Wednesday, April 8, 2026
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वाणी वंदना – हे देवी! वर ऐसा देना

डॉ. वसुंधरा मिश्र

शुभजिता को मेरी ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। मेरी स्वरचित कविता’ हे देवी! वर ऐसा देना’ प्रेषित कर रही हूँ। शुभजिता यूँ ही आगे उत्तरोत्तर अपने लक्ष्य को पूर्ण करती रहे। इसी आशा- विश्वास और उम्मीद से निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर हो। पुनः शुभकामनाएँ और बधाई –

वीणावादिनी पुस्तकधारिणी वासंती की देवी
गीत – संगीत – कला – संस्कार और संस्कृति की धूरी
हे देवी! वर देना ऐसा
सत्य और ईमान की घुट्टी पिला देना
देश की सोंधी मिट्टी से प्यार सिखा देना
युवाओं को सुमति – सुधर्म और उन्नति के पथ पर चलने देना
हर पल, हर दिन, नये रंगों से प्रतिदिन झोली भर देना
नई सोच, नए विचार और व्यवहार दे देना
हर बच्चे के अभिभावक को आदर और सम्मान दे देना

हे देवी! वर ऐसा देना
रिद्धि-सिद्धि और वृद्धि से भर पूर्णता देना
हर बालक – बूढ़े को अन्न सदैव ही देना
छाया रहे बड़ों की हरदम
बरगद के फैले पत्तों को सहलाते रहना
चिड़ियों के कलरव में वीणा के गीत सुनाना
छल – कपट – अत्याचार – हिंसा को मन से दूर भगाना

हे देवी! वर ऐसा देना
कण कण में देश प्रीत की गंगा ही बह जाए
हर युवा के कण्ठ कण्ठ में सरस्वती बस जाए
नव गति नव ताल छंद नव सब कुछ नया नया हो
हर भाषा के भावों में भारत उन्नत बन जाए
वाक् शक्ति की ही उपासना मानव की ऊर्जा है
चारों ओर दिशाओं में फैला है यही उजास

फेंक दूर तमस को ज्योति के बंधन में बांँध बस देना
हर मानव के मन में नैसर्गिक प्रवृत्ति के बीज बो देना
हे देवी! वर ऐसा देना
हे देवी! वर ऐसा देना

उस सीधे-साधे ग्रामीण का स्वाभिमान आज तक मुझे प्रेरणा देता है

प्रो. प्रेम शर्मा

स्नातकोत्तर की परीक्षा के बाद मैंने पहली बार अपने गाँव “खैरड़” जाने की इच्छा व्यक्त की। सबकी सहमति से 1970 के मार्च महीने में हम गांँव के लिए रवाना हुए। मैं, मेरी दीदी, मेरे भाई साहब और मम्मी_हम चारों गांँव पहुंचे।
हम तो पहली बार गए थे लेकिन मम्मी को भी घर पहचानने में कुछ दिक्कत हुई। घर के सामने रौनक थी।मम्मी जब एक घर के सामने रुकीं तो एक व्यक्ति तेजी से हाथ जोड़ता हुआ मम्मी के सामने आया और झट से चरण स्पर्श किए। उसने पूछा-
आप कलकत्ते वाली दीदी हो ना?
मम्मी ने उसे आशीर्वाद दिया और पहचानते हुए कहा तुम बनारसी हो?
हां जी हां जी__कहता हुआ वह ससम्मान सबको भीतर ले गया, खटिया बिछाई ,आवभगत किया।
मम्मी ने कमरे की तरफ इशारा करते हुए पूछा- यह क्या है?
बनारसी और उसकी पत्नी दोनों एक दूसरे की तरफ झांकने लगे। डरते डरते उसने कहा-मैंने यहां हट्टी(दुकान) खोली है। पूरा गांव यहीं से सामान लेता है। मैं शहर से ले आता हूं। गांव वालों को सुविधा हो जाती है।
“हमें बताना तो चाहिए था”
मम्मी ने बनारसीलाल से कहा।
बड़ी विनम्रता से बनारसी लाल ने कहा सारे गांव वालों की सहमति थी और पटवारी जी को भी बता दिया था। आपकी और शर्मा जी की सब ने बहुत तारीफ की। गांव वालों ने कहा वह कुछ नहीं कहेंगे बहुत बड़े दिलवाले हैं।
थोड़ी देर बाद हम तीनो भाई बहन जब कमरे में पहुंचे तो हमने अपनी बातें शुरू कर दीं
मैंने कहा-हमारा घर हमारी जमीन, कैसा कब्जा कर लिया।
दीदी ने कहा_बिना पूछे ,बिना बताए अपना बिजनेस शुरू कर लिया।
भाई साहब ने कहा_गांव वालों को सब सीधे-सीधे कहते हैं पर यह होते बहुत चालाक हैं।
इसी तरह का वार्तालाप हम कर रहे थे कि बाहर से आवाज आई
“खाना तैयार है”बहुत ही आदर भाव से विनम्रता से बहुत ही स्वादिष्ट खाना पति-पत्नी दोनों ने हमें खिलाया।
रात को हम सो गए और नींद भी अच्छी आई। सुबह हमें होशियारपुर के लिए निकलना था । सुबह हम उठे तो देखा कुछ अलग सा ही वातावरण नजर आया। घर बड़ा बड़ा और खाली खाली लग रहा था।जब ध्यान दिया तो पता चला कि जिस कमरे में दुकान थी वह कमरा बिल्कुल खाली था। अचानक पीछे से बनारसी लाल की आवाज सुनाई जी_जी– घर आपका– जमीन आपकी—आप लोगों की लंबी अनुपस्थिति के कारण गांँव वालों की सुविधा के लिए मैंने यह काम किया था। अब आप इसे संभाले।
मुझे ऐसा लग रहा था”काटो तो खून नहीं”शर्मिंदगी से हम तीनो भाई बहन जमीन में गड़े जा रहे थे। महसूस किया गांव वाले ईमानदार भी होते हैं और स्वाभिमानी भी।
उस सीधे-साधे ग्रामीण का स्वाभिमान आज तक मुझे प्रेरणा देता है।

