तेलंगाना के बिजली विभाग में लाइनमैन की पोस्ट के लिए जो भर्ती निकाली गई थी उसमें महिलाओं को वर्जित लिखा गया था। लेकिन सिरिशा ने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर इस बैन का विरोध किया। उन्होंने ये कहा कि जो काम लड़के कर सकते हैं, उसे मेरी तरह लड़कियां क्यों नहीं कर सकतीं। सिरिशा ने ट्रेड में आईटीआई की पढ़ाई पूरी की है।
आखिर सिरिशा की जीत हुई और उसके साथ आठ और लड़कियों ने इस पोस्ट के लिए आवेदन किया। उनमें से सिरिशा ने ये परीक्षा पास की। इसके साथ ही उसने बिजली के खंभे पर चढ़ने की परीक्षा भी पास की। इस साहसी लड़की ने खंभे पर चढ़ने और फिर उतरने में एक मिनट से भी कम समय लिया। सिरिशा को तेलंगाना की पहली लाइन वुमन बनने का सम्मान मिला है।
सिरिशा की उम्र 20 साल है। वे सिद्दीपट्ट राज्य के मारकूक मंडल में गणेशपल्ली गांव की निवासी हैं। सिरिशा का कहना है कि एक लाइन वुमन के तौर पर उन्हें कड़ी मेहनत करना होती है। वे अपने काम के बल पर ये बताना चाहती हैं कि महिलाएं किसी भी काम में पुरुषों से कम नहीं हैं।
नयीदिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शनिवार को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ शुरू किए गए दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के तहत गत शनिवार को भारत में अग्रिम पंक्ति के लगभग दो लाख स्वास्थ्यकर्मियों और सफाईकर्मियों को टीके की पहली खुराक दी गई। इसके साथ ही दुनियाभर में 10 महीनों में लाखों जिंदगियों और रोजगार को लील लेने वाली इस महामारी के भारत में खात्मे की उम्मीद जगी है। भारत में करीब एक करोड़ लोगों के संक्रमित होने और 1,52,093 लोगों की मौत के बाद देश ने ‘कोविशील्ड’ और ‘कोवैक्सीन’ टीके के साथ महामारी को मात देने के लिए पहला कदम उठाया है और देशभर के स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भारत में टीकाकरण के पहले दिन 3,352 केंद्रों पर 1,91,181 स्वास्थ्यकर्मियों और सफाईकर्मियों को टीके की पहली खुराक दी गयी।
स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ एम्स दिल्ली के निदेशक रणदीप गुलेरिया, नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल, भाजपा सांसद महेश शर्मा और पश्चिम बंगाल के मंत्री निर्मल माजी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें टीके की पहली खुराक दी गयी। पॉल कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए चिकित्सा उपकरण एवं प्रबंधन को लेकर गठित अधिकार समूह के प्रमुख भी हैं।
नयीदिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 1,000 करोड़ रुपये के ‘स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड’ शुरू किये जाने की घोषणा की। इस कोष की शुरुआत देश में नये उद्यमियों और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन देने के लिये की गई है।
मोदी ने ‘‘प्रारम्भ: स्टार्ट-अप भारत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन’ को संबोधित करते हुये विश्वास व्यक्त किया कि स्टार्ट-अप की वृद्धि से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उस क्षेत्र के लोगों के जीवन में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘नये उद्यमियों को शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराने के लिये देश 1,000 करोड़ रुपये के ‘स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड’ की शुरुआत कर रहा है। इससे नये उद्यमों की शुरुआत करने और उनकी वृद्धि को प्रोत्साहन देने में मदद मिलेगी।’’
