तमिलनाडु के इरुवादी गांव में जब पीर बानो की शादी हुई तो उसे दहेज में सिलाई मशीन भी मिली। एक दर्जी के परिवार से संबंध रखने वाली पीर बानो के भाई ने उसे उस वक्त सिलाई सिखाई जब वह स्कूल में पढ़ती थी। इस तरह नयी-नवेली दुल्हन ने सिलाई करके अपने परिवार की आय बढ़ाने का फैसला किया। अगले कुछ सालों में उसने तीन बच्चों को भी सिलाई सिखाई। उन्हीं दिनों पीर बानो ने श्रीनिवासन सर्विस ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे बास्केट मेकिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम के बारे में सुना। उसे अपनी आय बढ़ाने का यह तरीका उचित लगा। यहां से बास्केट बनाना सीखकर पीर बानो ने 2006 में अपने बिस्मी स्व सहायता समुह की शुरुआत की। आज उनके स्व सहायता समूह की 15 महिलाएं न सिर्फ कपड़े बेचकर बल्कि केले के रेशों से बास्केट बनाकर भी अच्छी-खासी कमाई कर रही हैं।
बिस्मी स्व सहायता समूह की कई महिलाओं ने कर्ज लेकर सिलाई मशीन खरीदी। पीर बानो ने इन महिलाओं को स्कूल यूनिफॉर्म, नाइट ड्रेस और साड़ी ब्लाउज बनाने की ट्रेनिंग दी। उन्होंने अब तक 350 महिलाओं को सिलाई सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया है। पीर बानो कहती हैं – ”मैं विधवा और गरीब महिलाओं से सिलाई सिखाने के पैसे नहीं लेती। मेरा यही प्रयास है कि वे अपने पैरों पर खड़ी हो जाएं और इज्ज्त की जिंदगी जिएं”। इसके अलावा उन्होंने अपने गांव में स्थित आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए कुर्सियां खरीदीं। साथ ही वहां पंखे भी लगवाए। बानो यहां साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखती हैं। पीर बानो ने जितनी मेहनत गांव के उत्थान के लिए की है, उतनी ही अपने तीनों बेटों को काबिल बनाने में भी की। उनका सबसे बड़ा बेटा मुंबई में वाटर बोर्ड में इंस्पेक्टर है। उनका दूसरा बेटा मैकेनिकल इंजीनियर है जो इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन में कार्यरत है। वहीं तीसरे बेटे ने अपनी ई कॉमर्स कंपनी की स्थापना की है। वह अपनी मां की बनाई हुई चीजें बेचने में भी मदद करता है।
तमिलनाडु के इरुवादी गांव में पीर बानो ने बनाया 350 महिलाओं को आत्मनिर्भर
14 साल की उद्यमी सिमरन ने डिजाइन की ट्रैवल किट
महिलाओं और बच्चों के लिए डिजाइन की
नयी दिल्ली : दिल्ली के श्रीराम स्कूल की छात्रा सिमरन सिंह ने जब यह देखा कि जब भी उनके पेरेंट्स लंबी यात्रा पर जाते हैं तो वे सेहत और सुरक्षा से जुड़े सामान की लंबी लिस्ट बना लेते हैं। इन सामानों को खरीदने के लिए उन्हें अपने व्यस्त शेड्यूल से वक्त निकालकर कई दुकानों पर जाना पड़ता है। सिमरन ने अपने मात-पिता को इस परेशानी से बचाने के लिए फरवरी 2021 में ‘सेफ्टी नोमाडिक’ की स्थापना की। अपनी कंपनी के अंतर्गत सिमरन ने एक ऐसी ट्रैवल किट बनाई जिसमें सफर के दौरान काम करने वाली छोटी-छोटी कई चीजें हैं। सिमरन ने दो तरह की सेफ्टी किट बनाई। इनमें से एक किट बच्चों के लिए तो दूसरी महिलाओं के लिए डिजाइन की गई है। उनकी हर किट में कुछ जरूरी दवाएं, फेस मास्क, टॉयलेट सीट कवर्स, पेपर सोप, कॉटन बॉल्स और एंटीसेप्टिक आदि हैं। सिमरन ने महिलाओं के लिए बनाई किट में सैनिटरी पैड्स, डिस्पोजेबल यूरिनेशन फनल, पेपर स्प्रे और सेफ्टी अलार्म भी रखा है। सिमरन ने ये महसूस किया कि सफर के दौरान बच्चे बोर होते हैं। उन्हें बोरियत से बचाने के लिए उसने अपनी किट में ओरिगेमी पेपर, स्केच पेन, चॉकलेट जैसी चीजें भी रखीं। इस किट को लॉन्च करने के 15 दिन के अंदर ही सिमरन ने 26 किट बेच दी। जल्दी ही वे बुजुर्गों और फैमिली के लिए भी किट डिजाइन करना चाहती हैं।
