Thursday, April 2, 2026
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महिला दिवस पर संघर्षरत महिलाओं को गो एयर ने किया सलाम

कोलकाता : गोएयर ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के योगदान को उल्लेखनीय बनाया और अपने क्षितिज और महिला कर्मचारियों को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए विभागों में सम्मानित किया। इस अवसर पर सोशल मीडिया पर वीडियो भी जारी किया गया। गोएयर ने फ्रंट-डेस्क, एयरपोर्ट, टिकटिंग, कस्टमर केयर, ऑपरेशन, एडमिन, ग्राउंड सर्विसेज, एचआर एट अल सहित विभिन्न विभागों की महिला कर्मचारियों को दिखाया और उनके अपार योगदान के लिए धन्यवाद दिया। “#WomenWhoKeepUsGoing भारतीय विमानन में महिलाओं को पहचानने, बढ़ावा देने और उन्हें मनाने के लिए किया गया है। गोएयर प्रवक्ता ने कहा, ‘नियोक्ता होने के नाते, गोएयर उस महिला शक्ति को सलाम करता है जो अपनी उड़ानों को 29 घरेलू और 10 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों में ले जाती है।

वीडियो महिलाओं को बेकार और योग्य बनाने के लिए दृश्यता बढ़ाने का प्रयास है, और बदले में महिलाओं को उड्डयन उद्योग में शामिल होने की अपील करने के लिए प्रेरित करता है। ” गोएयर ने एक महिला-चालक दल, यानी सभी-महिला कॉकपिट और केबिन क्रू के साथ छह गंतव्यों पर पांच उड़ानें संचालित कीं। इनमें मुंबई-गोवा-मुंबई के बीच G8 371 \ 372, दिल्ली-श्रीनगर के बीच G8 167, मुंबई-जम्मू के बीच G8 289 और दिल्ली-वाराणसी के बीच G8 404 शामिल हैं। क्रू ने टेक-ऑफ के तुरंत बाद इन सभी महिलाओं द्वारा संचालित उड़ानों पर विशेष घोषणा की।

‘यूरोप मैथ ओलंपियाड’ के लिए चुनी गयी भारतीय मूल की 13 साल की छात्रा

लंदन : जॉर्जिया में अगले महीने होने वाले प्रतिष्ठित ‘यूरोपियन गर्ल्स मैथेमैटिकल ओलंपियाड’ (ईजीएमओ) के लिए चुनी गई भारतीय मूल की 13 वर्षीय छात्रा ब्रितानी टीम की अब तक की सबसे कम उम्र की सदस्य है। लंदन में डलविच के एलयंस स्कूल की छात्रा आन्या गोयल ने गणित के सवाल सुलझाने के अपने जुनून को पूरा करने के लिए पिछले साल लागू लॉगडाउन का भरपूर इस्तेमाल किया। मैथ ओलंपियाड के विजेता रह चुके अपने पिता अमित गोयल के मार्गदर्शन से उसने ईजीएमओ के लिए चुनी जाने वाली ब्रितानी टीम का हिस्सा बनने के लिए ‘यूके मैथेमैटिक्स ट्रस्ट’ (यूकेएमटी) द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया। आन्या ने कहा, ‘‘ओलंपियाड के सवाल सुलझाने के लिए रचनात्मक होने और गहराई से सोचने की आवश्यकता होती है। कई बार एक ही सवाल को सुलझाने में कई दिन लग जाते हैं, लेकिन आपको हार नहीं माननी होती और नए विचारों के साथ सवाल सुलझाने होते हैं।’’ यूकेएमटी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए हर साल पूरे ब्रिटेन में माध्यमिक विद्यालयों के छह लाख से अधिक छात्र आवेदन करते हैं, जिनमें से हर साल नवंबर में होने वाले ‘ब्रिटिश मैथेमैटिकल ओलंपियाड’ के लिए शीर्ष 1,000 छात्रों को आमंत्रित किया जाता है। इनमें से ‘ब्रिटिश मैथेमैटिकल ओलंपियाड’ के दूसरे दौर के लिए शीर्ष 100 छात्र चुने जाते हैं। आन्या ने ईजीएमओ में भाग लेने वाली ब्रितानी टीम में चुनी गई शीर्ष चार लड़कियों में स्थान बनाया और इसी के साथ वह इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सबसे कम उम्र की छात्रा बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 15 वर्षीय एक छात्रा के नाम था। आन्या को उसकी आदर्श एवं दुनिया की सर्वश्रेष्ठ महिला गणितज्ञ मानी जानी वाली युहका माचिनो के साथ टीम में चुना गया है।

