स्मिता श्री चौधरी सॉल्टलेक स्थित मिरेन क्लब की सह संस्थापक हैं। यह क्लब उभरते हुए उद्यमियों से लेकर कॉरपोरेट के साथ काम कर रहा है और जगह की समस्या को आसान कर रहा है। शी इवेन्ट्स के साथ शुभजिता ओजस्विनी से मुलाकातों का सिलसिला जारी रहेगा…आपके लिए यह पहली कड़ी –
साल भर पहले शुरू किया मिरेन क्लब
मिरेन क्लब की सह संस्थापक हूँ। मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ। सॉल्टलेक में बचपन गुजरा… जादवपुर विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और फिर सिम्बॉयसिस से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री ली। मैं पढ़ाई के साथ ही नौकरी कर रही थी। एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के लिए नौकरी छोड़ी…इस बीच शादी हो गयी और जब मेरे बच्चे का जन्म हुआ तो उसकी देखभाल के लिए पूरी तरह ब्रेक लिया। अब जब वह 4 साल का हो गया है तो साल भर पहले ही मिरेन क्लब शुरू किया….मैं इसकी सह संस्थापक हूँ।
वर्क फ्रॉम होम…समय की माँग है
बचपन से ही मुझे बहुत कुछ करना था…नौकरी कर रही थी…पर इच्छा थी कि मुझे अपनी बॉस बनना है….मेरा अपना कुछ हो तो हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में मेरी रुचि है तो हमने मिरेन क्लब शुरू किया। यहाँ हमारी विभिन्न गतिविधियों के लिए जगहें हैं…जहाँ सेमिनार से लेकर कार्यशालाओं व अन्य कार्यक्रमों के लिए किराये पर जगहें देते हैं। पिछले साल जनवरी में शुरू किया था मगर हम सब जानते हैं कि कोविड – 19 के दौरान मार्च में सब ठप हो गया…सितम्बर से हमने वर्चुअल प्रदर्शनियाँ शुरू की..जहाँ उभरते हुए उद्यमियों का काम मिरेन क्लब के जरिए सामने लाया गया। इसके बाद धीरे – धीरे काम आगे बढ़ा…वर्क फ्रॉम होम…समय की माँग है।
कॉरपोरेट के साथ काम कर रही हूँ
मिरेन क्लब की स्थापना के पीछे मेरे परिवार का पूरा प्रोत्साहन है…मेरे पति से भी काफी प्रोत्साहन मिला…हालांकि घर से काम करना लोग पसन्द कर रहे हैं पर उम्मीद है कि यह समय भी गुजरेगा…हम इस समय कई संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। एक सेमिनार हॉल भी है जहाँ कॉरपोरेट कम्पनियों के कार्यशालाओं के लिए साझेदारी हो रही है।
मेरी माँ मेरे लिए माँ दुर्गा हैं
मेरी प्रेरणा मेरी माँ हैं। 12 साल की उम्र में मैंने अपने पिता को खो दिया था। तब मेरी दीदी ने बेहद कम उम्र में घर की जिम्मेदारियाँ सम्भाली…मगर परिवार की मुखिया के रूप में मेरी माँ जिस मजबूती से खड़ी रहीं और जिस तरह उन्होंने हर जिम्मेदारी सम्भाली, वह मुझे काफी प्रेरित करती है और अभी जब मैं खुद एक माँ हूँ तो मुझे समझ में आता है कि यह उनके लिए कितना कठिन रहा होगा। मेरी माँ मेरे लिए माँ दुर्गा है जो बगैर शिकायत के सब कुछ सम्भाल लेती हैं।
आप अडिग रहे तो आपको सफलता जरूर मिलेगी
