Friday, April 10, 2026
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पूर्वांचल की संस्कृति का अंग है भखरा सिन्दूर…

हिन्दू धर्म में सिंदूर लगाने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। रामायण और महाभारत में भी इसका जिक्र किया गया है। सिंदूर कई रंग के होते हैं। लाल, नारंगी, गुलाबी व कत्थई, जिनमें नारंगी और गुलाबी रंग के सिंदूर को सबसे शुभ माना जाता है। क्या है इसके पीछे की वजह, बता रही हैं जानी-मानी ज्योतिषाचार्य आरती दहिया…
क्यों अहम है भखरा सिंदूर?
जहां ज्यादातर भारतीय शादियों में सिंदूर लाल रंग का होता है, वहीं बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में सिंदूरदान के लिए नारंगी और गुलाबी रंग के सिंदूर (भखरा सिंदूर) का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कुछ खास मौकों पर और शुभ कार्यों में भी इस रंग के सिंदूर को विशेष महत्व दिया जाता है। महिलाएं न केवल खुद के लिए भखरा सिंदूर का इस्तेमाल करती हैं, बल्कि देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है।
पौराणिक कथाओं में भी है नारंगी सिंदूर का जिक्र
कथाओं के अनुसार जब हनुमान जी को पता चला कि श्री राम सीता द्वारा सिंदूर लगाए जाने से खुश होते हैं, तो उन्होंने अपना सारा शरीर ही नारंगी सिंदूर से रंग लिया। इसी तरह सिंदूर से रंगकर वे श्री राम की सभा में उनके प्रति अपना समर्पण दिखाने के लिए पहुंचे थे। सिंदूरदान के समय इस रंग के सिंदूर का प्रयोग पति-पत्नी में एक-दूसरे के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
कैसे बनता है ये सिंदूर?
सुहाग के लिहाज से लाल सिंदूर का भी उतना ही महत्व है जितना नारंगी और गुलाबी सिंदूर का। बड़ा अंतर ये है कि नारंगी सिंदूर प्राकृतिक व शुद्ध होता है जबकि लाल सिंदूर में केमिकल युक्त रंगों के मिलावट की गुंजाइश ज्यादा होती है। नारंगी और गुलाबी रंग का सिंदूर प्राकृतिक तरीके से बनाया जाता है। जब इसके फल सूख जाते हैं, तो उसके बीज को पीसकर यह सिंदूर तैयार किया जाता है। इसीलिए यह बिल्कुल सुरक्षित है, इससे बाल या त्वचा को किसी प्रकार का कोई भी नुकसान नहीं होता है।
इस रंग के सिंदूर से क्यों होती हैं शादियां?
डॉ. दहिया बताती हैं कि इसके पीछे का तर्क बेहद अनूठा है। दरअसल शादियां देर रात शुरू होती हैं और खत्म होते-होते पौ फटने को होता है। सिंदूरदान का समय आते-आते सुबह होने वाली होती है, इसलिए इस सिंदूर की तुलना सूर्योदय के समय होने वाली उस लालिमा से की जाती है जो हल्के नारंगी रंग की दिखाई पड़ती है। उम्मीद की जाती है कि जिस तरह सूरज की किरणें हर दिन लोगों के जीवन में एक नई सुबह, दिव्य ऊर्जा और खुशहाली लेकर आती है, उसी तरह ये सिंदूर दुल्हन की जिंदगी में नया सवेरा लेकर आए। रात से लेकर सुबह तक होने वाली रस्मों के पीछे यही मान्यता होती है कि परिवार के कुटुंब के साथ ही चांद, तारे और सूर्य सभी विवाह के साक्षी बन सकें।
(साभार – दैनिक भास्कर)

शादी में वर-वधू को दीजिए ये 5 वित्तीय उपहार

शादी-विवाह के अवसर पर अमूमन नगद या वस्तु उपहार स्वरूप दूल्हे या दुल्हन को दिया जाता है। पर बदलती ज़रूरतों के चलते इन्हें संभालना दोनों के लिए मुश्किल हो सकता है ख़ासतौर पर तब जब जोड़े को किसी एक शहर या राज्य से दूसरे राज्य या शहर जाना पड़े। उपहार ऐसा होना चाहिए जो नए जीवन की शुरुआत में सहायक तो हो ही साथ ही भविष्य को सुरक्षित रखने में भी उनकी मदद कर सके।