महामारी काल में बुजुर्गों के उपचार को प्राथमिकता दें निजी अस्पताल : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी चिकित्सा संस्थानों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी बुजुर्ग लोगों को भर्ती करने और उपचार में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर.एस.रेड्डी की पीठ ने अपने चार अगस्त 2020 के आदेश में परिवर्तन करते हुए यह कहा। उस आदेश में शीर्ष न्यायालय ने कोरोना वायरस के जोखिम को देखते हुए बुजुर्ग लोगों को भर्ती एवं उपचार में प्राथमिकता देने का निर्देश केवल सरकारी अस्पतालों को दिया था।
पीठ ने याचिकाकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार की इस दलील पर गौर किया कि ओडिशा और पंजाब के अलावा किसी भी अन्य राज्य ने शीर्ष अदालत के पहले जारी निर्देशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी नहीं दी है। न्यायालय ने बुजुर्ग लोगों को राहत प्रदान करने से संबंधित कुमार के नए सुझावों पर जवाब देने के लिए सभी राज्यों को तीन हफ्ते का समय दिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि शीर्ष न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन के लिए राज्यों को नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी करने की जरूरत है।
कुमार ने याचिका दायर कर न्यायालय से अनुरोध किया था कि महामारी काल में बुजुर्ग लोगों को अधिक देखभाल एवं सुरक्षा की जरूरत है अत: इस संबंध में निर्देश जारी किए जाने चाहिए

 

देश में 100 महिला फिल्म और फिक्शन लेखिकाएं सीखेंगी फिल्म लेखन की तकनीक

ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स ने नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनएफडीसी) से करार किया है। इसके तहत देश में 100 महिला फिल्म और फिक्शन लेखिकाओं को फिल्म लेखन की तकनीक सिखाई जाएगी। नेटफ्लिक्स इंडिया की कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल ने बताया। अभी कम्पनी 18 महिला फिल्म निर्देशकों के साथ काम कर रही है। हम फिल्म सेगमेंट में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ाना चाहते हैं। नयी महिला फिल्म निर्देशकों, राइटर्स व फिल्म क्राफ्ट के तमाम सेगमेंट में कंपनी को महिलाओं की मौजूदगी बढ़ाने को कहा गया है। आने वाले समय में बॉम्बे बेगम, पगलैट और माधुरी दीक्षित की फिल्मों की सीरीज नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो रही हैं, जो वुमेन सेंट्रिक फिल्में हैं और महिला राइटर्स की लिखी कहानियां हैं। अब औरतों की कई तरह की कहानियां होने से फिल्मों को लेकर बहुत संभावना है। कहानियां बहुत मौलिक और मजबूत हैं। नेटफलिक्स स्त्री प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए दुनियाभर में 50 लाख डॉलर खर्च करेगी। यह खर्च सिर्फ नेटफ्लिक्स के लिएफिल्मों पर काम करने वाली मेकर्स, प्रोडयूसर्स या राइटर्स के लिए ही नहीं होगा। कोई भी जो फिल्म इंडस्ट्री के लिए काम कर रही हैं वे इसमें शामिल हो सकती हैं।

