नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि जो पक्ष निजी तौर पर सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा-89 के तहत आने वाले मुकदमे आपसी समझौते से निपटाते हैं, तो उन्हें मुकदमे की पूरी फीस वापस मिलेगी। शीर्ष अदालत के इस फैसले से वादी आपसी समझ से दीवानी मुकदमे निपटाने के लिए प्रेरित होंगे। इस मामले में मद्रास उच्च न्यायालय के प्रशासनिक पक्ष के फैसले को चुनौती देने हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसमें कहा गया था सीपीसी की धारा- 89, तमिलनाडु न्यायालय शुल्क की धारा-69ए और वाद मूल्यांकन अधिनियम- 1955 में पक्षकारों के बीच अदालती विवाद निपटारे के तरीके शामिल होंगे। ये सभी तरीके बाद में अदालत के पास कानूनी रूप से आ गए हैं। 1955 अधिनियम की धारा 69ए और सीपीसी की धारा-89 के तहत विवादों के निपटान पर धनवापसी से संबंधित है। इसके अनुसार जहां न्यायालय पक्ष को सीपीसी की धारा- 89 में उल्लिखित विवाद के निपटान के किसी भी तरीके के लिए किसी पक्ष को रेफर करता है तो भुगतान किया गया शुल्क वापस कर दिया जाएगा। इसके लिए विवाद निपटान का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। मौजूदा मामले में, जबकि अपीलें अभी भी उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन थीं, पक्षकारों ने अदालत से बाहर एक निजी समझौता किया और विवाद को हल किया। मगर उच्च न्यायालय रजिस्ट्री ने इस आधार पर कोर्ट फीस वापस करने से मना कर दिया कि अदालत ने इस तरह नियमों को अधिकृत नहीं किया है। न्यायमूर्ति एम.एम. शांतानागौदर की पीठ ने यह फैसला खारिज कर दिया। पीठ ने कहा, हमारी राय में यह फैसला स्पष्ट रूप से एक बेतुके और अन्यायपूर्ण परिणाम की ओर ले जाता है, जहां पक्षकारों के दो वर्ग बिना संदर्भ के अपने मामले निपटा रहे हैं तो वे फीस वापस लेने के हकदार होंगे।
विवाद निपटान के तरीके
धारा- 89 के तहत वाद निपटान के चार तरीके है:- (ए) पंचाट; (बी) सुलह; (सी) लोक अदालत के माध्यम से निपटान सहित न्यायिक समझौता और (डी) मध्यस्थता।
फीस का तरीका
– अदालत में सिविल मुकदमों की फीस ‘कोर्ट फीस मुकदमा वैल्यू ऐक्ट’ के हिसाब से तय की जाती है, जो आमतौर पर 10 फीसदी तक होती है।
– आपराधिक मामलों में कोई कोर्ट फीस नहीं ली जाती। अपील करने पर यह तभी ली जाती है जब निचली अदालत सजा के साथ जुर्माना लगाती है। जुर्माना जमा करने पर ही उच्च अदालत में अपील की जा सकती है।
अगर मुकदमा रजामंदी से निपटाया तो वापस मिलेगी कोर्ट फीस : सुप्रीम कोर्ट
रामकृष्ण मिशन, नयी दिल्ली कर रहा है मूल्यपरक शिक्षा का निःशुल्क प्रसार
नयी दिल्ली : रामकृष्ण मिशन, नयी दिल्ली पिछले 8 वर्षों से शिक्षा के प्रसार में सक्रिय है। मिशन 6,7,8 या 7, 8, 9 कक्षा के जरूरतमंद विद्यार्थियों को प्राथमिक और माध्यमिक वर्गों के लिए नि: शुल्क शिक्षा देने की दिशा में काम कर रहा है। वे जीवन के कौशल, निर्णय लेने की क्षमता छात्रों को प्रदान करने के मिशन के साथ पंजीकृत स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करते हैं ताकि छात्र जीवन की अनिश्चितताओं और चुनौतियों का सामना कर सकें।
