान कृष्ण को केशव के नाम से संबोधित करते हैं।
गोवर्धनधारी-गिरधारी
इंद्र की पूजा रोककर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने और फिर इंद्र के बृज मंडल पर भारी बारिश करने पर लोगों को बचाने के लिए अपने सीधे हाथ की सबसे छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाने के कारण पड़ गया। भगवान को दोनों नाम प्रिय है। वृंदावन में गिरधारी, गिरिराजधारी नाम भगवान के लिए काफी प्रयोग किया जाता है।
माधव
इस नाम के पीछे दो कहानियां हैं। एक तो वसंत ऋतु के देवता या ऋतुओं में वसंत के समान श्रेष्ठ होने के कारण कृष्ण का नाम माधव पड़ा है, क्योंकि वसंत का एक नाम मधु भी है। दूसरी कहानी, त्रेतायुग के राक्षस मधु से जुड़ी है, जो मथुरा का राजा था। इसी मधु का बड़ा पुत्र यादवराज था, जिसके वंश में बाद में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। मधु के वंश में जन्म लेने के कारण भी इन्हें माधव कहते हैं।
मुरलीधर-वंशीधर
बांसुरी धारण करने के कारण नंदबाबा ने कृष्ण को ये नाम दिया था। नंदबाबा ने नन्हें कृष्ण को उपहार में बांसुरी दी थी। जो हमेशा उनकी पहचान रही। कृष्ण के व्यक्तित्व से बांसुरी इस तरह जुड़ी है कि उसके बिना कृष्ण की छवि की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
अच्युत
कृष्ण अपने व्यक्तित्व में अटल और अडिग हैं। उनकी छवि एक ऐसे देवता की है जो अविचल भक्ति प्रदान करते हैं। वे ही एकमात्र ऐसे देवता हैं, जो कई रूपों में एक साथ पूजे जाते हैं। पुत्र, मित्र, भाई, भगवान, पति, पुरूष, योद्धा, सलाहकार और गुरु सहित कई तरह से लोग कृष्ण की पूजा करते हैं। अपने हर रूप में वे अटल-अडिग हैं। इसीलिए उन्हें अच्युत कहा गया है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

