Thursday, April 9, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 411

बंगाल में ठंड बढ़ी, कोलकाता में 2 दिन में पारा 7 डिग्री लुढ़का

कोलकाता : बंगाल में पारा तेजी से उतर रहा है। कोलकाता की बात करें तो पिछले दो दिनों में तापमान में सात डिग्री की गौर करने लायक गिरावट दर्ज हुई है। सोमवार कोलकाता में न्यूनतम तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से तीन डिग्री कम है। वहीं रविवार को महानगर में न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। पिछले शनिवार को यह 22 डिग्री सेल्सियस था। जिलों में भी मौसम ठंडा रहेगा।

जिलों में भी मौसम ठंडा रहेगा –अलीपुर मौसम कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक अगले 48 घंटे भी तापमान मौजूदा स्तर के आसपास रहेगा। कोलकाता में शनिवार सुबह तेज बारिश हुई थी, तापमान में काफी गिरावट देखने को मिली थी।

तेजी से ठंड पड़ने की उम्मीद –बारिश का दौर खत्म होने के बाद तेजी से ठंड पड़ने की उम्मीद की जा रही थी और ऐसा ही हुआ। मौसम विभाग पहले ही कह चुका है कि इस बार बंगाल में कड़ाके की ठंड पड़ेगी और ज्यादा समय तक ठहरेगी भी।

निजी अस्पतालों ने ‘कोविड इलाज’ के नाम पर बढ़ा-चढ़ाकर पैसे लिए : रिपोर्ट

नयी दिल्ली :  एक संसदीय समिति ने शनिवार को कहा कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी और इस महामारी के इलाज के लिए विशिष्ट दिशानिर्देशों के अभाव में निजी अस्पतालों ने काफी बढ़ा-चढ़ाकर पैसे लिए। इसके साथ ही समिति ने जोर दिया कि स्थायी मूल्य निर्धारण प्रक्रिया से कई मौतों को टाला जा सकता था।
स्वास्थ्य संबंधी स्थायी संसदीय समिति के अध्यक्ष राम गोपाल यादव ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को ‘कोविड-19 महामारी का प्रकोप और इसका प्रबंधन’ की रिपोर्ट सौंपी। सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी से निपटने के संबंध में यह किसी भी संसदीय समिति की पहली रिपोर्ट है। समिति ने कहा कि 1.3 अरब की आबादी वाले देश में स्वास्थ्य पर खर्च ‘बेहद कम है’ और भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की नाजुकता के कारण महामारी से प्रभावी तरीके से मुकाबला करने में एक बड़ी बाधा आयी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसलिए समिति सरकार से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अपने निवेश को बढ़ाने की अनुशंसा करती है। समिति ने सरकार से कहा कि दो साल के भीतर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.5 प्रतिशत तक के खर्च के राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करें क्योंकि वर्ष 2025 के निर्धारित समय अभी दूर हैं और उस समय तक सार्वजनिक स्वास्थ्य को जोखिम में नहीं रखा जा सकता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में 2025 तक जीडीपी का 2.5 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवा पर सरकारी खर्च का लक्ष्य रखा गया है जो 2017 में 1.15 प्रतिशत था। समिति ने कहा कि यह महसूस किया गया कि देश के सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या कोविड और गैर-कोविड मरीजों की बढ़ती संख्या के लिहाज से पर्याप्त नहीं थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी अस्पतालों में कोविड के इलाज के लिए विशिष्ट दिशानिर्देशों के अभाव के कारण मरीजों को अत्यधिक शुल्क देना पड़ा। समिति ने जोर दिया कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और महामारी के मद्देनजर सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर साझेदारी की जरूरत है। समिति ने कहा कि जिन डॉक्टरों ने महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान दे दी, उन्हें शहीद के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए और उनके परिवार को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए।