यह छात्रों को उनके सामने आने वाले कठिन सवालों और स्थितियों का सामना करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह उनके सर्वांगीण विकास में मदद करता है। अब इस कार्यक्रम से 5,000 से अधिक स्कूल लाभान्वित हो रहे हैं। रामकृष्ण मिशन, नयी दिल्ली के सचिव स्वामी शांतात्मानंद ने इस कार्यक्रम की परिकल्पना की है और उन्हें बहुत उम्मीद है कि यह भारत के छात्रों और नागरिकों के जीवन में बहुत बदलाव ला सकता है।
एक्सएलआरआई ने मनाया 64वाँ दीक्षांत समारोह. 527 विद्यार्थियों को मिली डिग्री
कोलकाता : एक्सएलआरआई (ज़ेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट) ने अपना 64 वां वार्षिक दीक्षांत समारोह मनाया। यह एक वर्चुअल विदाई समारोह था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक संजीव मेहता उपस्थित थे। संजीव मेहता को संस्थान की ओर से इस बार प्रतिष्ठित सर जहाँगीर गाँधी मेडल फॉर सोशल एंड इंडस्ट्रियल पीस’ प्रदान किया गया। दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आगे रहने का एकमात्र तरीका लगातार विकसित होना है और तेजी से बदलती दुनिया में प्रासंगिक रहना है और जीवन भर विद्यार्थी रहना है। एक्सएलआरआई के बोर्ड ऑफ गवर्नर के अध्यक्ष टी. वी. नरेन्द्रन तथा निदेशक फादर पी क्रिस्टी एस जे ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया।
दीक्षांत समारोह में 527 एक्सएलआरआई छात्रों ने अपने स्नातक प्रमाणपत्र और पदक प्राप्त किए, जिनमें शामिल हैं – प्रबंधन में स्नातकोत्तर कार्यक्रम के 182 और 180 छात्र – बीएम, और एचआरएम; 15-महीने के पीजीडीएम (सामान्य प्रबंधन) कार्यक्रम के 104 छात्र; फैलो प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (एफपीएम) के 13 छात्र और पीजीडीएम-बीएम प्रोग्राम (इवनिंग) के 2017-2020 बैच के 48 छात्र। मानव संसाधन प्रबंधन (एचआरएम) 2018-20 बैच में दो वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा में पहले पांच रैंक धारक क्रमशः अभिषेक गोयल, सुभम अग्रवाल, उर्मी अरोरा, आदित्य कोम्पेला और सना अज़ीम हैं। दो वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट (बीएम) 2018-20 बैच में पहले पांच रैंक धारक क्रमशः उत्कर्ष बहुगुणा, बी राजा रेड्डी, माधवी गुप्ता, स्रीनिवासन एम एन, और गीतांशु सेठी हैं। सामान्य प्रबंधन (जीएम) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा में पहले पांच रैंक धारक – 15 -मौथर्स प्रोग्राम 2018-19 बैच में क्रमशः अरिजीत कर, अदिति रैना, सतीश कुमार, मानव भार्गव, और ज़फर अली कांचवाला हैं। व्यवसाय प्रबंधन में तीन वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा – इवनिंग प्रोग्राम 2017 – 20 बैच में पहले पांच रैंक धारक क्रमशः कोरीवी श्रवण कुमार, पूर्णिमा राधाकृष्णन, रणदीप सिंह, राहुल शर्मा और अनुभा प्रिया हैं।
नयी शिक्षा नीति लागू करने वाला पहला स्कूल बनेगा यूरो स्कूल्स