सबसे लम्बे समय तक वन डे खेलने वाली विश्व की दूसरी क्रिकेटर बनीं मिताली

नयी दिल्ली : भारतीय महिला वनडे टीम की कप्तान मिताली राज और उपकप्तान हरमनप्रीत कौर ने रविवार को दो रिकॉर्ड बनाए। दक्षिण अफ्रीका की महिला टीम के खिलाफ मैच में उतरने के साथ ही मिताली सबसे लंबे वक्त (21 साल 254 दिन) तक खेलने वाली दुनिया की दूसरी क्रिकेटर बन गई हैं। वहीं, हरमनप्रीत ने 100 वनडे खेलने वाली 5वीं भारतीय बनने का गौरव हासिल किया है। मिताली से आगे सिर्फ सचिन तेंदुलकर हैं, जिनका वनडे करियर 22 साल, 91 दिन का रहा है। मिताली ने श्रीलंका के सनथ जयसूर्या को पीछे छोड़ा है। जयसूर्या का वनडे करियर 21 साल, 184 दिन का रहा।
200+ वनडे खेलने वाली अकेली महिला क्रिकेटर हैं मिताली
मिताली के नाम दुनिया में सबसे ज्यादा 210 वनडे खेलने का रिकॉर्ड भी है। वे 200+ वनडे खेलने वाली अकेली महिला क्रिकेटर हैं। उनके बाद 100+ मैच खेलने वाली भारतीय खिलाड़ियों में झूलन गोस्वामी (183), अंजुम चोपड़ा (127), अमिता शर्मा (116) और हरमनप्रीत (100) हैं। मिताली ने 26 जून 1999 को आयरलैंड के खिलाफ वनडे से डेब्यू किया था। इस मैच में उन्होंने नाबाद 114 रन की पारी खेली थी।
मिताली के नाम वनडे में सबसे ज्यादा रन
मिताली ने अब तक वनडे में 50.64 की औसत से 6938 रन बनाए हैं। वे वनडे में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली महिला क्रिकेटर भी हैं। उन्होंने 7 शतक और 54 फिफ्टी लगाई हैं। वहीं, हरमनप्रीत कौर ने अब तक 34.95 की औसत से 2412 रन बनाए। इस दौरान 3 सेंचुरी और 11 फिफ्टी भी लगाईं। हरमन तीसरी भारतीय टॉप स्कोरर हैं। दूसरे नंबर पर अंजुम हैं। उनके नाम 127 वनडे में 31.38 की औसत से 2856 रन दर्ज हैं।

स्क्रैपिंग पॉलिसी : वाहन कबाड़ में बेचकर नया खरीदने पर कंपनियां देंगी छूट

नयी दिल्ली : यदि आप अपनी पुरानी गाड़ी को बेचकर नया वाहन खरीदने पर विचार कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को कहा कि व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी के तहत पुरानी गाड़ी को कबाड़ में बेचकर नया वाहन खरीदने वालों को कंपनियां 5% की छूट देंगी। नयी वॉलेंट्री व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी की घोषणा केंद्रीय बजट 2021-22 में की गयी है। इस नीति के तहत निजी वाहनों को 20 साल और वाणिज्यिक वाहनों को 15 साल बाद फिटनेस टेस्ट पास करना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी में चार प्रमुख कंपोनेंट हैं। वाहन निर्माता कंपनियों की ओर से छूट के अलावा पॉलिसी में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से ग्रीन टैक्स या अन्य लेवी की वसूली का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ऑटोमेटिड सेंटर्स पर फिटनेस और पॉल्यूशन टेस्ट को अनिवार्य बनाया गया है। यह ऑटोमेटिड सेंटर पूरे देश में स्थापित किए जाएंगे। इस दिशा में काम चल रहा है। ऑटोमेटिड फिटनेस सेंटर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के आधार पर स्थापित किए जाएंगे। स्क्रैपिंग सेंटर्स की स्थापना में केंद्र सरकार प्राइवेट पार्टनर्स और राज्य सरकारों की मदद करेगी।
ऑटोमेटिड टेस्ट पास न करने वाले वाहनों पर लगेगा भारी जुर्माना
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऑटोमेटिड टेस्ट पास ना करने वाले वाहनों को चलाने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही ऐसे वाहनों को जब्त किया जाएगा। गडकरी ने कहा कि यह पॉलिसी ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए वरदान साबित होने वाली है। इससे यह सबसे ज्यादा मुनाफे वाले सेक्टर्स में शामिल हो जाएगा और बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होंगे। कोविड-19 के प्रतिकूल प्रभाव के बीच भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए इस पॉलिसी को एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में 30% का उछाल आएगा
नितिन गडकरी ने कहा कि इस नीति के कारण देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में 30% तक का उछाल आएगा। इंडस्ट्री का टर्नओवर मौजूदा 4-5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 10 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच जाएगा। इस पॉलिसी के कारण भारत आने वाले सालों में ऑटोमोबाइल हब बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इस नीति के कारण देश का निर्यात 1.45 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, एक बार इस नीति के लागू होने के बाद स्क्रैप मैटेरियल जैसे स्टील, प्लास्टिक, रबर, एल्युमिनियम आदि का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल पार्ट बनाने में होगा। इससे कंपनियों की लागत में 30%-40% तक की कमी आएगी।
स्क्रैपिंग नीति से मिलेगा नयी तकनीक को प्रोत्साहन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी से वाहनों के बेहतर माइलेज के साथ नई तकनीक को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ग्रीन फ्यूल और इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे भारत के करीब 8 लाख करोड़ रुपए के भारी भरकम क्रूड इंपोर्ट बिल में कटौती होगी। इस पॉलिसी से गाड़ियों की मांग में बढ़ोतरी होगी जिससे रेवेन्यू भी बढ़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शुरुआत में करीब 1 करोड़ वाहन स्क्रैप में बदले जाएंगे, इसमें करीब 51 लाख लाइट मोटर व्हीकल 20 साल से ज्यादा की उम्र के शामिल होंगे। वहीं 34 लाख लाइट मोटर व्हीकल 15 साल से ज्यादा की उम्र के होंगे। इसके अलावा 15 साल से ज्यादा पुराने 17 लाख मीडियम और हेवी मोटर व्हीकल को स्क्रैप में बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पॉलिसी से आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा मिलेगा।
तैयार किया जा रहा है नीति का फ्रेमवर्क
सड़क परिवहन एवं हाईवे सचिव गिरिधर अरमाने का कहना है कि स्क्रैपिंग पॉलिसी का स्ट्रक्चर और फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। ग्रीन टैक्स को पहले ही नोटिफाई किया जा चुका है। कई राज्य इसे अप्रभावी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम राज्य सरकारों को सलाह देना चाहते हैं कि वे मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाने पर विचार करें। इससे पहले नितिन गडकरी कह चुके हैं कि इस पॉलिसी से 10 हजार करोड़ रुपए का नया निवेश आएगा और 50 हजार नौकरियां पैदा होंगी।

