राशन और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से लेकर कोविड सेंटर की व्यवस्था की
रायबरेली के कवि पंकज प्रसून ने अपने पैतृक गांव सहजौरा समेत 8 ग्राम पंचायतों में ‘आओ गांव बचाएं’ मुहिम की शुरुआत की है और इस मुहिम से बड़ी हस्तियाँ जुड़ गयी हैं। उत्तर प्रदेश के 33 गांवों की कमान अब मशहूर कवि कुमार विश्वास, फिल्म स्टार सोनू सूद और लोक गायिका मालिनी अवस्थी
पिछले एक महीने के अंदर इन तीनों हस्तियों ने रायबरेली और सुल्तानपुर के 33 गाँवों तक लोगों को मदद पहुंचाई है। लोगों को मुफ्त में दवाइयां और जांच की सुविधा दी जा रही है। कुमार विश्वास ने 8 गांवों में विश्वास कोविड केयर सेंटर भी खोले हैं। इन सेंटर्स में हल्के लक्षण वाले कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
रायबरेली की 8 ग्राम पंचायतों में कवियों की फौज जुटी
रायबरेली के कवि पंकज प्रसून ने अपने पैतृक गांव सहजौरा समेत 8 ग्राम पंचायतों में ‘आओ गांव बचाएं’ मुहिम की शुरुआत की है। इसी के तहत कवि कुमार विश्वास भी जुड़े और उन्होंने 8 गांवों में विश्वास कोविड केयर सेंटर की स्थापना करवाई। पंकज प्रसून ने बताया कि इस अभियान में अभिनेता सोनू सूद और लोक गायिका मालिनी अवस्थी भी जुड़े गए हैं। इन लोगों की मदद से 4 ग्राम पंचायतों के 30 गांवों को कोरोना की मुफ्त दवाइयां, राशन किट और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पहुंचाया गया।
डॉक्टरों से परामर्श दिला रहे
कवि पंकज प्रसून ने बताया कि विश्वास कोविड केयर सेंटर्स पर पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर पद्मश्री ज्ञान चतुर्वेदी, पीजीआई के डॉक्टर ज्ञान चन्द्र, राजीव दीक्षित अस्पताल के डॉ. दीना नाथ पटेल, एनबीआरआई के डॉ. संजीव ओझा हमेशा मॉनिटर करते हैं। वीडियो कॉल और फोन कॉल के जरिए मरीजों को परामर्श दिया जाता है। उन्हीं के प्रिस्किप्शन के अनुसार मरीजों को दवा दी जाती है।
सुल्तानपुर के 3 गाँवों में खुले केंद्र
कुमार विश्वास की टीम ने सुल्तानपुर के कई गांवों में भी कोविड किट पहुंचाई है। यहां तीन गांवों में विश्वास कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। इन सेंटर्स पर हल्के लक्षण वाले मरीजों को दवा दी जा रही है। इसके अलावा ग्रामीणों को कोविड केयर किट भी दी जा रही है। इस किट में दवा, मेडिकल उपकरण होते हैं।
कोरोना योद्धा : पंकज प्रसून की मुहिम से जुड़े सोनू सूद, मालिनी अवस्थी और कुमार विश्वास
स्वतन्त्रता के लिए प्राण उत्सर्ग करने वाले शहीद सआदत खां
शहीद सआदत खां इन्दौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर (द्वितीय) के फौजी थे। 10 मई 1857 का वह संकल्प भरा दिन जब पूरा देश भारत के अन्तिम मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फर के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़ा हो गया था। मेरठ में क्रांति की चिंगारी सुलग पड़ी जिसमें दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल आदि सभी को अपनी आगोश में जकड़ लिया।