यह सम्मेलन देश में स्टार्ट-अप इंडिया अभियान के पांच साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने 2016 में इसी दिन इस अभियान की शुरुआत की थी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्टार्ट-अप के लिये इक्विटी पूंजी जुटाने में मदद के वास्ते फंड ऑफ फंड योजना को भी अमल में ला रही है। आने वाले दिनों में सरकार स्टार्ट-अप को ऋण पूंजी जुटाने में भी मदद करने वाली है।
मोदी ने कहा कि भारत आज स्टार्ट-अप के मामले में दुनिया का तीसरा बड़ा देश बन गया है। भारत ने इस दौरान कई उभरते उद्यमियों को आगे बढ़ने में मदद की गई। नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी के साथ ये उद्यमी आगे बढ़े और बड़ी कंपनी बन सके।
उन्होंने कहा कि भारत में स्टार्ट-अप केवल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है बल्कि नये उभरते 40 प्रतिशत स्टार्ट-अप देश के दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से सामने आ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में केवल चार स्टार्ट-अप ही यूनिकॉर्न क्लब में शामिल थे लेकिन आज 30 से अधिक भारतीय स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न क्लब के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में ही 11 भारतीय स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुये हैं। इसके साथ ही भारत स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी वाला तीसरा बड़ा देश बन गया है। देश में इस समय 41,000 से अधिक स्टार्ट-अप काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर स्टार्ट-अप ऐसे भी है जिनमें महिलायें मुख्य भूमिका में हैं। देश में 2020 में कोरोना महामारी के दौरान कई स्टार्ट-अप शुरू हुये हैं। स्टार्ट-अप ने एक ही परिपाटी पर चलते रहने की सोच को बदला है। उन्होंने हर क्षेत्र में विविधता लाने की पहल की है।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर बिमस्टेक (बे आफ बंगाल इनिशिएटिव ऑफ मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक को-ऑपरेशन) देशों के स्टार्ट-अप से उनकी उपलब्धियों को सुना। देश के अंदर से जहां चेन्नई, एर्नाकुलम, भोपाल, गाजियाबाद, सोनीपत और दिल्ली के नये उद्यमियों ने उन्हें अपने कारोबार के बारे में बताया, वहीं मोदी ने बांग्लादेश, भूटान, म्यामां, नेपाल और थाइलैंड के स्टार्ट-अप उद्यमियों की उपलब्धियों के बारे में भी सुना और उन्हें सराहा।
वाशिंगटन : अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की पत्नी जिल बाइडन ने भारतीय मूल की गरिमा वर्मा को अपने कार्यालय में डिजिटल निदेशक और माइकल लारोसा को प्रेस सचिव के तौर पर नामित किया है। बाइडन की टीम ने यह जानकारी दी।
बाइडन के 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद जिल बाइडन अमेरिका की प्रथम महिला होंगी। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने भी प्रथम महिला के कार्यालय में अतिरिक्त सदस्यों की घोषणा की और ‘ज्वाइनिंग फोर्सेस’ पहल के नए कार्यकारी निदेशक के तौर पर रोरी ब्रोसियस को नामित किया।
