Thursday, April 9, 2026
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ऑनलाइन माध्यमों को लेकर गम्भीर ही नहीं जिम्मेदार होने की भी जरूरत है

कोविड -19 के कारण काम करने का तरीका बदला है और ऑनलाइन माध्यमों की पकड़ गहरी हो रही है। ऑनलाइन माध्यमों का अपना महत्व है पर क्या सामान्य माध्यमों की जगह ले सकते हैं….? फौरी तौर पर देखा जाए तो जवाब हाँ में हो सकता है मगर हकीकत देखी जाए तो जवाब न ही होगा…विकल्प स्थायी समाधान नहीं हो सकता।। ऑनलाइन कक्षाएं अस्थायी तौर पर चल सकती हैं मगर क्लासरूम ही ऐसी जगह है जहाँ शिक्षक और विद्यार्थी, दोनों को सुकून मिलेगा। यही बात ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यक्रमों और पत्रकारिता पर भी लागू होती है। जमीन पर उतरे बगैर न तो कार्यक्रम हो सकते हैं और न पत्रकारिता ही की जा सकती है। अगर आप ऑनलाइन माध्यम के जरिए भी काम कर रहे हैं तो भी आपको फील्ड पर जाना ही पड़ेगा वरना पत्रकार और कलम घिसाऊ लोगों में कोई फर्क नहीं रहेगा और आप जो कहेंगे, उसमें प्रामाणिकता भी नहीं रहेगी। आज ऐसे ऑनलाइन सृजनात्मकता के नाम पर ऐसी वेबसाइट्स और ऐप की बाढ़ आ गयी है जो आपकी रचनाएं छापने का दावा करते हैं, छाप भी देते हैं मगर जल्दबाजी में छापी गयी इन रचनाओं में सम्पादन नहीं होता. नतीजा यह होता है कि अशुद्धियों से भरी रचनाएं सामने आती हैं…ऑनलाइन वेबसाइट का फायदा होता है, प्रतिभागी को भी छपने की खुशी होती है पर क्या यह क्षणिक प्रसन्नता स्थायी है…जरूरी है कि ऑनलाइन दुनिया में भी ऑफलाइन जिम्मेदारी को ऑनलाइन बनाया जाए। कहने का मतलब यह है कि ऑनलाइन माध्यमों के साथ भी हमें जिम्मेदारी के साथ ही रहना होगा क्योंकि यह जरूरी भी है और आने वाले समय की माँग भी।

देश को मिला ‘बेंगलुरु मेढक’, पहली बार देश में शहर के नाम पर रखा मेढ़क का नाम

गड्‌ढा खोदने के लिए जाना जाता है यह भूरा मेढक
बंगलुरू : जमीन में गड्‌ढा खोदने वाले एक मेढक का नाम बेंगलुरु के नाम पर रखा गया है। इसे 2018 में खोजा गया था। यह पहली बार है जब देश किसी शहर के नाम पर मेढक का नाम रखा गया है। मेढक की इस नयी प्रजाति का नाम ‘स्फेरोथिका बेंगलुरु’ रखा गया है। इसे खोजने वाले माउंट कार्मल कॉलेज के प्रोफेसर दीपक पी. ने मेढक की तस्वीरें जुलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में भेजी हैं। इस पर और रिसर्च की जानी है।
मेढक का नामकरण करने वाली वैज्ञानिकों की टीम का कहना है, मेढकों के रहने की प्राकृतिक जगह को दोबारा तैयार करने की जरूरत है। यह मेढक बेंगलुरु शहर के राजनकुंटे में एक बंजर जगह पर मिला था।
भारत में जल-जमीन पर रहने वाले जीवों की खोज बढ़ीं
मेढक पर हुई रिसर्च इंटरनेशनल जर्नल जूटॉक्सा में पब्लिश हुई है। रिसर्च कहती है, जमीन और पानी दोनों जगह रहने वाले ऐसे एम्फीबियन्स जीवों की खोज भारत में पिछले कुछ सालों में बढ़ी हैं। वर्तमान में मिली मेढक की नई प्रजाति जमीन में गड्‌ढे खोदने के लिए जानी जाती है।
जंगल के बाहर मिल सकती है यह प्रजाति
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि मेढक की यह नई प्रजाति जंगलों के बाहर भी मिलेगी और खासतौर पर शहरों में इनकी संख्या ज्यादा हो सकती है। प्रो. दीपक कहते हैं, मेरा बचपन इसी शहर में गुजरा है और मैंने इसी शहर में अनोखे मेढक की खोज की, इससे मैं काफी खुश हूँ। प्रो. दीपक कहते हैं, इस प्रजाति को सुरक्षित रखना और इसके लिए रहने लायक जगह तैयार करना हमारे लिए बड़ी जिम्मेदारी है। हम देश में और नई प्रजातियां खोजने की कोशिश में जुटे हैं। देश के सबसे तेज विकसित होने वाले शहरों में नई प्रजाति खोजने की कोशिश कर रहे हैं। यह काफी चैलेंजिंग भी है