दिल्ली में बहादुर शाह ज़फर, बेगम ज़ीनत महल, बख्त खान, झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई, बैरकपुर में मंगल पांडे, मेरठ में धनसिह गुर्जर, जगदीशपुर में बाबू कुंवर सिंह, रेवाड़ी में राव तुलाराम सिंह, बल्लभगढ़ में राजा नाहर सिंह, बड़कागढ़ में राजा विश्वनाथ शाहदेव कानपुर में नाना साहब – अज़ीमुल्ला खान, लखनऊ में बेगम हज़रत महल, बांदा स्टेट में नवाब अली बहादुर, फैज़बाद में मौलवी अहमदुल्लाह, इलाहाबाद में मौलवी लियाकत अली, बरेली में खान बहादुर, तो इन्दौर में महाराजा तुकोजीराव होलकर (द्वितीय) के फौजी एवं मालवा के पठान सआदत खां ने फिरंगियों के खिलाफ हल्ला बोल दिया।
जब फिरंगियों के खिलाफ मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फर द्वारा क्रांति की तारीख तय कर दी गई तो पूरे देश में फिरंगियों के खिलाफ जंग शुरू हो गई। छावनियों और रेजीडेंसियो पर हमले हुए अंग्रेज़ इधर उधर भागते नज़र आ रहे थे और मारे जा रहे थे ।
इन्दौर रियासत की सुरक्षा हेतु सआदत खां ने महाराजा तुकोजीराव होलकर (द्वितीय) से अर्ज़ किया : हमने आपका नमक खाया है, ये एक अच्छा मौका आया है आप हमारे सर पर हाथ रखें, हम आपको महेश्वर, महू रेजीडेंसी का इलाका वापस दिलाकर रहेंगे और आपको अंग्रेज़ी शिकंजे से आज़ाद करा देंगे। अगर आप 1818 में हुए महाराजा मल्हार राव (तृतीय) के सुलहनामे के कारण ऐसा नहीं कर सकते तो आप अंग्रेज़ो को बता दीजिए कि मेरे सारे फौजी बागी हो गये हैं। बगावत की खबरें सुनकर इन्दौर खामोश ना रहसका और 1 जुलाई 1857 को सआदत खां ने क्रांति का बिगुल बजा डाला।
1 जुलाई 1857 को सआदत खां के नेतृत्व में क्रांति कि तोपें गड़गड़ा उठीं और सआदत खां, भागिरथ सिलावट, वंश गोपाल, भाई सरदार खां और अन्य साथी रेजीडेंसी जा पहुंचे। उस समय कर्नल एच• एम• डुरान्डु रेजीडेंसी कोठी में अपनी टेबल पर काम कर रहे थे।
सआदत खां रेजीडेंसी पहुंच कर्नल डुरान्डु से बात करना चाहा पर वह अनाप-शनाप बकने लगा जिसका उन्होंने विरोध किया। इस पर डुरान्डु ने तमंचे से उन पर वार किया जो उनके कान को छूता हुआ निकल गया। सआदत खां बचते हुए सीधे अपने घोड़े पर बैठना चाहा तो इसी बीच कर्नल ट्रेवर्स आ पहुंचा और धमकाते हुए तलवार से मुकाबला करना चाहा जिसमें एक गहरा घाव सआदत खां के गाल पर लगा जिससे वह लहुलुहान हो गये ।
अपने सरदार को लहुलुहान देख क्रांतिकारी भड़क गए। उधर सआदत खां ने यलगार भरी : ” तैयार हो जाओ फिरंगियों को मारने के लिए महाराज साहिब का हुक्म है ! कुछ घंटों की मुठभेड़ के बाद इन्दौर को अंग्रेजों से आज़ाद करा लिया गया। कुछ ही देर में पूरे शहर में खबर फैल गई और इसी जगह रेजीडेंसी में देखते देखते हज़ारों लोगों की भीड़ जमा हो गयी। सआदत खां ने सभी को संबोधित किया और क्रांति को आगे बढ़ाते हुए अपने कदम दिल्ली की ओर मोड़ दिये। यहां से मिली सफलता के बाद वह अपने साथियों के साथ दिल्ली की ओर कूच कर गए। दिल्ली में शहज़ादा फिरोज़शाह अपनी सेना के साथ सआदत खां की फौज में शामिल हो गए और सआदत खां की फौज अंग्रेजों को परास्त करती रही।
20 सितंबर 1857 को अंग्रेजों ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया और मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फर को बंदी बना लिया गया। इस प्रकार क्रांति असफल हो जाती है और क्रांतिकारी समूह बिखर जाते हैं। इसके बाद अंग्रेज़ो द्वारा क्रांतिकारी नेताओं को ढूंढ ढूंढकर कालापानी, फांसी और तोपें से उड़ाने का काम करने लगे।
इसी बीच सआदत खां फरार हो जाते हैं और छुपते छुपाते बांसवाड़ा पहुंचे जातें हैं और वहां अपना नाम बदलकर अकबर खां के नाम से रहने लगते हैं। उनकी तलाश में 5,000 का इनाम घोषित किया जाता है, पर उनका पता नहीं चल पाता है।