कोलकाता: भारत के प्रमुख ‘के 12’ स्कूल ब्रांड यूरो स्कूल ने नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत अपने स्कूल पाठ्यक्रम को संशोधित कर दिया है। सेरेब्रम, यूरोस्कूल के शोधकर्ताओं की टीम ने एनईपी 2020 की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए ग्रेड 1 से 5 के लिए नयी सामग्री तैयार की है। यूरोस्कूल पाठ्यक्रम की नई सामग्री रूपरेखा ‘ सेवन ई’ 7E निर्देश डिजाइन सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें शामिल हैं निम्नलिखित एन्गेज (संलग्न), एक्सप्लेन (व्याख्या) , एलैबोरेट (विस्तृत), एक्सप्लोर (अन्वेषण), इवॉल्यूएट (मूल्यांकन), एक्सटेंड (विस्तार) और एक्सपेरियेंस (अनुभव)।
संशोधित सामग्री रूपरेखा आगामी शैक्षणिक वर्ष में उपलब्ध कराई जाएगी। मामले के मूल विषय वस्तु को समझने, उच्च-क्रम के कौशल और वास्तविक जीवन स्थितियों में उनके अनुप्रयोगों का मूल्यांकन और चर्चा इस पाठ्यक्रम का मुख्य आकर्षण हैं। स्व-मूल्यांकन और सहकर्मी मूल्यांकन विद्यार्थियों को नियमित SWOT (एसडब्ल्यूओटी) विश्लेषण करने और उनकी कमजोरियों और खतरों पर काम करने में सक्षम करेगा। 21 विशेषज्ञों की एक कोर टीम द्वारा सितंबर 2020 में पाठ्यक्रम के डिजाइन और उन्नयन की प्रक्रिया शुरू हुई। यूरोस्कूल ने ये बदलाव सिर्फ भौतिक पाठ्यपुस्तकों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके बेहद सराहनीय और प्रभावी डिजिटल लर्निंग इकोसिस्टम – आर्गस में भी किए हैं। आर्गस को तीन मुख्य उद्देश्यों की सुविधा के लिए डिज़ाइन किया गया है: 1. घर से व्यक्तिगत शिक्षा; 2. छात्रों और शिक्षकों के बीच सहयोग की सुविधा और 3. समय पर सूचना और परामर्श के माध्यम से माता-पिता को अपने बच्चे की यात्रा में भागीदार बनाने के लिए आमंत्रित करना। एल – आर – पी – ए – एक्स शैक्षणिक ढांचा Argus @ होम छात्र एप्लिकेशन की बुनियाद बनाता है। छात्र डिजिटल मीडिया (डिजिटल बुक, वीडियो और क्विज़) से सीखते हैं और उससे जुड़ते हैं। अन्य मुख्य विशेषताएं, जैसे कि शिक्षक, छात्र और अभिभावक संचार, ऑनलाइन फॉर्मेटिव मूल्यांकन, अध्याय-वार छात्र विश्लेषण, सह-विद्वान क्लब, परियोजनाएं और होमवर्क सबमिशन आगे छात्र के सीखने को मजबूत करते हैं। पहल के बारे में टिप्पणी करते हुए, राहुल देशपांडे, यूरोकिड्स ग्रुप के , के -12 स्कूल के राहुल देशपांडे ने कहा , हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारे छात्रों को उनकी क्षमता की खोज करने में मदद करने के लिए सबसे नवीन आदानों के साथ प्रदान किया जाए। एनईपी दिशानिर्देशों के अनुसार पाठ्यक्रम में बदलाव इस दिशा में पहला कदम है।
सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल को चौथी बार आईडीएस 2020 -23 सम्मान
कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल को चौथी बार स्कूल में चौथी बार इंटरनेशनल डाइमेंशन इन स्कूल, 2020-2023 (पूर्व में आई एस ए) से सम्मानित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के स्थायी विकास के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 21 शताब्दी के वैश्विक मुद्दों के अनुरूप पाठ्यक्रम के विषयों को शामिल किया गया है। स्कूल की निदेशक शर्मिला बोस के अनुसार यह एक मूल्यपरक शिक्षा है जिसमें लचीलापन है और छात्राओं को यह पसन्द है। स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती