Wednesday, April 8, 2026
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1857 की क्रांति के गुमनाम चेहरे – बाबू अमर सिंह

स्वतन्त्र भारत की बुनियाद कई ऐसे गुमनाम चेहरों की कुर्बानी पर टिकी है जिनके चेहरे गुमनाम ही रह गये। प्रथम स्वाधीनता संग्राम में ही कई ऐसे लोग हैं जिनकी शहादतें हम भूल गये हैं। ऐसे ही एक स्वाधीनता सेनानी हैं बाबू अमर सिंह। बाबू अमर सिंह प्रख्यात स्वाधीनता सेनानी बाबू कुँवर सिंह के छोटे भाई थे जो कि जगदीशपुर रियासत से थे।

साहेबजादा सिंह के दूसरे बेटे अमर सिंह अपने बड़े भाई के बाद पैदा हुए थे। बताया जाता है कि वे लंबे कद के थे और गोरे थे। उनकी नाक के दाईं ओर तिल था। शिकार के शौकीन और धार्मिक थे और हर रात महाभारत का पाठ करते थे। वह शुरू में विद्रोह में शामिल होने के लिए अनिच्छुक थे लेकिन अपने भाई और सेनापति हरे कृष्ण सिंह के आग्रह पर राजी हो गये।
1857 के विद्रोह में भूमिका
24 अप्रैल 1858 को बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु के बाद, बाबू अमर सिंह सेना के प्रमुख बने और भारी बाधाओं के बावजूद, संघर्ष जारी रखा और काफी समय तक शाहाबाद जिले में एक समानांतर सरकार चलाई। अपने भाई की मृत्यु के चार दिन बाद, उन्होंने आरा में ब्रिटिश टैक्स कलेक्टरों के होने की खबर सुनी। बाद में उन्होंने उन पर हमला किया और उन्हें हरा दिया। उन्हें उनके सेनापति हरे कृष्ण सिंह ने सहायता प्रदान की।
अमर सिंह की सेना में रह चुके और 1858 में पकड़े गये एक सैनिक ने अमर सिंह की सेना का ब्योरा दिया। उसने कहा कि अमर सिंह के पहाड़ियों में पीछे हटने के बाद, उनके पास लगभग 400 घुड़सवार और 6 बंदूकें थीं। बंदूकें कलकत्ता के एक मैकेनिक से प्राप्त की गईं, जिन्होंने सीधे अमर सिंह की सेवा की। बल के पास तोप के गोले भी थे जो ब्रिटिश नावों पर छापे से प्राप्त सीसा के साथ जगदीशपुर में बनाए गए थे। अमर सिंह भी साथी विद्रोही नेता नाना साहिब के साथ अपने बल में शामिल होने की योजना बना रहे थे।
6 जून 1858 को, अमर सिंह और उनके 2000 सिपाहियों और 500 सैनिकों का बल बिहार के साथ सीमा के पास गाजीपुर के गहमर गाँव में पहुँचा। इस क्षेत्र के सकरवार राजपूत विद्रोही, मेघार सिंह के नेतृत्व में, अमर सिंह के समर्थन के लिए उत्सुक थे और एक गाँव में पत्र लिखकर उनकी मदद का अनुरोध किया गया था। अमर सिंह ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया। मेघार सिंह ने व्यक्तिगत रूप से अमर सिंह को 20,000 रुपये मूल्य का नज़राना या उपहार भेंट किया। उन्होंने आपूर्ति का आदान-प्रदान किया और अमर सिंह ने 10 जून को गहमर छोड़ दिया। इस गठबंधन की प्रेरणाओं में साकार और उज्जैनियों के बीच वैवाहिक संबंध थे। अक्टूबर 1859 में, अंग्रेजों के साथ बाद में छापामारी युद्ध होने के बाद, अमर सिंह अन्य विद्रोही नेताओं के साथ नेपाल तराई में भाग गए। वह संभवतः इसके बाद छिप गए और बाद में उसी वर्ष पकड़े गये और कारागार में ही उनका निधन हुआ।