कैब में महिला यात्रियों को मिलेगा महिलाओं के साथ यात्रा करने का विकल्प

मुम्बई : उबर और ओला जैसे कैब एग्रीगेटर की गाड़ियों में अगर महिला यात्री यह चाहती है कि वह केवल महिला यात्रियों के साथ ही यात्रा करेगी तो इसका विकल्प कंपनियों को देना होगा। सड़क परिवहन और हाइवे मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा निर्देश में इस नियम को लागू किया गया है।
पूलिंग सुविधा दे सकते हैं
दिशानिर्देशों में कहा गया है कि कैब एग्रीगेटर उन यात्रियों को पूलिंग सुविधा प्रदान कर सकते हैं, जिनका डिटेल्स और केवाईसी उपलब्ध है और जो एक ही रास्ते से यात्रा कर रहे हैं। लेकिन यदि स्टॉप के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक कोई यात्रा करता है तो इसके लिए ऐप के जरिए एक वर्चुअल कांट्रैक्ट करना होगा। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि यात्री पूलिंग का लाभ उठाने की इच्छुक महिला यात्रियों को केवल अन्य महिला यात्रियों के साथ पूल करने का विकल्प प्रदान किया जाएगा।
बुकिंग कैंसल पर 100 रुपये से ज्यादा पेनाल्टी नहीं
ऐप पर बुकिंग स्वीकार करने के बाद ड्राइवर द्वारा बुकिंग कैंसल होती है तो कुल किराये का 10 प्रतिशत से ज्यादा की पेनाल्टी नहीं होनी चाहिए। यह पेनाल्टी 100 रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर बुकिंग को यात्री कैंसल करता है तो भी इसी अनुपात में पेनाल्टी होनी चाहिए
ज्यादा किराया वसूला तो लाइसेंस सस्पेंड
नियमों के अनुसार ओला एवं उबर अगर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाती हैं तो उनका लाइसेंस भी सस्पेंड हो सकता है। अगर यात्री से ज्यादा किराया भी वसूला जाता है तो भी लाइसेंस रद्द हो जाएगा।कैब एग्रीगेटर को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी ड्राइवरों के लिए एक इंटीग्रेटेड स्वास्थ्य बीमा हो, जिसकी  बीमा राशि 5 लाख रुपये से कम न हो। इसका बेस ईयर 2020-21 माना जाएगा और हर साल इसमें 5 पर्सेंट की बढ़त की जाएगी। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि टर्म इंश्योरेंस हर ड्राइवर्स के लिए हो। इसकी रकम 10 लाख रुपए से कम नहीं होनी चाहिए। इसमें भी सालाना 5 प्रतिशत की बढ़त होगी।
ड्राइवर की ड्यूटी 12 घंटे से ज्यादा न हो
एग्रीगेटर को यह सुनिश्चित करना होगा कि ड्राइवर की ड्यूटी 12 घंटे से ज्यादा एक दिन में न हो। ड्राइवर को 10 घंटे का अनिवार्य ब्रेक देना होगा। एग्रीगेटर को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो भी डाटा ऐप पर जनरेट होता है उसे भारत के सर्वर पर होना चाहिए। इस तरह के डेटा को कम से कम तीन महीने और अधिकतम 24 महीने तक रखना होगा। यह डाटा राज्य सरकार के साथ साझा करना चाहिए। ग्राहक से संबंधित किसी भी डाटा को उसकी लिखित मंजूरी के बिना किसी से साझा नहीं करना चाहिए।
कंट्रोल रूम भी स्थापित करना होगा
इसी के साथ इन कंपनियों को 24 घंटे सातों दिन के ऑपरेशन वाला एक कंट्रोल रूम भी स्थापित करना होगा। यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी गाड़ियां अच्छी तरह से मेंटेन हों और कंट्रोल रूम से हमेशा संपर्क में रहें। कंट्रोल रूम को सभी गाड़ियों के मूवमेंट को एग्रीगेटर के निर्देश पर निगरानी करनी चाहिए।गाइडलाइंस के मुताबिक सभी गाड़ियों को एक दिन में अधिकतम दो राइड शेयरिंग की दो शहरों के बीच में हो सकती है। हफ्ते में यह अधिकतम चार हो सकती है।