दे ने इस कार्य में शामिल सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। परियोजना के माध्यम से, ‘द किंगडम ऑफ डॉल्स’ कक्षा 11, 5 और के जी की छात्राओं के बीच एक मजबूत सम्बन्ध स्थापित किये जा सके और विद्यार्थियों को सांस्कृतिक विभिन्नता की जानकारी देने के साथ रीति -रिवाजों से भी अवगत करवाया गया। इस तरह के कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एजीएम (एच आर), एल एच ओ. कोलकाता ने कहा जीवन में विभिन्नता एक रंग की तरह है और विद्यार्थी अलग – अलग संस्कृतियों के बारे में जान पाते हैं। बर्ड्स ऑफ ए फीदर; फ्लॉक टुगेदर के लिए आयोजित नर्सरी स्पोर्ट्स मीट की मुख्य अतिथि मीनाक्षी बिड़ला ने विद्यार्थियों को सराहा।
साझा परियोजना ‘एबलिंग माइंड डिसाइडिंग माइंडसेट ’ न्यूजर्सी की अर्ली चाइल्डहुड सेंटर बर्कली की मेरी के मैकमिलन के साथ 3 शिक्षण व सीखने की रणनीतियों के बारे में छात्राओं ने जाना। यह एडीएचडी और मुख्यधारा की छात्राओं को ध्यान में रखकर तैयार की गयी थी और इस आदान – प्रदान से छात्राओं को काफी लाभ हुआ।
कलकत्ता विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और अतिथि प्रवक्ता मेघा राठी ने शिक्षा को समावेशी बनाने वाले उस प्रयास की सराहना की।
‘टेस्टेसेंस : टेस्ट बियॉन्ड बाउड्रीज ‘ में छात्राओं ने साझा तौर पर ब्रिटिश स्कूल ऑफ जिनेवा, स्विटजरलैंड और फ्रांस के इकोले जीन डे-आर्क, प्लेडेलिक, के अपने साथियों के साथ भाषायी दिक्कतों से उबरकर काम किया। एसबीजीएस से शुभश्री सेनगुप्ता दास ने बताया कि इसके तहत भोजन की बर्बादी को लेकर जागरूक करने की कोशिश की गयी।
चूंकि महामारी के कारण फ्रांसीसी विनिमय यात्रा को रद्द करना पड़ा था, इसलिए एक्शन प्लान के साथ संरेखित करने के लिए कुछ गतिविधियां और साझा सत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए गए थे। प्रोजेक्ट ‘नेचर केसेस’ के लिए सौर सेल और पनबिजली के हस्तनिर्मित पोस्टर को डिजिटल रूप से बनाया गया और इसके बजाय ईमेल के माध्यम से साझा किया गया। परियोजना के लिए the एसिमिलेशन कल्चरल ’के छात्रों ने परियोजना के दौरान त्योहारों, वेशभूषा, लोककथाओं पर प्राप्त ज्ञान को अपने साथियों के साथ गूगल मीट मंच के माध्यम से भागीदार स्कूल में साझा किया परियोजना की प्रभाारी व संयोजक श्वेता सरकार और जयता साहा थीं।
रिपोर्टर दीदी की क्लास – पत्रकारिता परिचय
17 साल से मीडिया में रहते हुए जो अनुभव हुए, जो सीखा, वो नयी पीढ़ी तक ले जाने की कोशिश है। पत्रकारिता के अतिरिक्त अन्य विषयों के साथ अनुभवी लोगों को लाने का भी प्रयास है।
‘भारत में महिला उद्यमी होंगी आर्थिक विकास की ओर अग्रसर’

मंदिर जाने के बहाने

सच में, आप सभी बहनों के साथ आईडियल ग्रेंड की महिलाओं के साथ इस छोटे से ट्रिप में दिनांक 5.2.21 को बहुत आनंद आया। सुबह-सुबह सभी उत्साह में भरे हुए थे । चेहरे से खुशी झलक रही थी। सुबह के साथ ही सूर्य किरणों की प्रखरता भी बढ़ रही थी। अरे 9.30 बज रहे हैं अभी तक ड्राइवर नहीं आया, प्रेम बोली अरे लक्ष्मी फोन करो। किया है मेरे पति वहीं गेट पर ही खड़े हैं। उनकी बात हुई है वह फोरशोर रोड पर पेट्रोल भरवा रहा है। सब धीरे-धीरे वहाँ रखी कुर्सियों में धस कर बैठ गई। ललिता जी के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगीं। जैन मंदिर में डेढ़ बजे भोजन का बोला हुआ है।
