Thursday, April 9, 2026
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ऑस्‍ट्रेलिया में मिली ‘हाथों से चलने वाली’ दुर्लभ मछली, गुलाबी रंग देख वैज्ञानिक हैरान

तस्‍मानिया । ऑस्‍ट्रेलिया में तस्‍मानिया के तट पर 22 साल में पहली बार ‘हाथों से चलने वाली’ दुर्लभ मछली मिली है। यह हाथों से चलने वाली मछली गुलाबी रंग की है और अंतिम बार इसे साल 1999 में तस्‍मानिया में देखा गया था। इससे पहले यह केवल 4 बार ही देखी गई थी। ऑस्‍ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्‍होंने गहरे समुद्र में कैमरे से इस दुर्लभ मछली को तस्‍मान फ्रैक्‍चर मरीन पार्क में देखा है। इस मछली को हाल ही में दुर्लभ मछलियों की श्रेणी में रखा गया है। यह मछलियों की उन प्रजाति से ताल्‍लुक रखती है जिनके मुंह चौड़े होते थे। पहले माना जाता था कि ये मछलियां उथले पानी में पाई जाती हैं लेकिन तस्‍मानिया में हालिया खोज के दौरान यह समुद्र में 120 मीटर नीचे मिली है। इस मछली में ‘लंबे हाथ’ हैं जिससे यह समुद्र की तलहटी में चलती है। यह मछली आसानी से तैर भी सकती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ तस्‍मानिया के प्रफेसर नेविल्‍ले बैरेट और उनकी टीम ने एक कैमरा मरीन पार्क की तलहटी में डाला था ताकि कोरल, झींगा और मछलियों की अन्‍य प्रजाति का सर्वेक्षण किया जा सके। एक शोध सहायक ऐश्‍ली बस्तिआनसेन ने अक्‍टूबर महीने में इस कैमरे से लिए गए फुटेज का निरीक्षण किया तो उन्‍हें यह गुलाबी मछली मिली। इस रेकॉर्डिंग में पाया गया कि यह मछली एक पहाड़ से निकली चट्टान में थी। वीडियो में यह कुछ देर तक दिखी और उसके बाद तैरकर चली गई। बैरेट ने कहा, ‘उस समय इसने हमें बहुत शानदार दृश्‍य दिखाया। हमने एक हाथों से चलने वाली गुलाबी मछली की खोज की है।’ ऑस्‍ट्रेलिया में स्विटजरलैंड के आकार का यह मरीन पार्क समुद्री जीवों पर शोध के लिए बनाया गया है। बता दें कि अमेरिका में वैज्ञानिकों की एक टीम ने डायनासोर के समय के एक समुद्री राक्षस की खोज की थी। इस जीव की लंबाई 55 फीट तक देखी गई है। इस जीव का नाम इचिथ्योसॉर (ichthyosaur) है, जो समुद्री मछली का ही एक प्रकार है। रिसर्च से पता चला है कि मछली के आकार के इन समुद्री सरीसृपों (Reptiles) का आकार 24 करोड़ साल पहले काफी तेजी से बढ़ा। इस जीव के सिर का आकार 6.5 फीट मापा गया है।

(स्त्रोत साभार – नवभारत टाइम्स)

जब चोरों ने माफी माँगी और लौटाया सारा सामान

बांदा । उत्तर प्रदेश के बांदा में दिलचस्प घटना सामने आई है। यहां चोरों ने पहले एक वेल्डिंग की दुकान से हजारों का सामान चुराया लेकिन बाद में पीड़ित की माली हालत पता चली तो उनका दिल पसीज गया। चोरों ने माफीनामे के साथ पीड़ित को सारा सामान दोबारा लौटा दिया। उन्होंने चोरी का सामान एक बोरी और डिब्बे में पैक किया और उसके ऊपर एक कागज में माफी भी लिखकर चिपका दिया। यह घटना इलाके के साथ-साथ पुलिस महकमे में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
घटना बांदा के बिसंडा थाना इलाके की है। यहां चंद्रायल गांव में रहने वाले दिनेश तिवारी की आर्थिक हालत काफी खराब है। कुछ समय पहले ही उन्होंने 40 हजार रुपये का कर्ज लेकर वेल्डिंग का काम डाला था। 20 दिसंबर को रोजाना की तरह जब वह अपनी दुकान पहुंचे तो ताला टूटा मिला और औजार समेत अन्य सामान गायब था। उन्होंने बिसंडा थाने में घटना की सूचना दी।
चोरों ने लिखा- हमसे गलती हुई है
हालांकि मौके पर दरोगा के न मिलने के कारण केस दर्ज नहीं हो सका। 22 दिसंबर को उन्हें गांव के कुछ लोगों ने बताया कि उनका सामान कुछ दूरी पर पड़ा हुआ है। चोर दिनेश का सामान गांव की ही एक खाली जगह पर फेंक कर चले गए थे। दिनेश ने देखा कि एक बोरी में उसका सामान रखा हुआ और उसके ऊपर एक कागज भी चिपका हुआ था। लेटर में लिखा था, ‘यह दिनेश तिवारी का सामान है। हमें बाहरी आदमी से आपके बारे में जानकारी हुई। हम सिर्फ उसे जानते हैं जिसने लोकेशन (सूचना) दी कि वह (दिनेश तिवारी) कोई मामूली आदमी नहीं है। पर जब हमें जानकारी हुई तो हमें बहुत दुख हुआ इसलिए हम आपका सामान वापस देते हैं। गलत लोकेशन की वजह से हमसे गलती हुई।’
चर्चा का विषय बनी घटना
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वापस सामान मिलने की खुशी पर दिनेश तिवारी ने कहा, ‘मेरी वेल्डिंग की दुकान में 20 दिसंबर को चोरी हो गई थी, जब मैं उस दिन वहां पहुंचा तो चोर वहां से 2 वेल्डिंग मशीन, 1 कांटा (तौलने वाला), 1 बड़ी कटर मशीन, 1 ग्लेंडर और 1 ड्रिल मशीन कुल 6 सामान चोरी कर ले गए थे।’ दिनेश ने बताया कि वह उसी दिन थाने में शिकायत करने पहुंचे थे तो कहा गया कि दरोगा जी मुआयना करने आएंगे लेकिन कोई आया नहीं। हालांकि सामान वापस मिलने से दिनेश राहत महसूस कर रहे हैं। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।

