Tuesday, April 7, 2026
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40 साल में दुगनी हो चुकी है हिमालय में ग्लैशियरों के पिघलने की रफ्तार

चमोली : उत्तराखंड के चमोली में रविवार को ग्लेशियर टूटने से ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियां उफान पर आ गईं। इससे वहां चल रहे पावर प्रोजेक्ट और डेम तबाह हो गए। 170 लोगों की मौत की आशंका है। लेकिन ये हादसा हुआ क्यों? जवाब 2019 में आई एक अध्ययन में है। यह रिपोर्ट बताती है कि 21वीं सदी यानी मौजूदा समय में हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार पिछली सदी के आखिरी 25 साल के मुकाबले दोगुनी हो चुकी है। यानी, ग्लेशियरों से बर्फ की परत लगातार पिघलती जा रही है। तापमान बढ़ने से ग्लेशियरों के निचले हिस्से को नुकसान हो रहा है। ऐसे में पानी की कमी के साथ ही हादसे भी बढ़ेंगे। चमोली जैसी घटना इसकी गवाही है। करीब 80 करोड़ लोग सिंचाई, बिजली और पीने के पानी के लिए हिमालय के ग्लेशियरों पर निर्भर हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दशकों में यह बंद हो जाएगा, क्योंकि हम बड़े पैमाने पर ग्लेशियर खो रहे हैं। 40 साल की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन के लिए भारत, चीन, नेपाल और भूटान से पिछले 40 साल का सैटेलाइट डेटा लिया गया। यह बताता है कि क्लाइमेट चेंज से हिमालय के ग्लेशियर खत्म हो रहे हैं। जून 2019 में जर्नल साइंस एडवांसेज में पब्लिश हुई इस स्टडी से पता चलता है कि 2000 के बाद से ग्लेशियर हर साल डेढ़ फीट के बराबर बर्फ खो रहे हैं। बर्फ के पिघलने की रफ्तार 1975 से 2000 तक के वक्त मुकाबले दोगुनी है।
स्टडी को लेकर अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में PHD कैंडिडेट जोशुआ मौरर ने कहा कि इस अंतराल में हिमालय के ग्लेशियर कितनी तेजी से और क्यों पिघल रहे हैं, यह इसकी अब तक की सबसे साफ तस्वीर है। स्टडी के लीड ऑथर मौरर ने कहा कि हालांकि इस स्टडी को स्पेसिफिकली कैल्कुलेट नहीं किया गया है, लेकिन ऐसा हो सकता है कि पिछले 40 साल में ये ग्लेशियर अपने आकार का एक चौथाई तक हिस्सा खो चुके हों। शोधकर्ताओं द्वारा एकत्रित डेटा से पता चलता है कि बर्फ पिघलने का वक्त हर जगह एक जैसा है। इसकी वजह बढ़ता तापमान ही है। 1975 से 2000 के मुकाबले 2000 से 2016 में तापमान एक डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है। इस अध्ययन के लिए रिसर्चर्स ने वेस्ट से ईस्ट की ओर दो हजार किलोमीटर तक फैले 650 ग्लेशियरों के सैटेलाइट फुटेज का एनालिसिस किया। इनमें से कई अमेरिका के जासूसी सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें हैं।
रिसर्चर्स ने सैटेलाइट इमेज को 3D मॉडल में बदलने के लिए एक सिस्टम बनाया, जो समय के साथ ग्लेशियरों की बदलती ऊंचाई को दिखा सकता है। इसके बाद इन तस्वीरों का 2000 से पहले के ऑप्टिकल डेटा से मिलान किया गया। इससे ग्लेशियर की ऊंचाई में आया बदलाव साफ नजर आया। शोधकर्ताओं ने नोट किया कि एशियाई देशों में जीवाश्म ईंधन और बायोमास का बहुत ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। इनसे निकलने वाली कालिख का ज्यादातर हिस्सा ग्लेशियर की सतह पर आ जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि वे तेजी से पिघलने लगते हैं। उन्होंने पाया कि 1975 से 2000 तक यहां के ग्लेशियरों ने मामूली गर्मी के कारण हर साल लगभग 0.25 मीटर बर्फ खो दी। 1990 के दशक की शुरुआत में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या मुंह उठाने लगी। 2000 की शुरुआत में ग्लेशियरों के पिघलने में सालाना लगभग आधा मीटर की तेजी आई। अध्ययन के दौरान ग्राउंड स्टेशनों से तापमान का डेटा जुटाया गया। इसके बाद देखा गया कि ग्लेशियर के पिघलने की दर क्या है। टीम ने इन डेटा की तुलना की, जिससे पता चला कि वास्तव में हो क्या रहा है। मौरर ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग ही बर्फ को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। हिमालय आल्प्स की तरह तेजी से नहीं पिघल रहा है, लेकिन इसकी प्रोसेस एक जैसी है। हालांकि इस स्टडी में पामीर, हिंदूकुश या तियान शान जैसी ऊंची चोटियों को शामिल नहीं किया गया, लेकिन कुछ दूसरी स्टडी से पता चलता है कि वहां भी बर्फ इसी तरह पिघल रही है।

