Thursday, April 2, 2026
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मोबाइल और सोशल मीडिया पर रहता है ध्यान, तो काम शुरु करने से पहले करें ये काम

सोशल मीडिया और मोबाइल के कारण कई ज़रूरी काम रुक जाते हैं। इन तरकीबों से समय पर काम पूरा कर सकते हैं। किसी काम को करने के लिए एकाग्रता होनी बहुत ज़रूरी है। जब पूरा ध्यान मोबाइल और सोशल मीडिया पर लगा हो, तो किसी ज़रूरी काम पर ध्यान लगाना मुमकिन कैसे होगा। काम समय पर पूरा हो और ध्यान इधर-उधर ना भटके, इसके लिए कुछ तरकीबें अपनाकर देखिए…
पहले ही समय दें – पढ़ाई, दफ्तर या घर के किसी अन्य काम के बीच आधा ध्यान सोशल मीडिया और मैसेज पर लगाएंगे, तो ज़ाहिर है कि जिस काम को करने में आपको एक घंटा लगेगा, उसमें दो घंटे लग जाएंगे। ऐसे में कोई भी काम करने से पहले कुछ मिनट मोबाइल को दें। मैसेज, सोशल मीडिया आदि देख लें और फिर इंटरनेट बंद करके काम की शुरुआत करें। अगर काम के लिए मोबाइल का इंटरनेट इस्तेमाल कर रही हैं, तो बेशक कीजिए, लेकिन मोबाइल ख़ुद से दूर रखिए।
डू नॉट डिस्टर्ब चुनें – जिनसे आप रोज़ाना मैसेज या फोन पर बात करती हैं, उन्हें सूचित करें आप काम में व्यस्त हैं इसलिए वो आपको मैसेज या फोन ना करें। अगर कहना नहीं चाहती, तो डू नॉट डिस्टर्ब के चिह्न का उपयोग कर सकती हैं। साथ ही नोटिफिकेशन बंद कर दीजिए क्योंकि ख़ुद को कितना भी रोकने की कोशिश करें, लेकिन जब नोटिफिकेशन की आवाज़ आएगी, तो इसे देखे बिना ख़ुद को रोक नहीं सकेंगी।
कम से कम एप्स रखें – कम से कम एप्स मोबाइल में रखने की कोशिश करें। जितने कम एप्स होंगे, उतना ज़्यादा काम में ध्यान लगा सकेंगी। अगर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना भी है, तो एप ना लेकर मोबाइल के ब्राउज़र में इस्तेमाल करें। जब एप नहीं दिखेगा तो इन्हें कम से कम इस्तेमाल करेंगी।
पहले समय चुनें – घर का काम हो या दफ्तर का, काम की शुरुआत करने से पहले सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट ना करें। आपकी पोस्ट पर कितने लाइक या कमेंट आए, इसी पर ध्यान लगा रहेगा। लोग कमेंट करेंगे, तो आप जवाब देने में व्यस्त हो जाएंगी। काम खत्म करने बाद ही पोस्ट करें।
(साभार – दैनिक भास्कर)