गिफ्ट कार्ड

सभी बैंक विभिन्न मूल्यों के गिफ्ट कार्ड जारी करते हैं। उपहार में नगद राशि के बजाए इन कार्ड को दिया जा सकता है, ताकि उससे मनपसंद और ज़रूरत का सामान ख़रीद सकें। इसके अलावा प्री पेड कार्ड भी उपहार में दे सकते हैं।

इंश्योरेंस प्लान

विवाह के साथ एक नए पारिवारिक जीवन की शुरुआत होती है और इस अवसर पर बीमा भविष्य सुरक्षा की दृष्टि से एक बेहतर उपहार हो सकता है। अपनी सुविधा के अनुसार सिंगल प्रीमियम पॉलिसी, लाइफ इंश्योरेंस प्लान या कोई अन्य प्लान उनकी ज़रूरत के हिसाब से दे सकते हैं। सिंगल प्रीमियम प्लान में पूरी प्रीमियम की राशि एक मुश्त दे सकते हैं। वहीं अन्य किसी इंश्योरेंस प्लान जैसे मेडिकल या लाइफ इंश्योरेंस आदि में एक साल का प्रीमियम स्वयं भर सकते हैं। मेडिकल इंश्योरेंस में मैटरनिटी बेनिफिट वाला प्लान उनके काफ़ी काम का हो सकता है। हालांकि इन प्लान के बारे में एक बार दूल्हा-दुल्हन से चर्चा कर सकते हैं। इंश्योरेंस पॉलिसी ख़रीदने के लिए आधारकार्ड और फोटो की आवश्यकता होगी।

बैंक एफ डी

बैंक में वर वधू के साथ चर्चा और सहयोग से एकमुश्त राशि का तीन वर्ष या जैसे चाहें फिक्स डिपॉज़िट कर उपहार के तौर पर दे सकते हैं। उनके भविष्य में पड़ने वाली ज़रूरत के लिए यह सबसे अच्छा उपहार माना जा सकता है।

शेयर का उपहार

किसी ऐसी कंपनी के शेयर ले सकते हैं, जो लंबे समय में बेहतर मुनाफ़ा दें। इसके लिए शेयर ख़रीदकर उसे उनके डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर कर सकते हैं। इसके लिए डिलीवरी इंस्ट्रक्शन स्लिप भरना होगा। चाहें तो गिफ्ट डीड रजिस्टर करा सकते हैं। ऑनलाइन शेयर ट्रांसफर करने की प्रक्रिया बहुत आसान है। गिफ्ट भेजने वाले को गिफ्ट प्राप्त करने वाले का मोबाइल नंबर देना होगा और डीमैट खाते की जानकारी भरनी होगी।

ब्लू चिप स्टॉक…

ब्लू चिप स्टॉक कई बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के शेयर होते हैं। यह लंबे समय के निवेश के लिए बेहतर है। शेयर की क़ीमत ज़्यादा होने के कारण शेयर की क़ीमत बढ़ती है, तो फ़ायदा भी ज़्यादा होता है, जो लगाई गई रकम का कई गुना होता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड

अगर किसी को सोना गिफ्ट कर रहे हैं, तो वह सिर्फ़ लॉकर में रखा रहेगा या कम ही पहना जाएगा। ऐसे में यदि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड देंगें, तो ये 2.5 फीसदी की दर से वार्षिक ब्याज भी देगा। इन्हें बैंक, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, पोस्ट ऑफिस और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज से भी ख़रीद सकते हैं। ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं या आरबीआई की वेबसाइट से केवायसी फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं या इसे अधिकृत शाखाओं से ख़रीद सकते हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर)

नौकरी बदलने पर खुद ही ट्रांसफर हो जाएगा पीएफ खाता, सेंट्रलाइज आई टी सिस्टम को मंजूरी