सीबीएसई के बाद सीआईएससीई की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं टलीं
नयी तारीखों पर फैसला जून के पहले सप्ताह में होगा
नयी दिल्ली : देश में लगातार बढ़ते कोरोना के मामलों के बीच सीबीएसई के बाद अब काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) ने भी आईसीएसई (10वीं) और आईएससी (12वीं) की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। बोर्ड के मुताबिक परीक्षा की नई तारीख पर जून के पहले हफ्ते में फैसला लिया जाएगा।
10वीं के विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक होगी परीक्षा
सीआईएससीई के मुख्य कार्यकारी और सचिव गेरी एराथून ने बताया कि 12वीं की परीक्षा बाद में कराई जाएगी। वहीं, 10वीं के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा वैकल्पिक होगी। 10वीं के जो छात्र परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहते हैं, उनका रिजल्ट काउंसिल एक क्राइटेरिया के आधार पर तय करेगा। इस साल 10वीं-12वीं के थ्योरी एग्जाम 4 मई 2021 से शुरू होने थे।
सीबीएसई की परीक्षाएं पहले ही स्थगित
इससे पहले केंद्र सरकार ने सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके पेपर 4 मई से शुरू होने वाले थे। 12वीं की परीक्षा भी टाल दी गई है। सरकार 1 जून को 12वीं की परीक्षा पर फैसला करेगी। अगर परीक्षा कराने का फैसला हुआ भी तो यह 15 जून के बाद ही होगी।
कोविड -19 : घबराने की नहीं, बस व्यवस्थित होने की जरूरत है
ऐसे में घबराने की जगह उन्हें व्यवस्थित होने की जरूरत है
घर पर चेकलिस्ट बनाकर रखें और कोविड टूल किट तैयार रखें
मुम्बई : पूरे देश में कोरोना वायरस फैल रहा है। अगर आप किसी शहर या अपने घर में अकेले रह रहे हैं और आप कोरोना पॉजिटिव आ जाते हैं। घर पर आपके माता-पिता अकेले हैं, घर पर पेट्स हैं तो क्या आपके पास कार्ययोजना है? उदाहरण के तौर पर आप बेंगलुरु में हैं और कोविड पॉजिटिव हो गए हैं। आदर्श रूप से, बीबीएमपी आपको कॉल करके आपके इलाज और आइसोलेशन की व्यवसथा करती है लेकिन बहुत से लोगों ने बताया कि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 5 दिनों बाद तक बीबीएमपी ने उनकी कोई सुध नहीं ली।
ऐसे में लोगों को प्लान बी की जरूरत होती है। अकेले रह रहे पुरुषों और महिलाओं की आरटी-पीसीटी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनके लिए हम एक्सपर्ट्स से बात करके बता रहे हैं कि घर पर क्या तैयारी रखें।
अपनी सहायता प्रणाली को पहचानें : आपके एक-दो निकटस्थ पड़ोसियों, कुछ मित्रों, किराने का सामान बेचने वालों, मेडिकल स्टोर के लोगों से संपर्क बनाए रहें ताकि जरूरत पड़ने पर आप उनकी मदद ले सकें।