 

भारतीय कम्पनियों को मिलेगा मुम्बई – अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का 72 प्रतिशत ठेका

मुम्बई : मुम्बई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य का कॉन्ट्रैक्ट भारतीय कंपनियों को दिया जाएगा। यह कुल निर्माण कार्य का 72 प्रतिशत होगा। रेलवे बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीके यादव ने कहा कि इससे आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूती मिलेगी।

एसोसिएट्स चेंबर्स ऑफ कॉमर्स ऑफ इंडिया (एसोचेम) के वेबिनार में बोलते हुए उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के हाई वैल्यू टेक्निकल कार्य जैसे ब्रिज और टनल निर्माण का ठेका भारतीय कंपनियों के पास रहेगा। वहीं, जापान की कम्पनियों को सिग्नल, इलेक्ट्रिक और टेलीकॉम का काम मिलेगा। बुलेट ट्रेन के लिए लार्सन एंड टूब्रो को मिल सकता है कांट्रैक्ट, 24,958 करोड़ रुपए के साथ सबसे कम बोली लगाई।

बुलेट ट्रेन की 508 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के लिए आने वाली अनुमानित लागत 1.10 लाख करोड़ रुपये होगी। इसमें से 88 हजार करोड़ रुपये की राशि जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) भारत को कर्ज देगी। उन्होंने कहा कि जापान की सरकार से विस्तृत चर्चा के बाद, हमने इस परियोजना का 72 प्रतिशत परियोजनाओं को भारतीय कम्पनियों के लिए रखा है। इसमें सभी इंजीनियरिंग काम शामिल हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी इसलिए हुई क्योंकि भूमि अधिग्रहण में देरी हुई। फिलहाल गुजरात में 90 प्रतिशत जमीन अधिग्रहित हो चुकी है। वहीं, 10 प्रतिशत अधिग्रहण इसी साल 31 दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि नेशनल रेल प्लान 2030 तैयार है, इसे अगले महीने जारी किया जाएगा। बुलेट ट्रेन का वडोदरा-सूरत-वापी रूट नवंबर 2024 में बनकर तैयार हो जाएगा।