भारतवंशी डॉक्टर ने की कोरोना के संभावित इलाज की पहचान

वाशिंगटन : कोरोना मरीजों के फेफड़ों को होने वाले नुकसान और अंगों को बेकार होने से बचाने के लिए भारतीय मूल की अमेरिकी डॉक्टर ने एक इलाज की खोज की है। भारत में जन्मीं और टेनेसी की सेंट ज्यूड चिल्ड्रेन रिसर्च हॉस्पिटल में कार्यरत डॉ. तिरुमला देवी कन्नेगांती का इससे संबंधित अध्ययन जर्नल सेल के ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित हुआ है।
उन्होंने चूहों पर शोध के दौरान पाया कि कोरोना होने पर कोशिकाओं में सूजन की वजह से अंगों के बेकार होने का संबंध ‘हाइपरइनफ्लेमेटरी’ प्रतिरोध है जिससे अंतत: मौत हो जाती है। इस स्थिति से बचाने वाली संभावित दवाओं की उन्होंने पहचान की है।
सूजन वाली कोशिकाओं के मृत होने के संदेश प्रसारित होते हैं
शोधकर्ता ने विस्तार से अध्ययन कर यह पता लगाया है कि कैसे सूजन वाली कोशिकाओं के मृत होने के संदेश प्रसारित होते हैं जिसके आधार पर उन्होंने इसे रोकने की पद्धति का अध्ययन किया। सेंट ज्यूड अस्पताल के इम्यूनोलॉजी विभाग से जुड़ीं डॉ. कन्नेगांती ने कहा, ‘काम करने के तरीके और सूजन पैदा करने के कारणों की जानकारी बेहतर इलाज पद्धति विकसित करने में अहम है।’
डॉ. कन्नेगांती सेंट ज्यूड चिल्ड्रेन रिसर्च हॉस्पिटल से जुड़ी हैं
बता दें कि कन्नेगांती का जन्म और पालन-पोषण तेलंगाना में हुआ है। उन्होंने वारंगल के काकतिय विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र, जंतु विज्ञान और वनस्पति विज्ञान से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने परास्नातक और पीएचडी की उपाधि भारत के उस्मानिया विश्वविद्यालय से प्राप्त की। वर्ष 2007 में डॉ. कन्नेगांती टेनेसी राज्य की मेमफिस स्थित सेंट ज्यूड अस्पताल से जुड़ी हैं।
कोशिका में सूजन पैदा करने वाला साइटोकींस की पहचान की
उन्होंने कहा, ‘इस शोध से हमारी समझ बढ़ेगी। हमने उस खास साइटोकींस (कोशिका में मौजूद छोटा प्रोटीन जिससे संप्रेषण होता है) की पहचान की है जो कोशिका में सूजन पैदा करता है और व्यक्ति को मौत के रास्ते पर ले जाता है। इस शोध में श्रद्धा तुलाधर, पीरामल समीर, मिन झेंगे, बालामुरुगन सुंदरम, बालाजी भनोठ, आरके सुब्बाराव मलिरेड्डी आदि भी शामिल हैं।
डब्ल्यूएचओ ने दी रेमडेसिविर का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शुक्रवार को सलाह दी कि अस्पताल में भर्ती मरीजों पर कोरोना वायरस के इलाज में रेमडेसिविर का इस्तेमाल नहीं किया जाए। एक बयान के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ ने अस्पताल में भर्ती मरीजों में रेमडेसिविर के इस्तेमाल के खिलाफ सशर्त सिफारिश जारी की है, भले ही बीमारी कितनी भी गंभीर हो। इसकी वजह यह है कि वर्तमान में इस बात के कोई सुबूत नहीं हैं कि रेमडेसिविर इन मरीजों में जीवन या अन्य परिणामों में कोई सुधार करती है।

 

100 साल के हुए पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रघुनाथ चंदोरकर

मुम्बई : पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रघुनाथ चंदोरकर ने शनिवार 21 नवम्बर को जीवन के 100 बसंत पूरे कर लिए। अपने जीवन का शतक पूरे करने वाले वह तीसरे क्रिकेटर हैं। जीवन के 100 साल पूरे करने वाले दो अन्य भारतीय क्रिकेटर डीबी देवधर और वसंत रायजी हैं। चंदोरकर का प्रथम श्रेणी करियर 1943/44 से 1950/51 तक चला जिसमें वह महाराष्ट्र और मुंबई की तरफ से खेले। चंदोरकर ने अपने करियर के दौरान सात प्रथम श्रेणी मैच खेले। उन्होंने अपना पदार्पण महाराष्ट्र के लिए बॉम्बे के खिलाफ किया और उनका आखिरी मैच बॉम्बे के लिए महाराष्ट्र के खिलाफ था। चंदोरकर एक विकेटकीपर बल्लेबाज थे और अपनी शानदार बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने सात मैचों में 155 रन बनाए और इसके साथ ही उन्होंने विकेटकींिपग में तीन कैच और दो स्टंप भी किए थे। चंदोरकर से पहले प्रो.डीबी देवधर (1892-1993) और वसंत रायजी (1920-2020) दो भारतीय क्रिकेटर हैं, जिन्होंने अपना 100वां जन्मदिन मनाया है।