डॉक्टर: एक डॉक्टर से पहचान करें जो घर पर कोविड का प्रबंधन करने में आपकी मदद करे। अधिकांश कोविड के मामले बिना लक्षणों वाले होते हैं। अगर आपका ऑक्सिजन लेवल ठीक है और फीवर नियंत्रण में है तो घर पर ही ठीक केयर हो सकती है।
भोजन: ऐसे रसोइयों से संपर्क करें जो घर का बना ताजा खाना सप्लाई करता हो। अगर आपको जरूरत पड़ती है तो वह आपको खाना पहुंचा सकता है।
स्टॉक: आपातकालीन राशन के लिए ओट्स, उपमा और खिचड़ी जैसे रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ घर पर रखें। इसमें पीने का पानी भी शामिल है।
दवाएं: कुछ बेसिक दवाओं का स्टॉक रखें जैसे-पैरासिटामॉल, बीटाडीन (गार्गल करने के लिए) गैर-डिजिटल थर्मामीटर या बैटरी सहित थर्मामीटर, खांसी की दवाई, पल्स ऑक्सिमीटर, विटमिंस, यदि आपकी दवाएं चल रही हैं तो कम से कम एक महीने का स्टॉक रखें। यदि आप एक महिला हैं, तो घर पर पर्याप्त सैनिटरी नैपकिन रखना न भूलें।
पैसा: एटीएम कार्ड के साथ अपने खाते में पर्याप्त रुपये रखें। यदि आपका बीमा है तो उसकी पॉलिसी ध्यान से पढ़ें। जब आप बीमार हों तो एक मित्र या परिवार का पता लगाएं जिस पर आप पैसे के लेन-देन का प्रबंधन कर सकते हैं। ऐसे परिवार या दोस्त से संपर्क रखें जो आपको जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद कर सकें।
खुद को स्वस्थ रखें: शारीरिक और भावनात्मक रूप से खुद को स्वस्थ्य रखें। अगर आप तनाव महसूस कर रहे हैं तो सेल्फ केयर के बारे में पढ़ें और किसी दोस्त या प्रफेशनल काउंसलर्स से बात करें। यदि आप वर्किंग हैं तो पता करें कि क्या आपके कार्यालय में अस्पताल में भर्ती होने, ऐम्बुलेंस, ऑक्सिजन आदि की मदद देने की नीति है कि नहीं।
क्रिटिकल केयर: ऑक्सिजन, ऐम्बुलेंस जैसी क्रिटिकल केयर सर्विसेस के नंबर्स पास में रखें।
होम केयर सर्विसेस: कोविड रोगियों के लिए घर पर देखभाल करने वाले अस्पतालों पर रिसर्च करें और जानकारी रखें। याद रखें कि आप जितना ऑर्गनाइज्ड होंगे, उतना ही आसान होगा।
पेट पैरंट्स: उन दोस्तों का पता लगाएं जो आपके पालतू जानवरों को अपने पास रख सकें या किसी पेट हॉस्टल का पता लगाकर रखें।
कोविड चेकलिस्ट
1. लैपटॉप बैकपैक
2. बीमा के साथ मेडिकल फ़ाइल
3. आधार की फोटोकॉपी (प्लस मूल)
4. सभी मूल दस्तावेजों को स्कैन करें और Google ड्राइव पर एक प्राइवेट शेयर फोल्डर में अपलोड करें
5. पानी को साफ करने वाली गोलियां
6. दैनिक दवा (2 सप्ताह की आपूर्ति)
7. बुखार, पेट खराब होने आदि की दवाएं
8. बेसिक फर्स्ट एड किट
9. टॉर्च (अतिरिक्त बैटरी के साथ)
10. अपने फोन को चार्ज करने के लिए पावर बैंक
11. जिकलॉक बैग
12. प्लास्टिक जिप टाइज
13. बड़े और मध्यम कचरा बैग
14. कपड़े बदलने की व्यवस्था
15. इमरेजेंसी कंबल
16. थर्मस
17. तैयार खाना
18. साबुन
(साभार – नवभारत टाइम्स)
नहीं रहीं फिल्मकार सुमित्रा भावे