मोबाइल ऐप से फिर शुरू हुई जनरल टिकट की बुकिंग

काउंटर पर लंबी कतार से मिलेगी मुक्ति
नयी दिल्ली : टिकट बुकिंग के लिहाज से रेलवे ने रेल यात्रियों को बड़ी राहत दी है। अब यात्रियों को जनरल टिकट लेने के लिए लंबी कतार में खड़े रहने की जरूरत नहीं, क्योंकि इसे मोबाइल ऐप के जरिए भी बुकिंग की जा सकती है। रेलवे ने यह कदम कोरोना महामारी को देखते हुए उठाया है। टिकट काउंटर पर सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन करते हुए UTS यानी अनरिर्जव्ड टिकट सिस्टम ( अनारक्षित टिकट प्रणाली) के जरिए अनारक्षित टिकट बुक करने की सुविधा फिर से शुरू करेगी। यानी अब जनरल टिकट से रेल यात्रा एक बार फिर की जा सकेगी। पिछले साल लॉकडाउन के दौरान यह सुविधा रोक दी गयी थी । गौरतलब है कि इंडियन रेलवे का बुकिंग प्लेटफॉर्म देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है।
इससे बुकिंग काउंटरों पर जुटने वाली भीड़ कम होगी और सामाजिक दूरी के नियमों का भी अनुपालन किया जा सकेगा। रेल मंत्रालय के मुताबिक रेलवे अनारक्षित ट्रेन सेवा को धीरे – धीरे आरम्भ किया जायेगा। UTS ऑन मोबाइल ऐप की सुविधा 2018 से शुरु है। इसके जरिए यात्री ट्रेन टिकट बुक/कैंसिल कर सकते हैं। ऐंड्रॉयड के लिए गूगल प्ले और आईफोन के लिए ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। आप भी जानिए घर बैठे जनरल टिकट कैसे बुक कर सकते हैं-
सबसे पहले प्ले स्टोर से UTS ऑन मोबाइल ऐप को डाउनलोड करना होगा ऐप को जीपीएस अनुमति देनी होगी। नतीजतन, यात्री स्टेशन के 5 किलोमीटर के दायरे से टिकट बुक कर पाएंगे।
ऐप पर रजिस्ट्रेशन के लिए UTS पर नाम, मोबाइल नंबर और दूसरी जरूरी व्यक्तिगत जानकारी देना होगा। रजिस्ट्रेशन प्रोसेस यानी पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) भेजा जाएगा।
रजिस्ट्रेशन होने के बाद UTS ऑन मोबाइल ऐप के लिए यात्री की आई डी और पासवर्ड जेनरेट हो जाएगा। इसका इस्तेमाल करके यात्री अनारक्षित ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं।
यात्रियों को PNR नम्बर भी दिया जाएगा, जिसमें एक PNR पर यात्री अधिकतम चार टिकट बुक कर सकते हैं।
टिकट के लिए भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या पेटीएम आदि से किया जा सकता है। वर्तमान में कोरोना पूर्व की तुलना में 65% मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। इसके अलावा 90% से ज्यादा लोकल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। डेटा के मुताबिक हर दिन 1,250 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं, जबकि 5,350 लोकल ट्रेन और 326 से ज्यादा पैसेंजर ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।

अनीस थापा ने जीता अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन

रायपुर : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में सेना के जवान अनीस थापा ने 21 किलोमीटर लंबी ‘अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन’ को 55 मिनट 19 सेकंड में पूरा किया है। थापा ने इस प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया है। नारायणपुर जिले के पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि ‘अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन’ में आज हजारों धावक दौड़े। मैराथन दौड़ सुबह 6.30 बजे नारायणपुर जिला मुख्यालय में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मैदान से शुरू हुई तथा नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ में स्थित गांव बासिंग बहार में समाप्त हुई। इस मैराथन दौड़ के लिए छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों के 11 हजार 797 धावकों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया था।
अधिकारियों ने बताया कि पुरूष वर्ग में हैदराबाद के अनीस थापा ने 55 मिनट 19 सेकंड में 21 किलोमीटर की दौड़ पूरी कर प्रथम स्थान प्राप्त किया जबकि महाराष्ट्र के धावक अंगारिया विक्रम सिंह भरत 55 मिनट 59 सेकंड में तथा महाराष्ट्र के ही दीपक बापू 56 मिनट 39 सेकंड में दौड़ पूरी कर क्रमश: दूसरे एवं तीसरे स्थान पर रहे। उन्होंने बताया कि महिला वर्ग में उत्तर प्रदेश की धाविका रीनू ने इस मैराथन को एक घंटा सात मिनट 16 सेकंड में पूरा कर पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं दूसरे स्थान पर रही उत्तर प्रदेश की ही धाविका तामसी सिंह ने एक घंटा सात मिनट 58 सेकंड में दौड़ पूरी की तथा महाराष्ट्र की ज्योति जे चौहान ने एक घंटा आठ मिनट 42 सेकंड में दौड़ पूरी कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है।
अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित बस्तर को नई पहचान देने के लिए वर्ष 2019 से लगातार अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के घावक हिस्सा लेते हैं।
नारायणपुर जिले के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पहले स्थान प्राप्त विजेताओं को मैडल और एक लाख 61 हजार रूपए की नकद राशि से पुरस्कृत किया गया। दूसरे स्थान पर रहे धावक को 61 हजार रूपए और तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले विजेताओं को 31 हजार रूपए की नकद राशि और पदक से पुरस्कृत किया गया।

 

पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाना अच्छा कदम होगा : केवी सुब्रमण्यम