पहली बार द्वारिका से पुरी तक सूने मंदिरों में मनेगा जन्मोत्सव

ऑनलाइन या चैनलों पर ही हो सकेंगे दर्शन
नयी दिल्ली : 11-12 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। पंचांग भेद के कारण इस बार दो दिन तक जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इतिहास में ये पहला मौका है जब भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सभी जगह मंदिरों में बिना भक्तों के मनाया जाएगा। मंदिरों में सिर्फ पुजारियों की मौजूदगी में सारी परंपराएं पूरी की जाएंगी।
इस बार मंदिरों की बजाय भक्त ऑनलाइन या चैनल पर लाइव प्रसारण के जरिए भगवान का जन्मोत्सव देख पाएंगे। मथुरा में 3 दिन के लिए मंदिरों में भक्तों के प्रवेश पर रोक लग गई है। द्वारिका में खाली मंदिर में ही जन्माष्टमी मनेगी।
द्वारिका के जगत मंदिर के पुजारी प्रणवभाई के मुताबिक मंदिर में पूरे विधि-विधान से जन्मोत्सव मनाया जाएगा। शासन की गाइडलाइन के मुताबिक लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। हर साल यहां जन्माष्टमी पर लगभग दो से ढाई लाख लोग मौजूद होते हैं। स्थानीय लोगों को मंदिर में प्रवेश देने के बारे में विचार करना चाहिए।
मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बहुत प्रसिद्ध है। हर साल यहां 5 लाख से ज्यादा लोग इकट्ठा होते हैं। बांके बिहारी मंदिर पर भक्तों का जमावड़ा पूरे दो दिन रहता है। इस साल पूरे मथुरा में तीन दिन तक बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक है। मंदिरों में भीड़ जमा न करने के निर्देश जारी हो चुके हैं। मथुरा की सीमाओं पर भी सुरक्षाबल तैनात हैं।
चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी में 11 को जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पं. श्याम महापात्रा के मुताबिक ओडिशा में भगवान सूर्य की स्थिति को देखते हुए त्योहारों का निर्णय होता है। यहां 11 अगस्त को जन्मोत्सव मनेगा, 12 को नंदोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर में फिलहाल बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है। मंदिर के स्टॉफ और पुजारियों की मौजूदगी में ही उत्सव होगा।
इस्कॉन बेंगलुरु के 15 मंदिरों में दो दिन ऑनलाइन उत्सव
इस्कॉन बेंगलुरु अपने सभी 15 मंदिरों को एक साथ ऑनलाइन जोड़कर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएगा। अमेरिका के 3 मंदिर, रशिया, यूके, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों के मंदिर इस बार यू-ट्यूब और ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए जुड़ेंगे। इसके साथ ही फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी ये प्रोग्राम दो दिन लाइव किया जाएगा।
इस दौरान ये सारे प्लेटफॉर्म्स लाइव टीवी की तरह काम करेंगे। इस्कॉन बेंगलुरु के साथ 5 देशों के 15 कृष्ण मंदिर दो दिन के लिए कनेक्ट होंगे। दो दिन तक अलग-अलग प्रोग्राम होंगे। इस्कॉन की योजना कार्यक्रम को अपने एक करोड़ से ज्यादा भक्तों तक पहुंचाने की है।
11 को शैव, 12 को वैष्णव मंदिरों में उत्सव
शैव प्रमुख शहरों जैसे काशी, उज्जैन, हरिद्वार आदि में 11 अगस्त को और वैष्णव प्रमुख शहरों जैसे द्वारिका-मथुरा आदि में 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। दक्षिण भारत के कृष्ण मंदिरों में भी 12 को उत्सव मनाया जाएगा। ओडिशा में 11 अगस्त को जन्माष्टमी होगी।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई ने हिन्दी में खोला ट्विटर अकाउंट

तेहरान/नयी दिल्‍ली : भारत के साथ मजबूत होते संबंधों के के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई ने हिंदी में अपना ट्विटर अकाउंट खोला है। उनके इस अकाउंट पर देवनागरी लिपि में उनकी उनका बायो लिखा है, जबकि इस ट‍ि्वटर हैंडल से उन्‍होंने दो ट्वीट भी देवनागरी लिपि में किए हैं। हालांकि इस पर अभी ब्‍लू टिक नहीं है, पर बताया जा रहा है कि उनके कई अन्‍य भाषाओं में भी ट्विटर अकाउंट हैं।

हिन्‍दी में खोला ट्विटर अकाउंट – समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, ईरान के सर्वोच्‍च नेता के फारसी, अरबी, उर्दू, फ्रेंच, स्पेनिश, रूसी और अंग्रेजी जैसी अन्य भाषाओं में भी ट्विटर खाते हैं और उन्‍होंने हिन्‍दी में भी अकाउंट ओपन कर इससे दो ट्वीट किए हैं। ईरान के सर्वोच्‍च नेता के नाम से बने इस ट‍ि्वटर अकाउंट से देवनागरी में दो ट्वीट 8 अगस्‍त को किए गए हैं, जबकि इस अकाउंट पर अब तक उनके फॉलोअर्स की संख्‍या 1,275 हो गई है।

जब पानी हो शिक्षा और करनी हो नौकरी

कॅरियर युवाओं की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। नौकरी हो या पढ़ाई हो, तैयारी बहुत जरूरी है। आज के ऑफर में यह पेशकश विद्यार्थियों और युवाओं के लिए…

कॅरियर प्वाइंट  लाया है जेईई एडवांस्ड 2020 ऑनलाइन टेस्ट सीरीज (JEE Advanced 2020 Online Test Series By Career Point, Kota) ।

इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे हैं तो इसे देख  सकते हैं।