(साभार – विकिपीडिया)

उर्वरकों की होम डिलिवरी के लिए साथ आए स्मार्टकेम औऱ एग्रो स्टार

कोलकाता : दीपक फ़र्टिलाइज़र्स एंड पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएफपीसीएल) की सहायक कम्पनी स्मार्टकेम ने कृषि उत्पादों के ई -कॉमर्स प्लेटफॉर्म एग्रो स्टार से साझेदारी की है। इससे उर्वरक सीधे किसानों तक पहुँचाये जा सकेंगे। फिलहाल यह सुविधा महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों को मिलेगी और बाद में सेवा का विस्तार किया जायेगा। इस मौके पर डीएफपीसीएल के अध्यक्ष (क्रॉप न्यूट्रिशन बिजनेस) महेश गिरधर ने कहा, ”कोविड -19 महामारी और कम डेटा डेटा लागत ने गोद लेने में तेजी लाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, और यह प्रवृत्ति कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है और किसानों को अब पारंपरिक सेवाओं से परे विविध विकल्पों तक पहुंच है। किसानों के पास अब उच्च गुणवत्ता वाले महादान उत्पाद होंगे। “एग्रोस्टार के सीईओ और सह-संस्थापक शार्दुल सेठ ने कहा, “हम कई राज्यों में अपने उत्पादों के व्यापक और गहरे पैठ को सक्षम करने के लिए स्मार्टकेम टेक्नोलॉजीज के साथ सहयोग करने के लिए उत्साहित हैं, जिन्हें हम संचालित करते हैं। ”

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में मनाया गया मिट्टी दिवस

कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में हाल ही में मिट्टी दिवस मनाया गया। हर साल की तरह मिट्टी दिवस 5 दिसम्बर को मनाया गया। स्कूल में पाँचवीं कक्षा की छात्राओं ने स्वस्थ मिट्टी का महत्व समझाने का प्रयास किया जिससे मिट्टी की विविधता बरकरार रखी जा सके और उसका कटाव कम किया जा सके। इस बार उद्देश्य था कि उन सूक्ष्म जीवों से भी छात्राओं को परिचित करवाया जा सके, जो मिट्टी को उर्वर बनाने में सक्रिय रहते हैं – सूक्ष्म बैक्टेरिया से लेकर केंचुए तक का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इस मौके पर विशेष असेम्बली आयोजित की गयी और छात्राओं ने पोस्टर भी बनाये।

हिंदी विश्‍वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत महोत्‍सव 8 जनवरी को

केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ होंगे मुख्‍य अतिथि

वर्धा : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा का चतुर्थ दीक्षांत महोत्‍सव शुक्रवार, 08 जनवरी को पूर्वाह्न 11 बजे से सम्‍पन्‍न होने जा रहा है। महोत्‍सव में भारत सरकार के शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मुख्‍य अतिथि होंगे। उक्‍त जानकारी विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने मंगलवार को आयोजित ऑनलाइन पत्रकार वार्ता में दी। उन्‍होंने बताया कि दीक्षांत कार्यक्रम की अध्‍यक्षता विश्‍वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. कमलेश दत्‍त त्रिपाठी करेंगे। इस अवसर पर विशिष्‍ट अतिथि के रूप में वर्धा के सांसद श्री रामदास तडस तथा महाराष्‍ट्र सरकार के पशु संवर्धन तथा खेल मंत्री श्री सुनील केदार उपस्थित होंगे। दीक्षांत महोत्‍सव में दीक्षांत उपदेश विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल देंगे।

प्रो. शुक्‍ल ने बताया कि चतुर्थ दीक्षांत महोत्‍सव में 54 विद्यार्थियों को स्‍वर्ण पदक तथा 801 स्‍नातकों (जिसमें 117 विद्यार्थियों को पी-एच.डी., 43 विद्यार्थियों को एम.फिल., 453 विद्यार्थियों को स्‍नातकोत्‍तर तथा 188 विद्यार्थियों को स्‍नातक) को उपाधि प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम का प्रारंभ प्रात: 10.45 बजे डॉ. श्‍यामाप्रसाद मुखर्जी भवन में होगा। इस दौरान मुख्‍य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा विश्‍वविद्यालय की ओर से प्रकाशित पुस्‍तकों का लोकार्पण किया जाएगा। यह महोत्‍सव ऑनलाइन होगा।