उम्मीदें न छोड़ें और लगातार चलते रहें…बहुत से लोग बहुत तरह की बातें करेंगे और आपको डराएंगे पर आप अडिग रहे तो आपको सफलता जरूर मिलेगी।
चुनाव का बिगुल बज उठा है…आए दिन रैलियों और सभाओं से सड़कें गुलजार रहेंगी। सोशल मीडिया भी चुनावी प्रचार – कुप्रचार सभी से पटा पड़ा है…ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर लगाम कसने के लिए लाये गये नियम बेहद जरूरी जान पड़ते हैं। जरूरी तो हैं मगर काफी हैं…यह कहना जल्दबाजी होगी..कम से कम यूट्यूब, फेसबुक पर जिस तरह अपराध से लेकर आत्महत्याओं तक के लाइव वीडियो दिखायी पड़ते हैं…वह बहुत परेशान करने वाले होते हैं…चर्चा में रहने के लिए आए दिन भद्दे…अश्लील और फर्जी वीडियो बनाना तो आम बात हो गयी है।
क्या यह बेहतर नहीं होता कि ऐसे वीडियो पर लगाम कसी जाये या हिंसक और नग्नता से भरी सामग्री को अपलोड या डाउनलोड होने ही न दिया जाए। यह सही है कि सोशल मीडिया के लिए फिलहाल कोई सेंसरशिप नहीं है पर कोई तो तरीका हमें तलाशना ही होगा…जो इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगा सके। खासकर जब दसवीं की बच्ची से लेकर 70 – 80 साल के बुजुर्गों को माँ – बहन की गालियाँ देते हुए देखा जाता है तो समझ में नहीं आता कि किया क्या जाए…। महिलाओं के प्रति जिस तरह अपराध बढ़ रहे हैं…उसके पीछे इस तरह की सामग्री को अगर जिम्मेदार ठहराया जाए तो गलत नहीं होगा…जरूरी है कि इनका नियमन किया जाये…या लगाम कसी जाए…थोड़ी सी सेंसरशिप तो जरूरी है क्योंकि खुद तो लोग सुधरने से रहे…इस तरह की भाषा जब हस्तियाँ इस्तेमाल करती हैं तो परिस्थिति और बिगड़ जाती है इसलिए जरूरी है कि वह भी अपनी जिम्मेदारी को समझें…तभी स्थिति नियंत्रित की जा सकेगी।
सभी सखियों को नमस्कार। सखियों मैं पहले भी बहुत बार कह चुकी हूं कि स्त्री लेखिकाओं को साहित्य संसार में स्थापित के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है और प्राय: देखा जाता है इतिहास में जगह बनाने के लिए भी स्त्री रचनाकारों को बहुत मशक्कत करनी पड़ती है।
प्रो. गीता दूबे
चूंकि इतिहास लेखन की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी पुरुष रचनाकारों के मजबूत कंधों पर रही इसलिए महिलाओं के रचनात्मक योगदान को उन्होंने नकारा भले ही ना हो लेकिन खुले मन से स्वीकार भी नहीं ही किया। मध्ययुगीन भक्त कवयित्रियों में मात्र मीराबाई के अवदान को स्वीकार किया जाता है, बाकियों का तो नामोल्लेख करना ही काफी समझा जाता है। मध्ययुगीन भक्त कवयित्रियों में मीराबाई के अलावा दयाबाई और सहजोबाई का उल्लेख अवश्य मिलता है लेकिन इनके बारे में विस्तार से जानकारी नहीं मिलती। सखियों, आज मैं आपको निर्गुण काव्य धारा की कवयित्री सहजोबाई की रचनात्मकता से परिचित करवाऊंगी जिनके जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी मिलती है।