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सीबीएसई – एनसीआरटी की 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए है। इसका लाभ शिक्षक और अभिभावक दोनों उठा सकते हैं। भौतिकी (फिजिक्स), रसायन शास्त्र (केमेस्ट्री), जीव विज्ञान (बायोलॉजी), जैसे कई विषय हैं। पेनड्राइव 16 जीबी का है।
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ऑफर – 15 अगस्त तक ही है।
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विधि के क्षेत्र में जा रहे हैं तो टॉप रैंकर्स का ज्यूडिशियरी गोल्ड आपके लिए ही है। यह ऑनलाइन कक्षाएँ हैं। ऑफर 15 अगस्त तक हैं।
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कोविड-19 के कारण निजी वित्तीय मामलों में बदला भारतीय लोगों का रुख: सर्वेक्षण

नयी दिल्ली : लगभग 45 फीसदी भारतीय कोविड-19 के बाद आर्थिक सुधार के बारे में अनिश्चित हैं और कम से कम एक साल के लिये धीमी गति से वृद्धि का अनुमान लगा रहे हैं। एक सर्वे में यह तथ्य सामने आया है। इससे निजी वित्तीय मामलों को लेकर उनके बदले रुख से पता चलता है। डिजिटल धन प्रबंधन सेवा प्रदाता स्क्रिपबॉक्स द्वारा जुलाई में किये गये इस सर्वेक्षण में 1,400 से अधिक वयस्क भारतीयों की राय ली गयी। इनमें से 83 प्रतिशत पुरुष और 17 प्रतिशत महिलायें रहीं। स्क्रिपबॉक्स के फाइनेंशियल फ्रीडम सर्वे-2020 के अनुसार, 50 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने गैर-जरूरी खर्च बंद करने और किसी आपात स्थिति के लिये अधिक बचत की योजना बनायी है।

इसके अलावा सर्वे में कहा गया है कि 28 प्रतिशत लोग गैर-आवश्यक चीजों पर खर्च में कटौती करेंगे, 22 प्रतिशत लोग किसी आपातकालीन स्थिति के लिये अधिक बचत करेंगे और 10 प्रतिशत ईएमआई बोझ को कम करेंगे। सर्वेक्षण में कहा गया है, “यह वित्तीय दिक्कतों का समय है। लगभग हर दो भारतीय में से एक (45 प्रतिशत) अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर अनिश्चित है और कम से कम एक वर्ष के लिये धीमी वृद्धि का अनुमान कर रहा है।”सर्वे में शामिल लगभग 44 प्रतिशत लोग मासिक आय के 15 से 30 प्रतिशत के बराबर ईएमआई भर रहे हैं, जबकि 11 प्रतिशत लोग मासिक आय के 50 प्रतिशत से अधिक ईएमआई भर रहे हैं। सर्वेक्षण में सामने आया कि कोविड-19 महामारी ने भारतीयों को अधिक बचत करने के लिये प्रेरित किया है।

फेसबुक पर आईसीसी वीडियो चैनल को 1.65 अरब बार देखा गया: आईसीसी

दुबई : अन्तरराष्टीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के वीडियो चैनल को फेसबुक पर इस साल शुरूआती छह महीनों में सबसे ज्यादा लोगों ने देखा जो अन्य वैश्विक खेल महासंघों की तुलना में दोगुने से अधिक है। आईसीसी ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। आईसीसी ने कहा कि इसके वीडियो चैनल पर 2020 की पहली छमाही में व्यूज की संख्या 1.65 अरब थी जो सोशल मीडिया के इस मंच पर अन्य शीर्ष खेल संस्थानों की तुलना में कहीं अधिक है।