नयी दिल्ली : नौकरी बदलने के बाद आपका पीएफ खाता खुद ब खुद नए अकाउंट में ट्रांसफर या मर्ज हो जाएगा। दिल्ली में गत शनिवार को ईपीएफओ बोर्ड की बैठक में पीएफ अकाउंट के सेंट्रलाइज आईटी सिस्टम को मंजूरी दी गई। अभी तक अकाउंट ट्रांसफर कराने का यह काम खुद करना होता है। इसके लिए पुरानी और नई कंपनी में कुछ कागजी औपचारिकताएं होती हैं जिन्हें पूरा करना होता है। इन कागजी कार्यवाही के चलते कई लोग पुरानी कंपनी में PF का पैसा छोड़ देते हैं।

पीएफ पर ब्याज को लेकर कोई निर्णय नहीं
लोगों को उम्मीद थी कि इसमें एम्प्लॉई पेंशन स्कीम (ईपीएस) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन और पीएफ पर मिलने वाले ब्याज पर फैसला हो सकता है। लेकिन इस मीटिंग में इसको लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया। अभी पीएफ पर 8.5% सालाना ब्याज दिया जा रहा है।
ईपीएफओ की बोर्ड मीटिंग में कर्मचारियों के कुल सालाना जमा के 5% तक को बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्टों (इनविट्स) सहित वैकल्पिक निवेशों में डालने को मंजूरी दे दी है। सरकार कर्मचारियों के जमा पर ज्यादा रिटर्न कमाना चाहती है ताकि उन्हें ज्यादा ब्याज दिया जा सके।
पीएफ पर ब्याज के कम होने की उम्मीद नहीं
पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट और ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के संस्थापक व सीईओ पंकज मठपाल कहते हैं कि सरकार इस समय कर्मचारियों के पैसों को ऐसी जगह निवेश करने के साधन ढूंढ रही है जहां से ज्यादा रिटर्न मिल सके। इसके अलावा 2022 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी है। इसके चलते 2021-22 के लिए PF ब्याज दर में कटौती करके सरकार 6 करोड़ पीएफ खाताधारक को नाराज नहीं करना चाहेगी।

एयरटेल के प्रीपेड प्लान हुए महँगे, कीमतें 20-25 प्रतिशत बढ़ीं

नयी दिल्ली : दूरसंचार परिचालक भारती एयरटेल ने विभिन्न प्रीपेड पेशकश के लिए टैरिफ में 20-25 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा की, जिसमें टैरिफ वॉयस प्लान, असीमित वॉयस बंडल और डेटा टॉप अप शामिल हैं।
शुरुआती स्तर के वॉयस प्लान में लगभग 25 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, जबकि अनलिमिटेड वॉयस बंडल के ज्यादातर मामलों में बढ़ोतरी लगभग 20 फीसदी है।
कंपनी ने कहा कि उसने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि मोबाइल प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) 200 रुपये और आखिरकार 300 रुपये होना चाहिए, ताकि पूंजी पर उचित प्रतिफल मिल सके। एयरटेल ने एक बयान में कहा, ‘‘हम यह भी मानते हैं कि एआरपीयू के इस स्तर से नेटवर्क और स्पेक्ट्रम में जरूरी पर्याप्त निवेश किया जा सकेगा। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे एयरटेल को भारत में 5जी लागू करने के लिए मदद मिलेगी।’’
नए टैरिफ 26 नवंबर 2021 से लागू होंगे। शुरुआती वायस प्लान का टैरिफ 28 दिनों की वैधता के साथ मौजूदा 79 रुपये की जगह अब 99 रुपये होगा। इसमें 50 प्रतिशत अधिक टॉकटाइम (99 रुपये), 200 एमबी डेटा और एक पैसा प्रति सेंकेंड का वॉयस टैरिफ जैसे लाभ शामिल हैं।

ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वीर चक्र से सम्मानित

नयी दिल्ली : वायुसेना के ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान को उनके अदम्य शौर्य और साहस के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वीर चक्र से सम्मानित किया। अभिनंदन ने 2019 में पाकिस्तान के साथ हवाई संघर्ष के दौरान दुश्मन के एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था और उन्हें उस देश में तीन दिन तक बंधक बनाकर रखा गया था।
पुरस्कार के साथ दिए गए प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि वायुसेना के लड़ाकू पायलट को हवाई संघर्ष के दौरान “कर्तव्य की असाधारण भावना” प्रदर्शित करने के लिए भारत के तीसरे सबसे बड़े युद्धकालीन वीरता पदक से सम्मानित किया गया है।