नमामि गंगे परियोजना नदियों को दे रही नया जीवन, 20 नाले यमुना में गिरने हुए बंद

लखनऊ । नमामि गंगे परियोजना के तहत शहरों की लाइफ लाइन मानी जाने वाली नदियों को नया जीवन दिया जा रहा है। प्रदेश में सभी प्रमुख नदियों को योगी सरकार प्रदूषण मुक्त बनाने का कार्य तेजी से कर रही है। कान्हा की नगरी मथुरा में यमुना शुद्धीकरण का बड़ा कार्य किया गया है।
नमामि गंगे की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार 460.45 करोड़ की लागत से यमुना में गिरने 20 नालों को टैप किया गया है। साथ ही 30 एमएलडी का एक नया एसटीपी तैयार कर लिया गया है। नदियों को जीवंत करने के साथ-साथ इनमें सीवरेज गिरने की समस्या का समाधान अत्याधुनिक तरीके से किया जा रहा है। सरकार इसके लिए हर संभव प्रयास करने में जुटी है।
वहीं, नमामि गंगे परियोजना के तहत मुरादाबाद में रामगंगा सीवरेज योजना बड़ा परिवर्तन लेकर आई है। यहां 330.05 करोड़ की लागत से 13 नालों को नदी में गिरने से रोका गया है। साथ ही 58 एमएलडी का अत्याधुनिक एसटीपी बनकर तैयार है।
मिर्जापुर के चुनार नगर में 2.70 करोड़ की लागत से 10 केएलडी का एफएसटीपी बनाया गया है। फिरोजाबाद में 51.06 करोड़ की लगात से 02 बड़े नालों को आईएंडडी विधि से टैप किया गया है।
कासगंज में 76.73 करोड़ से 02 नालों को टैप करने के साथ 58 एमएलडी एसटीपी का निर्माण पूरा करा लिया गया है। सरकार की ओर से तेजी से नदियों की सफाई के लिए किए गए कार्यों से बड़ा बदलाव आया है। नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों को अत्याधुनिक विधि से निर्मित किया जा रहा है। बिजली की कम से कम खपत के साथ-साथ इनमें बायोगैस प्लांट का प्रयोग किया जा रहा है। सीवर ट्रीटमेंट की नई विधियों का प्रयोग कारगर साबित हुआ है। इन ट्रीटमेंट प्लांटों से नालों का गंदा पानी शुद्ध होने के बाद नदियों में छोड़ा जाता है। इस कारण नदियों में प्रदूषण की मात्रा कम हुई है। नदियों में मशीनों और नांवों से गाद की सफाई का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

महामारी की निराशा पीछे छोड़ रियल इस्टेट क्षेत्र पटरी पर, 2022 में बेहतर बिक्री की उम्मीद

नयी दिल्ली । भारत के रियल एस्टेट उद्योग ने 2020 की मंदी को पीछे छोड़ते हुए इस साल मकानों की बिक्री में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की और कारोबारियों को उम्मीद है कि नए साल 2022 में जोरदार मजबूती देखने को मिलेगी। भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में इस साल पुनरुद्धार के लिए एक मजबूत नींव रखी गई, जिसके 2030 तक 1,000 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। महामारी से पहले उद्योग का आकार 200 अरब डॉलर था। वर्ष 2021 में उद्योग ने प्रतिष्ठित डेवलपर्स के प्रति मांग बढ़ने, समय से मकान तैयार करने, ग्राहकों द्वारा बड़े और अच्छे घरों की मांग और बिल्डरों द्वारा डिजिटल तकनीकों को तेजी से अपनाने जैसे कुछ रुझान देखने को मिले।
आवासीय बाजार में जनवरी-मार्च के दौरान बिक्री मजबूत थी। इसमें आवास ऋण के लिए ब्याज दरों में ऐतिहासिक कमी और कुछ राज्यों द्वारा स्टांप शुल्क में कमी की प्रमुख भूमिका रही। हालांकि, कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान रियल एस्टेट सहित अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र में मांग प्रभावित हुई।
सितंबर तिमाही के दौरान लगभग सभी बड़े सूचीबद्ध डेवलपर्स ने अपनी बुकिंग बिक्री में तेज वृद्धि दर्ज की, जिससे रियल्टी शेयरों में तेजी आई। इस दौरान ज्यादातर मांग ऐसे बिल्डरों के पास देखने को मिली, जो प्रतिष्ठित और भरोसेमंद हैं। क्रेडाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन पटोदिया ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘रियल एस्टेट के लिए 2021 सफल वर्ष रहा, क्योंकि उद्योग ने लचीलेपन, नवाचार और बेहतर प्रदर्शन के साथ वापसी की।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम मानते हैं कि 2022 रियल एस्टेट क्षेत्र का वर्ष होगा।’’

भारतीय मूल के न्यायाधीश दक्षिण अफ्रीका की सर्वोच्च न्यायिक पीठ में नियुक्त

जोहानिसबर्ग । भारतीय मूल के नारंद्रन ‘जोडी’ कोल्लापन को दक्षिण अफ्रीका की सर्वोच्च न्यायिक पीठ- संवैधानिक अदालत में नियुक्त किया गया है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने शुक्रवार को 64 वर्षीय कोल्लापन और राम्माका स्टीवन माथोपो की नियुक्ति की घोषणा की। उन्हें सार्वजनिक साक्षात्कारों की लंबी प्रक्रिया के बाद संविधान पीठ में शामिल किया गया है।
इस पीठ में दो रिक्तियों के लिए रामाफोसा से इस साल अक्टूबर में कोल्लापन और माथोपो समेत पांच उम्मीदवारों के नाम की सिफारिश की गई थी। कोल्लापन और माथोपो एक जनवरी, 2022 को कार्यभार संभालेंगे। इससे पहले भी संविधान पीठ में नियुक्ति के लिए कोल्लापन का दो बार साक्षात्कार हुआ था, लेकिन वह इसी संस्थान के कार्यवाहक न्यायाधीश के तौर पर दो बार सेवाएं देने के बावजूद असफल रहे थे।
राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि कोल्लापन और माथोपो का कानूनी पेशे और न्यायपालिका में शानदार करियर रहा है। कोल्लापन ने 1982 में वकालत शुरू की थी। उन्होंने 1997 में दक्षिण अफ्रीकी मानवाधिकार आयोग के आयुक्त का पद ग्रहण किया और 2002 से 2009 तक सात वर्ष के लिए आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्हें अप्रैल 2016 में दक्षिण अफ्रीकी कानून सुधार आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