मई में आयोजित होगी यूजीसी नेट परीक्षा

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी मई महीने में जूनियर प्रोफेसर फेलोशिप और सहायक प्रोफेसर के लिए यूजीसी-नेट परीक्षा आयोजित करेगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर यूजीसी नेट परीक्षा 2021 की तारीखों का एलान किया। उन्होंने बताया, ‘‘राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी 2, 3, 4, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 14 और 17 मई को यूजीसी-नेट परीक्षा आयोजित करेगी।’’ परीक्षा का आयोजन दो पालियों में होगा। पहली पाली सुबि 9 बजे से 12 बजे और दूसरी पाली दोपहर बाद 3 बजे से 6 बजे तक आयोजित होगी। यूजीसी नेट परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) करेगी। परीक्षा की अवधि तीन घंटे की होगी । परीक्षा का आयोजन कम्प्यूटर आधारित परीक्षा विधि के माध्यम से होगा। ऑनलाइन आवेदन फार्म 2 मार्च 2021 तक किये जा सकते हैं।

अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस सीईओ का पद छोड़ेंगे, एंडी जेसी होंगे उत्तराधिकारी

न्यूयॉर्क : एक ऑनलाइन बुकस्टोर के रूप में अमेजन की शुरुआत करने और उसे खरीदारी तथा मनोरंजन की दुनिया का महारथी बनाने वाले जेफ बेजोस इस साल कंपनी के सीईओ का पद छोड़ देंगे और एंडी जेसी उनके उत्तराधिकारी होंगे। कंपनी द्वारा जारी बयान के मुताबिक करीब 30 वर्षों तक इस पद पर रहने के बाद अब कार्यकारी अध्यक्ष की नयी भूमिका में होंगे। बेजोस (57) गर्मियों में अपना पद छोड़ेंगे और उनकी जगह अमेजन के क्लाउड-कंप्यूटिंग व्यवसाय का संचालन करने वाले एंडी जेसी लेंगे। बेजोस ने कर्मचारियों को लिखे एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि उन्होंने नए उत्पादों और अमेजन में विकसित की जा रही शुरुआती पहलों पर ध्यान देने की योजना बनाई है।
उन्होंने कहा कि उनके पास अन्य परियोजनाओं के लिए अधिक समय होगा, जिसमें उनकी अंतरिक्ष अन्वेषण कंपनी ब्लू ओरिजिन, उनके द्वारा चलाए जाने वाले परोपकार के काम और वाशिंगटन पोस्ट की देखरेख शामिल है।
बेजोस अमेजन के सबसे बड़े शेयरधारक हैं, और कंपनी के कामकाज पर उनका व्यापक प्रभाव बना रहेगा। अमेजन ने बताया था कि 2020 में उसकी कुल बिक्री 38 प्रतिशत बढ़कर 386.1 अरब डॉलर हो गई, जो 2019 में 280.5 अरब डॉलर थी। बेजोस ने अपने उत्तराधिकारी के बारे में बताया, ‘‘जेसी को कंपनी में सभी अच्छी तरह जानते हैं और वह एक बेहतरीन नेतृत्वकर्ता साबित होंगे और मेरा उन पर पूरा विश्वास है।’’
उन्होंने कहा कि अमेजन का सीईओ होने एक बड़ी जिम्मेदारी है और ऐसे में दूसरी बातों पर ध्यान देना कठिन है और कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में वह अमेजन की नई पहलों पर ध्यान देंगे। उन्होंने कहा ‘‘उनमें इतनी ऊर्जा कभी नहीं थी और यह उनकी सेवानिवृत्ति नहीं है।’’
बेजोस ने कहा, ‘‘अमेजन की यात्रा लगभग 27 साल पहले शुरू हुई था, जब कंपनी केवल एक विचार थी, और इसका कोई नाम नहीं था। उस समय मुझसे सबसे अधिक बार यह सवाल पूछा गया था, इंटरनेट क्या है? शुक्र है, मुझे अब यह समझाना नहीं पड़ता।’’ इस समय अमेजन में 13 लाख लोग काम करते हैं और ये दुनिया भर में करोड़ो लोगों और कारोबारों को सेवाएं देते हैं।