आईसीसी ने कहा कि यह नतीजे फेसबुक के ‘क्राउडटैंगल्स एनालिसिस’ से लिये गये हैं। उसने कहा कि पिछले 12 महीनों की तुलना में इसका फेसबुक चैनल अपने वर्ग में सबसे ज्यादा व्यस्त पेज रहा। आईसीसी ने कहा, ‘‘इस चैनल मे इतिहास में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला दिन तब था जब बांग्लादेश ने अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप 2020 के फाइनल में भारत पर जीत हासिल की थी जिसे 44 लाख दर्शकों ने देखा। ’’उसने कहा कि मार्च में आस्ट्रेलिया में हुए महिला टी20 विश्व कप में चैनल को 1.1 अरब वीडियो व्यूज मिले जो 2018 चरण की तुलना में 1900 प्रतिशत ज्यादा थे जिसे यह अब तक सबसे ज्यादा देखा गया आईसीसी महिला टूर्नामेंट बन गया।

ग्रेच्युटी के लिए नहीं करना होगा 5 साल का इंतजार

नयी दिल्ली : सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को सरकार ग्रेच्युटी में राहत दे सकती है। अभी तक कर्मचारियों को कम्पनी में पांच साल पूरे करने के बाद ही ग्रेच्युटी मिलती है लेकिन सरकार इस न्यूनतम योग्यता को कम करने पर विचार कर रही है। नौकरी की सुरक्षा में गिरावट, रोजगार के बढ़ते अनुबंधों और कर्मचारियों के हित को ध्यान में रखते हुए संसदीय स्थायी समिति (श्रम) ग्रेच्युटी की पात्रता एक से तीन साल करने की सलाह दे रही है।

3 साल के बाद मिल सकती है ग्रेच्युटी 
कोविड-19 के बाद ग्रेच्युटी की समयसीमा कम करने की मांग ज्यादा उठने लगी है। एक अधिकारी ने कहा कि दो विकल्प हैं, अनुपात आधारित कुछ सेक्टर में बदलाव किये जाएं या पांच साल की समयसीमा सभी सेक्टर्स के लिए खत्म की जाए। सभी दूसरे विकल्प की मांग कर रहे हैं। स्थायी समिति ने एक से 3 साल करने की सलाह दी है, जो अभी पांच साल है।

योजना पर किया जा रहा है विचार
सरकारी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि ग्रेच्युटी की समयसीमा कम करने की मांग काफी समय से की जा रही है। अब इस योजना को आगे कैसे लेकर जाना है और पांच साल की समयसीमा को कितना कम किया जा सकता है, इस पर विचार किया जा रहा है।

5 साल की सीमा हो गई है पुरानी
लेबर मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि ग्रेच्युटी के लिए पांच साल की सीमा पुरानी है और अब ये कर्मचारियों के हित में काम नहीं करती। ट्रेड यूनियनों का दावा है कि कई फर्म लागत को बचाने के लिए कर्मचारियों को पांच साल से पहले ही हटा देती है। ताकि, उनकी ग्रेच्युटी की कॉस्ट बच जाए। जीनियस कंसल्टिंग के मुख्य कार्यकारी आर पी यादव ने कहा कि ग्रेच्युटी के लिए पांच सा`ल की समयसीमा लंबे समय तक काम करने के कल्चर को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि अब 2-3 साल की ग्रेच्युटी की समयसीमा एक बेहतर विकल्प होगा।

ऐसे कैलकुलेट होती है ग्रेच्युटी
कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान प्रत्येक वर्ष के वेतन के 15 दिनों के बराबर होता है। ये उसे संगठन में बिताए गए सालों की संख्या के आधार पर दिया जाता है।

सामाजिक सुरक्षा कोड में दी सलाह
हालांकि, श्रम मंत्रालय के अधिकारी ने कहा उन्हें इस बातचीत की आधिकारिक जानकारी नहीं है। स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में सामाजिक सुरक्षा कोड में सलाह दी है कि ग्रेच्युटी पर कार्यबल के सभी वर्गों पर ग्रेच्युटी का विस्तार हो।

 