बुलेट ट्रेन से जुड़ी खास बातें – मुम्बई-अहमदाबाद के बीच दूरी 508 किलोमीटर है। बुलेट ट्रेन से यह सफर केवल 2 घंटे में तय की जा सकेगी। सामान्य ट्रेन से यात्रा में 7 घंटे का समय लगता है। बुलेट ट्रेन की रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन में 10 कोच होंगे। इसमें 750 यात्रियों की क्षमता होगी। हालांकि, इसे बढ़ाकर 15 कोच किया जा सकता है। इससे कुल क्षमता बढ़कर 1,250 यात्रियों की हो जाएगी। बुलेट ट्रेन की सीटों में ऑटोमेटिक रोटेशन सुविधा भी दी जाएगी। मुम्बई-अहमदाबाद के बीच यह ट्रेन 12 स्टेशनों को कवर करेगी। इसमें बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स(यही से ट्रेन यात्रा शुरु करेगी) , थाने, विरार, बोईसर, वापी, बिलमोरा, सूरत,भरूच, बड़ौदा, आनंद, साबरमती और अहमदाबाद रेलवे स्टेशन (आखिरी स्टेशन) शामिल हैं।

न्यूरोसाइंटिस्ट सविथा शास्त्री : भरतनाट्यम की खातिर छोड़ी कॉरपोरेट दुनिया

अब तक पांच महाद्वीपों में 100 लाइव शो किए

हैदराबाद :  जब आप किसी कला के प्रति समर्पित होते हैं तो आपका ख्याल कुछ और करते हुए भी बार-बार उसी ओर जाता है। ऐसा ही कुछ न्यूरोसाइंटिस्ट सविथा के साथ भी हुआ। इसके चलते 2000 में सविथा ने कॉरपोरेट वर्ल्ड को अलविदा कहा। सविथा कला के इस रूप को आगे बढ़ाने में जी जान से जुटी हुई हैं। सविथा की पैदाइश हैदराबाद के एक तमिल परिवार में हुई। वह मुंबई में कुछ समय रहने के बाद चेन्नई चली गईं। सविथा ने अमेरिका से न्यूरोसाइंस में मास्टर डिग्री ली। एक न्यूराे साइंटिस्ट के तौर पर उसने खाड़ी देशों में न्यूरो डिजनरेटिव डिसीज पर काम किया।

सविथा ने 2000 में डांस सिखाने की शुरुआत की। 2008 के बाद सविथा डांस थियेटर प्रोडक्शन में परफार्मेंस देने लगीं जिसे उनके पति ए. के. श्रीकांथ संचालित करते हैं। वे पिछले तीन साल से डिजिटल मीडिया के लिए डांस फिल्म बना रही हैं। सविथा और उनके पति ने भरतनाट्यम सिखाने के लिए 1,800 से अधिक स्टूडेंट्स की एक कम्युनिटी बनाई जिसे ‘इनर सर्कल’ नाम दिया। स्टूडेंट्स के लिए भरतनाट्यम को आसान बनाने के लिए इस कपल ने कई वीडियो भी बनाए हैं। इन वीडियो को देखकर भरतनाट्यम की बारीकियां सीखी जा सकती हैं।

सविथा अब तक पांच महाद्वीपों में 100 लाइव शो कर चुकी हैं। यहाँ बिताए समय को वे अपने लिए यादगार मानती हैं। सविथा को उस महिला का चेहरा आज भी याद है जो कोलकाता में आयोजित डांस परफॉर्मेंस के बाद उनसे आकर मिली थी। वह महिला एक कैंसर सर्वाइवर थी और उस वक्त उसकी कीमोथैरेपी चल रही थी। उसने सविथा के डांस की तारीफ करते हुए कहा कि इस डांस को देखकर वह कुछ देर के लिए ही सही, पर अपनी तकलीफ भूल गयीं। सविथा को इस बात की खुशी है कि अपने डांस के जरिये वह लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने में सफल हो रही हैं।

यू ट्यूब पर छायीं महाराष्ट्र के पारम्परिक व्यंजनों को लोकप्रिय बनाने वाली आपली आजी