समानता के द्रष्टा श्रीपाद स्वामी रामानुजाचार्य

शुभांगी उपाध्याय

भारतवर्ष पर सैकड़ों वर्षों से ही अनगिनत आक्रमण होते आए हैं परन्तु इसकी अखण्डता को अक्षुण्ण रखने हेतु अनेकों वीर, महात्मा, संत, कवि आदि ने इस भूमि पर जन्म लिया और हर प्रकार से इसकी रक्षा की। ऐसा ही एक दौर था आज से लगभग हजार वर्ष पूर्व, जब भारत की अस्मिता पर आँच आई थी। विदेशी आक्रांताओं के अत्याचार, लूट-पाट और भय से मनुष्य का मन निराशा से भर उठा था। ऐसे में दक्षिण भारत के तमिल नाडु राज्य के श्रीपेरुमबुदुर नामक ग्राम में सन् १०१७ में एक ब्राह्मण परिवार में बालक का जन्म होता है। माता कांतिमती तथा पिता केशव उसे लक्ष्मण कहकर पुकारते थे। वह बालक भक्ति का ऐसा बीज बोता है जिससे जनमानस में सांस्कृतिक क्रांति, चेतना और जागृति हो जाती है। छोटी उम्र में पिता को खोने के बाद बालक परिवार सहित कांची जाकर ‘यादव प्रकाश’ से वेदांत की शिक्षा ग्रहण करता है। अपने गुरु की वेद चर्चा और तर्क से असंतुष्ट और असहमत बालक आगे चलकर आलवर संत श्रीपाद यमुनाचार्य जी महाराज की शरण में चला जाता है और उनका प्रधान शिष्य भी बन जाता है।

समा कल्याण के संकल्प हेतु जीवन समर्पित

संत यमुनाचार्य जी के वैकुंठ गमन के पश्चात एक अभूतपूर्व घटना घटी, जिससे एक साधारण बालक के असाधारण बनने की प्रक्रिया आरंभ हुई। बालक ने देखा की शरीर त्यागने के पश्चात भी गुरू जी की ३ उंगलियां मुड़ी हुई थी, सभी इस भेद को जानने के लिए उत्सुक थे। उदासीन बालक यह भांप गया की गुरुवर के तीन इच्छा बाकी थी। अकस्मात ही वह बोल पड़ा, मैं ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखूंगा और इतना कहते ही गुरु यमुनाचार्य की एक उंगली खुल गई। उसने और ऊँचे स्वर तथा दृढ़ निश्चय के साथ दो और प्रण किए की व श्रीविष्ण सहस्रनाम और दिव्य प्रबंधम’ पर भी टीका लिख अपने गुरू की इच्छा और साथ ही समस्त मानव जाति का कल्याण करेंगे। इसके पश्चात ही बाकी दो उंगलियां भी खुल गई। कार्य अत्यंत ही दुष्कर था परन्तु दृढ़ संकल्प, विराट इच्छाशक्ति, आत्म विश्वास और गुरु के आशीर्वाद से यह कार्य पूर्ण हुआ और लक्ष्मण से श्रीपाद स्वामी रामानुजाचार्य तक का सफर भी तय हुआ।

समानता की दृष्टि

आचार्य रामानुज का कम उम्र में ही थंगाम्मा नामक युवती से विवाह संपन्न हुआ था। कुलीन कन्या होने के कारण उनके मन में तथाकथित निम्न जाति-वर्ग के लोगों के प्रति द्वेष था साथ ही वह उनसे अनुचित व्यवहार भी करती थी। भगवान वरदराज के प्रियभक्त श्री कांचीपूर्ण जी (जो निम्न वर्ग से आते थे) को आचार्य अपना गुरु मानते थे। एक दिन मध्यान भोजन हेतु उन्होंने उन्हें अपने निवास पर आमंत्रित किया। उनके भोजन करके चले जाने के पश्चात थंगाम्मा ने बचे हुए भोजन को बांट दिया, घर को गोबर से लीपा, पुनः स्नान किया और पति के लिए दुबारा भोजन पकाने लग गईं। उनके इस कृत्य से आचार्य जी को बहुत कष्ट हुआ, मन द्रवित हो उठा। उनकी दृष्टि में केवल मनुष्य ही नहीं अपितु प्रत्येक प्राणीमात्र भी ईश्वर के समतुल्य ही था।  इस घटना के पश्चात ही उन्होंने गृहस्थाश्रम का त्याग कर सन्यास ग्रहण कर लिया। आगे चलकर उनकी इसी सम दृष्टि से तथाकथित निम्न जाति का उद्धार हुआ, उन्हें मंदिरों में प्रवेश, समाज में सम्मान और प्रभु भक्ति के योग्य भी बनाया।