दिग्गज ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने लिया क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास

नयी दिल्ली । भारत के सबसे सफल स्पिनरों में से एक हरभजन सिंह ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की। पंजाब के 41 वर्षीय खिलाड़ी ने अपने शानदार करियर में 103 टेस्ट में 417 विकेट, 236 एकदिवसीय मैचों में 269 विकेट और 28 टी 20 आई में 25 विकेट लिए है।
इस ऑफ स्पिनर ने ट्वीट किया, ‘‘ मैं उस खेल को अलविदा कह रहा हूं जिसने मुझे जीवन में सब कुछ दिया है, सभी अच्छी चीजें भी समाप्त हो जाती हैं। मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने इस 23 साल के लंबे सफर को बेहतरीन और यादगार बनाया।’’ हरभजन ने 1998 में शारजाह में न्यूजीलैंड के खिलाफ एकदिवसीय मैच से अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। उन्होंने भारत के लिए मार्च 2016 में ढाका में संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय में अपना आखिरी मैच खेला था। उन्होंने मार्च 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 32 विकेट लिये थे , जिसमें एक भारतीय द्वारा पहली टेस्ट हैट्रिक भी शामिल थी। यह उनके शानदार कॅरियर के सबसे यादगार पलों में से एक है।

बच्चों के वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन शुरू, जानिए प्रक्रिया

नयी दिल्ली । भारत में 15-18 वर्ष के बच्चे कोरोना वैक्सीन डोज के लिए अब जनवरी से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। सरकार ने देश में ओमीक्रोन के बढ़ते मामले को देखते हुए सरकार ने राज्यों को एहतियात बरतने का भी दिया है। बच्चे के लिए कोविन ऐप पर पंजीकरण की सुविधा है। रिजस्ट्रेशन के लिए अतिरिक्त कार्ड जोड़ा है। 10वीं की आईडी कार्ड रजिस्ट्रेशन के लिए जोड़ा गया है क्योंकि कुछ लोगों के पास हो सकता है कि आधार कार्ड न हो।’
सरकार ने बताया कि पहले की ही तरह युवा कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। गौरतलब है कि कोरोना वैक्सीनेशन के शुरुआत से ही कोविन ऐप के जरिए लोग रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं।
आर एस शर्मा ने कहा कि जब आप वैक्सीन के लिए रजिस्टर करेंगे तो आपके को-मोबिलिटी है या नहीं इस बारे में पूछा जाएगा। अगर आप हां कहते हैं तो आपको वैक्सीनेशन सेंटर पर रजिस्टर्ड डॉक्टर से मिला को-मोबिलिटी सर्टिफिकेट दिखाना होगा और उसके बाद वैक्सीन लग जाएगी।
उन्होंने कहा कि 60 साल से ऊपर वाले किसी व्यक्ति ने अगर वैक्सीन की दोनों डोज ले रखी है तो आपको रजिस्ट्रेशन के पहले दिन से 9 महीने बाद (39 सप्ताह) ही तीसरी डोज मिलेगी। यानी प्री-कॉशन डोज के लिए कोई शख्स योग्य होगा।

नहीं रहे नोबेल पुरस्कार विजेता डेसमंड टूटू

जोहान्सबर्ग। देश में नस्ली भेदभाव से लड़ने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने वाले दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद संघर्ष के प्रतीक आर्चबिशप डेसमंड टूटू का निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू ने उनके निधन पर शोक जताया।
राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने घोषणा की कि टूटू का रविवार तड़के केपटाउन में निधन हो गया। वह नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने वाले अंतिम जीवित दक्षिण अफ्रीकी थे। पूर्व में तपेदिक को मात दे चुके टूटू ने 1997 में प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी कराई थी। हाल के वर्षों में उन्हें अलग-अलग बीमारियों के चलते कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया।
रामफोसा ने टूटू के परिवार और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, ‘हमें एक मुक्त दक्षिण अफ्रीका देने वाले आर्चबिशप एमेरिटस डेसमंड टूटू का निधन उत्कृष्ट दक्षिण अफ्रीकियों की पीढ़ी को हमारे देश की विदाई में शोक का एक और अध्याय है।’ उन्होंने कहा, ‘डेसमंड टूटू बड़े देशभक्त थे; सिद्धांत और व्यावहारिकता के नेता जिन्होंने बाइबिल की अंतर्दृष्टि को अर्थ दिया कि कर्म के बिना धर्म मर जाता है।’
रामफोसा ने कहा, ‘असाधारण बुद्धि, ईमानदारी और रंगभेद की ताकतों के खिलाफ एक अजेय व्यक्ति, वह उन लोगों के प्रति दयालु थे, जिन्होंने रंगभेद के तहत उत्पीड़न, अन्याय और हिंसा का सामना किया।’ राष्ट्रपति ने सत्य और सुलह आयोग में टूटू की भूमिका के लिए भी उनकी सराहना की, जहां रंगभेद के शिकार लोगों द्वारा सुरक्षाबलों के अमानवीय व्यवहार की बातें साझा किए जाने के दौरान वह भावुक हो जाते थे।
वर्ष 1995 में तत्कालीन राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने टूटू को आयोग का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया था। रामाफोसा ने अपने बयान के अंत में कहा, ‘हम प्रार्थना करते हैं कि आर्चबिशप टूटू की आत्मा को शांति मिले लेकिन उनकी आत्मा हमारे देश के भविष्य के लिए प्रहरी बनकर खड़ी रहे।’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी टूटू के निधन पर शोक व्यक्त किया और श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह विश्व स्तर पर अनगिनत लोगों के लिए एक मार्गदर्शक थे और मानवीय गरिमा एवं समानता के प्रति उनकी भूमिका को हमेशा याद रखा जाएगा।
मोदी ने कहा, ‘आर्चबिशप एमेरिटस डेसमंड टूटू दुनिया भर में अनगिनत लोगों के लिए एक मार्गदर्शक थे। मानवीय गरिमा एवं समानता के प्रति उनकी भूमिका को हमेशा याद रखा जाएगा। मैं उनके निधन से बहुत दुखी हूं और उनके सभी प्रशंसकों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।’
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी आर्कबिशप डेसमंड टूटू के निधन पर रविवार को दुख जताया और रंगभेद के खिलाफ टूटू के अहिंसक संघर्ष को याद किया। उपराष्‍ट्रपति सचिवालय ने नायडू के हवाले से कहा, ‘आर्कबिशप डेसमंड टूटू के निधन से दुखी हूं। शांति के दूत और मानवाधिकारों के हिमायती, आर्कबिशप टूटू को दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ उनके अहिंसक संघर्ष के लिए हमेशा याद किया जाएगा।’
टूटू को 1984 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। उस समय वह जोहानिसबर्ग के बिशप थे। उन्हें ‘अफ्रीका के शांति बिशप’ के रूप में संदर्भित करते हुए नॉर्वेजियन नोबेल संस्थान ने कहा कि टूटू को पुरस्कार ‘दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की समस्या को हल करने के लिए अहिंसक अभियान में एक एकीकृत नेता के रूप में उनकी भूमिका के लिए’ दिया गया था।
नेल्सन मंडेला फाउंडेशन (एनएमएफ) ने 1950 के दशक की शुरुआत में एक वाद-विवाद प्रतियोगिता में पहली मुलाकात के बाद टूटू के मंडेला के साथ संबंधों को याद किया। इसके पश्चात, दोनों 11 फरवरी, 1990 को एक राजनीतिक कैदी के रूप में 27 साल बाद मंडेला की रिहाई के बाद ही दोबारा मिल पाए थे। एनएमएफ के मुख्य कार्यकारी सेलो हटंग ने एक बयान में कहा ‘तब से 2013 में मंडेला के निधन तक वे नियमित संपर्क में थे और समय के साथ उनकी दोस्ती गहरी होती गई।’ टूटू हाल के वर्षों में राज्य के उद्यमों की लूटपाट के भी मुखर आलोचक रहे। उन्होंने सत्तारूढ़ अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस (एएनसी) को भी नहीं बख्शा जिसके वह पूरी जिंदगी एक गौरवान्वित सदस्य रहे।