सहजोबाई का जन्म 25 जुलाई 1725 को दिल्ली के परीक्षितपुर नामक स्थान में हुआ था। उनका संबंध राजपूताने के ढूसर कुल से था। उनके पिता का नाम हरिप्रसाद तथा माता का नाम अनूपी देवी था। वह स्वामी चरणदास की योग्य शिष्या थीं। सहजोबाई के गुरु भाई जगजोत सिंह ने उनके गुणों की प्रशंसा करते हुए लिखा है-
“चरणदास की शिष्य दृढ़, सहजोबाई जान
ताकी दृढ़ गुरुभक्ति पर, जोगजीत कुर्बान।।”
कहा जाता है कि 11 वर्ष की उम्र में सहजोबाई का विवाह तय हुआ था लेकिन एक दुर्घटना में उनके होनेवाले पति का देहांत हो गया और सहजोबाई ने आजीवन अविवाहित रहने का निश्चय किया तथा ईश्वर की भक्ति में अपना जीवन समर्पित कर दिया। एक दूसरी कहानी के अनुसार उनके विवाह के समय उनके गुरु चरणदास भावी दंपति को आशीर्वाद देने के लिए वहाँ आए और उन्होंने सहजोबाई को संबोधित करके कहा-
“सहजो तनिक सुहाग पर कहा गुदाये शीश।
मरना है रहना नहीं, जाना विश्वेबी।।”
गुरु की यह वाणी सुनकर सहजोबाई विवाह की वेदी से उठ गईं और आजीवन अविवाहित रहने का निश्चय किया। भक्तिकाल के अन्यान्य भक्त कवियों की गुरु भक्ति का वर्णन तो बहुत ही आदरभाव के साथ किया जाता है लेकिन सहजोबाई की गुरु भक्ति भी अत्यंत उच्च कोटि की थी। वह गुरु के बताए मार्ग पर चलती हुई गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा दर्जा देती थीं। एक क्षण के लिए वह ईश्वर को भूल सकती थीं लेकिन गुरु के प्रति उनका समर्पण अद्भुत था-
“राम तजूँ पै गुरु न बिसारूँ, गुरु के सम हरि कूँ न निहारूँ।”
सहजोबाई का एकमात्र प्रामाणिक ग्रंथ मिलता है, सहजप्रकाश, जिसके बारे में यह जनश्रुति है कि सहजोबाई ने गुरु के आशीर्वाद और ईश्वर के प्रसाद से मात्र 18 वर्ष की उम्र में ही इस ग्रंथ की रचना कर डाली थी। दोहे, चौपाई, कुंडलियां आदि छंदों का प्रयोग सहजोबाई ने सहजता से किया है। भक्ति काल के बहुत से कवियों की भांति ही वह अपने आपको कवि नहीं भक्त मानती थीं जिन्होंने भक्ति के निमित्त कविता की है। कविता इनके लिए साधन है, साध्य नहीं। ऊनकी भक्ति भी जितनी ज्यादा गुरु के प्रति है, उतनी ईश्वर के प्रति नहीं
“सहजो’ कारज जगत के, गुरु बिन पूरे नाहिं ।
हरि तो गुरु बिन क्या मिलें, समझ देख मन माहि।।”
कबीर दास के दोहे “गुरू गोविंद दोउ खड़े की छाप निम्नलिखित दोहे पर दिखाई देती है-
“परमेसर सूँ गुरु बड़े, गावत वेद पुराने।
‘सहजो’ हरि घर मुक्ति है, गुरु के घर भगवान ।।”
और इसीलिए वह गुरु को ही भगवान के रूप में देखती हैं। हालांकि सहजोबाई निर्गुण ब्रह्म की आराधक थीं लेकिन उनके भक्तिपूरित उद्गारों में बहुत बार सगुण और निर्गुण के बीच का भेद मिटता दिखाई देता है। निम्नलिखित पद ऐसा ही है जिसपर मीराबाई के पद “मेरे तो गिरधर गोपाल..” की छाप सहजता से लक्षित की जा सकती हैं लेकिन अंतर इतना है कि सहजोबाई भक्ति की पराकाष्ठा में ईश्वरमय नहीं गुरुमय हो जाती हैं-
“मेरे इक सिर गोपाल और नहीं कांउ भाई.