प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने कहा कि विश्‍वविद्यालय का स्‍थापना दिवस 08 जनवरी को है और इस दृष्टि से दीक्षांत महोत्‍सव और स्‍थापना दिवस एक साथ मनाना विश्‍वविद्यालय के लिए दोहरे खुशी का अवसर है। दीक्षांत महोत्‍सव में नागपुर विश्‍वविद्यालय, अमरावती विश्‍वविद्यालय, गोंडवाना विश्‍वविद्यालय, कवि कुलगुरु संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय, रामटेक के कुलपति, वीएनआईटी, आईआईएम, नागपुर के निदेशक शामिल होंगे।

कोरोना कालखंड में ऑनलाइन शिक्षण का उल्‍लेख करते हुए कुलपति प्रो. शुक्‍ल ने कहा कि कोरोना काल में विश्‍वविद्यालय का परिसर कोरोना से मुक्‍त रहा है। विश्‍वविद्यालय ने 17 मार्च, 2020 से ही ऑनलाइन कक्षाएं प्रारंभ की और 90 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी कक्षाओं में शामिल हुए। इतना ही नहीं, दुनिया के तमाम देशों के विद्यार्थियों के लिए भारतीय सांस्‍कृतिक संबंध परिषद की सहमति के आधार पर ऑनलाइन शिक्षण प्रदान करने का काम किया। इस कालखंड में विश्‍वविद्यालय के विद्यार्थियों ने वर्धा सहित 10 से अधिक गांवों का सर्वे कर 400 पृष्‍ठों की रिपोर्ट तैयार की। विश्‍वविद्यालय ने इस रिपोर्ट को केंद्र और राज्‍य सरकार को सौंपा है। उन्‍होंने कहा कि विश्‍वविद्यालय ने सामाजिक संपर्क और उत्‍तरदायित्‍व का परिचय देते हुए कोरोना काल में 2 हजार से अधिक जरूरतमंद लोगों की मदद की है। विश्‍वविद्यालय ने कोरोना के नियमों का शत प्रतिशत पालन करते हुए 10 से अधिक अंतरराष्‍ट्रीय वेबिनार हिंदी माध्‍यम से संपन्‍न कराया, जिसमें 7 से अधिक देशों के अध्‍यापकों ने हिंदी में अपनी बात रखी।

हाल ही में माननीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी ने विश्‍वविद्यालय में भारतीय अनुवाद संघ का ई शुभारंभ किया। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि देश-विदेश के 64 भाषाओं के 01 हजार से अधिक अनुवादकों ने पंजीकृत कराकर एक अनूठी पहल की है। ‘भारतीय अनुवाद संघ’ राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा और ज्ञान में उन्नयन की दृष्टि से उपर्युक्त कार्यों में अग्रणी नेतृत्वकारी भूमिका का निर्वहन करने के लिए संकल्पित है ।

गत 8 अक्‍टूबर, 2020 को विश्‍वविद्यालय ने महाराष्‍ट्र सरकार के साथ वेबिनार किया जिसमें 7 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्‍सा लिया। उन्‍होंने कहा कि विश्‍वविद्यालय अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर हिंदी के उन्‍नयन के लिए अग्रसर है। विश्‍वविद्यालय में राष्‍ट्रीय स्‍तर पर 50 से अधिक वेबिनार कर कोरोना के काल में भी हमने अकादमिक दायित्‍वों का परिचय दिया है। उन्‍होंने कहा कि उच्‍च शिक्षा में हिंदी माध्‍यम से कार्य करने को लेकर विश्‍वविद्यालय नई प्रविधियां विकसित कर रहा है। इस दिशा में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए इंटरनेट आधारित रेडियो के माध्‍यम से भी अभिनव प्रयोग किया जा रहा है और साथ ही विश्‍वविद्यालय हिंदी के माध्‍यम से ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में आधुनिकतम तकनीक के द्वारा दुनिया भर में अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहा है।