कोलकाता : मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमण्यम ने पेट्रोलियम उत्पादों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसपर निर्णय जीएसटी परिषद को करना है। सुब्रमण्यम ने हाल में फिक्की एफएलओ सदस्यों के साथ परिचर्चा में कहा, ‘‘यह एक अच्छा कदम होगा। इसका निर्णय जीएसटी परिषद को करना है।’’ पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने का आग्रह किया है।
ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम आदमी पर बोझ बढ़ा है। यह विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में एक प्रमुख मुद्दा है। सुब्रमण्यम ने कहा कि मुद्रास्फीतिक दबाव मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं की महंगाई की वजह से है।

 

नये सोशल मीडिया नियमों से बढ़ेगी अनुपालन लागत : विशेषज्ञ

नयी दिल्ली : नये सोशल मीडिया नियम इस क्षेत्र की कंपनियों के लिये अनुपालन की लागत बढ़ा सकते हैं। इससे फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर पाना छोटी कंपनियों के लिये मुश्किल हो सकता है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का ऐसा मानना है। पिछले सप्ताह घोषित नये नियम सोशल मीडिया कंपनियों को दो वर्ग ‘सोशल मीडिया मध्यस्थ और महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थ’ में बांटते हैं। महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थ के लिये सरकार ने 50 लाख प्रयोगकर्ताओं की सीमा तय की है। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों को अतिरिक्त अनुपालन करना होगा।
फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों ने कहा कि वे अभी नियमों का अध्ययन कर रही हैं। कई लोगों ने नये नियमों की सराहना की है। इनका कहना है कि नये नियम शिकायत निवारण, फर्जी समाचार और उपयोगकर्ताओं की ऑनलाइन सुरक्षा जैसी चिंताओं को दूर करते हैं। हालांकि अनुपालन की में वृद्धि पर भी कई लोगों ने चिेता व्यक्त की है।
सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर (एसएफएलसी) की संस्थापक मिशी चौधरी ने कहा कि नियम अनुचित बोझ और अनुपालन बढ़ाने वाले हैं। ये इस क्षेत्र में प्रवेश को मुश्किल बना सकते हैं और हर किसी के लिसे अनुपालन की लागत बढ़ा सकते हैं। भारत में व्हॉट्सएप के 53 करोड़, यूट्यूब के 44.8 करोड़, फेसबुक के 41 करोड़, इंस्टाग्राम के 21 करोड़ और ट्विटर के 1.75 करोड़ उपयोक्ता हैं।
टेलीग्राम और सिग्नल जैसी कंपनियां उपयोक्ताओं की संख्या के बारे में जानकारी नहीं देती हैं। हालांकि, गोपनीयता संबंधी विवाद उठने के बाद हालिया समय में इन कंपनियों का डाउनलोड ठीक-ठाक बढ़ा है। टेलीग्राम ने नये नियमों के प्रभाव पर प्रश्नों का जवाब नहीं दिया।

मारुति ने नयी स्विफ्ट बाजार में उतारी, दाम 5.73 लाख रुपये से शुरू

नयी दिल्ली : देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कम्पनी मारुति सुजूकी इंडिया (एमएसआई) ने बुधवार को अपनी प्रीमियम हैचबैक कार स्विफ्ट का नया संस्करण बाजार में उतारा। दिल्ली में इसकी एक्स- शो रूम कीमत 5.73 लाख रुपये से लेकर 8.41 लाख रुपये तक होगी।
मारुति ने एक वक्तव्य में यह जानकारी देते हुये कहा है कि नयी स्विफ्ट को ग्राहकों की ताजगी और नयी प्रौद्योगिकी जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है। एमएसआई के कार्यकारी निदेशक (विपणन और बिक्री) शशांक श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘वर्ष 2005 में बाजार में उतारे जाने के बाद से ही स्विफ्ट ने भारतीय प्रीमियम हैचबैक बाजार में क्रांति ला दी है। इस दौरान स्विफ्ट ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन और सड़क पर सफल मौजूदगी के चलते अपनी अलग पहचान बनाई है।’’उन्होंने कहा कि इन वर्षों के दौरान मारुति की स्विफ्ट ने 24 लाख ग्राहकों का सौहार्द हासिल किया है। ‘‘नई स्विफ्ट इसी विरासत को और आगे बढ़ायेगी। इसमें नया अधिक शक्तिशाली के- श्रृंखला का इंजन लगा है। ईंधन क्षमता को और बेहतर बनाया गया है तथा सुरक्षा मानकों को भी बढ़ाया गया है।’’
नयी स्विफ्ट में मैनुअल और आटोमेटिक गीयर बदलने की सुविधा भी रखी गयी हे। मैनुअल गीयर सुविधा वाली नई स्विफ्ट का दाम 5.73 लाख से 7.91 लाख रुपये जबकि आटोमेटिक गीयर शिफ्ट (एजीएस) संस्करण का दाम 6.86 लाख से 8.41 लाख रुपये तक है।