भारतीय भाषा परिषद में 27वां हिंदी मेला सम्पन्न

अनवर हुसैन को युगल किशोर सुकुल पत्रकारिता सम्मान

कोलकाता। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा भारतीय भाषा परिषद के सह योगदान से आयोजित 27वां हिंदी मेला नए साल के अभिनंदन और उदार मानवता के आह्वान के साथ मेले का आज समापन हुआ। हिंदी मेला साहित्य को कलाओं से जोड़ने और साहित्य को नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के अभियान के रूप में देखा जाता है। यह हिंदी और हिन्दीतर भाषाओं के बीच एक पुल की तरह है। हिंदी मेला के संरक्षक रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि हिंदी मेला नई सांस्कृतिक ऊर्जा पैदा करता है। इसमें स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी और नौजवान अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने डॉ कुसुम खुमानी, अजय व्यास, नरेश कुमार, अमल दास और तमाम संस्कृतिकर्मियों का अभिनंदन करते हुए सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। अजय व्यास ने कहा कि हिंदी मेला एक सांस्कृतिक आंदोलन की तरह है। यह अच्छी बात है कि सभागार में अयोजन के साथ-साथ इसका ऑनलाइन में भी विस्तार हुआ है। समापन समारोह में युवा पत्रकार  अनवर हुसैन को युगल किशोर सुकुल पत्रकारिता सम्मान प्रदान किया गया।

डॉ राजेश मिश्र ने मानपत्र का वाचन किया। प्रो. संजय जायसवाल ने कविता, नृत्य, संगीत, लोकगीत आदि की भव्य प्रस्तुतियों के बाद कहा कि 27 सालों से हिंदी मेला का आयोजन हिंदी और मातृभाषा से प्रेम पैदा करने के लिए होता है ताकि हम आधुनिक विकास के साथ हिंदी की मर्यादा को खोने न दें। इस अवसर पर लगभग 200 विजयी प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह, उपहार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। 27 वर्षों से जारी हिंदी मेला सभी के स्नेह, सहयोग और विश्वास का प्रतीक है। इस अवसर पर अवधेश प्रसाद सिंह, डॉ केयूर मजूमदार, अनिता राय और सुशील पाण्डेय उपस्थित थे। मृत्युंजय ने अतिथियों को धन्यवाद दिया। रचनात्मक लेखन का शिखर सम्मान सूर्य देव रॉय, प्रथम स्थान निशा गहलौत, दिल्ली विश्वविद्यालय, द्वितीय स्थान रूपेश कुमार यादव, विद्यासागर विश्वविद्यालय, तृतीय स्थान पंकज सिंह, विद्यासागर विश्वविद्यालय और विशेष पुरस्कार अभिषेक पाण्डेय, कलकत्ता विश्वविद्यालय को मिला। कार्यक्रम का सफल संचालन विकास जायसवाल, पूजा गुप्ता, पूजा सिंह,आकांक्षा साव,सपना कुमारी, इंद्रेश कुमार ,विनोद यादव मास्टर जी,सुशील पांडे और धन्यवाद ज्ञापन अनीता राय ने दिया।