टीम ने बताया कि गरिमा ओहायो और कैलिफोर्निया के सेंट्रल वैली में पली बढ़ी हैं और उनका जन्म भारत में हुआ है । गरिमा बाइडन-हैरिस के चुनाव प्रचार अभियान का भी हिस्सा थीं। इससे पूर्व वह मनोरंजन जगत का हिस्सा रह चुकी हैं। वह पारामाउंट पिक्चर्स में मार्केटिंग फिल्म्स और वाल्ट डिज्नी कंपनी के एबीसी नेटवर्क में टेलीविजन कार्यक्रमों के लिए काम कर चुकी हैं। उन्होंने मीडिया एजेंसी होरिजन मीडिया के साथ भी काम किया है।
वर्मा कई छोटे-मोटे कारोबार और गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए मार्केटिंग, डिजाइन और डिजिटल में स्वतंत्र कंसल्टेंट के तौर पर सेवा दे चुकी हैं। टीम ने बताया कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान चुनाव प्रचार से जुड़े और अब बाइडन-हैरिस टीम का हिस्सा बने लारोसा डॉ. जिल बाइडन के प्रेस सचिव और मुख्य प्रवक्ता थे। लारोसा नैंसी पेलोसी के कार्यालय में हाउस डेमोक्रेटिक पॉलिसी कम्युनिकेशंस कमेटी के लिए संचार निदेशक थे।
जिन अन्य लोगों को नामित किया गया है उनमें गिना ली, वनेसा लायन और जॉर्डन मोंटोया के नाम शामिल हैं। जिल बाइडन ने कहा, ‘‘अपनी विवधतापूर्ण पृष्ठभूमि के साथ ये समर्पित और कुशल लोक सेवक एक ऐसे प्रशासन के निर्माण में प्रतिबद्ध होंगे जो अमेरिका के लोगों के विकास में सहयोग करेगा।’’ बाइडन की टीम ने कहा कि ये कुशल एवं अनुभवी लोग डॉ. जिल बाइडन के साथ काम करेंगे और उनके कार्यालय के कामकाज में अहम भूमिका निभाएंगे।
नयीदिल्ली : देश की टैक्सी सर्विस को एक नई उड़ान देते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत एयर टैक्सी सर्विस को शुरू कर दिया है। बता दें, यह टैक्सी सर्विस शुरुआती दौर में चंडीगढ़ से हिसार का रास्ता तय करेगी। जिसके बाद दूसरे चरण में हिसार से देहरादून के लिए भी हवाई सेवाएं शुरू की जाएंगी। वहीं इसके तीसरे चरण में दो और मार्गों को जोड़ा जाएगा।
सीएम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि “देश में पहली बार एयर टैक्सी के रूप में एक छोटे विमान का इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरे चरण में हिसार से देहरादून के लिए सेवाएं 18 जनवरी को शुरू की जाएंगी। तीसरे चरण में चंडीगढ़ से देहरादून और हिसार से धर्मशाला तक के दो अन्य मार्गों को 23 जनवरी को जोड़ा जाएगा। वहीं कंपनी शिमला, कुल्लू और अधिक हरियाणा मार्ग पर इसका विस्तार करने की योजना बना रही है।
खट्टर ने आगे कहा कि “एक निजी कंपनी द्वारा चलाए जाने वाले ये एयर टैक्सियां चार सीटर होंगी और इनकी गति सीमा 250 किमी प्रति घंटा होगी। इस एयर टैक्सी की शुरुआत के लिए राज्य के साथ-साथ देश के बाकी हिस्सों को भी बधाई देता हूं। इन हवाई टैक्सियों में किराया भी बहुत ज्यादा महंगा नहीं है। किराए का आंकलन करें मतो वॉल्वो बस में एक व्यक्ति का किराया 700 रुपये है। वहीं इस एयर टैक्सी में एक यात्री को 1,755 रुपये खर्च करने होंगे। हालांकि इससे समय की खासी बचत होगी।”
माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स अमेरिका के सबसे बड़े किसान बन गए हैं। उन्होंने देश के 18 राज्यों में दो लाख 42 हजार एकड़ जमीन खरीदी है। इसमें से ज्यादातर खेती करने योग्य भूमि है। मीडिया रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
दुनिया के चौथे सबसे अमीर शख्स बिल गेट्स अमेरिका के ऐसे पहले व्यक्ति बन गए हैं, जिनके पास इतनी जमीन है। रिपोर्ट के मुताबिक इस जमीन पर स्मार्ट सिटी का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ बिल गेट्स की योजना बड़े पैमान पर फसल उगाने की है। गेट्स के पास कुल 2,68,984 एकड़ जमीन पर मिलकियत हो गई है। खरीदी गई जमीन पर बिल गेट्स क्या करेंगे उसके बारे में नहीं बताया गया है।