17 साल बाद अर्थात 1874 में सआदत खां को उनके चेहरे के ज़ख्म के निशान की वजह से पहचान लिया जाता है और बांसवाड़ा में गिरफ्तार कर इन्दौर लाया जाता है और 1 अक्टूबर 1874 को सआदत खां को फांसी पर लटका दिया जाता है। सआदत खां की याद में इन्दौर लोकसेवा आयोग की कोठी के सामने ” स्मारक ” है जो हमेशा उनके योगदान को याद दिलाता रहेगा।
कोविड -19 : ए बिट मोर फाउंडेशन और मानव ज्योत एनजीओ का सहायता कार्य
भवानीपुर पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर कोरोना को लेकर जागरूक किया
कोलकाता : ए बिट मोर फाउंडेशन के संस्थापक युवा क्षितिज मिराज शाह ने छोटी सी उम्र में ही समाज के प्रति अपने सामाजिक दायित्व को समझा है। कोरोना काल के इस दुष्कर समय में भवानीपुर पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर ए बिट मोर फाउंडेशन और मानव ज्योत एनजीओ ने फुटपाथ पर रहने वाले लोगों के लिए और अखबार बेचकर अपना गुजारा करने वाले योद्धाओं को जो सुबह-सुबह हर घर में अखबार पहुंचाने का दायित्व निभाने का कार्य करते हैं, ऐसे लोगों के लिए कोरोना से संबंधित सुरक्षा और सावधानीपूर्वक रहने के लिए जागरूकता का संदेश दिया और कुछ आवश्यक सामग्री का वितरण भी किया। भवानीपुर पीएस के सार्जेंट पल्लव कुलाचार्य ने पुलिस स्टेशन के परिसर में दोपहर 12 बजे से दोनों संस्था के साथ मिलकर सभी जरूरतमंदों की सहायता के लिए अपने हाथ बढ़ाए। युवा क्षितिज ने इस अवसर पर लगभग 5000 मास्क 2500 सेनेटाइजर और सूखे नाश्ते जिसमें मूडी़, चिडंवा, बिस्किट, चनाचूर, सत्तू, केक आदि के पैकेट वितरित किए गए। इसके पूर्व क्षितिज मिराज शाह ने तिलजला अग्नि कांड में असहाय लोगों की मदद की थी। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने भी इस कार्यक्रम में योगदान दिया जिसमें सोहिला भाटिया की सक्रिय भूमिका रही। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।
क्वान्टम तकनीक को लेकर गम्भीर है सरकार : आशुतोष शर्मा
कोलकाता : केन्द्र सरकार क्वान्टम तकनीक और इसकी सम्भावनाओं को लेकर गम्भीर है। इस तकनीक को लेकर काम करने वाले लोगों, समूहों, संसाधनों की खोज भी शुरू हो गयी है। ऐसोचेम द्वारा क्वान्टम तकनीक को लेकर आयोजित एक वेबिनार को सम्बोधित करते हुए विज्ञान एवं तकनीक विभाग के सचिव आशुतोष शर्मा ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए अगले तीन सालों में 200 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना पर काम चल रहा है। केन्द्रीय बजट में भी अगले 5 साल में 800 करोड़ रुपये का आवंटन इस क्षेत्र के लिए किया गया है। वेबिनार को सम्बोधित करते हुए इसरो के वैज्ञानिक सचिव आर. उमामहेश्वरन ने इस तकनीक के महत्व को समझाया। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया की राष्ट्रीय तकनीक अधिकारी डॉ. रोहिणी श्रीवत्स ने कहा कि इस क्षेत्र में डेवलपरों, विद्यार्थियों और कम्पनिय़ों के लिए बहुत सम्भावनाएं हैं। ऐसोचेम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि देश में और अधिक क्वान्टम कम्प्यूटिंग एप्लिकेशन लैब की जरूरत है। विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, अकादमिक क्षेत्र के लोगों की जरूरत है। क्वान्टम तकनीक का उपयोग स्वास्थ्य, निर्माण, एयरोस्पेस और इंजीनियरिग जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इस वेबिनार में ऐसोचेम के अन्य गण्यमान्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