ग्रीटिंग्स, डायरी और कैलेंडर…कागज के टुकड़े में सजा शुभकामनाओं का बाजार

सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया
कोलकाता : नया साल आ गया है और शुरू हो गया है नववर्ष की शुभकामनाओं का दौर। आज के तकनीकी समय में जहाँ ई कार्ड्स के कारण साधारण ग्रीटिंग्स कार्डस के बाजार पर असर पड़ा है वहीं यह भी सच है कि गुजरे हुए क्षणों को लेकर हम बहुत ही भावनात्मक लगाव से जुड़े हैं। यही कारण हैं कि आज भी ग्रीटिंग्स कार्ड्स की दुकानें सजती हैं। हम जब छोटे थे तो अपने जेबखर्च से कार्ड खरीदना या कागज पर कार्ड बनाकर दोस्तों को देना बहुत भाता था और यह अल्हड़पन का सुख था। सुख के ऐसे क्षण ही ग्रीटिंग्स कार्ड्स की दुनिया से हमें जोड़ते हैं। इसके साथ ही साल नया है तो कैलेंडर और डायरी की दुकानें सजती हैं। कितने भी आधुनिक हों हम, इनकी जरूरत हमें हमेशा पड़ती है और गीता दैनन्दिनी तो भारतीय परिवारों की जरूरत ही है। ऐसी स्थिति में हम भी निकले ग्रीटिंग्स, डायरी और कैलेंडर बाजार देखने और समझने।
आज भी आपको 1 रुपये से शुरू होने वाले ग्रीटिंग्स कार्ड मिलते हैं और यहाँ स्टॉल लगाने वाले गुलाब कुमार सिंह कहते हैं कि ग्रीटिंग्स कार्ड्स के बाजार पर मोबाइल का असर पड़ा है।
कॉलेज स्ट्रीट, सियालदह, धर्मतल्ला समेत महानगर की प्रमुख जगहों पर आपको इन दिनों यह बाजार दिखेंगे मगर इन सबके बीच ओल्ड चाइना बाजार अपना अलग महत्व रखता है। यहाँ डायरी का स्टॉल सजाने वाले रामक्लेश मुखिया के मुताबिक बाजार में थोड़ी मंदी है और कोविड का असर है। यहाँ 30 रुपये से लेकर 50 रुपये से डायरी बिक रही है। वह कहते हैं कि बाजार में दुकानें अधिक हो गयी हैं तो मंदी का एक कारण यह भी है। कोविड का असर डायरी बाजार पर बहुत पड़ा है। रेनु स्टोर यहाँ की बड़ी दुकान है और संचालक विकी पांडेय के यहाँ कॉरपोरेट की जरूरत के अनुसार डायरियाँ उपलब्ध हैं। बाजार में महापुरुषों से लेकर देवी – देवताओं और प्राकृतिक दृश्यों से सज्जित हर तरह की छोटी – बड़ी डायरी है।
मोबाइल का असर तो कैलेंडर बाजार पर भी पड़ा है मगर घरों में व्रत – त्योहार देखने के लिए कैलेंडर की जरूरत तो पड़ती ही है और लोग डायरी एवं कैलेंडर छपवाते भी हैं क्योंकि यह ब्रांडिंग का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। कागज की कीमतों का असर पड़ा है और मजदूरी भी बढ़ने से फर्क पड़ा है। पॉकेट कैलेंडर तो रुपये से शुरू होता है तो टेबल कैलेंडर भी आपके बजट के भीतर आ सकता है।

बहरहाल इस पड़ताल में बात जरा ग्रीटिंग्स कार्ड के इतिहास पर भी हो। ग्रीटिंग कार्ड कार्ड स्टॉक या उच्च गुणवत्ता वाले कागज का सचित्र टुकड़ा है जिसमें मित्रता या अन्य भावना की अभिव्यक्ति है। हालाँकि ग्रीटिंग कार्ड आमतौर पर विशेष मौकों पर दिए जाते हैं जैसे जन्मदिन , 35 क्रिसमस या अन्य छुट्टियां , जैसे कि हैलोवीन , उन्हें भी भेजा जाता है संदेश धन्यवाद या अन्य भावनाओं को व्यक्त करें (जैसे बीमारी से अच्छी तरह से )। ग्रीटिंग कार्ड, आमतौर पर लिफाफे के साथ पैक किया जाता है, विभिन्न प्रकार की शैलियों में आते हैं। दोनों बड़े पैमाने पर उत्पादित और साथ ही हस्तनिर्मित संस्करण हैं जो सैकड़ों कंपनियों द्वारा बड़े और छोटे वितरित किए जाते हैं। आम तौर पर सस्ती होने के साथ, डाई-कट या ग्लिड-ऑन सजावट वाले अधिक विस्तृत कार्ड अधिक महंगे हो सकते हैं।
हॉलमार्क कार्ड और अमेरिकी अभिवादन , दोनों अमेरिकी-आधारित कंपनियां, आज दुनिया में ग्रीटिंग कार्ड के दो सबसे बड़े उत्पादक हैं।
पश्चिमी देशों में और अन्य समाजों में तेजी से, कई लोग पारंपरिक रूप से दिसंबर में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मौसमी रूप से थीम वाले कार्ड भेजते हैं। कई सेवा व्यवसाय इस मौसम में अपने ग्राहकों को कार्ड भी भेजते हैं, आमतौर पर एक सार्वभौमिक रूप से स्वीकार्य गैर-धार्मिक संदेश जैसे “खुशहाल छुट्टियां” या “सीजन की शुभकामनाएं”।