वहीं, मीडिया रिपोर्ट की मानें तो बिल गेट्स ने एरिजोना में स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए जमीनें खरीदी हैं। उनका सपना है कि वह एक बेहतरीन स्मार्ट सिटी बनाएं। 2008 में बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने घोषणा की थी कि उनका फाउंडेशन अफ्रीका और दुनिया के अन्य विकासशील देशों के दोटे किसानों को कृषि क्षेत्र में मदद करेंगे।
कृषि क्षेत्र में आने से देश को होगा फायदा
65 वर्षीय बिल गेट्स ने अमेरिका के लुसियाना में 69 हजार एकड़, अर्कंसस में करीब 48 हजार एकड़, एरिजोना में 25 हजार एकड़ खेती योग्य जमीन खरीदी है। जानकारों का कहना है कि बिल गेट्स अगर कृषि के क्षेत्र में आते हैं तो इससे अमेरिका में सस्टनेबल फार्मिंग को काफी मदद मिलेगी।
कोलकाता : कलकत्ता हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि अब से कार्यस्थलों में समलैंगिक यौन उत्पीड़न की शिकायतों को भी स्वीकार किया जाएगा। अगर कोई महिला अन्य महिला सहकर्मी के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत लेकर आती है तो उसे स्वीकार कर लिया जाएगा। इसी तरह एक पुरूष दूसरे पुरूष सहकर्मी के खिलाफ ऐसी शिकायत दर्ज करा सकता है।
एक मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं में काफी बहस हुई। दोनों तरफ की दलीलों पर गौर करने के बाद हाईकोर्ट ने यह निर्णय सुनाया। हाईकोर्ट के अनुसार 2013 अधिनियम की धारा नौ में समलैंगिकता के आरोपों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है इसलिए एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत की जा सकती है।
भले ही शिकायत करने वाले एक ही लिंग के कयों न हों। जहां समान लिंग वालों में विवाह को वैध बनाने की बात की जाती है, वहां यौन-उत्पीड़न भी स्वीकार्य होगा। गौरतलब है कि कार्यालयों में इस तरह के भी कई मामले सामने आ रहे हैं। इसे लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं होने के कारण शिकायतें दर्ज नहीं की जाती थीं।
कोलकाता : कोविड-19 के प्रसार को रोकने के उपाय के रूप में भारतीय रेलवे ने फरवरी के अंत में देशव्यापी लॉकडाउन के समय ही ई-कैटरिंग सेवाओं को निलंबित कर दिया था। अब यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने आइआरसीटीसी को चुनिंदा स्टेशनों पर फिर से ई कैटरिंग सेवा शुरू करने की अनुमति दे दी है। इसके मद्देनजर लंबे अंतराल के बाद पूर्व रेलवे के प्रमुख स्टेशनों पर जल्द ही फिर से ई-कैटरिंग सेवाएं शुरू की जाएगी। रविवार को पूर्व रेलवे की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई।
दरअसल, अनलॉक के बाद लंबी दूरी की ट्रेनों और विशेष ट्रेनों के फिर से शुरू होने के साथ आइआरसीटीसी की ई-कैटरिंग सेवाओं को फिर से बहाल करने के लिए यात्रियों की ओर से लगातार मांग की जा रही थी, क्योंकि ट्रेनों व स्टेशनों पर गर्म, स्वस्थ और स्वास्थ्यकर भोजन की आपूर्ति के लिए आइआरसीटीसी की सेवाएं बहुत लोकप्रिय है। यात्रियों की लगातार मांग को देखते हुए आइआरसीटीसी ने रेलवे बोर्ड को चुनिंदा स्टेशनों पर ई-कैटरिंग सेवाओं की फिर से बहाली के लिए अनुरोध पत्र लिखा था। तदनुसार, रेलवे बोर्ड ने आइआरसीटीसी को चयनित रेलवे स्टेशनों पर ई-कैटरिंग सेवाओं को फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है।