कोलकाता : वड़ा पाव, पाव भाजी, बेसन लड्‌डू और बालूशाही जैसे व्यंजनों को पारम्परिक तरीके से बनाकर सुमन सारी दुनिया में नाम कमा रही हैं। सुमन अपने 17 साल के पोते यश से नयी तकनीकी की जानकारी लेती हैं। उन्हें इस काम को करते हुए इतना अच्छा लगता है कि कभी वे इसे न करें तो बेचैनी महसूस करती हैं। अहमदनगर से 15 किमी दूर सरोला कसर गांव में सुमन थामने रहती हैं। 70 साल की उम्र में यू ट्यूब चैनल पर अपनी पहली रेसिपी पोस्ट कर लोगों का दिल जीत लेने वाली सुमन को इंटरनेट सेंसेशन कहा जाता है। कई मुश्किल हालातों के बाद भी महाराष्ट्र के एक गांव की इस महिला ने पारम्परिक रेसिपीज के जरिये यूट्यूबर्स के बीच अपनी खास जगह बनाई है। वो भी तब जब वे कभी स्कूल नहीं गयीं। यहां तक कि इंटरनेट की जानकारी उन्हें बिल्कुल नहीं है। बहुत कम संसाधनों के बीच वे अपने पारंपरिक व्यंजन बनाकर छाई हुई हैं। सुमन की पाककला प्रतिभा को उनके 17 वर्षीय पोते यश ने पहचाना। उसने अपनी दादी के स्वादिष्ट व्यंजन को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए ‘आपली आजी’ के नाम से यू ट्यूब चैनल की शुरुआत की। वे इस चैनल पर घर में बने मसालों का उपयोग कर महाराष्ट्रीयन फूड रेसिपीज बताती हैं। इस काम को शुरू किए जाने के एक महीने के बाद ही सुमन को यू टयूब के सबसे लोकप्रिय चैनल के लिए ‘यू ट्यूब क्रिएटर्स अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। अब तक वे अपने चैनल पर 120 रेसिपीज शेयर कर चुकी हैं। सुमन अपने 17 साल के पोते यश से नई तकनीकी की जानकारी लेती हैं। उन्हें इस काम को करते हुए इतना अच्छा लगता है कि कभी वे इसे न करें तो बेचैनी महसूस करती हैं। सुमन इस यूट्यूब चैनल के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहती हैं- ”मुझे कभी यह पता ही नहीं था कि यू ट्यूब क्या होता है। लेकिन मैंने इस बारे में पूरी जानकारी ली। मुझे इस बात की खुशी है कि मैं कामयाब हो गयी।”सुमन के चैनल पर आप महाराष्ट्र की मिठाइयों से लेकर चटनी और सब्जियों की रेसिपी देख सकते हैं। उनके यू ट्यूब चैनल पर 6 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं। हर दिन इस बुजुर्ग महिला के रेसिपी वीडियो पर लाखों व्यूज आते हैं। वड़ा पाव, पाव भाजी, बेसन लड्‌डू और बालूशाही जैसे व्यंजनों को पारम्परिक तरीके से बनाकर  में बनाकर सुमन सारी दुनिया में नाम कमा रही हैं। वे कहती हैं – ”अपने सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती है।”

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पहली बार एक अश्वेत नोआ हैरिस बना छात्र संगठन का अध्यक्ष

मिसीसिपी: हार्वर्ड विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार किसी अश्वेत छात्र को छात्रसंघ का अध्यक्ष चुना गया है। खबर है कि इस बार मिसीसिपी के एक 20 वर्षीय अश्वेत छात्र को छात्र संगठन का अध्यक्ष चुना गया है। हैटिसबर्ग के नोआ हैरिस इस बार हार्वर्ड के स्नातक परिषद का अध्यक्ष चुना गया है, जिसकी घोषणा हाल ही में की गयी है। प्रशासनिक विषयों की पढ़ाई कर रहे हैरिस स्नातक परिषद के अश्वेत छात्रों के समूह के सहअध्यक्ष भी हैं।
इसके पहले दो और छात्र स्नातक परिषद के अध्यक्ष रह चुके हैं लेकिन हैरिस छात्र संगठन द्वारा चुना गया पहला अश्वेत छात्र है। हैरिस ने पत्रकारों को कहा है कि वे इस सम्मान को हल्के में नहीं लेंगे। उन्होंने कहा है कि इस वर्ष गर्मियों में जॉर्ज फ्लॉयड, ब्र्योना टेलर और अहमॉद आर्बरी की मौत के बाद देश में नस्लभेद को लेकर जो आन्दोलन शुरु हुआ है, उसके बाद हार्वर्ड छात्र संगठन द्वारा एक अश्वते छात्र पर भरोसा कर उसे चुनना एक ऐतिहासिक कदम है।
आपको बता दे कि इस चुनाव में हैरिस के साथ स्नातक परिषद की उपाध्यक्ष पद के लिए क्लीवलैंड की जेनी गन को चुना गया है। गन न्यूरोसाइंस की पढाई कर रही हैं। दोनों का कहना है कि वे छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहते हैं और इस जिम्मेदारी का पूरी शिद्दत से निर्वाह करेगें। फिलहाल एक अश्वेत को छात्रनेता चुनना कितना कारगर साबित होता है, ये तो वक्त ही बताएगा।