एमएसएन प्रयोगशालाओं में मोलनुपिरवीर के तीसरे चरण का परीक्षण शुरू
कोलकाता : एमएसएन लेबोरेटरीज प्रा। लिमिटेड (एमएसएन) ने मोलनुपिरावीर कैप्सूल के लिए तीसरे चरण का परीक्षण आरम्भ कर दिया है। गत 19 मई को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से मोलनुपिरवीर कैप्सूल की प्रभावकारिता और हल्के से मध्यम कोवि़ड -19 के रोगियों पर सुरक्षा अध्ययन करने के लिए नैदानिक परीक्षण की मंजूरी मिली है। एमएसएन भारत भर में 40 से अधिक साइटों में अपना नैदानिक परीक्षण शुरू करेगा और पहली खुराक जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। हल्के से मध्यम COVID-19 से पीड़ित 2400 से अधिक विषयों पर नैदानिक परीक्षण किए जाएंगे।
मोलनुपिरवीर एंटीवायरल गुणों वाली एक प्रायोगिक दवा है और वर्तमान में कोविड -19 उपचार के लिए नैदानिक चरण के अध्ययन के अधीन है। एमएसएन आर एंड डी टीम ने एपीआई और फॉर्मूलेशन दोनों विकसित किए हैं, नैदानिक अध्ययन के सफल समापन के बाद नियामक अनुमोदन के बाद जल्द ही लॉन्च होने की उम्मीद है। कोविड उपचार रेंज के हिस्से के रूप में कम्पनी पहले ही 200mg, 400mg और 800mg की क्षमता वाले फैविलो (फैविपीराविर ), 75 mg कैप्सूल के रूप में ओसेलो (ओसेल्टामीविर ) और बेरीडोज (Baricitinib) उतारा है। एमएसएन से सभी कोविड दवाओं की उपलब्धता के लिए, मरीज एमएसएन कोविड हेल्पलाइन @ 91005 91030 पर संपर्क कर सकते हैं या अधिक सहायता के लिए [email protected] पर ईमेल कर सकते हैं।
कोविड : बिड़ला हाई स्कूल के पूर्व विद्यार्थियों ने किया सहायता कार्य
कोलकाता : कोरोना आपदा के समय एक दूसरे की मदद करना जरूरी है। बिड़ला हाई स्कूल अल्मनी ने कोलकाता पुलिस के साथ कोरोना आपदा में फँसे जरूरतमंदों की मदद की। बीएचएस हाई स्कूल अल्मनी और कोलकाता पुलिस की इस पहल को सिंघी बागान के सन्तोष चौटाला का सहयोग मिला। इसके तहत 1500 लोगों को भोजन मुहैया करवाया गया। लक्ष्य कम से कम 3 हजार लोगों की मदद करना है। यास तूफान के खतरे को देखते हुए ओम नमकीन की ओर से सूखे मेवे और चॉकीवॉकी की ओर से केक भी वितरित किये गये। इसके लिए बिड़ला हाई स्कूल अल्मनी ने कोलकाता पुलिस के साथ बालीगंज, चेतला, पर्णश्री, मैदान और कस्बा पुलिस स्टेशन की भी मदद ली।
नवजागरण के इतिहास का एक जरूरी नाम हैं मतिलाल सील
बंगाल में बहुत से समाज सुधारक रहे हैं जो नवजागरण काल की आधारशिला हैं और आज तक हम उनको याद करते हैं तो कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनके योगदान को इतिहास समुचित सम्मान नहीं दे सका। वे समाज सुधारक नहीं थे…उद्योगपति थे…व्यवसाय के क्षेत्र में पूरा नाम कमाया…धन कमाया लेकिन वह सब जनता को अर्पण कर दिया। आज बात करेंगे ऐसी ही विभूति की…
बंगाल में बहुत से समाज सुधारक रहे हैं जो नवजागरण काल की आधारशिला हैं और आज तक हम उनको याद करते हैं तो कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनके योगदान को इतिहास समुचित सम्मान नहीं दे सका। वे समाज सुधारक नहीं थे…उद्योगपति थे…व्यवसाय के क्षेत्र में पूरा नाम कमाया…धन कमाया लेकिन वह सब जनता को अर्पण कर दिया। आज बात करेंगे ऐसी ही विभूति की…मतिलाल सील…उदार विचारधारा के धनी व्यवसायी, जिन्होंने धन तो खूब कमाया मगर सामाजिक एवं शैक्षणिक सुधारों के लिए दान भी उतना ही दिया।