बैंक में जाकर घटा सकेंगे लोन की ईएमआई, नहीं खराब होगा सिबिल स्कोर

नयी दिल्लीः जल्द ही ऋण लिए हुए लोग बैंक या फिर अन्य वित्तीय संस्थानों में जाकर के अपनी ईएमआई को कम करा सकेंगे। इस तरकीब से उनके सिबिल स्कोर पर भी किसी तरह का निगेटिव इफेक्ट नहीं पड़ेगा. लोन मोरेटोरियम लिए ग्राहकों को बैंकों ने अगस्त तक राहत दी थी, जिसमें बैंकों ने अपने लोन लिए ग्राहकों को किश्त भरने से छूट दी थी। हालांकि अब सितंबर से ऐसे लोगों को अपनी किस्त ब्याज के साथ जमा करनी होगी. ऐसे में उनके ऊपर एक बार फिर से ज्यादा ईएमआई का बोझ पड़ने लगेगा।

आरबीआई ने लिया था ये फैसला
आरबीआई के गवर्नर शशिकांत दास ने नई घोषणा में लोन सेटलमेंट के लिए एक और स्कीम को जारी किया है। इस योजना के जरिए भी ग्राहक अपना ऋण सेटलमेंट करा सकते हैं। अच्छी बात ये है कि इस स्कीम के लाभ से डिफॉल्टर वंचित रहेंगे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर ने मौद्रिक समीक्षा नीति की बैठक में कर्ज पुनर्गठन सुविधा (Debt restructuring facility) का ऐलान किया है। लोन रिस्ट्रक्चरिंग की मजूंरी मिलने के बाद अब बैंक अपने कर्जदारों के लोन वापसी का शेड्यूल फिर से तय कर सकते हैं। इसके तहत बैंक लोन चुकाने का पीरियड बढ़ा सकते हैं या पेमेंट में भी राहत दे सकते हैं।  इस रिस्ट्रक्चरिंग के तहत बैंक तय कर सकेंगे कि ईएमआई को घटाना है, ऋण की समयावधि बढ़ानी है, या सिर्फ ब्याज वसूलना है।

कोरोला काल में आरबीआई ने ग्राहकों को दी थी मोरेटोरियम लोन की सुविधा
इस स्कीम से पहले रिजर्व बैंक ने ग्राहकों को मोरेटोरियम का ऐलान लॉकडाउन की शुरुआत में 3 माह के लिए किया था लेकिन 22 मई को इसे तीन माह के लिए आगे बढ़ा दिया था। सेंट्रल बैंक के इस फैसले के बाद बैंकों से ऋण लेने वाले ग्राहकों की 6 महीने तक लोन की ईएमआई देने में छूट मिली थी लेकिन अब मोरेटोरियम लोन अवधि 31 अगस्त को खत्म होने जा रही है।

रिजर्व बैंक ने कहा, कि यह पुनर्गठन रिजर्व बैंक के 7 जून 2019 को जारी मितव्ययी रूपरेखा ढांचे (Frugal design framework) के अनुरूप होगा। गौरतलब है कि इससे पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस संबंध में कहा था कि जिन उद्योगों पर कोरोना वायरस का असर पड़ा है उनकी मदद के लिए सरकार कर्ज के पुनर्गठन की आवश्यकता को लेकर रिजर्व बैंक के साथ मिलकर काम कर रही है।

ईएमआई कम कराने का ये है विकल्प
बैंक ग्राहक अपने कर्ज की अवधि को बढ़ाकर के ईएमआई को कम करा सकते हैं। इससे उन्हें किश्त तो नियमित रूप से चुकानी पड़ेगी, पर राशि कम हो जाएगी। बैंकों के ऋण से जुड़ी बातों के जानकार सुनील सिंह का कहना है कि करीब 70 फीसद तक ग्राहकों ने अपने ऋण को मोरटोरियम योजना में शामिल कर लिया था। बैंकों के माध्यम से सरकार ने कोरोना काल में ग्राहकों को राहत दी थी, लेकिन सितंबर से किश्त चुकानी पड़ेगी। राहत यह है कि कर्ज की समयावधि बढ़ाकर ईएमआई कम की जा सकेगी। बैंक रिस्ट्रक्चर अपने स्तर पर ही कर सकेंगे। इससे ग्राहक की सिबिल खराब नहीं होगी।

(साभार – जी न्यूज)