हालांकि आइआरसीटीसी व उसके अधिकृत वेंडरों को केंद्र और राज्य सरकारों एवं अधिकृत एजेंसियों द्वारा जारी किए गए स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रोटोकॉल से संबंधित सभी दिशा निर्देशों का पालन करना होगा। बयान में बताया गया कि पूर्व रेलवे के क्षेत्राधिकार में ई-कैटरिंग सेवाएं सात रेलवे स्टेशनों पर शुरू की जाएंगी। ये हावड़ा, सियालदह, कोलकाता, दुर्गापुर, आसनसोल, मालदा और भागलपुर स्टेशन हैं।
वहीं, मालदा डिवीजन, हावड़ा डिवीजन और जमालपुर के अलावा बर्धमान और बोलपुर में आने वाले दिनों में ई-कैटरिंग सेवाओं के दायरे में और अधिक स्टेशनों को जोड़ने की भी योजना है। गौरतलब है कि ई-कैटरिंग सेवाओं का मूल उद्देश्य विभिन्न शहरों के रेलवे स्टेशनों पर मौजूद रेस्तरां और फूड प्लाजा में उचित दर पर विभिन्न प्रकार के भोजन प्रदान करना है।
ई-कैटरिंग के तहत भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आइआरसीटीसी) द्वारा बड़ी संख्या में खाद्य एग्रीगेटरों द्वारा सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा , ई-कैटरिंग सेवाओं में फास्ट फूड यूनिट और फूड प्लाजा चुनिंदा स्टेशनों पर उपलब्ध हैं। यात्री अपनी बर्थ संख्या का विवरण देकर ई-कैटरिंग सुविधा का लाभ उठा सकते हैं और ई-कैटरिंग के माध्यम से या तो अग्रिम भुगतान करके या डिलीवरी के बाद भुगतान करके इसका लाभ उठा सकते हैं। ई-खानपान को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए पूर्व रेलवे आइआरसीटीसी को सभी प्रकार का सहयोग व समर्थन दे रहा है।
सहारनपुर : हैरान हो जाना स्वाभाविक है, जब पता चले कि एक किसान का गुड़ पांच हजार रुपये किलो भी बिकता है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का एक गांव है मुबारकपुर। यहीं के किसान संजय सैनी दस एकड़ में न केवल जैविक विधि से गन्ने की खेती कर रहे हैं, वरन रसायनमुक्त गन्ने को चीनी मिल में बेचने की जगह अपने कोल्हू पर 77 प्रकार का गुड़ भी बना रहे हैं। इनकी कीमत 80 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये प्रति किलो तक है। गुड़ की ऐसी आसमानी कीमत सुनकर हर कोई हैरान हो जाता है। सबकी हैरानी दूर करते हुए संजय दावा करते हैं कि पांच हजार रुपये प्रति किलो वाला गुड़ च्यवनप्राश से भी ज्यादा खूबियों से समृद्ध है। च्यवनप्राश बनाने में जितने प्रकार की सामग्री (जड़ी-बूटी आदि) लगती हैं, इस गुड़ में उससे भी ज्यादा सामग्री मिलाई जाती है। संजय को अपना गुड़ बेचने कहीं जाना नहीं पड़ता, उनका पूरा गुड़ घर से ही बिक जाता है, इस गुड़ के खरीदार पूरे देश में हैं।
गुड़ को लेकर अब खासे चर्चित हो चले संजय सैनी देश भर में लगने वाली कृषि प्रदर्शनियों में जाते हैं और विभिन्न जड़ी-बूटियों से बने 77 प्रकार के गुड़ लोगों के सामने रखते हैं। संजय बताते हैं, उनका गुड़ सामान्य नहीं है। यह जैविक गन्ने से तैयार होता है, इसमें विभिन्न दुर्लभ जड़ी-बूटियां मिली हैं, यह कई प्रकार के रोगों में कारगर है। ऐसे में जड़ी-बूटियों की कीमत के अनुसार ही गुड़ की कीमत भी निर्धारित होती है। पांच हजार रुपये प्रति किलो वाले गुड़ में स्वर्ण भस्म के अतिरिक्त 80 प्रकार की जड़ी-बूटियां मिलाई जाती हैं। पांच हजार रुपये किलो वाले गुड़ की मांग अभी पांच सौ किलो प्रतिवर्ष है।