शिक्षाविद्, सामाजिक सुधारक और ब्रह्म समाज के संस्थापकों में से एक थे। शिवनाथ शास्त्री ने मतिलाल सील की प्रशंसा करते हुए उनको ईमानदार, विनम्र और दयालु परोपकारी बताते हुए कहा है कि मतिलाल सील की समृद्धि द्वारकानाथ टैगोर और रुस्तमजी चौसी जैसी थी। सील का जन्म 20 मई 1792 को कोलकाता में सुवर्ण वणिक (स्वर्ण व्यवसाय से जुड़ा वर्ग) परिवार में हुआ था। उनके पिता चैतन्य चरण सील वस्त्र व्यवसायी थे और सील जब 5 वर्ष के थे तो उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी व्यावसायिक बुद्धि काफी तीक्ष्ण थी….कुछ समय के लिए मतिलाल सील ने एक ब्रिटिश फर्म में काम किया। इस बीच 1809 में 17 साल की उम्र में मतिलाल सील का विवाह सुरती बागान के मोहन चांद दे की बेटी नागरी दासी से हुआ।
1815 में सील ने फोर्ट विलियम में काम करना आरम्भ किया…काम करते हुए मतिलाल सील के श्वसुर ने उनको ब्रिटिश सेना को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने की सलाह दी जिससे सील की आय में वृद्धि हुई। बाद में उन्होंने इस नौकरी से इस्तीफा दे दिया मगर व्यवसाय उनकी रगों में था। 1819 में सील ने अपना व्यवसाय शुरू किया। वे शराब के कारोबारी मिस्टर हडसन को बोतल और कॉर्क बेचा करते थे। ब्रिटिश कारोबारियों ने सील को नील, रेशम, चीनी, चावल, सॉल्टपीटर औऱ अन्य सामानों की आपूर्ति का जिम्मा भी दिया। वे प्रथम श्रेणी की एजेंसियों के 20 घरों के बनिया नियुक्त किये गये जिसमें से 50 से 60 ऐसे घर कलकत्ता में थे। मतिलाल सील ने खुद नील, रेशम, चीनी का निर्यात यूरोप को करना शुरू किया और इंग्लैंड से लोहा, सूती कपड़े के टुकड़ों का आयात करने लगे। अपनी समृद्धि से उन्होंने यूरोपियन लोगों को कड़ी टक्कर देनी शुरू कर दी। उन्होंने कार्गो नावें हासिल कीं जो उन दिनों नयी चीज थीं। सील ने पुरानी आटे की मिल में काम किया…ऑस्ट्रेलिया को बिस्कुटों से लदा पूरा जहाज भेजा। बाद में इनके पास व्यवसाय के लिए 13 जहाज थे और इसमें से एक स्टीम टग था जिसका नाम बनिया था।
मतिलाल सील जितने बड़े व्यवसायी थे, उतने ही उदारवादी भी थे। कई सामाजिक कार्य़ों के लिए उन्होंने दान किया। 1841 में बेलघरिया में एक भिक्षुकावास बनवाया जिसमें 500 लोगों को रोज खिलाया जाता था। उन्होंने मतिलाल घाट बनवाया। उन्होंने साहूकारी, बिल की गिनती जैसे कामों में हाथ लगाया और अपनी पद्धति तथा व्यावहारिक बुद्धि से काम करते है। मतिलाल सील बैंक ऑफ इंडिया के संस्थापकों में से एक थे। वे भारत में पहली जीवन बीमा कम्पनी न्यू ओरिएंटल इन्श्योरेंस की स्थापना में भी सक्रिय थे। वे एग्री हॉर्टिकल्चरल सोसायटी के महत्वपूर्ण सदस्य थे और असम टी कम्पनी के संस्थापक निदेशक भी थे।