गुरु भी शिष्य बन गए

मैसूर से कुछ दूर स्थित श्रीरंगम नगरी के श्रीरंगनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में आचार्य जी ने कई वर्षों तक प्रभु की सेवा की। तत्कालीन समय के महान संत श्रीपाद गोष्ठिपूर्ण जी महाराज से महामंत्र सीखने के लिए आचार्य १८ बार मिलते हैं जिसमें से १७ बार निराशा ही हाथ लगती है। अठारहवीं बार की भेंट में गोष्ठिपूर्ण जी महामंत्र  ॐ नमो नारायणाय बता देते हैं परन्तु साथ ही दो शर्त भी रखते हैं, पहला यह की मंत्र की गोपनीयता बनाए रखनी होगी और दूसरा, भविष्य में किसी सुपात्र को ही महामंत्र सिखाने का वचन। यह जानने के पश्चात की इस मंत्र के श्रवण मात्र से ही ईश्वर प्राप्ति हो जाती है, आचार्य स्वयं को रोक न सके। उनका संवेदशील हृदय आह्लादित हो उठा और इस चराचर जगत के कल्याण हेतु वे मंदिर की सबसे ऊँची दीवार पर खड़े होकर जोर-जोर से मंत्रोच्चारण करने लगे। जिसने भी इस मंत्र को धारण किया, उन सबका उद्धार हो गया। इस बात पर गोष्ठिपूर्ण अत्यंत क्रोधित होकर अपने शिष्य से कहते हैं,गुरुद्रोही ! तुझ नरक मिलेगा।

आचार्य भाव-विभोर हो कह उठते हैं, यदि एक मेरे नरक चल जाने से समस्त संसार का कल्याण होता है तो मुझ अपने किए पर तनिक भी खेद नहींइस महान विचार, त्याग की भावना और करुणामयी हृदय के आगे गोष्ठिपूर्ण नतमस्तक हो जाते हैं, ग्लानि से भर उठते हैं और रामानुजाचार्य को अपना गुरु स्वीकार कर लेते हैं।

ध्येय के प्रति पूर्ण निष्ठा और विद्या की देव माता सरस्वती का आशीर्वाद

“ब्रह्म सूत्र पर भाष्य लिखने” के अपने पहले संकल्प की पूर्ति हेतु आचार्य को ऋषि बोधायन द्वारा रचित बोधायन वृत्ति के अध्ययन की आवश्यकता थी। आज के आधुनिक दौर में तो हम एक क्लिक में ही दुनिया भर की जानकारी प्राप्त कर लेते हैं परन्तु एक हजार वर्ष पूर्व ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी। उस पुस्तक का पता लगाने हेतु आचार्य ने बड़ा ही संघर्ष किया और पाया कि उस कृति की केवल एक ही प्रति उपलब्ध है, वह भी सुदूर कश्मीर की घाटियों में बने ‘श्री शारदापीठम’ में। अपने मेधावी तथा प्रिय शिष्य कुरेज को साथ लेकर वे कश्मीर पहुंच गए और वहां उन्हें निराशा ही हाथ लगी क्योंकि पंडितों ने वह प्रति देने से मना कर दिया। मान्यता है की उस मंदिर में माता सरस्वती स्वयं प्रगट होकर पुस्तक की प्रति आचार्य को सौंप देती हैं। वे जब दक्षिण भारत के लिए प्रस्थान करते हैं तब जंगल में ही पुजारीगण उनपे हमला करके किताब छीन लेते हैं परन्तु उनके शिष्य गुरेज के पास अद्भुत स्मरणशक्ति थी जिससे वह एक नजर में ही पूरी पुस्तक याद कर लेते हैं। उन्हीं की सहायता से आचार्य श्री भाष्य की रचना करते हैं और उनकी इसी महान रचना के कारण उन्हें “श्री संप्रदाय शिरोमणिभी कहा जाता है।

हरि को भजे, सो हरि का होय

कावेरी नदी के किनारे बसा पर्वतीय क्षेत्र मेलुकोटे बहुत ही सुंदर क्षेत्र है। अपने जीवनकाल में आचार्य ने लगभग १२ वर्ष तक इस स्थान को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और श्री चेलुव नारायण मंदिर में प्रभु की सेवा की। विभत्स आक्रांताओं ने भारत के अनेकों मंदिर तोड़े, बहुमूल्य रत्न लूटे और साथ ही हमारे अराध्य देवी-देवताओं के विग्रह भी चुरा कर साथ ले गए। इसी में से एक सुंदर विग्रह राम प्रिय भी थी, जो इस मंदिर की ‘उत्सव मूर्ति’ थी और उत्सवों अथवा जात्रा के दौरान इस विग्रह की झाँकी निकलती थी। यह वही दिव्य मूर्ति थी जिसकी पूजा त्रेता युग में प्रभु राम और उनके वंशजों ने की और द्वापर में श्री कृष्ण ने भी की।

आचार्य को जब यह ज्ञात हुआ की वह मूर्ति दिल्ली के मुग़ल दरबार में है तो बिना विलंब वे अपने प्रभु को लेने पहुँच गए। उन्होंने आग्रहपूर्वक जब अपने प्रभु को ले जाने की मांग की तब मुग़ल शासक ने उन्हें मूर्ति लौटा दी। यह देखकर शहजादी अत्यंत द्रवित हो उठी और दीवानों की तरह आचार्य और उनके काफिले का पीछा करते हुए मेलुकोटे शहर जा पहुँची। मुस्लिम कन्या होने के कारण उसका मंदिर में प्रवेश वर्जित था, वह बाहर ही अपने आराध्य श्री हरि विष्णु के ध्यान में लीन हो गई। जब आचार्य को यह ज्ञात हुआ तब उन्होंने उसे मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी और वह महान भक्त प्रभु में ही समा गईं। तत्पश्चात आचार्य ने स्वयं बीबी नाचियार की मूर्ति को मंदिर में स्थापित करवाया। वह मूर्ति आज भी मंदिर परिसर में स्थापित है और भक्तगण प्रभु की अनन्य प्रेमिका को भी पूजते हैं।