पुणे : जानी-मानी फिल्म निर्देशक एवं लेखिका सुमित्रा भावे का फेफड़ों संबंधी बीमारियों के कारण यहां सोमवार को निधन हो गया। वह 78 वर्ष की थीं। फिल्म निर्देशक सुनील सुख्तनकर ने यह जानकारी दी। मराठी सिनेमा और रंगमंच की मशहूर हस्ती भावे पिछले दो महीने से फेफड़ों संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। भावे के साथ पिछले 35 साल से काम कर रहे सुख्तनकर ने कहा कि भावे ने सोमवार की सुबह महाराष्ट्र के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। भावे को उनके बेहतरीन काम के लिए कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी होने के बाद एक समाज कल्याण संस्था के साथ काम शुरू किया और पुणे स्थित कर्वे इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में अध्यापन का काम किया। इसके बाद उन्होंने समाचार वाचक के रूप में भी सेवाएं दीं। उन्होंने 1985 में अपनी पहली लघु फिल्म ‘बाई’ बनाई, जिसे कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। भावे और सुख्तनकर ने निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखते हुए 1995 में ‘दोघी’ फिल्म बनाई, जिसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके अलावा, उन्होंने ‘देवराई’ (2004), ‘घो माला असाला हवा’, ‘हा भारत माजा’, ‘अस्तू – सो बीट इट’, ‘संहिता’, ‘वेलकम होम’, ‘वास्तुपुरुष’, ‘दाहवी फा’ और ‘कासव’ समेत कई अच्छी फिल्में दीं।
असम के पूर्व मुख्यमंत्री भूमिधर बर्मन का निधन
गुवाहाटी : असम के पूर्व मुख्यमंत्री भूमिधर बर्मन का रविवार शाम को गुवाहाटी के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके परिवार ने यह जानकारी दी। वह 91 वर्ष के थे। बर्मन कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता थे और दो बार अल्पकाल के लिए असम के मुख्यमंत्री रह चुके थे। असम सरकार ने बर्मन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। बर्मन पहली बार हितेश्वर सैकिया के निधन के बाद मुख्यमंत्री बने और इस पद पर 22 अप्रैल से 14 मई 1996 तक रहे। उन्हें वर्ष 2010 में दोबारा उस समय मुख्यमंत्री बनाया गया जब तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई हृदय के ऑपरेशन के लिए मुंबई गए थे। बर्मन हितेश्वर सैकिया और तरुण गोगोई सरकार में मंत्री रहे और शिक्षा, स्वास्थ्य , राजस्व सहित विभिन्न विभागों का कार्यभार संभाला। आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक सात बार विधायक रहे बर्मन पहली बार 1967 में असम विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। उन्होंने नलबाड़ी जिले के बोरखेत्री सीट का चार बार प्रतिनिधित्व किया। वह दो बार नलबाड़ी पश्चिम और एक बार धर्मापुर से विधायक चुने गए।
गीतकार राजेंद्र राजन का निधन
सहारनपुर : देश-विदेश मे अपने गीतों से सहारनपुर की पहचान बनाने वाले प्रख्यात गीतकार राजेन्द्र राजन का गत गुरुवार की सुबह निधन हो गया। वह 65 वर्ष के थे। राजन पिछले कुछ दिनों से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें सहारनपुर के मेडिकल कॉलेज मे भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
साहित्यकार डॉ वीरेन्द्र आजम ने पीटीआई-भाषा को बताया कि देश-विदेश के मंचों पर अपने गीतों से वाहवाही लूटने वाले राजेन्द्र राजन के निधन से साहित्यिक जगत मे शोक की लहर दौड़ गई है। आजम ने बताया कि अपने गीतों से सबको मंत्रमुग्ध करने वाले राजन को महादेवी पुरस्कार, साहित्य भूषण पुरस्कार, कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर पुरस्कार से नवाजा गया था।