सरकार को 200 में और जनता को देने होंगे 1 हजार रुपये

नयी दिल्ली: ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने रविवार को कोरोना वैक्सनी के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब कोरोना वायरस वैक्सीन की कीमतों को लेकर चल रहा संशय दूर हो चुका है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने वैक्सीन की कीमत पर बड़ा ऐलान किया है।

पूनावाला ने कहा कि सरकार को ऑक्सफोर्ड  की वैक्सीन 200 रुपये में देंगे, तो वहीं, जनता को यह वैक्सीन 1 हजार रुपये में दी जाएगी। पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट में ऑक्सफोर्ट-एस्ट्राजैनेका की वैक्सीन कोविशील्ड बनाई जा रही है। बता दें कि डीसीजीआई कोविशील्ड को आपातकालीन इस्तेमाल की इजाजत दी है।

सरकार ने पूरी कर ली हैं सभी तैयारियां

भारत में जल्द ही वैक्सीन प्रोग्राम की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए सरकार ने सभी तैयारियां कर ली हैं। शनिवार को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राई रन का आयोजन किया गया था। भारत सरकार के अलावा यूरोपीय संघ भी वैक्सीन निर्माताओं की मदद के लिए आगे आया है।

सीरम इंस्टीट्यूट दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता कंपनी है। सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा कि हर महीने ऑक्सफोर्ट-एस्ट्राजैनेका की वैक्सीन के 50-60 मिलियन डोज तैयार किए जा रहे हैं। कंपनी ने बताया कि यह वैक्सीन फाइजर-बायोएनटेक से सस्ती है और ट्रांसपोर्टेशन भी आसान है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत ने 2021 के मध्य तक 130 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा हुआ है।

कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने बताया कि कोरोना वायरस वैक्सीन के 40-50 मिलियन डोज लगाने के लिए तैयार किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम सरकार के साथ कॉन्ट्रैक्टर साइन करने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 7-10 दिनों में वैक्सीन उपलब्ध हो जाएंगी।

पूनावाला ने बताया कि सरकार ने अभी हमें वैक्सीन निर्यात करने की इजाजत नहीं दी है, जबकि, साऊदी अरब और दूसरे कई देशों से हमारे द्वपक्षीय संबंध हैं। हम अगले कुछ हफ्तों में सरकार से इजाजत देने के लिए कहेंगे, ताकि हम 68 दूसरे देशों तक वैक्सीन पहुंचा सकें।

एक ही रात में पांडवों ने बनाया था यह मंदिर

महाराष्ट्र में मुंबई के पास स्थित अंबरनाथ मंदिर की। यह मंदिर शहर के अंबरनाथ शहर में स्थित है। इसे अंबरेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।

मंदिर में एक शिलालेख मौजूद है जिसमें लिखा है कि यह मंदिर 1060 ईं में राजा मांबाणि द्वारा बनाया गया था। इसे पांडवकालीन मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस जैसा मंदिर पूरे विश्व में नहीं है। मान्यता है कि इस मंदिर के पास कई ऐसे नैसर्गिक चमत्कार हैं जिसके चलते इसकी मान्यता बढ़ जाती है। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में –

इस मंदिर में एक अद्वितीय स्थापत्य कला शामिल है। यह मंदिर 11वीं शताब्दी में बनाया गया था। इस मंदिर के बाहर दो नंदी बैल बने हुए हैं। मंदिर के बाहर इसके प्रवेश द्वार पर तीन मुखमंडप हैं। यहां एक सभामंडप मौजूद है जिसकी 9 सीढ़ियों के नीचे गर्भगृह स्थित है। मंदिर की मुख्य शिवलिंग त्रैमस्ति की है। इनके घुटने पर एक नारी है जो शिव-पार्वती के रूप को दर्शाती है। इसके शीर्ष भाग पर शिवजी नृत्य मुद्रा में नजर आते हैं।