नहीं रहे फुटबॉल के जादूगर माराडोना

फुटबॉल के महान प्लेयर्स में से एक डिएगो आर्मैंडो मैराडोना का गत 25 नवम्बर को 60 साल की उम्र में निधन हो गया। मैराडोना गरीब परिवार में जन्मे थे। हालांकि, जो शोहरत, पैसा और मुकाम मैराडोना ने हासिल की, उसकी कोई खिलाड़ी बस कल्पना ही कर सकता है। उनके भाई ने उन्हें एक फुटबॉल गिफ्ट की थी। इससे इतना प्यार हुआ कि 6 महीने तक पास रखकर सोते थे। इसी फुटबॉल में इतनी महारत हासिल कर ली कि गोल ऑफ द सेन्चुरी किया। इसके अलावा उनके गोल ‘हैंड ऑफ गॉड’ की बदौलत अर्जेंटीना वर्ल्ड कप जीता। मैराडोना को फीफा ने प्लेयर ऑफ द सेन्चुरी भी चुना। ये अवॉर्ड उन्होंने एक और फुटबॉल लीजेंड पेले के साथ साझा किया था।

मैराडोना का जन्म ब्यूनस आयर्स के लानुस में एक गरीब परिवार में हुआ था। ये ब्यूनस आयर्स की झुग्गी-झोपड़ी वाला इलाका था। मैराडोना के पिता डॉन डिएगो और मां साल्वाडोरा फ्रेंको को 3 बेटियों के बाद पहला बेटा मिला था, मैराडोना। ये परिवार बाद में बढ़कर 8 भाई-बहनों वाला हो गया। मैराडोना जब 3 साल के थे, तो उन्हें उनके भाई ने एक फुटबॉल गिफ्ट की थी। तभी से मैराडोना को फुटबॉल से इतना प्यार हुआ कि वो 6 महीने तक उसे अपनी शर्ट के भीतर रखकर ही सोते थे
10 साल की उम्र में मैराडोना रोजा एस्ट्रेला क्लब के लिए खेलते थे। इसी क्लब से खेलते वक्त अर्जेंटीनोस जूनियर्स के छोटे से क्लब ने उनकी स्किल्स को पहचाना। उन्हें लॉस केबोलिटास ने भी चुना, पर 12 साल की उम्र तक उन्हें बॉल ब्वॉय का ही रोल मिला। 15 साल की उम्र में उन्होंने अर्जेंटीनोस जूनियर्स के लिए प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की। 1981 में उन्हें बोका जूनियर्स क्लब ने साइन किया। 1982 में मैराडोना ने बोका जूनियर्स से खेलते हुए उन्होंने पहला मेडल हासिल किया।
मैराडोना की प्रतिभा को देखते हुए उन्हें 1977 में नेशनल टीम में शामिल किया गया। हालांकि, 1978 वर्ल्ड कप के लिए उन्हें टीम में ये कहकर शामिल नहीं किया गया कि वे अभी बच्चे हैं। 1978 में वर्ल्ड कप जीतने वाली अर्जेंटीना 1982 में डिफेंडिंग चैम्पियन के तौर पर उतरी थी।