 

भारत रत्न को लेकर मेरे समर्थन में अभियान न चलाएं : रतन टाटा

नयी दिल्ली : देश के प्रतिष्ठित उद्योगपति रतन टाटा ने सोशल मीडिया पर उनको भारत रत्न देने के मांग कर रहे लोगों से इस अभियान को बंद करने का आग्रह किया है। टाटा ने कहा है कि वह भारतीय होने पर खुद को भाग्यशाली मानते हैं और उन्हें देश की वृद्धि और समृद्धि में योगदान देने पर खुशी होगी। सौ अरब डॉलर से अधिक के टाटा समूह के मानद चेयरमैन ने सोशल मीडिया के प्रयोगकर्ताओं से उनके लिए भारत रत्न की मांग के अभियान को रोकने को कहा है। सोशल मीडिया पर अभियान के जरिये सरकार से टाटा को देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान देने की मांग की जा रही है।

टाटा ने ट्वीट किया, ‘‘मैं सोशल मीडिया पर यह अभियान चलाने वाले एक वर्ग की भावनाओं का सम्मान करता हूं। मैं उनसे विनम्रता से आग्रह करता हूं कि इस तरह के अभियान को रोका जाए।’’
सोशल मीडिया पर इस समय #भारतरत्न फॉर रतन टाटा ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया प्रयोगकर्ता टाटा को उनके योगदान विशेषरूप से युवाओं को प्रेरित करने के लिए भारत रत्न देने की मांग कर रहे हैं।
टाटा ने कहा, ‘‘मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मैं भारतीय हूं। मैं भारत की वृद्धि और समृद्धि में योगदान देने का प्रयास करूंगा।’’सोशल मीडिया के एक प्रयोगकर्ता ने अन्य लोगों से भी इस अभियान में शामिल होने का आग्रह करते हुए कहा कि टाटा ने युवाओं को प्रेरणा दी है। उन्होंने युवाओं को बताया है कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए अपनी क्षमता पर भरोसा करना जरूरी है।

समय की माँग है गैस आधारित अर्थव्यवस्था : पीएम मोदी

डोभी – दुर्गापुर पाइपलाइन का निर्माण 2400 करोड़ रुपये की लागत से गेल द्वारा किया गया है