घर के ‘सुख-चैन’ के लिए नाई बन गई वो

आप में से किसी ने महिला को नाई का काम करते नहीं देखा होगा, गांव में तो कभी नहीं। सब मानते हैं कि यह काम केवल पुरुष ही कर सकते हैं, लेकिन सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी प्रखंड के बसौल गांव की सुख चैन देवी ने इस मिथक को तोड़ दिया। लॉकडाउन में जब पति का रोजगार छिन गया तो घर के ‘सुख-चैन’ के लिए यहां की सुख चैन देवी ने खुद कैंची-उस्तरा थाम लिया। घर-घर जाकर वह लोगों के बाल-दाढ़ी काटने लगी। एक हफ्ते में उसने अपने परिवार को संभाल लिया। सुख चैन देवी ने बताया कि अगर वह ऐसा नहीं करती तो उसका पूरा परिवार भूखे मर जाता। चंडीगढ़ में कमाने गए उसके पति का लॉकडाउन में रोजगार छिन गया था। लोगों के आगे हाथ फैलाने के बजाए वह अपना हुनर सामने लायीं।
‘लोग क्या सोचेंगे’, इस बात को मन से निकाला
सुख चैन देवी कहती हैं कि उन्हें पता था कि नाई का काम करते देख लोग क्या कहेंगे। लोक-लाज की बातें सामने आएंगी, लेकिन ‘लोग क्या सोचेंगे’ यही डर महिलाओं को आगे नहीं बढ़ने देता। इससे दो कदम आगे बढ़ेंगे तो चारों तरफ संभावनाएं ही नजर आएंगी। सचमुच ऐसा ही हुआ। सुख चैन देवी रातों-रात मशहूर हो गई। गांव-कस्बे से निकली उसकी कहानी देशभर की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी।
बाल-दाढ़ी बनवाने वालों की कतार लग गयी
लॉकडाउन के समय सुबह में ही सुख चैन देवी गांव घूमने निकल जाती। जब शाम होती तो इनके हाथ में अपनी कमाई के दो सौ से ढाई सौ रुपये होते। इससे पूरा परिवार आराम से खा-पी लेता। संकोच छोड़ कर जब सुख चैन देवी ने इस काम में कदम आगे बढ़ाया तो उनसे बाल-दाढ़ी बनवाने वालों की लाइन लग गयी। गांव में उनकी इज्जत बढ़ी। जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने उनका उत्साह बढ़ाया। मदद भी की। सुखचैन देवी ने बताया कि यह काम करने में उन्हें थोड़ी भी परेशानी नहीं है और न ही कोई शर्म। सरकारी योजना का लाभ मिले तो वह और बड़ी सफलता हासिल करेगी।
सुख चैन देवी की शादी बाजपट्टी के ही पथराही गोट में हुई थी। बीमारी के कारण उसके पति की मौत हो गई थी। इसके कुछ दिनों के बाद ससुराल और मायके की सहमति पर उसकी दूसरी शादी देवर रमेश से कर दी गई। इसके बाद उसका घर-परिवार ठीक से चल रहा था, लेकिन लॉकडाउन के कारण आर्थिक बोझ ने उसे जब परेशानियों में डाल दिया तो उसने नाई बनकर यह साबित कर दिया कि गांव-कस्बों की महिलाओं के बारे में यह धारणा अब बहुत पीछे छूट गई कि वे केवल चूल्हा-चौका तक सीमित हैं और घर चलाना मर्दों की जिम्मेवारी है। उसने दिखा दिया कि महिलाओं की किसी से तुलना नहीं की जा सकती, वे अतुलनीय हैं। थल, जल, नभ सबमें अदम्य साहस के साथ आज अग्रिम पंक्ति में खड़ी है। चाहे गांव हो या शहर, बदलाव हर जगह दिखने लगा है।
(साभार – दैनिक भास्कर)