कनाडा लौटाएगा भारत की एक खास मूर्ति, 100 साल से भी पहले हुई थी चोरी

टोरंटो : कनाडा का एक विश्वविद्यालय ‘ऐतिहासिक गलतियों को सही करने’ और ‘उपनिवेशवाद की अप्रिय विरासत’ से उबरने की कोशिश के तहत हिंदू देवी अन्नपूर्णा की अनोखी मूर्ति भारत को लौटाएगा, जिसे एक सदी से अधिक समय पहले भारत से चुराकर लाया गया था। यह मूर्ति मैकेंजी आर्ट गैलरी में रेजिना विश्वविद्यालय के संग्रह का हिस्सा है। यह मूर्ति नोर्मान मैकेंजी के 1936 के मूल वसीयत का हिस्सा है। विश्वविद्यालय ने एक बयान में बताया कि कलाकार दिव्या मेहरा ने इस तथ्य को ओर ध्यान आकृष्ट किया कि इस मूर्ति को एक सदी से भी पहले गलत तरीके से लाया गया। जब वह मैकेंजी के स्थायी संग्रह को खंगाल रही थीं और अपनी प्रदर्शनी की तैयारी कर रही थीं तब उनका ध्यान इस ओर गया। बयान के अनुसार, 19 नवंबर को इस मूर्ति का डिजिटल तरीके से लौटाने का कार्यक्रम हुआ और अब उसे शीघ्र ही वापस भेजा जाएगा। विश्वविद्यालय के अंतरिम अध्यक्ष और कुलपति डॉ. थॉमस चेज ने इस मूर्ति को आधिकारिक रूप से भारत भेजने के लिए कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया से डिजिटल तरीके से मुलाकात की। बिसारिया ने कहा, ”हम खुश हैं कि अन्नपूर्णा की यह अनोखी मूर्ति अपनी गृह वापसी की राह पर है। मैं भारत को इस सांस्कृतिक विरासत को लौटाने को लेकर सक्रिय कदम उठाने को लेकर रेजिना विश्वविद्यालय के प्रति आभारी हूँ।”विश्वविद्यालय ने कहा कि अपनी गहन छानबीन के आधार पर मेहरा इस निष्कर्ष पर पहुँचीं कि 1913 में अपनी भारत यात्रा के दौरान मैकेंजी की नजर इस प्रतिमा पर पड़ी और जब एक अजनबी को मैकेंजी की इस मूर्ति को पाने की इच्छा का पता चला तो उसने वाराणसी में गंगा के घाट पर उसके मूल स्थान से उसे चुरा लिया।