गन्ना मिलों पर बकाए को लेकर परेशान रहने वाले किसानों के लिए संजय सैनी ने एक रास्ता खोला है। संजय बताते हैं कि वर्ष 2000 में उन्होंने जैविक गन्ने की खेती की ओर रुख किया। फसल अच्छी हुई तो उसे मिल में बेचने की जगह स्वयं के कोल्हू पर ही जैविक गुड़ बनाने का सिलसिला शुरू कर दिया। गुड़ बनाते समय गन्ने के रस को साफ करने के लिए भी किसी केमिकल का प्रयोग करने की जगह सरसों के तेल, दूध और अरंडी के तेल का प्रयोग शुरू किया।
धीरे-धीरे उनके जैविक गुड़ के कद्रदान बढ़ते गए। सराहना मिली तो हौसला भी बढ़ा, परिणाम अब सामने है। आज उनके कोल्हू पर आसपास के 10 लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है। संजय सैनी ने जड़ी-बूटियों से संबंधित कई पुस्तकों का अध्ययन किया था। जैविक गुड़ बनाने में उनका यह ज्ञान काम आया। किस गुड़ में किस सामग्री और जड़ी-बूटी को कितनी मात्र में डालना है, यह अनुपात उन्हें पठन-पाठन और अपने अनुभव से मिला।
केमिकल का प्रयोग किए बिना गुड़ को लंबे समय तक फफूंद से बचाना आसान नहीं था। संजय ने प्रयोग किया और दूब, एलोवेरा व तुलसी के रस से गुड़ पर कोटिंग कर उसे लंबे समय तक फफूंद से बचाने में कामयाबी पाई। संजय बताते हैं कि बिहार और बंगाल में हींग जैसा स्वाद देने वाले गुड़ की अधिक मांग रहती है, तो वहां के लिए वैसा ही गुड़ बनाते हैं। पित्त रोकने के लिए अजवायन, सौंफ और धनिया मिश्रित गुड़ खूब पसंद किया जा रहा है। वात के लिए मेथी व काले जीरे का गुड़ रामबाण है।
कफ को रोकने के लिए सोंठ, काली मिर्च और दालचीनी के मिश्रण से गुड़ तैयार किया जाता है। वहीं, मधुमेह के मरीजों के लिए अश्वगंधा, मेथी, अजवायन और लेमनग्रास मिश्रित गुड़ की खूब मांग है। संजय बताते हैं, यह मधुमेह रोकने में बेहद कारगर है। बुजुर्गो के लिए सतावर और सफेद मूसली मिला गुड़ बेहद लाभकारी है।
गुड़ के बाद संजय अब गन्ने के रस की कुल्फी और गन्ना जलेबी बनाने की तैयारी में हैं। संजय सैनी किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करते हैं, उन्हें प्रशिक्षण भी देते हैं। आज इनके द्वारा प्रेरित देश भर के 650 किसानों का समूह जैविक खेती पर काम कर रहे हैं। (साभार – दैनिक जागरण)
सभी सखियों को नमस्कार। सखियों, इतिहास के पन्नों पर अनगिनत प्रेम कहानियाँ अंकित हैं जिनकी सुगंध से देश की हवाएँ आज भी सुवासित हैं। इनमें से कुछ कहानियों को अपनी मंजिल मिलीं तो कुछ आधी -अधूरी भले ही रहीं लेकिन उन्हें शोहरत खूब मिली। ऐसी ही एक कथा है, रानी रूपवती या रूपमती और मालवा के अंतिम स्वाधीन सम्राट बाजबहादुर की प्रेमकथा और इसकी गवाही देता है मांडू का किला।
कहा जाता है कि रानी रूपमती नर्मदा में स्नान किए बिना अन्न जल ग्रहण नहीं करती थीं और राजा बाजबहादुर उनसे इतना प्रेम करते थे कि उन्होंने मांडू में 3500 फीट की ऊंचाई पर रानी रूपमती के लिए एक किले का निर्माण करवाया जिसे रानी रूपमती का किला भी कहा जाता है। इस किले से नर्मदा नदी दिखाई देती थी। रानी रूपमती के महल तक पहुँचने से पहले राजा बाज बहादुर के महल को पार करना होता था और बाज बहादुर ने यह व्यवस्था रानी की सुरक्षा के लिए की थी।