मतिलाल सील्स फ्री कॉलेज (बाद में मतिलाल सील्स फ्री स्कूल एंड कॉलेज) औपचारिक तौर पर मार्च 1842 में उनके घर पर ही खोला गया था। यह संस्थान आरम्भ में सेंट एफ. जेवियर्स, चौरंगी के निदेशकों द्नारा प्रबंधित किया जाता था। जेसुएट पादरियों के लिए यह अनिवार्य था कि हिन्दू विद्यार्थियों पर इसाईयत न थोपें। इसके बावजूद जब पादरियों के विरुद्ध बहुत अधिक शिकायतें मिलने लगीं तो सील रेवरेंड कृष्णमोहन बनर्जी को संस्थान का संचालन करने के लिए कहा। उन दिनों इस कॉलेज का सालाना खर्च 12 हजार रुपये था जो मतिलाल सील ट्रस्ट से आता था। विद्यार्थियों से मात्र 1 रुपये लिये जाते थे। यहाँ पर अंग्रेजी साहित्य, इतिहास, भूगोल, आवृत्ति, लेखन, गणित, बीजगणित, दर्शन विज्ञान, उच्च गणित और गणित का व्यावहारिक प्रयोग सिखाया जाता था। एक समय तक यहाँ 500 विद्यार्थी पढ़ते थे। कॉलेज के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और सरकारी, मिशनरी और विश्वविद्यालय की परीक्षा में सफल हुए।
वे अपने व्यावसायिक जीवन के अंतिम दिनों में भी कलकत्ता के सबसे समृद्ध नागरिक थे। मतिलाल सील के दोनों बेटों हीरालाल सील और चुनीलाल सील ने भी अपने धन का एक हिस्सा जनहित से जुड़े कार्य़ों के लिए दिया। मतिलाल सील के समय में कलकत्ता का नागरिक समाज दो भागों में बँटा था। एक तरफ राजा राममोहन राय थे तो दूसरी तरफ रूढ़िवादी सोच वाले राधाकांत देव थे और अधिकतर धनी लोग ऐसे ही थे। राधाकांत देव ने सती प्रथा और विधवा विवाह को लेकर बने कानून का जमकर विरोध किया था। सील पारम्परिक विचारों के होते हुए भी राजा राममोहन राय के पक्षधर थे। स्त्रियों की शिक्षा को उन्होंने समर्थन दिया। इतना ही नहीं उन्होंने जाति की बाधाओं को तोड़कर विधवा से विवाह का साहस रखने वाले व्यक्ति को 1 हजार रुपये दहेज देने की सार्वजनिक घोषणा की थी। सील का निधन 20 मई 1854 को हुआ। उनके नाम पर कोलकाता में एक सड़क भी है।
(स्त्रोत साभार – गेट बंगाल, मतिलाल सील डॉट कॉम, विकिपीडिया)
कोरोना मरीजों के लिए वेस्ट बंगाल मोशन फिल्म आर्टिस्ट फोरम ने खोला 25 बेड वाला चिकित्सा केंद्र
कोलकाता : कोरोना मरीजों की मदद के लिए वेस्ट बंगाल मोशन फिल्म आर्टिस्ट फोरम की ओर से कोलकाता में 25 बेड वाला चिकित्सा केंद्र खोला गया है। वहां उन मरीजों को रखा जाएगा, जिन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा रहा लेकिन अविलंब ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है। आर्टिस्ट फोरम की तरफ से यह चिकित्सा केंद्र दक्षिण कोलकाता के लेक गार्डन इलाके में खोला गया है। चिकित्सा केंद्र का नाम बांग्ला फिल्मों के महान अभिनेता दिवंगत सौमित्र चटर्जी के नाम पर ‘सौमित्र’ रखा गया है। इसे स्थानीय एक क्लब की मदद से बैडमिंटन कोर्ट में खोला गया है। दूसरी तरफ बांग्ला फिल्मों के चर्चित अभिनेता जीशु सेनगुप्ता और संगीतकार इंद्रदीप दासगुप्ता ने लेक मार्केट इलाके में स्थानीय विधायक देवाशीष कुमार के सहयोग से कोरोना मरीजों के लिए सेफ होम खोला है। इंद्रदीप ने बताया कि यहां हल्के लक्षण वाले कोरोना के मरीजों को रखा जाएगा। ऑक्सीजन की भी व्यवस्था की गयी है।
नहीं रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद और चिपको आन्दोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा
देहरादून : प्रसिद्ध पर्यावरणविद और चिपको आंदोलन नेता सुंदरलाल बहुगुणा का एम्स, ऋषिकेश में कोविड-19 से निधन हो गया । वह 94 वर्ष के थे । उनके परिवार में पत्नी विमला, दो पुत्र और एक पुत्री है ।
एम्स प्रशासन ने बताया कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद गत आठ मई को बहुगुणा को एम्स में भर्ती कराया गया था । ऑक्सीजन स्तर कम होने के कारण उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी । चिकित्सकों की पूरी कोशिश के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका । नौ जनवरी, 1927 को टिहरी जिले में जन्मे बहुगुणा को चिपको आंदोलन का प्रणेता माना जाता है ।