कोलकाता : सर्दियों में जल कमान से नियंत्रित किया जायेगा वायु प्रदूषण

कोलकाता : कोलकाता नगर निगम (केएमसी) सर्दियों के समय वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अभिनव पहल करते हुए जल कमान का इस्तेमाल करेगा। गौरतलब है कि सर्दियां शुरू होते ही हवा में कार्बन की मात्रा बढ़ जाती है इसलिए विशेषज्ञों की सलाह पर, केएमसी ने जल कमान का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। पर्यावरणविदों के मुताबिक दैनिक ऑक्सीजन की कमी से निपटने का सबसे अच्छा तरीका अत्याधुनिक ‘मिस्ट कैनन’ का इस्तेमाल है। जल कमान से निकलने वाला हजारों लीटर पानी हवा में तैरते कार्बन कणों की संख्या को कम करता है, जिससे प्रदूषण का स्तर भी नियंत्रित होता है। मिस्ट कैनन का इस्तेमाल कोलकाता में कोरोना महामारी की शुरुआत के समय सड़कों को सैनिटाइज करने में किया गया था। जल कमान को महानगर की घनी आबादी वाले इलाकों में प्रतिदिन दोपहर बाद इस्तेमाल किया जाएगा। जानकारों के मुताबिक यह प्रदूषण की दर (पीएम 2.5) को कम कर सकता है।केएमसी के मुख्य प्रशासक व राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा-‘चक्रवाती तूफान ‘एम्फन’ में कोलकाता में 18,000 बड़े पेड़ गिर गए थे, जिससे इस बार सर्दियों में प्रदूषण की मात्रा आर बढ़ने की आशंका है इसलिए मिस्ट कैनन का घनी आबादी वाले इलाकों में इस्तेमाल किया जाएगा।’
केएमसी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जल कमान को चरणबद्ध तरीके से 12 इलाकों में उपयोग में लाया जाएगा। यह भी तय किया गया है कि विक्टोरिया के आसपास जहां पेड़ों की कतारें हैं, उनकी पत्तियों को एक स्प्रिंकलर से धोया जाएगा। पर्यावरणविद् सौमेंद्रमोहन घोष ने केएमसी की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पत्तियों को धोने से बहुत अधिक ऑक्सीजन मिलेगी क्योंकि पेड़ों के पत्ररंध्र पूरी तरह से मुक्त हो जाएंगे।

 

अब फालतू खर्च पर लगेगी लगाम, गूगल करेगा आपकी मदद

नयी दिल्ली : ने अपने डिजिटल पेमेंट ऐप गूगल ऐप को पूरी तरह से रीडिजाइन कर दिया है। गूगल का दावा है कि नए बदलाव से गूगल पे उपयोगकर्ताओं को मनी सेविंग में आसानी हो जाएगी। साथ ही यूजर अपने खर्च पर नजर रख सकेंगे। गूगल पे के नए बदलाव एंड्राइड के साथ आईओएस यूजर के लिए होंगे। हालांकि गूगल की तरफ से शुरुआत में गूगल पे में बदलाव केवल अमेरिकी यूजर के लिए किया गया है। हालांकि जल्द ही भारत समेत बाकी दुनिया में गूगल पे का अपडेट मिलेगा।
क्या होगा बदलाव
गूगल पे के पुराने ऐप में आपको बैंक कार्ड डिटेल और हालिया ट्रांजैक्शन होम पेज पर नजर आते थे। लेकिन नए गूगल पे ऐप में न केवल ट्रांजैक्शन डिटेल मिलेगी, बल्कि यूजर अपने रोजाना के खर्च को चेक कर पाएंगे। नए ऐप में आपको डिजिटल पेमेंट के साथ ही मैसेजिंग टूल भी मिलेगा। गूगल पे ऐप के रीडिजाइन ऐप में यूजर अपने सबसे ज्यादा ट्रांजैक्शन करने वाले लोगों को ट्रैक कर पाएगा। साथ अगर आप किसी कॉन्टैक्ट पर क्लिक करते हैं, तो उसके साथ की पुरानी सभी ट्रांजैक्शन डिटेल दिखेगी। यह एक चैट क्लिक बबल में दिखेगी। इसी चैट बॉक्स में आपको पेमेंट का ऑप्शन मिलेगा, जहां आप मनी रिक्वेस्ट, बिल देख पाएंगे।
फालतू खर्च पर लगेगी लगाम
गूगल पे में एक ग्रुप चैट फीचर भी मिलेगा, जहां आप एक ग्रुप में कंट्रीब्यूशन कर पाएंगे। साथ ही देख पाएंगे कि किसने ट्रांजैक्शन किया है और किसने नही। गूगल पे का सबसे बेहतरीन फीचर फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम है। मतलब यूजर की ओर से अपने कार्ड को ऐप से कनेक्ट करने पर अपने सभी खर्च पर सिंगल क्लिक पर नजर रख पाएगा। साथ ही हर महीने अपने खर्चे की लिस्ट देख पाएगा। वहीं अगर आप डिनर या पार्टी और शॉपिंग में ज्यादा खर्च कर देते हैं, तो इसे लेकर गूगल आपको आगाह भी करेगा। इससे यूजर को अपने खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

 

डाटा सुरक्षा कानून को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा : रविशंकर प्रसाद