रूपमती की पृष्ठभूमि को लेकर बहुत सी कहानियाँ मशहूर हैं, जिनमें से एक के अनुसार वह गरीब किसान की बेटी तो अन्य के अनुसार गणिका की पुत्री थी। रूपमती केवल अनिंद्य सुंदरी ही नहीं थीं बल्कि गीत संगीत की कला में भी निष्णात थीं। संगीत पारखी बाजबहादुर ने उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें अपनी जीवन संगिनि बना लिया। लेकिन इस प्रेमकथा की उम्र ज्यादी लंबी नहीं रही क्योंकि रूपमती और बाजबहादुर के प्रेम को शत्रुओं की नजर लग गई। कहते हैं कि रूपमती के रूप की चमक और गीतों की खनक दिल्ली दरबार तक भी पहुँच गई और अकबर के सेनानायक अहमद खाँ के नेतृत्व में मुगल सेना मालवा पर चढ़ आईं।
जब सेना सारंगपुर तक पहुँची तब बाजबहादुर को इसकी सूचना मिली। एक कहानी के अनुसार सन् 1561 ई. में सारंगपुर के युद्ध में पराजित होकर बाजबहादुर भाग निकला तो दूसरी के अनुसार अहमद खाँ द्वारा कैद कर लिया गया। कहा जाता है कि बाजबहादुर की गिरफ्तारी की सूचना पाकर रूपमती ने हीरा चाटकर अपने प्राण दे दिए। एक कहानी यह है कि अहमद खां ने गमजदा रानी को बंदी बनाकर उन्हें अपनी बेगम बनने का प्रस्ताव दिया लेकिन उन्होंने यह दोहा लिखकर, सतीत्व रक्षा के लिए आत्महत्या कर ली-
“रूपवती दुखिया भई, बिना बहादुर बाज।
सो अब जियरा जरत है, यहाँ नहीं कछु काज ।।
मांडू का महल
यह खबर पाकर अकबर को बहुत पछतावा हुआ और उन्होंने बाजबहादुर को मुक्त कर दिया। कहते हैं कि रूपमती की मजार पर सिर पटक कर बाजबहादुर ने भी प्राण त्याग दाए। कहा जाता है कि 1568 में सारंगपुर के पास एक अकबर द्वारा एक मकबरे का निर्माण कराया गया। बाज बहादुर के मकबरे पर अकबर ने ‘आशिक-ए-सादिक’ और रूपमती की समाधि पर ‘शहीदे-ए-वफा’ लिखवाया।
रूपमती की गायन प्रतिभा की चर्चा उस दौर में हर ओर थी और बहुत से लेखकों ने अपनी किताबों में इसका जिक्र किया है। मुंशी कर्म अली ने “तवारीखे मालवा” में लिखा है कि दीपक राग गाने के बाद जब तानसेन उसकी ज्वाला से पीड़ित था तो रूपमती ने मल्हार राग गाकर उसे शांत किया था। रूपमती केवल गायिका नहीं कवयित्री भी थीं।
हालांकि उनके द्वारा रचित कवाताएँ समय के साथ इतिहास के गलियारे में विलुप्त हो गई हैं लेकिन जनता के बीच उनकी स्मृति अब भी जीवित हैं। रूपमती द्वारा रचित अनेक गीत और पद्य जनसाधारण के बीच मशहूर हैं तथा अब तक मालवा के कई भागों में लोकगीतों के रूप में गाए जाते हैं। सैरुलमुताखिरीन ने भी रूपवती की बेजोड़ गायकी और हिंदी जबान में लिखे मजमून की सराहना की है। उनके गीत प्रेम और समर्पण के भावों से लबरेज़ हैं जिनमें भारतीय नारी की आत्मा कूजती है। सखियों, एक उदाहरण देखिए –
“और धन जोड़त है री मेरे तो धन प्यारे को प्रीत पूँजी।
कहूँ तिरिया की न लगे दृष्टि अपने कर रखूँगी कूँजी।
दिन – दिन बढ़े सवायो डेवढ़ो घटे न एको गूँजी।
बाज बहादुर के सनेह ऊपर निछावर करूँगी धन और जी।”
सखियों, यह प्रेम कहानी अपने आप में असाधारण और अविस्मरणीय है और कहने वाले कहते हैं कि मांडू के किले पर अब भी बाज बहादुर और रूपवती की मधुर स्वर लहरियाँ गूंजती हैं। प्रेम और समर्पण के साथ शस्त्र और संगीत के साये में पली इस कहानी ने जाति और धर्म की बेड़ियों का अतिक्रमण कर इतिहास ही नहीं जनता के बीच भी अपनी मिसाल कायम की। इस कथा पर कई उपन्यासों की रचना हुई है और फिल्म भी बनी है। हीर- रांझा , लैला- मजनू , शीरीं- फरहाद की तरह रूपवती और.बाजबहादुर की कथा को तो जनमानस ने याद रखा लेकिन रूपवती की काव्य प्रतिभा का मूल्यांकन सही ढंग से नहीं हो पाया। ऐसी न जाने कितनी प्रतिभाओं को समय की धूल ने ढँक लिया है, जिसे पोंछना आवश्यक है। आज के लिए विदा , सखियों। अगले हफ्ते फिर मुलाकात होगी, एक नई कहानी के साथ।