इस मंदिर की वास्तुकला बेहद शानदार है। इसे देखने देश-विदेश से कई लोग आते हैं। मंदिर की बाहर की दीवारें शिव जी के अनेक रूपों से सुसज्जित हैं। यहां पर गणेश, कार्तिकेय, चंडिका आदि देवी-देवताओं की मू्र्तियां भी मौजूद हैं। साथ ही देवी दुर्गा की मूर्ति भी सुसज्जित है। मां दुर्गा को असुरों का नाश करते हुए भी दिखाया गया है।

ऐसा कहा जाता है कि एक अज्ञातवास के दौरान कुछ वर्ष पांडवों ने अंबरनाथ में बिताए थे। इस दौरान उन्होंने विशाल पत्थरों से एक ही रात में मंदिर का निर्माण किया था। लेकिन पांडवों का पीछा लगातार कौरव कर रहे थे फिर भय के चलते उन्हें यह स्थान छोड़कर जाना पड़ा।

(साभार – दैनिक जागरण)

बिहार: राजगीर में सीआरपीएफ कैंप के पास इंदकूट गुफा में मिली 50 फीट लंबी सबसे संकरी सुरंग

इंदकूट गुफा… राजगीर शहर से करीब सात किलोमीटर दूर सीआरपीएफ कैंप के पास राजगीर-गया पहाड़ की हाथीमत्था चोटी पर स्थित है। मुख्य गुफा 65 फीट लंबी है। इसमें एक छोटी सुरंग है। यह शायद मगध क्षेत्र की सबसे संकरी सुरंग है। इसकी लंबाई 50 फीट के करीब है। यह इतनी संकरी है कि इसमें एक ही व्यक्ति लेटकर किसी तरह आर-पार हो सकता है।

नालंदा की साहित्यिक मंडली ‘शंखनाद’ की टीम व पुरातत्ववेत्ताओं ने इसे एक हफ्ते पहले लोगों के समक्ष लाया है। हालांकि, स्थानीय लोगों ने बताया कि उनलोगों ने कई बार सुरंग आर-पार की है। हाथीमत्था खड़ी चोटी है। इस पर चढ़ना अन्य चोटियों जैसा आसान तो नहीं, पर काफी रोमांचक है। ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने यहां के स्थानीय लोगों (इंदवस्सा) को उपदेश दिया था। गुफा के आसपास पहाड़ पर इंद्रजौ के पौधों की अधिकता है।

पुरातत्ववेत्ता तूफैल अहमद खान सूरी व इतिहासकार डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह कहते हैं- इंदकूट गुफा  का वर्णन कई किताबों में  है। बौद्ध ग्रंथ ‘संयुक्त निकाय’ के पेज 206, ‘सारपत्थपकासिनी’ के पेज 300 के अलावा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा वर्ष 1936 में प्रकाशित डॉ. बिमलचूर्णला रचित ‘राजगृह इन एनसिएंट लिटरेचर’ के पेज 15 पर इस गुफा का वर्णन है। इनमें कहा गया है कि गौतम बुद्ध ने स्थानीय लोगों को जीवन रहस्य के बारे में जानकारी दी थी।

राजगृह की सबसे ऊंची चोटी
राजगृह की रत्नागिरि पर स्थित अशोक स्तंभ के अवशेष वाली चोटी 1,243 फीट ऊंची है। जबकि इंदकूट गुफा वाली हाथीमत्था चोटी 1,300 फीट ऊंची है। इसे राजगृह के समीप की सबसे ऊंची चोटी कही जा कहती है। सिमरौर के श्री यादव, सुधीर यादव, टिंकु साव, जगजीवनपुर गांव के चंदु राजवंशी, दिनेश राजवंशी, मेढ़ू राजवंशी व अन्य ने बताया कि उनलोगों ने इस चोटी का कई बार भ्रमण किया है। सबसे संकीर्ण गुफा को आर-पार भी किया है।