बेंगलुरु : केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को कहा कि सरकार भारत को डाटा अर्थव्यवस्था के बहुत बड़े केंद्र के तौर पर विकसित करना चाहती है और बहुत जल्द डाटा सुरक्षा कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, मैं भारत को डाटा अर्थव्यवस्था के बहुत बड़े केंद्र के तौर पर विकसित करना चाहता हूं। डाटा से डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। यह अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य को भी बढ़ाने में उपयोगी होगा।‘बेंगलुरु प्रौद्योगिकी सम्मेलन, 2020’ को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए प्रसाद ने कहा कि भारत में बड़े पैमाने पर डाटा का सृजन होता है और मोबाइल फोन और आधार जैसी डिजिटल व्यवस्था से डाटा तैयार होता है।
उन्होंने कहा, हम जल्द ही डाटा सुरक्षा कानून को अंतिम रूप देंगे।भारत डाटा अर्थव्यवस्था, डाटा नवाचार, डाटा परिशोधन के लिए क्रांति का इंतजार कर रहा है। प्रसाद ने कहा, मैं (कर्नाटक के) मुख्यमंत्री से यह सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं कि राज्य को भारत की डाटा अर्थव्यवस्था का बड़ा केंद्र बनाएं।
कर्नाटक सरकार के साथ कर्नाटक नवाचार और प्रौद्योगिकी सोसाइटी, सूचना प्रौद्योगिकी पर राज्य सरकार के दृष्टिकोण समूह, जैव-प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप तथा सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित यह सम्मेलन आज 19 नवंबर से 21 नवंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया।
प्रसाद ने कहा कि महामारी के दौरान भी संचार क्षेत्र में सात प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई और बड़ी वैश्विक कंपनियों ने निवेश किया। उन्होंने कहा, यह चुनौतीपूर्ण समय है और हमने इसे एक अवसर में बदलने का फैसला किया है।उन्होंने कहा कि विश्व स्तर की कंपनियां वैकल्पिक स्थान की तलाश कर रही हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोबाइल निर्माण में भारत की बड़ी कामयाबी के मद्देनजर हम प्रोत्साहन देने के साथ उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रसाद ने कहा कि भारत समेत दुनिया की बड़ी कंपनियों ने अगले पांच साल में 11 लाख करोड़ रुपए का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है और मोबाइल तथा कल-पुर्जे के निर्माण की पेशकश की है। इसमें से सात लाख करोड़ रुपए केवल निर्यात के लिए होंगे।

पाकिस्तान के स्वात में मिला 1300 साल पुराना हिन्दू मंदिर

स्वात :  पश्चिमी पाकिस्तान के स्वात जिले के एक पहाड़ में पाकिस्तानी और इतालवी पुरातात्विक विशेषज्ञों ने 1,300 साल पुराने एक हिंदू मंदिर को खोज निकाला है। बारिकोट घुंडई में खुदाई के दौरान इस मंदिर का पता लगा।
खैबर पख्तूनख्वा के पुरातत्व विभाग के फजले खलीक ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह मंदिर भगवान विष्णु का है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर 1,300 साल पहले हिंदू शाही काल के दौरान बनाया गया था।
हिंदू शाही या काबुल शाही (850-1026 ई) एक हिंदू राजवंश था जिसने काबुल घाटी (पूर्वी अफगानिस्तान), गंधार (आधुनिक पाकिस्तान) और वर्तमान उत्तर पश्चिम भारत में शासन किया था। खुदाई के दौरान मंदिर स्थल के पास छावनी और पहरे के लिए मीनारें आदि भी मिले हैं। विशेषज्ञों को मंदिर के पास पानी का कुंड भी मिला है। संभवत: श्रद्धालु पूजा से पहले वहां स्नान करते थे। इलाके में पहली बार हिंदू शाही काल के निशान मिले हैं।
इटली के पुरातत्व मिशन के प्रमुख डॉ लुका ने कहा कि स्वात जिले में मिला गंधार सभ्यता का यह पहला मंदिर है। स्वात जिले में बौद्ध धर्म के भी कई पूजा स्थल स्थित हैं। खलीक ने कहा कि स्वात जिला हजार साल पुराने पुरातत्व स्थलों का घर है और इलाके में पहली बार हिंदू शाही काल के निशान पाए गए हैं। इटली के पुरातत्व मिशन के प्रमुख डॉ लुका ने कहा कि स्वात जिले में मिला गंधार सभ्यता का यह पहला मंदिर है। स्वात जिला पाकिस्तान के शीर्ष 20 स्थलों में से है जो प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और पुरातात्विक स्थलों जैसे हर तरह के पर्यटन का घर है। स्वात जिले में बौद्ध धर्म के भी कई पूजा स्थल स्थित हैं।