शिवांगी स्वरूप : प्लेन उड़ाने का सपना देखा था, पूरा भी किया

इतिहास बना देंगी यह पता नहीं था

बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली शिवांगी स्वरूप भारतीय नौसेना में पायलट बनने वाली पहली महिला हैं। भारतीय नौसेना में वैसे तो 400 से अधिक महिला नौसैनिक व अधिकारी हैं, लेकिन सभी प्रशासनिक, अकादमिक, संचार और शैक्षिक सेवाओं में हैं। शिवांगी नौसेना में शामिल होने के बाद पायलट बनने वाली पहली महिला हैं। दिसंबर 2019 में कोच्चि नेवल बेस पर ऑपरेशनल ड्यूटी ज्वॉइन की। फिलहाल ड्रोनियर सर्विलांस एयरक्राफ्ट उड़ाएंगी। इस विमान को कम दूरी के समुद्री मिशन पर भेजा जाता है।
एसएसबी के जरिए हुआ नेवी में चयन
शिवांगी ने वर्ष 2010 में डीएवी पब्लिक स्कूल से सीबीएसई 10वीं की परीक्षा 10 सीजीपीए के साथ पास की थी। साइंस स्ट्रीम से 12वीं करने के बाद इंजीनियरिंग की। एम. टेक में दाखिला भी लिया। फिर SSB की परीक्षा के जरिए नेवी में सब लेफ्टिनेंट के रूप में चयनित हुईं। करीब डेढ़ साल की ट्रेनिंग के बाद उनका चयन नौसेना में पहली महिला पायलट के लिए किया गया।
पायलट तो बनना था, इतिहास बनाना नहीं सोचा था
शिवांगी कहती हैं कि बचपन से प्लेन उड़ाने की इच्छा थी। घर वालों से अक्सर बात होती थी कि मेरी पायलट बनने की तमन्ना है। लेकिन, यह नहीं सोचा था कि ऐसा करने से कोई इतिहास बन जाएगा। वह कहती हैं- “मैं तो मौके की तलाश करते-करते नेवी में आ गई थी। आखिर यहीं मुझे पायलट बनने का मौका मिल गया।” शिवांगी बिहार की लड़कियों के लिए मिसाल हैं, लेकिन वह कहती हैं कि खुद को लड़का-लड़की के अंतर से निकालना जरूरी है। हरेक की अपनी क्षमता है और जो भी अपनी क्षमता को प्रतिभा से निखारते हुए टाइम मैनेजमेंट के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ेगा, उसे मुकाम हासिल होना ही है।
(साभार – दैनिक भास्कर)

 