कोलकाता : प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गत रविवार को हल्दिया का दौरा किया और एलपीजी आयात टर्मिनल, 348 किमी डोभी – दुर्गापुर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन अनुभाग को समर्पित किया, जो प्रधान मंत्री उर्जा गंगा परियोजना का हिस्सा है।  डोभी – दुर्गापुर पाइपलाइन का निर्माण 2400 करोड़ रुपये की लागत से गेल द्वारा किया गया है। उन्होंने हल्दिया रिफाइनरी की दूसरी कैटेलिटिक-आइसोडेवेक्सिंग यूनिट की आधारशिला भी रखी और राष्ट्रीय राजमार्ग 41 पर रानीचक, हल्दिया में 4 लेन आरओबी-कम-फ्लाईओवर को समर्पित किया। इस आयोजन में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने भाग लिया। इस अवसर पर बोलते हुए, प्रधान मंत्री ने कहा कि चार परियोजनाओं से क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी और रहन-सहन दोनों में सुधार होगा। ये परियोजनाएं हल्दिया को निर्यात-आयात के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी मदद करेंगी। स्वच्छ ईंधन उपलब्ध होगा। प्रधान मंत्री ने जोर देकर कहा कि गैस आधारित अर्थव्यवस्था भारत के लिए समय की आवश्यकता है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए एक राष्ट्र-एक गैस ग्रिड एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके लिए, प्राकृतिक गैस की लागत को कम करने और गैस-पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रधान मंत्री ने पूर्वी भारत में जीवन और व्यवसाय की गुणवत्ता में सुधार के लिए रेल, सड़क, हवाई अड्डे, बंदरगाहों, जलमार्गों में सूचीबद्ध कार्य किए। उन्होंने कहा कि गैस की कमी से इस क्षेत्र में उद्योग बंद हो रहे हैं। इसे मापने के लिए पूर्वी भारत को पूर्वी और पश्चिमी बंदरगाहों से जोड़ने का निर्णय लिया गया।

350 किलोमीटर डोभी-दुर्गापुर पाइपलाइन से न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि बिहार और झारखंड के 10 जिले लाभान्वित होंगे। निर्माण कार्य ने स्थानीय लोगों को 11 लाख मानव दिवस रोजगार प्रदान किए। यह रसोईघरों को स्वच्छ पाइप एलपीजी प्रदान करेगा और स्वच्छ सीएनजी वाहनों को सक्षम करेगा। सिंदरी और दुर्गापुर उर्वरक कारखानों को निरंतर गैस की आपूर्ति मिलेगी। प्रधान मंत्री ने गेल और पश्चिम बंगाल को जगदीशपुर-हल्दिया और बोकारो-धामरा पाइपलाइन के दुर्गापुर-हल्दिया खंड को जल्दी खत्म करने के लिए कहा। पश्चिम बंगाल में महिलाओं को 90 लाख मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए, जिनमें एससी / एसटी वर्ग की 36 लाख से अधिक महिलाएँ शामिल हैं। पिछले छह वर्षों में पश्चिम बंगाल में एलपीजी कवरेज 41 प्रतिशत से बढ़कर 99 प्रतिशत हो गया। इस साल के बजट में उज्ज्वला योजना के तहत 1 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस कनेक्शन का प्रस्ताव किया गया है। हल्दिया का एलपीजी आयात टर्मिनल उच्च मांग को पूरा करने में एक बड़ी भूमिका निभाएगा क्योंकि यह पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर में करोड़ों परिवारों की सेवा करेगा क्योंकि यहां से 2 करोड़ से अधिक लोगों को गैस मिलेगी। जिनमें से 1 करोड़ उज्ज्वला योजना के लाभार्थी होंगे। प्रधान मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल को एक प्रमुख व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए अथक प्रयास कर रही है। इसके लिए बंदरगाह के नेतृत्व वाला विकास एक अच्छा मॉडल है। कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्टट्रस्ट को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। प्रधान मंत्री ने हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स की क्षमता और पड़ोसी देशों के साथ संपर्क को मजबूत करने का भी आह्वान किया। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के नए फ्लाईओवर और प्रस्तावित मल्टी-मॉडल टर्मिनल कनेक्टिविटी में सुधार करेंगे।