राष्ट्रपति भवन में आयोजित पुरस्कार समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। इस अवसर पर कई अन्य सैन्य अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। इस महीने की शुरुआत में, वायुसेना ने वर्धमान की पदोन्नति ग्रुप कैप्टन के रूप में की थी। पाकिस्तान के साथ हुए हवाई संघर्ष के दौरान उनकी रैंक विंग कमांडर की थी।
राष्ट्रपति भवन ने ट्वीट किया, “राष्ट्रपति कोविंद ने विंग कमांडर (अब ग्रुप कैप्टन) वर्धमान अभिनंदन को वीर चक्र प्रदान किया। उन्होंने अदम्य शौर्य और साहस दिखाया, व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह न करते हुए शत्रु के सामने वीरता प्रदर्शित की और कर्तव्य की असाधारण भावना का प्रदर्शन किया।”अभिनंदन ने अपने मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमान के गिरने से पहले 27 फरवरी, 2019 को पाकिस्तान के एक एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था। भारत द्वारा बालाकोट में आतंकी ठिकाने पर किए गए हवाई हमले के एक दिन बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की कोशिश की थी। सरकार ने वर्धमान को वीर चक्र प्रदान करने के निर्णय की घोषणा 2019 में की थी।

रिजर्व बैंक की सिफारिशों से डिजिटल ऋण क्षेत्र की वृद्धि को मिलेगा प्रोत्साहन : विशेषज्ञ

मुम्बई : डिजिटल ऋण (ऑनलाइन मंचों और मोबाइल ऐप सहित) पर भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यसमूह की सिफारिशों से इस क्षेत्र की क्रमिक वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा। उद्योग विशेषज्ञों ने यह राय जताई है।
रिजर्व बैंक के बनाए गए कार्यसमूह ने अपनी एक व्यापक रिपोर्ट में कई सिफारिशें की हैं। इसमें गैरकानूनी डिजिटल ऋण गतिविधियों पर अंकुश के लिए एक अलग कानून, डिजिटल ऋण देने वाले ऐप का नोडल एजेंसी से सत्यापन और एक स्व-नियामक संगठन (एसआरओ) की स्थापना का सुझाव शामिल है।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा है कि यह प्रस्ताव काफी हद तक रचनात्मक और अपेक्षा के अनुरूप है। उसके बयान में कहा गया है कि नियमनों की शुरुआत डिजी-ऋण की वृद्धि दर को कम कर सकती है। चीन और भारत (पी2पी) जैसे देशों में छोटे से समय में इसमें काफी तेज वृद्धि देखी गई है।
इस नोट में कहा गया है कि इन नियमों से हालांकि दीर्घावधि में सुचारू तरीक से वृद्धि देखने को मिलेगी। एंड्रोमेडा और अपनापैसा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वी स्वामीनाथन ने कहा कि डिजिटल ऋण के विस्तार की गति को देखते हुए उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण अब अधिकारियों के साथ उद्योग के खिलाड़ियों के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के कार्यसमूह ने गैरकानूनी डिजिटल ऋण गतिविधियों को रोकने के लिए अलग कानून और डिजिटल ऋण देने वाले पारिस्थितिकी तंत्र में प्रतिभागियों के लिए स्व नियामक संगठन का जो सुझाव दिया है, वह पूरी तरह से उचित प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उपभोक्ताओं का डिजिटल ऋण देने वाली कंपनियों पर भरोसा कायम रहे। कार्यसमूह ने इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।’’ इन सिफारिशों का स्वागत करते हुए फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (फेस) ने कहा कि उद्योग की संरचना और फिनटेक सदस्यों और ग्राहकों के लिए नियम निर्धारित करने के लिए एसआरओ समय की मांग है।
फेस ने बयान में कहा, ‘‘हम डिजिटल ऋण देने वाले मंचों के लिए नैतिक व्यवहार और आचार-संहिता के उच्च मानकों को लाने के लिए रिजर्व बैंक के कदम का स्वागत करते हैं।’’इंडिया लेंड्स के संस्थापक और सीईओ और डिजिटल लेंडिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (डीएलएआई) के संस्थापक सदस्य गौरव चोपड़ा का मानना ​​है कि ऐप पर उपयोगकर्ता द्वारा की गई प्रत्येक कार्रवाई के लिए ‘ऑडिटेबल लॉग’ जैसी सिफारिशें भारत के डिजिटल ऋण उद्योग के लिए पासा पलटने वाली साबित होगी।
रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए साइंजी के सह-संस्थापक और सीईओ अंकित राता ने कहा कि यदि सिफारिशें स्वीकार हो जाती हैं, तो ये न केवल उपभोक्ताओं के संरक्षण में मददगार होंगी, बल्कि धोखाधड़ी वाले लेनदेन पर अंकुश लगाते हुए डेटा गोपनीयता के उल्लंघन को भी रोकेंगी।