निष्कर्षतः हम कह सकते हैं की संत रामानुजाचार्य का जीवन अत्यंत ही प्रेरणादायी है। भारतीय संत परंपरा में आदिगुरु शंकराचार्य जी के पश्चात श्रीपाद रानुजाचार्य जी का ही नाम लिया जाता है। आचार्य शंकर के अद्वैतवाद से भिन्न इन्होंने विशिष्टाद्वैत’ की रचना की। वैष्णव धर्म के प्रचार प्रसार हेतु इन्होंने पूरे भारतवर्ष की यात्रा की और जन जागृति का कार्य किया। अपने जीवनकाल में इन्होंने बहुत सारी रचनाएं की, भाष्य लिखे परन्तु सर्वाधिक लोकप्रिय रचनाएं श्री भाष्यम’ और ‘वेदान्त संग्रहम‘ को माना जाता है।

वेदान्त के अलावा सातवीं-दसवीं शताब्दी के रहस्यवादी एवं भक्तिमार्गी आलवार सन्तों के भक्ति-दर्शन तथा दक्षिण के पंचरात्र परम्परा को इन्होंने अपने विचारों का आधार बनाया। संत रामानुजाचार्यजी की शिष्य परम्परा में ही रामानन्द हुए जिनके शिष्य कबीर, रैदास और सूरदास थे। सन् ११३७ में जब यतिराज रामानुजाचार्य १२० वर्ष की अवस्था में पहुँचते हैं तब वह ब्रह्मलीन हो जाते हैं। ऐसे तेजस्वी, समदर्शी दिव्यात्मा की सहस्राब्दी में सम्मान स्वरूप विश्व की दूसरी सबसे बड़ी बैठी हुई मूर्ति, स्टैच्यू ऑफ इक्विलिटीका अनावरण कर प्रधानमंत्री सहित समस्त भारतवर्ष ही नहीं अपितु समस्त संसार के भक्तजन उनके प्रति अपना आभार व्यक्त कर रहे हैं। यह भारतीय सांस्कृतिक क्रांति और चेतना का आगाज़ है।

 ( शुभांगी कलकत्ता विश्वविद्यालय की शोधार्थी हैं )

प्रतिकूल स्थितियों भी अपनी हिम्मत बनाए रखकर ही नया इतिहास लिख सकती हैं आप

प्रश्न. ऑनलाइन एग्जाम के मार्क्स के ऊपर सभी यूनिवर्सिटी वालो ने एडमिशन दिया क्यों? क्या ये उचित था क्या इस पर कोई प्रश्न नहीं उठना चाहिए? – राधा ठाकुर

उ. बिल्कुल उठना चाहिए। सभी विश्वविद्यालयों को प्रवेश परीक्षा लेनी चाहिए। मैंने खुद इस सवाल को फेसबुक पर उठाया था। ऑनलाइन परीक्षण पद्धति में बहुत घालमेल हुआ है, दोनों ओर से। विद्यार्थियों ने भी बहुत छूट ली है और अध्यापकों ने भी अतिरिक्त रूप से सदाशयता दिखाई है। जिन लोगों ने ईमानदारी दिखाई उन्हें कहीं प्रवेश नहीं मिला। उनकी कोई गलती नहीं है लेकिन खामियाजा तो भुगतना पड़ा। हालांकि यह स्थिति हर जगह नहीं है लेकिन जहां भी ऐसा हुआ है, गलत हुआ है। इसका विरोध होना चाहिए।

प्र.स्त्रियों की पढ़ाई की सीमा क्यों बंधी जाती है क्यों आधे पर रोक दिया जाता है क्या स्त्रियों की पढ़ाई का कोई महत्व नहीं या उसका पढ़ना जरूरी नहीं है? – राधा ठाकुर

उ. स्त्रियों का पढ़ना तो सबसे जरूरी है। जहां तक बीच में रोक देने की बात है तो अब स्थितियां कमोबेश बदल रही हैं। लड़कियां भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर‌ रही हैं और नये कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।

प्र. जो लड़कियाँ आगे बढ़ने की राह में लगातार अपने ही घर से अड़चनों का सामना कर रही हैं, वह क्या करें? खासकर तब जब उनको घर से अकेले निकलने तक नहीं दिया जाये?

(नाम और पहचान गोपनीय)  

उ. लड़कियों को स्थितियों का विरोध करना चाहिए। अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए छोटा मोटा काम करने से भी परहेज नहीं करना चाहिए क्योंकि पढ़ाई बंद होने का सबसे बड़ा कारण आर्थिक होता है। कुछेक अपवादों को छोड़ दें तो लड़कियों के लिए हमेशा से ही आगे बढ़ने की राहें आसान नहीं रही हैं। इस स्थिति में सबसे बड़ी जरूरत है, हौसला बनाए रखने की। उन तमाम लड़कियों से जो अपनी-अपनी जगह पर संघर्षरत हैं, से मेरा एक ही संदेश है कि वे हिम्मत न हारें। कोशिश जारी रखें। प्रतिकूल स्थितियों भी अपनी हिम्मत बनाए रखकर ही वे नया इतिहास लिख सकती हैं।

 

अपने सवाल हमें भेजें, अगर आप चाहें तो आपकी पहचान गोपनीय रखी जायेगी। व्हाट्सऐप करें – 9163986473

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह

कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में प्राथमिक विभाग की छात्राओं ने गणतंत्र दिवस समारोह मनाया। नर्सरी की छात्राओं ने विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों के रूप में खुद को प्रस्तुत किया। वीडियो और पावर प्वाइंट प्रस्तुति छात्राओं को दिखायी गयी। भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों, स्वाधीनता सेनानियों और राष्ट्रीय ध्वज को लेकर क्विज भी हुआ। किंडरगार्टन की छात्राओं ने कागज मोड़ने की तकनीक से राष्ट्रीय ध्वज बनाया। गणतंत्र दिवस समारोह के वीडियो इनको दिखाये गये। पहली और दूसरी कक्षा की छात्राओं ने तिरंगे के रंग में खुद को सजाया और भारतीय संविधान के बारे में बताया। तीसरी कक्षा में ‘अनेकता में एकता’ और ‘नागरिकों के अधिकारों’ पर एकांकी का मंचन हुआ। संविधान के महत्व पर चौथी और पाँचवीं कक्षा की छात्राओं ने प्रस्तुति दी। डॉ. बी. आऱ. अम्बेडकर पर एक वीडियो प्रस्तुति दी गयी। राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण कविताओं व गीतों की प्रस्तुति भी की गयी