मखाने और बांस की खेती का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करेगा रुहेलखंड विश्‍वविद्यालय

रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्लांट साइंस विभाग में दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने जा रहा है। यह सर्टिफिकेट मखाने की खेती और बेंबो फार्मिंग के लिए होगा। इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। विवि के बॉटनिकल गार्डन में मखाने के की खेती के लिए तालाब तैयार होगा वहीं बांस की कई प्रजातियों को तैयार करने के लिए टिश्यू कल्चर तकनीक की मदद ली जाएगी। इन दोनों प्रोजेक्ट के लिए रुहेलखंड विवि की ओर से प्रपोजल नेशनल हार्टीकल्चर मिशन और बेंबू बोर्ड को भेजा जा रहा है। शुक्रवार को कुलपति ने बॉटनिकल गार्डन के निरीक्षण के दौरान यह जानकारी दी।रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पांच एकड़ में बॉटनिकल गार्डन तैयार किया गया है। पहले यह दो एकड़ में था बाद में विस्तार देते हुए इसको पांच एकड़ कर दिया गया। विवि में बांस की काला, सफेद, और हरे प्रजाति को टिश्यू कल्चर की मदद से तैयार किया है। विभाग बॉटनिकल गार्डन में दस प्रजाति के बांस तैयार कर उनको विकसित करेगा और लोगों को पौधे देकर रोजगार में मदद करेगा। शुक्रवार को इस प्रोजेक्ट के निरीक्षण के लिए कुलपति प्रो. केर्पी ंसह बॉटनिकल गार्डन पहुंचे। वहां उन्होंने विभागाध्यक्ष प्रो. संजय गर्ग, प्रो. आलोक श्रीवास्तव और प्रोफेसर जेएन मौर्या से बैंबू फार्मिंग में हुए शोध की प्रगति के बारे में पूछा। इस दौरान उन्होंने मखाने की खेती के लिए एक मॉडल तालाब विकसित करने के लिए भी विभागाध्यक्ष को निर्देश दिए। यह सारी कवायद मखाने की खेती और बैंबू फार्मिंग को लेकर शुरू होने जा रहे सर्टिफिकेट कोर्स को लेकर की जा रही है। विभाग की ओर से दोनों कोर्स का सिलेबस तैयार किया जा चुका है। अब ढांचा तैयार होने के बाद इसको शुरू कर दिया जाएगा।

बगैर आरक्षण वाली ट्रेनें चलाएगा भारतीय रेलवे

नयी दिल्ली : ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी है। भारतीय रेलवे अब बिना रिजर्वेशन वाली ट्रेनें चलाएगा। ये ट्रेनें पूरी तरह जनरल कोच होंगी। यात्री इन ट्रेनों में तुरंत टिकट लेकर यात्रा कर सकेंगे। रेलवे के इस फैसले से लाखों यात्रियों को फायदा मिलेगा। ये ट्रेनें लोकल ट्रेनों से पूरी तरह अलग होंगी। पहले चरण में इन ट्रेनों को एक डिवीजन से दूसरे डिवीजन में चलाया जाएगा। वहीं, इसके बाद दूसरे डिवीजन में भी इन्हें चलाया जाएगा।
ट्रेनों को जल्द से जल्द संचालित किया जा सके, इसके लिए भारतीय रेलवे ने सभी रेल मंडलों से जानकारी भी मांग ली है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय रेलवे द्वारा बिना रिजर्वेशन वाली ट्रेनों को इसलिए चलाया जाएगा, ताकि लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्री अंतिम स्टेशन पर जल्द पहुँच सकें। आपको बता दें कि अभी आरक्षित ट्रेनों में तीन से चार जनरल कोच लगते हैं और इनमें सफर करने के लिए यात्रियों को रिजर्वेशन कराना पड़ता है।
रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मेल व एक्सप्रेस ट्रेनें आरक्षित होती हैं, लेकिन उसमें लगे जनरल कोचों की वजह से क्षेत्रीय यात्री भी सफर करते हैं. जिसकी वजह से ट्रेन को रास्ते में बार-बार रोकना पड़ता है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री परेशान हो जाते हैं।
बिना रिजर्वेशन वाली ट्रेनों के चलने से एक जहां लोकल में सफर करने वाले यात्रियों को कम समय लगेगा। वहीं, इस फैसले से कम आय वाले यात्रियों के पास अधिक ट्रेनों का विकल्प हो जाएगा. साथ ही इससे रेलवे को भी फायदा होगा और उसे लंबी दूरी की ट्रेनों की गति बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
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अमूल के साथ आप भी शुरू कर सकते हैं अपना व्यवसाय