 

ऐ सखी सुन – परिवेश हो या पर्यावरण, सुन्दर बनाना होगा

गीता दूबे

ऐ सखी सुन 5

सभी सखियों का मेरा नमस्कार। सखियों, त्यौहारों का सिलसिला अभी तक जारी है और दीपावली, भाई दूज के बाद अब छठ की तैयारी है जो बिहार का महापर्व माना जाता है। और अब तो यह पर्व बिहार की सीमा का अतिक्रमण कर पूरे देश ही नहीं दुनिया के कई हिस्सों में जोर शोर से मनाया जाता है। जहाँ- जहाँ बिहारी लोगों की बस्तियां आबाद हुईं वहाँ वहाँ उनके रीति रिवाज, खान -पान और‌ पर्व -संस्कृति ने भी अपनी पहचान कायम की। और इस तरह छठ की महिमा फैलती गई। तमाम भारतीय त्यौहारों की तरह यह भी  परिवार केन्द्रित त्यौहार है जिसमें निसंदेह स्त्रियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। हालांकि कहनेवाले कह ही सकते हैं कि इसमें पूरे परिवार की भूमिका रहती है लेकिन तमाम और पर्व त्यौई की ही भांति स्त्रियों के कंधे पर हमेशा की तरह कुछ अतिरिक्त भार पड़ता है जिसे वह खुशी -खुशी उठाती भी हैं वह चाहे घर की साफ सफाई करना हो, नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करना हो या फिर कठिन उपवास करते हुए भी मीठे ठेकुए का प्रसाद‌ बनाना हो।‌ यह स्त्री की शक्ति ही है कि वह भूखे रहकर भी तमाम लोगों के लिए सुस्वादु भोजन या प्रसाद बनाना नहीं भूलती। और‌ मेरी प्यारी सखियों, आश्चर्य की बात कहें या चिंता की कि स्त्री की जिस शक्ति और वैशिष्ट्य के लिए उसकी सराहना होनी चाहिए वही उसके शोषण का कारण बन जाती है। समाज सदियों से स्त्री पूजा का छद्म रचते हुए उसकी सहनशक्ति की परीक्षा लेता रहता है। जब तक वह सहती है तब तक देवी और जैसे ही अपनी जुबान खोलकर किसी बात का विरोध करने का निर्णय लेती है रातों-रात कुलटा साबित कर दी जाती है। लेकिन इससे देवी पूजा की परंपरा कभी बाधित नहीं होती। वह ज्यों की त्यों वर्तमान है और उसका स्वरूप समय के साथ बदलता या नये रूप में ढलता संवरता रहता है। शायद यही कारण है कि भारतीय परंपरा में कोई भी त्यौहार देवताओं के साथ साथ देवियों को उसी अविभाज्य रूप में शामिल करता है जैसे किसी भी सहज स्वाभाविक परिवार में स्त्री पुरुष की समान भूमिका होती है। तकरीबन सभी देव अपनी- अपनी देवियों के साथ ही पूजित होते हैं, जैसे शिव पार्वती, राम सीता, विष्णु लक्ष्मी आदि। और कुछ देवियों यथा काली, दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी आदि की अलग से पूजा का विधान भी है अर्थात देवियों का पलड़ा पूजा के‌ आसन पर किसी भी रूप में देवों से कम नहीं है। शायद इसी कारण लोक पर्वों में बहुत से देवताओं की पूजा भी प्रकारांतर‌ से देवी पूजा का रूप ले लेती है। 