तीन महिलाएं…तीन क्षेत्र…तीन उड़ान….अशिमा, निधि, शेनिका

किसी भी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी आज सामान्य बात है। लेकिन कोई ऐसा फील्ड हो, जिसमें महिलाएं कुछ ऐसा कर दिखाएं, जो पुरुषों को भी पीछे छोड़ दें, या यों कहें कि वो भीड़ से अलग दिखें तो इसे उनकी अनूठी कामयाबी कहा जाना चाहिए। राजस्थान की ऐसी कई महिलाएं हैं, जिन्होंने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है। महिला दिवस पर ऐसी ही तीन महिलाओं का जिक्र कर रहे हैं, जो अपने हौसलों से प्रेरणा बनी हैं। नयी राह दिखाने वाली साबित हुई हैं। आशिमा ने उस मोटर स्पोर्टस को करियर चुना, जिसमें एक गलती जिंदगी पर भारी पड़ सकती है
राजस्थान ही नहीं देश में मोटर स्पोर्ट्स में लड़कियों की संख्या बहुत कम है लेकिन जयपुर की आशिमा कौशिक ने इस खतरनाक चुनौती को अपना पैशन बनाया और पुरुषों के वर्चस्व वाले मोटर स्पोर्ट्स में कदम रख चैंपियन बनीं। आशिमा इन दिनों टेक्सास में हैं। वह कहती हैं- मुझे बचपन से गाड़ियों का शौक था। जब थोड़ी बड़ी हुई तो मां के साथ घूमने जाते वक्त नजर रखती कि कैसे ड्राइव की जाती है। इसी शौक ने ड्राइविंग सीट पर बैठा दिया। जैसे ही लाइसेंस बना, मैंने तय किया कि जब मैं तेज गाड़ी चला सकती हूं तो फिर रेस में शामिल क्यों नहीं हो सकती। बस यह खेल चुन लिया।
‘एक-एक कर 30 लड़के फंसे गड्‌ढे में, अकेले मैंने कार निकाली’
आशिमा कई रैली और रेस में हिस्सा ले चुकी है। कई में चैंपियन बनीं, लेकिन कई ऐसे पल हैं, जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता। वह बताती हैं कि बीकानेर के करणी सिंह स्टेडियम में अल्टीमेट डेजर्ट ऑफरोड चैंपियनशिप में 30 लड़कों के बीच मैं अकेली लड़की थी। इसके एक राउंड में एक गहरे गड्‌ढे में प्रवेश कराकर कार को बाहर निकाला जाना था। एक-एक कर 29 लड़कों की कारें फंस गयीं। उन्हें क्रेन से बाहर लाया गया। जैसे ही मेरा नंबर आया, स्टेडियम में मौजूद लोगों ने शोर मचा दिया। लोग सीटी बजाने लगे, वे शो कर रहे थे कि जब लड़के नहीं निकाल सके तो तुम क्या कर लोगी। मेरा को-ड्राइवर मेरा भाई सिद्धार्थ था। हमने चुनौती को स्वीकार किया। कार गड्‌ढे में प्रवेश कर चुकी थी, लोगों की जुबान से सामूहिक स्वर निकला, ये भी गयी…। हमने एक-एक कर सभी खिलाड़ियों की गलतियों को बड़े ध्यानपूर्वक नोटिस किया और तय किया कि ये सब गलतियां नहीं करनी हैं। बस अचानक से कार बाहर आ गयी। पूरा स्टेडियम अचानक ऐसे शोर में तब्दील हो गया जैसे सचिन तेंदुलकर ने अंतिम गेंद पर छक्का लगाकर वर्ल्ड कप जीता दिया हो।
आशिमा के को-ड्राइवर या नेविगेटर सिद्धार्थ कौशिक ने बताया कि आशिमा कभी भी सड़क पर तेज ड्राइव नहीं करती लेकिन उसे शुरू से ही स्टंट करने का शौक था। वह मैदान में बड़ी कार लेकर चली जाती और स्टंट करती। मम्मी चौंक जातीं, लेकिन अंतत: उनको आशिमा का यह रूप स्वीकार करना ही पड़ा। आशिमा ने ऑटो क्रॉस, रॉयल राजस्थान रैली, हिमालय पार्ट, डेजर्ट स्टॉर्म जैसी कई चैंपियनशिप में हिस्सेदारी की और अंतिम दौर तक पहुंचीं।
सोलर प्लांट लगाकर 22 साल की लड़की ने खड़ा किया 500 करोड़ का कारोबार