जोशीमठ में हिमखंड टूटा, भीषण बाढ़, 150 श्रमिकों की मौत की आशंका

देहरादून/नयी दिल्ली : उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में रविवार को नंदादेवी ग्लेशियर के एक हिस्से के टूट जाने से धौली गंगा नदी में विकराल बाढ़ आई और पारिस्थितिकीय रूप से नाजुक हिमालय के हिस्सों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के एक प्रवक्ता ने तपोवन-रेनी में एक विद्युत परियोजना प्रभारी को उद्धृत करते हुए कहा कि परियोजना में काम करने वाले 150 से अधिक मजदूरों की मौत की आशंका है। उन्होंने बताया कि तीन शव बरामद किये गए हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कहा कि बिजली परियोजना पूरी तरह से बह गई है। पहाड़ों के किनारे पानी के तेज बहाव में आने से रास्ते में आने वाले घर भी बह गए। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने चमोली में आपदा प्रभावित तपोवन का निरीक्षण किया। उन्‍होंने कहा कि आपदा से करीब 1500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। क्षतिग्रस्त प्रोजेक्ट 2023 तक पूरा होना था। अधिक आबादी वाले क्षेत्रों सहित नीचे की ओर स्थित मानव बस्तियों में नुकसान होने की आशंका है। कई गाँवों को खाली कराया गया है और लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में पहुँचाया गया है। आईटीबीपी के एक प्रवक्ता ने कहा कि रेनी गांव के पास एक पुल ढहने के कारण कुछ सीमा चौकियों के साथ सम्पर्क ‘‘पूरी तरह से टूट’’ गया है।
पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और देहरादून सहित कई जिलों के प्रभावित होने की आशंका है और इन जिलों को हाई अलर्ट पर रखने के साथ ही आईटीबीपी और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को राहत और बचाव कार्यो में लगाया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उत्तराखंड के चमोली में हिमखंड टूटने के कारण अचानक आई बाढ़ की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और लोगों की सुरक्षा की कामना की। राष्ट्रपति भवन ने कोविंद के हवाले से ट्वीट किया, ‘‘उत्तराखंड में जोशीमठ के पास ग्लेशियर टूटने के करण क्षेत्र में हुए नुकसान को लेकर काफी चिंतित हूं। लोगों की सुरक्षा और कुशलता की कामना करता हूँ।’’उन्होंने कहा, ‘‘पूरा विश्वास है कि वहां राहत एवं बचाव कार्य अच्छे ढंग से चल रहा होगा।’’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘‘मैं उत्तराखंड में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा हूं। भारत उत्तराखंड के साथ खड़ा है, सभी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता है।’’ इससे पहले दिन में खबर आयी थी कि ऋषि गंगा पर परियोजना में लगे 150 मजदूर प्रभावित हुए हैं।उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमखंड टूटने के कारण अचानक आई बाढ़ के बाद तपोवन ऊर्जा परियोजना में काम करने वाले कम से कम 150 लोगों के मारे जाने या लापता होने की आशंका है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के प्रवक्ता ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि रैणी गांव में कम से कम तीन पुलों के ढहने के कारण बल की कुछ सीमा चौकियों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। जो पुल ढहे हैं, उनमें से एक सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का है। आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक कुमार पांडे ने दिल्ली में कहा, ‘‘तपोवन के परियोजना स्थल प्रभारी तथा स्थानीय प्रशासन के मुताबिक बैराज पर काम कर रहे 100 से ज्यादा लोगों और एक सुरंग में काम कर रहे 50 से अधिक लोगों के मारे जाने या लापता होने की आशंका है। अब तक तीन लोगों के शव मिल गए हैं।’’उन्होंने बताया कि अभी बचाव काम में आईटीबीपी के 250 से अधिक जवान लगे हैं। पांडे ने कहा कि सुरंग में करीब 16-17 श्रमिक सुरक्षित हैं और उन्हें बचाने के लिए बचाव दल मलबा हटा रहे हैं।

इस तरह आया धरती पर वसंत

 मौसम प्रकृति के बदलाव का अहसास दिलाता है। हर बदलती हुई ऋतु अपने साथ एक संदेश लेकर आती है। भारत की प्रकृति के अनुसार हमारे यहां छ: ऋतुएं प्रमुख रूप से मानी गई है। हेमंत, शिशिर, वसंत, ग्रीष्म, वर्षा व शरद ऋतु। इनमें वसंत को सबका राजा कहा गया है। वसंत को ऋतुओं का राजा कहने के पीछे कई कारण हैं जैसे- फसल तैयार रहने से उल्लास और खुशी के त्यौहार, मंगल कार्य, विवाह , सुहाना मौसम, आम की मोहनी खुशबू, कोयल की कूक, शीतल मन्द सुरभित हवा, खिलते फूल, मतवाला माहौल, सुहानी शाम, फागुन के मदमस्त करने वाले गीत सब मिलकर अनुकूल समां बाधते है। यही कारण है कि वसंत को ऋतुराज की संज्ञा दी गई है।