 

एसबीआई ने अब तक नहीं लौटाए जन-धन खाताधारकों से वसूले गए 164 करोड़ रुपये : रिपोर्ट

नयी दिल्ली : भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अप्रैल, 2017 से लेकर दिसंबर, 2019 के दौरान प्रधानमंत्री जन-धन योजना के खाताधारकों से डिजिटल भुगतान के एवज में वसूले गए 164 करोड़ रुपये के अनुचित शुल्क को अभी तक लौटाया नहीं है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-मुंबई की तरफ से जन-धन खाता योजना पर तैयार एक रिपोर्ट के मुताबिक इस शुल्क राशि को वापस लौटाने का सरकार से निर्देश मिलने के बाद भी अभी तक सिर्फ 90 करोड़ रुपये ही खाताधारकों को लौटाए गए हैं। अभी 164 करोड़ रुपये की राशि लौटाई जानी बाकी है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, एसबीआई ने अप्रैल, 2017 से लेकर सितंबर, 2020 के दौरान जन-धन योजना के तहत खोले गए साधारण बचत खातों से यूपीआई एवं रुपे लेनदेन के एवज में कुल 254 करोड़ रुपये से अधिक शुल्क वसूला था। इसमें प्रति लेनदेन बैंक ने खाताधारकों से 17.70 रुपये का शुल्क लिया था। इस बारे में स्पष्टीकरण के लिए भेजे गए सवालों का देश के सबसे बड़े बैंक ने कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि, यह तथ्य है कि किसी भी दूसरे बैंक के उलट एसबीआई ने जन-धन खाताधारकों द्वारा डिजिटल लेनदेन करने पर शुल्क वसूलना शुरू कर दिया था। एक महीने में चार से अधिक निकासी करने पर बैंक 17.70 रुपये प्रति लेनदेन का शुल्क ले रहा था। एसबीआई के इस कदम ने सरकार के आह्वान पर डिजिटल लेनदेन करने वाले जन-धन खाताधारकों पर प्रतिकूल असर डाला। इस रिपोर्ट के मुताबिक, एसबीआई के इस रवैये की अगस्त, 2020 में वित्त मंत्रालय से शिकायत की गई थी जिसने फौरन कदम उठाया।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 30 अगस्त, 2020 को बैंकों के लिए यह परामर्श जारी किया कि एक जनवरी, 2020 से खाताधारकों से लिए गए शुल्क को वापस कर दिया जाए। इसके अलावा भविष्य में इस तरह का कोई शुल्क नहीं वसूलने को भी कहा गया।
इस निर्देश के बाद एसबीआई ने 17 फरवरी, 2021 को जन-धन खाताधारकों से डिजिटल लेनदेन के एवज में लिए गए शुल्क को लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। रिपोर्ट तैयार करने वाले सांख्यिकी प्रोफेसर आशीष दास कहते हैं कि अब भी इन खाताधारकों के 164 करोड़ रुपये लौटाए जाने बाकी हैं।

स्वच्छ सर्वेक्षण : इंदौर लगातार पांचवी बार सबसे स्वच्छ शहर घोषित छत्तीसगढ़ सबसे स्वच्छ राज्य