ग्रीटिंग कार्ड के प्रकार

ग्रीटिंग कार्ड (उदाहरण)
काउंटर कार्ड : ग्रीटिंग कार्ड जो व्यक्तिगत रूप से बेचे जाते हैं। यह बॉक्सिंग कार्ड के साथ विपरीत है .
मानक
उच्च गुणवत्ता वाले कागज (जैसे कार्ड स्टॉक ) पर एक मानक ग्रीटिंग कार्ड मुद्रित होता है, और एक के साथ आयताकार और मुड़ा हुआ होता है, सामने की ओर चित्र या सजावटी आकृति। हस्ताक्षर के लिए रिक्त स्थान के साथ-साथ हस्ताक्षर या हस्तलिखित संदेश जोड़ने के लिए अंदर एक पूर्व-मुद्रित संदेश उपयुक्त है। कार्ड के साथ एक मिलान लिफाफा बेचा जाता है। कुछ कार्ड और लिफाफे में फैंसी सामग्री, जैसे सोने की पत्ती , रिबन , या चमक .
हस्तनिर्मित
हस्तनिर्मित कार्ड एक कार्ड है, जिसमें एक कार्ड भी शामिल है उत्पादन चरण या एक विशेषता जो हाथ से बनाई गई है। इस उत्पाद में न केवल उदाहरण के लिए उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है, applique आइटम या रिबन लेकिन पॉप-अप और 3-डी कार्ड के साथ-साथ मिश्रित सामग्रियों से बने कार्ड भी। “हस्तनिर्मित” शब्द को एमेच्योर और वॉल्यूम-प्रोडक्शन कार्डों द्वारा बनाए गए कार्डों पर लागू किया जाता है, जिसमें हाथ से बनाए गए चरण शामिल होते हैं।
फोटो
एक फोटो कार्ड एक कार्ड है जिसमें एक तस्वीर चुनी जाती है प्रेषक द्वारा। दो मुख्य प्रकार के फोटो कार्ड हैं। पहला फोटो इंसर्ट कार्ड है जो प्रेषक की अपनी फोटो प्रदर्शित करने के लिए बनाया गया है। कार्ड के डिजाइन के आधार पर, फोटो कार्ड से चिपकी रहती है, कार्ड से चिपकी रहती है या कार्ड की जेब में फिसल जाती है, जिसमें फ्रेम के रूप में कार्य करने के लिए एक छेद को काट दिया जाता है। दूसरा प्रकार मुद्रित फोटो कार्ड है, जिसमें फोटो को कलाकृति के साथ जोड़ा जाता है और सीधे कार्ड के चेहरे पर मुद्रित किया जाता है। दोनों प्रकार छुट्टी शुभकामनाएं भेजने के लिए लोकप्रिय हैं जैसे कि क्रिसमस , हनुक्काह , और बच्चे की बौछार के लिए, जहां प्रेषक एक भेजने की इच्छा रखता है अपने ही परिवार की याद। निजीकृत कार्ड भी देखें।
निजीकृत
एक व्यक्तिगत कार्ड एक कार्ड है जो प्रेषक के स्वयं के चित्रों या संदेश के साथ व्यक्तिगत है। विशेष निजीकरण तकनीक का उपयोग करने वाली वेबसाइटें, जैसे मूनपिग , उपभोक्ताओं को एक कार्ड को वैयक्तिकृत करने की अनुमति देती हैं, जो तब मुद्रित होता है और प्राप्तकर्ता को सीधे भेजा जाता है।
पुन: प्रयोज्य
ये ग्रीटिंग हैं। बजट के प्रति सचेत। पुन: प्रयोज्य कार्ड के लिए दो सामान्य प्रारूप हैं। सबसे पहले, पेज रखने के लिए उनमें स्लिट्स वाले कार्ड होते हैं। दूसरे, नोटपैड शैली के कार्ड हैं जहां पृष्ठ कार्ड के पीछे चिपके रहते हैं। पुन: प्रयोज्य कार्ड के लिए उपयोग किए जाने वाले पृष्ठों को प्राप्त होने के बाद हटाया जा सकता है और कार्ड का पुन: उपयोग करने के लिए नए पृष्ठों का उपयोग किया जा सकता है।
संगीतमय
कुछ ग्रीटिंग कार्ड खोले जाने पर संगीत या ध्वनि बजाते हैं। । वे आमतौर पर 3 डी हस्तनिर्मित जन्मदिन कार्ड होते हैं जो पारंपरिक उत्सव के गीत जैसे कि “आपको जन्मदिन मुबारक हो “.
इलेक्ट्रॉनिक
(जिसे ई-कार्ड भी कहा जाता है) ग्रीटिंग कार्ड भी हो सकते हैं इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे गए। फ्लैश -डेड कार्ड ईमेल द्वारा भेजे जा सकते हैं, और कई साइटें जैसे फेसबुक उपयोगकर्ताओं को शुभकामनाएं भेजने में सक्षम बनाती हैं। हाल ही में, सेवाओं ने लॉन्च किया है जो उपयोगकर्ताओं को शुभकामनाएं भेजने में सक्षम बनाती हैं। पाठ संदेश द्वारा एक मोबाइल फोन या इस उद्देश्य के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग करें ऐसे कार्ड को मोबाइल ई-कार्ड या एमसीकार्ड कहा जाता है। इन इलेक्ट्रॉनिक सेवाओं में से कई आगे की चर्चा को सक्षम करने के लिए खुली या अनाम चैट की पेशकश करते हैं।>
क्विलिंग कार्ड ग्रीटिंग कार्ड होते हैं जिनमें कार्ड के मोर्चे पर एक क्विल्ड डिज़ाइन होता है। क्विलिंग एक आर्टफ़ॉर्म है जहाँ जटिल डिज़ाइन बनाने के लिए पेपर के स्ट्रिप्स को रोल किया जाता है। ये कार्ड अद्वितीय और दस्तकारी होते हैं और अक्सर कला के कामों के लिए तैयार किए जाते हैं।