फोटो सेशन शुरू हो गया। बड़ा मजा आ रहा था सबके सामान एक कुर्सी पर और सब एक फ्रेम में घुसने की कोशिश में। मैंने और लक्ष्मी ने एक सेल्फी ले ही ली। सबके साथ भी एक फोटो। मुस्कान तो हरेक के चेहरे पर जमी हुई थी। इंतजार – – – – तभी 10.15 पर लक्ष्मी ने कहा कि मेरे साजन गेट पर ड्राइवर की राह देख रहे हैं और अभी फोन आया है कि पेट्रोल पंप पर आज बहुत लंबी लाइन है। खैर इंतजार खत्म हुआ। एक लंबी सी 17 सीटर ट्रेवलर हाजिर।
उसके दरवाजे खुलते ही साठ साल की नवयुवतियों की धक्का मुक्की। कुछ मनचले पतियों का भी मन डोलने लगा। पर हाय ये पिकनिक तो केवल गृहस्वामिनी के लिए थी।
सुलोचना की जिद थी कि वो युवा ड्राइवर के पीछेवाली सीट पर सुरक्षित रहेगी। लक्ष्मी के पास तो पूरी लक्ष्मी और 17 देवियों को ले जाने की जिम्मेदारी थी। वो एक बड़ा स्टूल भी लेकर गई थी । तीन चार बड़े झोले जिनमें नमकीन आदि खाने के सामान भरे हुए थे, कुछ शॉल आदि भी। किसी को अगर अधिक ठंड लग गई तो? लक्ष्मी तो व्यवस्थापक थी। ड्रेस भी पुरुषों की पहनी थी। सिर पर हैट और पैर में जूते। आखिर एक पुरुष का अहसास तो हो।
चलो अच्छा हुआ कि 20 की जगह 17 ही आईं नहीं तो पुष्पा जी सोती कैसे? नहीं तो आते-जाते तीन सीटों को कैसे हथियातीं। आखिर मात्र 65-70 के बीच की हैं। अच्छा ही हुआ।

मजा आया जब न्यू अलिपुर में गुप्ता ब्रदर्स ढूंढने निकले। पतियों के साथ जाने का मजा ही कुछ और है। वे जब घूमाने ले जाते हैं तो प्यारी सजनियां के पैरों को जमीन पर भी उतारने नहीं देते। दौड़ दौड़ कर सब कुछ गाड़ी की सीट पर ही ला कर देते हैं। कितना सुख। अलादीन के चिराग की तरह पति के गालों को रगड़ते ही सब कुछ हाजिर। एक गुप्ता ब्रदर्स खोजने में बीस मिनट लगे । फिर चलते चलते सांस फूल गई। रास्ते के उस पार – – चलो दोसा इडली पाव भाजी और मजेदार चाय ने सारी बातों को भुला दिया।साथ में कचौडियां और गुलाब पंखुड़ियों वाले संदेश भी सबके लिए बांध लिए गए। महिलाएं खाएं चाहे न खाएं, सब कुछ रहना चाहिए।
धीरे धीरे मंजु व्यास , पुष्पा राठी, फोगला, पुष्पा बोथरा, राधा, शारदा, ललिता जी, सुलोचना, प्रेम गुप्ता, प्रेम सेठिया, वीणा, पुष्पा जैन, राजकुमारी, और मैं यानि वसुंधरा मिश्र, सभी ने अपने-अपने गीत संगीत चालू कर दिए। गणेशजी की स्तुति से लेकर णमोकार मंत्र आदि सभी देवी-देवताओं को याद किया। स्त्रियाँ सच में संस्कृति की विरासत होती हैं। अपनी भाषा के द्वारा वे पूरे विश्व से जुड़ जाती हैं। भारतीय स्त्री के संस्कार उसकी नस नस में घुलेमिले रहते हैं। और हम सभी तो दादी-नानी वर्ग के थे, सास बहू पोते-पोतियों से भरे घर को संवारने वालीं। परिवार की बागडोर संभालने वालीं। सच में जिम्मेदारियों को संभालते संभालते अब थोड़ी छुट्टी मिली। सभी घूमने निकल पड़ीं। वहां भी हिसाब-किताब करते हुए। यह भी एक व्यवस्थित तरीके से जीना और जीने की कला है।