नयी दिल्ली : केंद्र सरकार के वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर को लगातार पांचवीं बार सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया जबकि छत्तीसगढ़ ने सबसे स्वच्छ राज्य का स्थान बरकरार रखा । वार्षिक स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार 2021 के परिणामों की घोषणा शनिवार को की गई । स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार 2021 में सबसे स्वच्छ शहरों में दूसरा स्थान सूरत को और तीसरा स्थान विजयवाड़ा को प्राप्त हुआ।
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा घोषित सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ को भारत का सबसे स्वच्छ राज्य घोषित किया गया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को सर्वेक्षण में ‘‘स्वच्छ गंगा शहर’’ की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। इस श्रेणी में बिहार के मुंगेर को दूसरा और पटना को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में इंदौर और सूरत ने अपना स्थान बरकरार रखा हालांकि नवी मुम्बई स्वच्छ शहर की श्रेणी में तीसरे स्थान से चौथे स्थान पर आ गई । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गत शनिवार को विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये । इस अवसर पर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी एवं अन्य उपस्थित थे । इस अवसर पर राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि 35 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तथा शहरी क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त हुए हैं।
कोविंद ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन की सबसे बड़ी सफलता देश की सोच में बदलाव आना है जहां अब घर के छोटे बच्चे भी बड़ों को गंदगी फैलाने से रोकते और टोकते हैं ।
आवास शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ सर्वेक्षण में 28 दिनों में 4,320 शहरों में 4.2 करोड़ लोगों की राय ली गई ।
सर्वेक्षण में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश को देश में स्वच्छ राज्यों में दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त हुआ जहां 100 से अधिक शहरी स्थानीय निकाय हैं । 100 से कम शहरी स्थानीय निकाय वाले राज्यों की श्रेणी में झारखंड को पहला स्थान मिला और इसके बाद हरियाणा और गोवा को स्थान प्राप्त हुआ । एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में शीर्ष 10 स्वच्छ शहरों में इंदौर, सूरत, विजयवाड़ा, नवी मुम्बई, नयी दिल्ली, अंबिकापुर, तिरूपति, पुणे, नोएडा और उज्जैन शामिल हैं । इस श्रेणी में 25 शहरों की सूची में लखनऊ को निचला स्थान प्राप्त हुआ ।
मंत्रालय के अनुसार, एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में महाराष्ट्र का विटा शहर को प्रथम स्थान मिला और इसके बाद लोनावाला और ससवाड शहर को स्थान प्राप्त हुआ । इसी प्रकार से, 1-3 लाख आबादी वाले छोटे स्वच्छ शहरों की श्रेणी में नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद को प्रथम स्थान मिला । नागरिकों की राय के आधार पर होसंगाबाद तेजी से उभरते छोटे शहर और तिरूपति को श्रेष्ठ छोटे शहर के रूप में सामने आया ।
वहीं, 3-10 लाख आबादी की श्रेणी में नोएड देश में ‘स्वच्छ मध्यम शहर’ के रूप सामने आया जबकि नवी मुम्बई ने ‘सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज’ पुरस्कार प्राप्त किया । छावनी बोर्ड की श्रेणी में अहमदाबाद को सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला । इस श्रेणी में अहमदाबाद के बाद मेरठ और दिल्ली को स्थान प्राप्त हुआ ।

करतारपुर कॉरिडोर खुलने से 73 साल बाद मिले दो दोस्त

1947 के बंटवारे ने किया था अलग

इस्लामाबाद : करतारपुर कॉरिडोर के खुलने से बंटवारे से अलग हुए दो दोस्तों की मुलाकात हो गई। भारत के सरदार गोपाल सिंह अपने बचपन के दोस्त अब 91 साल के मोहम्मद बशीर से 1947 में अलग हो गए थे। इतने लंबे अरसे बाद एक दूसरे को देख दोनों की आंखें भर आई और उन्होंने एक दूसरे को गले लगा लिया। इस समय सरदार गोपाल सिंह की उम्र 94 साल जबकि मोहम्मद बशीर 91 साल के हो चुके हैं।