नयी दिल्ली: अगर आप नई नौकरी की तलाश में हैं तो हम आपको एक ऐसे व्यवसाय के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको शुरू कर आप पहले दिन से ही मोटी कमाई कर सकते हैं। डेयरी प्रोडक्ट बनाने वाली कम्पनी अमूल के साथ व्यवसाय करने का इस समय बड़ा मौका है। अमूल नए साल में भी फ्रेंचाइजी ऑफर कर रही है। छोटे निवेश में हर महीने नियमित कमाई की जा सकती है। अमूल की फ्रेंचाइजी लेना फायदे का सौदा है। इसमें नुकसान न के बराबर होने की गुंजाइश होती है।अमूल बिना किसी रॉयल्‍टी या प्रॉफिट शेयरिंग के फ्रेंचाइजी दे रही है। आप 2 लाख से लेकर 6 लाख रुपये खर्च करके अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं ।कारोबार की शुरुआत में ही अच्‍छा खासा लाभ कमाया जा सकता है। फ्रेंचाइजी के जरिए हर महीने लगभग 5 से 10 लाख रुपये की बिक्री हो सकती है। हालांकि, यह जगह पर भी निर्भर करता है।
अमूल दो तरह की फ्रेंचाइजी दे रहा है। पहली अमूल आउटलेट, अमूल रेलवे पार्लर या अमूल क्‍योस्‍क की फ्रेंचाइजी और दूसरी अमूल आइसक्रीम स्‍कूपिंग पार्लर की फ्रेंचाइजी। अगर आप पहली वाली में निवेश करना चाहते हैं तो 2 लाख रुपये निवेश करने होंगे। वहीं अगर दूसरी फ्रेंचाइजी लेने का सोच रहे हैं तो 5 लाख का निवेश करना होगा। इसमें नॉन रिफंडेबल ब्रांड सिक्‍योरिटी के तौर पर 25 से 50 हजार रुपये देने होंगे।अमूल आउटलेट लेने पर कम्पनी अमूल प्रोडक्‍ट्स के मिनिमम सेलिंग प्राइस यानी एमआरपी पर कमीशन देती है. इसमें एक मिल्‍क पाउच पर 2.5 फीसदी, मिल्‍क प्रोडक्‍ट्स पर 10 फीसदी और आइसक्रीम पर 20 फीसदी कमीशन मिलता है। अमूल आइसक्रीम स्‍कूपिंग पार्लर की फ्रेंचाइजी लेने पर रेसिपी बेस्‍ड आइसक्रीम, शेक, पिज्‍जा, सेंडविच, हॉट चॉकेलेट ड्रिंक पर 50 फीसदी कमीशन मिलता है। वहीं, प्री-पैक्‍ड आइसक्रीम पर 20 फीसदी और अमूल प्रोडक्‍ट्स पर कंपनी 10 फीसदी कमीशन देती है।अगर आप अमूल आउटलेट लेते हैं तो आपके पास 150 वर्ग फुट जगह होनी चाहिए। वहीं, अमूल आइसक्रीम पार्लर की फ्रेंचाइजी के लिए कम से कम 300 वर्ग फुट की जगह होनी चाहिए।अगर आप फ्रेंचाइजी के लिए अप्‍लाई करना चाहते हैं तो आपको [email protected] पर मेल करना होगा. इसके अलावा इस लिंक http://amul.com/m/amul-scooping-parlours पर जाकर भी जानकारी ली जा सकती है।

(साभार – न्यूज 18)