इस बार टीम में मैराडोना भी थे। डिफेंडिंग चैम्पियन होने के कारण अर्जेंटीना और पहला युवा मैराडोना, दोनों से उम्मीदें थीं। हालांकि, मैराडोना सिर्फ पहले राउंड में ही हंगरी के खिलाफ 2 गोल कर पाए। टीम भी दूसरे राउंड में बाहर हो गई। ब्राजील ने अर्जेंटीना को बाहर का रास्ता दिखाया।
मैराडोना 1986 का वर्ल्ड कप खेल रहे थे। इंग्लैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबला था। मैराडोना ने मैच में दो गोल किए। इनमें से एक गोल को हैंड ऑफ गॉड कहा जाता है। इंग्लैंड की टीम का कहना था कि बॉल मैराडोना के हाथ से लगकर गई है, लेकिन रेफरी ने फैसला गोल का ही दिया। इंग्लैंड मुकाबले से बाहर हो गई और अर्जेंटीना ने आगे सेमीफाइनल भी जीता और खिताब भी।
मैच के बाद डिएगो ने कहा था कि ये गोल थोड़ा मेरे सिर और थोड़ा भगवान के हाथ से छुआ था। डिएगो के इस बयान के बाद इस गोल को हैंड ऑफ गॉड कहा गया। इसे लोगों ने गोल ऑफ द सेंचुरी भी चुना। इस टूर्नामेंट में मैराडोना ने 5 गोल किए थे।ये संयोग है कि मैराडोना का निधन उसी तारीख को हुआ, जिस दिन क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का निधन हुआ था। मैराडोना कास्त्रो को अपना दूसरा पिता मानते थे। कास्त्रो का निधन 25 नवंबर 2016 को हुआ था। मैराडोना 4 दिसंबर 2016 को कास्त्रो के अंतिम दर्शन के लिए क्यूबा भी पहुंचे थे।
मैराडोना ने 4 फीफा वर्ल्ड कप टूर्नामेंट खेले, जिसमें 1986 का विश्व कप शामिल था। 1986 वर्ल्ड कप में वे अर्जेंटीना के कैप्टन भी थे। वे टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किए गए थे। उन्हें गोल्डन बॉल अवॉर्ड जीता था। मैराडोना को फीफा प्लेयर ऑफ द सेंचुरी से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने एक बार वर्ल्ड कप गोल्डन बॉल, एक बार बैलन डी ओर, 2 बार साउथ अमेरिकन फुटबॉलर ऑफ द ईयर, 6 बार नेशनल लीग टॉप स्कोरर अवॉर्ड जीता है।
मैराडोना ने 1982 के दशक में कोकीन लेना शुरू किया था। तब उनका करियर शबाब पर था, लेकिन उन्हें नशे की लत पड़ चुकी थी। 1984 में जब नेपोली क्लब के लिए खेलने लगे थे, तब वो इटैलियन माफिया कोमोरा के संपर्क में आ गए थे। अगले दो दशकों तक उन्होंने लगातार ड्रग्स ली और शराब पी। कोकीन के सेवन के लिए मैराडोना को उनके क्लब नेपोली ने 1991 में 15 महीने के लिए बैन कर दिया था।
इसी साल उन्हें ब्यूनस आयर्स में 500 ग्राम कोकीन के साथ अरेस्ट किया गया था। उन्हें तब 14 महीने की सजा दी गई थी। ड्रग्स ने उनके फुटबॉल करियर को ही खत्म कर दिया। 1997 में उन्होंने फुटबॉल को अलविदा कह दिया।

 