भारत से दर्शन करने गए थे सरदार गोपाल सिंह
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, करतारपुर कॉरिडोर खुलने से सरदार गोपाल सिंह गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन के लिए पाकिस्तान आए हुए थे। पाकिस्तान के नरोवाल के रहने वाले मोहम्मद बशीर भी गुरुद्वारा पहुचे हुए थे। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे को देखा तो उन्हें चेहरा जाना पहचाना लगा। थोड़ी बहुत पूछताछ के बाद दोनों एक दूसरे को पहचान गए।

मौजूद लोगों की आँखें भर आई
यह मौका इतना भावुक था कि वहां मौके पर मौजूद भारतीय तीर्थयात्री और पाकिस्तानी नागरिकों के आंखें भर आई। सभी लोगों ने विभाजन के दौरान अलग हुए इन दो दोस्तों की मुलाकात पर खुशी भी जताई। भारत, पाकिस्तान और दुनिया के दूसरे देशों से पहुंचे तीर्थयात्रियों ने इन दोनों दोस्तों को बधाईयां दी। दोनों पुराने दोस्तों ने अपने बचपन और जवानी के किस्से भी सुनाए।
बंटवारे से पहले साथ में गुरुद्वारा जाते थे दोनों दोस्त
गोपाल सिंह ने कहा कि पाकिस्तान बनने के दौरान दोनों नौजवान थे। बशीर ने कहा कि बंटवारे से पहले भी दोनों दोस्त बाबा गुरु नानक के गुरुद्वारे में जाया करते थे। इन दोनों दोस्तों ने दोपहर का भोजन एक साथ ही किया और चाय पी। गोपाल सिंह ने करतारपुर कॉरिडोर के प्रोजेक्ट पर खुशी जाहिर की और इसके लिए दोनों देशों की सरकारों को धन्यवाद दिया।

माया सभ्यता में 4000 साल पहले कहां से आता था नमक? पानी के नीच मिली ‘रसोई’

बर्तनों से खुलेगा रहस्य
लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी में माया पुरातत्वविद हीथर मैककिलोप और उनकी टीम ने खुदाई में ‘सॉल्ट किचन’ की खोज की है, जहां मिट्टी के बर्तनों में नमकीन पानी को उबाला जाता था। पानी के नीचे इस खोज से पता चला है कि माया सभ्यता के ‘सॉल्ट वर्कर्स’ ने उस दौर में शहरों के भीतर नमक की आपूर्ति कैसे की। खोज में उन्हें सैकड़ों लकड़ी के नमूने, मिट्टी के बर्तनों के ढेर और छप्पर के घर मिले हैं।
ढेर सारे बर्तनों से भरी पुरातत्वविद लैब
एलएसयू डिपार्टमेंट ऑफ जियोग्राफी एंड एंथ्रोपोलॉजी में थॉमस एंड लिलियन लैंड्रम एलुमनी प्रोफेसर मैककिलोप ने कहा कि पुरातत्वविद लैब ढेर सारे बर्तनों से भरी हुई है। लेकिन वे लकड़ियों को गीला रख रहे हैं ताकि वे सूखकर खराब न हों। उन्होंने कहा कि मैंने Ek Way Nal की प्रत्येक इमारत से प्राप्त लकड़ी के नमूनों को रेडियोकार्बन डेटिंग के लिए भेजने का फैसला किया है। ताकि यह पता किया जा सके कि क्या लकड़ियां और समुद्र तल पर पाई गईं कलाकृतियां और इमारतें एक ही समय की हैं।
900 ईस्वी में ही खाली कर दिए गए थे शहर
मैककिलोप ने एक भवन निर्माण की भी खोज की है जो माया सभ्यता के चरम पर लेट क्लासिक में शुरू हुआ और मध्य टर्मिनल क्लासिक तक चलता रहा, जब माया शाही नेताओं की शक्ति घट रही थी। इन शहरों को 900 ईस्वी में खाली छोड़ दिया गया था। खोजकर्ताओं ने सॉल्ट किचन और कम से कम एक निवास के साथ तीन भाग के भवन निर्माण की सूचना दी है।