फेसबुक ने की क्लीनमैक्स से साझेदारी, 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाएगा
नयी दिल्ली : फेसबुक ने संवहनीयता उपायों के तहत भारत में शत प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने के लिए क्लीनमैक्स के साथ साझेदारी की है।
कंपनी ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि समझौते के तहत फेसबुक और क्लीनमैक्स पवन तथा सौर परियोजनाएं तैयार करेंगे, जो भारत के बिजली ग्रिड को अक्षय ऊर्जा की आपूर्ति करेगा।
बयान के मुताबिक, ‘‘फेसबुक और क्लीनमैक्स ने आज भारत में फेसबुक के संवहनीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक साझेदारी की घोषणा की, जिसके तहत क्लीनमैक्स के पवन और सौर ऊर्जा संयंत्रों से बिजली की आपूर्ति की जाएगी।’’
बयान में कहा गया कि इस समझौते के तहत कर्नाटक में स्थित 32 मेगावाट की पवन परियोजना को चालू किया जाएगा। इस समझौते के तहत क्लीनमैक्स के पास परियोजनाओं का स्वामित्व होगा और वह संचालन करेगी, जबकि फेसबुक आने वाले वर्षों में परियोजना से मिले 100 प्रतिशत पर्यावरणीय विशेषता प्रमाणपत्र (ईएसी) को खरीदने के लिए प्रतिबद्ध होकर दीर्घकालिक समर्थन देगा।
फेसबुक में नवीकरणीय ऊर्जा की प्रमुख उर्वी पारेख ने कहा, ‘‘हम इस महत्वपूर्ण कदम की घोषणा से उत्साहित हैं, जो भारत सहित इस क्षेत्र में हमें अपने परिचालन को 100 प्रतिशत नवीकरण ऊर्जा पर आधारित करने में मदद करेगा।’’
डॉक्टर की जान बचाने के लिए बना 175 किमी लंबा ग्रीन कॉरिडोर
सागर : एमपी में हर तरह कोरोना संक्रमण से हाहाकार है। इस बीच बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पदस्थ डॉक्टर सत्येंद्र मिश्रा की जान बचाने के लिए सरकार ने पूरी ताकत लगा दी है। कोरोना की वजह से डॉक्टर सत्येंद्र मिश्रा के फेफड़ों अधिक संक्रमण हो गया है। एमपी में इलाज संभव नहीं था। सीएम शिवराज के निर्देश पर सागर कलेक्टर डॉक्टर मिश्रा को इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से हैदराबाद भिजवाया है, जहां उनका इलाज शुरू हो गया है।
डॉक्टर को इलाज के लिए सागर से हैदराबाद जाना था। इसके लिए एयर एंबुलेंस से संपर्क किया गया है। एयर एंबुलेंस ने किराया 18 लाख से कुछ अधिक बताया। साथ ही पहले भुगतान की मांग। रविवार होने की वजह से बैंक बंद था। उतनी बड़ी राशि बिना बैंक खुले ट्रांसफर होना संभव नहीं था। ऐसे में सागर कलेक्टर बैंक ऑफ इंडिया के मुंबई ब्रांच विशेष अनुमति लेकर सागर में बैंक खुलवाया। उसके बाद एयर एंबुलेंस को भुगतान किया गया। उसके बाद एयर एंबुलेंस के साथ हैदराबाद से डॉक्टरों की टीम भोपाल पहुंच गई। यहां से सड़क मार्ग के जरिए विशेष एंबुलेंस से डॉक्टरों की विशेष टीम रविवार रात 12 बजे सागर के भाग्योदय अस्पताल पहुंची। उसके बाद डॉक्टरों की टीम ने सागर में ही उनका संपूर्ण परीक्षण किया। सागर कलेक्टर दीपक सिंह ने बताया कि हैदराबाद की डॉक्टरों की टीम ने डॉ सतेंद्र मिश्रा का संपूर्ण परीक्षण करने के उपरांत सोमवार सुबह 5:00 विशेष एंबुलेंस उन्हें लेकर भोपाल के लिए निकली।
175 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर बना