भागवदगीता में वसंत
वसंत को ऋतुओं का राजा इसलिए कहा गया है क्योंकि इस ऋतु में धरती की उर्वरा शक्ति यानि उत्पादन क्षमता अन्य ऋतुओं की अपेक्षा बढ़ जाती है। यही कारण है कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्वयं को ऋतुओं में वसंत कहा है। वे सारे देवताओं और परम शक्तियों में सबसे ऊपर हैं वैसे ही बसंत ऋतु भी सभी ऋतुओं में श्रेष्ठ है।

वसंत की उत्पत्ति के संबंध में कथा 

  • अंधकासुर नाम के राक्षस का वध सिर्फ भगवान शंकर के पुत्र से ही संभव था। तो शिवपुत्र कैसे उत्पन्न हो तब इसके लिए कामदेव के कहने पर ब्रह्माजी की योजना के अनुसार वसंत को उत्पन्न किया गया था।
  • ब्रह्मा जी ने शक्ति की स्तुति की उसके बाद देवी सरस्वती पक्रट हुई। ब्रह्मा और देवी सरस्वती ने सृष्टि सृजन किया। इसलिए वसंत में नए पेड़-पौधे उगते हैं। उनमें लगने वाले फूलों में कामदेव को स्थान दिया गया।
  • कालिका पुराण में वसंत का व्यक्तीकरण करते हुए इसे सुदर्शन, अति आकर्षक, सन्तुलित शरीर वाला, आकर्षक नैन-नक्श वाला, अनेक फूलों से सजा, आम की मंजरियों को हाथ में पकड़े रहने वाला, मतवाले हाथी जैसी चाल वाला आदि सारे ऐसे गुणों से भरपूर बताया है।

संरचना को मजबूत करेगा राज्य का बजट : सुशील मोहता

कोलकाता : क्रेडाई के अध्यक्ष तथा मर्लिन ग्रुप के चेयरमैन सुशील मोहता का मानना है कि इस बार के राज्य बजट में संरचनागत ढांचे के विकास पर जोर दिया गया है। खासकर नयी सड़कें और मौजूदा सड़कों का उन्नतिकरण और फ्लाईओवरों पर ध्यान दिया गया है जिससे सम्पर्क मजबूत हो सकेगा। मोहता ने कहा कि संरचना के मजबूत होने से राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इसके साथ ही स्टैम्प ड्यूटी, पंजीकरण शुल्क से आने वाले 7245 करोड़ की राजस्व उगाही का अनुमान लगाया गया है। रियल इस्टेट के क्षेत्र में कुल लेन-देन 1 लाख करोड़ हो सकता है जो कि एक नया मापदंड होगा। इसके अतिरिक्त रघुनाथपुर और कुछ अन्य औद्योगिर कॉरिडोर बंगाल में निवेश को प्रोत्साहन देंगे।