बीकानेर के एक गाँव में सोलर लैंड विकसित कर सोलर एनर्जी प्रोडक्शन का बिजनेस शुरू कर इस स्तर पर पहुँचने वाली राजस्थान की एकमात्र युवती हैं निधि गुप्ता। निधि ने बताया कि उन्होंने जयपुर से ही इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद अपना बिजनेस करने की ठानी। आईएफएस पिता आरपी गुप्ता ने प्रोत्साहित किया और मैंने सोलर प्लांट के फील्ड में उतरने का फैसला किया। मैंने अपनी बचत का पैसा इकट्‌ठा किया और तय किया कि इसी पैसे से मैं अपने व्यवसाय को खड़ा करूंगी। जब व्यक्ति में कुछ करने की हिम्मत हो तो वह सब कुछ कर पाने में सक्षम होता है। मुझे ताकत मिली और मैंने अपने दम पर बाजार का सर्वे शुरू किया। मेरे भाई ने मेरी इस काम में पूरी मदद की। असल में पूरा प्रोजेक्ट बनने के बाद जब बाजार से पहला ऑर्डर मिला तो मुझमें नयी ताकत का संचार हुआ। शुरुआत करने के लिए जब में बीकानेर के गांव पहुंची तो गांव के लोगों ने सोचा 22 साल की लड़की है, क्या कर लेगी। फिर उन्होंने देखा कि प्लांट कमीशन के दौरान मैं आधी रात तक वर्करों से काम कराती रहती, उन्हें गाइड करती तो गांव के लोगों का सपोर्ट मिलने लगा। एक बार सिविल वर्क के दौरान कई लड़के आ गए, बोले- काम रोको। मेरे साथ बदसलूकी तक करने को उतारू हो गए। पर मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैंने तय किया था अपना काम स्थापित करना ही है। और उनके खिलाफ पुलिस में भी गयी, कलेक्टर से भी मिली। खैर शुरुआत 1 लाख रुपए के निवेश से की थी, आज कम्पनी 500 करोड़ के टर्नओवर तक पहुंच गई है। कम्पनी ने 250 किलोवाट से शुरुआत की थी जो 600 मेगावाट बिजली उत्पादन तक पहुंच गई है।सिरोही की बेटी, जो अमेरिका आर्मी में कैप्टन रैंक पर पहुंचने वाली पहली भारतीय युवती
अमेरिका की आर्मी में कैप्टन रैंक तक पहुंचने वाली पहली भारतीय युवती हैं सिरोही की डॉ. शेनिका शाह। जिस जगह पर शेनिका पहुँचीं हैं, उसे देखकर किसी भी भारतीय को गर्व हो सकता है। भारतीय परिवार की इस बेटी ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जिसके कारण आज अमेरिका की आर्मी उसे सैल्यूट करती है। यही भारत की बेटी की ताकत है जो हमारे देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बनी है। कैप्टन डॉ. शेनिका शाह के पिता प्रीतम शाह मूल रूप से राजस्थान में सिरोही में पिंडवाड़ा निवासी हैं और माँ गुजरात के महुधा की। अपने काम के सिलसिले में अमेरिका के न्यूयॉर्क गए प्रीतम शाह की बेटी अमेरिका की आर्मी में कैप्टन बन गई। शेनिका डॉक्टर हैं। यह बेहद असाधारण हैं अमेरीकी आर्मी के लिए।
सेना में डॉक्टर की भूमिका
असल में शेनिका न्यूयॉर्क सिटी के हेरिकस स्कूल से पढ़ीं। इसके बाद साइंस और ऑस्टियोपैथी मेडिसिन में एमडी के लिए न्यूयॉर्क इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दाखिला ले लिया। बतौर शेनिका- मैंने स्नातक की डिग्री के दौरान ही अमेरीकी सेना में निकली सेकंड लैफ्टीनेंट की पोस्ट के लिए आवेदन कर दिया। मेरा सलेक्शन हो गया। मुझे इस पद पर नियुक्ति मिल गई। अब जैसे ही यानी 2020 में मुझे डॉक्टरी की स्नातक उपाधि मिली, मुझे प्रमोट कर कैप्टन बना दिया गया। मैंने आर्मी हॉस्पिटल में एक डॉक्टर के रूप में काम करना शुरू कर दिया है। मैं भारत ही नहीं बल्कि दुनिया की महिलाओं से कहना चाहती हूं कि वह खुद को कमजोर न समझें। क्योंकि, इंसान जो भी कर सकता है वह सब वह कर सकती हैं। बस जरूरत है हौसले की। हिम्मत की।