एक बहुत मजे की बात है कि भारतीय स्त्रियों को खुशी बहुत ही कम बजट और कम से कम सुविधाओं में भी अधिक से अधिक मिल जाती है।
हमारे मंदिर और उनमें विराजमान कोई भी देवी देवता सबके होते हैं क्योंकि उनमें भी रिश्तेदारी होती है। जिस प्रकार हमारा देश अनेकता में एकता का संदेश देता है वैसे ही हमारे देवी-देवताओं में भी एकता है।
हम अलग अलग धर्म और परंपराओं को मानने वाले थे लेकिन दिगंबर जैन मंदिर नमिनाथ जी के मंदिर में जा कर सबने पूजा अर्चना की। जैन धर्म और बौद्ध धर्म भारत की श्रमण संस्कृतियों का ही एक रूप है। सनातन धर्म के गर्भ से ही उत्पन्न हुए हैं। यह जोका में शारदा गार्डन में स्थित है। जैन धर्म में णमोकार मंत्र का जप करना महत्वपूर्ण है।
गुरु की महिमा का जितना बखान किया जाय हमारे लिए कम है। कबीर तुलसी मीरा रैदास जायसी आदि संतों का देश है – –
गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागूं पाय
बलिहारी गुरु आपणे गोविंद दिओ बताय।
स्वामीनाथ जी का मंदिर तो दर्शनीय स्थलों में से एक है। स्वामीनाथ महाराज और अखंडानंद महाराज के अनुयायियों का यह मंदिर अक्षर धाम के नाम से जाना जाता है। यह सत्मार्ग का पथ है। गुजरात से संत स्वामीनाथ ने परोपकार और अध्यात्म को पूरे विश्व में प्रसारित किया। राजप्रासाद की तरह भव्य मंदिर और उसकी नक्काशी ने मन को मोहित कर दिया। ऐसे ही देश और विदेशों में 1150 मंदिर बनाए जा चुके हैं। ये मंदिर स्थापत्य कला और संस्कृति के अनूठे नमूने हैं। यह कोलकाता शहर से बाहर डायमंड हार्बर जोका में स्थित है।
हमलोगों ने बहुत सारे गेम खेले। बुढापा और जवानी वाले गेम में खूब मज़ा आया। कोई सिर पर रखी थाली में से गोटियाँ चुन रही थीं जिसका भाग्य अच्छा था वे प्रथम द्वितीय तृतीय आईं और मजे की बात है बिना किसी प्राइज़ के। हां हमलोग इतने खुश थे कि हमारी एक बहन ने वहां की एक टूटी कुर्सी को पहचान लिया। अच्छा हुआ वे बच गईं और दूसरे को बचने में मदद कीं। फोगला ने तो इतने फोटो लिए कि कुछ बहनों के कुछ पोज़ तो रह ही गए।
भोजन का जिक्र न जाने क्यों छूट रहा है। वैसे तो हम सभी को मंदिर के भोजनालय को अपना समझ बैठे थे। शुद्ध- दाल- चावल – हरी मटर की सब्जी – गट्टे – चटनी – पापड़- सलाद और फलके- मेथी पराठें—-!और जलेबी भी। और जलेबी के लिए विशेष धन्यवाद तो ललिता जी को ही है। क्या कहने रेनु के? उसने तो संयुक्त परिवार की बड़ी बहू बनने का ठेका ही ले लिया था। प्यारी और चुलबुली रेनु सबको परोसने में ही लगी रही। हम सभी को बहुत दिनों बाद खाने का आनंद आया। उसको लास्ट में हम सबने परोसा। परिवार को एकजुट होना सिखाया तो हम बहनों ने ही। ठीक ही कहा गया है – – – जैसा हो मन वैसा ही अन्न।
अरे! शारदा जी ने सभी का आईक्यू टेस्ट कर लिया। इतने जनरल नॉलेज के प्रश्न पूछे कि सबकी बुद्धि खुल गई। पिकनिक कहॉं थी ये तो समझ में आ ही गया होगा। जोका में जैन मंदिर, अक्षर धाम मंदिर और मनोरंजन बस।
शाम कैसे बीत गई पता ही नहीं चला। बहुत सी बातें छूट गईं। लक्ष्मी ने मोर्चा अच्छी तरह संभाला। बाकी सभी बहनों का सैल्यूट। फिर एक मंदिर की तलाश।
विश्व भोजपुरी सम्मेलन में सम्मानित की गयीं प्रतिभा सिंह