ये हैं आयकर बचाने वाले 5 खर्च

पैसे कमाना बहुत ही मुश्किल काम है, ये सब जानते हैं। ऐसे में जब भी बात टैक्स चुकाने की आती है तो हर कोई तमाम तरह के निवेश के जरिए अपनी गाढ़ी कमाई को आयकर की तरह देने से बचाने की हर कोशिश करता है। आज जानिए ऐसे 5 खर्च, जो कर बचाने में आपकी मदद कर सकते हैं –
प्री नर्सरी की फीस – बच्चे की ट्यूशन फीस पर टैक्स में छूट मिलती है, ये तो सभी जानते हैं, लेकिन अगर आपका बच्चा छोटा है तो आप उसके प्ले स्कूल, प्री-नर्सरी और नर्सरी की फीस पर भी टैक्स छूट पा सकते हैं। 2015 में ये व्यवस्था शुरू की गई थी। धारा 80सी के तहत ये फायदा मिलता है, जिसके तहत आप अधिकतम 1.5 लाख रुपये पर टैक्स छूट पा सकते हैं। हालांकि, ये ध्यान रखने वाली बात है कि ये फायदा सिर्फ दो बच्चों तक की फीस पर मिलता है। अगर बच्चे जुड़वा हो जाते हैं तो तीन बच्चों तक ये फायदा लिया जा सकता है।
स्टाम्प ड्यूटी पर भी मिलती है टैक्स छूट – जब आप नया घर खरीदते हैं तो आपको स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान करना होता है। इन पर भी आप टैक्स छूट पा सकते हैं। ये फायदा भी धारा 80सी के तहत मिलता है, जिसमें आप एक साल में 1.5 लाख रुपये तक पर टैक्स छूट ले सकते हैं। ध्यान रहे कि आप ये डिडक्शन उसी वित्त वर्ष में क्लेम करें, जिस वित्त वर्ष में आपने घर खरीदा है, क्योंकि बाद में इसका फायदा नहीं लिया जा सकता है।
माता -पिता को दिया हुआ ब्याज – अगर आपने घर खरीदने के लिए अपने मां-बाप से कर्ज  लिया है, तो उन्हें दिए गए ब्याज पर भी इनकम टैक्स में छूट का फायदा ले सकते हैं। यानी ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट सिर्फ बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से लिए हुए लोन तक सीमित नहीं रहेगी। ये छूट 2 लाख रुपये तक धारा 24बी के तहत मिल सकती है। ध्यान रहे कि आपके पास मां-बाप को ब्याज चुकाए जाने का सर्टिपिकेट होना जरूरी है।
माता -पिता को दिया गया किराया – अगर आप अपने माता -पिता के घर में रह रहे हैं तो आप उन्हें किराया देना भी दिखा सकते हैं और उस पर टैक्स का फायदा ले सकता है। ये फायदा आप सेक्शन 10(13ए) के तहत ले सकते हैं। इसके तहत आप कंपनी की तरफ से मिले एचआरए या बेसिक सैलरी का 50 फीसदी या अपनी सैलरी के 10 फीसदी से अधिक जितना आपके रेंट दिया है, उसमें जो भी कम हो, उतना एचआरए क्लेम कर सकते हैं।
माता -पिता के इलाज का खर्च – बुढ़ापे में अधिक मेडिकल खर्च होता है ये सभी जानते हैं। अगर आप इन खर्चों को फाइनेंस करते हैं तो आप उन पर टैक्स में छूट क्लेम कर सकते हैं। यह छूट धारा 80डी के तहत मिलती है और इसके तहत आप 50 हजार रुपये तक का डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। हालांकि, अगर ये खर्चें हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कवर हैं तो उसे इसमें जोड़ा नहीं जाएगा।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