आइ बैस हिये मांहिं और दूजा ध्यान नाहिं,
मेरे तो सर्बस उन और हिताई बोई॥
जाति हू की कान तजा, लोक हू की लाज भजी,
दोनों कुल माहिं बनी, कहा करै सोई॥
उघरी है प्रीति मेरा, निहचै हुई वाकी चेरा,
पहिरि हिये प्रेम बेरा, टूटै नहिं जोई॥
मैं जो चरनदास भइ, गति सति सब खोइ दई,
‘सहजो’ बाई नहीं रही, उठि गई दोई।”
संसार की क्षणभंगुरता और सांसारिक नातों की स्वार्थपरता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने उपदेशात्मक शैली में लिखा-
“सहजो जीवत सब सगे, मुए निकट नहिं जायं
रोवैं स्वारथ आपनै, सुपने देख डरायं।”
भक्ति कालीन अधिकांश कवि प्रेम पर बल देते हैं, वह चाहे कबीर हों या जायसी। मीराबाई तो प्रेम दीवानी हैं ही और सहजोबाई भी प्रेम की सरसता ही नहीं महत्ता के प्रति भी आश्वस्त दिखाई देती हैं। प्रेम दिवाने भक्त ही जीवन का वास्तविक आनंद पा सकते हैं-
प्रेम दिवाने जो भये पलटि गयो सब रूप।
‘सहजो’ दृष्टि न आवई, कहा रंक कहा भूप॥
प्रेम दिवाने जो भये, नेम धरम गयो खोय।
‘सहजो’ नर नारी हंसैं, वा मन आनँद होय॥
प्रेम दिवाने जो भये, ‘सहजो’ डिगमिग देह।
पाँव पड़ै कितकै किती, हरि संभाल जब लेह॥
प्रेम लटक दुर्लभ महा, पावै गुरु के ध्यान।
अजपा सुमिरन करत हूँ, उपजै केवल ज्ञान॥”
गुरु के प्रति पूर्णतया समर्पित और प्रेम तथा समर्पण के माध्यम से भक्ति की जोत जलानेवाली, निर्गुण और सगुण के बीच सामंजस्य स्थापित करनेवाली भक्त कवयित्री सहजोबाई की मृत्यु 26 जनवरी 1805 में वृंदावन में हुई। इनकी भक्ति भी सराहनीय है और कवित्त भी लेकिन हिंदी साहित्य के इतिहास में इन्हें जो जगह मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिली। सहजोबाई के व्यक्तित्व और कृतित्व के प्रति श्रद्धा ज्ञापित करती हुई, आज की कहानी मैं यहीं समाप्त करती हूँ।
कोलकाता : इक्वेस्ट्रिंग स्पोर्ट्स के सहयोग से इक्वेट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया 11 से 14 मार्च 2021 तक ग्रेटर नोएडा में होने वाले इक्वेस्ट्रियन टेंट पेगिंग के लिए विश्व कप क्वालीफायर का आयोजन कर रहा है। रूस, अमेरिका, बेलारूस, भारत, पाकिस्तान, सूडान और बहरीन सहित कुल सात देशों में एक दूसरे के साथ विश्व कप विजेता खिलाड़ी होंगे। इन सात टीमों में से, शीर्ष दो विश्व कप के लिए अर्हता प्राप्त करेंगे जो 2023 में दक्षिण अफ्रीका में होने जा रहा है।
विश्व कप क्वालिफायर द पेंटा ग्रैंड 2021 का एक हिस्सा होगा; जिसमें नेशनल इक्वेस्ट्रियन टेंट पेगिंग चैंपियनशिप, हॉफ मिलियन कप और नोएडा हॉर्स शो गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम, ग्रेटर नोएडा में 03 से 14 मार्च, 2021 तक आयोजित किया जाएगा।
कुल 50 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय राइडर्स, 250 से अधिक भारतीय राइडर्स और 300 से अधिक घोड़े द पेंटा ग्रैंड 2021 में भाग लेंगे। और दुनिया भर के कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