कोलकाताः वाराणसी में दो दिवसीय विश्व भोजपुरी सम्मेलन का समापन भोजपुरी को आठवीं सूची में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर देने के साथ सोमवार को हुआ। बड़ालालपुर स्थित जीवनदीप शिक्षण समूह के परिसर 22 राज्यों से आये विशिष्ट लोगों ने भोजपुरी भाषा पर अपने विचार रखे और भोजपुरी के अस्तित्व को बचाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर फिजी के भारत में राजदूत निलेश रोहित कुमार, महात्मा गांधी विद्यापीठ, वाराणसी के कुलपति पीएन सिंह, बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय एवं विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ अशोक सिंह ने संयुक्त रूप से किया । समारोह में भोजपुरी गायन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कोलकाता की प्रख्यात गायिका प्रतिभा सिंह को सम्मानित किया गया। उन्होंने समारोह में अपने गीतों के गायन से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
राज्य की श्रीमती सौन्दर्य प्रतियोगिता 2021 जीतीं दिव्या केडिया
दिव्या केडिया मारवाड़ी संयुक्त परिवार की बहू, एक कुशल पत्नी और माँ के रूप में अपनी सभी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए सौंदर्य प्रतियोगिताओं के विषय में सोच भी नहीं सकतीं थीं। लेकिन उनकी दो पुत्रियों की प्रेरणा से इस क्षेत्र में कदम रखने का मन उन्होंने बनाया और सफल भी रहीं। वे मानतीं हैं कि यदि गृहणियां घर – बाहर संभाल सकती हैं, तो वे अपने सपने भी पूरे करने के लिए सक्षम हैं। पहले स्त्रियों को अपने लिए समय नहीं होता था अब वे अपनी पहचान स्वयं बना रही हैं।

42 वर्षीय दिव्या केडिया नृत्य, अभिनय, तैराकी में निपुण होने के साथ-साथ मिलनसार हैं, सामाजिक सेवा के कार्यों में भी रुचि रखती हैं। अपने पति के कार्य में भी सहयोग देती हैं। बहुमुखी प्रतिभा की धनी दिव्या केक बेकर केकिजा को संभालती हैं।
कोलकाता के एक प्रख्यात होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में बंगाल की प्रसिद्ध सेलीब्रिटी ऋतुपर्णा सेनगुप्ता और बॉलीवुड के अमन यतन वर्मा प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित थे। इस अवसर पर शहर के जाने माने फैशन क्षेत्र के लोग और सौंदर्य प्रतियोगिता के बहुत से प्रतिभागियों में दिव्या केडिया ने उम्र के इस पड़ाव में अपना महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। महिला का सक्षम होना ही पर्याप्त नहीं है, उसे अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर भी मिलना चाहिए। प्रतिभागी महिलाओं का मूल्यांकन केवल सुंदरता से ही नहीं था बल्कि उनके व्यक्तित्व, बुद्धिमत्ता, सृजनात्मक शक्ति और साहसिक क्षमता के आधार पर किया गया। इसमें प्रथम रनरअप गीतांजली राय, द्वितीय संजीता दास थीं
पूरे पश्चिम बंगाल से शामिल प्रतिभाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया जिसमें घर की मैनेजर गृहलक्ष्मी, वरिष्ठ नागरिक और प्रेरक मॉडल्स सभी उपस्थित थे। इस प्रतियोगिता के आयोजक मधुर शर्मा,रोली त्रिपाठी, छवि अस्थाना और अंशु मुद्गल रहे। डॉ. वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी।