हाँ सखियों, बिल्कुल सही समझा आपने। मैं यहाँ छठ पर्व की बात कर रही हूँ। है तो यह सूर्य की उपासना का पर्व जिसमें पहले ढलते हुए सूर्य की पूजा की जाती है और उसके बाद उगते हुए सूर्य की उपासना कर, व्रत का पारण अर्थात अन्नग्रहण किया जाता है। लेकिन लोक आस्था इस देव पूजा को किस तरह देवी पूजा में बदल देती है, इसका सुंदर उदाहरण यह पर्व है। व्रती या उपासक सूर्य की जय-जयकार करने के साथ साथ छठी मैया से वरदान भी माँगते हैं। दरअसल सूर्य अर्थात प्रकृति पूजा का यह सिलसिला मानव सभ्यता के आदिम काल से आरंभ हुआ और आज भी बदलते परिवेश और आधुनिकता की बयार के बावजूद जारी है। चूंकि हमारे समाज में बहुत सी देवियों का प्रभाव है, सकारात्मक और नकारू दोनों ही रूपों में, अर्थात सामान्य मनुष्य उनसे डरता भी है और‌ उनकी पूजा भी करता है शायद इसी वजह से सूर्योपासना का यह पर्व देवी पूजा के रूप में सहजता से ढल गया होगा। इसके पीछे के कारणों या मान्यताओं पर कभी और विस्तार से बात करूंगी। 

प्रकृति पूजा, देवी पूजा या लोक आस्था के इस व्रत की एक बड़ी विशेषता है कि इस में शारीरिक और मानसिक स्वच्छता को इतना अधिक महत्व दिया जाता है कि यह भय लोगों के मन में बना रहता है कि नियम भंग होने से छठी मैया नाराज हो जाएंगी और उनका क्रोध परिवार को नष्ट कर देगा। इसीलिए तमाम नियमों का पालन एक भयमिश्रित आस्था के साथ किया जाता है। समसामयिक परिस्थितियों में जहां करोना नामक वायरस ने हमारे देश ही नहीं पूरी दुनिया के शारीरिक मानसिक और आर्थिक स्वास्थ्य को संकट में डाल दिया है , तब हमें स्वच्छता का महत्व अनायास ही समझ में आ रहा है और‌ दीपावली तथा छठ जैसे लोक पर्वों का महत्व भी जिसमें साफ सफाई पर अत्याधिक महत्व दिया जाता है। लेकिन समस्या यह है कि हम अपने घरों का कचरा तो साफ करते हैं लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर बेझिझक गंदगी बिखेरते हैं। छठ के पहले जिन घाटों को साफ सुथरा कर‌ चमका दिया जाता है वही घाट पूजा के समापन के बाद गंदगी के ढेरों से ढँक जाते हैं।

एक सवाल पूछना चाहती हूँ सखियों, क्या साफ सफाई की इस व्यवस्था को हम अपने रोजमर्रा के जीवन का अविभाज्य और स्वाभाविक हिस्सा नहीं बना सकते ? क्यों हम पर्व त्यौहारों पर ही साफ सफाई करें, क्यों न साफ सफाई को जीवन का मूलमंत्र बना लें। क्यों सिर्फ अपने घर की सफाई को ही महत्त्व न दें बल्कि सार्वजनिक स्थलों को भी साफ रखने की कोशिश करें। अब यह मत पूछना सखी कि मैं यह बात आप सखियों से ही क्यों कह रही हूं, तो आप ही बताइए का मैं किस से कहूं ? जिस तरह हर पर्व त्यौहार में हम औरतें कमर कस कर सफाई अभियान में लग जाती हैं, बच्चों को बात -बात पर साफ सुथरा रहने की हिदायत देती हैं, उसी तरह हमें परिवेश की स्वच्छता की जिम्मेदारी भी अपने मजबूत कंधों पर उठानी होगी। कब तक हम इस प्रतीक्षा में रहेंगे कि कोई दूसरा मसीहा, नेता या समाज सुधारक आएगा और समाज उसके पीछे-पीछे चल पड़ेगा। वह दौर समाप्त हो गया। अब हमें यह काम अपने ‌हाथों में लेना होगा और परिवार और समाज को एक दिशा देनी होगी।  तो आइए, आज साथ मिलकर यह शपथ लें कि परिवेश हो या पर्यावरण, घर हो या समाज, उसे स्वच्छ और सुंदर बनाने की जिम्मेदारी न केवल हम स्वयं उठाएंगे बल्कि औरों को भी इस राह पर चलना सिखाएंगे। फिलहाल विदा, अगली मुलाकात तक के लिए।