पॉप-अप
पॉप-अप कार्ड आम तौर पर कार्ड होते हैं जो एक बार खुल जाते हैं, एक तस्वीर कॉम होती है पाठक को आश्चर्यचकित करते हुए, बाहर की ओर संकेत करें। ग्रीटिंग कार्ड में चित्र और मुद्रित संदेश विभिन्न शैलियों में आते हैं, ललित कला से लेकर हास्य-व्यंग्य तक। गैर-विशिष्ट कार्ड, किसी भी अवसर पर असंबंधित, एक तस्वीर (या एक व्यक्तिगत तस्वीर में पेस्ट करने के लिए एक जेब) की सुविधा हो सकती है, लेकिन कोई पूर्व-मुद्रित संदेश नहीं। पेपर पॉप कार्ड में वियोज्य पॉप-अप कार्ड के लिए एक पेटेंट है, जो पॉप-अप कीपसेक को सहेजने की सुविधा देता है।
पॉप अप कार्ड डिजाइन किरिगामी कला से प्रेरित हैं, जिसकी उत्पत्ति जापान में हुई थी। यह कार्ड शैली U.S.A, U.K, भारत और अन्य जगहों पर फैल गई है। शार्क टैंक सीजन 605 के एपिसोड में 11 लवपॉप कार्ड किरिगामी कला से प्रेरित पॉप कार्ड के साथ दिखाई दिए और $ 300,000 का फंड उठाया।
प्रिंट करने योग्य
जिसे डिजिटल ग्रीटिंग कार्ड के रूप में भी जाना जाता है, वे शॉपिंग प्लेटफॉर्म जैसे ईटीसी और कुछ ब्लॉगों के माध्यम से ऑनलाइन पाए जा सकते हैं। आमतौर पर पीडीएफ दस्तावेज़ के रूप में उपलब्ध है, कार्ड के लिए डिजाइन घर या स्थानीय प्रिंट की दुकान पर मुद्रित किया जा सकता है। प्रिंट करने योग्य कार्ड ने डिजाइनरों को दुनिया भर के ग्राहकों को आसानी से कार्ड उपलब्ध कराने की अनुमति दी है।
गेट वेल
एक गेट-वेल कार्ड एक ग्रीटिंग कार्ड है जो किसी के बीमार होने पर भेजा जाता है। क्रोनिक और टर्मिनल बीमारी के मामले में उनका उपयोग समस्याग्रस्त है क्योंकि रोगी को ठीक होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है लेकिन वे अभी भी अमान्य को आराम दे सकते हैं।
इतिहास
बधाई देने की परम्परा हज़ारों साल पुरानी है। सुनते हैं, पहला शुभकामना संदेश ईसा से 600 वर्ष पहले भेजा गया था। ग्रीटिंग कार्ड भेजने का रिवाज प्राचीन चीनी से पता लगाया जा सकता है, जिन्होंने नए साल का जश्न मनाने के लिए अच्छी इच्छा के संदेशों का आदान-प्रदान किया, और मिस्रियों को , जिन्होंने पेपिरस स्क्रॉल पर अपना अभिवादन व्यक्त किया। 15 वीं शताब्दी की शुरुआत तक, यूरोप में हस्तनिर्मित कागज ग्रीटिंग कार्ड का आदान-प्रदान किया जा रहा था। जर्मन लोगों को 1400 की शुरुआत में लकड़ियों से नए साल की शुभकामनाएं देने के लिए जाना जाता है, और 15 वीं शताब्दी के मध्य की शुरुआत में यूरोप के विभिन्न हिस्सों में हस्तनिर्मित कागज वैलेंटाइन का आदान-प्रदान किया जा रहा था, सबसे पुराना वेलेंटाइन अस्तित्व में था ब्रिटिश संग्रहालय । कार्ड को ऑरलियन्स के चार्ल्स ड्यूक ने अपनी पत्नी को लिखा था।
1850 के दशक तक, ग्रीटिंग कार्ड अपेक्षाकृत महंगी, हस्तनिर्मित से बदल दिया गया था। निजी संचार के एक लोकप्रिय और सस्ती साधन के लिए हाथ से वितरित उपहार, बड़े पैमाने पर मुद्रण, मशीनीकरण, और डाक टिकट की शुरूआत के साथ डाक दरों में कमी के कारण। इसके बाद क्रिसमस कार्ड जैसे नए ट्रेंड आए, जिनमें से पहला 1843 में लंदन में प्रकाशित रूप में दिखाई दिया जब सर हेनरी कोल को काम पर रखा गया कलाकार जॉन कैलकोट हॉर्सले एक छुट्टी कार्ड डिजाइन करें जिसे वह अपने दोस्तों और परिचितों को भेज सके। 1860 के दशक में, मार्कस वार्ड एंड कंपनी , गुडॉल और चार्ल्स बेनेट जैसी कंपनियों ने ग्रीटिंग कार्ड का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया। उन्होंने प्रसिद्ध कलाकारों जैसे केट ग्रीनवे और वाल्टर क्रेन को चित्रकारों और कार्ड डिजाइनरों के रूप में नियुक्त किया। व्यापक लॉरा सेडोन ग्रीटिंग कार्ड कलेक्शन मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी से 32,000 विक्टोरियन और एडवर्डियन ग्रीटिंग कार्ड और 450 नंबर: वेलेंटाइन डे उन्नीसवीं शताब्दी के शुरुआती दिनों में कार्ड, दिन के प्रमुख प्रकाशकों द्वारा मुद्रित।
रंग जैसे तकनीकी विकास लिथोग्राफी ने 1930 में निर्मित ग्रीटिंग कार्ड उद्योग को आगे बढ़ाया। विनोदी ग्रीटिंग कार्ड, जिसे स्टूडियो कार्ड के रूप में जाना जाता है, 1940 के दशक और 1950 के दशक में लोकप्रिय हो गया।
1970 के दशक में, पुनर्नवीनीकरण किए गए पेपर ग्रीटिंग्स , एक छोटी सी कंपनी जिसे हॉलमार्क कार्ड जैसी बड़ी कंपनियों के खिलाफ एक प्रतिस्पर्धी पहचान स्थापित करने की आवश्यकता है, ने हास्य, सनकी कार्ड डिजाइन प्रकाशित करना शुरू कर दिया। कलाकार का नाम पीठ पर रखने के साथ। यह मानक लुक (जिसे कभी-कभी हॉलमार्क लुक कहा जाता है) के रूप में जाना जाता था से दूर था।
1980 के दशक के दौरान, छोटे बैच प्रिंटिंग की लागत कम हो गई और हस्तनिर्मित कार्ड के लिए बढ़ते स्वाद के साथ एक साथ मरना इसे आर्थिक रूप से संभव बना दिया। छोटे आला कंपनियों के लिए बड़े स्थापित ब्रांडों के साथ प्रतिस्पर्धा में स्थापित करने के लिए। अभिनव कंपनियों जैसे नोबलवर्क्स और 1980 के दशक में अपनी नींव से बढ़ कर उद्योग में महत्वपूर्ण प्रभावकारक बन गए। अब जो “वैकल्पिक” ग्रीटिंग कार्ड कहा जाता है उसके लिए एक संपन्न बाजार स्थापित किया गया था। यह नाम भले ही अटक गया, लेकिन इन “वैकल्पिक” कार्डों ने शैलियों की एक विशाल श्रृंखला को गले लगा लिया और अंततः उद्योग का रूप बदल दिया।
किसी एक व्यक्ति को भेजे गए ग्रीटिंग कार्ड की सबसे बड़ी दर्ज संख्या क्रेग शेरगोल्ड , एक लाभार्थी / श्रृंखला पत्र और बाद में श्रृंखला ईमेल के शिकार के लिए गई।

आर्थिक प्रभाव
यूनाइटेड किंगडम में, यह अनुमान है कि हर साल ग्रीटिंग कार्ड पर एक बिलियन पाउंड खर्च किए जाते हैं, जिसमें औसत व्यक्ति प्रति वर्ष 55 कार्ड भेजता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में, लगभग 6.5 बिलियन ग्रीटिंग कार्ड हर साल यूएस $ 7 बिलियन से अधिक की कुल लागत पर खरीदे जाते हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका में, एक काउंटर कार्ड आमतौर पर यूएस $ 2 से $ 4 के लिए बेचता है। बॉक्सिंग कार्ड, जो क्रिसमस कार्ड या अन्य समय के लिए लोकप्रिय होते हैं जब कई कार्ड भेजे जाते हैं, कम खर्च होते हैं।