(साभार – दैनिक भास्कर)

बिहार का घरेलू नाट्य है डोमकच, सिर्फ़ महिलाएं ही हो सकती हैं शामिल

प्राचीन काल से ही लोकनाट्य, कला व संस्कृति से मानव का आत्मीय जुड़ाव रहा है। हर प्रदेश की अपनी अलग भाषा-संस्कृति रही है, जो उस ख़ास आंचलिक या ग्रामीण क्षेत्र की समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। तभी तो राज्य में भिन्न-भिन्न कलारूपों के कारण इसकी विशेषता राष्ट्रीय फलक पर अपनी अमिट पहचान बनाती है। बिहार के मिथिलांचल व पूर्वांचल के अलावा भी भोजपुर क्षेत्रों में प्राकृतिक मौसम, त्यौहार, शादी-विवाह, पर अलग-अलग प्रकार के गीत गाए जाते रहे हैं। इनमें कुछ गीत व नाट्य महिला प्रधान होते हैं। इनके सभी पात्र महिलाओं द्वारा ही रचे जाते हैं, और उसका अभिनय भी महिलाएं ही करती हैं। ‘डोमकच’ बिहार का एक ऐसा ही घरेलू लोकनाट्य है, जो विशेषकर घर-आंगन में की जाने वाली प्रस्तुति है। इस नाट्य को अमूमन अब भी मिथिलांचल के गांवों-क़स्बों में किया जाता है। जब लड़के के विवाह के समय आमतौर पर सभी पुरुष बारात लेकर दुल्हन के घर चले जाते हैं, तब घर की महिलाएं ख़ुद को एक रात के लिए पितृसत्ता द्वारा ओढ़ाए गए मर्यादा के सभी आवरणों से मुक्त करती हैं। घर पर छूट गई महिलाएं एक रात के लिए रात्रि जागरण करती है। इनमें वे कई तरह के स्वांग, लोकगीतों के बहाने अपनी अव्याख्यायित इच्छाओं को स्वर देती हैं। इनमें से कोई एक या दो महिलाएं पुरुष का वेश धारण करती हैं। पुरुष-वेश धारण करने वाली महिलाओं में ज़्यादातर लड़के (दूल्हा) की बहन या बुआ (फुआ) होती हैं। वो अपने घर के बड़े-बुज़ुर्गों का शर्ट, धोती-कुर्ता, गमछा, बनावटी मूंछ और लकड़ी की लाठी भी साथ रखती हैं। महिलाएं पहले अपने घर फिर उसके बाद पड़ोस के घर जाकर अन्य सभी महिलाओं को छेड़ती हैं। इनके गीत और भंगिमाएं बहुरंगी होते हैं। डोमकच का ख़ास तौर पर महिलाओं को बेसब्री से इंतज़ार रहता है। जब वे पारंपरिक पितृसत्ता द्वारा ओढ़ाई गई मर्यादा से मुक्त होकर लोकनाट्य रग में स्वच्छंद होकर सांस लेती हैं। डोमकच सामान्यतः अन्य नृत्यों से अलग महिला प्रधान होते हुए भी हास्य-व्यंग्य व छींटाकशी वाले गीतों से भरा पड़ा है। लेकिन इसकी लोकप्रियता इतनी है कि यह पड़ोसी राज्यों झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित नेपाल के सीमांचल तराई इलाक़ों में थोड़ी-थोड़ी भिन्नता के साथ विवाह के अवसर पर ही वर पक्ष के घर की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। डोमकच को एक बार फिर से संवारने की आवश्यकता है, ताकि इस जैसे हमारे अन्य आंचलिक और क्षेत्रीय लोकनाट्य दुनिया भर के रंगकर्मियों और साहित्यकर्मियों के लिए शोध का विषय बनें तथा लोक-आकर्षण का मुख्य केंद्र भी हों।
(साभार – दैनिक भास्कर)