बिड़ला हाई स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह

कोलकाता । बिड़ला हाई स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह उल्लास के साथ मनाया गया। बहुप्रतिक्षित कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए दसवीं के छात्र अनस अली ने समारोह की रूपरेखा रखी। इसके बाद ध्वजारोहण हुआ। नौवीं के छात्र समित दास ने ध्वज फहराते हुए देशभक्ति की भावना को और ऊँचा किया। अंग्रेजी के शिक्षक जोसफ ऑरोकियास्वामी ने भाषण दिया। आर्यन वत्स ने ‘एक और जंजीर तड़कती है’ कविता का पाठ किया। देवांश लोहिया और मयंक पुरस्वनि ने पूर्ण स्वराज के संकल्प की ऐतिहासिक तस्वीरों को सामने रखा। स्कूल की प्रिंसिपल लवलीन सैगल ने छात्राओं को सन्देश दिया कि वे देशभक्ति के भाव को सदैव संजोये रखें। इसके बाद आर्य सरकार ने बांग्ला काव्य पाठ किया। अदित, वेदांश औऱ सौभाग्य ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। बायोलॉजी की शिक्षिका डॉ. अरुंधती चक्रवर्ती ने अनेकता में एकता पर भाषण दिया। इसके बाद वैष्णव श्रीराम ने संस्कृत में काव्य पाठ किया। अन्त में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का प्रसारण यूट्यूब और फेसबुक पर किया गया।
प्रेषक – रोहिताश्व दास, बिड़ला हाई स्कूल

वाणी प्रवाह -2022, प्रतियोगिता – चित्रांकन

अलिप्ता मंडल, कक्षा – 5, शिक्षण संस्थान – साउथ प्वाइंट स्कूल

 

 

बजट 2022 : इन बिन्दुओं में समझें बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के मुख्य बिन्दु यह रहे –

– जनवरी 2022 में जीएसटी का कलेक्शन 1.49 लाख करोड़ रुपये, ये किसी भी महीने में जीएसटी कलेक्शन का अबतक का सबसे बड़ा रेकॉर्ड

– वर्ष 2022-23 में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पीएम आवास योजना के तहत 80 लाख घरों के निर्माण को पूरा करने के लिए 48,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं

– हर घर नल से जल का कवरेज 8.7 करोड़ है, जिसमें से 5.5 करोड़ घरों को पिछले 2 वर्षों में ही नल का पानी उपलब्ध कराया गया था। इस योजना के लिए वर्ष 2022-23 में 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

– एनपीएस में राज्य और केंद्र की तरफ से छूट का दायरा बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया गया, केंद्र का पहले से 14 प्रतिशत था, राज्यों के कर्मचारियों के लिए 10 प्रतिशत की छूट थी, अब वह भी 14 प्रतिशत हुई

– इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, इनकम टैक्स दरों में भी कोई बदलाव नहीं

– 2 साल पुराने आईटीआर की गलती सुधारी जा सकेगी

– कॉर्पोरेट टैक्स 18 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत किया गया, कॉर्पोरेट टैक्स पर सरचार्ज भी 12 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किया गया

– कंपनियों के लिये स्वेच्छा से कारोबार से बाहर होने के लिये समयसीमा दो साल से कम कर छह महीने की जाएगी

– 2022-23 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान

– सरकार के कर्ज कार्यक्रम के तहत संसाधन जुटाने को सॉवरेन हरित बॉन्ड जारी किए जाएंगे

– 44,605 करोड़ रुपये के केन-बेतवा लिंक परियोजना का कार्यान्वयन किसानों और स्थानीय आबादी को सिंचाई, खेती और आजीविका की सुविधा प्रदान करने वाली 9 लाख हेक्टेयर से अधिक किसानों की भूमि की सिंचाई के लिए किया जाएगा

– अर्बन प्लानिंग के लिए 250 करोड़ रुपये से 5 मौजूदा अकैडमिक इंस्टिट्यूट्स को सेंटर फॉर एक्सिलेंस में तब्दील किया जाएगा

– ईसीएलजीएस योजना को मार्च 2023 तक बढ़ाया जाएगा और गारंटी कवर को 50,000 रुपये बढ़ाकर पांच लाख करोड़ रुपये किया जाएगा

– पीएम गतिशक्ति मास्टरप्लान में आर्थिक परिवर्तन, निर्बाध मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता के लिए 7 इंजन शामिल होंगे

– सुरक्षा और क्षमता बढ़ाने को लेकर 2,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क को स्वदेशी प्रौद्योगिकी- कवच के अंतर्गत लाया जाएगा

– 2022-23 के बीच नेशनल हाईवे की लंबाई 25000 किमी तक बढ़ाई जाएगी, हाईवे विस्तार पर 20 हजार करोड़ रुपये होंगे खर्च

– डीआरडीओ के साथ मिलकर प्राइवेट सेक्टर को डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग के लिए प्रोत्साहन नीति

– रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, सरकार का रक्षा बलों में आयात को कम करने पर जोर

– ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड के विस्तार पर जोर, गांवों में भी इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर होंगी, भारत नेट प्रोजेक्ट 2025 तक पूरा होने की उम्मीद

– पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक सड़कों के लिए राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम को पीपीपी मोड में लिया जाएगा, इससे टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा

– 2022 में 5G टेलिकॉम सर्विस को लॉन्च करने के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी होगी

– रेलवे छोटे किसानों और छोटे व मध्यम उद्यमों के लिए नए प्रोडक्ट और कुशल लॉजिस्टिक सर्विस तैयार करेगा। स्थानीय उत्पाद की आपूर्ति श्रृंखला में मदद के लिए ‘एक स्टेशन, एक उत्पाद’ होगा

– विमानन कंपनी एयर इंडिया के स्वामित्व का रणनीतिक हस्तांतरण पूरा हो गया है और नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (एनआईएनएल) के रणनीतिक खरीदार का चयन किया जा चुका है

– पीएम ई विद्या के ‘वन क्लास, वन टीवी चैनल’ कार्यक्रम को 12 से 200 टीवी चैनलों तक बढ़ाया जाएगा। यह सभी राज्यों को कक्षा 1 से 12 तक क्षेत्रीय भाषाओं में सप्लीमेंट्री शिक्षा प्रदान करने में सक्षम बनाएगा

– राष्ट्रीय संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल) ने अपना काम शुरू कर दिया है, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को 14 क्षेत्रों में शानदार प्रतिक्रिया मिली है और साथ ही तीस लाख करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं

– फसलों के असेसमेंट के लिए किसान ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा, लैंड रिकॉर्ड्स को डिजिटल किया जाएगा

– हम शहरी क्षेत्रों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देंगे, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देंगे

– बैटरी स्वैपिंग स्कीम का ऐलान, ईवी इकोसिस्टम को बढ़ाने के लिए इनोवेशन को बढ़ावा

– वित्त मंत्री ने कहा, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशनों को अनुमति देने को बैटरी अदला-बदली नीति तैयार की जाएगी

– मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध

– हब एंड स्पोक मॉडल के आधार पर शिक्षा देने के लिए डिजिटल विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा

– कोविड के कारण औपचारिक शिक्षा को जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई के लिए 1-क्लास-1-टीवी चैनल शुरू किया जाएगा जिसके जरिये बच्चों को पूरक शिक्षा दी जाएगी।

– 2018 में पर्यावरण से जुड़े सिंगल विंडो सिस्टम परिवेश को शुरू किया गया था, ये सेन्ट्रलाइज्ड सिस्टम को तेज करेगा

– ई पासपोर्ट को 2022 में लॉन्च किया जाएगा, चिप आधारित ई-पासपोर्ट जारी किए जाएंगे, 2047 तक भारत की आधी आबादी शहरों में रहेगी

– कॉमर्शियल बैंक 75 जिलों में 75 डिजिटल बैंकिंग यूनिट्स स्थापित करेंगे

– गंगा नदी के आसपास के क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा

– 1.5 लाख डाक घरों में कोर बैंकिंग सिस्टम सुविधा

– सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधा के विकास के लिए वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम का ऐलान

– 2022 में 3.8 करोड़ घरों तक नल का जल उपलब्ध कराने के लिए 60 हजार करोड़ का आवंटन

– सक्षम आंगनवाड़ी नयी पीढ़ी की आंगनबाड़ी होंगी जो क्लीन एनर्जी से चलेंगी, 2 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों को अपग्रेड किया जाएगा

– नेशनल टेलि-मेंटल हेल्थ प्रोग्राम शुरू होगा, इसके लिए आईआईटी बेंगलुरु टेक्नॉलजी सपोर्ट प्रदान करेगा

– 2021-22 में 1.63 करोड़ किसानों से 1208 लाख मीट्रिक टन गेहूं और धान की खरीद का अनुमान, इसके लिए किसानों को 2.37 लाख करोड़ रुपये एमएसपी का किसानों के खाते में सीधा भुगतान होगा।

– इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम का फायदा एमएसएमई को मिलेगा

– नदियों को जोड़ने की 5 परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है, 5 नदी लिंक (दमनगंगा-पिंजल, तापी-नर्मदा, गोदावरी-कृष्णा, कृष्णा-पेन्नार और पेन्नार-कावेरी) के लिए ड्राफ्ट डीपीआर को अंतिम रूप दिया गया है

– 62 लाख लोगों तक शुद्ध पेय जल की पहुंच

– साल 2023 को ‘मोटा अनाज वर्ष’ घोषित किया गया

– देशभर में केमिकल फ्री एग्रीकल्चर को बढ़ावा दिया जाएगा

– पीएम गतिशक्ति आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार देगा

– पर्वत माला प्रोजेक्ट के तहत पहाड़ी इलाकों में पीपीपी मोड में मास ट्रांजिट सिस्टम

– 400 न्यू जेनरेशन वंदेभारत ट्रेनें अगले 3 सालों में

– मौजूदा वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 9.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा है

– समग्र कल्याण हमारा लक्ष्य, ये बजट अगले 25 सालों की बुनियाद रखेगा

(साभार – नवभारत टाइम्स)

 

जानिए बजट 2022 की कुछ खास बातें

नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट पेश किया। इनकम टैक्स में कमी की आस लगाए वेतनभोगियों को निराशा हाथ लगी। बजट में डिटिजल करेंसी शुरू करने, अगले 3 सालों में नई पीढ़ी की 400 वंदेभारत ट्रेन, डिजिटल यूनिवर्सिटी समेत कई बड़े ऐलान किए गए। सीतारमण ने चौथी बार केंद्रीय बजट पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि 2014 से ही सरकार का फोकस नागरिकों के सशक्तीकरण पर है। आइए देखते हैं बजट की 15 खास बातें –