उन्होंने सत्तर के दशक में गौरा देवी तथा कई अन्य लोगों के साथ मिलकर जंगल बचाने के लिए चिपको आंदोलन की शुरूआत की थी । पद्मविभूषण तथा कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित बहुगुणा ने टिहरी बांध निर्माण का भी बढ़-चढ़ कर विरोध किया और 84 दिन लंबा अनशन भी रखा था । एक बार उन्होंने विरोध स्वरूप अपना सिर भी मुंडवा लिया था । टिहरी बांध के निर्माण के आखिरी चरण तक उनका विरोध जारी रहा । उनका अपना घर भी टिहरी बांध के जलाशय में डूब गया । टिहरी राजशाही का भी उन्होंने कडा विरोध किया जिसके लिए उन्हें जेल भी जाना पडा । वह हिमालय में होटलों के बनने और लक्जरी टूरिज्म के भी मुखर विरोधी थे । महात्मा गांधी के अनुयायी रहे बहुगुणा ने हिमालय और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए कई बार पदयात्राएं कीं ।
गूगल ने भारत में पेश किया न्यूज शोकेस , 50 हजार पत्रकारों, छात्रों को मिलेगा प्रशिक्षण
नयी दिल्ली : गूगल ने भारत में 30 समाचार संगठनों के साथ अपने न्यूज शोकेस की पेशकश की, जिसका मकसद गूगल के समाचार और खोज मंचों पर गुणवत्तापूर्ण सामग्री प्रदर्शित करने के लिए प्रकाशकों को प्रोत्साहित करना और समर्थन देना है। इसके साथ ही गूगल भारत में अगले तीन वर्षों के दौरान समाचार संगठनों और पत्रकारिता विद्यालयों के 50,000 पत्रकारों और पत्रकारिता के छात्रों को डिजिटल हुनर सिखाएगा। गूगल के उपाध्यक्ष (उत्पाद प्रबंधन) ब्रैड बेंडर ने कहा, ‘‘हम अब प्रकाशकों की मदद के लिए न्यूज शोकेस पेश कर रहे हैं, ताकि लोगों को भरोसेमंद खबर मिल सके, विशेष रूप से इस महत्वपूर्ण समय में जब कोविड संकट जारी है। समाचार शोकेस दल प्रकाशकों की पसंद के अनुसार लेखों को बढ़ावा देता है, और उन्हें खबर के साथ अतिरिक्त संदर्भ देने की अनुमति भी देता है, ताकी पाठकों में इस बात की बेहतर समझ बन सके कि उनके आसपास क्या हो रहा है।’’
उन्होंने कहा कि ये समाचार दल ब्रांडिंग सुनिश्चित करते हैं, और उपयोगकर्ताओं को प्रकाशकों की वेबसाइट पर ले जाते हैं। गूगल न्यूज शोकेस भारत में 30 राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय समाचार संगठनों के साथ शुरू किया गया है और आने वाले दिनों में इस संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी। गूगल की यह सेवा जर्मनी, ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जापान, यूके, ऑस्ट्रेलिया, चेकिया, इटली और अर्जेंटीना सहित एक दर्जन से अधिक देशों में उपलब्ध है।
भारत में गूगल के कंट्री हेड और उपाध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा कि प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में समाचारों की खपत बढ़ रही है, वहीं उपभोक्ता आदतों में बदलाव भी आ रहा है, जिसमें अधिक युवा उपभोक्ता समाचार के लिए डिजिटल पहुंच का इस्तेमाल कर रहे हैं। गुप्ता ने कहा कि कंपनी अगले तीन वर्षों में 50,000 से अधिक पत्रकारों और पत्रकारिता के छात्रों को प्रशिक्षित करेगी और इसके तहत खबरों के सत्यापन, फेक न्यूज से निपटने के उपायों और डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल पर खासतौर से ध्यान केंद्रित किया जाएगा।