कोलकाता में खुलेगा देश का पहला ‘एंटी बैंक फ्रॉड’ पुलिस स्टेशन

कोलकाता : जैसे-जैसे देश अधिक डिजिटल हो रहा है, समय के साथ अपराध का प्रकार बदल रहा है। साइबर और बैंक धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है। नोटबंदी के बाद से पश्चिम बंगाल के कोलकाता में बैंक धोखाधड़ी के मामलों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। लिहाजा, कोलकाता का पुलिस मुख्यालय लालबाजार बैंक धोखाधड़ी अपराधों को रोकने के लिए साइबर पुलिस स्टेशन की तर्ज पर देश का पहला ‘एंटी बैंक फ्रॉड’ पुलिस स्टेशन खोलने जा रहा है। दरअसल, कुछ दिनों पहले कोलकाता पुलिस ने राज्य सरकार के गृह विभाग को एक नया पुलिस स्टेशन खोलने का प्रस्ताव भेजा था। सूत्रों ने कहा कि प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद कोलकाता पुलिस ने एक नया पुलिस स्टेशन खोलने का काम शुरू कर दिया है।चुनाव के बाद 2021 तक नया बैंक धोखाधड़ी विरोधी थाना लालबाजार में खोला जा सकता है। इस नए पुलिस स्टेशन के शुभारंभ के साथ कोलकाता पुलिस में देश का पहला पुलिस कमिश्नरेट होगा जिसके पास केवल बैंक धोखाधड़ी के मामला की जांच करने के लिए एक विशेष पुलिस स्टेशन होगा। अब तक कोलकाता पुलिस के इंटेलिजेंस डिवीजन के तहत एंटी-बैंक फ्रॉड सेक्शन बैंक धोखाधड़ी की जांच के लिए काम कर रहा है। लेकिन इस बार अगर उस विभाग को पुलिस स्टेशन में बदल जाता है, तो पुलिस का दावा है कि जांच की प्रगति कई गुना बढ़ जाएगी। खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अगर विभाग को पुलिस स्टेशन में बदल दिया जाता है, तो 154 सीआरपीसी के अनुसार उसके पास खुद एफआइआर करने की शक्ति होगी। इतने लंबे समय तक संबंधित पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराने के बाद ही पुलिस जांच का प्रभार लेती थी। इसके अलावा थाने में काबिल पुलिस अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी और बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया जाएगा। इससे प्रदेश में अपराध में कमी आ सकती है।

केंद्र सरकार ने 250 रुपये तय की कोरोना वैक्सीन की कीमत

नयी दिल्ली : केंद्र सरकार ने कोरोना वैक्सीन की एक खुराक की कीमत 250 रुपये निर्धारित की है, जो 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए निजी अस्पतालों में उपलब्ध होगी। केंद्र सरकार ने शनिवार को इसबात का ऐलान किया। टीकाकरण अभियान का दूसरा चरण एक मार्च से शुरू हो जाएगा। सरकार ने फैसला किया है कि लोगों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त टीका लगाया जाएगा। वैक्सीन की एक खुराक के लिए कॉस्ट-ब्रेकअप 150 रुपये बताई जा रही है और इसमें सेवा शुल्क के रूप में 100 रुपये और जुड़ जाएंगे और फिर निजी अस्पताल लाभार्थियों से कीमत वसूलेंगे। सूत्रों ने बताया कि यह निर्णय राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा लिया गया है और इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सूचना भेजी जा रही है। हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स के बाद, कोविड-19 महामारी के खिलाफ टीकाकरण का तीसरा चरण मार्च की शुरुआत में 10,000 सरकारी और 20,000 से अधिक निजी टीकाकरण केंद्रों में 27 करोड़ लोगों को कवर करने के लिए शुरू हो रहा है।
गौरतलब है कि कोल्ड चेन प्वाइंट वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर कोरोना के टीके संग्रहित किए जाएंगे। वहीं निजी अस्पताल एवं क्लीनिक अपने आस-पास के सार्वजनिक अस्पतालों से खुराक प्राप्त कर सकेंगे। कोरोना टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है, रजिस्ट्रेशन के लिए आधारा, पैन कार्ड, वोटर आईडी समेत 12 दस्तावेजों को वैध माना गया है।

 

 