1. पूर्वोत्तर के विकास के लिए नई योजना ‘पीएम विकास पहल’
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट स्पीच में कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘पीएम विकास पहल’ नाम की नई योजना शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि देश की उत्तरी सीमा पर स्थित गांवों को एक नए जीवंत ग्राम कार्यक्रम के दायरे में शामिल किया जाएगा ताकि इन गावों में विकास को बढ़ावा दिया सके। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट पेश करते हुए कहा कि देश के 112 आकांक्षी जिलों में से 95 प्रतिशत में स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन में बढ़ोतरी के 7 इंजन से संबंधित परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति से जोड़ा जाएगा।

2. अगले 3 सालों में 400 नई वंदे भारत ट्रेन, 25000 किमी बढ़ेंगे नेशनल हाइवे
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि रेलवे छोटे किसानों, एमएसएमई के लिए नए उत्पाद विकसित करेगा। लोकसभा में वित्त मंत्री ने 2022-23 का आम बजट पेश करते हुए इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रयासों के कारण रोजगार एवं उद्यम अवसरों में वृद्धि हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नेशनल हाइवेज का 2022-23 में 25,000 किमी विस्तार किया जाएगा और सड़क परिवहन मास्टर प्लान के लिए 2022-23 में ‘पीएम गति शक्ति’ को अंतिम रूप दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने 400 नई वंदे भारत ट्रेन शुरू किए जाने का प्रस्ताव किया और कहा कि अगले वित्त वर्ष में चार बहु-मॉडल पार्क के लिए अनुबंध दिए जाएंगे। उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा, ‘एक उत्पाद एक रेलवे स्टेशन को लोकप्रिय बनाया जाएगा, 400 नई वंदे भारत ट्रेन शुरू की जाएंगी।’ वित्त मंत्री ने कहा कि अगले तीन वर्ष में 100 ‘पीएम गति टर्मिनल’ स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वदेशी रेल सुरक्षा एवं क्षमता प्रौद्योगिकी ‘कवच’ के तहत करीब 2,000 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क को लाया जाएगा।

3. 3. 5G के लिए 2022-23 में स्पेक्ट्रम की नीलामी
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि निजी कंपनियों की तरफ से 5जी मोबाइल सेवाओं की शुरुआत के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी अगले वित्त वर्ष 2022-23 में की जाएगी। सीतारमण ने वर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए कहा कि कंपनियों के लिए स्वैच्छिक निकासी की समयावधि को दो साल से घटाकर छह महीने किया जाएगा।

4. डिजिटल यूनिवर्सिटी का प्रस्ताव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में शिक्षा प्रदान करने के लिए एक डिजिटल यूनिवर्सिटी के गठन का प्रस्ताव रखते हुए मंगलवार को कहा कि इसका निर्माण हब एवं स्पोक मॉडल के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान लगी पाबंदियों से औपचारिक शिक्षा को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार स्कूली बच्चों को अनुपूरक शिक्षा मुहैया कराने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए ‘एक क्लास-एक टीवी चैनल’ की व्यवस्था लागू की जाएगी। पीएम ई विद्या के ‘वन क्लास, वन टीवी चैनल’ कार्यक्रम को 12 से 200 टीवी चैनलों तक बढ़ाया जाएगा। यह सभी राज्यों को कक्षा 1 से 12 तक क्षेत्रीय भाषाओं में सप्लीमेंट्री शिक्षा प्रदान करने में सक्षम बनाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि लघु एवं मध्यम क्षेत्रों की तरफ से दी जाने वाली आतिथ्य सेवाएं अभी तक सामान्य स्थिति में नहीं पहुंच पाई हैं। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति की महत्ता को ध्यान में रखते हुए तीन योजनाएं महिलाओं एवं बच्चों के समेकित विकास के लिए शुरू की गई थीं।

5. इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं
इस बार इनकम टैक्स के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही, इनकम टैक्स दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। हां, राज्य सरकार के कर्मचारियों को नेशनल पेंशन स्कीम में छूट का दायरा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है। आईटीआर में गड़बड़ी को ठीक करने के लिए 2 साल का वक्त मिलेगा।

6. कपड़े, मोबाइल चार्जर समेत ये सामान सस्ते होंगे
चमड़े के सामान सस्ते होंगे। कपड़ा भी सस्ता होगा। मोबाइल चार्जर, मोबाइल लेंसेस सस्ते होंगे। इसके अलावा खेती का सामान सस्ता होगा। पॉलिश्ड हीरा सस्ता होगा।

7. इस साल सरकार ला रही डिजिटल रुपया
पने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने आरबीआई की डिजिटल करेंसी पर बड़ा ऐलान किया। वित्त मंत्री ने कहा कि आरबीआई की डिजिटल करेंसी ‘डिजिटल रुपी’ को नए वित्त वर्ष की शुरुआत में ही लॉन्च कर दिया जाएगा। डिजिटल रुपी को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी व अन्य टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के जरिए पेश किया जाएगा। यह डिजिटल इकनॉमी को बिग बूस्ट देगा। करेंसी मैनेजमेंट को ज्यादा इफीशिएंट और कम लागत वाला बनाएगा।

8. क्रिप्टोकरेंसी से कमाई पर 30 प्रतिशत कर
क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली कमाई पर 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा।

9. कॉर्पोरेट टैक्स में कमी
कॉर्पोरेट टैक्स 18 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत किया गया, कॉर्पोरेट टैक्स पर सरचार्ज भी 12 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किया गया। कंपनियों के लिये स्वेच्छा से कारोबार से बाहर होने के लिये समयसीमा दो साल से कम कर छह महीने की जाएगी