ग्रीटिंग कार्ड एसोसिएशन
ग्रीटिंग कार्ड एसोसिएशन एक यूएस व्यापार ग्रीटिंग कार्ड और स्टेशनरी निर्माताओं के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन है। ग्रीटिंग कार्ड एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जॉन बीडर का कहना है कि ग्रीटिंग कार्ड उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण भावनाओं को संप्रेषित करने के लिए प्रभावी उपकरण हैं जिनकी आप परवाह करते हैं: “कोई भी महान महसूस करता है जब उन्हें मेल में एक अप्रत्याशित कार्ड प्राप्त होता है। मेरे लिए, ग्रीटिंग कार्ड जैसा कुछ नहीं है। एक विशेष संदेश भेजने के लिए। मुझे एक उद्योग का हिस्सा होने पर गर्व है जो न केवल लोगों को जोड़े रखता है, बल्कि हमारी भावनाओं को व्यक्त करने में मदद करने के लिए कल्पना और शब्दों की शक्ति दोनों का उपयोग करता है। ”

लुई अवार्ड्स
1988 से ग्रीटिंग कार्ड एसोसिएशन ने उस वर्ष प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ शुभकामना कार्ड के लिए एक वार्षिक पुरस्कार समारोह आयोजित किया है। पुरस्कारों को लुईस लुई पैरांग <65 की मान्यता में कहा जाता है।>, अमेरिकी क्रिसमस कार्ड के पिता के रूप में वर्णित।
नववर्ष, जन्मदिन, विवाह या त्योहारों के अवसर पर बधाई संदेश, पत्र और कार्ड भेजने की रीति बहुत पुरानी है। आजकल तकनीक के विस्तार और उन्नति के चलते ई-मेल, वॉट्सएप, मोबाइल फोन, एसएमएस तथा संचार के अत्याधुनिक साधनों के ज़रिए झटपट शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हो जाता है, लेकिन पुराने समय में बधाई संदेश भेजना सरल नहीं था। बावजूद इसके, लोग विभिन्न तरीक़ों से अपने मन की बातें एक-दूसरे तक पहुंचा देते थे।

आजकल बाज़ार में एक से लेकर हज़ार रुपये तक की क़ीमत के बधाई कार्ड उपलब्ध हैं। कई कम्पनियां सिर्फ़ बधाई कार्ड बेचकर करोड़ों की कमाई कर रही हैं। तमाम कूरियर कम्पनियां व इंटरनेट केंद्र ख़ासतौर पर शुभकामना संदेश व उपहार भेजने का काम करते हैं। ग़ौरतलब है कि भारतीय डाक विभाग की तरफ़ से बधाई पत्र भेजने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। विभिन्न सोशल कम्युनिटीज़ पर कस्टमाइज़्ड संदेश भेजने की सुविधा भी है ही।
ज़िक्र सैकड़ों साल पहले का
सदियों पहले आज की तरह संचार के तीव्र साधन नहीं थे, तब दूतों व कबूतरों द्वारा भी बधाई पत्र भेजे जाते थे। चीन व मिस्र में बधाई संदेश भेजने की श्रेष्ठ परम्परा थी। इन देशों में कई ताम्रपत्रों के अलावा इत्र की ऐसी शीशियां भी मिली हैं, जिन पर शुभकामनाएं दर्ज हैं।
भारत में ताड़पत्रों, केले के पत्तों, कदम्ब छाल, कपड़ों तथा ताम्रपत्रों पर बधाई संदेश भेजने की रवायत थी। मौर्य काल में तांबे, सोने-चांदी के पत्तों पर सौभाग्य व मंगल कामनाएं दी जाती थीं। इतिहासकारों के अनुसार, ईसा से 600 वर्ष पूर्व के बधाई पत्र भी मिले हैं। भारत में अंग्रेज़ों ने सर्वप्रथम क्रिसमस तथा नए वर्ष पर शुभकामना संदेश भेजने और ‘हैप्पी न्यू ईयर’ कहने की रवायत डाली।
शुरुआती दिनों का एक छपा हुआ शुभकामना पत्र वर्ष 1843 ई. में भेजा गया था, जो इंग्लैंड में मिला है। ब्रिटिश म्यूज़ियम में 1842 ई. का मुद्रित बधाई कार्ड भी मिला है। इस पर ‘हैप्पी क्रिसमस टू यू’ लिखा है। ज़ाहिर है कि किसी संदेश के प्रत्युत्तर में ये कार्ड छापकर भेजने के लिए तैयार किया गया होगा।
कार्ड के बारे में चंद कमाल बातें
-भारत में शुरुआती दिनों में शिवकाशी, मद्रास और मुम्बई में अधिक बधाई पत्र छपते थे।
-हैदराबाद के निज़ाम का नाम सबसे ज़्यादा शुभकामना पत्र भेजने वालों की सूची में दर्ज है।
-दुनिया का सबसे लम्बा ग्रीटिंग कार्ड 7 किलोमीटर का था। इसे 10 दिसम्बर, 1967 को वियतनाम युद्ध में मोर्चे पर डटे अमेरिकी सैनिकों के नाम भेजा गया था। इस पर 1 लाख लोगों की सामूहिक शुभकामनाएं दर्ज थीं और इसका वज़न 10 टन था।
-दुनिया का सबसे छोटा शुभकामना पत्र 1920 में एक चावल के दाने पर लिखकर प्रिंस ऑफ़ वेल्स को भेजा गया था।
-13वीं सदी में यूरोपियनों ने वुडकट्स पर नए साल के ग्रीटिंग्स भेजकर नई परिपाटी शुरू की थी।
-अमेरिका में छपे हुए ग्रीटिंग कार्ड्स बेचने की शुरुआत लुई प्रैंग नामक एक जर्मन लिथोग्राफ़र ने की थी, जिसने वर्ष 1856 में बोस्टन में ग्रीटिंग कार्ड्स की दुकान सजाई थी।
-अमेरिका में हर साल साठ लाख ग्रीटिंग कार्ड्स भेजे जाते हैं, जिनका बाज़ार आठ अरब डॉलर्स का है।
-सबसे लोकप्रिय ग्रीटिंग कार्ड हैप्पी बर्थडे के होते हैं। दुनिया में कुल बिकने वाले ग्रीटिंग कार्ड में से आधे जन्मदिन संदेशों के होते हैं।
-जहां तक सीज़नल कार्ड्स की बात है तो क्रिसमस पर सबसे ज़्यादा ग्रीटिंग कार्ड दिए जाते हैं। इसके बाद वैलेंटाइंस डे, मदर्स डे और फ़ादर्स डे के कार्ड्स की बारी आती है।
(इनपुट –  विकिपीडिया एवं दैनिक भास्कर)