चैम्पियनशिप के आयोजक सचिव अहमद ने इस अवसर पर कहा, ‘हम भारत में पहली बार इक्वेस्ट्रियन टेंट पेगिंग के लिए आईटीपीएफ विश्व कप क्वालिफायर लाने के लिए रोमांचित हैं। ” भारत में भारतीय महाराजा और नवाब द्वारा खेल को लोकप्रिय बनाया गया था, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें कमी आई है। ” लेकिन अब कुछ प्रमुख टीमों जैसे हरियाणा पुलिस, पंजाब पुलिस, 61 कैवलरी, पीबीजी, एएससी, आरवीसी, असम राइफल्स, बीएसएफ, आईटीबीपी, बिहार पुलिस, एएमयू राइडिंग क्लब आदि के लिए धन्यवाद, खेल बढ़ रहा है। इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव कर्नल जयवीर सिंह ने कहा देश में पहली बार विश्व कप क्वालीफायर प्राप्त करना विशेष रूप से इन परीक्षण समय के दौरान एक कठिन काम था मगर इस आयोजन से देश का सम्मान बढ़ेगा। टेंट पेगिंग एक ऐसा खेल है जिसमें एक घुड़सवार पर सवार घुड़सवार सवार होता है और पिकअप में छेद करने के लिए तलवार या लांस का उपयोग करता है और टेंट खूंटी के एक छोटे से ग्राउंड टारगेट प्रतीकात्मक ले जाता है। टेंट पेगिंग को 1982 में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया द्वारा एक आधिकारिक खेल के रूप में शामिल किया गया था और आज यह एक अंतर्राष्ट्रीय शेड्यूल गेम है।
कोलकाता : स्ट्राइड्स फर्मा साइंस लिमिटेड (स्ट्राइड्स) की सहायक कम्पनी सिंगापुर की स्ट्राइड्स फर्मा ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड को ईबूप्रोफिन ओरल सस्पेंशन यूएसपी, 100 एम डी/ 5 मिली (ओटीसी) को यूएसएफडीए मंजूरी मिल गयी है। यह उत्पाद जैव-सूचीबद्ध और चिकित्सीय रूप से संदर्भ लिस्टेड ड्रग (RLD), चिल्ड्रन्स मोट्रिन® ओरल सस्पेंशन, जॉनसन एंड जॉनसन कंज्यूमर इंक के 100 mg / mL के बराबर है। स्ट्राइड्स अमेरिका में अपना कारोबार बढ़ा रहा है। दवा कम्पनी की बंगलूरु स्थित निर्माण इकाई में बनेगी और अमरीकी बाजार में इसका विपणन स्ट्राइड्स फर्मा इंक करेगी।
कोलकाता : इन्ब्रू होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने उत्तर अमेरिका के मॉल्सन कूर्स इंडिया का अधिग्रहण कर लिया है। इन्ब्रू के मालिक लंदन के प्रवासी भारतीय उद्योगपति रवि देयोल हैं। मॉल्सन कूर्स इंडिया अमेरिका के कूर्स ब्रेविंग यूएसए की सहायक कम्पनी है। अधिग्रहण के अनुसार इन्ब्रू होल्डिंग्स भारत में इस कम्पनी के बिजनेस ऑपरेशन के साथ देश में इसकी निर्माण इकाई की सुविधाएं भी अधिग्रहीत करेगी। इन्ब्रू होल्डिंग्स के चेयरमैन रवि देयोल के अनुसार उनकी कम्पनी भारतीय बाजार को समझती है और यह अधिग्रहण कम्पनी को मजबूती देगा। गौरतलब है कि देओल बरिस्ता के संस्थापक भी हैं।
कोलकाता : कल्याण भारती ट्रस्ट को पीआरएसआई के सर्वश्रेष्ठ अंग्रेजी न्यूजलेटर का सम्मान मिला है। हाल ही में आयोजित पीआरएसआई के 2020 के राष्ट्रीय पुरस्कारों के वर्चुअल आयोजन में शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इसके साथ ही उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, इंटरनेशनल पब्लिक रिलेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष फिलिप बोरेमैन्स और पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत पाठक उपस्थित थे। शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक से यह पुरस्कार कल्याण भारती ट्रस्ट के सीईओ प्रदीप अग्रवाल ने ग्रहण किया।
कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की ओर से छात्राओं के लिए हाल ही में वर्चुअल पिकनिक आयोजित की गयी। यह पिकनिक नर्सरी से लेकर तीसरी कक्षा की छात्राओं के लिए आयोजित की गयी थी। इस मौके पर बच्चियों ने थीम के अनुसार परिधान पहने थे। उनके पास पानी की बोतल, कैप और धूप के चश्मे भी थे। एक तरफ जहाँ नर्सरी की छात्राएं डिज्नीलैंड की वर्चुअल यात्रा पर निकलीं तो के जी और पहली कक्षा की छात्राओं ने दुबई के मिरेकल गार्डन की वर्चुअल सैर की। दूसरी कक्षा की छात्राओं की थीम फूल थीं तो उनके लिए बोर्डिग पास भी था और वे श्रीनगर के ट्यूलिप गार्डन गयीं। वहीं तीसरी कक्षा की छात्राएं हॉलीवुड के यूनिर्वसल स्टूडियो स्थित जुरासिक पार्क देखा। छात्राओं को कई खेल खिलाए गये। इस पिकनिक से अभिभावक भी काफी प्रसन्न रहे।