व्यवसाय में आचार विचार और नैतिक मूल्यों के महत्व पर वाद-विवाद

कोलकाता :  भवानीपुर एजकेशन सोसाइटी कॉलेज में जूम पर हुए वाद विवाद प्रतियोगिता” एथिक्स इन बिजनेस” में बहुत से विद्यार्थियों ने पक्ष और विपक्ष में अपनी बात रखी।कुमार आयुष, तिलक गुप्ता, दृष्टि श्राफ, आर्य मन विश्वास, जश बाविशी, गरिमा चांडक आदि विद्यार्थियों ने भाग लिया। चार छात्रों ने पक्ष में अपनी बात रखी, वहीं दो छात्रों ने विपक्ष में अपनी बात कही। कार्यक्रम के प्रमुख संचालक प्रो. मोहित साव ने ऑनलाइन माध्यम पर होने वाले वाद विवाद में विद्यार्थियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस विषय पर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। वहीं चंद्रोमा साहा जो व्यवसायिक क्षेत्र में कई वर्षों से हैं उन्होनें विद्यार्थियों से कहा कि किसी भी व्यवसाय के एथिक्स किस बात पर निर्भर करते हैं इसके लिए कंपनी के सभी संदर्भों का अध्ययन आवश्यक है। प्रो. उर्मि शुक्ला ने विद्यार्थियों से कहा कि वाद विवाद में आत्मविश्वास और अपने पक्ष और विपक्ष किसी भी विचार पर डटे रह कर पूरे विश्वास से अपनी बात रखें।विद्यार्थियों ने व्यापारिक आचार संहिता और नैतिक मूल्यों की बात रखी जैसे टाटा विश्वसनीय कंपनी है, वहीं मैगी का ग्राफ बहुत तेजी से नीचे की ओर जाने लगा था। इन सभी बातों का संबंध ग्राहकों की मानसिकता से जुड़ा है। खराब उत्पाद भी बिक जाते हैं लेकिन एक दिन वे बाजार में अपनी विश्वसनीयता भी खो देते हैं। एक कंपनी का मालिक अच्छा मनुष्य हो सकता है लेकिन कई बार देखा गया है कि बाद में स्कैम में पकड़ा जाता है। कंपनियों और उनके कानून आदि पर भी विचार किया गया। प्रो. दिलीप शाह ने विद्यार्थियों के साथ इस प्रकार के व्यापार से संबंधित कई अनुभवों को साझा किया। प्रो. उर्मि शुक्ला और प्रो. मोहित साव ने प्रश्नोत्तर काल में विद्यार्थियों को उनकी गलतियों का समाधान किया। बिजनस से जुड़ी चंद्रोमा साहा ने विद्यार्थियों को अपने अनुभव बताए। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

डेढ़ साल में घर-घर पाइपलाइन से मिलेगी गैस : पेट्रोलिम मंत्री

कोलकाता : बिहार के डोभी-दुर्गापुर तक प्राकृतिक गैस पाइपलाइन लगाने का काम पूरा हो चुका है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हल्दिया की सभा से 4700 करोड़ लागत की गैस पाइपलाइन समेत तीन परियोजनाओं का लोकार्पण एवं एक योजना का शिलान्यास करेंगे। वहीं डेढ़ साल में आसनसोल समेत पश्चिम बंगाल के 10 जिलों के लोगों को पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति होगी। उसके पहले शुक्रवार को केंद्रीय पेट्रोलियम, इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दुर्गापुर पहुंचे। उन्होंने पानागढ़ के मैट्रिक्स खाद कारखाने का दौरा किया, जहां पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति होगी। इसके बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि पहले पूर्वोत्तर व पूर्वी भारत के अपर असम में गैस पाइपलाइन थी, इसके अलावा पश्चिम एवं दक्षिण भारत का इलाका गैस पाइपलाइन से जुड़ा हुआ था। प्रधानमंत्री ने पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत में गैस पाइपलाइन बैठाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत के विकास से देश का विकास होगा। इसके लिए उत्तरप्रदेश के जगदीशपुर से पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक गैस पाइपलाइन बैठाने का कार्य किया जा रहा है। बिहार के डोभी-दुर्गापुर तक 348 किलोमीटर गैस पाइपलाइन 2400 करोड़ की लागत से बिछ गयी है। इससे पानागढ़ खाद कारखाने व झारखंड के सिदरी खाद कारखाने में गैस की आपूर्ति होगी। पानागढ़ खाद कारखाने में प्रतिवर्ष 13 लाख टन खाद का उत्पादन होगा। इससे बंगाल के किसानों को सुविधा होगी। वाहनों में सीएनजी गैस इस्तेमाल करने से खर्च में 15-30 फीसद तक कमी आएगी। सीएनजी स्वच्छ इंधन है। उद्योग को गैस मिले, उद्योग बढ़े, इसके लिए प्रयास हो रहा है। उन्होंने कहा कि उज्जवला योजना का लाभ देश में आठ करोड़ लोगों को मिला है। इसमें बंगाल में 88 लाख लोगों को योजना का लाभ मिला है। बंगाल के दस जिलों में साल-डेढ़ साल में घर-घर गैस का कनेक्शन मिलने लगा है।