सोशल मीडिया पर सरकार ने कसा शिकंजा, लागू हुए नये नियम

नयी दिल्ली : सोशल मीडिया की मनमानी पर अब सरकार शिकंजा कसेगी। इसके लिए सरकार ने नियम जारी किये हैं जिसकी घोषणा केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर ने की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया बहुत तेजी से बढ़ रहा है,लेकिन इसे देश में दुरूपयोग की इजाजत नहीं दी जा सकती। नयी निर्देशिका या गाइडलाइंस के दायरे में फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्‍स और नेटफ्लिकस, ऐमजॉन प्राइम, हॉटस्‍टार जैसे ओटीटी प्‍लेटफॉर्म्‍स आएंगे। जावड़ेकर ने पहले कहा था कि इसके संबंध में दिशानिर्देश तैयार किए जा चुके हैं और जल्द ही उन्हें लागू किया जाएगा। रविशंकर प्रसाद ने कहा, “सोशल मीडिया कंपनीज का भारत में कारोबार करने के लिए स्‍वागत है। इसकी हम तारीफ करते हैं। व्‍यापार करें और पैसे कमांए।” उन्‍होंने कहा कि सरकार असहमति के अधिकार का सम्‍मान करती है लेकिन यह बेहद जरूरी है कि यूजर्स को सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाने के लिए फोरम दिया जाए। प्रसाद ने कहा कि हमारे पास कई शिकायतें आईं कि सोशल मीडिया पर मार्फ्ड तस्‍वीरें शेयर की जा रही हैं। आतंकी गतिविधियों के लिए इनका इस्‍तेमाल हो रहा है। प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म्‍स के दुरुपयोग का मसला सिविल सोसायटी से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।उन्होंने कहा फिर ये कानून 3 महीने के अंदर लागू किए जाएंगे जिसमें कंपनियों को एक मुख्य शिकायत अधिकारी नियुक्त करना होगा जो किसी भी गलत खबर के लिए उत्तरदाई होगा और यदि कोई खबर गलत होगी तो 24 घंटे के अंदर उसको हटाएगा।
दो तरह की श्रेणियाँ हैं : सोशल मीडिया इंटरमीडियरी और सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया इंटरमीडियरी। सबको ग्रीवांस रीड्रेसल मैकेनिज्‍म यानी शिकायतों के निपटारे के लिए कार्य प्रणाली बनानी होगी। 24 घंटे में शिकायत दर्ज होगी और 14 दिन में निपटाना होगा।
अगर यूजर्स खासकर महिलाओं के सम्‍मान से खिलवाड़ की शिकायत हुई तो 24 घंटें में कंटेंट हटाना होगा। सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया को चीफ कम्‍प्‍लायंस ऑफिसर रखना होगा जो भारत का निवासी होगा। एक नोडल कॉन्‍टैक्‍ट पर्सन यानी नोडल सम्पर्क अधिकारी रखना होगा जो कानूनी एजेंसियों के चौबीसों घंटे संपर्क में रहेगा। मंथली कम्‍प्‍लायंस रिपोर्ट जारी करनी होगी यानी मासिक रिपोर्ट जारी करनी होगी।
सोशल मीडिया पर कोई खुराफात सबसे पहले किसने की, इसके बारे में सोशल मीडिया कंपनी को बताना पड़ेगा। हर सोशल मीडिया कंपनी का भारत में एक पता होना चाहिए। हर सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म के पास यूजर्स वेरिफिकेशन की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए।
सोशल मीडिया के लिए नियम लागू हैं। सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को तीन महीने का वक्‍त मिलेगा। सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि प्रिंट और टीवी के लोगों को प्रेस काउंसिल और और टीवी के कानूनों का पालन करना होता है लेकिन ओटीटी के लिए कोई कानून नहीं है, जिसको लेकर कई बार सवाल उठे हैं कि ओटीटी को भी निगरानी के दायरे में लाया जाना चाहिए।
ओटीटी और डिजिटल न्‍यूज मीडिया को अपने बारे में विस्‍तृत जानकारी देनी होगी। रजिस्‍ट्रेशन अनिवार्य नहीं है। दोनों को ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्‍टम लागू शिकायत निपटान प्रणाली आरम्भ करनी होगी। अगर गलती पाई गई तो खुद से रेगुलेट करना होगा। ओटीटी प्‍लेटफॉर्म्‍स को सेल्‍फ रेगुलेशन बॉडी बनानी होगी जिसे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या कोई नामी हस्‍ती हेड करेगी। सेंसर बोर्ड की तरह ओटीटी पर भी उम्र के हिसाब से सर्टिफिकेशन की व्‍यवस्‍था हो। एथिक्‍स कोड टीवी, सिनेमा जैसा ही रहेगा। डिजिटल मीडिया पोर्टल्‍स को अफवाह और झूठ फैलाने का कोई अधिकार नहीं है।