शुभजिता और शी को तलाश है सृजन के प्रहरियों की…. क्या आपमें है वह बात? अगर हाँ..तो शुभजिता प्रतिभा सम्मान का मंच आप ही के लिए है।
आप स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय के विद्यार्थी हैं या फिर शोधार्थी हैं…..या फिर अन्य कलाओं से है प्यार..कलाकार हैं या हैं चित्रकार.. प्रतिभा आपकी होगी…मंच हम देंगे.. विद्यालय स्तर – पहली से पाँचवीं कक्षा – चित्रांकन…काव्य आवृति छठीं से बारहवीं तक – टिप्पणी लेखन…काव्य आवृत्ति और कविता पोस्टर (कम से कम 5 चित्र) कॉलेज, विश्वविद्यालय और शोधार्थी – आलेख…पुस्तक समीक्षा..कविता पोस्टर (कम से कम 5 चित्र), कविता/ लेख/ कहानी अनुवाद
——————————– प्रत्येक प्रतिभागी के लिए है
डिजिटल प्रतिभागिता प्रमाणपत्र
शुभजिता यू ट्यूब चैनल तथा वेबसाइट पर प्रस्तुति
विजेता के लिए है
शुभजिता प्रतिभा सम्मान विजेता प्रमाणपत्र
पुस्तक समीक्षा होने पर शुभ सृजन नेटवर्क चैनल पर वीडियो
शुभ सृजन सम्पर्क हिन्दी इन्फो ई डायरेक्टरी में निःशुल्क पंजीकरण
शुभजिता पर साक्षात्कार
और वाणी प्रवाह यू ट्यूब चैनल पर प्रस्तुति और प्रतियोगिता में सीधा प्रवेश
सभी विजेता प्रतिभागियों को लेकर आयोजित होगा वाणी प्रवाह…2021′
जहाँ प्रतियोगिताएं होंगी…पर अलग.. कुछ प्रतियोगिताओं के…विषय प्रतियोगिता स्थल पर मिलेंगे
विद्यालय स्तर पर – चित्रांकन, काव्य आवृति (विषय आयोजकों द्वारा) (पहली से पाँचवीं कक्षा)
छठीं से बारहवीं – आशु टिप्पणी लेखन, कविता पोस्टर, काव्य आवृति (विषय आयोजकों द्वारा)
महाविद्यालय, विश्वविद्यालय और शोधार्थी- आशु कृति, कविता पोस्टर, पुस्तक समीक्षा, आशु वक्तव्य, आशु अनुवाद (लिखित) जहाँ विजेता को मिलेगा
सृजन प्रहरी सम्मान का खिताब, ट्रॉफी तथा प्रमाणपत्र
सृजन प्रहरी उपविजेता (प्रथम और द्वितीय) ट्रॉफी तथा प्रमाणपत्र
पंजीकरण शुल्क – स्कूल स्तर पर – 250 रुपये
कॉलेज तथा विश्वविद्यालय स्तर पर – 300 रुपये गूगल फॉर्म लिंक –
नयी दिल्ली : मामाअर्थ ब्रांड नाम से पर्सनल केयर उत्पादों की बिक्री करने वाली होंसा कंज्यूमर प्राइवेट लिमिटेड (एचसीपीएल) ने कहा है कि इस साल 200 लोगों की भर्ती करेगी। कंपनी ने बताया कि टियर-1 और टियर-2 शहरों में उसके उत्पादों की बिक्री में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है और ऑनलाइन कारोबार में तेजी से बढ़ा है। एचसीपीएल ने बताया कि इस साल उसकी आय बढ़कर 500 करोड़ रुपये से अधिक हो गई और निकट भविष्य में इसके दोगुना होने का अनुमान है। कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ वरुण अलघ ने बताया, “हम अभी 300 लोग हैं और इस साल के अंत तक हम 500 लोग होंगे। इनमें से 100 लोग ऑफलाइन खुदरा दल का हिस्सा होंगे, और शेष वृद्धि दल, डीटूसी दल, उपभोक्ता सेवा, विपणन दल और अन्य काम संभालेंगे।” उन्होंने बताया कि कंपनी ने चार साल में 500 करोड़ रुपये के कारोबार को हासिल किया है और कंपनी ने अब 1,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया है।