सागर कलेक्टर ने बताया कि जिले के भाग्योदय अस्पताल से लेकर भोपाल एयरपोर्ट तक 175 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर रोड बनाया गया। इसमें पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भोपाल एयरपोर्ट से वह हैदराबाद के लिए रवाना हो गए हैं। वहां उनका इलाज शुरू हो गया है।
वहीं, डॉक्टर सत्येंद्र मिश्रा का इलाज कर रहे छय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सौरभ जैन ने बताया कि हैदराबाद के डॉक्टरों की टीम रात्रि 12:00 बजे पहुंची। उन्होंने डॉ मिश्रा को वेंटिलेटर पर रखकर संपूर्ण परीक्षण किया। उसके बाद सुबह में उन्हें यहां से ले जाया गया है। सोमवार की सुबह साढ़े दस बजे वह हैदराबाद स्थित यशोदा अस्पताल में पहुंच गए। वहां उनका इलाज शुरू हो गया है।
स्वाधीनता संग्राम के गुमनाम नायक गंगू मेहतर
गंगू मेहतर विट्ठुर के शासक नाना साहब पेशवा की सेना में नगाड़ा बजाते थे। गंगू मेहतर को कई नामों से पुकारा जाता है। भंगी जाति के होने से गंगू मेहतर तो पहलवानी का शौक़ होने की वजह कर गंगू पहलवान के नाम से पुकारा जाता था।गंगू मेहतर पर अंग्रेजो ने पचास हजार का इनाम रखा था। सती चौरा गांव में इनका पहलवानी का अखाड़ा था, कुश्ती के दांव पेच एक मुस्लिम उस्ताद से सीखने के कारण गंगूदीन नाम से पुकारे जाने लगे और लोग इन्हें श्रद्धा प्रकट करने के लिए गंगू बाबा कहकर भी पुकारते थे। गंगू मेहतर के पुरखे जिले कानपुर के अकबरपुरा गांव के रहने वाले थे। उच्चवर्णों की बेगार, शोषण और अमानवीय व्यवहार से दुखी होकर इनके पुरखे कानपुर शहर के चुन्नी गंज इलाके में आकर रहने लगे थे।
1857 के स्वाधीनता संग्राम में इन्होने नाना साहब की तरफ़ से लड़ते हुए अपने शागिर्दों की मदद से सैंकड़ो अंग्रेज़ों को मौत के घाट उतारा था। और इस क़त्ल ए आम से अंग्रेज़ी सरकार बहुत सहम सी गई थी। जिसके बाद अंग्रेज़ों ने गंगू मेहतर जी को गिरफ़्तार करने का आदेश दे दिया।गंगू मेहतर पर अंग्रेजो ने पचास हजार का इनाम रखा था! गंगू मेहतर अंग्रेज़ों से घोड़े पर सवार होकर वीरता से लड़ते रहे। अंत में गिरफ़्तार कर लिए गए। जब वह पकड़े गए तो अंग्रेज़ों नेउन्हें हथकड़ियाँ और पैरों में बेड़ियाँ पहनाकर जेल की काल कोठरी में रख दिया और तरह तरह के ज़ुल्म किये।
गंगू मेहतर पर इलज़ाम था के इन्होने कई महिलाओं और बच्चों का क़त्ल किया था; पर ये बात प्रोपेगंडा का हिस्सा भी थी, क्युं के अंग्रेज़ों ने उस समय मीडिया का भरपूर उपयोग प्रोपेगंडा के लिए किया था! बहरहाल गंगू मेहतर को फांसी की सज़ा सुनाई जाती है। उसके बाद कानपुर में इन्हे बीच चौराहे पर 8 सितम्बर 1859 को फाँसी के फंदे पर लटका दिया जाता है।जब उन्हे फांसी दी गई तो उनकी लाश को घोड़े में बाँधकर पूरे शहर में घुमाया! लेकिन दुर्भाग्यवश भारत के इतिहास में इनका नामो निशान नही है। यह नाम जातिवाद के कारण इतिहास के पन्नों में कहीं सिमट सा गया है।
शहीद गंगू मेहतर अपनी अंतिम सांस तक अंग्रेजों को ललकारते रहे : “भारत की माटी में हमारे पूर्वजों का ख़ून व क़ुर्बानी कि गंध है, एक दिन यह मुल्क आज़ाद होगा।” एैसा कहकर उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को क्रान्ति का संदेश दिया और देश के लिए शहीद हो गए।कानपुर के चुन्नी गंज में इनकी प्रतिमा लगाई गयी है।