देसी मोबाइल कम्पनी लावा देश में ही बनायेगी सस्ते स्मार्टफोन

नयी दिल्ली : अभी तक भारत में बिकने वाले अमूमन हर एक स्मार्टफन का निर्माण चीनी कंपनियां करती रही हैं। लेकिन अब इसमें बदलाव हो रहा है। भारतीय स्मार्टफोन निर्माता कम्पनी लावा मोबाइल उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है, जो लावा ब्रांड के साथ ही अन्य ब्रांड के स्मार्टफोन को बनाने का काम करेगी। ऐसे में भारत में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों के दबदबे में कमी आने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक लावा भारत में ही नोकिया, मोटो ब्रांड के स्मार्टफोन का निर्माण करेगी। एचएमडी ग्लोबल कंपनी का नोकिया ब्रांड और लेनेवो और मोटोरोला ब्रांड अपने फोन को मेड इन इंडिया डिवाइस के तौर पर बिक्री करती है। साथ ही फोन के बैक पैनल पर मेड इन इंडिया का टैग भी लगाती है। ऐसे में कंपनी ने इन दोनों स्मार्टफोन कंपनियों के ब्रांड ने भारत में ही स्मार्टफोन के निर्माण के लिए लावा मोबाइल के साथ डील की है। नोकिया और मोटो के मेड इन इंडिया स्मार्टफोन को बनाने में कम लागत आएगी। माना जा रही है कि इससे इस क्षेत्र में चीन का दबदबा कम होगा।

लोकल हेलमेट की बिक्री-उत्पादन करना होगा अपराध

भारत में सालाना 1.7 करोड़ हेलमेट की बिक्री

नयी दिल्ली  : केंद्र सरकार ने मजबूत, हल्के-हवादार और अच्छी गुणवत्ता के ब्रांडेड हेलमेट की बिक्री के लिए नया कानून लागू कर दिया है। नया कानून पहली जून 2021 से लागू हो जाएगा। इसके बाद लोकल हेलमेट की बिक्री व उत्पादन अपराध माना जाएगा। इसके तहत जुर्माना व सजा का प्रावधान होगा। सरकार के इस फैसले से सड़क दुर्घटना में बाइक सवारों की जान बच सकेगी। वर्तमान में हर साल औसतन 10,000 से अधिक बाइक सवार की मुत्यु होती हैसड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने इस बाबत 26 नवंबर को अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियम में पहली बार हेलमेट को भारतीय मानक ब्यूरो (बीएसआई) की सूची में शामिल किया है। इसमें निर्माता कंपनियों को हेलमेट को बाजार में बिक्री से पहले बीएसआई से प्रमाणित (क्वालिटी कंट्रोल) करना अनिवार्य होगा। इसमें राज्य सरकारों के प्रवर्तन विभाग को अधिकार होंगे कि वह लोकल हेलमेट की बिक्री व उत्पादन पर रोक लगाने के लिए समय समय पर जांच करें।
टू व्हीलर हेलमेट मैन्युफैक्चरर एसोएिशन के अध्यक्ष राजीव कपूर ने हिन्दुस्तान को बताया कि बगैर हेलमेट अथवा हेलमेट की खराब गुणवत्ता (लोकल हेलमेट) होने पर एक हजार रुपये का चालान होगा। नए मानक में हेलमेट का वजन डेढ़ किलो से घटाकर एक किलो 200 ग्राम कर दिया गया है। हालांकि अधिसूचना मे इसका जिक्र नहीं है।
नए नियम निर्यात होने वाले हेलमेट व अन्य सामग्री पर लागू नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि 2016 के अध्ययन के मुताबिक देश में प्रतिदिन 28 बाइक सवार सड़क हादसे में मारे जाते हैं। गैर बीआईएस हेलमेट उत्पादन, स्टॉक व ब्रिकी अब अपराध माना जाएगा। ऐसा करने पर कंपनी पर दो लाख का जुर्माना व सजा होगी। लोकल हेलमेट को अब निर्यात भी नहीं किया जा सकेगा।
सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति ने हल्के-हवादार, मजबूत हेलमेट का सुझाव दिया था। समिति का कहना है कि भारी हेलमेट बाइक सवारों के लिए बोझिल व भारतीय मौसम के अनुकूल नहीं हैं। समिति में एम्स के डाक्टर व बीआईएस के अधिकारी शामिल थे। भारत में सालाना 1.7 करोड़ हेलमेट की बिक्री होती है।