10. कोयला से गैस बनाने की चार पायलट प्रोजेक्ट शुरू की जाएंगी
सीतारमण ने कहा कि कोयला से गैस बनाने की चार पायलट परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। कोयले से गैस बनाने के लिए कोयले को आंशिक रूप से हवा, ऑक्सीजन, भाप या कार्बन डाई ऑक्साइड द्वारा नियंत्रित परिस्थितियों में आंशिक रूप से ऑक्सीकृत किया जाता है। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए संसद में बजट पेश करते हुए कहा, ‘तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता के लिए कोयला से गैस बनाने और उद्योग के लिए आवश्यक रसायनों में कोयले को बदलने के लिए चार पायलट परियोजनाएं गठित की जाएंगी।’

11. डिफेंस सेक्टर में आयात में कटौती
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में आयात को घटाने और आत्म निर्भरता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र के लिए 68 प्रतिशत पूंजी को स्थानीय उद्योग के लिए आवंटित किया जाएगा।

12. 2025 तक पूरा होगा भारत नेट प्रोजेक्ट
ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड के विस्तार पर जोर, गांवों में भी इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर होंगी, भारत नेट प्रोजेक्ट 2025 तक पूरा होने की उम्मीद। सीतारमण ने कहा कि सभी गांवों में भारतनेट के तहत ऑप्टिकल फाइबर नेट को बिछाने का अनुबंध पीपीपी आधार पर दिया जाएगा।’

13. 2022-23 को ‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सरकार 2022-23 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर (एमएसपी) गेहूं और धान की खरीद के लिए 2.37 लाख करोड़ रुपये भुगतान करेगी। वित्त मंत्री ने वर्ष 2022-23 के लिए केंद्रीय बजट पेश करते हुए 2022-23 को ‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की। 2021-22 में 1.63 करोड़ किसानों से 1208 लाख मीट्रिक टन गेहूं और धान की खरीद का अनुमान, इसके लिए किसानों को 2.37 लाख करोड़ रुपये एमएसपी का किसानों के खाते में सीधा भुगतान होगा।

14. डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने को शुरू होंगे 75 डिजिटल बैंक
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक देश के 75 जिलों में 75 डिजिटल बैंकों की स्थापना करेंगे। आम बजट 2022-23 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि चिप आधारित ई-पासपोर्ट जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि शहरी योजना के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा तथा कारोबारी सुगमता तथा जीवन में सुगमता के अगले चरणों को भी शुरू किया जाएगा।

15. एमएसएमई की रेटिंग के लिए 6,000 करोड़ रुपये का कार्यक्रम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) की रेटिंग के लिए 6,000 करोड़ रुपये के कार्यक्रम को अगले पांच वर्षों में लागू किया जाएगा। आम बजट 2022-23 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि डिजिटल आधारभूत ढांचे को बढ़ावा देने की पहल के तहत ‘देश स्टैक ई-प़ोर्टल’ शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ड्रोन शक्ति के लिए स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाएगा।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

 

दूरसंचार सुधारों से नकदी प्रवाह बढ़ेगा, 5जी में निवेश को अनुकूल माहौल बनेगा: समीक्षा

नयी दिल्ली । दूरसंचार क्षेत्र में सुधारों से 4जी प्रसार को बढ़ावा मिलेगा, तरलता या नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और 5जी नेटवर्क में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनेगा। आर्थिक समीक्षा 2021-22 में यह कहा गया है।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि कोविड संबंधी चुनौतियों का सामना करने में दूरसंचार क्षेत्र के ‘‘उत्कृष्ट प्रदर्शन’’ और ऑनलाइन शिक्षा एवं घर से काम (डब्ल्यूएफएच) के चलन से डेटा की खपत में भारी वृद्धि के साथ, सुधार उपायों से ब्रॉडबैंड और दूरसंचार कनेक्टिविटी के प्रसार और पैठ को बढ़ावा मिलेगा।
समीक्षा में भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में ढांचागत और प्रक्रियागत सुधारों की रूपरेखा बताते हुए कहा गया है कि दूरसंचार अवसंरचना के विस्तार के अलावा सुधार लाने के लिए और भी कई कदम उठाए गए हैं। इसमें कहा गया, ‘‘सुधारों से 4जी प्रसार को बढ़ावा मिलेगा, नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और 5जी नेटवर्क में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनेगा।’’
मजबूत और जिम्मेदार नियामकीय ढांचे ने उचित कीमतों पर सेवा की पहुंच को बनाए रखा है, सरकार ने उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से सेवाप्रदाताओं के बीच उचित प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए और उपाय भी किए हैं।
समीक्षा में कहा गया कि दूरसंचार देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को प्रभावित करने वाले सबसे शक्तिशाली क्षेत्रों में से एक है और इस क्षेत्र की का महत्व बहुत बढ़ गया है। यह कुल दूरसंचार उपभोक्ता आधार में वृद्धि, इंटरनेट उपभोक्ताओं और ब्रॉडबैंक कनेक्शनों की लगातार बढ़ती संख्या में नजर आता है।
बीते कुछ वर्षों में भारत के दूरसंचार क्षेत्र में डेटा की भूमिका बहुत बढ़ गई है क्योंकि कड़ी प्रतिस्पर्धा से लागत कम हुई है और इससे डेटा इस्तेमाल और बढ़ गया है।
प्रत्येक डेटा उपभोक्ता का प्रतिमाह औसत वायरलेस डेटा उपयोग वित्त वर्ष 2017-18 में 1.24 गीगाबाइट प्रतिमाह से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में 14.1 गीगाबाइट मासिक हो गया है। मोबाइल टावरों की संख्या दिसंबर, 2021 में बढ़कर 6.93 लाख हो गई है।